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दुर्ग । शौर्यपथ । जिला कार्यकारी अध्यक्ष सोनू साहू के नेतृत्व में पिछले कुछ दिनों से RTE के तहत प्रवेश में जो समस्या आ रहे थे उसको लेकर दुर्ग अपर कलेक्टर श्रीमान प्रकाश सर एवम जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास बघेल जी के हस्तक्षेप बाद रिसाली नोडल अधिकारी को दिशानिर्देश देकर ऐसे जो भी विद्यार्थी जिनका नाम प्रवेश संबन्धित प्रक्रिया में किसी निम्न कारणों से नहीं आए होंगे उसे निजी स्कूल प्रबंधक के साथ समन्वय बनाकर उन सभी छात्र छात्राओं को नियमानुसार प्रवेश देने के लिए निर्देश दिए जिसके बाद रिसाली नोडल अधिकारी बच्चो के पात्र सूचित बनाकर स्कूल प्रशासन को भेजे अब स्कूल प्रबंधक ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश देने के लिए अपनी सहमति दिए भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन दुर्ग के तमामन NSUI की साथी जिन्होंने छात्रहित में आवाज बुलंद कर विघार्थियों के लिए आगे आए उन सभी साथियों का बहुत- बहुत धन्यवाद विशेष करके बड़े भाई रिसाली नगर निगम के पूर्व पार्षद चिंटू चन्द्र भान सिंह ठाकुर जी जय सेन,सूर्य देशमुख,अमोल जैन,शिवांग साहू,आशीष, बनटी वर्मा, टिकेंद्र साहू,उभरन टंडन, सुरेंद बाघमारे,आयुष सोनी सहित उपस्थित पालक जनो को बधाई आप सभी ने इस अधिकार की लड़ाई में अपना बहुमूल्य समय देकर छात्रहित में सहयोग प्रदान किए..
अंजोरा विश्वविद्यालय के कुलपति ने महापौर से की सौजन्य मुलाकात
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग सीमा क्षेत्र के पशु पालकों को अब अपने बीमार मवेशियों का ईलाज कराने अंजोरा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं जाना पड़ेगा । उन्हें दुर्ग शहर में ही महिला समृद्धि बाजार के बाजू प्रारंभ हो रहे दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सभी प्रकार की सुविधा प्राप्त होगी। इस संबंध में आज अंजोरा विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ0 ण्म.पी. दक्षिणकर ने आज महापौर श्री धीरज बाकलीवाल से सौजन्य मुलाकात कर उन्हें उद्घाटन कार्यक्रम के लिए आमत्रित किये । कल 11 बजे उसका उद्घाटन किया जावेगा। दाऊ वासुदेव कामधेनु विश्वविद्यालय का उद्घाटन कांगे्रस उपाध्याक्ष एवं पूर्व विधायक श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर द्वारा किया जावेगा। इस मौके पर विशेष अतिथि के रुप में महापौर धीरज बाकलीवाल, सभापति राजेश यादव, ऋषभ जैन, भोला महोबिया, एल्डरमेन अजय गुप्ता एवं अन्य उपस्थित रहेगें।
15 से 20 प्रतिशत बचे कार्यो को 15 दिनों में करें पूरा करने अधिकारियों को दिये निर्देश
दुर्ग / शौर्यपथ / निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा आज निगम डाटा सेंटर में सुबह और दोपहर दो पालियों में निगम अधिकारियों की बैठक लेकर सांसद निधि, विधायक निधि, अधोसरंचना मद, संधारण मद, महापौर निधि से होने वाले कार्यो की समीक्षा की। उन्होनें लोक कर्म विभाग, जलकार्य विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर कहा निदान 1100 में मिलने वाले शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं करने के कारण नगर निगम दुर्ग का ग्रेड अन्य निगमों से नीचे आ रहा है। उन्होनें सभी अधिकारियों को निर्देशित कर कहा राज्य शासन की योजना पौनी पसारी योजना, गौठान, ठगड़ाबांध सौदर्यीकरण, शंकर नाला निर्माण आदि महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी लेकर आगामी बैठक में उपस्थित होवें ।
