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मनोरंजन / शौर्यपथ / अभिषेक बच्चन की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘लूडो’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। रिलीज से पहले अभिषेक ने इंस्टाग्राम पर ‘लूडो’ से अपने किरदार की एक झलक दिखाई है। इसमें वह काफी खूंखार लग रहे हैं। फिल्म में वह ‘बिट्टू’ नाम का किरदार निभा रहे हैं।
फोटो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “बिट्टू, मैं जो किरदार लूडो में निभा रहा हूं वह बेहद क्लासिक है। यह बाहर से कठोर और अंदर से नरम दिल वाला किरदार है। यह किरदार निभाना काफी चुनौती भरा था लेकिन उसके साथ ही काफी संतोषजनक भी। मैं आप सभी को इससे मिलवाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। ‘लूडो’ 12 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।"
अभिषेक का यह लुक फैन्स और दोस्तों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। फराह खान लिखा है, “आप पर यह टपोरी लुक हमेशा अच्छा लगता है, लव योर ईगो लुक”। ऋतिक रोशन ने लिखा है, “अच्छे लग रहे हो”। बिपाशा बसु ने भी अभिषेक को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे ट्रेलर बहुत पसंद आया, ऑल द बेस्ट”। इसके साथ ही एक फैन ने लिखा है, “हम आपके इस अवतार का इंतजार कर रहे हैं”। एक अन्य फैन ने लिखा है, “फिल्म को और देखने के लिए हम सुपर-एक्साइटेड हैं”।
फिल्म की कास्ट की बाते करें तो यह काफी दमदार है। इसमें अभिषेक बच्चन, राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा, फातिमा सना शेख, आदित्य रॉय कपूर, रोहित सराफ और पंकज त्रिपाठी मुख्य किरदार में हैं। ‘लूडो’ फिल्म दर्शकों को एक मजेदार जर्नी पर लेकर जाने वाली है।
कहा जा रहा था कि यह फिल्म ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ का सीक्वल है, लेकिन इस बात को खारिज करते हुए अनुराग बसु ने कहा था कि ऐसा कुछ नहीं। यह अपने आप में एक एक्शन कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जिसकी स्टोरी एकदम अलग है।
मनोरंजन / शौर्यपथ /बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर ने हाल ही में कोरोना को मात दी है। अपने कोरोना टाइम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव होने की बात को स्वीकार करने में उन्हें छह से आठ घंटे लग गए थे। इस दौरान उन्होंने अपनी बहन अंशुला का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि अंशुला ने उनका आइसोलेशन इस प्रकार तैयार किया जैसा वह उनका कमरा हो।
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अर्जुन कपूर ने कोरोना पॉजिटिव आने के बाद के भावों को बताया है। उन्होंने कहा, "कोरोना रिजल्ट मिलने के कुछ घंटों बाद तक मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है।” अर्जुन बताते हैं कि डॉक्टर से बात करने के बाद खुद के संक्रमित होने की बात को स्वीकार करने में उन्हें छह से आठ घंटे लग गए थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें केवल हल्के लक्षण ही महसूस हो रहे थे।
इस दौरान उनकी बहन अंशुला उनके साथ रहीं। उन्होंने बताया कि वह काफी भाग्यशाली हैं जो इस पूरे वक्त अंशुला उनके साथ थीं। वह अंशुला ही थीं, जिन्होंने उन्हें घर पर भी आइसोलेशन में रहने में मदद की। कोविड-19 के दौरान सकारात्मक रहने पर अर्जुन ने कहा कि वह नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज करने की कोशिश करते थे।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह अपने बर्तन और वॉशरूम खुद साफ करते थे। वह डिस्पोजेबल प्लेट्स में खाना खाते थे। अपने अनुभवों को शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि अभी भी वह शारीरिक तौर पर पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं। कोरोना से उनकी इम्युनिटी काफी कम हो गई है।
श्रीनगर/ एजेंसी / राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आज (बुधवार) जम्मू-कश्मीर में करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की. यह रेड टेरर फंडिंग के शक को लेकर की गई. NIA ने जिन जगहों पर छापा मारा, उनमें NGO, सामाजिक कार्यकर्ता का परिसर और श्रीनगर के स्थानीय समाचार पत्र का दफ्तर शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NIA का कहना है कि इन लोगों के पास अनजान लोगों से पैसा आ रहा था, जिसे आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया था. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने NIA द्वारा की गई छापेमारी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है.
