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आस्था / शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में भैरव को विशाल आकार के काले शारीरक वर्ण वाले, हाथ में भयानक दंड धारण किए हुए और साथ में काले कुत्ते की सवारी करते हुए वर्णन किया गया है। दक्षिण भारत में ये 'शास्ता' के नाम से तथा माहाराष्ट्र राज्य में ये 'खंडोबा' के नाम से जाने जाते हैं। मुख्यत: काल भैरव और बटुक भैरव की पूजा का प्रचलन है। श्री लिंगपुराण 52 भैरवों का जिक्र मिलता है।
मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं- 1.असितांग भैरव, 2. रुद्र भैरव, 3. चंद्र भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है। आओ जानते हैं भगवान बटुक भैरव की संक्षिप्त जानकारी।
बटुक भैरव :
1. 'बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन:। ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे।।'- अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है।
2. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है। इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। उक्त सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है। यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। 'महा-काल-भैरव' मृत्यु के देवता हैं। 'स्वर्णाकर्षण-भैरव' को धन-धान्य और संपत्ति का अधिष्ठाता माना जाता है, तो 'बाल-भैरव' की आराधना बालक के रूप में की जाती है। सद्-गृहस्थ प्रायः बटुक भैरव की उपासना ही करते हैं, जबकि श्मशान साधक काल-भैरव की।
3. बटुक भैरवजी तुरंत ही प्रसन्न होने वाले दुर्गा के पुत्र हैं। बटुक भैरव की साधना से व्यक्ति अपने जीवन में सांसारिक बाधाओं को दूर कर सांसारिक लाभ उठा सकता है। बटुक भैरव आराधना के लिए मंत्र है- ।।ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाचतु य कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।।
4. साधना का मंत्र : '।।ॐ ह्रीं वां बटुकाये क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये कुरु कुरु बटुकाये ह्रीं बटुकाये स्वाहा।।' उक्त मंत्र की प्रतिदिन 11 माला 21 मंगल तक जप करें। मंत्र साधना के बाद अपराध-क्षमापन स्तोत्र का पाठ करें। भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ भी करना चाहिए।
5. एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है। आराधना का दिन रविवार और मंगलवार नियुक्त है। पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है। उक्त माह के रविवार को बड़ा रविवार मानते हुए व्रत रखते हैं।
6. आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं। जुआ, सट्टा, शराब, ब्याजखोरी, अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें। दांत और आंत साफ रखें। पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें। अपवित्रता वर्जित है।
7. सुर और सुरों के महाराज बटुक भैरव का मंदिर लखनऊ शहर के व्यस्ततम क्षेत्र केसरबाग में स्थित है। बटुक भैरव का यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। माना जाता है कि बटुक भैरव सुरों के राजा हैं, इसलिए यहां मांगी जाने वाली मन्नत भी कला, संगीत और साधना से जुड़ी होती है।
8. इस साधना से बटुक भैरव प्रसन्न होकर सदा साधक के साथ रहते हैं और उसे सुरक्षा प्रदान करते हैं अकाल मौत से बचाते हैं। ऐसे साधक को कभी धन की कमी नहीं रहती और वह सुखपूर्वक वैभवयुक्त जीवन- यापन करता है। जो साधक बटुक भैरव की निरंतर साधना करता है तो भैरव बींब रूप में उसे दर्शन देकर उसे कुछ सिद्धियां प्रदान करते हैं जिसके माध्यम से साधक लोगों का भला करता है।
शौर्यपथ शिक्षा / प्रश्नों को हल करने के लिए साल भर कड़ी मेहनत करते रहने की चिंता और तनाव में बहुत छोटी किन्तु सर्वाधिक असरकारी गलतियों से मिलने वाला परिणाम जीवन भर हमें ज्यादा परेशान करता है | इस आर्टिकल में नीट जैसी परीक्षा में परीक्षार्थियों से होने वाले कॉमन-मिस्टेक्स से उन्हें सावधान करने की कोशिश की गई है |
नीट देश की प्रतिष्ठित और बहुत महत्वाकांक्षी परीक्षा है | इस परीक्षा के प्रश्न पत्र और आंसर शीट (ओ एम आर शीट ) भी विशेष कोड के साथ विशेष ऑर्डर में प्रिंट किये गए होते हैं | नीट के परीक्षार्थियों को आंसर देना शुरू करने से पहले अपने प्रश्नपत्र-बुकलेट और आंसर शीट के कोड को मिला लेना चाहिए| दोनों का एक ही कोड होना चाहिए | कोड अलग होने पर तुरंत इस गलती की जानकारी वहां उपस्थित परीक्षा प्रभारी को देना चाहिए| क्योंकि अलग-अलग कोड वाले प्रश्न-पत्रों में प्रकाशित प्रश्नों के क्रम (आर्डर ऑफ़ क्वेश्चन) अलग-अलग होते हैं इसलिए उस विशेष कोड के आंसर शीट में प्रकाशित विकल्पों यानी संभावित आंसर से संबंधित गोले (सर्किल) भी अलग क्रम में होते हैं|
