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शौर्यपथ विशेष / लगातार बढ़ती मंहगाई के इस दौर में सस्ती बिजली का मिलना लोगों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा लागू की गयी हाफ बिजली बिल योजना से बिजली के घरेलू उपभोक्ता लाखों परिवारों को सस्ती बिजली मिलने से बड़ी राहत मिली है। इन परिवारों को अपने घर के बिजली बिल में 400 यूनिट तक बिजली की खपत की आधी राशि का ही भुगतान करना होता है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नई सरकार के गठन के बाद सस्ती बिजली देने का फैसला किया। राज्य सरकार ने आम जनता से किया गया वायदा पूरा करते हुए हाफ बिजली बिल योजना लागू की। राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 01 मार्च 2019 से हाफ बिजली बिल योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह खपत की गई 400 यूनिट तक की बिजली पर प्रभावशील विद्युत की दरों के आधार पर आधे बिल की राशि की छूट दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख बिजली उत्पादक राज्य है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा है कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादक राज्य के साथ बिजली उपभोक्ता राज्य भी बने। अपने संसाधनों का सीधा आर्थिक लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को भी मिलना चाहिए ताकि उनका जीवन स्तर ऊंचा उठे। बिजली की ताकत सबकी ताकत बने। हाफ बिजली बिल योजना में विगत ढाई वर्षों में सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिल में 1822 करोड रूपए की राहत दी गई है। इस योजना से साढ़े 39 लाख 63 हजार परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। हाफ बिजली बिल योजना के चलते राज्य में प्रति परिवार बिजली खपत में भी वृद्धि हुई है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार आ रहा है। सस्ती बिजली से न केवल गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के घरों का बजट सुधरा है बल्कि किसानों को भी राहत मिली है। एकल बत्ती कनेक्शन योजना से लाखों गरीबों के घर भी रोशन हुए हैं।
राज्य सरकार द्वारा किसानों, गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ-साथ उद्योगों को भी रियायती दर पर अच्छी गुणवत्ता के साथ बिजली आपूर्ति के प्रबंध किए गए हैं। उर्जा विभाग की कृषि पम्प उर्जीकरण योजना में विगत ढाई वर्षों में 93 हजार से अधिक नए पम्पों को विद्युत कनेक्शन दिया गया है। इसे मिला कर राज्य में विद्युतीकृत सिंचाई पम्पों की संख्या 5 लाख 80 हजार हो चुकी है। इसके साथ ही साथ कृषि लागत में कमी लाने के उद्देश्य से किसानों को कृषक जीवन ज्योति योजना में 3 एचपी के पम्प पर सालाना 6000 यूनिट और 3 से 5 एचपी के कृषि पम्पों पर 7500 यूनिट की सालाना छूट दी जा रही है। इसके अतिरिक्त किसानों को फ्लेट रेट का विकल्प भी दिया गया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों को पूरी तरह निःशुल्क बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। इन वर्गों के किसानों के लिए विद्युत खपत की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को राज्य सरकार द्वारा 30 यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है। राज्य में 18 लाख परिवारों को योजना का फायदा मिल रहा है। सस्ती बिजली का लाभ इस्पात उद्योगों को मिलने से उन्हें राहत मिली है। राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को उर्जा प्रभार में 80 पैसे प्रति यूनिट की रियायत भी दी गई है। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बिजली की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में विद्युत अधोसंरचना के विकास के काम भी बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं। इसके तहत 33/11 के.व्ही के 312 नए विद्युत उपकेन्द्र स्थापित किए गए हैं। विद्युत लाइनों के विस्तार, नये बिजली केन्द्रों की स्थापना के साथ राज्य के 14 नगर निगम क्षेत्रों में विद्युत लाइनों को व्यवस्थित करने, ट्रांसफार्मरों को शिफ्ट करने और नए केवल लाइनों के विस्तार के 1288 कार्यों में कुल 59 करोड़ की राशि व्यय की गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मजरा टोला में 168 करोड़ रूपए से विद्युतीकरण के 3390 कार्य किए गए हैं। बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं। मोर बिजली मोर एप के माध्यम से घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली से संबंधित समस्यों का त्वरित समाधान किया जा रहा है। लगभग 59.03 लाख बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया गया है।