बैठक में कार्यपालन अभियंता सुशील कुमार बाबर, राजेश पाण्डेय, सहा0 अभियंता जितेन्द्र समैया, जगदीश केशवानी, उपअभिंयंता व भवन अधिकारी प्रकाशचंद थवानी, सहा0 भवन अधिकारी गिरीश दीवान, उपअभियंता राजकिशोर पालिया, ए0आर0 राहंगडाले, कु0 आसमा डहरिया, भारती ठाकुर, श्रीमती अर्पणा मिश्रा, भीमराव, विनोद मांझी, के अलावा राजेन्द्र ढबाले एवं मनोहर साहू, भूपेन्द्र गोईर व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
समीक्षा बैठक में आयुक्त बर्मन ने सांसद निधि, विधायक निधि, अधोसरंचना मद, महापौर निधि निगम मद से होने वाले कार्यो की निविदा और उसके कार्य आदेश की जानकारी ली। उन्होनें कार्य आदेश के बाद 6 माह से एल साल तक रोक रखे कार्यो एवं अब तक कार्य प्रारंभ नहीं करने वाले ठेकेदार मंजरी शर्मा, राज इंटरप्राइजेस, गीता बिल्डर, मेसर्स संज्ञा कंन्ट्रक्शन सहित करीब 9 ठेकेदारों के निविदाओं को निरस्त कर पुनः निविदा आमंत्रित करने अधिकारियांे को निर्देश दिये। उन्होनें कहा जिन कार्यो में 15 से 20 प्रतिशत ही कार्य बचा है उसे 15 दिनों के अंदर पूरा अवगत करायें।
इसके अलावा जिन कार्यो की निविदा होकर कार्य आदेश नहीं हुआ है उसे अधिकारी जल्द से जल्द कार्य आदेश जारी कर कार्य प्रारंभ करावें। उन्होनें कहा जिन ठेकेदारों द्वारा कार्य आदेश प्राप्त करने के बाद विकास कार्य प्रारंभ नहीं किया है और समय समाप्ति पर है से ठेकेदारों के निविदा निरस्त कर पुनः निविदा आमंत्रित किया जावे । काम नहीं करने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी । उन्होनें अमृत मिशन सहित सांसद, विधायक, महापौर, संधारण मद, निगम मद के रुके कार्यो को जल्द से जल्द प्रारंभ कर अवगत करायें।
समीक्षा बैठक के दौरान उन्होनें कहा निगम विभागों के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री से प्राप्त शिकायतों, निदान 1100 में होने वाले शिकायतों सहित अन्य शिकायतों का निराकरण समय पर नहीं किया जाता है। सबसे अधिक नल घर विभाग की शिकायत है जिसका निराकरण नहीं किया गया। इसी प्रकार शिकायतों का निराकरण नहीं करने वाले विभाग लोक कर्म विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग कर्मशाला विभाग ीाी शामिल है। निदान 1100 के शिकायतों का निराकरण नहीं करने के कारण नगर निगम दुर्ग का ग्रेड अन्य निगमों से नीचे स्तर पर है । उन्होनें कहा आगामी बैठक में अधिकारी पौनी पसारी योजना, ठगड़ा बांध सौदर्यीकरण कार्य, गोठान योजना, शंकर नाला निर्माण कार्य की प्रगति, आदि योजनाओं की संपूर्ण जानकारी लेकर उपस्थित होवें ।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / गोरखपुर के ललित नारायण मिश्रा रेलवे हॉस्पिटल के एक टॉयलेट में समाजवादी पार्टी के झंडे के रंग वाले टाइल्स को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. सपा ने रेलवे से 24 घंटे के भीतर इन टाइल्स को बदलने का अल्टीमेटम दिया है.
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने रेलवे के महाप्रबंधक से भी मुलाकात की है. सपा नेताओं ने पार्टी के झंडे के रंग वाले टाइल्स 24 घंटे में हटाने कहा है. गोरखपुर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह नगर भी है. सपा ने मामले को लेकर ट्वीट भी किया. उसने ट्वीट में लिखा कि दूषित सोच रखने वाले सत्तासीन नेताओं द्वारा राजनीतिक द्वेष की वजह से गोरखपुर रेलवे अस्पताल में शौचालय की दीवारों को सपा के रंग में रंगना लोकतंत्र को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना है. एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी के ध्वज के रंगों का अपमान घोर निंदनीय हैं. पार्टी ने रेलवे से इस मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल रंग बदलने की मांग की है.
