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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / खीरे के छिलकों के कई फायदे हैं। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और सिलिका जैसे मिनरल्स होते हैं। ये आपकी मांसपेशियों, हड्डियों और टेंडन को स्वस्थ रखने के लिए सिलिका एक आवश्यक घटक है। यह हमारी स्किन को हाइड्रेट भी करता है, साथ ही रंगत और आंखों की रोसशनी में सुधार करता है। तो चलिए जानते हैं स्किन पर खीरे के छिलकों के फायदे
पफी आंखे
खीरे के ठंडे छिलके आंखों पर लगाने से सूजन कम हो सकती है। हाई वाटर कंटेंट आंखों के क्षेत्र में कोमल त्वचा को हाइड्रेट करने और ब्लड वाहिकाओं को अनुबंधित करने में मदद करती है। छिलकों को अपनी आंखों पर लगभग 10 से 15 मिनट के लिए रखें और आराम करें।
स्किन को जवां बनाएं
खीरे के छिलके में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। जिसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से सनबर्न, रूखापन, पिंपल, डार्क सर्कल से छुटकारा दिलाने के साथ स्किन में ग्लो लेकर आता है।
कैसे बनाएं फेस पैक
खीरे के छिलके और शहद
शहद अपने एक्सफोलिएटिंग गुणों के लिए जाना जाता है। यह लोच और नए ऊतक विकास को बढ़ावा देता है जो आपको युवा और चमकती त्वचा देता है।
सामग्री
आधा छिलका खीरा
2 बड़े चम्मच शहद या एलोवेरा
कैसे बनाएं
छिलकों और खीरे के साथ प्यूरी तैयार करें और फिर शहद डालें। इस पैक को अपने स्किन पर कम सम कं 15 मिनट के लिए लगाएं और बाद में ठंडे पानी से चेहरे को साफ करें।
खीरे के छिलके और दूध
सामग्री
आधा खीरे के छिलके
1/4 कप दूध
1 बड़ा चम्मच शहद
1 बड़ा चम्मच ब्राउन शुगर
कैसे बनाएं
खीरे को छीलकर पीसकर प्यूरी बना लें। फिर कटोरी में दूध, शहद और ब्राउन शुगर मिलाएं। इस मिश्रण को कद्दूकस किए हुए खीरे में मिला लें। इसे अच्छे से मिलाएं। पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।
आस्था / शौर्यपथ /पितृ पक्ष 20 सितंबर से आरंभ हो चुके हैं, जो कि 6 अक्टूबर तक रहेंगे। इन दिनों में पितरों के आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर धरती पर लौट कर आते हैं, इसलिए लोग इन दिनों में खरीदारी या शुभ काम नहीं करते हैं। यह समय शोकाकुल होता है। जबकि शास्त्रों और पुराणों में पितृ पक्ष का समय अशुभ होने का जिक्र नहीं है। 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष में इस साल कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो बेहद कल्याणकारी हैं। इन शुभ योग में तर्पण और पिंडदान करने पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इसके साथ ही नया काम या खरीदारी के लिए भी समय उत्तम है।
गणेश चतुर्थी और नवरात्रि के बीच में आते हैं पितृ पक्ष
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष को अशुभ मानना उचित नहीं है क्योंकि श्राद्ध गणेश चतुर्थी और नवरात्रि के बीच में आते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले श्रीगणेश की पूजा की जाती है। इस तरह से पितृ पक्ष अशुभ काल नहीं होता है।
पितर देते हैं आशीर्वाद-
शास्त्रों में पितरों को देवता तुल्य माना गया है। श्राद्ध पक्ष में पितर पृथ्वी पर अपने परिवार के यहां आते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शुभ योग में खरीदारी करने से कोई दोष नहीं लगता है। मान्यता है कि इन शुभ योग में खरीदारी करने से पितर भी प्रसन्न होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
बन रहे ये शुभ संयोग-
पितृ पक्ष में सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग के साथ रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। पितृ पक्ष में 21, 23, 24, 27, 30 सितंबर और 6 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग, 26 और 27 सितंबर को रवि योग और 27 व 30 सितंबर अमृत सिद्धि योग बन रहा है।