इसलिए तनाव और हड़बड़ी में परीक्षार्थी कोड को ना मिलाकर सीधे आंसर देना शुरू ना कर दें| आंसर देना शुरू करने से पहले एक ज़रूरी कार्य यह भी है कि परीक्षार्थी अपने प्रश्न-पत्र में प्रकाशित पृष्ठों की संख्या को ठीक से चेक कर लें अर्थात आपके प्रश्न-पत्र में प्रकशित पृष्ठों की संख्या पूरी है या नहीं| यानी प्रश्न-पत्र के ऊपर प्रकाशित कुल पृष्ठों की संख्या और अन्दर संलग्न (अटैच) पृष्ठों की संख्या पूरी है या नहीं| एक सामान्य गलती आंसर शीट (ओएमआर शीट) में दिए गए गोले (सर्किल) को ठीक ढंग से नहीं भरने की भी होती हैं| ओएमआर अर्थात ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन। यह स्कैनर की तरह कार्य करता है। यह शीट कुछ विशेष प्रकार के चिन्हों या फिर मार्क्स को (आंसर या रिस्पांस को) पहचानने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
ओएमआर शीट को लेजर लाइट के माध्यम से डाटा एंट्री में उपयोग की जाती है। ओएमआर शीट में परीक्षार्थियों के द्वारा जो काले घेरे किए गए होते हैं वहां से लेजर की मात्रा कम वापस आती है क्योंकि काला रंग प्रकाश का अच्छा अवशोषक होता है यानी लाइट को काला रंग अच्छे से सोख लेता है| इसलिए जहां पर गोले को काला नहीं किया हुआ है, केवल वहां से लेजर लाइट की मात्रा ज्यादा वापस आती है। इस प्रकार ओएमआर स्कैनर हमारी शीट में दिए हुए उत्तरों या रिस्पांस को वैज्ञानिक विधि से तुरंत पहचान लेता है। ओएमआर शीट को यदि अच्छे से नहीं भरा गया हो तो ओएमआर स्कैनर उसके डाटा को कलेक्ट नहीं करेगा। इसलिए इस शीट को भरते समय गोले को पूरी तरीके से काला करना जरूरी होता है अन्यथा मशीन उसे नहीं पढ़ पाएगी। अनेक परीक्षार्थी इस शीट को भरने में ही गलतियां करते हैं | एक से अधिक विकल्पों में काला रंग भर देना या किसी आंसर को मिटाने, बदलने का प्रयास करते हुए बाद में किसी अन्य आंसर (विकल्प) में काला रंग भरना या निर्धारित स्थान (सर्किल) में सही ढंग से काला रंग नहीं भरना भी सामान्य तौर पर होने वाली गलतियां हैं|
ओएमआर शीट में काला करने के अलावा किसी और तरह का निशान जैसे की टिक या क्रॉस नहीं लगाया जाना चाहिए।गोला भरते वक्त सावधानी यह भी रखें कि कोई लाइन या निशान बाहर ना हो| यानी काला निशान (स्याही) केवल गोले के अंदर ही रहे।
किसी भी एग्जाम को फेस करते समय पहली और आवश्यक योग्यता परीक्षार्थी का खुश रहना और उस एग्जाम के दिशा-निर्देशों (गाइडलाइंस) के प्रति ईमानदार रहना होता है| इस योग्यता के सामने टेंशन, एग्जाम -फोबिया या निराशापन की चुनौतियों का असर अपने आप नगण्य हो जाता है|
साभार : योगेश अग्रवाल, साइंस-मैथ्स शिक्षक
रायपुर / शौर्यपथ लेख / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में परंपरागत व्यवसायों को प्रोत्साहन देकर उन्हें एक बार फिर नवजीवन प्रदान करने के लिए बड़ी पहल की गयी है। लोहारी, रजककारी, तेलघानी और चर्मशिल्प जैसे व्यवसाय हमारे ग्रामीण जनजीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। शहरीकरण, औद्योगीकरण और बाजारीकरण के दौर में इन व्यवसायों का महत्व धीरे-धीरे कम होता गया। दक्षता के बावजूद इनसे जुड़े लोग अपने परम्परागत कार्यों से दूर होते गए। जीवकोपार्जन के लिए रोजगार और आय का जरिया जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया, इसलिए वे दूसरे काम-धंधों को अपनाने लगे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने इन व्यवसायों से जुड़े लोगों की यह विवशता पूरी संवेदनशीलता के साथ महसूस की और इन व्यवसायों को पुनर्जीवन देने का बड़ा फैसला लिया। आज भी ग्रामीण अंचलों में इन व्यवसायों में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। इसलिए राज्य सरकार द्वारा पराम्परागत व्यवसायों को मदद देकर प्रोत्साहित करने के लिए चार बोर्डों छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड और छत्तीसगढ़ चर्मशिल्प विकास बोर्ड का गठन किया गया है।
परम्परागत व्यवसायों के लिए गठित किए गए ये बोर्ड अपने अपने क्षेत्र से संबंधित व्यवसायों को प्रोत्साहन देकर रोजगार के अवसर बढ़ाने में योगदान दंेगे। छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड लौहशिल्पकारों को, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड तेलघानी को, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड रजककारों को और छत्तीसगढ़ चर्मशिल्प विकास बोर्ड चर्म शिल्पकारों को स्वरोजगार के लिए मदद देंगे। संबंधित बोर्ड अपने क्षेत्र से जुड़े शिल्पकारों और लोगों को उन्नत प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण प्रदान करने के साथ ऋणग्रस्त शिल्पकारों और व्यवसाय में संलग्न लोगों को स्वरोजगार के लिए बैंकों से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।
राज्य शासन द्वारा गठित इन बोर्डों के संचालक मण्डल में राज्य शासन द्वारा अध्यक्ष तथा चार अशासकीय सदस्य नामित किए जायेंगे। बोर्ड के संचालक मंडल में आवश्यकतानुसार अन्य संबंधित विषय विशेषज्ञों को अशासकीय सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जा सकेगा। राज्य शासन के द्वारा नामंकित अधिकारी बोर्ड के प्रबंध संचालक होंगे। इन सभी बोर्ड का मुख्यालय रायपुर में होगा।
राज्य सरकार द्वारा इन बोर्डों के गठन की अधिसूचना के अनुसार विकास बोर्डों की कार्य अवधि तीन वर्ष होगी। बोर्ड की तीन वर्ष की कार्य अवधि के पश्चात् बोर्ड स्वमेव समाप्त माना जाएगा। बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों को वित्त विभाग के प्रचलित नियम और निर्देशों के अनुसार सुविधाएं देय होंगी।