रेलवे ने कहा, टाइल्स पुराने, कोई राजनीतिक मकसद नहीं
रेलवे ने एक ट्वीट कर स्पष्ट किया है कि यह टाइल्स पहले से लगी हैं. इसका कोई राजनीतिक मक़सद नहीं है. इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है. उसका कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत गोरखपुर रेलवे हॉस्पिटल के टॉयलेट में लगे यह टाइल्स वर्षों पुराने हैं. इन टाइल्स को लगाने का उद्देश्य बेहतर साफ सफाई सुनिश्चित करना है. इसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई भी संबंध नहीं है. आइये साथ मिलकर स्वच्छ भारत मिशन में सहयोग करें.
मांग नहीं मानी तो प्रदर्शन करेंगे
सपा के नेता और कार्यकर्ता गुरुवार को गोरखपुर कार्यालय में भी इकट्ठा हुए. उन्होंने इस मामले में रोष प्रकट करते हुए दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग रखी.सपा जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी ने कहा कि हम पार्टी के ध्वज का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि ये टॉयेलट 3-4 महीने पहले ही बना है और बुधवार को पहली बार पार्टी की जानकारी में यह मामला आय़ा. उन्होंने मांग नहीं मानने पर सड़क पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी.
राजनांदगांव / शौर्यपथ /जिले में खरीफ फसलों की कटाई जोरों-शोरो से चल रही है जिसके बाद गेंहूँ, चना, मसूर, सरसों आदि रबी फसलों की बोआई की जानी है जिसके लिए विभिन्न रबी फसलों की बोआई का कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिसमें जिले में संचालित जल सिंचाई परियोजनाओं में जल की उपलब्धता के आधार पर दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोनी किया जाना है इस वर्ष जल सिंचाई परियोजना के माध्यम से केवल दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिये सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जायेगा ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसानों को परियोजना से सिंचाई उपलब्ध नहीं किया जाना है क्योंकि ग्रीष्मकालीन धान में अत्यधिक सिंचाई जल एवं वातावरण में विपरित प्रभाव पड़ता है। वहीं ग्रीष्मकालीन धान उत्पादन लेने में लगने वाले सिंचाई जल की मात्रा से दोगुने दलहनी एवं तिलहनी फसलों की सिंचाई कर कम लागत में अधिक उत्पादन एवं लाभ प्राप्त किया जा सकता है। किसान ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहनी फसलें जैसे- चना, तिवड़ा, मटर, उड़द, मूंग, कुल्थी तथा तिलहनी फसलें जैसे- अलसी, सुर्यमुखी, कुसुम, सरसों एवं अनाज वाली फसलों में मक्का फसल का आसानी से सफलता पूर्वक उत्पादन ले सकते है।
जिले में संचालित विभिन्न मध्यम सिंचाई परियोजनावार- रूसे जलाशय परियोजना, पिपरिया जलाशय, मोंगरा जलाशय, सूखानाला जलाशय, घुमरिया नाला बैराज के माध्यम से कुल रकबा 3020 हेक्टेयर में रबी दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए सिंचाई जल दिये जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसी प्रकार लघु सिंचाई परियोजना से 1000 हेक्टेयर रकबा में सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाना है।
धान के 1 किलो चावल उत्पादन के लिए 500 लीटर सिंचाई जल की आवश्यकता होती है जो किसी भी फसल में लगने वाली जल मांग की तुलना में बहुत ही अधिक है ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसान ज्यादातर नलकूप के माध्यम से सिंचाई करते है जिससे भू-जलस्तर में गिरावट होने से जल निस्तारी आपूर्ति की समस्या निर्मित हो सकती है। आगामी दिनों में भू-जलस्तर में गिरावट होने पर ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसानों की नलकूप विद्युत कटौती भी की जा सकती है।
