August 03, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    भिलाई नगर / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम की टीम ने वार्ड 12 कांट्रेक्टर काॅलोनी में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। निर्माणाधीन कमरे को तोड़ कर बिजली के खंभे को कब्जा मुक्त कराया गया। कब्जाधारी व्यक्ति को अपने पट्टे के अतिरिक्त जमीन के अलावा निगम और शासकीय संपत्ति पर किसी भी प्रकार से कब्जा नहीं करने की हिदायत दी गई। कब्जा की शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। जोन -1 के सहायक राजस्व अधिकारी दुबे ने बताया कि कांट्रेक्टर काॅलोनी चौक के पास एक व्यक्ति पट्टे की जमीन के अलावा अतिरिक्त जमीन पर कमरा बना रहा था। जिसकी शिकायत वार्ड के लोगों ने जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि से की थी।
    जोन आयुक्त के निर्देशानुसार जोन -1 के राजस्व विभाग की टीम ने बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई की। कब्जाधारी व्यक्ति ने अपने पट्टे की जमीन के अलावा खाली जमीन पर भी कब्जा करने की नीयत से नींव की खुदाई करवाकर छड़ से काॅलम खड़े कर लिया था। बिजली के पोल को भी अपने कब्जे में ले लिया था। इस वजह से चौक पर अंधा मोड़ बन गया था। वहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। जिसे तोड़कर बिजली के पोल को कब्जा मुक्त कराया गया। तोड़फोड़ टीम में जोन-1 राजस्व विभाग के राजेश गुप्ता, कन्हैया, मंगल, राजेन्द्र शामिल थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए इस बार 35वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा सोशल डिसटेंसिंग का पालन करते हुए मनाया जाएगा । 25 अगस्त से 8 सितंबर तक जिला व ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्रदान के प्रति जागरुक किया जाएगा। इस वर्ष राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा-2020 का थीम – “हॉस्पिटल कॉनियल रिट्रेवल प्रोग्राम” पर आधारित है। जिला अस्पताल में 25 अगस्त को सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल, सिविल सर्जन डॉ रवि तिवारी सहित ब्लॉक स्तर के नेत्र रोग अधिकारी इस बार शाम 3 से 4 बजे के बीच वेबीनार के माध्यम से इस पखवाड़े का शुभारंभ करेंगे। देखने का अधिकार मानव के मूल अधिकारों में से एक है। अत: यह आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति अनावश्यक दृष्टिहीन न होने पाए और यदि है तो दृष्टिहीन न रहने पाए। इसी उद्देश्य को लेकर दृष्टिविहीनता कार्यक्रम के तहत बच्चों तथा प्रजनन आयु समूह में आंखें की कार्निया, पुतली से नेत्रहीनता की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा प्रति वर्ष मनाया जाता है।
    जिला अंधत्व नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. निधी ग्वारे ने बताया कार्नियल अन्धेपन की समस्याओं को दूर करने के लिए हॉस्पिटल कॉनियल रिट्रेबल प्रोग्राम के अंतर्गत ऐसे मरीज जिनका अस्पताल में मृत्यु होने पर परिजनों को नेत्र दान के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मृत शरीर जिनकी उम्र 5 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम की अवस्था में मृत्यु होने पर 4-6 घंटे के भीतर कॉनियल निकालने की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। वहीं 24 घंटे के भीतर जरुरतमंद को ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। केवल ऐसे मृत शरीर से ही नेत्रदान लिया जा सकता हैं जिन्हें गंभीर बीमारी कैंसर, हेपेटाइटीस व एचआईवी एड्स जैसी रोग से ग्रसित नहीं होनी चाहिए।