राज्य सरकार ने जहां समाज के हर वर्ग की बिजली संबंधी जरुरतों को ध्यान में रखते हुए, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बिजली की सतत आपूर्ति के पुख्ता प्रबंध किए हैं, वहीं राज्य के एक महत्वपूर्ण संसाधन के रुप में बिजली का लाभ किसानों, उद्योगों, गरीबों के साथ-साथ मध्यमवर्ग के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास पूरी संवेदनशीलता के साथ किया है। किफायती बिजली से खेती-किसानी से जुड़े किसानों को उत्पादन लागत कम रखने में मदद मिल रही है, वहीं सतत और रियायती दर पर बिजली की आपूर्ति उद्योगों को कठिन प्रतिस्पर्धा के दौर में टिके रहने का हौसला दे रही है। राज्य सरकार की बिजली नीति ने गरीबों और मध्यवर्ग के लोगों को भी बड़ी राहत दी है।
सेहत /शौर्यपथ /ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया शोध के मुताबिक उम्र से संबंधित आंखों की बीमारी, मोतियाबिंद और मधुमेह से संबंधित नेत्र रोग डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं। दृष्टि हानि मनोभ्रंश के पहले लक्षणों में से एक हो सकती है।
माना जाता है कि दृश्य संवेदी मार्गों की कम उत्तेजना डिमेंशिया के विकास को तेज करती है। कुछ अध्ययनों में यह पता चला है कि डिमेंशिया और नेत्र संबंधी स्थितियों के बीच एक सबंध हो सकता है, जो मोतियाबिंद, मधुमेह से संबंधित नेत्र रोग और ग्लूकोमा और याददाश्त में कमी का कारण बनता है।
उम्र के साथ बढ़ती हैं स्थितिः
इन नेत्र संबंधी स्थितियों के मामले उम्र के साथ बढ़ जाते हैं। जैसा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अवसाद और स्ट्रोक जैसी स्थितियां है और जो डिमेंशिया के लिए जोखिम कारक माने जाते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये नेत्र संबंधी स्थितियां इन स्थितियों से स्वतंत्र रूप से डिमेंशिया के जोखिम से जुड़ी हैं। इसकी जांच करने के लिए शोधकर्ताओं ने 55-73 वर्ष की आयु के 12,364 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /मानसून में हेयर फॉल होना आम बात है लेकिन जब आपके बाल नॉर्मल से ज्यादा झड़ने लग जाएं, तो फिर आपको बालों की केयर पर ध्यान देने की जरूरत है। आमतौर पर लोग बालों पर अच्छे से अच्छा शैम्पू, कंडीशनर और हेयर मास्क का इस्तेमाल तो कर लेते हैं, लेकिन वे कई ऐसी छोटी चीजों को इग्नोर कर जाते हैं, जिनकी वजह से हेयर फॉल होता है। आज हम आपको ऐसी ही गलतियां बता रहे हैं, जिनकी वजह से हेयर फॉल बढ़ता है।
कंघी करने का गलत तरीका
जब आपके बाल गीले होते हैं, तो आपको कंघी करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से बाल बहुत ज्यादा टूटते हैं। गीले बाल अगर उलझे हुए रहते हैं, तो कई लोग बड़ी लापरवाही से इन्हें सुलझाने की कोशिश करते हैं, जिसकी वजह से हेयर फॉल बढ़ता जाता है।
गन्दा तकिया
कभी-कभी आप बालों में ऑयलिंग करते हैं, तो आप उसी तकिए का इस्तेमाल करते होंगे, जिसपर आप रोजाना सोते हैं। ऐसा करने से तकिए में तेल लगा जाता है और इसमें बहुत तेजी से धूल-मिट्टी जमती जाती है। ऐसे में आप जब भी उस तकिए का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके बाल टूटते जाते हैं।
गर्म पानी से बाल धोना
कई लोग बालों को ट्रीटमेंट देने के लिए गर्म पानी से बाल धोते हैं, जबकि ऐसा करने से आपके बालों की जड़ें कमजोर होती जाती है और आपके बाल सामान्य से ज्यादा टूटने लगते हैं। गर्म पानी से बाल धोना आपके बालों को रफ भी बनाता है।
बिना सीरम के कंघी करना
सीरम सिर्फ आपके बालों में शाइन के लिए ही नहीं है, बल्कि इसे लगाने से बाल सुलझे और हेल्दी भी रहते हैं इसलिए आप जब भी बालों को धोएं, तो कंघी करने से पहले थोड़ा-सा सीरम बालों में भी जरूर लगाएं।
खाना खजाना / शौर्यपथ /ब्रेकफास्ट के लिए उपमा भी एक हेल्दी ऑप्शन माना जाता है लेकिन आज हम उपमा सूजी से नहीं बल्कि ब्रेड और दही से बनाएंगे। आपको अगर उपमा पसंद है, तो यकीन मानें कि आपको यह रेसिपी भी बहुत पसंद आएगी। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं दही और ब्रेड वाला उपमा-
सामग्री-
दही
ब्रेड
मूंगफली
हल्दी
गर्म मसाला
नींबू
