
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
मेलबॉक्स /शौर्यपथ / आत्मनिर्भर भारत की सफलता का ब्रह्मास्त्र है, वेस्ट मैटेरियल यानी अनुपयोगी सामान का पुनर्चक्रण। हमें समझना होगा कि कोई भी सामान अनुपयोगी नहीं होता, बस उसके रिसाइकिल करने की देर होती है। आज पुनर्चक्रण का यह काम मेट्रो या बड़े शहरों तक सीमित है, वह भी शत-प्रतिशत नहीं। यह जान लेना चाहिए कि चीन का माल इसलिए सस्ता होता है, क्योंकि वह पुनर्चक्रण में विश्वास करता है। यदि हमारे यहां भी ऐसी कोई व्यवस्था लागू हो जाए, तो उत्पादों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी। इससे हम चीन की वस्तुओं को दाम के आधार पर टक्कर दे सकेंगे। सामूहिकता से भरे इन प्रयासों से नए रोजगार का भी सृजन होगा और पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाए रखने में भी हम कामयाब हो सकेंगे। इसलिए विकासवाद के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के होने वाले बेतरतीब दोहन को सीमित करके हमें पुनर्चक्रण की तरफ बढ़ना चाहिए।
विकास पंडित, बड़वानी, मध्य प्रदेश
एकजुटता जरूरी
आज हमारा देश एक साथ कई मोर्चों पर उलझा हुआ है। कोविड-19, भुखमरी, आर्थिक विकास, पलायन के साथ-साथ अब चीन व नेपाल के साथ हमारा सीमा-विवाद भी गहरा गया है। देशप्रेमी अपनी लालसा को शांत करके हर परिस्थिति में सरकार और देश के साथ खडे़ हैं, पर विघ्न संतोषी सरकार और देश के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। वे देश में धार्मिक अफवाह भी फैला रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर देश को टुकड़ों में बांटा जा रहा है। इसके जवाब में आम जनता में एकजुटता जरूरी है। लगता है, अंग्रेजों का गुलाम रहकर और अपनी संतानों को खोकर भी कुछ लोग आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि आपस में दुश्मनी रखना मजहब भी नहीं सिखाता है। हमें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
ममता रानी, काशीपुर
उल्टा पड़ता दांव
चीन का कमोबेश अपने सभी पड़ोसी देशों से सीमा-विवाद है। सिर्फ जमीनी सीमा ही नहीं, वह दक्षिण चीन सागर में भी अपना दावा जताता रहा है। हालांकि, वहां अमेरिका के प्रत्यक्ष विरोध के कारण उसकी दाल नहीं गल रही है। चीन अब तक इसलिए बढ़ता रहा है, क्योंकि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करके सामने वाले देश को झुका देता है। यही हथकंडा उसने भारत के खिलाफ भी अपनाने की गुस्ताखी की है। पहले जरूर उसने हमारे कुछ क्षेत्रों को हथिया लिया है, लेकिन इस बार सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी एक भी मनमानी भारतीय सीमा के अंदर नहीं चलेगी। चीन की विस्तारवादी नीति पहली बार उस पर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों को निशाना बनाना उसे कितना भारी पड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारे सैनिकों से ज्यादा उसके सैनिकों की जान गई है। यह साफ बताता है कि भारत से उलझना अब चीन के लिए हर मोर्चे पर भारी पड़ने वाला है।
धीरज पाठक, शास्त्री नगर, चैनपुर
पुराने बनाम नए नोट
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्तमान में जारी किए जा रहे छोटे साइज के नए नोटों के कागज पुराने और अपेक्षाकृत निम्न गुणवत्ता के प्रतीत होते हैं। इस कारण जहां पुराने नोटों का जीवन लंबा महसूस हो रहा है, वहीं नए नोट जल्दी खराब हो रहे हैं। ऐसे में, केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह आरबीआई को इस बात के लिए निर्देशित करे कि उच्च गुणवत्ता के कागजों का ही नए नोटों में इस्तेमाल हो। इसके साथ ही प्लास्टिक कोटेड नोट भी जारी किए जाएं, ताकि पड़ोसी देशों से नकली नोटों की आने वाली खेप रोकी जा सके। इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों से भी बचा जा सकेगा।
प्रमोद अग्रवाल गोल्डी, हल्द्वानी,