    राष्ट्रीय अंधत्वव नियंत्रण के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया, कार्नियल अन्धेपन के बचाव व अच्छी दृष्टि के लिए आंखों की देखभाल बहुत जरूरी है। यह पाया गया है कि छोटे बच्चे अक्सर कार्नियल नेत्रहीनता के शिकार होते है। कार्नियल नेत्रहीनता का उपचार केवल किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसकी आंख के कॉर्निया को खराब कार्निया वाले मरीज की आंख में लगा देने से हो सकता है और उसकी आंख की रोशनी वापस लाई जा सकती है। उसका अंधापन दूर किया जा सकता है। इसे नेत्र प्रत्यारोपण भी कहते है।
    उन्होंने बताया नेत्रदान सिर्फ मरणोपरांत ही किया जाता है। किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु होने पर परिवार शोकाकुल होता है ऐसी मुश्किल घड़ी में नेत्रदान करना जटिल होता है। ऐसे में समाज के लोग, समाज सेवी, अन्य प्रतिनिधि अहम भूमिका निभा सकते है। डॉ. मिश्रा ने बताया ने प्रदेश में राज्यभर के अस्पतालों में गत वर्ष 2019-20 में 362 नेत्रदान हुए थे। वहीं वर्ष 2018-19 में 360 और वर्ष 2017-18 में 378 नेत्रदान प्राप्त हुए थे। वर्तमान में हम देश में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में काम करने वाले नेत्र बैंक के प्रयासों से सालाना 60000 से 65000 आँखों का संग्रह नेत्रदान के जरिए प्राप्त हो रहे हैं।
    डॉ मिश्रा ने बताया देश में राष्ट्रीय सर्वेक्षण अंधत्व वर्ष 2015-19 की रिपोर्ट के अनुसार देश में अंधेपन के कुल मामलों में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस की समस्या लगभग 7.9% बढ़ी है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 20,000 नए अंधेपन के मामलों में वृद्वि होती है। देश में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख कार्निया की जरूरत होती है। जबकि जागरूकता की वजह से नेत्रदान में अभी भी प्रगति हो रही है लेकिन यह अपर्याप्त है । बड़े शहरों और कस्बों में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के इलाज की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज में आई बैंक द्वारा दी जाती है। कॉर्निया के अंधेपन के रोकथाम के लिए नेत्र प्रत्यारोपण के साथ-साथ कॉर्निया से होने वाले नुकसान को बचाया जाना जरूरी है।
    इसके लिए छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को विटामिन ए पिलाना अतिआवश्यक है। सभी बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। आंखों को चोट लगने से बचाया जाए और बच्चों को नुकीली वस्तु से न खेलने दें। आंख में संक्रमण होने पर इसका जल्द उपचार कराने के साथ नेत्र चिकित्सक की सलाह लें। यदि ऑखों में कुछ पड़ जाए तो आंख को मलें नही केवल साफ पानी से धोएं, फायदा न होनें पर नेत्र चिकित्सक से जांच करवाएं।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने के पूर्व विगत वर्षों की भांति किसान पंजीयन किया जाना है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में नवीन किसान पंजीयन एवं गत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में पंजीकृत कृषकों का डेटा अद्यतन किए जाने का कार्य 17 अगस्त से 31 अक्टूबर 2020 तक किया जाएगा। राज्य शासन के निर्णय अनुसार विगत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में धान खरीदी हेतु पंजीकृत किसानों को खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में धान खरीदी के लिए पंजीकृत माना गया है। इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे तथा खसरे को राजस्व विभाग द्वारा अद्यतन किया जाएगा। 