विधि- -रेसिपी को शुरू करने के लिए सबसे पहले दही को अच्छे से फेंटना है। आप चाहें, तो इसे एक बार ब्लेंडर में भी चला सकते हैं।
-आपको ब्रेड भी ग्राइंड करनी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप उसे ठीक से ग्राइंड नहीं करेंगे, तो उसमें उपमा वाला टेक्सचर नहीं आएगा।
-ब्रेड को ग्राइंड करने और दही को फेंटने के बाद आप एक कढ़ाई में तेल गर्म करें. इसके बाद उसमें सरसों के बीज, करी पत्ते, हरी मिर्च, अदरक और प्याज डालकर फ्राई करें।
-अगर आप इसमें मूंगफली डालना चाहते हैं, तो पहले से ही मूंगफली को रोस्ट करें और फिर इस स्टेज पर उसे डालें।
-अब सिर्फ हल्दी पाउडर इस स्टेज पर आपको डालना है और फिर भूनना है। इसमें हम नमक या गरम मसाला पहले नहीं डालेंगे क्योंकि ऐसा करने से दही के फटने की गुंजाइश होगी।
-इस स्टेज पर आपको ब्रेड डालकर 20 सेकंड तक भूनना है और उसके बाद इसमें दही मिला देना है।
-इसे 2-3 मिनट तक पकने दें और उसके बाद इसमें थोड़ी-सी चीनी डालें और गरम मसाला आदि मिलाएं। आप इसके बाद इसमें अनारदाने और धनिया पत्ता मिलाएं। ध्यान रहे कि आपको नमक सबसे आखिर में डालना है।
-अब आप चाहें, तो इसमें नींबू का रस मिलाकर इस स्वादिष्ट उपमा को सर्व कर सकते हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /आज के वक्त में हर कोई फिट नजर आना चाहता है। जिसके लिए मेहनत भी करते हैं। लेकिन वजन कम नहीं हो पाता है। कई लोगों को वक्त की कमी के चलते जिम या योग क्लास जाने का भी वक्त नहीं मिलता है। ऐसे में घर पर ही कुछ एक्सरसाइज करने की कोशिश करते हैं। साथ ही अलग-अलग डाइट प्लान को फॉलो करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे फल है जिसका सेवन कर वजन पर कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं कौन से फल है जिसका सेवन कर वजन को कम करने में मदद मिलेगी।
- कीवी - कीवी खट्टी मीठी आती है। यह मानसून सीजन में अधिक पाई जाती है। इसमें मौजूद विटामिन सी, ई, फाइबर, फोलेट वजन घटाने में मदद करते हैं। साथ ही वेस्ट साइज को भी कम करने में मदद करते हैं। अगर आप अनिद्रा से ग्रसित है तो इसका सेवन कर सकते हैं। हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद मिलती है।
- केला - केले का सेवन करने से भी वजन कम होता है। लेकिन आप दूध केले का सेवन करेंगे तो आपका वजन बढ़ेगा। केले में मुख्य रूप से पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी 6, सी और ए मौजूद होता है। इसका सेवन करने से कैलोरी कम होती है।
- संतरा - संतरे का सेवन करके भी आप कैलोरी कम कर सकते हैं। इसमें विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। संतरे का सेवन करने से भूख जल्दी - जल्दी नहीं लगती है। इसलिए खाना खाने के बाद संतरे का सेवन किया जाता है। यह खाने को डाइजेस्ट करता है और भूख को भी कम करता है।
-खरबूजा - इस फल में कैलोरी की मात्रा कम और पानी की मात्रा अधिक होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक जिस फल में पानी की मात्रा अधिक होती है वह वेट लॉस जल्दी करते हैं। इसमें मुख्य रूप से पोटेशियम, फाइबर, बीटा-कैरोटीन और विटामिन सी मुख्य रूप से होता है।
-एवोकाडो - यह सबसे महंगा फल होता है। लेकिन यह तेजी से वजन घटाने में मदद करता है। इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। और रोज एक फल खाने से पेट भरा रहता है और भूख कम लगती है।
शौर्यपथ / हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान गणेशजी को लड्डू, सतोरी या पुरण पोली, श्रीखंड, केले का शीरा, रवा पोंगल, पयसम, मोदक आदि प्रसादों का भोग लगाया जाता है जिसमें उन्हें सबसे प्रिय मोदक है। आओ जानते हैं कि उन्हें मोदक क्यों पसंद है।
1. मोदक का वर्णन : एक बार माता पार्वती को देवताओं ने अमृत से तैयार किया हुआ एक दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर दोनों बालक (कार्तिकेय तथा गणेश) माता से मांगने लगे। तब माता ने मोदक के महत्व का वर्णन किया कि इस मोदक की गंध से ही अमरता प्राप्त होती है। इसे सूंघने और खाने वाला सभी शास्त्रों का ज्ञाता, सभी तंत्रों में प्रवीण, सभी कलाओं का जानकार और सर्वज्ञ हो जाता है।
मोदक के अमृततुल्य होने की कथा पद्म पुराण के सृष्टि खंड में मिलती है।
