August 06, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में त्यौहारों के लिए जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कहा। धान खरीदी की तैयारी, गोधन न्याय योजना, आकांक्षी जिला के संकेतकों, मुआवजा राशि वितरण तथा राजस्व के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि दीपावली तथा अन्य त्यौहारों के लिए शासन द्वारा दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इन निर्देशों के अनुरूप सभी कार्य करने होंगे। जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली में फटाके के दुकान के लिए स्थान का चयन किया गया है। उन स्थानों पर रेत, फायर ब्रिगेड जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। सभी एसडीएम, तहसीलदार दुकानदारों को प्रोटोकॉल के बारे में बताएं और सुरक्षा के उपाय करने के लिए निर्देशित करें। दीपावली के त्यौहारों के दौरान कोविड-19 के प्रोटोकाल का पालन कराना सुनिश्चित करें। इसके लिए जनप्रतिनिधि, सरपंच, सचिव का सहयोग लेकर लोगों को जागरूक करें। इसके लिए व्यापक रूप में प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।
    कलेक्टर वर्मा ने कहा कि धान खरीदी के लिए पंजीयन का अंतिम दिन है सभी शेष कार्य को शत प्रतिशत पूरा करें। कोई भी किसान पंजीयन के लिए नहीं छूटना चाहिए। धान कटाई प्रारंभ हो गई है, सीमावर्ती तहसीलों में कोचिया के माध्यम से धान लाने की संभावना बनी होती है। इन क्षेत्रों में वन विभाग, राजस्व विभाग, कृषि तथा अन्य विभागों की टीम बनाकर निगरानी करें। वहीं सीमा पर चेक पोस्ट में कड़ाई से जांच करें। धान खरीदी में पिछले वर्ष जिन केन्द्रों में अधिक शिकायत मिली है उनका चिन्हांकन करके निगरानी रखें। इस साल 18 नए धान खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं। इन केन्द्रों में सभी व्यवस्था उपलब्ध हो। जिन स्थानों पर चबूतरे का निर्माण किया जा रहा है वे धान खरीदी प्रारंभ होने के पहले पूरा कर लिया जाए। उन्होंने धान खरीदी केन्द्रों में बारदाने की उपलब्धता की जानकारी ली।
    कलेक्टर ने कहा कि गोधन न्याय योजना में सभी को सामूहिक रूप से अधिक कार्य करने की जरूरत है। गौठानों में गोबर खरीदी की जा रही है। उनका निराकरण करना आवश्यक है। सभी गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण निरंतर होना चाहिए। वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण के बाद इसे सोसायटी के माध्यम से विक्रय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन विभागों को वर्मी कम्पोस्ट की आवश्यकता होगी वे सभी समिति के माध्यम से खरीदी करेंगे। गौठानों में बाड़ी का निर्माण किया गया है इसमें आर्थिक गतिविधियां करने की आवश्यकता है। महिला स्वसहायता समूह को इसके लिए प्रेरित करें। वहीं गौठान में चारागाह को भी विकसित किया जाए। नरवा योजना के अंतर्गत नरवा के विकास के लिए कार्य प्रारंभ होने चाहिए। जिन जगहों पर नरवा का विकसित किया जाना है वहां कार्य प्रारंभ करें। बोल्डर चेकडेम एवं अन्य स्ट्रक्चर बन रहे है, वहां काम पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीपावली त्यौहार आने वाली है। जो मजदूरी मूलक या अन्य कार्य किए जा रहे हंै उन सभी का भुगतान त्यौहार के पहले किया जाए।
    कलेक्टर वर्मा ने आकांक्षी जिले के संकेतकों की समीक्षा करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में अधिक कार्य करने की जरूरत है। सभी विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने संकेतकों की जानकारी प्राप्त कर इन संकेतकों में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनके द्वारा इन संकेतकों पर कार्य नहीं किया जा रहा उन पर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर श्री वर्मा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री पोर्टल, मुख्यमंत्री जनदर्शन, समय-सीमा, फसल बीमा, क्षतिपूर्ति, मुआवजा वितरण, आरबीसी 6-4 की राशि, वनधन केन्द्र, जनपदों के पंचायत भवन निर्माण तथा राजस्व के लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान के अंतर्गत बुधवार और गुरूवार को सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर लक्षण वाले मरीजों का सूची दी जा रही है जो वर्तमान में बहुत कम है। इसमें प्रगति लाने की जरूरत है। लक्षण वाले मरीज मिलने पर 24 घंटे के अंदर जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दीपावली में राउत नाचा तथा अन्य माध्यमों से कोरोना प्रचार-प्रसार किया जाए। मेडिकल स्टोर्स से सर्दी, खांसी मरीजों की पहचान कर उनका जांच कराएं। कोरोना के प्रोटोकाल का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें।
    इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव बीपी सिंह, वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ रामावतार दुबे, अपर कलेक्टर हरिकृष्ण शर्मा, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती तनुजा सलाम, नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम राजनांदगांव मुकेश रावटे, एसडीएम डोंगरगांव वीरेन्द्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। विडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए विकासखंड अधिकारी जुड़े रहे।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी,ये गुलिस्तां हमारा -अल्लामा इकबाल सर अल्लामा मुहम्मद इकबाल (9 नवंबर 1877- 21 अप्रैल 1938) एक कवि, लेखक, दार्शनिक, समाज सुधारक, राजनीतिक कार्यकर्ता और कल्पना से परे शख्सियत थे. हालांकि वह पेशे से वकील थे और उनके 106 मामलों को तारीखी रूप में बताया जाता है, जो आज तक का रिकॉर्ड है. सियालकोट में जन्मे इकबाल की प्रारंभिक शिक्षा मदरसे और बाद में गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से हुई. उस समय के प्रतिष्ठित विद्वानों, मीर हसन और थॉमस वॉकर अर्नोल्ड का उनके विचारों पर गहरा प्रभाव था उनकी कानून और पीएचडी (दर्शनशास्त्र) की उच्च शिक्षा क्रमशः इंग्लैंड और जर्मनी में हुई. इकबाल को कई विश्वविद्यालयों द्वारा प्रोफेसर के रूप में रखने की पेशकश की गई थी, लेकिन वह ऐसी नौकरियों से मुक्त होने और रचनात्मक लेखन पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करते थे.
    इकबाल की प्राथमिक भाषा पंजाबी थी लेकिन वे अरबी, फारसी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में निपुण थे. उन्हें एशिया का सबसे अग्रणी कवि माना जाता है और उन्हें 'अल्लामा' (विद्वान) कहा जाता है. उनकी कविता में रूमानियत के बजाय विषयों पर एक संदेश देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. उन्होंने भगवान राम, गुरु नानक, महात्मा गांधी, सर सैयद अहमद खान, गालिब, टीपू सुल्तान, हिटलर, मुसोलिनी, आदि सहित अन्य हस्तियों पर लिखा. उनके अन्य विषय देशभक्ति, बच्चे और बचपन, मां, प्रकृति, धर्म, दर्शन, समाज कल्याण, मानव कल्याण रहे.
    अल्लामा इकबाल सर सैयद से बहुत प्रभावित थे और दोनों विभूतियों के रिश्तों ने अलीगढ़ मूवमेंट पर गहरा असर डाला था. अल्लामा इकबाल ने तीन बार अलीगढ़ का दौरा किया 9 फरवरी 1911, 18 नवंबर 1929 और 18 दिसंबर 1934. पहली यात्रा में उन्होंने स्ट्रैची हॉल में बहुत महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया था. “इकबाल मेडल” की शुरुआत 1912 में हुई थी. इकबाल बरनी (1913) और भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन (1919) इस पदक के गौरवशाली विजेता थे. उनकी रचनाएं अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट और अलीगढ़ मैगज़ीन में 8 मार्च 1911 से 1938 तक प्रमुखता से प्रकाशित हुईं.
    पूरी दुनिया में उनके कलाम को खूब पढ़ा और शोध किया जाता है, लखनऊ से “आतिफ़ हनीफ़” जो की उर्दू अदब और साहित्य से जुड़े हैं, बतातें हैं की उर्दू शेर -शायरी के लिए इक़बाल का कोई सानी नहीं, उनके चाहने वालों ने उनके जन्मदिन को इस कोरोना काल में "वेबिनार, ज़ूम मीटिंग्स या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये सेलिब्रेट किया.
    खुदी को कर बुलंद इतना की हर तक़दीर से पहले,
    खुदा बन्दे से खुदे पूछे बता तेरी रज़ा क्या है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्ति की आखिरकार नीलामी हो गई है. दाऊद इब्राहिम की 7 प्रॉपर्टी में से 6 प्रॉपर्टी बिक गई हैं. हालांकि, एक प्रॉपर्टी को निलामी से हटा दिया गया था. दो वकीलों को दाऊद की 6 प्रॉपर्टी मिली है. इनमें से 4 प्रॉपर्टी 4, 5, 7, 8 भूपेंद्र भरद्वाज को मिली, जबकि 2 प्रॉपर्टी 6 और 9 अजय श्रीवास्तव ने ली हैं. इसी के साथ दाऊद की हवेली वकील अजय श्रीवास्तव ने खरीदी है. यह हवेली 11 लाख 20 हजार की बिकी है.
    अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की रत्नगिरी जिले के खेड़ में 13 पुश्तैनी संपत्तियां थीं. 13 में से 7 की आज नीलामी हो गई है. माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम की मुम्बई की जप्त संपत्तियों को बेचने के बाद साफेमा यानी स्मगलर फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर एक्ट ने आज दाऊद इब्राहिम के गांव की पुश्तैनी संपत्तियों की नीलामी की है.
    साफेमा ने कुल 17 संपत्तियों की नीलामी की है, जिसमें से 7 संपत्तियां अकेले दाऊद इब्राहिम की थीं. साफेमा के जांच अधिकारी मुनाफ सैयद के मुताबिक़, रत्नागिरी के खेड़ में दाऊद की कुल 13 संपत्ति थीं, जिसमें से 7 की निलामी की गई है. इन संपत्तियों की कीमत तकरीबन 80 लाख लगाई गई थी.
    1993 सीरियल बम धमाकों का आरोपी और अंतरराष्ट्रीय भगोड़े आतंकी दाऊद इब्राहिम की मुम्बई में भी कई संपत्तियां जप्त की गई थीं, लेकिन उन्हें नीलाम करने में सरकार को 25 साल से भी ज्यादा का समय लग गया. साल 2018 में साफेमा दाऊद के गढ़ नागपाड़ा में बने रौनक अफ़रोज़ होटल, डाम्बर वाला बिल्डिंग और शबनम गेस्ट हाऊस को बेचने में क़ामयाब हुई थी. उसके बाद दाऊद की बहन हसीना पारकर का फ्लैट भी एजेंसी नीलाम करने में कामयाब रही.
    साफेमा के मुताबिक कोविड 19 संक्रमण को देखते हुए इस बार थोड़ा बदलाव किया गया. इस बार पब्लिक ऑक्शन में बदलाव कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये नीलामी हुई. 17 संपत्तियों में एक फ्लैट ड्रग्स तस्कर इक़बाल मिर्ची का भी है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ /बिहार विधानसभा चुनावों में चिराग पासवान ने बिहार में बड़ा गेम खेला है. चिराग की रणनीति के आगे नीतीश कुमार और उनकी पार्टी बिहार में तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. के चुनावी डेस्क के विश्लेषण दिखाते हैं कि अगर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार का इतना जोर-शोर से विरोध नहीं किया होता तो एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का नीतीश का सपना उनकी सहयोगी बीजेपी पर इसकदर निर्भर नहीं करता.
    यह रिपोर्ट पब्लिश किए जाने तक, बीजेपी को अभी राज्य में सबसे ज्यादा सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं. वहीं, विपक्षी नेता तेजस्वी यादव रनर-अप बनते दिख रहे हैं. नीतीश कुमार की पार्टी तीसरे नंबर पर बनी हुई है, जो कि उसके पहले के प्रदर्शन के आगे कुछ नहीं है.
    चुनाव डेस्क का डेटा दिखाता है कि अगर नीतीश कुमार की जेडीयू के हर उम्मीदवार को चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार का सामना नहीं करना पड़ता तो इन चुनावों में वो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती थी. कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे और पार्टी से निकाले जा चुके पवन वर्मा ने कहा कि 'ऐसा लगता है कि बीजेपी नीतीश कुमार को अपना जूनियर पार्टनर बनाने में कामयाब हो गई है- जोकि चिराग पासवान के मूव के पीछे की मंशा थी.'
    कई चुनावी विश्लेषकों और बीजेपी के आलोचकों का ऐसा मानना है कि बीजेपी ने अपने एक सहयोगी चिराग पासवान का इस्तेमाल दूसरे सहयोगी के वोटबैंक में सेंध लगाने में किया है. चिराग पासवान के वोटकटवा रोल से बीजेपी को पहली बार नीतीश के साथ रहे खट्टे-मीठे गठबंधन में अपनी भूमिका बदलने का मौका मिला है. पार्टी ने बहुत स्पष्ट तरीके से उस व्यक्ति की हैसियत कम कर दी है, जिसने कभी कहा था कि उसका नरेंद्र मोदी से कोई लेना-देना नहीं होगा, जो उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे. नरेंद्र मोदी से मुलाकात न करने के बहाने कभी नीतीश कुमार ने पटना में एक डिनर पार्टी कैंसल कर दी थी. अब आज जब उनके पास फिर मुख्यमंत्री बनने का मौका है, तो वो बीजेपी की और पीएम मोदी की बार-बार अपील की वजह से है.
    बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने यह सच है कि चिराग पासवान की ओर से यह वादे-इरादे दिखाए जाने के बावजूद कि वो नीतीश कुमार को चोट पहुंंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और ऐसी स्थिति होगी कि वो बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे, पीएम मोदी सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी बार-बार नीतीश को ही मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा की. नीतीश ने चिराग के हमलों को लेकर नाराजगी दिखाई थी, इसी के चलते वो पटना में हुई बीजेपी के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी काफी देरी से पहुंचे थे.
    हालांकि, सार्वजनिक रूप से न तो पीएम ने, न किसी वरिष्ठ बीजेपी नेता ने चिराग पासवान के इस मिशन को लेकर कुछ नहीं कहा. ऐसे में इसे इस तरह लिया जा रहा था कि बीजेपी चिराग पासवान का गारंटर बनी हुई है.
    बातचीत में कहा था कि 'हम शाम तक सरकार गठन और नेतृत्व को लेकर फैसला लेंगे.' उनके इस बयान से ऐसा लगा कि यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार गठबंधन से मुख्यमंत्री न चुने जाएं. हालांकि, बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि वादे के मुताबिक नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री चुने जाएंगे.

    खेल / शौर्यपथ / इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन के फाइनल मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स की टीम का आमना-सामना चार बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस से होगा। दिल्ली दूसरे क्वॉलिफायर मैच में सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर आईपीएल के फाइनल में पहली बार अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है। वहीं, मुंबई इंडियंस ने पहले क्वॉलिफायर में दिल्ली को ही करारी शिकस्त देकर छठी बार फाइनल का अपना टिकट कटवाया है। मुंबई भले ही पांचवीं बार इस ट्रॉफी को अपने नाम करने के लिए फेवरेट टीम मानी जा रही हो, लेकिन दिल्ली ने जिस तरह का प्रदर्शन हैदराबाद के खिलाफ किया है, उसको देखते हुए अगर श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम इस खिताब को पहली बार अपने नाम करने में सफल होती है तो कोई हैरत वाली बात नहीं होगी। आइए एक नजर डालते है उन पांच कारणों पर जिनके दम पर दिल्ली कैपिटल्स की टीम रोहित एंड कंपनी का पांचवीं बार इस खिताब को अपने नाम करने का सपना चकनाचूर कर सकती है।
    1. धवन अकेले बिगाड़ सकते हैं मुंबई का खेल
    दिल्ली कैपिटल्स के लिए इस सीजन सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शिखर धवन पर फाइनल मुकाबले में काफी बड़ा दरोमदार होगा। धवन वो बल्लेबाज हैं, जिनका बल्ला अगर फाइनल में चला तो मुंबई का हर दांव उल्टा पड़ सकता है। दिल्ली के लिए अच्छी खबर यही है कि गब्बर हैदराबाद के खिलाफ शानदार पारी खेलकर आ रहे हैं और उनकी हालिया फॉर्म मुंबई के गेंदबाजों की नींद जरूर उड़ा रही होगी। धवन इस सीजन अबतक 16 मैचों में 145.65 के स्ट्राइक रेट से 603 रन बना चुके हैं।
    2. स्टोयनिस का ऑल-राउंड खेल दिला सकता है दिल्ली को पहला खिताब
    सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ बल्ले और गेंद दोनों से ही धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले मार्कस स्टोयनिस बेहद शानदार फॉर्म में हैं। हैदराबाद के खिलाफ उनसे ओपनिंग करवाने का टीम का फैसला भी एकदम सही साबित हुआ था। स्टोयनिस के पास पावरप्ले के अंदर बड़े शॉट्स लगाने की काबिलियत है, इसके साथ वो पारी को चलना भी बखूबी जानते हैं। ऑस्ट्रेलिया का यह ऑल-राउंडर बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कारगर साबित हो सकता है। स्टोयनिस ने इस सीजन अबतक 16 मैचों में 352 रन बनाने के साथ 12 विकेट भी चटकाए हैं। यानी अगर फाइनल में दिल्ली के इस ऑलराउंडर का दिन रहा, तो दिल्ली को पहली बार चैंपियन बनने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
    3. रबाडा और नॉर्टजे की जोड़ी कर सकती है कमाल