धर्म संसार / शौर्यपथ /कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन माता अहोई, भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत संतान प्राप्ति, उसकी लंबी आयु और खुशहाली के लिए रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की अहोई के रूप में पूजा की जाती है और तारों को अर्घ्य देकर व्रत पारण किया जाता है। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।
अहोई अष्टमी 2021 शुभ मुहूर्त-
अहोई अष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 39 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक है।
अहोई अष्टमी महत्व और व्रत नियम-
इस व्रत में माताएं अपने पुत्र की सलामती के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत में सई माता और सेई की भी पूजा की जाती है। अहोई अष्टमी पर माताएं चांदी की माला भी पहनती हैं, जिसमें हर साल दो चांदी के मोती जोड़ती हैं। इस व्रत में बहुत नियमों का पालन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में व्रती महिला चाकू से सब्जी आदि काट नहीं सकती हैं।
पूजा विधि-
दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है। फिर रोली, चावल और दूध से पूजन किया जाता है। इसके बाद कलश में जल भरकर माताएं अहोई अष्टमी कथा का श्रवण करती हैं। अहोई माता को पूरी औऱ किसी मिठाई का भी भोग लगाया जाता है। इसके बाद रात में तारे को अघ्र्य देकर संतान की लंबी उम्र और सुखदायी जीवन की कामना करने के बाद अन्न ग्रहण करती हैं। इस व्रत में सास या घर की बुजुर्ग महिला को भी उपहार के तौर पर कपड़े आदि दिए जाते हैं।
बालोद / शौर्यपथ / शासन की योजना का लाभ लेकर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम परसतराई का कृषक चंद्रहास देवांगन अच्छी आमदनी अर्जित कर रहा है। कृषक ने अपनी आमदनी का जरिया मत्स्य पालन को बनाया। जिससे वह लगभग आठ लाख रुपए वार्षिक आमदनी प्राप्त कर रहा है। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषक द्वारा वर्ष 2018-19 में 03.18 हेक्टरयर भूमि 10 वर्ष हेतु लीज पर लेकर मत्स्य विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 02 हेक्टेयर में तालाब निर्माण करवाया गया। जिसके लिए उन्हें मत्स्य पालन विभाग द्वारा 04 लाख 80 हजार रूपए अनुदान प्रदाय किया गया। तत्पश्चात् कृषक ने उक्त तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषक द्वारा तालाब में मत्स्य पालन एवं बीज उत्पादन किया जा रहा है। इससे वह लगभग आठ लाख रूपए वार्षिक आमदनी अर्जित कर रहा है। मत्स्य पालन से होने वाली आमदनी से कृषक और उसका परिवार काफी खुश है।
क्रमांक/596
समाचार
नरवा विकास कार्य से ग्रामीणों को मिल रही सिंचाई की सुविधा, परसवानी नाला से 436 हेक्टेयर खेतों में हो रही सिचांई
बालोद, 21 सितम्बर 2021
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवा, गरवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना के अन्तर्गत जिले में नरवा विकास के कार्य से ग्रामीणों को सिंचाई की सुविधा मिल रही है। नरवा विकास के कार्य के अंतर्गत गुण्डरदेही विकासखण्ड के परसवानी नाला का चयन किया गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि परसवानी नाला डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम घीना से प्रारंभ होकर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम परसवानी में प्रवेश करते हुए ग्राम सिकोला में तान्दुला नदी में समाहित होता हैं। परसवानी नाले की कुल लम्बाई 25.80 किलोमीटर है, जिसमें 21.80 किलोमीटर गुण्डरदेही विकासखण्ड में आता हैं। परसवानी नाला क्षेत्र में ग्राम परसवानी, परसतराई, बोरगहन, अर्जुनी टिकरी, झींका, खपरी, कान्दूल, रौना, देवगहन एवं सिकोला शामिल हैं।