ओपिनियन /शौर्यपथ /अपनी युवावस्था में मैंने मैकमोहन रेखा पर लंबी दूरी के गश्ती दल का नेतृत्व किया है। एक बार हमारे दल को खांगला जाना था। हमें देर हो गई और शाम गहराने लगी थी, लेकिन हमें अपना काम पूरा करना था। गश्ती के दौरान भटककर हम सीमा के उस पार करीब एक किलोमीटर तक चले गए थे। हमने अपने दल को दो टीमों में बांटा और चीनी सैनिकों की नजर में आए बिना हम अगली सुबह खांगला पहुंच गए। एक युवा अधिकारी के रूप में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से यह मेरा पहला परिचय था। बाद में मैंने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी डिवीजन और उसके बाद लद्दाख में 14वीं कोर की कमान संभाली। मैं कई बार गलवान घाटी से गुजर चुका हूं। यहां की पर्वत शृंखलाओं पर सीमा-रेखाएं एक भूलभुलैया हैं। यहां न कोई सीमा-रेखा है और न सीमा के करीब कोई पोस्ट। अभी पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की जो सीमा-रेखा, यानी एलएसी है, वह 1962 की खूनी जंग का नतीजा है। यह युद्ध दोनों देशों के बीच में यहीं सबसे ऊबड़-खाबड़ और असह्य इलाके में लड़ा गया था। लड़ाई अक्तूबर-नवंबर में दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ), गलवान और हॉट स्प्रिंग्स, पैंगोंग झील के आर-पार, रजांगला और डेमचोक इलाकों में हुई थी। अत्यधिक कम तापमान और जान-माल की व्यापक क्षति के कारण उस युद्ध को रोक दिया गया था और चीन के सैनिक अपने ठिकानों पर वापस चले गए थे। इसी तरह, भारतीय सेना भी पास के ठिकानों पर लौट आई थी। तब से राजनीतिक तौर पर औपचारिक सीमांकन न हो पाने की वजह से दोनों देशों की सेनाएं यहां डटी हुई हैं। दोनों के बीच में सीमा-बंटवारे को लेकर 22 बार बातचीत हो चुकी है, पर नतीजा अब तक सिफर रहा है। भारत पूरे अक्साई चिन पर अपना दावा जारी रखे हुए है, तो चीन सीमा के पास वाले क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जिसे भारत ‘चीनी धारणा’ वाली सीमा रेखा कहता है।
दरअसल, अंग्रेजों ने इन सीमाओं को तय किए बिना छोड़ दिया था। उसके नक्शे में कई सीमाएं दिखाई देती हैं, जिनमें से एक कुन-लुन पहाड़ों के साथ चल रही है, जिसे जॉनसन-अर्दग रेखा कहा जाता है। इसके मुताबिक, अक्साई चिन जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। एक अन्य रेखा, जो काराकोरम रेंज के करीब है, उसे मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड रेखा कहा जाता है। एक रेखा सुदूर पश्चिम में है, जो फॉरेन ऑफिस रेखा है। आजादी के बाद इसे तय करने का काम जम्मू और कश्मीर के शासकों, तिब्बत और भारत व चीन के हुक्मरानों पर छोड़ दिया गया था। मगर अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी है।
भारत ने अपना नक्शा 1954 में ही जारी कर दिया था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय रेखा बताती है कि अक्साई चिन भारत का हिस्सा है। फिर भी, चीन ने 1955 में यहां से गुजरता हुआ पश्चिमी राजमार्ग बनाया, जो तिब्बत को काशगढ़ और शिनजियांग से जोड़ता है। जैसा कि भारत का दावा है, चीनियों ने इस संवेदनशील राजमार्ग के पश्चिमी हिस्से को सुरक्षित रखने की सोची होगी। चिप-चाप नदी और गलवान नदी के जलक्षेत्रों के बीच काराकोरम रेंज के साथ चलने वाली रिज लाइनों पर प्रभावी होने से चीन की यह मंशा बखूबी पूरी हो सकती थी, और उसके बाद चांग-चेनमो रेंज के पश्चिम में रिज लाइनों के साथ दक्षिण-पूर्व में आगे बढ़ना उसके मुफीद होता। इन इलाकों को अपने कब्जे में रखने की कोशिश चीन इसलिए करता है, ताकि भारतीय सुरक्षा बलों को पश्चिमी राजमार्ग से दूर रखा जा सके। यहां आर्टिलरी और निगरानी का दायरा बढ़ाना बताता है कि वह अपनी रेखा को आगे बढ़ाकर पश्चिम की तरफ ले जाना चाहता है। मगर भारतीय सेना चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा में किए जाने वाले किसी भी बदलाव को रोकने के लिए संकल्पित है। उल्लेखनीय है कि एलएसी का पहली बार इस्तेमाल खुद चीन के प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई ने साल 1959 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लिखे पत्र में किया था।
आज, पूर्वी लद्दाख में 800 किलोमीटर से अधिक सीमा-रेखा है, जिसमें लगभग 550 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा है। चीनी गश्ती दल यह सुनिश्चित करते हैं कि वे दर्रे को बंद और जलग्रहण क्षेत्र को अपने कब्जे में रखें, ताकि भारतीय सैनिक जमीन पर और आगे न बढ़ सकें। वे ऐसे ट्रैक बनाते रहते हैं, जो आमतौर पर पश्चिमी राजमार्ग से निकलते हैं और उत्तरोत्तर एलएसी की ओर बढ़ते हैं, ताकि वे दर्रे या क्रॉसिंग प्वॉइंट पर हावी हो सकें। हॉट स्प्रिंग्स और गलवान में दोनों तरफ सड़कें व ट्रैक बनाए गए हैं। चीन को इस इलाके का ज्यादा फायदा मिलता है, क्योंकि उसकी तरफ यह अपेक्षाकृत खुला व समतल है और अपने पश्चिमी राजमार्ग की सुविधा भी उसे हासिल है।