2. मोदक के लिए प्रतियोगिता : मोदक के महत्व का वर्णन सुनकर गणेशजी को इसके खाने की तीव्र इच्छा जागृत हुई। कार्तिकेय भी इसके खाने की जिद करने लगे। माता ने कहा कि तुममें से जो धर्माचरण के द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करके सर्वप्रथम सभी तीर्थों का भ्रमण कर आएगा, उसी को मैं यह मोदक दूंगी। माता की ऐसी बात सुनकर कार्तिकेय ने मयूर पर आरूढ़ होकर मुहूर्तभर में ही सब तीर्थों का स्नान कर लिया। इधर गणेश जी का वाहन मूषक होने के कारण वे तीर्थ भ्रमण में असमर्थ थे। तब गणेशजी श्रद्धापूर्वक माता-पिता की परिक्रमा करके पिताजी के सम्मुख खड़े हो गए।
3. तब गणेशजी बने प्रथम पूज्य : माता पिता की परिक्रमा कर उन्होंने माता पिता की स्तुति की। यह देख माता पार्वतीजी ने कहा कि समस्त तीर्थों में किया हुआ स्नान, सम्पूर्ण देवताओं को किया हुआ नमस्कार, सब यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब प्रकार के व्रत, मन्त्र, योग और संयम का पालन- ये सभी साधन माता-पिता के पूजन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हो सकते। इसलिए यह गणेश सैकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से भी बढ़कर है। अतः यह मोदक मैं गणेश को ही अर्पण करती हूं। माता-पिता की भक्ति के कारण ही इसकी प्रत्येक यज्ञ में सबसे पहले पूजा होगी।
4. कैसे बनता मोदक : मोदक भी कई तरह के बनते हैं। मोदक चावल के आटे, घी, मैदा, मावा, गुड़, सूखे मेवे, नारियल आदि से बनाया जाता है। आटे में खोपरा, गुड़, मेवा आदि भरकर उसे घी में तलकर इसे तैयार किया जाता है। उखड़ी के मोदक : इसमें चावल के आटे से मोदक बनाए जाते हैं जिसके अंदर नारियल और शक्कर के मिश्रण को भरा जाता है और फिर उसे उबालकर बनाया जाता है।
5. मोदक का महत्व : गणपत्यथर्वशीर्ष में लिखा है- 'यो मोदकसहस्त्रेण यजति स वांछितफलमवाप्नोति।' अर्थात गणेशजी को एक हजार मोदक का भोग जो लगाता है उसे मनचाहा फल प्रदान प्राप्त होता है। कहते हैं कि गणेशजी का एक दांत टूटा हुआ है इसलिए गणेशजी को एकदंत कहते हैं। मोदक तलकर और उबालकर अर्थात दो तरह से बनाए जाते हैं। इसके प्रक्रिया से मोदक मोदक मुलायम और मुंह में आसानी से घुल जाने वाले होते हैं। इसलिए टूटे दांत होने पर भी गणेश जी इसे आसानी से खा लेते हैं।
आस्था / शौर्यपथ /ज्योतिष विद्वानों के अनुसार राहु और केतु के कारण ही कालसर्प दोष लगता है और उसी के कारण जीवन में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जब कुंडली में सारे ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं तो उसे पूर्ण कालसर्प योग कहते हैं। कालसर्प दोष 12 प्रकार का होता है।
1. कालसर्प दोष की पूजा उज्जैज (मध्यप्रदेश), ब्रह्मकपाली (उत्तराखंड), त्रिजुगी नारायण मंदिर (उत्तराखंड), प्रयाग (उत्तरप्रदेश), त्रीनागेश्वरम वासुकी नाग मंदिर (तमिलनाडु) आदि जगहों पर होती है परंतु त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) को खास जगह माना जाता है।
2. नाशिक के पास गोदावरी तट पर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यही पर नागपंचमी और विशेष दिनों में कालसर्प दोष की पूजा होती है। इस पूजा के लिए यह सबसे प्रमुख स्थान है।
3. इस एकमात्र स्थान पर प्रतिवर्ष लाखों लोग कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। कहते हैं कि यहां के शिवलिंग के दर्शन करने से ही कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर में कालसर्प शांति, त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबलि की पूजा संपन्न होती है।
4. कहते हैं कि इस मंदिर में 3 शिवलिंगों की पूजा की जाती है जिनको ब्रह्मा, विष्णु और शिव के नाम से जाना जाता है। मंदिर के पास 3 पर्वत स्थित हैं, जिन्हें ब्रह्मगिरी, नीलगिरी और गंगा द्वार कहा जाता है। ब्रह्मगिरी पर्वत भगवान शिव का स्वरूप है, नीलगिरी पर्वत पर नीलाम्बिका देवी और दत्तात्रेय भगवान का मंदिर है और गंगा द्वार पर्वत पर देवी गोदावरी मंदिर है।
5. यहां पर कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए संपूर्ण पूजा विधिवत रूप से की जाती है, जिसमें कम से कम 3 घंटे लगते हैं। अन्य स्थानों की अपेक्षा इस स्थान का खास महत्व है क्योंकि यहां पर शिवजी का महा मृत्युंजय रूप विद्यमान है।
6. तीन नेत्रों वाले शिवशंभु के यहां विराजमान होने के कारण इस जगह को त्र्यंबक (तीन नेत्रों वाले) कहा जाने लगा। उज्जैन और ओंकारेश्वर की ही तरह त्र्यंबकेश्वर महाराज को यहां का राजा माना जाता है।
कालसर्प दोष की पूजा और कहां-कहां होती है?