महबूबा मुफ्ती ने आज सुबह ट्वीट किया, 'NIA ने श्रीनगर में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और ग्रेटर कश्मीर के कार्यालय पर छापामारी की. ये अभिव्यक्ति की आजादी और असंतोष पर भारत सरकार की दोषपूर्ण कार्रवाई का एक और उदाहरण है. अफसोस की बात है कि NIA उन लोगों को डराने और धमकाने के लिए BJP की पालतू एजेंसी बन गई है, जो लाइन में लगने से इनकार करते हैं.'
बता दें कि महबूबा मुफ्ती द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान पर बवाल हो रहा है. मुफ्ती ने बीते शुक्रवार कहा था कि उन्हें तब तक चुनाव लड़ने या राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, जब तक पिछले साल पांच अगस्त को लागू किए गए संवैधानिक बदलाव वापस नहीं लिए जाते. उन्होंने कहा था कि वह तिरंगे को तभी उठाएंगी, जब पूर्ववर्ती राज्य के अलग ध्वज को बहाल कर दिया जाएगा.
जिसके बाद महबूबा मुफ्ती के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन होने लगे. रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने PDP कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को कुछ देर के लिए हिरासत में ले लिया. प्रदर्शनकारी PDP की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए हालिया बयानों का विरोध कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर एक बोर्ड पर पेंट भी फेंका, जिस पर मुफ्ती की तस्वीर बनी हुई थी.
महबूबा मुफ्ती के बयान पर नाराजगी जताते हुए गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री को यदि भारत और उसके कानून पसंद नहीं हैं तो उन्हें सपरिवार पाकिस्तान चले जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'महबूबा मुफ्ती पिछले दो दिन से अनर्गल बयान दे रही हैं. उन्हें हवाई टिकट खरीदने चाहिए और अपने परिवार के साथ कराची चले जाना चाहिए. सभी के लिए यह ठीक होगा. अगर वह चाहें तो करजन तालुका की जनता उन्हें हवाई टिकट खरीदने के लिए पैसे भेज देगी.'
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बेगूसराय बिहार में आज (बुधवार) पहले चरण के लिए वोट डाले जा रहे हैं. 71 सीटों पर 1066 उम्मीदवार मैदान में हैं. सभी पोलिंग बूथों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. निर्वाचन अधिकारी कोरोनावायरस संकट के मद्देनजर एहतियात भी बरत रहे हैं. वहीं दूसरी ओर इस सियासी दंगल में पाला बदलने का खेल भी जारी है. बेगूसराय में बीजेपी के बागी आशुतोष ने नींद उड़ा रखी है. वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं भारतीय जनता पार्टी में 20 वर्षों का सेवा दिया हूं लेकिन जब 2019 में सांसद के रूप में गिरिराज जी आए, तो पूरे बेगूसराय का मतदाता बगैर किसी सवाल के उनको 7.5 लाख वोट से जिताने का काम किया.'
उन्होंने आगे कहा, 'यहां पिछड़े नेतृत्व की शून्यता थी. हमने गिरिराज दा को भी कहा कि इस समाज का एक बेटा हो लेकिन उन्होंने राजनीति को रिश्तेदारी में बदल दिया. रिश्तेदारी में बदलकर टिकट जिनको दिया, उससे पूरा समाज आहत है. भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री ने यहां के मतदाताओं के साथ छल किया है और छल का परिणाम उनको 10 तारीख के रूप में दिखाई पड़ेगा.'