    कगीसो रबाडा और एनरिच नॉर्टजे ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए इस सीजन कई बेहतरीन स्पेल डाले हैं और टीम को एकतरफा जीत दिलाई है। हैदराबाद के खिलाफ रबाडा ने अपने चार ओवर में सिर्फ 29 रन देकर 4 विकेट अपने नाम किए थे। दोनों ही गेंदबाजों के पास वो गति और लाइन लैंथ मौजूद है, जिसके दम पर वो मुंबई इंडियंस के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस कर सकते हैं। रबाडा डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर फेंकने की अपनी काबिलियत से मुंबई के बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं, जबकि नॉर्टजे अपनी गति के दम रनों पर अंकुश लगा सकते हैं।
    4. काम आएगी अश्विन की चतुराई
    मुंबई के खिलाफ आईपीएल 2020 के फाइनल मैच में रविचंद्रन अश्विन पर काफी कुछ निर्भर करेगा। पहले क्वॉलिफायर मैच में दिल्ली को भले ही मुंबई के हाथों हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन अश्विन ने उस मैच में भी मुंबई के बल्लेबाजों को अपनी घूमती गेंदों पर खूब नचाया था। कप्तान श्रेयस अय्यर अश्विन का इस्तेमाल पावरप्ले में करते हैं और अश्विन हर बार कप्तान को विकेट निकाल कर देते हैं। इसके साथ ही, अश्विन बीच के ओेवरों में रनगति पर भी लगाम लगा सका सकते हैं, जो मुंबई के बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ा सकता है।
    5. एक्स फैक्टर साबित हो सकते है शिमरॉन हेटमायर और पंत
    हैदराबाद के खिलाफ शिमरॉन हेटमायर काफी अच्छे टच में दिखाई दिए थे और उन्होंने 22 गेंदों में 42 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली थी। हेटमायर का बल्ला अगर फाइनल में मुंबई के खिलाफ चला, तो इस कैरेबियाई बल्लेबाज को रोकना रोहित शर्मा के लिए आसान नहीं होगा। ऋषभ पंत का बल्ला भले ही इस पूरे टूर्नामेंट में खामोश रहा हो, लेकिन अपना दिन होने पर पंत किसी भी गेंदबाजी अटैक की धज्जियां उड़ा सकते हैं और रोहित खुद इस बात को अच्छे से जानते हैं। पंत का ओवरऑल रिकॉर्ड वैसे भी मुंबई के खिलाफ काफी अच्छा रहा है और इसी टीम के खिलाफ पंत ने अपने आईपीएल करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी भी खेली है।

    सेहत / शौर्यपथ क्या आप जानते हैं कि हर सेहतमंद चीज, हर मौसम में फायदेमंद नहीं होती? लेकिन ये बात बिल्कुल सही है। इसलिए हम आपको बता रहे हैं ऐसी 5 चीजों के बारे में, जिनका ठंड में इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद की जगह नुकसानदायक हो सकता है।
    1 दही -
    दही वैसे तो बेहद फायदेमंद होता है, लेकिन ठंड के दिनों में कच्चे दही का इस्तेमाल आपके लिए ठीक
    नहीं है। इसकी तासीर ठंडी है, इस मौसम में यह आपको सर्दी, जुकाम खांसी या पाचन संबंधी समस्या दे सकता है। आप इसे खाना ही चाहते हैं, तो फ्राय करके या छाछ के रूप में कर सकते हैं।
    2 दूध - भले ही आपको यकीन न हो, लेकिन ठंड में दूध का इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है। यह कफ पैदा करता है, जो कफ या ठंडी तासीर वालों के लिए नुकसानदायक है। आप चाहें तो इसे गर्म करके, हल्दी, शहद, गुड़ या अंजीर के साथ इसे ले सकते हैं।
    3 पुदीना - इस मौसम में भी पुदीने को स्वाद से खाते हैं तो थोड़ा संभल जाएं, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और इस मौसम में यह सर्दी जुकाम का कारण बन सकता है।
    4 फल - फलों में इस मौसम में आपको चयन करना होगा कि कौन से फल ठंडी तासीर के हैं और कौन से नहीं। इस मौसम में केला, संतरा जैसे फल कफ और कोल्ड का कारण बन सकते हैं।
    5 ठंडा पानी - नॉर्मल पानी की जगह ठंडा पानी पीने की आदत है, तो इन दिनों में ऐसा न करें। इससे आपका गला खराब हो सकता है और यह सर्दी जुकाम का कारण बन सकता है।

    मनोरंजन /शौर्यपथ / तेजी से काम करने के लिए मशहूर अक्षय कुमार दनादन फिल्म साइन किए जा रहे हैं। तुरत-फुरत शूटिंग निपटा रहे हैं। लगभग 10 फिल्में उनके हाथ में हैं। जहां कोरोनावायरस के कारण दूसरे स्टार अभी भी काम करने से कतरा रहे हैं वहीं अक्षय कुमार को यह वायरस भी रोक नहीं पा रहा है।
    खबर है कि अक्षय कुमार अब एक कॉमेडी मूवी करने जा रहे हैं और फिल्ममेकर मुदस्सर अज़ीज़ को उन्होंने हां कह दिया है। मुदस्सर अज़ीज़ 'हैप्पी भाग जाएगी' और 'पति पत्नी और वो' नामक कॉमेडी और सफल फिल्म बना चुके हैं।