रबी 2020-21 में विभिन्न फसलों की बीज मांग की गई है जिसमें दलहन फसल में 10980 क्विंटल तथा तिलहनी फसलों में 980 क्विंटल की बीज मांग की गई है जिनमें से गेंहूँ 986 क्विंटल, चना 2805 क्विंटल तथा अन्य फसलें 100 क्विंटल बीज सहकारी समितियों में भण्डारित की गई है साथ ही दलहनी, तिलहनी फसलों के क्षेत्र विस्तार के लिए कृषि विभाग में संचालित योजनाओं के तहत प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। किसानों से आग्रह है कि ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य दलहनी, तिलहनी एवं मक्का फसल की बोनी करें।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले में धान फसल की कटाई प्रारंभ हो चुकी है, जिन क्षेत्रों में धान के बाद रबी फसल लिया जाता है वहाँ किसान धान कटाई के बाद खेत में पड़े पराली को जला देते है। इसके संबंध में किसानों को भ्रम है कि पराली जलाने के बाद अवशेष (राख) से खेत को खाद मिलेगा तथा खेत साफ हो जाएगा, लेकिन यह सोचना गलत है, क्योंकि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता तथा लाभदायक कीट भी खत्म हो जाती है। साथ ही वायु प्रदुषण का कारण बनती है जिससे मनुष्य, पशु पंक्षी सभी को विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी होती है जिसका उदाहरण -दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे शहरों में कुछ वर्षो से देखने को मिल रहा है।
धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान -
एक टन धान पराली जलाने से हवा में 3 किलो ग्राम कार्बन, 513 किलो ग्राम कार्बन डाई-आक्साईड, 92 किलो ग्राम कार्बन मोनो आक्साईड तथा 250 किलो ग्राम राख घुल जाती है। धान पराली जलाने से वायु प्रदुषित होने से आँखो में जलन एवं सांस संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है इस कारण भूमि में 80 प्रतिशत तक नाईट्रोजन, सल्फर एवं 20 प्रतिशत अन्य पोषक तत्व की कमी आ रही है। मित्र कीट की मृत्यु होने से नई-नई बीमारियाँ उत्पन्न होती है। एक टन धान पराली जले से 5.5 किलो ग्राम नाईट्रोजन, 2 किलो ग्राम फास्फोरस और 1.2 किलो ग्राम सल्फर जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। पशुओं के लिए वर्ष भर चारा आपूर्ति की समस्या बन जाती है।
फसल अवशेष/पराली/नरवाई जलाने पर आर्थिक दंड -
आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा वायु (प्रदुषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19(5) के अंतर्गत फसल अपशिष्ट को जलाया जाना प्रतिबंधित किया गया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के तहत खेती में कृषि अवशेषों को जलाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है जिसके तहत पराली जलाने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक दंड के रूप में 2 एकड़ से कम खेत पर 2500 रूपए, 2 से 5 एकड़ खेत पर 5000 रूपए तथा 5 एकड़ से अधिक पर 15000 रूपए जुर्माना लगाया जाएगा।
पराली का निर्मित गौठान में दान -
जिले में सुराजी गांव योजना के तहत गौठान निर्मित किए गए है जिसमें धान पराली का दान करें, ताकि गौठान में वर्षभर पशुओं के लिए चारा आपूर्ति बनी रहें। पैरादान करने के लिए संबंधित गौठान समिति/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।
पराली का प्रबंधन -
स्टा मल्चर मशीन की सहायता से पराली को गठ्ठे में एक कर उपयोग कर सकते है। वेस्ट डी-कम्पोजर के 200 लीटर प्रति एकड़ घोल को फसल कटाई उपरांत खेतो में पड़े अवशेषों के उपर छिड़काव कर सड़ा सकते है। जिससे खेतों में ही पोषक तत्व प्रबंधन किया जा सकता है। वेस्ट डी-कम्पोजर बनाने के लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो ग्राम गुड़ मिलाकर वेस्ट डी-कम्पोजर का 20 ग्राम का घोल डालकर 6 से 7 दिन के लिए ढककर रख देते है। प्रतिदिन दो बार डंडे से उसे अच्छी तरह मिलाना चाहिए। धान के पराली का यूरिया से उपचार करके पशु चारे के रूप में उपयोग कर सकते है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / बड़े शहरों