एलएसी को लेकर न तो कोई सर्वे हुआ है और न ही जमीन पर सीमांकन। यह नक्शे पर मोटी कलम के साथ खींची गई रेखा है। इससे जमीन पर 100 मीटर तक अंतर हो सकता है, इसीलिए रेखा के इस पार या उस पार कुछ मीटर की दूरी पर बना टेंट भी समस्या पैदा कर सकता है। हालांकि, चीन के सैनिकों ने एलएसी के पास जहां तंबू गाड़ा, वहां से गलवान नाला सीधे दिखाई देता है, जहां भारत के लिहाज से संवेदनशील दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड जाती है, इसीलिए यह भारत को नागवार गुजरा है। इस तरह के मामलों के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए 1993 के बाद से दोनों देशों के बीच में कई समझौते हुए हैं। साल 1996 में हुआ एक समझौता कहता है कि इस तरह के सीमा-विवादों के निपटारे में सैन्य हथियारों का इस्तेमाल नहीं होगा।
चूंकि सीमा को लेकर अब तक अंतिम सहमति नहीं बन सकी है, इसलिए दोनों पक्ष कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। इनमें साल 2013 में पूर्वी लद्दाख के डेपसांग, डेमचोक और चुमार में हुआ तनाव भी एक है। गलवान हालिया घटनाओं का चरम बिंदु है। इसका खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि दोनों राष्ट्रों के पास परमाणु हथियारों से संपन्न बड़ी सेनाएं हैं। क्या दोनों देश अभी युद्ध का जोखिम उठा सकते हैं, जब पूरी दुनिया के साथ वे भी कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहे हैं? बहस का मुद्दा यह भी है कि चीन इस समय ऐसा कोई तनाव क्यों चाहेगा?
(ये लेखक के अपने विचार हैं) पीजेएस पन्नू, डिप्टी चीफ, इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ
शौर्यपथ लेख / रामदेव एक नाम एक ब्रांड है आज भारत में . बाबा रामदेव की पहचान योग गुरु के रूप में शुरू हो कर पतंजलि के ब्रांड पर पहुँच गयी . रामदेव पूरी दुनिया को योग की शिक्षा देने के कारण प्रसिद्द हुए और योग से निरोग की बात करते करते राजनीती में प्रवेश कर लिए २०११-से २०१४ तक बाबा रामदेव राजनीती में काफी सक्रीय रहे . तात्कालिक कांग्रेस सरकार पर लगातार हमला करने वाले रामदेव ने रामलीला मैदान में आन्दोलन शुरू कर दिया और अंत सलवार सूट के प्रसंग में हुआ . रामदेव ने २०१४ के चुनाव के पहले तात्कालिक सरकार को खूब परेशान किया आम जनता को भाजपा की सरकार आने पर पेट्रोल की कीमत ३५ रूपये तक मिलने की बात कही . आम जनमानस में रामदेव की बाते घर कर गयी और महंगाई की मार , पेट्रोल की बदती कीमत , सीमा पर जवानो के बलिदान के प्रसंगों का बहुत चतुराई से उपयोग किया . उपयोग इस लिए कहा जा सकता है कि २०१४ के बाद रामदेव ने कभी पेट्रोल की बढती कीमत पर कभी कुछ नहीं कहा ये तो रामदेव जाने और रामजी जाने . ऐसा नहीं कि नई सरकार आने के बाद पेट्रोल की कीमत कम हुई , महंगाई कम हुई , सीमा पर जवानो की शहादत कम हुई ,बेरोजगारी कम हुई , शिक्षका स्तर सुधरा , स्वास्थ्य का स्तर सुधरा किन्तु योग गुरु बाबा रामदेव मौन रहे या हो सकता है योग गुरु से व्यापारी रामदेव की राह पर व्यस्त हो जिस तरह रामदेव का व्यापार २०१४ के बाद तेजी से बढ़ा कई बार मन में ये सवाल उठता है कि रामदेव का दिखावा सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए और अपने व्यापार की बढ़ोतरी के लिए ही था ? रामदेव योग से निरोग के साथ आयुर्वेद से निरोग का रास्ता अपनाते गए और भारत के बाज़ार के कई हिस्सों में कब्ज़ा कर लिया स्वदेशी का नारा देते हुए सामानों का मूल्य बढ़ाते गए और आज बाज़ार में ये स्थिति है कि महंगाई की मार झेल रही देशभक्त इंसान रामदेव के महंगे प्रोडक्ट खरीद रही है किन्तु बाबा रामदेव वर्तमान में महंगाई पर मौन है , तेल की बढती कीमत पर मौन है , बेरोजगारों की समस्या पर मौन है , स्वास्थ्य पर मौन है देशी वाहन से विदेशी वाहन के सफर में आज स्वदेशी का पाठ पढ़ाने वाले बाबा आखिर एक बार फिर जनता की भावनाओ के साथ खेलते हुए आयुर्वेद मंत्रालय के नियमो की पेजिदगीयो का फायदा उठाते हुए कोरोना संक्रमण के खौफ से जी रही दुनिया के सामने कोरोनिल ले आये . कोरोनिल एक आयुर्वेद दवा है और आयुर्वेद दवा का इंसानी शरीर में नकारात्मक असर ना के बराबर होता है ये सब जानते है .