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / पढ़ई तुंहर दुआर योजना के अंतर्गत हमारे नायक में जगह बना कर जिले के मानपुर ब्लॉक की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल ने जिले का मान बढ़ाया है। गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद है। ऐसे समय मे बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग पढ़ई तुंहर दुआर योजना ले कर आई। इस योजना के माध्यम से बच्चे वर्चुअल क्लास से सुरक्षित अपने घरों में रहते हुए पढ़ाई से जुड़े हुए है। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने अधिकारिक वेब पेज पर हमारे नायक नाम से श्रृंखला प्रारंभ की है।
    हमारे नायक में पूरे राज्य से उन शिक्षक और छात्रों को जगह मिलती है। जिन्होंने पढ़ई तुंहर दुआर योजना में उल्लेखनीय कार्य किया हो। मानपुर ब्लॉक के शासकीय उच्चतम माध्यमिक शाला मानपुर की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल पूरे जिले में सबसे ज्यादा ऑनलाइन क्लास अटेंड करने वाली विद्यार्थी के रूप में हमारे नायक में जगह बनाने में कामयाब रही। ख्याति की इस कामयाबी में उनके पिता  नितेश खंडेलवाल एवं मां श्रीमती दीपाली खंडेलवाल और भाई संस्कार खंडेलवाल के साथ-साथ उनके शिक्षक अनिता देवांगन और रेणुका का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
    ख्याति ने बताया कि पढ़ई तुंहर दुआर के ऑनलाइन क्लास से उन्हें बहुत लाभ हुआ और उसे पूरे राज्य के शिक्षकों से सीखने का मौका मिला है। ख्याति ने अपने साथ-साथ अपने सहपाठियों को भी वर्चुअल क्लास के लाभ बता कर उन्हें ऑनलाइन क्लास से जोडऩे का काम किया। मानपुर वनांचल के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मानपुर की कक्षा दसवीं की छात्रा कुमारी ख्याति खंडेलवाल का हमारे नायक के रूप में चयन होने पर मोहला-मानपुर के विधायक इंद्र शाह मंडावी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री हेतराम सोम, जिला मिशन समन्वयक भूपेश साहू, एपीसी सतीश ब्यौहरे, मानपुर बीईओ नरेंद्र कुमार निरापुरे, बीआरआरसी जाहिदा खान, एबीईओ अरूण कुमार मरकाम और मानपुर ब्लॉक के सभी टीचर्स ने खुशी व्यक्त करते हुए छात्रा ख्याति खंडेलवाल के उज्ज्वल भविष्य की कामना किये है। मानपुर वनांचल की छात्रा का चयन स्टेट लेवल पर हमारे नायक के रूप में होने पर निश्चित रूप से राजनांदगांव जिले का मान पुरे राज्य में बढ़ा है।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि गांधी/नेहरू फैमिली पार्टी के लिए वोट दिलाने वाली रही है और देश के निर्माण में इसका अहम योगदान रहा है, ऐसे में उन्‍हें लगता है कि पार्टी के नेतृत्‍व को लेकर चर्चाओं के बीच सोनिया गांधी को इस समय कार्यकारी अध्‍यक्ष बने रहना चाहिए. 'शॉटगन' के नाम से लोकप्रिय बॉलीवुड एक्‍टर शत्रुघ्न ने यह बात विशेष बातचीत में कही. बातचीत के दौरान उन्‍होंने विभिन्‍न मुद्दों पर खुलकर राय रखी. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक को लेकर उन्‍होंने यह भी उम्‍मीद जताई कि कांग्रेस के नेतृत्‍व के जुड़े मसला जल्‍द ही सुलझा लिया जाएगा और इसका सर्वसम्‍मत समाधान निकल आएगा.
    बीजेपी से कांग्रेस की ओर रुख करने वाले शत्रुघ्न ने कहा, 'मैं इस पार्टी में नवप्रवेशी हूं. मुझे कांग्रेस में आए हुए दो वर्ष भी नहीं हुए हैं. इस लिहाज से मैं टर्निंग नहीं लर्निंग फेस से भी गुजर रहा हूं.' उन्‍होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो अपील की, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं कि सोनियाजी को कार्यकारी अध्‍यक्ष के रूप में बने रहना चाहिए.शत्रुघ्न यह कहने से भी नहीं चूके कि राहुल गांधी नेशनल आईकॉन हैं, उन्‍हें ट्राई किया जा चुका है और पार्टी के लिए जो कुछ करके दिखाया, उससे इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन अभी यह सोचता हूं कि देश के सबसे विद्वान पीएम में से एक मनमोहन सिंहजी ने जो कहा है और सुझाया है कि सोनिया जी को कार्यकारी अध्‍यक्ष बने रहना चाहिए.