विकास बोर्डों द्वारा स्थानीय उपलब्ध संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए अपने क्षेत्र से जुड़े व्यवसाय को अधिक लाभप्रद बनाने और उनसे जुड़े कार्यों के विकास के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नीतियों और कार्यक्रम के संबंध में सुझाव दिए जाएंगे। विकास बोर्डों द्वारा परम्परागत व्यवसायों की गुणवत्ता वृद्धि, समस्याओं और आवश्यकताओं से संबंधित अनुसंधान कार्य तथा व्यवसायों से शिक्षित युवाओं और महिलाओं को जोड़ने के उपायों के संबंध में भी सुझाव दिए जाएंगे।
प्रदेश में परम्परागत व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरु की गयी पौनी-पसारी योजना के बाद राज्य सरकार द्वारा चार बोर्डों का गठन दूसरी बड़ी पहल है। वंशानुगत रुप से परम्परागत कार्य करने वालों और इन व्यवसायों से जुड़ने वाले लोगों को इन बोर्डों के जरिए जरुरी मदद, उन्नत उपकरण और तकनीकी मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे उनके कौशल और कार्यकुशलता में और अधिक सुधार होगा। इन व्यवसायों में अच्छे अवसर निर्मित होंगे, ये व्यवसाय लाभप्रद बनेंगे और जिससे परम्परागत व्यवसायों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
रायपुर / शौर्यपथ /
कोविड संक्रमण काल में मच्छर जनित रोगों से जागरूक होकर ही लड़ा जा सकता है। आसपास सफाई के साथ-साथ पानी एकत्रित नहीं होने पाए इसका सभी को विशेष ध्यान रखना होगा । इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम द्वारा कोरोना वायरस के साथ-साथ डेंगू के प्रसार को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने कहा, 'Óजागरूकता ही डेंगू के डंक से बचाती है, डेंगू एडीज एजिप्टी रोग वाहक मच्छर के द्वारा फैलता है। इस रोग का प्रसार अधिकतर जुलाई से नवंबर माह के मध्य तक होता है। यह मच्छर घर के अंदर और उसके आसपास के स्थानों पर रहता है, वहीं पर पलता है और केवल दिन के समय में ही काटता है।
यह एक प्रभावित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में तेजी से प्रसार करता है। डेंगू बुखार की रोकथाम एवं निवारण में जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। डेंगू में रोगी के शरीर पर बुखार के साथ साथ लाल दाने निकल आते हैं। दो से सात दिनों की अवधि के तीव्र ज्वर के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, बदन दर्द, शरीर पर महीन दाने एवं खराश होने पर रोगी संदेहात्मक श्रेणी में होता है। प्रारंभिक लक्षण तथा परीक्षण जांच के आधार पर डेंगू के संभावित रोगियों की पहचान की जाती है।"
डॉ. बघेल कहती है, "वर्तमान समय में रुक-रुक कर हो रही बारिश भी डेंगू के लार्वा को पनपने के लिए एक अनुकूल मौसम प्रदान कर रही है मलेरिया विभाग द्वारा मच्छर के अंडे, लार्वा को नष्ट करने के लिए पूर्व से ही उचित कार्रवाई की जा रही है । क्योंकि रुक रुक कर होने वाली वर्षा में लार्वा को पनपने के लिए स्वच्छ पानी मिल जाता है और वह तेजी से विकसित हो जाते हैं ।
डेंगू नियंत्रण के लिए लोगों को नियमित रूप से घरों की छत और घर में रखे गमले की ट्रे, कूलर, पानी की टंकी को खाली कर सुखाने के पश्चात उपयोग करना चाहिए। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए घर और आसपास पुराने टायर, मटके, कबाड़ आदि में बरसात का पानी एकत्रित ना होने दें । घर के बाहर छोटे गड्ढों में मिट्टी का भराव करें। जिससे मच्छरों के प्रजनन को कम किया जा सके। पानी के फैलाव को रोकने के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई और दवाई का छिड़काव करते रहें। साथ ही नालियों की साफ-सफाई और घर के आस-पास पानी के टैंकों की नियमित रूप से साफ-सफाई रखें।"
डेंगू बीमारी के लक्षण
तेज बुखार, उल्टी आना, शरीर पर लाल चकते पडऩा है। बुखार को कन्ट्रोल करने के लिए चिकित्सीय परामर्श लें। हर बुखार डेंगू का नही होता है, डेंगू के लक्षण होने पर समय से डॉक्टर की सलाह लें और डॉक्टर की सलाह पर ही दवा का सेवन करें।
रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में निर्मित गौठान और साल भर पहले शुरू हुई गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है। गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी का आंकड़ा अब तक 100 करोड़ रूपए के पार पहुच चुका है। खरीदे गए गोबर से राज्य के लगभग 6000 गौठानों में बहुतायत रूप से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। गौठानों अब तक उत्पादित एवं विक्रय की गई खादों का मूल्य 90 करोड़ रूपए के पार हो गया है। गोधन न्याय योजना में ग्रामीणों की बढ़-चढ़कर भागीदारी में इसे न सिर्फ लोकप्रिय बनाया है बल्कि इसके माध्यम से जो परिणाम हमारे सामने आए हैं वह बेहद सुखद है।
गोधन न्याय योजना अपने आप में एक ऐसी अनूठी योजना बन गई है, जो बहुआयामी उद्देश्यों को अपने आप में समाहित कर लिया है। इस योजना के शुरूआती दौर में लोगों के मन में कई तरह के सवाल और इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं थी, जिसे गौठान संचालन समिति और गौठान से जुड़ी महिलाओं ने निर्मूल साबित कर दिया है। इस योजना से हमारे गांवों मेेें उत्साह का एक नया वातावरण बना है। रोजगार के नए अवसर बढ़े हैं। पशुपालकों, ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का जरिया मिला है। महिला स्व सहायता समूहों को को स्वावलंबन की एक नई राह मिली है।
पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ उन्हें चारे-पानी का एक ठौर देने के उदेद्श्य गांवों में स्थापित गौठान और गोधन न्याय योजना के समन्वय से वास्तव में गौठान अब ग्रामीण के आजीविका के नया ठौर बनते जा रहे है। गौठानों में महिला समूहों द्वारा जिस लगन और मेहनत के साथ आयमूलक गतिविधियां सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। वह अपने आप में बेमिसाल है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का कहना है कि हमारे गांव शक्ति का केन्द्र रहे हैं। ग्रामीण संसाधनों ने इतनी शक्ति होती है कि उससे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था संचालित हो। हमें अपनी संस्कृति, अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान से जुड़े रहकर विकास की गति को बढ़ाना हो तो इसका सबसे अच्छा साधन है अपने परम्परागत संसाधनों का सम्मान और मूल्य संवर्धन करते हुए ऐसा विकास, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण जनता की सीधी भागीदारी हो।
गोधन न्याय योजना और हमारे गौठान वास्तव में ग्रामीणों की योजना है और उन्हीं के द्वारा उन्हीं की भलाई के लिए संचालित की जा रही है। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी की राशि का आंकड़ा 100 करोड़ के पार हो गया है। यह कोई छोटी बात नहीं है। गोबर को बेचने वाले और खरीदने वाले और उससे वर्मी कम्पोस्ट से लेकर विविध उत्पाद तैयार करने वाले गांव के ही है। इससे यह बात स्पष्ट है कि हमारे गांव रोजगार और उत्पादन के केन्द्र बिन्दु बन सकते हैं, जो गांधी जी के ग्राम स्वराज का उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ सरकार सुराजी गांव योजना- नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी और गोधन न्याय योजना के जरिए ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की ओर तेजी से बढ़ रही है।
गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 100 करोड़ 82 लाख रूपए की गोबर की खरीदी गौठानों में हो चुकी है। गौठान समितियों को 32 करोड़ 94 लाख तथा महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 21 करोड़ 42 लाख रूपए के लाभांश का वितरण किया जा चुका है। गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट निर्माण से लेकर आय अर्जन की विविध गतिविधियों में जुटीं समूह की महिलाएं लगन और मेहनत से जुटी है। उनकी लगन और मेहनत ने यह बात प्रमाणित कर दी है, कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी विषम हो उसे पुरूषार्थ से पराजित किया जा सकता है। महिला समूहों ने उच्च गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट खाद तैयार कर एक नया कीर्तिमान रचा है। छत्तीसगढ़ के गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की मांग पड़ोसी राज्य भी करने लगे हैं। झारखंड राज्य ने डेढ़ लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट सप्लाई का आर्डर रायगढ़ जिले को मिला है। यह गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ राज्य से लगे सीमावर्ती राज्यों के किसान भी छत्तीसगढ़ के बार्डर इलाके के गौठानों में आकर वर्मीकम्पोस्ट क्रय कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना को स्काच गोल्ड अवार्ड मिलना राज्य के लिए गौरव पूर्ण उपलब्धि है।
गोधन न्याय योजना के तहत अब तक राज्य में 10 हजार 112 गौठान स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 6112 गौठान निर्मित और संचालित हैं। इस योजना से लाभान्वित होने वालों में 44.51 प्रतिशत महिलाएं हैं। 48.10 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 7.82 प्रतिशत अनुसूचित जाति के तथा 40.58 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग के पशुपालक हैं। 79 हजार से अधिक भूमिहीन परिवारों को इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त आय का जरिया सुलभ हुआ है। महिला समूहों द्वारा गौठानों में अब तक 7 लाख 80 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 6 लाख 13 हजार क्विंटल खाद का विक्रय हो गया है। गौठानों में 3 लाख 46 हजार क्विंटल सुपर कम्पोस्ट खाद में से 1 लाख 60 हजार क्विंटल खाद बिक चुकी है। गौठानों में सफलतापूर्वक गोबर की खरीदी और आयमूलक गतिविधियों के संचालन से 1634 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। यह गोधन न्याय योजना के सार्थकता और उसके जरिए होने वाले लाभ का परिणाम है।
रायपुर / शौर्यपथ / वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ राज्य को विभिन्न कार्यो के लिए कई राष्ट्रिय पुरस्कारों से नवाजा गया है . कोरोना काल के दरम्यान भी छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यो को कई क्षेत्रो में सफलता मिली है . आइये जाने छत्तीसगढ़ को वर्ष 2021 में कितने राष्ट्रिय पुरस्कार किन किन क्षेत्रो में प्राप्त हुए है .