आम जनमानस में ये धारणा है और कई वैज्ञानिक प्रमाण भी है कि आयुर्वेद की पद्दति से बनी दवा अगर शरीर को फायदा नहीं दे सकती तो नुक्सान भी नहीं होगा यही सबसे बड़ी खासियत है आयुर्वेद की किन्तु आयुर्वेद के नाम से बनी दवा से कोरोना ठीक होने का दावा करने वाले पतंजली के मालिक रामदेव को इस वैश्विक महामारी में क्या भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को भरोसे में नहीं लेना चाहिए था . वो भी ऐसे वक्त जब सरकार कोरोना आपदा का दंश झेल रही है और देश में आर्थिक स्थिति चौपट जैसी है इस संजीवनी बूटी के परिक्षण के लिए पतंजलि को केंद्र सरकार को भरोसे में लेने से देश हित और देशभक्ति का उदाहरन तो पेश होता ही स्वदेशी की ताकत पर आम जनता को भी गर्व होता किन्तु केंद्र सरकार को भरोसे में लिए बिना आयुष मंत्रालय को भरोसे में लिए बिना कोरोना की दवा को बाज़ार में उतारने की आखिर क्या जल्दी थी रामदेव को आखिर क्या सन्देश देना चाहते है योग गुरु से व्यापारी गुरु बने रामदेव भारत सरकार और आम जनता को .
आम जनता सहित पूरी दुनिया यही प्रार्थना कर रही है कि कोई तो बना दे कोरोना की दवा . जब ऐसी स्थिति है तो व्यापारी रामदेव ने आखिर केंद्र सरकार को और आयुष मंत्रालय को भरोसे में क्यों नहीं लिया क्या केंद्र सरकार के कार्यो पर रामदेव को भरोसा नहीं रहा . हम तो अब भी यही प्रार्थना कर रहे है कि कोरोनिल से कोरोना का सफल इलाज हो सके और यह दवा कलयुग में संजीवनी का काम करे . वर्तमान में तो आयुष मंत्रालय ने इस दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी है किन्तु यही दुआ करते है कि बाबा रामदेव की दवा और दावा सही हो .... ( शरद पंसारी )
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोना को ठीक करने के दावे के साथ लांच की गई बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि की दवा कोरोनिल के प्रचार-प्रसार पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। सरकार ने इस दवा के लिए किए जा रहे दावों की जांच करने का फैसला किया है। आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को चेतावनी दी है कि ठोस वैज्ञानिक सबूतों के बिना कोरोना के इलाज का दावे के साथ दवा का प्रचार-प्रचार किया गया तो उसे ड्रग एंड रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून के तहत संज्ञेय अपराध माना जाएगा।
बाबा रामदेव ने जैसे ही मंगलवार को कोरोना को सात दिन में पूरी तरह ठीक करने के दावे के साथ दवा को लांच किया, आयुष मंत्रालय हरकत में आ गया। इसके बाद आयुष मंत्रालय ने तत्काल पतंजलि को दवा के प्रचार-प्रसार के विज्ञापनों पर रोक लगाने को कह दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि यदि इसके बाद दवा का विज्ञापन जारी रहा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पतंजलि ने ऐसी किसी दवा के विकसित करने और उसके ट्रायल की कोई जानकारी मंत्रालय को नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय की अनुमति से कई आयुर्वेदिक दवाओं का कोरोना के इलाज में ट्रायल किया जा रहा है, लेकिन उनमें पतंजलि की दवा शामिल नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोना का इलाज खोजने के लिए जूझ रही है और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में बिना वैज्ञानिक सबूत के किसी दवा से इलाज का दावा खतरनाक साबित हो सकता है और करोड़ों लोग इस भ्रामक प्रचार के जाल में फंस सकते हैं। इसीलिए इस दवा के प्रचार-प्रसार वाले विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही पतंजलि को जल्द-से-जल्द कोरोनिल दवा में इस्तेमाल किए गए तत्वों का विवरण देने को कहा गया है।
पतंजलि को यह भी बताना होगा कि इस दवा का ट्रायल किन-किन अस्पतालों में और कितने मरीजों पर किया गया। ट्रायल शुरू करने के क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) में दवा का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। पतंजलि से सीटीआरआइ के रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ट्रयल के परिणाम का पूरा डाटा देने को कहा गया है।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरी पड़ताल और तथ्यों के सही पाए जाने के बाद की इस दवा को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। दरअसल आयुर्वेदिक दवा को विकसित करने और बेचने से पहले आयुष मंत्रालय से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिस राज्य में इस दवा का उत्पादन किया जा रहा है, वहां के लाइसेंसिंग अथारिटी से इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य है। आयुष मंत्रालय ने उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग अथारिटी से इस दवा को दी गई मंजूरी और लाइसेंस की प्रति देने को कहा है।