परसवानी नाला में उपचार हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मद से स्वीकृत राशि से 107 संरचनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है, जिसमें मिट्टी का कटाव रोकने, जल स्तर में वृद्धि तथा ग्रामीणों के आजीविका हेतु ब्रशवुड, वृक्षारोपण कार्य, रिजार्च पिट निर्माण, फार्म बंडिग कार्य, नाला गहरीकरण, कच्ची नाली निर्माण आदि कार्य कराया गया है। परसवानी नाला के निकट लगभग 436 किसानों का जमीन है, जिसमें खेती एवं अन्य कार्य करते है। इस नाला में विभिन्न संरचना बनने से हुए जलभराव का उपयोग लगभग 436 हेक्टेयर खेतों में पम्पिंग के माध्यम से सिंचाई किया जा रहा है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /बच्चों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। कई बार हम बच्चों के सवालों का जवाब बता देते हैं तो कई बार उन्हें इगनोर कर देते हैं। ऐसे में बच्चे मनमानी करने लगते हैं और वह जिद्दी हो जाते हैं। वहीं घर में मौजूद बड़े उनको खूब लाड़-प्यार करते हैं और बच्चों की खूब बात मानते हैं। हर चीज को पूरा करते हैं। जिसके बाद अंत में बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। शुरूआत में भी हम बच्चों की कई जिद्दों को पूरा करते हैं और फिर बच्चों को आदत हो जाती है। वह फिर अपना हर काम जिद्द से पूरा करवाने लगते हैं। तो चलिए जानते हैं कि बच्चों में बदलाव के लिए क्या करें।
1) कई बच्चे मां बाप की बात सुने बिना ही बहस शुरू कर देते हैं। ऐसे में बतौर मां बाप पहले बच्चों को प्यार से अपनी बात समझाएं। इससे हो सकता है कि बच्चा आपकी बात समझ जाए।
2) आपको बच्चों की बात सुननी भी जरूरी है। अगर आप बच्चे की बात नहीं सुनते हैं तो आपका बच्चा निगेटिव हो जाता है। इसलिए बच्चे की बात को भी ध्यान से सुनें।
3) कई बार बच्चों को लगता है कि वह सही हैं। ऐसे में आप उन्हें सही गलत में फर्क बताएं। उन्हें उद्हारण देकर बताएं। अगर आप बच्चे पर हमेशा अपना फैसला देंगे तो हो सकता है कि वह आपकी बात को ना मानें।
4) बच्चों को ज्यादा गुस्सा ना करें। समझने और समझाने से स्वस्थ्य रिश्ता बनता है। इसलिए बच्चों को भी बोलने का मौका दें। अगर आप उसको बोलने का मौका देंगे तो वह भी आपको अच्छी तरह से सुनेगा।
सेहत / शौर्यपथ /देर रात तक पार्टी हो या वेब सीरिज देखना, मज़ा तो आता है। पर इसकी सज़ा आपके पेट को मिलती है गड़बड़ पाचन तंत्र के रूप में। कब्ज, मल त्याग में परेशानी, ब्लॉटिंग और गैस्ट्रिक समस्याएं हमारी खराब जीवनशैली के कारण हैं। पर इन समस्याओं को हेल्दी डाइट से दूर किया जा सकता है। और इसके लिए आपको किसी फैंसी डाइट की जरूरत नहीं है। बस आलूबुखारा को अपने आहार में शामिल करें और फर्क देखें। विभिन्न शोधों में यह सामने आया है कि आलूबुखारा आपकी स्किन के लिए ही नहीं, बल्कि आपके पाचन तंत्र के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
आलूबुखारा का नाम सुनकर मुंह में पानी आया कि नहीं? यह एक रसदार खट्टा-मीठा मौसमी फल है, जिसे आपने कभी न कभी जरूर खाया होगा। इसे फल के तौर पर खाने से लेकर कई हेल्दी व्यंजन बनाने तक, किसी भी तरह से ग्रहण किया जा सकता है। पर क्या आप जानती हैं कि यह स्वादिष्ट फल आपके पेट के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है? खासतौर से अगर आप कब्ज से पीड़ित हैं, तो आलूबुखारा आपकी सुबह आसान बना सकता है। आइए जानते हैं कि कैसे आलूबुखारा पेट से संबंधित विकार जैसे- भूख की कमी, बदहजमी को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है।
सबसे पहले जानते हैं आलूबुखारा में मौजूद पोषक तत्व