    यह पूछने पर कि क्‍या कांग्रेस में इस समय बहुत ज्‍यादा खामोशी नहीं है कि किसे पार्टी संभालना चाहिए, इस पर 'शत्रु' ने कहा कि मुझे उम्‍मीद है कि जल्‍द ही इस मसले का समाधान हो जाएगा. कांग्रेस पार्टी को अब अध्‍यक्ष के रूप में 'नॉन गांधी' के बारे में नहीं सोचना चाहिए, इस सवाल पर सिन्‍हा ने कहा, 'क्‍यों नहीं हो सकता. न मैं अध्‍यक्ष पद की दौड़ में हूं, न बनना है और न ही किसी ने मुझे बनाना है लेकिन पार्टी में ऐसी क्षमता रखने वाले कई काबिल लोग है. पत्र लिखा गया तो मैं कहना चाहता हूं कि यह मीडिया के लिए नहीं बल्कि पार्टी के हित में लिखी गई.' उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस, इस फैमिली (गांधी/नेहरू) के साथ जुड़े हुए और निर्भर रहे हैं. वे पार्टी को वोट दिलाने वाले और राष्‍ट्र का निर्माण करने वाले हैं. नेहरू जी के नेतृत्‍व में देश का बहुत विकास हुआ, इसके बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में भी काफी काम हुआ.