पतंजलि की दवा को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में लाइसेंस
पतंजलि की दवा कोरोनिल को उत्तराखंड आयुष विभाग की तरफ से लाइसेंस जारी किया है। आयुष मंत्रालय ने विभाग से इस बारे में जानकारी मांगी है। विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ. यतेंद्र सिंह रावत का कहना है कि दिव्य फार्मेसी के नाम पर 12 जून को लाइसेंस जारी किया गया है। लाइसेंस में कोरोनिल वटी समेत दो अलग-अलग मात्रा वाली श्वासारी दवा को इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया है। अब कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि वह किस आधार पर इम्यूनिटी बूस्टर की दवाओं को कोविड-19 की दवा बता रही है।
पतंजलि की दवा पर आयुष मंत्रालय की गलतफहमी दूर : बालकृष्ण
पतंजलि की दवा के विज्ञापन पर रोक लगाने के मामले पर आचार्य बालकृष्ण का बयान आया है। आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के महामंत्री हैं। उन्होंने ट्वीट किया है, 'केंद्र सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन देती आई है। पतंजलि की दवा को लेकर आयुष मंत्रालय को जो भी गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं की जांच (रेंडमाइज्ड प्लेसबो कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्रायल) के सभी आधिकारिक मानकों को सौ प्रतिशत पूरा किया है। इसकी सभी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है, अब कहीं कोई संशय नहीं रह गया है।'
पतंजलि ने कोरोना वायरस की दवा
आपको बता दें कि योग गुरु स्वामी रामदेव ने कोरोना वायरस की दवा कोरोनिल को मंगलवार को बाजार में उतारा और दावा किया कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद बनी यह दवा शत- प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। यहां पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि पूरे विश्व में पहला ऐसा आयुर्वेदिक संस्थान है, जिसने जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद कोरोना महामारी की दवाई प्रामाणिकता के साथ बाजार में उतारी है ।
उन्होंने कहा कि यह दवाई शत-प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत-प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो गयी। ( साभार जागरण मिडिया ग्रुप )
कृष्णा टंडन की रिपोर्ट
जांजगीर चांपा / शौर्यपथ / विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक नारायण चंदेल का फेसबुक अकाउंट सैयद कमल नामक हैकर ने हैक कर लिया है। इस मामले का शिकायत विधायक ने पुलिस अधीक्षक सहित जांजगीर थाना में की है। विधायक नारायण चंदेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह का मैसेज यदि उनके फेसबुक एकाउंट से किया तो इस पर तत्काल विधायक को सूचित किया जाए, हालांकि विधायक नारायण चंदेल ने अपना फेसबुक अकाउंट फिलहाल बंद कर दिया है जांजगीर चाम्पा क्षेत्र का विधायक जो विधानसभा का पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुका है इस तरह का अचानक फेसबुक अकाउंट हैक हो जाने से विधायक काफी सोच में पड़ गए है।
दुर्ग / शौर्यपथ / भिलाई नगर के स्कूल शकुंतला विद्यालय के छात्र हर साल की भांति इस साल भी टॉप टेन में अपना स्थान बनाकर भिलाई सहित विद्यालय का नाम रौशन करने का काम किया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा घोषित हॉयर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल परीक्षा 2020 का आज परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। महामारी के गहन अंधकार में शकुन्तला विद्यालय क्रमांक - 2 के 2 विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त कर अंकों की रिमझिम फुहारों से खुशनुमा माहौल बनाकर दुर्ग संभाग में सकारात्मकता का संचार कर दिया।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की प्रावीण्य सूची में कक्षा बारहवीं के छात्र सौरभ साहू ने 96.20 प्रतिशत (500 मे से 481 अंक) के साथ चौथे स्थान प्राप्त किया एवं कक्षा दसवीं में महक यादव 97.8 प्रतिशत (600 में 587 अंक) के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया। कक्षा बारहवीं की नेहा वर्मा मात्र एक अंक से प्रावीण्य सूची में आने से चूक गई। विद्यालय के छात्रों के प्राविण्य सूचि में आने पर विद्यालय के डायरेक्टर संजय ओझा, प्राचार्य विपिन ओझा सहित सभी शिक्षक और स्टाफ ने इन छात्रों को बधाई दी है।
इस साल भी उत्कृष्ट रहा विद्यालय का परिणाम