कब्ज से निजात दिलाने में उपयोगी आलूबुखारा कई पोषक तत्वों का स्रोत है। आलूबुखारा को सुखाने के बाद यह प्रून के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। प्लम और प्रून दोनों ही पोटेशियम , मैग्नीशियम, फॉस्फोरस , जैसे खनिजों से भरपूर हैं। इतना ही नहीं इसमें विटामिन ए, विटामिन सी , विटामिन बि6 और विटामिन ई जैसे पौष्टिक तत्व भी पाए जाते हैं।
आयुर्वेद में भी बहुत खास है आलूबुखारा
5000 साल पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में भी आलूबुखारा को उसके औषधीय गुणों के कारण खास स्थान दिया गया है। इसका टैक्स्चर कोमल होता है और यह आंतों में चिकनाहट पैदा करता है। जिससे आपको मल त्याग में आसानी होती है और कब्ज से निजात मिलती है।
आलूबुखारा शरीर की खुजली को दूर करता है तथा प्यास को रोकता है। आयुर्वेद में आलूबुखारा फल, आलूबुकारा के पत्ते और आलूबुखारा के बीज का तेल को भी लाभकारी बताया गया है। जिन्हें अलग-अलग बीमारियों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके सेवन से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है। जिससे हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का जोखिम कम होता है।
अब जानिए कब्ज को कैसे ठीक करता है आलूबुखारा?
आलूबुखारा में हाई फ़ाइबर और एंटीऑक्सीडेन्ट होते हैं, जिससे आपका पाचन स्वस्थ रहता है। यह ऐसे पदार्थ हैं जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। प्लम ऑक्सीडेटिव तनाव के जोखिम को कम कर सकता है। यह आपके मेटाबॉलिज़्म को मजबूत करके कब्ज से राहत देता है।
कैसे करें सेवन: आलूबुखारा को ईवनिंग स्नैक्स के तौर पर इस्तेमाल करना, आपको कब्ज से राहत दिला सकता है। हर रोज़ आप मुट्ठी भर आलूबुखारे खा सकती हैं। इसके अलावा आप चाहें तो प्रून के रूप में इसके सूखे फल का भी सेवन कर सकती हैं।
डियर लेडीज, यहां हैं आपके लिए आलूबुखारा खाने के कुछ और कारण
1. हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार करता है आलूबुखारा
आलूबुखारा आपके शरीर को फ्री रेडिकल्स से छुटकारा पाने और कोलेस्ट्रॉल के बढ़ते स्तर को रोकने में कारगर है। इससे यह हृदय स्वास्थ्य में सुधार लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बैड कोलेस्ट्रॉल के नाम से भी जाना जाता है। आलूबुखारा के फायदे में एक फायदा यह है कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। आलुबुखारे में आयरन की मात्रा होती है, जो ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करती है। इसमें पोटेशियम होने से शरीर के सेल्स मजबूत होते हैं और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।
2. हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है आलूबुखारा
इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए, कैल्शियम, फास्फोरस, कॉपर, मैग्नीशियम और फाइबर मौजूद होते हैं। जिससे यह 30 के बाद होने वाले हड्डियों के नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यानी ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों के जोखिम को कम कर सकता है आलूबुखारा। मोनोपॉज की उम्र के करीब पहुंच रहीं महिलाओं को आलूबुखारा को जरूर अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। ताकि वे स्वयं को ओस्टियोपोरेसिस से बचा सकें।
3. याद्दाश्त भी तेज करता है आलूबुखारा
ढेर सारा काम, जूम मीटिंग और टार्गेट अचीव करने की भागदौड़, ये बहुत सारे कारक हैं जो आपकी मेमोरी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। अगर आप भी इन दिनों बहुत कुछ भूलने लगी हैं, तो यह संकेत है कि आपको अपनी डाइट में आलूबुखारा जरूर शामिल करना चाहिए।
तो लेडीज, इस स्वादिष्ट फल के इतने फायदे जानकर आप भी झटपट करें इसे अपनी डाइट में शामिल।