उन्होंने कहा, 'जिला महामंत्री होने के नाते मैंने उनके (गिरिराज सिंह) समक्ष इस बात को रखा था. आदरणीय सांसद ने प्रदेश नेतृत्व को भी गुमराह किया है. वो नीतीश जी की सरकार नहीं देखना चाहते थे. वो साजिश करते हैं. इस साजिश के विरुद्ध जिला के महामंत्री ने आवाज उठाई है. उन्होंने टिकट का जो बंटवारा किया, वो जनता के जनादेश के विरुद्ध किया है. उनको तो आना चाहिए. वैसे भी वो जनता-कार्यकर्ता से मिलते नहीं हैं. कहते हैं कि हमारा जनता से सीधा कॉन्टैक्ट है.'
आशुतोष ने कहा, 'वो गरीब के नेता तो हैं नहीं. वो गरीब के बीच में कहां जाते हैं. वो दिल्ली में होम क्वारंटाइन हो गए. वो हिंदू हृदय सम्राट हैं और जो हिंदू होगा, उसके सम्राट हैं और यहां सब तो हिंदू हैं नहीं, यहां तो सब गरीब हैं.'
पटना / एजेंसी / बिहार में बुधवार से विधानसभा चुनाव शुरू हो गए हैं. यहां पर आज पहले चरण की वोटिंग भी हो रही है. लेकिन बाकी चरणों के लिए चुनावी रैलियां भी जारी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बुधवार को यहां तीन जगहों पर रैलियां कर रहे हैं. सुबह में मिथिला क्षेत्र में पहुंचे हुए पीएम ने यहां पर अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर एक टिप्पणी की है, जिससे लोगों की नीतीश कुमार को लेकर एक पुरानी याद ताजा हो गई है. नीतीश कुमार ने कभी मंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी पर तंज कसा था, आज पीएम मोदी की यह टिप्पणी उसी तंज के अंडरटोन में थी.
पीएम ने कहा कि 'मिथिला में जन्म लेने वाली मां सीता आज अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण को देखकर बहुत खुश होंगी.' पीएम ने कहा कि 'सदियों की तपस्या के बाद, अब आखिरकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है. वो सियासी लोग जो बार-बार हमें तारीख पूछा करते थे, बहुत मजबूरी में वो भी तालियां बजा रहे हैं. यही बीजेपी, NDA की पहचान है- जो हम कहते हैं, वो हम करते हैं.'
बता दें कि नीतीश कुमार ने 2015 में बीजेपी पर ऐसा ही कुछ तंज कसा था. उस वक्त वो लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में थे. उन्होंने कहा था, 'बीजेपी और आरएसएस के लोग कहते रहते हैं- राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे.'
हालांकि, इस टिप्पणी के ठीक पहले ही पीएम मोदी ने नीतीश कुमार की अच्छी-खासी तारीफ की थी और उन्होने भावी मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि 'पिछले 15 सालों में नीतीश जी के नेतृत्व में बिहार ने अच्छी प्रगति की है.' उन्होंने बिहार के आर्थिक सुधार के लिए नीतीश कुमार को क्रेडिट भी दिया.
कुछ इसी तरह का मसला पिछले शुक्रवार को भी देखने को मिला था. पीएम ने सासाराम की रैली में जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जा देने वाली आर्टिकल 370 हटाने के केंद्र के फैसले का जिक्र करते हुए विपक्ष पर हमला किया था. उन्होंने इस फैसले का आलोचना करने वालों पर निशाना साधा लेकिन दिलचस्प है कि मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध खुद उस वक्त नीतीश कुमार ने किया था. यहां तक कि उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में इसका विरोध भी किया था. हालांकि, कानून बन जाने के बाद नीतीश और उनके सांसदों ने इसे अपना समर्थन दे दिया था.