शकुन्तला विद्यालय क्र-2, रामनगर भिलाई विद्यालय के हॉयर सेकेण्डरी का परीक्षाफल 97.68: प्रतिशत रहा। कुल सम्मिलित 389 विद्यार्थियों में से 264 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये । 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की संख्या 19 रही । गणित में 68, भौतिक शास्त्र में 189, रसायन शास्त्र में 192, जीव विज्ञान में 93, अंग्रेजी में 203, हिन्दी में 216 एवं वाणिज्य 73 विद्यार्थियों ने विशेष योग्यता प्राप्त की । शाला स्तर पर नेहा वर्मा 94.8: द्वितीय स्थान, कागज वर्मा 94.6: तृतीय स्थान एवं देवेन्द्र कुमार 94.2: एवं नेहा निशाद 94: अकों के साथ चैथे एवं पांचवें स्थान पर रहें । आयुश भोई और देवेन्द्र ने भौतिक शास्त्र में 100 में 100 तथा रसायन में जितादिव्य पॉल ने 100 में 100 अंक प्राप्त किये ।
इसी क्रम में हाई स्कूल का परीक्षाफल 95.3: रहा। कुल 192 विद्यार्थी सम्मिलित हुये । जिसमें 18 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिषत से अधिक अंक अर्जित किये ।
शाला स्तर पर षाष्वत मिश्रा 95.8:, प्रणय पाण्डेय एवं वर्तिका षर्मा 95.8: के साथ द्वितीय एवं षानिया अंजुम 94.6: के स्थान तृतीय स्थान वंदना बारिक 94 प्रतिषत के साथ चैथे स्थान एवं राहुल देवांगन 93.8: के साथ पांचवें स्थान पर रहे । इसी प्रकार दसवीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में विशयवार 100 में 100 अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी गणित में शानिया अंजुम, शाष्वत मिश्रा, मोहित चैधरी तथा विज्ञान में महक यादव, अदिति शर्मा, वर्तिका शर्मा हैं ।
विद्यालय का हॉयर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा । विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रोन्नति का आधार उनका परिश्रम है, जिसके कारण विद्यालय उन्नति के उत्तरोत्तर सोपान की ओर अग्रसर है ।
शकुन्तला गु्रप ऑफ स्कूल्स के इस उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम के लिए डायरेक्टर संजय ओझा, प्राचार्य प्रशासक एस.एस.गौतम, प्राचार्यद्वय विपिन ओझा, आरती मेहरा, प्रबंधक ममता ओझा, मेंनेजर व्ही दुबे, अभय दुबे, विभोर ओझा, उपप्राचार्य रंजना कुमार, अनीता नायर, हेड मिस्ट्रेस अर्चना मेश्राम, सीनियर मिस्ट्रेस बलजीत कौर, प्रभारी राजेश वर्मा, शिक्षक बी.एस.राजपूत, मनोज पाण्डेय, ममता बोस, शशि शाह, सुनीता सक्सेना, रूशाली माहूले, कविता साहू, शीला रौतेला, मुक्ता शाहा, विजय लक्ष्मी, अमित कुमार, प्रतिक साहू, उपेन्द्र देवांगन, मेघा नफाडे, संगीता भंडारी, आर.के.मिश्रा, सरिता सिंह, प्रीति सरवन, तृप्ति अग्रवाल, संगीता दुबे, कविता चैधरी, के.पी.तिवारी, साहिष्ता, छाया, सीमा दुबे, हरदीप कौर आदि ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को बधाई देते हुये हर्ष व्यक्त किया।
जगदलपुर / शौर्यपथ / वैश्विक महामारी के लगातार बढ़ रहे संक्रमण ने महतारी एक्सप्रेस 102 कर्मचारियों का कार्य भी बड़ा दिया है| आजकल कोरोना संक्रमण के डर से लोग अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने से कतरा रहे हैं तो कर्मचारियों को पहले उनकी समझाइश भी करनी पड़ रही है | बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत महतारी एक्सप्रेस 102 के कर्मचारी कोरोना वारियर बनकर अपनी विशेष भूमिका निभा रहे हैं। यहां 102 के कर्मचारी संक्रमित क्वारंटाइन सेंटरों में भी पहुंचकर मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में जुटे है। साथ ही अस्पतालों में उपचार के बाद स्वस्थ्य होने पर उन्हें घर तक पहुंचाकर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करने में जुटे हैं।
महतारी एक्सप्रेस 102 के पायलट और ईएमटी की टीम 24 घंटे सेवा दे रहे हैं। कोरोना वायरस से बचाव में महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी हर बार उपयोग में लाने से पहले एम्बुलेंस को सेनेटाइज कर साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते है। साथ ही डिलेवरी महिलाओं के अलावा क्वारंटाइन मरीज को अस्पताल पहुंचाने व घर पहुंचाते समय 102 महतारी एक्सप्रेस को प्रत्येक बार सैनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक मरीजों को संक्रमण की रोकथाम व बचाव के लिए समझाइश देते हुए ग्लब्स व मास्क पहनाया जाता है।