कालसर्प दोष निवारण के लिए नागपंचमी के दिन को सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि इस दिन नागों की पूजा का विधान है। इसलिए इस दिन कालसर्प दोष वालों को चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा भगवान शिव को अर्पित करने को कहा जाता है इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। आओ जानते हैं कि कहां कहां होती है कालसर्प दोष निवारण की पूजा।
1. त्र्यंबकेश्वर : द्वादश ज्योतिर्लिंग में से केवल एक नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का नागपंचमी के दिन अभिषेक, पूजा की जाए तो इस दोष से हमेशा के लिए मुक्ति मिलती है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक के पास गोदावरी के तट पर स्थित है। कालसर्प योग से मुक्ति के लिए बारह ज्योतिर्लिंग के अभिषेक एवं शांति का विधान बताया गया है।
2. बद्रीनाथ धाम : चार धामों में एक बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। कहते हैं कि यहां पर भी कालसर्प दोष के साथ-साथ पितृदोष की भी पूजा कराई जाती है। बद्रीनाथ धाम में ब्रह्मकपाली स्थान पर यह पूजा होती है।
3. त्रिजुगी नारायण मंदिर : केदारनाथ धाम से करीब 15 किलोमीटर दूर त्रिजुगी नारायण मंदिर है। कहते हैं कि यहां पर चांदी, तांबे या सोने के नाग-नागिन (दो बच्चों सहित) अर्पित करने और यहां आंगन में जल रही ज्वाला में चंदन, गुलरिया, पीपल की लकड़ी अर्पित करने और विधिवत पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
5. प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी के संगम तट पर काल सर्प दोष और पितृदोष की पूजा को उत्तम माना गया है। यहां पूजन के अलावा दर्शन मात्र से भी कालसर्प दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
5. त्रीनागेश्वरम वासुकी नाग मंदिर : यह दक्षिण भारत में तंजौर जिले में स्थित त्रीनागेश्वरम वासुकी नाग मंदिर के पास भी काल सर्पदोष से मुक्ति हेतु पूजा की जाती है।
6. उज्जैन सिद्धवट : यह भी माना जाता है कि उज्जैन की क्षिप्रा नदी के तट पर सिद्धवट नामक स्थान पर पितृदोष के साथ ही काल सर्पदोष से मुक्ति की पूजा भी होती है।
भिलाई /शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र अपने उत्कृष्ट उत्पादन के साथ-साथ श्रेष्ठ प्रशिक्षण के लिए भी जाना जाता है। भिलाई इस्पात संयंत्र का मानव संसाधन विकास विभाग अपने उत्कृष्ट प्रषिक्षण कार्यक्रमों का ऑफ-लाइन तथा ऑन-लाइन आयोजनों से भिलाई इस्पात संयंत्र के साथ-साथ सेल के अन्य इकाईयों तथा विभिन्न कंपनियों व कॉलेजों को भी प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। यह उल्लेखनीय है कि संयंत्र के कार्यपालक निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन एस के दुबे के कुशल मार्गदर्शन तथा एचआरडी विभाग के महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष सौरभ सिन्हा के नेतृत्व में मानव संसाधन विकास विभाग ने प्रषिक्षण में अपने उत्कृष्टता का सफर निरन्तर जारी रखा है।
इस तारतम्य में प्रबंधकीय विषयों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी एचआरडीसी के तहत संचालित भिलाई मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। आज बीएमडीसी के नाम से प्रचलित इस प्रशिक्षण संस्थान ने कोरोना संकटकाल से लेकर अब तक अनेक प्रबंधकीय प्रषिक्षणों को बखूबी अंजाम दिया है। कोरोनाकाल में प्रषिक्षण के नियमित आयोजन निष्चित ही बाधित हुआ है परन्तु वर्तमान में प्रषिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन प्रारम्भ कर दिया गया है।
भिलाई इस्पात संयंत्र आज संयंत्र अपने उत्पादन की गति को सामान्य बनाने में महती योगदान दिया है वहीं प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी कोरोना के साये से बाहर आने की पुरजोर कोषिष की है। संयंत्र का उत्पादन सामान्य होने के साथ ही संयंत्र की प्रशिक्षण गतिविधियों ने भी जोर पकड़ते हुए सामान्यता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अब कोरोना प्रोटोकाल के साथ सभी प्रशिक्षण सामान्य रूप से आयोजित किये जा रहे है।
बीएमडीसी के उपमहाप्रबंधक संजीव श्रीवास्तव तथा सहायक महाप्रबंधक एस के पालो और उनकी टीम के सतत् प्रयासों ने प्रबंधकीय प्रशिक्षण को नई ऊँचाई देने के साथ-साथ इन प्रशिक्षणों को उत्कृष्ट बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आज प्रबंधकीय प्रशिक्षण के क्षेत्र में बीएमडीसी ने एक अलग पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की है।