    सूत्रों का कहना है कि मुदस्सर ने अक्षय कुमार को अपनी स्क्रिप्ट सुनाई थी और अक्षय ने तुरंत फिल्म करने के लिए हां कह दी। जुलाई 2021 से अक्षय इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं।
    अक्षय कुमार सोशल, एक्शन और कॉमेडी फिल्म लगातार कर संतुलन बनाए रखे हैं। उनका मानना है कि उनके फैंस को वैरायटी देना चाहिए और उनके फैंस यह फिल्में पसंद भी कर रहे हैं।
    हाल ही में अक्षय कुमार की मूवी 'लक्ष्मी' ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। राघव लॉरेंस द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अक्षय के साथ किआरा आडवाणी, राजेश शर्मा, शरद केलकर, मनु ऋषि चड्ढा जैसे कलाकार हैं।

    श्रध्दा /शौर्यपथ / दीपावली के दिन माता लक्ष्मी को यदि ये भोग लगाएंगे तो उनकी कृपा सदा आप पर बनी रहेगी। लेकिन ध्यान रहे कि माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना सदा भगवान विष्णुजी के साथ ही करना चाहिए। लक्ष्मीजी को धन की देवी माना गया है। कहते हैं कि अर्थ बिना सब व्यर्थ है। लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग को लक्ष्मी मंदिर में जाकर अर्पित करना चाहिए या दीपावली के दिन पूजा के दौरान इन्हें अर्पित करें।
    लक्ष्मी भोग
    1. केसर भात : पीले रंग के केसर भात भी माता को अर्पित करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है।
    2. पीले रंग के मिष्ठान : माता लक्ष्मी को पीले और सफेद रंग के मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं।
    3. खीर : माता लक्ष्मी को चावल की खीर में किशमिश, चारोली, मखाने और काजू मिलाकर अर्पित करें।
    4. हलुआ : शुद्ध घी का हलुआ माता को प्रिय है।
    5. ईख (गन्ना) : दीपावली के दिन गन्ना को इसलिए अर्पित किया जाता क्योंकि उनके सफेद हाथी को यह प्रिय है।
    6. सिघाड़ा : सिंघाड़ा माता लक्ष्मी को बहुत ही पसंद है। इसकी उत्पत्ति भी जल से होती है।
    7. मखाना : जिस तरह माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र से हुई उसी तरह मखाने की उत्पत्ति भी जल से हुई है। मखाना कमल के पौधे से मिलता है।
    8. बताशे : पताशा या बताश भी माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय है। रात्रि की पूजा में इसे अर्पित किया जाता है।
    9. नारियल : नारियल को श्रीफल भी कहते हैं। इसमें सबसे शुद्ध जल भरा रहता है। श्रीफल होने के कारण माता यह बहुत पसंद है।
    10. पान : माता लक्ष्मी की पूजा में मीठा पान का बहुत महत्व है। यह प्रसन्नता और समृद्धि का प्रतीक है।
    11. अनार : मां लक्ष्‍मी को फलों में अनार बेहद प्रिय है। दीपावली की पूजन के दौरान अनार जरूर अर्पित करें।
    इसके अलावा पूजन के दौरान 16 प्रकार की गुजिया, पपड़ियां, अनर्सा, लड्डू चढ़ाएं जाते हैं। आह्वान में पुलहरा चढ़ाया जाता है। इसके बाद चावल, बादाम, पिस्ता, छुआरा, हल्दी, सुपारी, गेंहूं, नारियल अर्पित करते हैं। केवड़े के फूल और आम्रबेल का भोग अर्पित करते हैं। जो कोई भी व्यक्ति एक लाल फूल अर्पित कर लक्ष्मीजी के मंदिर में उन्हें यह भोग लगाता है तो उसके घर में हर तरह की शांति और समृद्धि रहती है। किसी भी प्रकार से धन की कमी नहीं रहती।

    धर्म संसार / शौर्यपथ /देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर पूजन-अर्चन करने से आर्थिक संकट समाप्त हो जाता है। खासकर शुक्रवार को यहां जाना चाहिए। महालक्ष्मी और लक्ष्मी के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। उनमें से ही जानते हैं 10 की जानकारी।
    1. पद्मावती का मंदिर : तिरुपति के पास तिरुचुरा नामक एक छोटा-सा गांव है। इस गांव में देवी पद्मावती का सुंदर मंदिर है। यह मंदिर 'अलमेलमंगापुरम' के नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता है कि तिरुपति बालाजी के मंदिर में मांगी मुराद तभी पूरी होती है, जब श्रद्धालु बालाजी के साथ-साथ देवी पद्मावती का आशीर्वाद भी ले लें।