खाना खजाना / शौर्यपथ /बात जब ब्रेकफास्ट की आती है तो घर की महिलाओं को सबसे पहले ख्याल दलिया बनाने का आता है। यह रेसिपी जल्दी बनने के साथ सेहत के लिए भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। रोजाना एक कटोरी दलिया खाने से व्यक्ति को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह वजन कम करने में मदद करने के साथ कब्ज की समस्या भी दूर करता है। दलिया में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं और यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स में भी कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन ब्रेकफास्ट में सर्व किया गया रेगुलर दलिया कई बार बच्चों को पसंद नहीं आता है। ऐसे में यह हेल्दी रेसिपी उनकी डाइट में शामिल करने के लिए इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए बनाते हैं चॉकलेट दलिया।
चॉकलेट दलिया बनाने के लिए सामग्री-
-1-कटोरी दलिया
-2- चम्मच देसी घी
-2- गिलास दूध
-5- चम्मच चीनी
-2-3-चम्मच चॉकलेट पाउडर
-1-कटोरी ड्राई फ्रूट
-1-चम्मच चॉकलेट चिप्स
चॉकलेट दलिया बनाने की विधि-
चॉकलेटी दलिया बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में देसी घी गर्म करें और दलिया डालकर सुनहरा होने तक फ्राई कर लें। अब इसमें दूध डालें और दलिया को अच्छी तरह से पका लें। फिर इसमें सभी सामग्री जैसे चीनी,चॉकलेट पाउडर आदि भी डाल दें। जब दलिया दूध पूरी तरह सोख ले तो गैस बंद कर दें। दलिया जब थोड़ा ठंडा हो जाए तो उसे एक बाउल में निकालकर चॉकलेट चिप्स और ड्राई फ्रूट डालकर सर्व करें।
वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ / फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों वस्तुओं में से एक तितलियों की तस्वीर घर में रखने के बारे में जानें।
1. फेंगशुई के अनुसार घर में सम संख्या में उड़ती हुई तितलियों की तस्वीर लगानी चाहिए। तितलियां घर में खुशियां लाती हैं। सभी के चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है।
2. बच्चों के पढ़ने वाले कमरे में इसे लगाने से उनका पढ़ने में मन लगा रहता है।
3. तितलियों से संबंधों में घनिष्ठता आती है और जीवनसाथी से प्रेम संबंध मजबूत होते हैं। शयनकक्ष इसके चित्र को लगाने से फायदा मिलता है।
4. तितलियों के सुंदर चित्र घर में रहने से सभी सदस्यों की रचनात्मकता अर्थात क्रिएटिविटी में बढ़ोतरी होती है।
5. तितलियां खुशियों के साथ ही शांति और समृद्धि की भी प्रतीक हैं। इससे उन्नती और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
नारायणपुर जिले में अब तक 316.63 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूर्ण
नारायणपुर / शौर्यपथ / सड़के किसी भी देश के लिए जीवन रेखा होती है। सड़कों के अभाव में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। किसी भी गांव की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति की कल्पना बिना अच्छी सड़कों के करना संभव नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक गांव को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाये। इसके लिए भारत सरकार ने 25 दिसम्बर 2000 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरूआत की थी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के सामान्य क्षेत्रों में 500 एवं 500 से अधिक तथा पहाड़ी क्षेत्रों में 250 एवं 250 से अधिक आबादी वाले समस्त बिना जुड़ी हुई बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का प्रावधान है।
इस योजना के अंतर्गत गांव, तालुका, जिले और बड़े शहरों को जोड़ते हुए सड़के बनाई जाती हैं तथा साथ ही सड़कों के गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए विभिन्न स्तर पर सड़कों के जांच का प्रावधान भी किया गया है, जिसके लिए समय-समय पर राज्य गुणवत्ता समीक्षक एवं राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षक द्वारा सड़कों की गुणवत्ता की जांच की जाती है। इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य देश के गांवों को शहरों से पक्की सड़कों द्वारा जोड़ना है। लोगों को आने जाने में कोई तकलीफ ना हो और उस क्षेत्र का विकास हो। सड़को के निर्माण से उस क्षेत्र में विकास की प्रबल संभावनाएं होती है। इस योजना का मुख्य लाभ ग्रामीण लोगों को होगा।