इस विशाल मानव निर्मित जंगल में भूपेश बघेल ने लगाया बरगद का पौधा
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बनाया गया था प्रस्ताव, 83 हजार से अधिक लगे पौधे
दुर्ग/शौर्यपथ / देश में पर्यावरण की मानव निर्मित विशाल धरोहर दुर्ग जिले में बनी है। आज मुख्यमंत्री ने इस प्रोजेक्ट का अवलोकन किया। नंदिनी की खाली पड़ी खदानों की जमीन में यह प्रोजेक्ट विकसित किया गया है। लगभग 3.30 करोड़ रुपए की लागत से यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। आज जन वन कार्यकम में मुख्यमंत्री ने यहाँ बरगद का पौधा लगाया और जंगल का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि इसके लिए डीएमएफ तथा अन्य मदों से राशि ली गई है। पर्यावरण संरक्षण के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया। यह प्रोजेक्ट देश दुनिया के सामने उदाहरण है कि किस तरह से निष्प्रयोज्य माइंस एरिया को नेचुरल हैबिटैट के बड़े उदाहरण के रूप में बदला जा सकता है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करने यह प्रशंसनीय कदम है। यहां 100 एकड़ में औषधीय पौधे तथा फलोद्यान भी विकसित करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिये ये बड़ी पहल है। इससे प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
इस अवसर पर अपने संबोधन में वन मंत्री ने कहा कि हमने प्रकृति को सहेजने बड़े निर्णय लिए। चाहे लेमरू प्रोजेक्ट हो या नदियों के किनारे प्लांटेशन, प्रकृति को हमने हमेशा तवज्जो दी। आज यह मानव निर्मित जंगल का बड़ा काम हुआ है। मैं इसके लिए क्षेत्र की जनता को बधाई देता हूँ।
इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं वनमंत्री मोहम्मद अकबर, पीएचई मंत्री गुरु रुद्र कुमार, उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमेश पटेल ने भी पौधरोपण किया।
उल्लेखनीय है कि 17 किलोमीटर क्षेत्र में फैले नंदिनी के जंगल में पहले ही सागौन और आंवले के बहुत सारे वृक्ष मौजूद हैं। अब खाली पड़ी जगह में 83,000 पौधे लगाये गये हैं। इसके लिए डीएमएफ-एडीबी से राशि स्वीकृत की गई। इस अवसर पर पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने विस्तार से प्रोजेक्ट की जानकारी दी और इस कार्य मे लगे अधिकारियों को बधाई दी। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे तथा डीएफओ धम्मशील गणवीर ने विस्तार से प्रोजेक्ट की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। उन्होंने बताया कि 83000 पौधे लगाये जा चुके हैं। 3 साल में यह क्षेत्र पूरी तरह जंगल के रूप में विकसित हो जाएगा। यहां पर विविध प्रजाति के पौधे लगने की वजह से यहां का प्राकृतिक परिवेश बेहद समृद्ध होगा। श्री गणवीर ने बताया कि यहां पर पीपल, बरगद जैसे पेड़ लगाए गये हैं जिनकी उम्र काफी अधिक होती है साथ ही हर्रा, बेहड़ा, महुवा जैसे औषधि पेड़ भी लगाए गये हैं। इस मौके पर पीसीसीएफ वन्य संरक्षण नरसिंह राव, लघु वनोपज के एमडी संजय शुक्ला, आईजी विवेकानंद सिन्हा, एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही बीएसपी सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता भी उपस्थित रहे।
शौर्य पथ । यह दुर्गा भाभी हैं, वही दुर्गा भाभी जिन्होंने साण्डर्स वध के बाद राजगुरू और भगतसिंह को लाहौर से अंग्रेजो की नाक के नीचे से निकालकर कोलकत्ता ले गयी. इनके पति क्रन्तिकारी भगवती चरण वोहरा थे. ये भी कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद के पास आखिरी वक्त में जो माउजर था, वो भी दुर्गा भाभी ने ही उनको दिया था.
14अक्टूबर 1999 में वो इस दुनिया से गुमनाम ही विदा हो गयी कुछ एक दो अखबारों ने उनके बारे में छापा बस.
आज आज़ादी के इतने साल के बाद भी न तो उस विरांगना को इतिहास के पन्नों में वो जगह मिली जिसकी वो हकदार थीं और न ही वो किसी को याद रही चाहे वो सरकार हो या जनता.
एक स्मारक का नाम तक उनके नाम पर नही है कहीं कोई मूर्ति नहीं है उनकी. सरकार तो भूली ही जनता भी भूल गयी,
ऐसी वीर वीरांगनाओं को हम शत शत नमन करते है और भविष्य मे ऐसे तमाम वीरों को सम्मान दिलाने के लिये प्रयासरत रहें....!