बता दें कि इस बार फिर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड एक साथ चुनाव लड़े रहे हैं. पहले चरण में 71 सीटों पर वोटिंग हो रही है, इसमें से 35 सीटों पर जेडीयू ने और 29 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. एनडीए की सहयोगी रही चिराग पासवान की पार्टी इस बार गठबंधन से अलग हो गई है. चिराग ने अपने उम्मीदवार जेडीयू उम्मीदवारों के खिलाफ उतारे हैं, जिसके बाद ऐसी चर्चा उठी थी कि वो अलग हो जाने के बाद भी जेडीयू को गच्चा देते हुए बीजेपी की बैकडोर से मदद कर रहे हैं. हालांकि, बीजेपी ने इन दावों को बार-बार ठुकराया है और कहा है कि चिराग पासवान से उसका कोई लेना-देना नहीं है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बाहरी इलाके में अपराधियों ने एक डेंटल डॉक्टर को दिन दहाड़े अगवा कर लिया और रिहाई के बदले 10 करोड़ रुपये बिटक्वाइन्स के रूप में फिरौती की मांग की. इतना ही नहीं डॉक्टर का अपहरण भी नाटकीय अंदाज में हुआ. पांच अपहरणकर्ता बुर्के में आए थे. हैदराबाद से सटे रंगारेडी जिले के किस्मतपुर में डॉक्टर हुसैन एक डेंटल हॉस्पिटल में काम करते थे, वहीं से अपहरणकर्ताओं ने उन्हें अगवा कर लिया.
अपहरण के बाद डॉक्टर हुसैन को हैदराबाद ले जाया गया , जहां उन्हें अंधेरे कमरे में रखा गया. पुलिस के मुताबिक अपहरणकर्ता मराठी बोलते थे. बाद में उन अपहरणकर्ताओं ने डॉक्टर को चार अन्य लोगों को सौंप दिया जो बोलेरो में सवार थे. ये सभी बेंगलुरु या कर्नाटक के सटे इलाके शिमोगा जाने की बात कर रहे थे.
अपराधियों ने डॉक्टर हुसैन को इसलिए निशाना बनाया था क्योंकि हुसैन डेंटिस्ट के अलावा प्रॉपर्टी डीलिंग का भी काम करते हैं. किस्मतपुर में उनकी भी प्रॉपर्टी है. एक कार की निशानदेही पर पुलिस ने उन्हें अपहर्ताओं के चंगुल छुड़ाया. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर आंध्र प्रदेश क अनंतपुर में एक कार को चारों तरफ से घेर लिया. इस घटना में तीन अपराधी भागने में कामयाब रहे जबकि एक पुलिस के हत्थे चढ़ गया. कार में डेंटिस्ट हुसैन के हाथ-पैर बंधे हालत में मिले.
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / ट्विटर ने 18 अक्टूबर को अपने प्लेटफॉर्म पर लेह-लद्दाख की जियो टैग लोकेशन को जम्मू-कश्मीर, चीन में दिखाया था. जिसके बाद केंद्र सरकार के आईटी सचिव अजय साहनी ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी को इस मामले में कड़ी चेतावनी के साथ चिट्ठी लिखी थी. सरकार ने ट्विटर द्वारा भारत के नक्शे को गलत तरीके से दिखाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी. ट्विटर ने इस मुद्दे पर सरकार के समक्ष सफाई पेश की थी लेकिन अब इस मामले को देख रही समिति का कहना है कि ट्विटर की सफाई अपर्याप्त है.
पैनल की चीफ मीनाक्षी लेखी ने कहा कि समिति अपनी राय में इस बात पर एकमत है कि लद्दाख को चीन के हिस्से के रूप में दर्शाने वाले ट्विटर पर स्पष्टीकरण अपर्याप्त था. ट्विटर इंडिया के अधिकारियों ने आज समिति को बताया कि ट्विटर इस मुद्दे पर भारत की संवेदनशीलता का सम्मान करता है लेकिन ये नाकाफी है. ये सिर्फ संवेदनशीलता का सवाल नहीं है. ये भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है. लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखाना एक आपराधिक कृत्य है, इस अपराध के लिए 7 साल तक कैद हो सकती है.
आईटी सचिव अजय साहनी ने ट्विटर को दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया था कि लेह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है. लद्दाख और जम्मू-कश्मीर भारत के अभिन्न अंग हैं, जो भारत के संविधान द्वारा शासित हैं. साहनी ने ट्विटर को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल साइट को भारत के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ट्विटर द्वारा भारत की संप्रभुता और अखंडता के साथ किया गया अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह कानून का भी उल्लंघन होगा. आईटी सचिव ने पत्र में लिखा कि ऐसे कार्यों से न सिर्फ ट्विटर की साख गिरती है बल्कि सोशल साइट की तटस्थता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं.