    2. दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर : भारतीय राज्य तमिलनाडु के जिले वेल्लू में स्थित थिरुमलई कोड गांव श्रीपुरम में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को 'दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर' कहा जाता है। 100 एकड़ में फैला यह मंदिर चेन्नई से 145 किलोमीटर दूर पलार नदी के किनारे स्थित है।
    3. पद्मनाभस्वामी मंदिर : पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुअनंतपुरम् में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है, लेकिन यहां से अपार मात्रा में 'लक्ष्मी' की प्राप्ति हुई थी। यह मंदिर अपने सोने के खजाने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाम मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था। इसका जिक्र 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है, लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था।
    4. मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर : समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ज्ञात इतिहास के अनुसार इस महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना अंग्रेजों के काल में हुई। उस समय देवी लक्ष्मी एक ठेकेदार रामजी शिवाजी के स्वप्न में प्रकट हुईं और उन्हें समुद्र तल से देवियों की 3 प्रतिमाएं निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएं एकसाथ विद्यमान हैं।
    5. कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर : कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है। कहा जाता है कि यहां स्थित महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। इसके बाद शिलहार यादव ने 9वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था।
    मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी की लगभग 40 किलो की प्रतिमा स्थापित है जिसकी लंबाई लगभग 4 फीट की है। कहा जाता है कि यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है।
    6. लक्ष्मीनारायण मंदिर : दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक लक्ष्मीनारायण मंदिर को मूल रूप में 1622 में वीरसिंह देव ने बनवाया था, उसके बाद पृथ्वीसिंह ने 1793 में इसका जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सन् 1938 में भारत के बड़े औद्योगिक परिवार बिड़ला समूह ने इसका विस्तार और पुनरुद्धार कराया जिसके बाद इसे बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है।
    7. इंदौर का महालक्ष्मी मंदिर : इंदौर शहर के हृदयस्थल राजवाड़ा की शान कहे जाने वाले श्री महालक्ष्मी मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1832 में मल्हारराव (द्वितीय) ने कराया था। 1933 में यह 3 तलों वाला मंदिर था, जो आग के कारण तहस-नहस हो गया था। 1942 में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कराया गया था। वर्तमान में मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करके इसे भव्य रूप दिया गया है।
    8. चौरासी मंदिर : यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के चंबा से 65 किलोमीटर दूर भरमौर जिला नगर में स्थित है। यहां महालक्ष्मी के साथ गणेशजी और नरसिंह भगवान की मूर्ति भी स्थित है। प्राकृतिक वादियों में बसा यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
    9. चंबा का लक्ष्मीनारायण का मंदिर : हिमाचल के चंबा में स्थित यह मंदिर पारंपरिक वास्तुकारी और मूर्तिकला का उत्कृष्‍ट उदाहरण है। चंबा के 6 प्रमुख मंदिरों में यह मंदिर सबसे विशाल और प्राचीन है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर राजा साहिल वर्मन ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था। यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है।
    10. अष्टलक्ष्मी मंदिर : चेन्नई के इलियट समुद्र तट के पास स्थित यह मंदिर लगभग 65 फीट लम्बा और 45 फीट चौड़ा है। मंदिर में देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप 4 मंजिल में बने 8 अलग-अलग कमरों में स्थापित है। इस मंदिर में देवी लक्ष्मी अपने पति और भगवान विष्णु के साथ मंदिर की दूसरी मंजिल में विराजित है।