    कांग्रेस पार्टी में इस समय युवा और बुजुर्ग नेताओं को लेकर चल रही बहस को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह सही है कि बुजुर्गों को युवाओं के लिए जगह छोड़ना चाहिए और यह जितना जल्‍दी हो बेहतर है. देश को मजबूत कदमों से आगे बढ़ाएं लेकिन इसके साथ भी यह भी कहना चाहूंगा कि यंग जनरेशन के पास जोश और ऊर्जा है लेकिन उनहें अनुभव की भी जरूरत हो. ऐसे में मेरा मानना है कि युवा और बुजुर्गों में समन्‍वय होना चाहिए.

     

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / समायोजित सकल राजस्व यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. सुप्रीम कोर्ट तीन पहलुओं पर फैसला सुनाएगा. पहला- केंद्र की याचिका जिसमें AGR के भुगतान के लिए 20 साल देने की मांग की गई है, भारती और वोडा-आइडिया ने 15 साल में भुगतान की इजाजत मांगी है. दूसरा क्या स्पेक्ट्रम (या स्पेक्ट्रम का उपयोग करने का अधिकार) IBC के तहत हस्तांतरित, सौंपा या बेचा जा सकता है. और तीसरा कोर्ट ये भी फैसला सुनाएगा कि आरकॉम का स्पैक्ट्रम इस्तेमाल करने पर जियो और वीडियोकॉन और एयरसेल का स्पैक्ट्रम इस्तेमाल करने पर एयरटेल उनकी देयता के आधार पर अतिरिक्त देयता के तहत आएंगे?
    टेलीकॉम कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) जमा करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को केंद्र की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह टेलीकॉम कंपनियों को बकाया राशि की फिर से गणना करने की अनुमति नहीं देगा. कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) को आरकॉम, सिस्तेमा श्याम टेलीसर्विसेज, वीडियोकॉन से संबंधित दिवालापन प्रक्रिया पर 7 दिनों के भीतर ब्योरा देने को कहा था. दूरसंचार विभाग ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट 20 साल में बकाया राशि वसूलने की अनुमति दे.
    दूरसंचार कंपनियों द्वारा बकाया के बारे में विभाग ने शीर्ष अदालत को सूचित किया गया है. एयरटेल ने 18004 करोड़ का भुगतान किया है, बकाया राशि लगभग 25976 करोड़ है. वहीं वोडाफोन-आइडिया ने 7854 करोड़ का भुगतान किया, शेष राशि लगभग 50399 करोड़ है. टाटा टेलीकॉम ने 4197 करोड़ का भुगतान किया. उस पर शेष 12601 करोड़ है.
    सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, हमें लंबित बकाया पर बेईमानी से व्यवहार करने वाले टेलीकॉम को राहत क्यों देनी चाहिए? वोडाफोन की तरफ से कोर्ट में पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत के व्यवसायों में पूरे निवेश में घाटा हुआ है. वार्षिक राजस्व, आईटी रिटर्न का विवरण दाखिल किया गया है. एक लाख करोड़ इक्विटी का सफाया हो चुका है."
    इस पर कोर्ट ने कहा, "क्या आपने आकस्मिक देयताओं के लिए वार्षिक खातों की व्यवस्था की है? रोहतगी ने जवाब दिया, "हम में सफल रहे इसलिए हमारे पास कोई प्रावधान नहीं था." सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दूरसंचार विभाग की मांग के बावजूद आपने बकाया के लिए प्रावधान क्यों नहीं किया? वोडाफोन-आइडिया के वकील ने कहा, "दंड और ब्याज राशि 50 हजार करोड़ को पार कर गई जबकि दूरसंचार विभाग की गणना के अनुसार 14 हजार करोड़ रुपये बकाया था. हमने जो कुछ भी कमाया वह खर्चों में बह गया." इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "प्रश्न यह नहीं है कि यदि आप कुछ छिपा रहे हैं, सवाल तो यह है कि आप बकाया का भुगतान कैसे करेंगे?"
    बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बकाया ना चुकाने वाली टेलीकॉम कंपनियों से 10 साल का बहीखाता मांगा था. साथ ही कंपनियों से यह भी कहा कि 10 साल में दिए गए टैक्स का ब्यौरा भी कोर्ट में दाखिल करें.

    देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र से कहा कि वो कंपनियों की भुगतान योजना पर विचार करे और कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दे. सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान दूरसंचार एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो पैसा कमा रहा है, इसलिए उसे कुछ धनराशि जमा करनी होगी. क्योंकि सरकार को महामारी के इस दौर में पैसे की जरूरत है. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए बताया कि पीएसयू के खिलाफ एजीआर बकाया को वापस ले लिया गया है. यह भी कहा गया कि 4 लाख करोड़ रुपये का 96% बिल वापस ले लिया गया है.
    क्या होता है एजीआर
    एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू दूरसंचार विभाग की ओर से टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिंग फीस है. आंकड़ों के मुताबिक इन कंपनियों पर एजीआर के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं. भारती एयरटेल पर करीब 35 हजार करोड़ और वोडाफोन-आइडिया पर 53 हजार करोड़ बाकी है. इसके अलावा कुछ अन्य कंपनियों पर बकाया है.

    सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में टेलीकॉम कंपनियों के मामले में केंद्र की एजीआर की परिभाषा को स्वीकार करते हुए इन टेलीकॉम कंपनियों को कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाये का भुगतान करने का आदेश दिया था. सरकार ने इन दूरसंचार कंपनियों के लिए एजीआर बकाया के भुगतान को 20 साल में सालाना किस्तों में चुकाने का प्रस्ताव रखा था.

     

       खाना खजाना /शौर्यपथ / सामग्री :
    ब्रेड- 6 
    बटर- आवश्यकतानुसार
    बारीक कटा प्याज- 1 
    उबले आलू- 2 
    उबला राजमा- 1/2 कप
    बारीक कटा अदरक-लहसुन- 2 चम्मच 
    हल्दी पाउडर- 1 चम्मच
    लाल मिर्च पाउडर- 1 चम्मच
    गरम मसाला पाउडर- 1 चम्मच
    चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
    नमक- स्वादानुसार
    तेल- आवश्यकतानुसार

    विधि :
    पैन में एक चम्मच तेल गर्म करें और उसमें अदरक-लहसुन को कुछ सेकेंड तक भूनें। अब उस पैन में मैश किया आलू, उबला राजमा, नमक और अन्य सभी मसाले डालें। मध्यम आंच पर मिश्रण को अच्छी तरह से पकाएं और गैस बंद कर दें।  जब मिश्रण पूरी तरह से ठंडा हो जाए तो उसमें बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च डालकर मिलाएं।