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोरोना काल में आर्थिक विकास को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए अपनाई गई रणनीति के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। संकट के बावजूद प्रदेश के त्यौहारी बाजार में अच्छी रौनक दिख रही है। वाहन बाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले नवरात्रि की तुलना में इस बार की नवरात्रि में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्र के लोगों ने जमकर वाहनों की खरीदी की है। वर्ष 2019 में नवरात्र के दौरान जहां 417 एग्रीकल्चर ट्रेक्टर बिके थे, वहीं इस साल 679 ट्रेक्टरों की बिक्री हुई। इसी तरह कमर्शियल ट्रेक्टर पिछले साल 28 बिके थे, जबकि इस साल यह संख्या 35 रही। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में आ रही समृद्धि तथा किसानों में बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। इसी तरह मोटर कार की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछली नवरात्र को जहां 2426 मोटर कार लोगों ने खरीदी थीं, वहीं इस बार 2795 मोटर कारों की बिक्री हुई। यदि हार्वेस्टर की बात करें तो पिछले नवरात्रि में मात्र एक हार्वेस्टर की बिक्री हुई थी, जबकि इस नवरात्रि में 24 लोगों ने हार्वेस्टर की खरीदी की है। गांवों की तरह शहरी क्षेत्रों में भी लोगों में उत्साह और आत्मविश्वास का वातावरण बना हुआ है। कोरोनाकाल के बाद तेजी से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था संवर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की जेब में पैसा डालने इसे असर माना जा सकता है।
एक ओर जहां पूरे देश में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी का माहौल देखा जा सकता है वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कोरोनाकाल में लिए गए सकारात्मक और दूरदर्शी निर्णय का परिणाम उपलब्धियों के रुप में देश में सुर्खियां बटोर रहा है। किसानों के खाते में संकट के समय पैसा डालने, लॉकडाउन में उद्योग का संचालन सुचारू रखकर रोजगार के अवसर को बनाए रखने, मनरेगा के माध्यम से सर्वाधिक रोजगार देने जैसे अभिनव प्रयासों का ही यह असर है कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी रफतार से गतिमान रही। राज्य में मंदी का असर नहीं पड़ा। अनलॉक होने के बाद जब बाजार खुले तो व्यवसाय में भी रौनक आई और त्योहार का सीजन आने के साथ खरीददारी भी बढ़ गई। इस नवरात्रि में गत नवरात्रि की अपेक्षा अधिक संख्या में कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर, कार और हार्वेस्टर की बिक्री फिर से देखा जा सकता है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 पर चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया नया कृषि कानून किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ देने वाला है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार की दुहाई देती है। जब एक राष्ट्र-एक बाजार है, तो कीमत भी एक होनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कीमत की व्यवस्था लागू कर दें, तो हमंे कानून में संशोधन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तीन नये कानून बनाकर केन्द्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। केन्द्र सरकार का कानून किसानों को ठगने वाला कानून है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से किसानों के मन में संशय पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इस बात की गारंटी देनी चाहिए कि किसानों के उपज को कोई भी समर्थन मूल्य से नीचे नहीं खरीदेगा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों की खामियों की जमकर आलोचना की और कहा कि हम अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, छत्तीसगढ़ के व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग भोले-भाले है। लोग ठगाए मत, इसलिए हम मंडी विधेयक में संशोधन कर किसानों और आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा की व्यवस्था कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा कोरोना संक्रमण काल के दौरान 20 लाख करोड़ रूपए के राहत पैकेज का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विशेष पैकेज से किसी को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और शांता कुमार कमेटी सिफारिशों का उल्लेख किया और केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हितों की अनदेखी के मामले को सदन में बड़े ही तार्किक ढंग से उठाए। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे सदन में खामोशी छायी रही। सदन के सदस्य, किसानों के हित में मुख्यमंत्री के तर्काें को बड़े ही गौर से सुनते नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ की बात हो, किसानों की बात हो, तो दल नहीं, दिल देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से छत्तीसगढ़ के किसानों को लाभ देने के मामले में केन्द्र सरकार द्वारा अड़ंगा लगाया जा रहा है। केन्द्र सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में जो तीन नए कानून बनाए है, उसकी जरूरत क्या थी? क्या किसी किसान संगठन ने या किसी राजनीतिक दल ने कानून में बदलाव की मांग की थी? कोरोना संकट काल में जब देश के लोग समस्याओं से जूझ रहे थे, ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार ने किसानों के हितों की परवाह न करते हुए कृषि के क्षेत्र में तीन नए अध्यादेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि इसके चलते केन्द्र सरकार के एक सहयोगी दल की मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। इन्ही तीनों कानूनों के चलते एनडीए के सहयोगी दल नाराज है। एनडीए के कई केन्द्रीय मंत्री भी इस कानून से सहमत नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार का कहना है कि कृषि के तीनों नए कानून, किसानों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम पूरे देश में फैलाया जा रहा है। इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। यह कानून पूंजीपतियों को लाभ देने वाला कानून है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 2006 से यह कानून लागू है। आज हालत यह है कि समर्थन मूल्य तो दूर की बात, बिहार में 1300 रूपए क्विंटल से अधिक मूल्य पर किसानों का धान खरीदने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इस कानून से बिहार के किसानों का कोई भला नहीं हुआ तो देश के किसानों का भला होने वाला नहीं है।
केन्द्र सरकार के नए कानून के तहत निजी मंडी खोलने की बात पर एतराज जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके जरिए सरकारी मंडियों को समाप्त करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून की वजह से धीरे-धीरे मंडियां खत्म हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चिटफंड कम्पनी जैसी व्यवस्था है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में चिटफंड कम्पनियों के कारनामों को भी एक-एक कर उजागर किया और कहा कि जिस तरीके से चिटफंड कम्पनियां लोगों को लालच देकर लूटती है। उसी तरह केन्द्र सरकार द्वारा पारित नए कानूनों के जरिए किसान और आम उपभोक्ता लूटे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि समर्थन मूल्य भारत सरकार घोषित करती है, तो किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की है। राज्य सरकारें एजेंसी के रूप में काम करती है। उन्होंने कहा कि जब हम छत्तीसगढ़ के किसानों का धान 2500 रूपए क्विंटल में खरीद रहे थे। भारत सरकार ने किसानों को बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कहा कि धान और गेहूं खरीदने पर यूपीए सरकार ने किसानों को बोनस दिया था। वर्तमान में केन्द्र में ऐसी सरकार है, जो किसानों को बोनस देने से रोकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से किसानों को बोनस देने की अनुमति के लिए हम कृषि मंत्री और खाद्य मंत्री के साथ दिल्ली गए थे। तत्कालीन केन्द्रीय खाद्य मं़त्री से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ और यहां के किसानों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए बोनस दिए जाने की मांग की थी। परंतु हमारी इस मांग को केन्द्र सरकार ने ठुकरा दिया था। मजबूरन हमें किसानों का धान 2500 रूपए प्रति क्विंटल के बजाए समर्थन मूल्य पर खरीदना पड़ा। किसानों के हितों की रक्षा और उनके उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की है। इसका लाभ हम राज्य के धान उत्पादक किसानों के साथ-साथ गन्ना और मक्का उपजाने वाले किसानों को भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर अमल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते छह माह से जीएसटी का पैसा केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है। केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ को 4000 करोड़ रूपए लेना है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अत्यावश्यक वस्तु विधेयक में केन्द्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव को आम लोगों के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि यह विपणन कानून है। इसमें बदलाव पंूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इससे अत्यावश्यक वस्तुओं में जैसे खाद्यान्न, तेल, आलू, प्याज आदि के भंडारण की सीमा को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा उठाकर कारपोरेट और बड़े-बड़े व्यापारी मन माफिक कीमत पर किसानों की उपज खरीदकर जमाखोरी करेंगे। पूरा बाजार उनके कब्जे में हो जाएगा और मनमाने दाम पर सामान बचेंगे। उन्होंने कहा कि इसका दुष्परिणाम अभी से देखने को मिलने लगा है। आलू और प्याज की कीमतें कई गुना बढ़ गई है। यह कानून आम उपभोक्ताओं के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्षी सदस्यों द्वारा चर्चा के दौरान धान खरीदी के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने चावल उपार्जन की जो लिमिट इस साल तय की है। वह भी भेदभाव पूर्ण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से छोटे राज्यों की भी लिमिट छत्तीसगढ़ से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि धान से एथेनॉल बनाने के उनके प्रस्ताव का शुरूआती दौर में लोगों ने मजाक उठाया था। अब तो केन्द्र सरकार ने हमारे प्रस्ताव को लाभकारी बताते हुए मान्य कर लिया है। धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति भी दे दी है और इसका विधिवत दर 54.87 रूपए घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में धान की अतिशेष मात्रा तथा गन्ना से एथेनॉल बनाने के लिए राज्य सरकार ने एमओयू भी कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी एक साल में राज्य में एथेनॉल का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों को उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार इसके जरिए बोनस को समाप्त करने के बाद अब पीडीएस सिस्टम को भी बंद करने की जुगत में लगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का एक ऐसा राज्य है, जहां का पीडीएस सिस्टम पूरे देश के लिए मॉडल है। हमारे राज्य में पीडीएस के 98 प्रतिशत उपभोक्ताओं का राशनकार्ड उनके आधार कार्ड से लिंक है। उन्होंने कहा कि शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट के एकदम उलट छत्तीसगढ़ राज्य में 80 प्रतिशत से अधिक किसान समर्थन मूल्य से लाभान्वित होते हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार के कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग कानून को भी किसानों के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए नया कानून लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में खड़ी है और उनके हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सर्व सम्मति से मंडी विधेयक संशोधन विधेयक 2020 को पारित करने का आग्रह किया।
मनोरंजन / शौर्यपथ / कॉमेडी, ड्रामा और डांस का कॉम्बिनेशन एक ही जगह बहुत कम देखने को मिलता है। टीवी पर इस बार आपको यह तीनों चीजें एक साथ नजर आने वाली हैं। कैसे? दरअसल, कॉमेडी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्माÓ की पूरी कास्ट डांस रिएलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसरÓ के सेट पर नजर आने वाली है।
पिंकविला के मुताबिक, 'तारक मेहता का उल्टा चश्माÓ की कास्ट स्पेशल गेस्ट के रूप में डांस रिएलिटी शो में आएगी। आने वाले एपिसोड्स में आप देखेंगे कि 'इंडियाज बेस्ट डांसरÓ शो में डांस के अलावा हंसी-मजाक का भी तड़का मिलेगा। मलाइका अरोड़ा, टेरेंस लूईस और गीता कपूर संग कास्ट मस्ती करती नजर आएगी। होस्ट हर्ष लिंबाचिया और भारती सिंह भी कई फन मोमेंट शेयर करेंगे। उम्मीद है कि यह अभी तक का सबसे ज्यादा एंटरटेनिंग अपिसोड होगा।
मालूम हो कि 'तारक मेहता का उल्टा चश्माÓ के तीन हजार एपिसोड पूरे हो चुके हैं। दिलीप जोशी, इस शो में 'जेठालालÓ का किरदार निभाते हैं। इनकी सोशल मीडिया पर भी तगड़ी फैन फॉलोइंग है। दर्शकों के बीच 'जेठालालÓ का किरदार काफी लोकप्रिय है। 'दयाबेनÓ संग वह एक खट्टा-मीठा रिश्ता शेयर करते हैं, लेकिन लंबे समय से इस शो से 'दयाबेनÓ गायब हैं। हालांकि, अब इनके वापस आने की चर्चा हो रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
