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दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 को लेकर अभ्यर्थियों की मांगें अब तेज होती नजर आ रही हैं। विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता और रसायन विज्ञान व्याख्याता के पदों पर भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने और अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्तमान रिक्त पदों, पात्रता शर्तों और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के कारण प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञान शिक्षक के पद बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षक भर्ती 2026 में विज्ञान शिक्षक के पर्याप्त पद जोड़कर संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी करने की की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञान विषय में बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध हैं, ऐसे में पदों की संख्या बढ़ाकर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में भी पद सृजित करने की मांग
अभ्यर्थियों ने जीव विज्ञान व्याख्याता एवं रसायन विज्ञान व्याख्याता के आवश्यक/रिक्त पद सृजित कर भर्ती में शामिल करने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि इन विषयों के भी बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी हैं और रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
6 सितंबर की CTET परीक्षा देने वालों को भी मिले मौका
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मांग 6 सितंबर 2026 को होने वाली CTET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन का अवसर देने की है। अभ्यर्थियों ने कहा है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में CTET Application Number के लिए अलग कॉलम रखा जाए तथा केवल Roll Number उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी पात्र अभ्यर्थी को अवसर से वंचित न किया जाए।
50 प्रतिशत की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत छूट की मांग
अभ्यर्थियों ने स्नातक स्तर पर निर्धारित 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत की छूट सभी पात्र अभ्यर्थियों को देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पात्रता मानदंड में व्यवहारिक और न्यायसंगत संशोधन से बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष करने की मांग
ज्ञापन में शिक्षक भर्ती की उच्चतम आयु सीमा 40 वर्ष के स्थान पर 45 वर्ष किए जाने की मांग की गई है। साथ ही नियमानुसार मिलने वाली आयु सीमा में छूट को भी लागू करने की बात कही गई है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को समान अवसर
अभ्यर्थियों ने स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की भर्ती में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यमों के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि माध्यम के आधार पर योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित नहीं किए जाने चाहिए।
‘टकराव नहीं, संवाद और समाधान’ की अपील
ज्ञापन के अंत में अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और न्यायपूर्ण अवसर की अपेक्षा से रखी गई हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में आवश्यक संशोधन, अतिरिक्त पदों का समावेश, CTET अभ्यर्थियों को अवसर तथा पात्रता एवं आयु सीमा में राहत मिलने से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यापक और न्यायसंगत बन सकेगी। अब सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से बिलासपुर जिले के पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बिलासपुर के ग्राम रहंगी (बिल्हा) में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 100 करोड़ से ज्यादा की यह स्वास्थ्य परियोजना है।
श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुलभ
बिलासपुर जिले में लंबे समय से पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के उपचार के लिए ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना की मांग की जा रही थी। श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
श्रम मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों को सफलता मिली। 30 जून 2026 को आयोजित ईएसआईसी कॉरपोरेशन की 198 वीं बोर्ड बैठक में बिलासपुर के रहंगी ग्राम में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान की गई। अस्पताल के स्थापित होने से बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में ईएसआईसी से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारजनों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे श्रमिक परिवारों को उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भरता भी कम होगी।
पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मिलेगा लाभ
श्रमिक हितों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिलासपुर में ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना से जिले के हजारों पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?
वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।
सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?
सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।
प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”
इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।
" लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?
वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।
सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?
सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।
प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”
इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।
" लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "
अंबिकापुर साइबर ठगी मामले की जांच में गंभीर आरोप | हवाला के जरिए दो किस्तों में रकम देने का दावा | WhatsApp कॉल रिकॉर्डिंग शिकायत के साथ पेश किए जाने की बात
अंबिकापुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ कैडर के अंडर-ट्रेनिंग IPS अधिकारी राहुल बंसल पर अंबिकापुर में साइबर ठगी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान करीब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित रकम हवाला के जरिए दो किस्तों में दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और CBI निदेशक से रिपोर्ट तलब की है।
साइबर थाने की जांच से जुड़ा है मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अंबिकापुर साइबर थाने से जुड़े मामले की जांच के दौरान IPS अधिकारी राहुल बंसल और दो पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका रही। शिकायत में कथित लेन-देन से संबंधित WhatsApp कॉल की रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ता ने जून 2026 में CBI निदेशक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी। शिकायत में कथित रिश्वतखोरी और उससे जुड़े लेन-देन की जांच की मांग उठाई गई है।
अदालत ने मांगी दो स्तरों पर रिपोर्ट
मामले में दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के DGP से पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक रिपोर्ट और CBI निदेशक से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
अदालत का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिकायत में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने आरोपों को सही ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। आरोपों की सत्यता जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
कौन हैं राहुल बंसल?