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2021 : छत्तीसगढ़ को मिला 12 पुरस्कार : 24-04-2021
केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2021 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 12 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित वर्चुअल समारोह में विजेता पंचायतों के खातों में पुरस्कार राशि का ऑनलाइन अंतरण किया। केन्द्रीय पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पुरस्कार समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़ें। उन्होंने पुरस्कार हासिल करने वाले सभी पंचायतों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय ई-पंचायत पुरस्कारों में दूसरा स्थान : 21-04-2021
प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं द्वारा स्थानीय स्वशासन में आईसीटी (Information & Communication Technology) के बेहतर उपयोग के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय ई-पंचायत पुरस्कारों में दूसरा स्थान मिला है। केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों की पंचायतों में आईसीटी और ई-एप्लीकेशन के प्रभावी उपयोग का मूल्यांकन कर बेहतर प्रदर्शन करने वालों राज्यों को ई-पंचायत पुरस्कार प्रदान किया जाता है। तीन अलग-अलग वर्गों में दिए जाने वाले इस पुरस्कार में छत्तीसगढ़ को प्रथम वर्ग (Category-I) में असम के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। भारत सरकार द्वारा पंचायतों के कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के लिए आईसीटी के उपयोग को बढ़ावा देने हर वर्ष ई-पंचायत पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
हेल्थ एंड वेलनेस एप्लीकेशन के उपयोग में छत्तीसगढ़ को मिला पुरस्कार : 14-04-2021
हेल्थ एंड वेलनेस एप्लीकेशन के उत्कृष्ट उपयोग के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। इस एप्लीकेशन के उपयोग में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आज देश में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की शुरूआत के तीन वर्ष पूरे होने पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रदेश को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। छत्तीगसढ़ ने कोरोना महामारी के इस कठिन समय में भी लक्ष्य से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उन्नयन किया है।
प्रदेश की पंचायतों ने फिर दिखाया दम, लगातार तीसरे साल 11 राष्ट्रीय पुरस्कार : 03-04-2021
केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा कोंडागांव जिला पंचायत, गरियाबंद और तिल्दा जनपद पंचायत तथा सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड के सरगवां और लुंड्रा विकासखंड के रिरी, बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के माहुद (अ), कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के महराटोला एवं रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के बैहार ग्राम पंचायत का चयन दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार के लिए किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2021 के अंतर्गत बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के दूरस्थ वनांचल गोटईगुड़ा ग्राम पंचायत को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार, रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड के नवागांव (ल) को बाल मित्र ग्राम पंचायत पुरस्कार और आरंग विकासखंड के बैहार को ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार दिया जाएगा।
राष्ट्रीय पंचायत अवार्ड 2021: कोण्डागांव को मिला दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार : 01-04-2021
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आज 31 मार्च को विशिष्ट कार्य करने वाले पंचायतों के लिए दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार, नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार एवं ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान अवार्ड की घोषणा की गई। जिसमें जिला पंचायत कोंडागांव को उत्कृष्ट कार्य हेतु वर्ष 2019-20 के लिए छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्रदान करते हुए दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार (डी.डी.यू.पी.एस.पी.) 2021 प्रदान करने की घोषणा की गई।
बिलासपुर जिले को पीएम किसान सम्मान निधि के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए मिला राष्ट्रीय अवार्ड : 24-02-2021
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में देश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र तोमर ने आज इस योजना के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर जिले को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए पुरस्कृत किया। बिलासपुर के कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के राज्य नोडल अधिकारी श्री जी.के. निर्माम ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
मोर जमीन-मोर मकान में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार : 01-01-2021
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी अंतर्गत समावेशी मॉडल मोर जमीन-मोर आवास को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री, हरदीप सिंह पुरी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। । भारत सरकार, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत मिशन के 04 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पीएमएवाय-यू और आशा अवार्ड के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को तीन श्रेणियों में अवार्ड प्राप्त हुए हैं। ”बेस्ट कन्वर्जेंस विथ अदर मिशन“ की श्रेणी में छत्तीसगढ़ राज्य को उत्तम प्रदर्शन करने हेतु पुरस्कृत किया गया।