    ब्रेड स्लाइस के ऊपर यह राजमा वाला मिश्रण डालकर फैलाएं। ऊपर से दूसरा ब्रेड रखें। तीनों सैंडविच इसी तरह से तैयार कर लें। सैंडविच के ऊपर बटर लगाएं। नॉनस्टिक पैन में सैंडविच को दोनों ओर से सुनहरा होने तक सेंकें और सर्व करें।

     

    सेहत / शौर्यपथ / बरसात के मौसम में मच्छरों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। मच्छरों के काटने से नींद उड़ने से ज्यादा डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। इन बीमारियों में बुखार से छुटकारा पाना आसान नहीं होता। इस दौरान मरीज के जोड़ों में दर्द और सिर में भी दर्द रहता है। साथ ही प्लेटलेट्स काफी कम हो जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए घर में भी कुछ ऐसी असरदार चीजें मौजूद हैं, जो इस बीमारी से लड़ने में आपकी मदद कर सकती हैं।

    -डेंगू के बुखार से राहत पाने के लिए नारियल पानी खूब पिएं। इसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और एलेक्‍ट्रोलाइट्स शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है।

    -तुलसी के पत्तों को गर्म पानी में उबाल लें और फिर इस पानी को पिएं। ऐसा करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। इसे दिन में चार बार पी सकते हैं।

    -डेंगू बुखार में मेथी की पत्तियां उबालकर चाय बनाकर पिएं। ऐसा करने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और डेंगू का वायरस दूर होता है।

    -पपीते के पत्ते भी काफी असरदार हैं। इसमें मौजूद पपेन शरीर के पाचन को सही रखता है। इसका जूस पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं।

    -तुलसी के पत्तों के साथ काली मिर्च को पानी में उबाल लें और पिएं। इससे इम्यून सस्टिम मजबूत होता है और यह एंटी बैक्टीरियल की तरह काम करता है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / पुरे छत्तीसगढ़ में अगर कोई निगम लगातार घाटे में है तो वह है दुर्ग निगम लेकिन यह घाटा केवल शहर की जनता के लिए है . शहर में अगर किसी तरह के जनहित के कार्य की बात करे तो निगम प्रशासन के पास इतना मद नहीं रहता और मद आने का इंतज़ार करती है किन्तु जब यही कार्य निगम प्रशासन को अपने मनपसंद इंजिनियर या ठेकेदार से करवाना हो तो यही निगम कही से भी मद की व्यवस्था कर लेती है और जब इस पर किसी तरह की शिकायत की जाए तो शिकायत को दबाने में कार्यवाही में लेटलतीफी में और बातो को घुमाने में निगम के जिम्मेदार अधिकारी एक दक्ष राजनेता की तरह बात करने लग जाते है .
    शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा ऐसे कई मामलो पर निगम आयुक्त को संज्ञान में लाया गया किन्तु निगम आयुक्त बर्मन द्वारा कार्यवाही के नाम पर सिर्फ दिन और महीने ही बताये जा रहे है चाहे वो व्ही.पी. मिश्रा की शिकायत पर जाँच कर रहे अधिकारी प्रभारी ईई गोस्वामी की कार्यप्रणाली हो या फिर अमृत मिशन के कार्य में हो रही मिलावट खोरी की जाँच की बात हो निगम आयुक्त द्वारा सिर्फ और सिर्फ समय ही दिया जा रहा है किन्तु कार्यवाही नहीं .
    ऐसे ही एक मामले में निगम के सब इंजिनियर जो कि वर्तमान में अमृत मिशन के कार्य को कार्यालय में बैठ कर निरीक्षण कर रहे है जिनके कार्यो में लापरवाही पर शहर के विधायक भी नाराजगी जता चुके है किन्तु आयुक्त बर्मन द्वारा ना तो कार्य में सुधार की कोई पहल की गयी और ना ही कार्य की जाँच .
    सब इंजिनियर भीम राव द्वारा फर्जी नाम से आयुक्त बंगले में कार्य करवाया गया जिसमे शौचालय के नाम पर संधारण मद से लाख रूपये के लगभग सिर्फ बाथरूम की साज सज्जा में ही खर्च कर दिया गया वो भी तब जब कि पूर्व में रह रहे आयुक्त सुन्दरानी भी उसी बंगले में निवास करते रहे तो क्या बाथरूम में सजावट के नाम पर निगम के लाख रूपये खर्च करने वाले जिम्मेदार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आयुक्त बर्मन मौन क्यों है , अमृत मिशन में हो रही मिलावट खोरी पर जाँच का आदेश देने वाले आयुक्त बर्मन आदेश का पालन नहीं करने वाले सब इंजिनियर पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे है जबकि यही आयुक्त बर्मन है जो निगम के अधिकारिक सोशल मिडिया ग्रुप पर सेवानिवृत्त के बाद हुए बिदाई समारोह पर भेदभाव लगाने वाले निगम कर्मचारी को नोटिस देने में देरी नहीं की जबकि 25 दिनों पहले सब इंजिनियर भीम राव को जाँच का आदेश देने के बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर मौन है जबकि निगम के एक सब इंजिनियर को विगत कई महीनो से बिना प्रभार के रखे हुए है और आरोप यह है की कार्य में लापरवाही बरती जाती है आखिर एक अधिकारी के लिए एक नियम और दुसरे के लिए दूसरा .
    क्या दुर्ग निगम की इस प्रशासनिक अव्यवस्था पर जिला प्रशासन संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्यवाही करेगा या फिर निगम प्रशासन की ये कार्यप्रणाली ऐसे ही गतिमान रहेगी ?