सेहत / शौर्यपथ / शरीर का ध्यान रखना हो तो हम चेहरे और बालों का पूर्ण रूप से ध्यान रखते हैं, लेकिन हम अक्सर अपने पैरों का ध्यान रखना भूल जाते हैं। हालांकि आपके पैर बहुत सारे टॉक्सिन को इकट्ठा करते हैं और शरीर के किसी अन्य शरीर हिस्से के समान ध्यान देना चाहिए। यकीनन आपको दिनभर में पैरों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता होगा, तो रात का समय आपके लिए है। सोने से पहले पैरों पर तेल लगाने के कई फायदे हैं। ऐसे में आप नारियल, तिल, लैवेंडर और यहां तक कि बादाम का तेल लगा सकते हैं। तो आज जानते हैं मसाज करने का तरीका और इसके फायदे।
क्या है फीट ऑयल के फायदे
1) इंप्रूव ब्लड सर्कुलेशन
कई लोगों का पूरा दिन बैठने में या फिर बहुत अधिक काम में निकल जाता है। लंबे समय तक बैठे रहने से पैरों में सही तरह से ब्लड रुक जाता है। अपने पैरों को स्वस्थ्य रखने के लिए आपको केवल तेस मालिश के लिए 5 मिनट का समय निकालना होगा। सोने से ठीक पहले अपनी पसंद के किसी भी तेल से अपने पैरों की मालिश करें।
2) नींद
सोने से पहले पैरों की तेल मालिश आपको तनावमुक्त और आराम मिलता है। यह तनाव से छुटकारा दिलाता है और आपकी नसों को आराम देता है। आपके पैरों में कई एक्यूपंक्चर बिंदुओं को भी सक्रिय करते हैं।
3) दर्द को कम करता है
तेल मालिश सूजन को भी शांत करती है और पैरों में किसी भी प्रकार के तनाव या दर्द से आराम देने में मदद करता है। तलवे में मालिश, तनावपूर्ण मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है और बेहतर नींद के लिए आपके पूरे शरीर को आराम देता है ।
4) पीएमएस के लक्षण
पीएमएस के लक्षण आमतौर पर सूजन, अनिद्रा और ऐंठन से पीड़ित करते हैं। ऐसे में पैरों की मालिश इन लक्षणों को नियंत्रित करने में फायदेमंद साबित हुई है। आप अपने पैरों की मालिश लैवेंडर के तेल से कर सकते हैं, जिसमें एक मीठी खूशबू होती है जो राहत देने में मदद करता है।
कैसे करें पैरों की मसाज
सोने से पहले अपने पैरों को अच्छे से साफ करें और फिर बेड पर बैठ कर पैरों को सीधे फैलाएं। अब तेल की कुछ बूंदें लें और एक-एक कर दोनों पैरों की मसाज करें। हल्के हाथ से मसाज करें और पैरों के तलवों को हल्के-हल्के प्वॉइंट दबाएं। इसे कम से कम 5 से 10 मिनट के लिए करें। रिलेक्स करने के लिए तेल को थोड़ा गर्म करें और फिर इस्तेमाल करें। अगर पैर बहुत ज्यादा ऑयली लगे तो और तौलिया से डैब कर सकते हैं। ध्यान रखें की आप पैरों को रगड़े नहीं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /पूरे घर में किचन और बाथरूम को सबसे ज्यादा क्लीन रखा जाता है। किचन में बर्तन धोते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि सिंक साफ रहेष क्योंकि कई बार सिंक में खाने का सामान जाने से वह जाम हो जाती है। क्योंकि कई बार बर्तन धोते समय चायपत्ती या फिर अन्य खाने का सामान सिंक में छूट जाता है जिसकी वजह से कई बार सिंक जाम हो जाती है। सिंक पाइप जाम होने के बाद जलभराव की समस्या होने लगती है। ऐसे में कुछ लोग सिंक पाइप को साल में एक बार बदलवा लेते हैं। हालांकि अगर इस पाइप की नियमित रूप से सफाई हो तो ये लंबे समय तक चलेगा और इसमें से आनी वाली बदबू से भी बचा जा सकता है। तो आज जानते हैं कुछ घरेलू उपाय जिसकी मदद से आप पाइप को मिनटों में साफ कर सकते हैं।
इसे साफ करना आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन घर को साफ रखने के लिए आपको ये करना होगा। आप मुंह पर कपड़ा बांध कर और हाथ में गल्व्स पहन कर ही इसे करें।
1) नींबू के छिलके और गुनगुना पानी
कई लोग सिंक में बहुत ज्यादा गर्म पानी डालते हैं। इससे अगर आपका पाइप प्लास्टिक का होगा तो वह पिघल सकता है। इसलिए आप पानी को गर्म करें और उसमें नींबू के छिलके मिक्स करें। कम से कम 7 से 8 छिलके डाल दें। थोड़ी देर तक उबालें और फिर गैस बंद करें। पानी को गुनगुना होने दें। इस पानी में 1 चम्मत डिश वॉश मिलाएं और गुनगुने पानी को पाइप में डालें।
2) विनेगर और डिटर्जेंट पाउडर
एक कप पानी में 2 कप विनेगर मिक्स करें और फिर इसमें डिटर्जेंट पाउडर मिक्स करें। फिर इसमें एक चम्मच बेकिंग पाउडर मिक्स करें। मिश्रण को पाइप में डालें और फिर इसको 4-5 बार नॉर्मल पानी से साफ करें। अगर पाइप में कुछ फंसा हो तो हैंगर वायर कै इस्तेमाल कर सकते हैं।