कार्यपालन अभियंता सह सदस्य सचिव परियोजना क्रियान्वयन इकाई श्री विनय वर्मा ने बताया कि परियोजना स्थापना के बाद से नारायणपुर जिले में अब तक लगभग 316 किलोमीटर की कुल 76 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। योजनांतर्गत लक्षित चिन्हित 208 योग्य बसाहटों के विरूद्ध 170 बसाहटें और जिले से जुड़ी बसाहटों को बारहमासी आवागमन सुविधा प्रदान किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 के तहत् नारायणपुर में कुल 5.50 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गयी है, जिसमें से 1.20 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 के तहत् जिले में कुल 10 किलोमीटर सड़क की स्वीकृति प्राप्त की जा चुकी है, जिसका निर्माण प्रगति पर है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न कार्यक्षेत्रों के तहत् नारायणपुर जिले में अब तक 316.63 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। इस योजना के आने से ग्रामीणजनों को सभी क्षेत्रों में अत्यधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। जिसमें विद्यालय, चिकित्सालय, देवालय, दर्शनीय स्थल, विकासखण्ड एवं जिला मुख्यालय आदि आने-जाने के लिए सायकल, दुपहिया वाहन एवं बस से जिले के प्रत्येक क्षेत्र में आवागमन सुगम हो रहा है। योजना के संचालित होने से गावों एवं ग्रामीणों का चहुमुखी विकास संभव हो रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं का फायदा लेकर बलौदाबाजार के पलारी विकासखण्ड के ग्राम अमेठी निवासी तुलसीराम फेंकर की शुद्ध आमदनी लगभग 6 लाख रुपये सालाना है। महज सवा एकड़ के तालाब में मछली पालन से उनकी यह आमदनी हो रही है। स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण की मछलीपालन विभाग की योजना का फायदा उठाकर उन्होंने 2 बरस पूर्व अपने खेत पर तालाब निर्माण कराया। सवा एकड़ की भूमि को तालाब बनाने पर इनपुट सब्सिडी सहित उन्हें लगभग 2.50 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। राज्य सरकार की मछलीपालन की योजनाओँ से मिल रहे फायदे से तुलसीराम बेहद खुश है। पक्का घर, मोटर गाड़ी सहित तमाम भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाने के साथ ही अपने बच्चे तामेश्वर फेंकर को बंगलोर के प्रतिष्ठित कॉलेज में मछलीपालन विज्ञान में उच्च शिक्षा दिलाने में भी सफल हुए हैं।
अमेठी ग्राम में महानदी के किनारे तुलसीराम फेंकर का फिश फार्म बना हुआ है। पलारी से कोई 12 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में यह गांव स्थित है। सौर ऊर्जा चलित पंप से पानी लिफ्ट कर तालाब में भरते है। साल भर में उनके तालाब में मछली का दो दफा उत्पादन होता है। दोनों बार मिलाकर लगभग 35 लाख रुपये की मछली का उत्पादन होता है। बीज, दाना, दवाई, श्रम आदि पर लगभग 80 प्रतिशत खर्च हो जाता है। ये सब खर्च निकालने के बाद भी लगभग 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो जाता है। श्री फेंकर ने बताया कि मछली पालन का सबसे बड़ा फायदा इसके विक्रय को लेकर किसी तरह की समस्या का नहीं होना है। लोग स्वयं उनके तालाब पर मछली खरीदने लाइन लगाए खड़े रहते हैं। थोक में खरीदने के लिए रायपुर, बिलासपुर और भाटापारा के ठेकेदार एक फोन पर आ जाते हैं। थोक में लगभग 85 रुपये और चिल्हर में 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की सरकार द्वारा मछलीपालन को खेती का दर्जा दिए जाने के निर्णय से तुलसीराम सहित मछुआ समुदाय में खुशी है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक से उन्हें अब कम ब्याज दर पर ऋण मिलेगा। ऋण लेने के लिए आवेदन उन्होंने तैयार भी कर लिए हैं।