    मनोवैज्ञानिक दे रहे मानसिक स्वास्थ्य में स्वैच्छिक सेवाएं ,विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक छात्र- छात्राऐं प्रदान कर रहे स्वैच्छिक सेवा

    रायपुर / शौर्यपथ / मोबाइल की घंटी बजी। फोन रिसीव किया । उधर से आवाज आई। "सर मुझे बताइए मुझे कोरोना होगा कि नहीं मेरे परिवार के सदस्य की रिपोर्ट पॉजि़टिव आई है"। मनोवैज्ञानिक (क्लीनिकल साइकोलॉजी विशिष्टता) छात्र नरेंद्र कुमार वर्मा बताते हैं कि हर दो-चार दिन में इस तरह के फोन आते हैं और घबराई हुई आवाज में लोग ऐसी ही बातें पूछते हैं ।
    कोरोनावायरस के संक्रमण ने लोगों के अंदर डर पैदा कर दिया है साथ ही भ्रामक जानकारियों से भी लोग गुमराह हो रहे हैं । लोग मानसिक रूप से परेशान होते हैं तो कॉल करते हैं इसलिए हमारा यह काम है कि लोगों के मन की शंकाओं को दूर कर उन्हें उचित परामर्श दिया जाए ।
    मनोवैज्ञानिक छात्र देवेंद्र वर्मा कहते हैं कि कई बार ऐसे फोन आते हैं जिसमें पूछा जाता है कि मेरे पड़ोस में कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति मिला है, मैं अपने घर को रोज़ धोती हूं बार-बार हाथ धोती हूं साथ ही सैनिटाइजर का भी प्रयोग करती हूं, घर से बाहर निकलती हूं या दरवाजे पर कोई भी आता है उससे मिलती हूं तो आकर फिर से नहाती हूँ,दिनभर में ऐसा चार पांच बार करती हूं वैसे मुझे सर्दी खांसी बुखार या जुकाम जैसी कोई शिकायत नहीं है फिर भी बार-बार लगता है मुझे कोरोना हो जाएगा, मुझे कोरोना वायरस का संक्रमण तो नहीं होगा? कोरोना से बचने के लिए मैं और क्या करूं? इस तरह के प्रश्नों का हम फोन पर उचित परामर्श देते हैं । अगर लोगों के मन में कोई भी शंका उत्पन्न हो रही हो तो वह टोल फ्री नंबर 104 पर डायल कर मनोवैज्ञानिक सलाह ले सकते हैं । जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर सकारात्मक मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए जिला मानसिक स्वास्थ्य विभाग ने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मनोवैज्ञानिक छात्रों की सेवाएं, स्वैच्छिक सेवा प्रदाता के रुप में लेने का निर्णय किया था। प्रोफेसर मनोविज्ञान अध्ययनशाला की डॉ.प्रियवंदा श्रीवास्तव ने बताया कि जिला मानसिक स्वास्थ्य विभाग रायपुर और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मनोविज्ञान विभाग से अनुबंध किया गया ताकि जिले के समस्त विकासखंड में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके। साथ ही इसके लिए स्वैच्छिक सेवा प्रदान करने हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और रायपुर मनोरोग स्पर्श क्लीनिक के चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डीएस परिहार के सहयोग से मनोवैज्ञानिक छात्रों का भी सहयोग लिया गया था । इसमें आरंग, अभनपुर, धरसींवा, रायपुर और तिल्दा में स्वैच्छिक सेवा के तहत टेलीमेडिसिन के माध्यम से अपने क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य से ग्रसित नियमित रुप से लॉकडाउन और अनलॉक में परामर्श ले रहे है । ये छात्र क्वारंटाइन सेंटरों में भी काउंसलिंग की सेवाएं दे रहे हैं ।
    डॉ.श्रीवास्तव ने कहा मनोवैज्ञानिक स्वैच्छिक सेवा प्रदाताओं ने अप्रैल से जुलाई तक 670 लोगों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से परामर्श दिया है । वहीं अप्रैल में 168,मई में 184,जून में 252,और जुलाई में 66 लोगों को परामर्श दिया है । टेलीमेडिसिन के माध्यम से 108 लोगों ने डिप्रेशन से बचने के लिए परामर्श लिया है । वहीं 92 लोगों द्वारा नशा मुक्ति के लिए परामर्श लिया गया है । 309 लोगों ने कोविड-19 के तनाव को लेकर परामर्श लिया है । 161 ऐसे लोग थे जिन्होंने अन्य मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोवैज्ञानिकों से नियमित परामर्श लिया है ।
    रायपुर मनोरोग स्पर्श क्लीनिक के चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डीएस परिहार ने बताया मनोवैज्ञानिक द्वारा जिले में मानसिक स्वास्थ्य से पीडि़त लोगों को परामर्श दिया जा रहा है । पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वैच्छिक रूप से छात्र-छात्राओं द्वारा लॉकडाउन और अनलॉक के दौरान बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए लोगों को मनोरोग के विषय में परामर्श दे रहे है।
    कहॉ कहॉ से मिल रही है सेवा!
    आरंग में राहत केंद्र भानसोज ,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरफ़ौद, रीवा, चंदखुरी, कुरुदकुटेला के स्वास्थ्य केंद्रों से सम्पर्क कर मनोवैज्ञानिक परामर्श मानसिक स्वास्थ्य से पीडित लोग ले सकते है ।
    अभनपुर में उपरवारा, अभनपुर, गोबरा नवापारा,तोरला, खोरपा, गुढियारी,खिलोरा के स्वास्थ्य केंद्र से लोग मनोवैज्ञानिक परामर्श ले सकते है ।धरसींवा में सिलयारी,मांढर और दोंदेकलॉ बिरगॉव के स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क कर लोग मनोवैज्ञानिक परामर्श प्राप्त कर सकते है । तिल्दा में खरोरा, बंगोली, खैरखुट के स्वास्थ्य केंद्र से मनोवैज्ञानिक परामर्श ले सकते है । रायपुर में हिरापुर कबीरनगर और भाटागॉव, डीडी नगर के स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क कर लोग मनोवैज्ञानिक परामर्श ले सकते है ।

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