के शिक्षण विधि के तर्ज पर विद्यार्थियों को डिजिटल एजुकेशन देने के लिए राजनांदगांव जिला के मोहला ब्लॉक के स्मार्ट टीवी से अध्यापन के नवाचार को विभाग द्वारा काफी सराहना मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ राज्य स्तर पर प्रकाशित होने वाले ई पत्रिका शिक्षा के गोठ में भी इसको विशेष रूप से प्रकाशित किया गया है। स्मार्ट क्लास द्वारा अध्यापन को बढ़ावा देने वाले सोमाटोला के शिक्षक श्री राजकुमार यादव के बारे में पत्रिका ने विशेष लेख प्रकाशित किया है। उल्लेखनीय है कि मोहला के शिक्षक श्री राजकुमार यादव जो शिक्षा के क्षेत्र में नये-नये नवाचार करने के लिए जाने जातेे है, वो इस नवाचार के प्रथम प्रेरणास्रोत है।
मोहला एबीईओ राजेन्द्र कुमार देवांगन ने जानकारी दिया कि शिक्षा के गोठ विभाग की एक राज्यस्तरीय ऑनलाइन ई पत्रिका है। जिसमें पढ़ाई में नवाचार करने वाले व बेहतर शिक्षण देने वाले शिक्षकों व स्कूलों के बारे में लेख प्रकाशित किया जाता है। यह पत्रिका पढ़ई तुहर दुआर पोर्टल में उपलब्ध है। इस ई पत्रिका के प्रथम संस्करण अक्टूबर 2020 के अंक में मोहला के शिक्षकों के नवाचार को प्रकाशित किया गया है। मोहला ब्लाक के शिक्षकों ने राज्य स्तरीय ई पत्रिका में उनके नवाचारी प्रयास को स्थान देने के लिए राज्य स्तर के विभागीय अधिकारीगण एवं संपादक मंडल के सदस्यगण श्री आरएन सिंह, डॉ. योगेश शिवहरे, एके सोमशेखर, प्रशांत कुमार पांडेय, डॉ. एम सुदीश, डॉ. विद्यावती चंद्राकर, सत्यराज अय्यर, डॉ. जयाभारती चंद्राकर सहित उप संचालक जनसंपर्क राजनांदगांव डॉ. उषा किरण बड़ाईक का आभार प्रदर्शित किया है। उल्लेखनीय है कि मोहला ब्लाक के कुल 272 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालााओं में स्मार्ट टीवी के जरिये अध्यापन का नवाचारी प्रयास शिक्षकों द्वारा स्वप्रेरणा से प्रेरित होकर किया जा रहा है, जिसमें 224 स्कूलों में स्मार्ट टीवी लगाने का कार्य शिक्षकों द्वारा स्वयं के व्यय एवं जनसहयोग से पूर्ण किया जा चुका है। ऐसे नवाचार के संबंध में विभागीय ई पत्रिका में लेख प्रकाशित होने से मोहला ब्लॉक के शिक्षकों का उत्साह और बढ़ा है तथा अन्य ब्लॉक के शिक्षक भी प्रेरित होकर इसका अनुसरण कर रहे है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / ऊर्जा मंत्रालय, भारत शासन के अतिरिक्त सचिव एवं केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी आशीष उपाध्याय ने आज आकांक्षी जिला राजनांदगांव में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती तनुजा सलाम एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी आशीष उपाध्याय ने कहा कि आकांक्षी जिला राजनांदगांव में नीति आयोग द्वारा निर्धारित सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं अन्य संकेतको पर अच्छा कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुपोषण दर में कमी आई है। उन्होंने संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए भी साफ्टवेयर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को ट्रेक करने के लिए कहा। ताकि इसके आधार पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों में दी जा रही सुविधाओं एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने जिले में मृदा परीक्षण की संख्या बढ़ाने के लिए भी कहा।