          दुर्ग / शौर्यपथ / कांग्रेस सरकार को सत्ता 15 साल बाद मिली इस सत्ता को हांसिल करने के लिए कांग्रेस सरकार ने विभागों में हो रहे घोटालो पर नाराजगी जाहिर करते हुए कई आन्दोलन किये और सुशासन की बात कह कर जनता से समर्थन माँगा . प्रदेश की जनता ने भी भरपूर समर्थन देकर कांग्रेस को प्रदेश का ताज पहनाया किन्तु कांग्रेस के दो साल के शासन के बाद भी आज भी ऐसे कई विभाग है जो अपने पुराने कार्यप्रणाली पर ही कार्यरत है . ऐसे ही एक विभाग है दुर्ग का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय . जहां अधिकतर कार्य दलालों के माध्यम से होते थे किन्तु ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद आम जनता को दस्तावेजी कार्यो में तो आसानी हो गयी किन्तु आज भी शहर व जिले में ऐसे कई वाहन विक्रेता है जो ना किसी अधिकृत विक्रेता के अधीन नियमानुसार और ना ही विभाग से ट्रेड लाइसेंस लेकर कार्य कर रहे है . ऐसा नहीं है कि विभाग के प्रमुख अधिकारी को इन संस्थानों की जानकारी नहीं है किन्तु ऐसा कौन सा कार्य की अधिकता है जो विभागप्रमुख द्वारा इन संस्थानों के कार्यो पर ना ही जाँच की जा रही है और ना ही किसी प्रकार की कार्यवाही .शौर्यपथ समाचार पत्र की टीम द्वारा ऐसे ही कुछ शो रूम की पड़ताल की गयी तो दो मामले सामने आये है जो शासन के नियमो के विरुद्ध वाहन विक्रय कर विभाग को धोखा दे रहे है
    पहला मामला है KIA वाहन विक्रेता
         दुर्ग के बाईपास टोल प्लाज़ा के करीब KIA  मोटर्स के वाहन विक्रय का शो रूम है पर संचालको द्वारा यहाँ शो रूम ना लिख इसे सर्विस सेंटर का नाम दिया गया है किन्तु इस संसथान में नए वाहनों के विक्रय के लिए बेक ऑफिस से लेकर फ्रंट ऑफिस और सेल्समेन भी तैनात है साथ ही नए वाहन भी डिस्प्ले के लिए रखा गया है . वाहन विक्रय के लिए अधिकृत वाहन विक्रेता को जिला परिवहन विभाग से ट्रेड लाइसेंस लेना ज़रूरी होता है किन्तु दुर्ग में संचालित इस संसथान ने दुर्ग जिला परिवहन विभाग से किसी भी प्रकार की वाहन विक्रय करने की अनुमति नहीं ली है और शायद यही कारण है कि दुर्ग जिले का कोई भी व्यक्ति अगर KIA   मोटर्स का कोई वाहन दुर्ग के इस संसथान से लेता है तो उसे बिलिंग रायपुर मुख्यालय से दिया जाता है जो कि परिवहन विभाग के नियमो के विरिद्ध है किन्तु दुर्ग के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को इसकी जानकारी होने के बाद भी किसी तरह की कोई कार्यवाही या जाँच नहीं करना कई तरह के संदेहों को जन्म देता है जबकि प्रदेश के परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जो जिले के प्रभारी है साल भर प्रेस से चर्चा के वक्त कहा था कि परिवहन विभाग में किसी भी तरह के अवैधानिक कार्यप्रणाली को बर्दास्त नहीं किया जाएगा किन्तु प्रदेश के व्हीआईपी जिले में जिस जिले से प्रदेश के मुख्यमंत्री व गृह मंत्री है उसी जिले में खुले आम अवैध तरीके से सर्विस सेंटर के नाम पर शो रूम का सञ्चालन हो रहा है .


    दो पहिया वाहन विक्रेता का अवैधानिक तरीके से वाहन विक्रय ...
         ऐसा नहीं कि शहर में सिर्फ चार पहिया वाहन विक्रेता ही नियमो  की अवहेलना कर रहे है यह कार्य दो पहिया वाहन विक्रेता द्वारा भी बड़े स्तर पर किया जा रहा है ऐसे ही एक मामले में शहर के व्यस्तम क्षेत्र ग्रीन चौक में सुराना मोटर्स द्वारा अवैधानिक तरीके से वाहन का विक्रय किया जा रहा है . सुराना मोटर्स के पास ना ही इन विक्रय किये जाने वाले वाहनों की सब डीलरशिप है और ना ही डीलरशिप फिर भी कई कम्पनियों के वाहन खुलेआम विक्रय किया जा रहा है जिसकी कई बार शिकायत की जानकारी भी विभाग को समाचार पत्रों व अन्य माध्यमो से हुई किन्तु क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा आज पर्यंत तक मामले की ना तो जाँच की गयी और ना ही कार्यवाही जिसका परिणाम यह है कि आज भी सुराना मोटर्स द्वारा खुले आम शासन के नियमो की धज्जी उड़ाते हुए नए वाहनों का बिना किसी जायज अधिकृत पत्र के विक्रय किया जा रहा है . आखिर ऐसी क्या मज़बूरी है क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दुर्ग की जो कार्यवाही या जाँच के नाम पर टालमटोल कर रहे है क्या परिवहन मंत्री का विभाग से भ्रष्टाचार हटाने की बात सिर्फ एक जुमला था या फिर अधिकारियों द्वारा विभाग को अँधेरे में रखा जा रहा है .

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