बेस्ट कन्वर्जेंस विथ अदर मिशन की श्रेणी में छत्तीसगढ़ को मिला पुरस्कार
मोर जमीन-मोर मकान घटक के अन्तर्गत हितग्राहियों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, अन्य योजनाओं का समावेश कर उनके सफल क्रियान्वयन हेतु ”बेस्ट कन्वर्जेंस विथ अदर मिशन“ की श्रेणी में छत्तीसगढ़ राज्य को उत्तम प्रदर्शन करने हेतु पुरस्कृत किया गया।
बेस्ट परफॉर्मिंग म्युनिसिपल काउंसिल श्रेणी में डोंगरगढ़ को मिला इनाम
नगर पालिका परिषद, डोंगरगढ़ को अधिक से अधिक आवास निर्माण पूर्ण करने पर देश में ”बेस्ट परफॉर्मिंग म्युनिसिपल काउंसिल श्रेणी“ में पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
बेस्ट हाउस कंस्ट्रक्शन श्रेणी में हितग्राहियों को मिला पुरस्कार
प्रदेश के तीन हितग्राही मंजू साहू (धमतरी), मुमताज बेगम (धमतरी), ममता वर्मा (कवर्धा) के आवासों को देश के ”बेस्ट हाउस कंस्ट्रक्शन श्रेणी“ में पुरस्कार प्राप्त हुए।
दुर्ग / शौर्यपथ / शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 6500 प्रायवेट स्कूलों में 3 लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे है, लेकिन विगत 10 वर्षो में कई बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया, जिसे ड्रॉपआउट भी कहा जाता है। जिसकी कभी कोई निष्पक्षता से जांच नहीं कराया गया कि आरटीई के अंतर्गत इतनी बड़ी संख्या में बच्चों ने क्यों स्कूल छोड़ दिया और वे बच्चे आज कहां है और क्या कर रहे है, जबकि शाला त्यागी बच्चों के लिए केन्द्र सरकार और सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर उन्हें पुन: मुख्यधारा यानि स्कूलों में प्रवेश दिलाने का प्रयास करने का दावा कर रही है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल के द्वारा विगत तीन वर्षो से यह मांग किया जा रहा है कि आरटीई के अंतर्गत विगत दस वर्षो में लगभग 30 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया और इसकी जांच होनी चाहिए। लोक शिक्षण संचालनालय ने अब इस मामले में जांच कराने का निर्णय लिया है और एक एनजीओ को जांच करने की जिम्मेदारी दी है। प्रथम चरण में रायपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और द्वितीय चरण में रायगढ़ और बस्तर के प्रायवेट स्कूलों में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों की सोशल आडिट होगी।
खाना खजाना / शौर्यपथ / शाही पनीर हो या फिर दाल मखनी इसके साथ परोसे गए मुलायम गार्लिक नान का स्वाद याद करते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। कई लोग तो सिर्फ इस गार्लिक नान का स्वाद लेने के लिए ही होटल में जाते हैं। नान के ऊपर लहसुन और हरे धनिए की गार्निशिंग उसका स्वाद दोगुना कर देती है। अगर आप भी रेस्त्रां वाला स्वाद घर पर बनाए जाने वाले गार्लिक नान में लाना चाहती हैं तो फॉलो करें ये रेसिपी।
गार्लिक नान बनाने के लिए सामग्री-
-मैदा - डेढ़ कप (या 1 कप मैदा और 1/2 कप आटा)
-इंस्टंट ड्राई यीस्ट - 1/2 टी स्पून
-दही - 1 टेबल स्पून
-दूध - 1/3 कप
-चीनी - 1/2 टी स्पून
-तेल - 1 टेबल स्पून
-गुनगुना पानी - 1/2 कप
-लहसुन (बारीक कटा) - 2 टेबल स्पून
-धनिया (बारीक कटा) - 3 टेबल स्पून
-बटर (परोसने के लिए)- 1 टिकिया
गार्लिक नान बनाने की विधि-
गार्लिक नान बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरे में इंस्टंट ड्राई यीस्ट लें और फिर इसमें चीनी मिला दें। अब 1/2 कप गुनगुना पानी इसमें डाल दें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से हिलाएं। इसके बाद इसे 15 मिनट के लिए ढंककर रख दें। इस मिश्रण में अगर आपको झाग नजर आता है। इसका मतलब यीस्ट सक्रिय है और अगर ऐसा नहीं होता है यीस्ट सक्रिय नहीं है या फिर आपने ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल किया है। अगर झाग नहीं है तो बिना झाग वाले यीस्ट के मिश्रण को फेंक दें और फिर से मिश्रण तैयार करें।
अब एक बड़े बर्तन में डेढ़ कप मैदा (या 1 कप मैदा और 1/2 कप आटा) छान लें और इसमें एक टेबल स्पून दही और तेल डालें। इसी दौरान इसमें नमक भी डाल दें। अब इसमें पहले से तैयार किया गया यीस्ट का मिश्रण डाल दें। अब रोटी के आटे की तरह इसे नरम गूंथ लें। नरम आटे के लिए जरूरत पड़ने पर थोड़ा सा पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब आटे को तेल से चिकना कर लें और रख दें। इसे गीले कपड़े से या बर्तन को प्लास्टिक या ढक्कन से ढंक दें। इसे लगभग एक से डेढ़ घंटे तक हल्के गर्म स्थान पर रख दें। इसके बाद कपड़ा या ढक्कन हटाएं तो आपको आटा फूला हुआ दिखाई देगा। अब आटे को नरम करने के लिए एक बार फिर गूंथ लें। अब आटे की लोईयां बना लें और फिर कपड़े से ढंककर लगभग आधा घंटे के लिए अलग रख दें।
अब एक लोई लें और उसमें आटा लगाकर उसे लंबाई में अंडाकार में बेल लें। उस पर थोड़ा कटा हुआ लहसुन और कटा हुआ हरा धनिया डालें। फिर उसे बेलन से या हाथ से धीरे-धीरे दबाएं। अब नान को पलट लें और उस पर हाथ से या ब्रश की सहायता से पानी लगाकर गीला कर लें।
अब लोहे के तवे को गैस पर गर्म करने रख दें और जब तवा गरम हो जाए तो गीली सहत की ओर से नान को तवे पर डाल दें। इससे नान तवे से चिपक जाएगी।अब तवे को हैंडिल से पकड़े और गैस पर उल्टा कर दें। इसे नान के सिकने तक गैस पर घुमाते रहें। इसमें लगभग एक मिनट का वक्त लगेगा। अब नान को कलछी का उपयोग कर निकाल लें। आप देखेंगे की नीचे की सतह भी सुनहरे रंग की हो गई है. इस तरह आपकी गार्लिक नान तैयार हो चुकी है। इसे ऊपर से बटर लगाकर खाने के साथ गरमागरम परोसें।