कांकेर की महिला समूह ने महुआ लड्डू बेचकर कमाए 6 लाख रूपए
रायपुर / शौर्यपथ / त्यौहारों और विशेष अवसरों पर परिजनों को उपहार देने के लिए वनोपज और उससे बनी मिठाईयां नये विकल्प के रूप में सामने आ रही हैं। कांकेर जिले की महिला स्व-सहायता समूह ने संजीवनी विक्रय केन्द्र के माध्यम से महुआ लड्डू के गिफ्ट पैक की बिक्री कर 6 लाख रूपये की आमदनी अर्जित की है।
स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार किये गए महुआ लड्डू, शहद, चिरौंजी, महुआ सैनिटाइजर, सर्व ज्वर हर चूर्ण, इमली कैंडी जैसे स्वास्थ्यवर्धक सामग्री और मिठाई के गिफ्ट पैक को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। वनोपज और वनौषधियों से तैयार उत्पाद का उपयोग इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है। पिछले दीपावली में कांकेर जिले के ग्राम भानबेड़ा ’’दिशा महिला स्व-सहायता समूह’’ की महिलाओं ने 09 क्विंटल महुआ लड्डू तैयार कर 06 लाख रूपये लाभ अर्जित किया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के विभिन्न जिलों के महिला स्व-सहायता समूह द्वारा वनोपज और वनौषधियों से तैयार उत्पादों की महक देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रही है। इन उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। राज्य शासन द्वारा भी सभी वनोपजों के प्रसंस्करण और वैल्यू एडीशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। आदिवासी अंचल की महिलाओं को इन आर्थिक गतिविधियों में जहां रोजगार मिल रहा है वहीं यह उनकी समृद्धि का नया आधार बन रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुगल के मोबाईल नंबर पता कर सीधे बात की और उसकी बात बन गई। यह प्रसंग जुड़ा है बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लाक के ग्राम मुड़पार के रहने वाले 25 वर्षीय दिव्यांग श्री रवि कश्यप से। मुख्यमंत्री से बात और अपनी मांग रखने का दो दिन का अरसा नहीं बीता था, कि उसे मुख्यमंत्री के हाथों चमचमाती टाईसायकिल की सौगात मिल गई। मुख्यमंत्री ने दिव्यांग रवि कश्यप को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। दिव्यांग रवि ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की संवेदनशीलता के लिए उनका आभार जताया।
बात छोटी सी है, परंतु यह साबित करने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक राज्य के आम जनता की पहुंच कितनी सहज है। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अज्ञात नंबर से कॉल आने पर भी उन्होंने न केवल फोन करने वाले की बात सुनी, अपितु उनकी समस्या का निराकरण भी तत्परता से कर दिया।
दिव्यांग श्री रवि कश्यप ने गूगल से मुख्यमंत्री का नंबर खोज कर उन्हें शनिवार को उन्हें सीधे फोन लगाकर बात की। दो दिन के भीतर ही श्री कश्यप को मुख्यमंत्री ने ट्राईसिकल प्रदान कर दी। इस चमत्कार की उम्मीद छत्तीसगढ़ राज्य में ही की जा सकती है, जहां राज्य का मुखिया आम लोगों के लिए सहज उपलब्ध है। आज बिलासपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री बघेल ने सकरी हेलीपेड पर दिव्यांग श्री कश्यप को ट्राईसिकल भेंट की।