कलेक्टर वर्मा ने उन्हें बताया कि स्वास्थ्य, पोषण, अधोसंरचना, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेश एवं कौशल विकास के महत्वपूर्ण संकेतक पर जिले में अच्छा कार्य किया जा रहा है। कोविड-19 के दौरान टेक होम राशन भी हितग्राहियों के घरों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जो रोड स्वीकृत हुए हैं उनमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रोड निर्माण में कुछ दिक्कते हुई है। कोरोना की वजह से भी कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन अब कार्यों में गति लाते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। इसके लिए फेस-3 की राशि भी स्वीकृत हुई है। जिले में 1698 ग्राम है। जिनमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों में कनेक्टीविटी है। मानपुर, मोहला के दूरस्थ ग्रामों में कुछ स्थानों में कनेक्टीविटी के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी के लिए कार्य किया जा रहा है। कोविड-19 की रोकथाम के लिए भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती रेणु प्रकाश ने कहा कि कुपोषण दर में कमी आई है। सुपोषण को बढ़ावा देने के लिए समाज से सहयोग लेते हुए सुपोषण पात्र जैसी योजना आरंभ कर सकते हैं। लीड बैंक प्रबंधक श्री अजय त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्याति योजना के तहत दिए गए लक्ष्य 9669 के विरूद्ध 10 हजार हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इस अवसर पर नीति आयोग के फेलो सुश्री ज्योति सिंह ने प्रजेन्टेशन के माध्यम से नीति आयोग के संकेतक पर जिले की प्रगति की जानकारी दी। इस अवसर पर उप संचालक कृषि जीएस धु्रर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम, सहायक संचालक कौशल विकास नितिन हिरवानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुंबई / एजेंसी / कोरोना वायरस संक्रमण महामारी ने जहां लोगों की रोजी-रोटी पर असर डाला है, वहीं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाला है. छोटे बच्चे भीड़ या अंजान से डरने वाले फोबिया यानी भय का शिकार हो रहे हैं तो बड़े बच्चों में तनाव, चिंता और घबराहट की शिकायतें देखने को मिल रही हैं. ये चिंता की बात इसलिए है क्यूँकि इनमें से कई बच्चों को अस्पतालों में डॉक्टर, काउंसलर और दवा की ज़रूरत पड़ रही है.
मुंबई निवासी नायोमी कोठारी स्पीच एंड लैंग्विज थेरपिस्ट हैं. इनका बेटा एक साल का हो चुका है लेकिन पिछले पांच-छह महीने से घर से बाहर ना निकलने के कारण अनजान चेहरे या भीड़ से डर रहा है. इस डर या फोबिया को ‘आगोराफोबिया'(Agoraphobia) कहते हैं. कोठारी कहती हैं, "हम घर के अंदर पाँच महीने से बंद थे. बाबा कहीं नहीं गया था, गार्डन पब्लिक स्पेसेस भी बंद थे, पाँच महीने के बाद जब हम वैक्सिनेशन के लिए डॉक्टर वोरा के पास गए तो बाबा इतना रोया कि आँख बड़े-बड़े हो गए. लेफ़्ट राइट देखने लगा बाहर क्या है? क्या होता है?"
इस परेशानी को देखकर डॉक्टर परेशान थे कि आखिर एक साल का बच्चा इतना क्यों रो रहा है? SRCC चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पीडीट्यट्रिशन डॉ. अमीश वोरा ने कहा, "हमें लगा बारह महीने का बच्चा इतना क्यूँ डर रहा है? मैंने बोला 15 दिन बाद फिर आएँ. 15 दिन के बाद भी वही हालत थी...फिर समझ आया कि ये बच्चा सोशल सोशल आयसोलेशन की वजह से रो रहा है. पिछले छह महीने में वो किसी को मिला नहीं और घर से बाहर कभी निकला नहीं है. छह महीने में बच्चों में जो ग्रोथ होना चाहिए, वो नहीं हो सका लेकिन इस बच्चे को आगोराफोबिया हुआ था. माँ भी थेरपिस्ट हैं तो बच्चे का पूरा ट्रीटमेंट तुरंत मिल गया."
बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, NIMHANS में रोज़ाना क़रीब 40 बच्चे मानसिक इलाज के लिए आ रहे हैं. इनके अलावा 35 बच्चों की फ़ोन पर काउन्सलिंग हो रही है. NIMHANS में डिपार्टमेंन्ट ऑफ चाइल्ड एंड एडोलोसेन्ट सायकिट्रिक के हेड डॉ. जॉन विजय सागर ने बताया, "हमारे अस्पताल में रोज़ाना 35-40 बच्चे जो 6 साल से लेकर 16-17 साल के हैं, वो आ रहे हैं और क़रीब 30-35 बच्चों की टेलीफोनिक काउन्सलिंग हो रही है. पेरेंट्स को देखना पड़ेगा कि बच्चों के लिए रूटीन अच्छा प्लान करें...टाइम टाइम पर कुछ ऐक्टिविटीज़ करवाएँ, और बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करें."