राहुल बंसल मूल रूप से जयपुर के रहने वाले बताए गए हैं। उन्होंने B.Tech की पढ़ाई के बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2021 उत्तीर्ण की और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वे अगस्त 2025 से सरगुजा क्षेत्र में पदस्थ हैं।
अब जांच की दिशा पर नजर
करीब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत, हवाला के जरिए भुगतान और WhatsApp कॉल रिकॉर्डिंग जैसे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब निगाहें DGP और CBI निदेशक की रिपोर्ट पर रहेंगी। इन रिपोर्टों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे प्रथम दृष्टया क्या तथ्य सामने आए हैं और अब तक संबंधित एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की है।
महत्वपूर्ण: राहुल बंसल और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि मिनीमाता जी ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में समाज से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता जी के नाम पर राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी व्यक्तित्व हम सभी को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
*मुख्यमंत्री निवास नया रायपुर में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा छत्तीसगढ़ का पहला लोकपर्व हरेली*
*खेती-किसानी, लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की दिखेगी जीवंत झलक*
*गेड़ी, पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर होगा मुख्यमंत्री निवास*
रायपुर / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जनजीवन की पहचान हरेली तिहार के अवसर पर 12 अगस्त को मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हरेली का यह लोकपर्व पूरे पारंपरिक उल्लास और छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया जाएगा। संस्कृति विभाग एवं कृषि विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा।
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख और पहला लोकपर्व माना जाता है। खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल की कामना और ग्रामीण जीवन के सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला हरेली तिहार प्रदेश की कृषि प्रधान संस्कृति और प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ के आत्मीय संबंध को अभिव्यक्त करता है।
हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों और हल-नांगर की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। खेती में उपयोग होने वाले औजारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। गांवों में घरों और चौपालों में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हरेली की खुशियां साझा की जाती हैं। गेड़ी चढ़ने की परंपरा और विभिन्न छत्तीसगढ़ी खेल इस पर्व के उत्साह को और बढ़ाते हैं।
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ की इन्हीं लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। आयोजन स्थल को हरेली की भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में सजाया जाएगा। खेती-किसानी से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं, कृषि उपकरणों और लोक संस्कृति के विविध प्रतीकों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।
कार्यक्रम में हरेली से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति के विविध रंगों के साथ उत्सव का वातावरण निर्मित होगा। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन की समृद्ध विरासत से जोड़ना भी है।
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की उस जीवन पद्धति का प्रतीक है जिसमें प्रकृति, कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। यह पर्व किसान और खेती के सम्मान के साथ सामूहिकता, प्रकृति संरक्षण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, तीज-त्योहारों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार का आयोजन इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ की माटी, महतारी, खेती-किसानी और लोकजीवन के गौरव का उत्सव बनेगा।
रायपुर / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।
*मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह*
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।
*सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद*
कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
*मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार*
कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।
*109 शहीद स्मारकों का होगा निर्माण, क्यूआर कोड से मिलेगी शहीदों और घटनाओं की पूरी जानकारी*
*लंबित मामलों के निराकरण के लिए चलेगा विशेष अभियान*
*नक्सल प्रभावितों के पुनर्वास और शहीद परिवारों को सहायता में तेजी लाने के निर्देश*
रायपुर / नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन सभागार में सोमवार को उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों, पुनर्वासित युवाओं तथा माओवादी गतिविधियों से प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता एवं सुविधाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने प्रभावित परिवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने, पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, शहीदों के सम्मान में स्मारकों के निर्माण तथा लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण सहित विभिन्न विषयों पर अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
*शहीद परिवारों को शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्ति पर उप मुख्यमंत्री ने जताया हर्ष*
बैठक में नक्सल पीड़ित परिवारों एवं पुनर्वासित युवाओं को मिल रही सहायता और सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने शहीद परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति एवं शासकीय सेवा प्रदान किए जाने की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि शहीद परिवारों को शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है। इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शहीद परिवारों के प्रति शासन की जिम्मेदारी सर्वोच्च प्राथमिकता में है और उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने एसआईबी के डैशबोर्ड को भी नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए, ताकि नक्सल प्रभावित परिवारों, पुनर्वासित व्यक्तियों और सहायता से संबंधित प्रकरणों की वास्तविक एवं अद्यतन स्थिति की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके।
*109 शहीद स्मारकों का होगा निर्माण, क्यूआर कोड से मिलेगी पूरी जानकारी*