ध्यान दें
1) सिंक का पाइप अगर डिटैचेबल है तो महीने में एक बार इसे खोल कर जरूर साफ करें। ध्यान दे की इसके अदर ज्यादा कूड़ा ना अटका रहे।
2) सिंक एरिया पर कुछ भी सामान ना रखने की कोशिश करें। क्योंकि कई बार सिंक लीक हो जाती है, ऐसे में सामान रखा रहने पर चेक करना मुश्किल हो सकता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /कई लोगों को डोडा मिठाई बहुत पसंद होती है लेकिन इस मिठाई को घर में बनाने में काफी टाइम लगता है। दूध को जलाकर डोडा बनाने का प्रोसेस काफी लम्बा है इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं डोडा बर्फी बनाने की ऐसी रेसिपी जिससे इसे बनाने में कम समय लगेगा।
डोडा बर्फी बनाने की सामग्री
2 कप
2 कप खोया
1/2 कप दूध
1 1/2 कप चीनी बूरा
1/2 कप मिल्क पाउडर
1/2 टीस्पून बेकिंग पाउडर
2 टीस्पून घी
2 टीस्पून कोकोआ पाउडर
1 टेबलस्पून पिस्ता
1 टेबलस्पून काजू
डोडा बर्फी बनाने की विधि
- सबसे पहले पनीर और खोया कद्दूकस कर लें।
- मीडियम आंच पर पैन में घी डालकर गरम करने के लिए रख दें।
- इसमें खोया डालकर अच्छी तरह से ब्राउन होने तक भून लें।
- जब खोया भून जाए तब पनीर डालकर दोनों को चलाते हुए भून लें।
-जब मिश्रण घी छोड़ने लगे तब चीनी बूरा और दूध डालकर मिक्स कर चलाते हुए पकाएं।
-चीनी के घुलने पर इसमें मिल्क पाउडर डालकर मिक्स कर लगातार 2 मिनट तक चलाते हुए पकाएं।
-2 मिनट बाद इसमें बेकिंग पाउडर और कोकोआ पाउडर मिलाकर लगभग 5 मिनट तक चलाते रहें। जब मिश्रण पैन छोड़ने लगे तब गैस बंद कर दें।
-एक ट्रे पर घी लगाकर चिकना कर लें। तैयार मिश्रण ट्रे पर डालकर ऊपर से पिस्ता और काजू डाल दें।
-इसे सेट होने के लिए लगभग 2 घंटे तक अलग रख दें। तय समय के बाद बर्फी को ट्रे से निकालकर मनचाहे पीस में काट लें।
-तैयार है डोडा बर्फी। खाएं और खिलाएं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /वेट लॉस के लिए आप कितनी कोशिशें करते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि आप वजन कम करने के लिए जिस भी ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं, वह उल्टी पड़ जाती है और धीरे-धीरे आपका वजन बढ़ने लगता है। जैसे, कई लोग वजन कम करने के लिए रात का खाना छोड़ देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं? कुछ स्थितियों में रात का खाना छोड़ने से आपका वजन कम होने की बजाय बढ़ने लगता है। आइए, जानते हैं कि अगर आप भी डिनर स्किप प्लान को फॉलो करना चाहते हैं, तो आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
रात का खाना न करें स्किप
रात का खाना न खाना वेट लॉस के लिए अच्छा ऑप्शन नहीं है। इससे नींद ठीक से नहीं आने से लेकर शरीर में शरीर में विटामिन और न्यट्रिशन की हो सकती है। इसके अलावा शरीर का मेटाबॉलिज्मे स्लों पड़ सकता है। वहीं, रात को खाना छोड़ने से अगली सुबह आपको तेज भूख लग सकती है, जिससे आप ज्यादा खा लेते हैं। वहीं, जब आप दिन भर काम करते हैं, तो रात के समय शरीर को एनर्जी रिस्टोर करने के लिए पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है लेकिन जब आप रात में कुछ नहीं खाते, तो इससे सिर्फ शरीर में कमजोरी आ जाती है।
वेट लॉस प्लानिंग में काम की बातें-
-आप डिनर और सोने के बीच में एक अच्छा गैप रखें, यदि आप इसे रेग्युलर फॉलो करते हैं, तो आपको अपना डिनर कभी भी स्किप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-रात के खाने के लिए खिचड़ी एक अच्छा ऑप्शन है। यह खाने में हल्का और फाइबर से भरा होता है, जिसे खाने से लम्बे समय तक आपका पेट भरा रहता है।
-रोटी के साथ चिकन टिक्का या फिर दाल-चावल भी एक अच्छा ऑप्शन हैं, जिन्हें खाने के बाद आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और रात में कुछ अनहेल्दी खाने का मन नहीं करता।
-शाम को 7 बजे के बाद नमक कम खाएं। नमक लेने से शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ जाती है, जो वजन बढ़ाने का काम करती है। आप डिनर और सोने के बीच में एक अच्छा गैप करें ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