कोरोना काल में हमारे बच्चे घरों में क़ैद महसूस कर रहे हैं और कम बोलचाल के साथ-साथ उनके खेलकूद का दायरा भी सिमट चुका है. इस वजह से कई बच्चे मानसिक रूप से बीमार हुए हैं. कई बच्चे तो घरों में क़ैदियों जैसा महसूस कर रहे हैं. घर से बाहर जाने नहीं मिलता..थोड़ा सा बाहर निकले तो मास्क ग्लव्ज़ की कैद में रहना पड़ता है. ये बच्चे अपने फ़्रेंड्स से भी नहीं मिल पा रहे हैं. उनकी पढ़ाई भी ऑनलाइन चल रही है. काउंसलिंग के लिए कई बच्चों ने कहा कि उन्हें घर में अच्छा नहीं लगता, वो बोर फ़ील करते हैं.
डॉक्टर बताते हैं प्री-कोविड की तुलना में बच्चों में मानसिक तनाव के मामले दोगुने हुए हैं. मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल के कंसल्टेंट साइकिट्रिस्ट डॉ. केदार तिलवे कहते हैं, "प्री कोविड से तुलना करें तो अभी बच्चों में तनाव के मामले दोगुने हुए हैं. शिकाएतें भी अलग देखी जा रही हैं, पहले Attention deficit hyperactivity disorder , Scholastic backwardness, बिहेव्यरल इशू की वजह से बच्चे आते थे पर अभी ज़्यादा करके, उदासी, घबराहट, तनाव, चिंता, शारीरिक लक्षण के कारण स्ट्रेस ये कम्प्लेंट की संख्या बढ़ गयी है."
वॉकहार्ट हॉस्पिटल के कंसल्टेंट नियोनैटोलॉजी डॉ. समीर शेख कहते हैं, "अभिभावकों का जॉब लॉस, पेरेंट्स का स्ट्रेस, फ़ाइनैन्स का स्ट्रेस, के देखकर बच्चे भी समझ रहे हैं कि घर के हालात पहले जैसे नहीं हैं. ये सब उनपर भी इम्पैक्ट करता है, उनको समझ आ रहा है कि घर के हालात पहले जैसे नहीं हैं. और फिर बच्चों पर स्ट्रेस बढ़ता है, इस वजह से हमारे पास अलग-अलग तरह की बीमारी का रूप लेकर आते हैं."
बच्चों में मानसिक बीमारी के मामले मेट्रो शहरों के अलावा छोटे शहरों से भी रिपोर्ट हो रहे हैं. एक्स्पर्ट्स के मुताबिक़ फ़्रंटलाइन वर्कर्स जैसे कि पुलिस, डॉक्टर,नर्स, सफ़ाईकर्मी के बच्चों में ज़्यादातर ऐसी मानसिक तनाव की शिकायत देखी जा रही हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से वरवर राव की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर जल्द विचार करने के लिए कहा है. SC ने कहा कि उनकी जमानत याचिका पर 17 सितंबर से सुनवाई नहीं हुई है. इसके साथ की शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के CJ से अनुरोध किया है कि वह उचित पीठ के समक्ष अपील को सूचीबद्ध करे. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की चिकित्सा स्थिति किसी विशेष चरित्र और समय की ओर ध्यान देने की मांग करती है. यह मामला एक कैदी/दोषी/अभियुक्त के मानवाधिकारों के बारे में सवाल उठाता है.
दरअसल, याचिकाकर्ता की ओर से इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वरवर राव को कई बीमारियां है और उनको कोरोना होने के बाद तलोजा जेल से अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था. इसके बाद फिर उनको वापस जेल भेज दिया गया है. वरवर की मेडिकल स्थिति देखते हुए जमानत दी जाए क्योंकि हाईकोर्ट में सितंबर के बाद सुनवाई नहीं हुई है.
पी वरवर राव की पत्नी ने जमानत पर रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में उनकी पत्नी ने इस आधार पर तत्काल रिहाई की मांगी है कि उनकी लगातार हिरासत क्रूरता और अमानवीय व्यवहार होगी. इसके साथ ही भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन और उनकी गरिमा का उल्लंघन होगा.याचिका में कहा गया है कि वरवर को कई बीमारियां हैं और कोविड -19 महामारी के समय उनको जेल में रखना ठीक नहीं है.
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