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने राज्य निर्माण से अब तक माओवादी हिंसा में शहीद हुए जवानों एवं दिवंगत नागरिकों की स्मृति में घटना स्थल अथवा संबंधित ग्रामों में बनाए जाने वाले 109 शहीद स्मारकों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने इन स्मारकों के लिए एक मानक डिजाइन तैयार कर निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक केवल स्मृति स्थल नहीं होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को शहीदों के बलिदान और नक्सल हिंसा की घटनाओं से परिचित कराने का माध्यम भी बनेंगे। इन स्मारकों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करने पर संबंधित शहीद, घटना और उनके योगदान से जुड़ी विस्तृत जानकारी लोगों को उपलब्ध हो सकेगी।
*नक्सल हिंसा में प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने विशेष अभियान*
उप मुख्यमंत्री ने राज्य निर्माण से अब तक नक्सल हिंसा में हताहत हुए लोगों के ऐसे मामलों की भी समीक्षा की, जिनमें अब तक प्रभावित परिवारों तक राहत नहीं पहुंचाई जा सकी है। उन्होंने ऐसे सभी मामलों की पहचान कर विशेष मुहिम चलाने, प्रभावित लोगों से आवेदन प्राप्त करने और पात्र हितग्राहियों को शासन की सहायता एवं राहत का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित कोई भी पात्र परिवार शासन की सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए मैदानी स्तर पर सक्रिय होकर लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।
*गंभीर प्रकरणों को छोड़कर अन्य मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश*
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पुनर्वासित युवाओं से संबंधित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यूएपीए, जनहानि जैसे गंभीर प्रकरणों को छोड़कर अन्य मामलों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्रता से निराकृत किया जाए। इसके लिए पेशेवर अधिवक्ताओं, लोक अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं का दल गठित कर सभी प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी मामलों में पृथक्करण की प्रक्रिया भी पूर्ण करने को कहा, ताकि प्रत्येक प्रकरण की प्रकृति के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और पात्र पुनर्वासित युवाओं को अनावश्यक रूप से लंबित प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।
*शहीदों के सम्मान में स्कूल, चौक-चौराहों और भवनों के नामकरण की प्रक्रिया होगी तेज*
शहीदों के सम्मान और उनकी स्मृति को स्थायी रूप से जीवित रखने के उद्देश्य से स्कूलों, चौक-चौराहों एवं शासकीय भवनों के नामकरण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जहां नामकरण के लिए विभागीय अनुमति आवश्यक है, वहां तत्काल अनुमति प्राप्त कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और जल्द से जल्द नामकरण पूर्ण कराया जाए।
*क्षतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन राशि के सभी पात्र मामलों में लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश*
बैठक में राज्य निर्माण से अब तक माओवादी हिंसा में जनहानि के मामलों में मिलने वाली क्षतिपूर्ति तथा घायल जवानों एवं आम नागरिकों को प्रदान की जाने वाली प्रोत्साहन राशि की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने सभी प्रकरणों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लोगों को निर्धारित सहायता एवं प्रोत्साहन राशि का लाभ अनिवार्य रूप से मिले और कोई भी पात्र प्रकरण लंबित न रहे।
*पुनर्वास केंद्रों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और भोजन की व्यवस्था पर विशेष जोर*
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पुनर्वास केंद्रों में उपलब्ध व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने सभी पुनर्वास केंद्रों में आवश्यक एवं उपयुक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से मौसमी बीमारियों से बचाव, स्वच्छता, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कलेक्टरों को पुनर्वास केंद्रों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों में रह रहे लोगों की सुविधाओं और आवश्यकताओं की लगातार निगरानी की जाए तथा किसी भी कमी को तत्काल दूर किया जाए।
*पुनर्वासित युवाओं को कौशल विकास से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर*
उप मुख्यमंत्री ने पुनर्वासित युवाओं को दी जाने वाली इनाम राशि में से शेष राशि का भुगतान इस माह के अंत तक करने के निर्देश दिए। उन्होंने दूसरे राज्यों में शस्त्र त्यागकर छत्तीसगढ़ वापस आ रहे स्थानीय निवासियों को भी पुनर्वास केंद्रों से जोड़ने और उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए, ताकि वे पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्होंने ऐसे पुनर्वासित युवाओं के संबंध में भी चर्चा की, जो दूसरे राज्यों के निवासी हैं और अपने गृह राज्य वापस जाना चाहते हैं। उन्होंने संबंधित राज्यों से समन्वय कर ऐसे युवाओं को उनके गृह राज्य भेजने की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पुनर्वासित लोगों को समाज में सम्मानजनक स्थान और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने ग्राम जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर पुनर्वासित लोगों को समाज में ससम्मान स्थान दिलाने, उन्हें सभी पात्र शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तथा आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
*इलवद पंचायत योजना के 50 ग्रामों में विकास कार्यों को प्राथमिकता*
बैठक में इलवद पंचायत योजना के तहत चयनित 50 ग्रामों में विकास कार्यों के आबंटन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इन ग्रामों के विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चयनित सभी ग्रामों में विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर उन्हें प्रारंभ कराया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं एवं विकास कार्यों का लाभ ग्रामीणों को शीघ्र मिल सके।
*पुनर्वासित युवाओं की नसबंदी खुलवाने के निर्देश*
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने ऐसे पुनर्वासित युवाओं के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिनकी नसबंदी कराई गई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे युवाओं की नसबंदी खुलवाने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, नक्सल प्रभावित परिवारों को समयबद्ध सहायता, शहीद परिवारों के कल्याण, लंबित प्रकरणों के निराकरण और पुनर्वासित युवाओं को सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव गृह सुश्री निहारिका बारिक, सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, डीजी पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन श्री पवन देव, एडीजी नक्सल श्री विवेकानंद सिन्हा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