बस्तर जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर भानपुरी सीएचसी के अंतर्गत आने वाले मुंडागांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात महतारी एक्सप्रेस के पायलट रामफल बंजारे ने बताया सूदूर जंगल के इलाकों में पहुंच विहिन मार्गों से होकर डिलवरी के लिए गर्भवती महिला का लेबर पेन होने की सूचना कॉल सेंटर से मिलने पर एम्बुलेंस लेकर 30 मिनट में हितग्राही के घर पहुंचने की कोशिश रहती है। पायलेट श्री बंजारे ने बताया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 20 से 25 किमी की दूर गांव होता है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे की डयूटी करते हैं। वे चार साल से पायलट यानी एम्बुलेंस के ड्राइवर की नौकरी कर रहे हैं। ईएमटी घनश्याम बर्मन ने कहा ये उनका सौभाग्य है ऐसे दुरस्थ अंचल में जरुरतमंदों तक दिन रात कभी भी इमेंरजेंसी सेवा देते हैं। जब किसी गांव में पहुंचते हैं तो लोग डॉक्टर साहब कहकर पुकारने लगते हैं। मरीज की गंभीर हालत में लोगों उनकों किसी फिल्म नायक की तरह समझ कर सम्मान देते हैं।
लॉकडाउन के दौरान मई महीने में पारापुर भंडामपुर ( चित्रकोट) निवासी फूलो बाई (28) के प्रसव पीड़ा का कॉल आया| जैसे ही महतारी एक्सप्रेस की टीम पहुंची इमेंरजेंसी मेडिकल टेक्निशयन घनश्याम बर्मन ने महिला की जांच की । प्रसव पीड़ा ज्यादा होने की वजह से मितानिन और स्थानीय महिलायों की मदद से घर पर ही डिलवरी करवाई गयी| प्रसूता ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। बच्चा व जच्चा स्वस्थ्य होने पर एम्बुलेंस की टीम लोहांडीगुड़ा अस्पताल लेकर आयी जहाँ प्रभारी चिकित्सक द्वारा जांच व प्रसव बाद की दवाईयां दी गई। दूसरी टीम में गजेंद्र सिंह ईएमटी व पायलट मयाराम धुव्र महतारी एक्सप्रेस में सेवा देते हैं।
वहीं हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर मुंडागांव पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक रोशन वर्मा (आरएमओ) ने बताया रेफरल केस में 50 किमी दूरी के दायरे में जिला मुख्यालय जगदलपुर में सिविल अस्पताल व मेडिकल कॉलेज तक इमेंरजेंसी में सेवा देकर मरीजों की जान बचाने का कार्य करते हैं। इन एम्बुलेंस से गर्भवती महिलाओं के उपचार के लिए उन्हें हॉस्पिटल तक मुफ्त लाया जाता है और वापस घर तक छोड़ा जाता है| महिने में 10 से 12 नार्मल डिलवरी कराया करवाई जाती है। डिलवरी के बाद जच्चा – बच्चा की जांच के बाद टीकाकारण भी किया जाता है।
आरएमओ रोशन वर्मा ने बताया पिछले साल 179 सुरक्षित डिलवरी करवाई गयी थी । एम्बुलेंस की सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की 2 प्रतिशत मामलों को रेफर किया जाता है। श्री वर्मा ने बताया कोरोना संक्रमण को लेकर सहमें लोग जब अस्पताल आने से कतरा रहे हैं तब महतारी एक्सप्रेस की टीम ने मोर्चा संभाला और गर्भवती महिलाओं को समझाकर अस्पताल में संस्थागत डिलवरी कराने प्रोत्साहित किया।
नवागढ़ / शौर्यपथ / सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ सरोज पांडेय के जन्मदिन के अवसर पर नवागढ़ विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला महामंत्री विकास धर दीवान के नेतृत्व में उनके निवास जल परिसर दुर्ग पर सौजन्य भेंट कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ-साथ सुश्री पांडेय कुछ स्थानीय संगठन के मुद्दों पर भी विधानसभा के तीनों मंडलो के कार्यकर्ताओं ने अपनी बातें रहे। जन्मदिन पर पूरी सोशल डिस्टेंस की साथ सरोज पाण्डेय बड़ी सहजता एवं सरलता से सबसे मुलाकात करती नजर आई,जिससे कार्यकर्ता उत्साहित दिखे।
भाजपा जिला महामंत्री विकास धर दीवान ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरोज पाण्डेय हम सबकी मार्गदर्शक है,बेमेतरा जिला एवं नवागढ़ विधानसभा में उनका विशेष लगाव शुरू से रहा है। उन्होंने हमेशा से ही इस क्षेत्र के जन समस्याओं के निराकरण के लिए आवाज उठाई है। सन्गठन के कार्यकर्ता उनके नेतृत्व उत्साहित है।
इस दौरान वरिष्ठ नरेंद्र शर्मा,शरद जोशी,फिरतुराम साहू,दीपक तिवारी,मण्डल अध्यक्ष नवागढ़ चन्द्रपाल साहू,मिथलेश बिसेन मिन्टू,पुर्व नप अध्यक्ष गिरेन्द्र महिलांग, देवादास चतुर्वेदी, जिला मंत्री मधु रॉय,निशा चौबे,दुर्गा सोनी,रुम्पल टुटेजा,टीकम पूरी गोस्वामी, रमेश निषाद,गोलू सिन्हा,हेमा यादव,रामसागर साहू,सुभाष सोनी,बबलू राजपूत,सुरेश साहू,मोहन बघेल, ओमकार साहू,उमेश ध्रुव,रोहित साहू,युवराज ठाकुर, सुदेश हरि, प्रणय दीवान तनु,होरीलाल सिन्हा,रोहित सिन्हा,कुंजबिहारी ठाकुर,कृष्णा ठाकुर,डैनी ठाकुर,मनीष श्रीवास,प्रदीप शुक्ला, दयावंत धर बांधे,लक्ष्मी वर्मा,छन्नू गुप्ता,भगत कुम्भकार आदि ने शुभकामनाएं दी।
बेमेतरा / शौर्यपथ / मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की बेमेतरा जिला जन संवाद रैली के तहत प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय एवं पूर्व मंत्री शपुन्नूलाल मोहले ने ऑनलाइन सोशल मीडिया के माध्यम से सम्बोधित किया, इस दैरान बेमेतरा जिला सन्गठन से पूर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा,पूर्व मंत्री डीडी बघेल, पूर्व संसदीय सचिव लाभचंद बाफना, पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, जिला महामंत्री विकास धर दीवान प्रदेश नेतृत्व से ऑनलाइन जुड़कर संवाद किये।