श्री कश्यप का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संवेदनशीलता के बारे में सुना था। गूगल से उनका नंबर खोज कर नंबर की वैधता परखने के लिए मैंने उन्हें सीधे फोन कर दिया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इत्मीनान से उनकी पूरी बात सुनी और ट्राईसिकल की उनकी मांग को पूरा करने के संबंध में आश्वस्त भी किया। श्री कश्यप बताते है कि यह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ही है, जिसके चलते उन्हें दो दिन के भीतर ही ट्राईसिकल मुख्यमंत्री ने स्वयं प्रदान कर दी है। वे कहते हैं कि छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्य है जहां के मुखिया से कोई भी व्यक्ति सीधे अपनी बात रख सकता है। श्री कश्यप ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। पिता श्री चुंगु राम कश्यप की आमदनी से ही छह सदस्यीय परिवार का गुजर-बसर होता है। इस दौरान संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि सिंह, कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर भी मौजूद थे।
खाना खजाना / शौर्यपथ /एमपी में खाने का अलग ही स्वाद होता है, इंदौरा का पोहा और भोपाल का दाल बाफला खाने में बेहद ही स्वादिष्ट लगता है। मध्यप्रदेश के खाने में हल्का तीखापन और मिठास होती है। ऐसे में एमपी में मिलने वाला जीरावन मसाला बड़ा मजेदार होता है। अगर घर में कोई सब्जी न बनी हो तो भी आप इस मसाले को पूड़ी पराठे के साथ खाया जा सकता है। इसे आप स्लाद पर भी छिड़क कर खा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं जब घर में कुछ अच्छा ना बना हो तो कैसे जीरावन मसाला बनाया जाए।
जीरावन बनाने की सामग्री
2 चम्मच जीरा
1 चम्मच साबुत धनिया
1 चम्मच सौंफ
5 से 6 लौंग
1 इंच दालचीनी का टुकड़ा
1 जायफल
1 तेजपत्ता
1 बड़ी इलायची
4 से 5 सूखी लाल मिर्च
2 चम्मच अमचूर पाउडर
1 चम्मच काला नमक
1 चम्मच सफेद नमक
1/4 चम्मच हींग
1 चम्मच हल्दी पाउडर
1/2 चम्मच सौंठ पाउडर
जीरावन बनाने का तरीका
जीरावन मसाला बनाने के लिए सबसे पहले धनिया को छोड़कर बाकी सारे मसाले ड्राई रोस्ट करें। जीरा को आधा ही लेना है और आधा कच्चा लेना है। अब साबुत धनिया भी ड्राई रोस्ट करें। इन सभी को एक प्लेट में निकालें। कढ़ाई को गर्म करें और सूखे मसाले भी रखें। अब सभी मसालों को आधा कच्चा जीरा मसाला एक साथ पीसें। जीरावन मसाला तैयार है।
ध्यान दें।
इसे एयर टाइट कंटेनर में स्टोर करें।
इसे पोहा या फिर सलाद में डालें ।
फ्राई आइटम पर भी इसे डाला जा सकता है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / तांबे के बर्तन में खाने के फायदे के बारे में हर कोई जानता है। इसे खाने से आपकी सेहत को कई पोष्क तत्व मिलते हैं। यही वजह है कि पुराने लोग तांबे के बर्तनों में खाना खाते थे। ये बर्तन सेहत के लिए भले ही फायदेमंद क्यों ना हों लेकिन लोग इनको इस्तेमाल करने से बचते हैं। क्योंकि ये बहुत ज्यादा जल्दी काले पड़ जाते हैं। अगर इनका रखरखाव सही तरीके से ना किया जाए तो ये सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। ऐसे में तांबे के बर्तन को साफ करना बहुत जरूरी है। तो चलिए जानते हैं कैसे करें तांबे के बर्तन को साफ।
1) सारे बर्तनों को आप डिशवॉशर से आसानी से साफ कर सकते हैं, लेकिन तांबे के बर्तनों को कभी भी उसमें न धोएं। इसके अलावा ऐसे डिटर्जेंट में न धोएं जिसमें ब्लीच हो।
2) कई बार आप तांबे के बर्तन को गर्म कर फिर उसमें खाना बनाते हैं। तांबे के बर्तनों के साथ ऐसा ना करें। ऐसे बर्तन जल्दी ही गर्म हो जाते हैं।
3) स्टील के बर्तनों को लोहे के जूने से घिसा जाता है। ऐसे में तांबे के बर्तनों के साथ ऐसा ना करें। ये सॉफ्ट टिन लाइनिंग को बहुत जल्दी खराब कर सकता है।
4) इन बर्तनों में मीट और मछली ना पकाएं। चिकन या चिकन ब्रेस्ट को इसमें पाकाया जा सकता है, लेकिन इसके अलावा कुछ और न पकाएं। उन चीजों को पकाने से बचें जो पकने में ज्यादा समय लगता है।
5) अगर आप तांबे के बर्तन में खाना बना रही हैं तो उसे नॉन स्टिक कुकवेयर की तरह इस्तेमाल करें। स्टील की कल्छी इस्तेमाल करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