प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे शासनकाल का एक वर्ष पूरा हुआ है। मोदी सरकार ने ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए हैं। इसे जिला जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक घर तक पहुंचाना है। साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए शपथ ली गई है कि अपने जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे।
पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने राज्य सरकार के8 विफलताओं पर व्यंग्यात्मक प्रहार किए, उन्होंने छत्तीसगढ़ में बड़ते कोरोना मामलों को बड़ी नाकामी बताया, एवं कार्यकर्ताओ से कहा कि पूरी कोरोना से बचने सुरक्षा का पालन करते हुए जन मुद्दों को उठाना है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रदेश महामंत्री सन्तोष पांडेय ने सभी को आत्मनिर्भर भारत की शपथ दिलाई, एवं डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी के पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला।
पूर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा में जिला संगठन की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान हर्षवर्धन तिवारी, संजीव तिवारी, मण्डल अध्यक्ष मोंटी साहू,मण्डल अध्यक्ष चन्द्रपाल साहू,पार्षद प्रतिनिधि रुम्पल टुटेजा,परस वर्मा,निखिल साहू,रोहित साहू,प्रणय दीवान तनु व अन्य कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय में उपस्थित रहे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / चालू खरीफ मौसम में फसलों को प्रतिकूल मौसम सूखा, बाढ़, कीट व्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है। इस संबंध में अधिसूचना राज्य शासन कृषि विभाग द्वारा जारी कर दी गई है। राजनांदगांव जिले के लिए मुख्य फसल धान सिचिंत एवं धान असिंचित तथा अन्य फसल सोयाबीन, अरहर अधिसूचित की गई है।
बीमा कराने के लिये आवश्यक दस्तावेज -
ऋणी किसान ऐच्छिक आधार पर फसल बीमा करा सकते है। ऐसे ऋणी किसान जो फसल बीमा का लाभ नहीं लेना चाहते हैं उन्हें किसान निर्धारित प्रपत्र में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा की अंतिम तिथि 15 जुलाई के 7 दिवस पूर्व संबंधित बैंक में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। किसानों द्वारा निर्धारित प्रपत्र में घोषणा पत्र जमा नहीं करने पर संबंधित बैंक की ओर से मौसम के लिये स्वीकृत या नवीनीकृत की गई अल्प कालीन कृषि ऋण का अनिवार्य रूप से बीमा किया जाना है। अऋणी किसान बैंक, सहकारी समिति एवं लोक सेवा केन्द्र में बीमा प्रस्ताव फार्म, नवीनतम आधारकार्ड, बैंक पासबुक, भू-स्वामित्व साक्ष्य (बी-1 पांचसाला)/किरायदार/साझेदार किसान का दस्तावेज, बुवाई प्रमाण पत्र एवं घोषणा पत्र प्रदाय कर बीमा करा सकते हैं।
आधार कार्ड अनिवार्य -
फसल बीमा कराने के लिये समस्त ऋणी एवं अऋणी किसानों को आधार कार्ड की नवीनतम छायाप्रति संबंधित बैंक या संस्थान हो अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना है।
बीमा के लिए प्रीमियम राशि दर -
योजना के अंतर्गत ऋणमान धान सिंचित प्रति हेक्टर 44 हजार 500 रूपए एवं धान असिंचित प्रति हेक्टर 36 हजार 500 रूपए है। जिसका 2 प्रतिशत अर्थात् किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि 890 रूपए धान सिंचित एवं 730 रूपए धान असिंचित के लिए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा। इसी प्रकार किसानों द्वारा सोयाबीन फसल के लिए 700 रूपए, अरहर फसल के लिए 505 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा।
एक ही बैंक से बीमा कराएं -
ऋणी एवं अऋणी किसानों द्वारा समान रकबा, खसरा का दोहरा बीमा कराने की स्थिति में किसान के समस्त दस्तावेज को निरस्त करने का अधिकार बीमा कंपनी के पास होगा। साथ ही संबंधित के विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों से आग्रह है कि गत वर्ष एवं इस वर्ष मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए अधिक से अधिक संख्या में अपनी फसलों का बीमा कराएं। फसलों का बीमा करवाने हेतु समय कम होने के कारण अंतिम तिथि 15 जुलाई का इंतजार न करते हुए किसान स्वयं अपने नजदीकी सहकारी समिति/बैंक में सम्पर्क कर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। किसानों द्वारा फसल बीमा कराने के लिए अपने संबंधित समिति, संबंधित बैंक, बीमा प्रदाय कंपनी (एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमि.) लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