सोलह श्रृंगार/ शौर्यपथ / किसी भी खास त्योहार के अवसर पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, इनसे महिलाएं अधिक खूबसूरत लगती हैं। इनका पौराणिक महत्व तो है ही साथ ही आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि हर एक प्रकार के श्रृंगार से सेहत पर भी अनुकूल असर होता है।
विज्ञान ने भी माना है कि इन 16 श्रृंगार से महिलाओं के मन, शरीर और सेहत पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं। इस बार 9 सितंबर, गुरुवार को हरतालिका तीज व्रत है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत तो रखती ही हैं, साथ ही इस दिन 16 श्रृंगार करके पूजा में बैठने और कथा सुनने का भी महत्व है।
हम आपको बताते हैं कि 16 श्रृंगार में कौन से बेमिसाल सेहत राज छुपे हैं। आइए जानें -
1. बालों में गजरा/फूल - बालों को महिलाओं का गहना कहा जाता है, बालों को गजरे व फूलों से सजाने पर उनकी खुशबू से मन की सेहत पर अच्छा असर होता है और सुगंध से मन तरंगित व खुश रहता है।
2. बिंदी - माथे पर बिंदी लगाने से व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। मस्तक के बीच के स्थान पर बिंदी लगाने से तीसरा नेत्र जाग्रत होता है। बिंदी लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है और इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है। साथ ही मस्तिष्क भी शांत रहता है और सुकून का अनुभव होता है।
3. सिंदूर - शरीर-रचना विज्ञान के अनुसार जिस स्थान पर सिंदूर सजाया जाता है, वह ब्रह्मरंध्र और अहिम नामक मर्मस्थल के ठीक ऊपर होता है, जो अत्यंत कोमल होता है। यहां सिंदूर लगाने से इस स्थान की सुरक्षा होती है। इसके अलावा सिंदूर में कुछ ऐसे धातु होती है जो चेहरे पर झुर्रियों के असर को कम करती हैं और महिलाओं के शरीर में विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित करती हैं।
4. गले में हार या मंगल सूत्र - मंगल सूत्र व इनके मोतियों से होकर निकलने वाली वायु महिलाओं के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। आयुर्वेद के अनुसार, गले में स्वर्ण धातु धारण करने से छाती और ह्रदय स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद काले मोती महिलाओं को बुरी नजर से बचाते हैं।
5. कान में झुमके व बाली - कान छिदवाने से आंखों की रोशनी तेज होती है। दरअसल, कान के निचले हिस्से में एक प्वॉइंट होता है जिसके पास से आंखों की नसें गुजरती हैं। जब कान के इस प्वॉइंट को छिदवाकर इसमें बाली पहनते हैं तो इससे आंखों की रोशनी तेज होने में मदद मिलती है।
6. मांग टिका - सिर के बीचोबीच पहना जाने वाला मांग टिका महिलाओं की सुंदरता बढ़ाने के अलावा मस्तिष्क संबंधी क्रियाएं संतुलित और नियमित रखता है।
7. चूड़ियां व ब्रेसलेट - महिलाओं की चूड़ियां जब हाथों की कलाई पर टकराती हैं तो उससे शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है। साथ ही ये महिलाओं के शरीर में हार्मोंस संतुलित रखने में सहायक होती हैं।
8. बाजूबंद - इसे बाजुओं में पहनने से बांह स्थित केंद्रों पर दवाब पड़ता है जो महिलाओं को लंबे समय तक सुंदर और जवां बनाए रखता है।
9. कमरबंद - इसे पहनने से महिलाओं में हर्निया की आशंका कम होती है।
10. पायल - पायल पैरों से निकलने वाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा को शरीर में संरक्षित रखती है। महिलाओं के पेट और निचले अंगों में वसा (फैट) बढ़ने की गति को रोकती है। साथ ही चांदी की पायल पैरों से घर्षण करके पैरों की हड्डियां मजबूत बनाती हैं।
11. बिछिया - बिछिया एक्यूप्रेशर उपचार पद्धति पर कार्य करती है जिससे शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां सबल रहती हैं। यह एक खास नस पर प्रेशर बनाती है जो कि गर्भाशय में समुचित रक्त संचार प्रवहित करती है, जिससे गर्भधारण क्षमता बेहतर होने में मदद मिलती है।
12. नथनी - जिस जगह नथ पहनी जाती है, उस जगह एक तरह का एक्यूप्रेशर प्वाइंट होता है जो प्रसव पीड़ा के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है।
13. अंगूठी - अंगुलियों में अंगूठी पहनने से आलस्य और सुस्ती में कमी आती है।
14. मेहंदी - मेहंदी हथेलियों को सुंदर बनाने के साथ-साथ शरीर को ठंडा रखती है और चर्म रोग को दूर करने में मदद करती है।
15. काजल - काजल लगाने से आंखों को ठंडक मिलती है और इससे आंखों से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं।
16. मेकअप - चेहरे पर हल्का मेकअप व नेल पेंट लगाने से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
व्रत त्यौहार / शौर्यपथ /प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल तृतीया को सौभाग्यवती महिलाओं का खास हरतालिका तीज पर्व मनाया जाता है। इस दिन निर्जल रहकर व्रत किया जाता है।
इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं तथा कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस वर्ष 9 सितंबर 2021, गुरुवार को हरतालिका तीज मनाई जा रही है। हरतालिका तीज के दिन शिव-पार्वती जी की मिट्टी से बनी प्रतिमा की पूजा होती है। अगर आप भी यह व्रत रख रही हैं तो कोशिश करें कि शिव-पार्वती की प्रतिमा घर पर ही बनाए।
हरतालिका तीज 2021 के शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज तिथि का प्रारंभ 09 सितंबर 2021, गुरुवार के दिन सुबह 02.33 मिनट पर होगा और 09 सितंबर को रात्रि 12.18 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त होगी।
प्रात:काल पूजा मुहूर्त- सुबह 06.03 मिनट से सुबह 08.33 मिनट तक।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त- शाम 06.33 मिनट से रात 08.51 मिनट तक।
सरल पूजा विधि :
सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती हैं।
इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं सूर्योदय से पूर्व ही उठ कर, नहा कर पूरा श्रृंगार करती हैं।
पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी-शंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है।
रात में भजन, कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है और शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।
इस व्रत के व्रती को शयन का निषेध है इसके लिए उसे रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करना चाहिए।
फिर अगले दिन प्रातःकाल स्नान करने के पश्चात् श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक किसी सुपात्र सुहागिन महिला को श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, खाद्य सामग्री, फल, मिष्ठान्न एवं यथा शक्ति आभूषण का दान करना चाहिए। रेत के शिवलिंग बनाए हैं तो उनका जलाशय में विसर्जन किया जाता है और खीरा खाकर इस व्रत की पूर्णता की जाती है।
इस दिन 'ॐ पार्वतीपतये नमः' मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
हरतालिका व्रत कथा-
यह कथा शिवजी ने ही मां पार्वती को सुनाई थी। इस कथा में मां पार्वती को उनका पिछला जन्म याद दिलाया था। 'हे गौरा, पिछले जन्म में तुमने मुझे पाने के लिए बहुत छोटी उम्र में कठोर तप और घोर तपस्या की थी। तुमने ना तो कुछ खाया और ना ही पीया बस हवा और सूखे पत्ते चबाए। जला देने वाली गर्मी हो या कंपा देने वाली ठंड तुम नहीं हटीं। डटी रहीं। बारिश में भी तुमने जल नहीं पिया। तुम्हें इस हालत में देखकर तुम्हारे पिता दु:खी थे। उनको दु:खी देख कर नारदमुनि आए और कहा कि मैं भगवान् विष्णु के भेजने पर यहां आया हूं। वह आपकी कन्या की से विवाह करना चाहते हैं। इस बारे में मैं आपकी राय जानना चाहता हूं।
’नारदजी की बात सुनकर आपके पिता बोले अगर भगवान विष्णु यह चाहते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं। परंतु जब तुम्हें इस विवाह के बारे में पता चला तो तुम दुःखी हो गईं। तुम्हारी एक सहेली ने तुम्हारे दुःख का कारण पूछा तो तुमने कहा कि मैंने सच्चे मन से भगवान् शिव का वरण किया है, किन्तु मेरे पिता ने मेरा विवाह विष्णुजी के साथ तय कर दिया है। मैं विचित्र धर्मसंकट में हूं। अब मेरे पास प्राण त्याग देने के अलावा कोई और उपाय नहीं बचा।
तुम्हारी सखी बहुत ही समझदार थी। उसने कहा-प्राण छोड़ने का यहां कारण ही क्या है? संकट के समय धैर्य से काम लेना चाहिए। भारतीय नारी के जीवन की सार्थकता इसी में है कि जिसे मन से पति रूप में एक बार वरण कर लिया, जीवनपर्यन्त उसी से निर्वाह करें। मैं तुम्हें घनघोर वन में ले चलती हूं जो साधना स्थल भी है और जहां तुम्हारे पिता तुम्हें खोज भी नहीं पाएंगे। मुझे पूर्ण विश्वास है कि ईश्वर अवश्य ही तुम्हारी सहायता करेंगे...
तुमने ऐसा ही किया। तुम्हारे पिता तुम्हें घर में न पाकर बड़े चिंतित और दुःखी हुए। इधर तुम्हारी खोज होती रही उधर तुम अपनी सहेली के साथ नदी के तट पर एक गुफा में मेरी आराधना में लीन रहने लगीं। तुमने रेत के शिवलिंग का निर्माण किया। तुम्हारी इस कठोर तपस्या के प्रभाव से मेरा आसन हिल उठा और मैं शीघ्र ही तुम्हारे पास पहुंचा और तुमसे वर मांगने को कहा तब अपनी तपस्या के फलीभूत मुझे अपने समक्ष पाकर तुमने कहा, 'मैं आपको सच्चे मन से पति के रूप में वरण कर चुकी हूं। यदि आप सचमुच मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर यहां पधारे हैं तो मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लीजिए। तब 'तथास्तु' कहकर मैं कैलाश पर्वत पर लौट गया।
उसी समय गिरिराज अपने बंधु-बांधवों के साथ तुम्हें खोजते हुए वहां पहुंचे। तुमने सारा वृतांत बताया और कहा कि मैं घर तभी जाउंगी अगर आप महादेव से मेरा विवाह करेंगे। तुम्हारे पिता मान गए औऱ उन्होने हमारा विवाह करवाया। इस व्रत का महत्व यह है कि मैं इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मनवांछित फल देता हूं। इस पूरे प्रकरण में तुम्हारी सखी ने तुम्हारा हरण किया था इसलिए इस व्रत का नाम हरतालिका व्रत हो गया। इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती जी के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।
महत्व- भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाए जाने वाले हरतालिका तीज व्रत हिंदू धर्म के कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस व्रत में सुहागिनें तथा कुंवारी कन्याएं पूरे श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाती है। इस दिन सुहागिनें निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना रखती हैं। यह व्रत निराहार और निर्जला रहकर किया जाता है। इस पर्व की मान्यता के अनुसार इस व्रत में सुहागिनें सुबह से लेकर अगले दिन सुबह सूर्योदय तक जल ग्रहण तक नहीं करती यानी 24 घंटे तक बिना अन्न-जल के सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रहती हैं। यह पर्व एमपी, यूपी, बिहार के साथ ही कई राज्यों में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। यह दिन शिव-पार्वती के पूजन के साथ ही श्री गणेश के पूजन के लिए भी खास माना जाता है।
हरतालिका तीज के दिन क्या करें जानिए खास बातें-
1. इस दिन हरतालिका तीज पूजन के लिए मिट्टी से बनाई गई प्रतिमा को सुंदर वस्त्रों से सजाएं।
2. भगवान शिव जी को धोती-गमछा चढ़ाएं और माता पार्वती को लहंगा अथवा ओढ़नी और सुहाग की पिटारी चढ़ाएं।
3. पूजन के अगले दिन शिव-पार्वती जी की प्रतिमा को जल में विसर्जित कर दें।
4. इसके बाद ब्राह्मण-ब्राह्मणी के जोड़े को भोजन करावाएं और धोती या गमछा ब्राह्मण को और ब्राह्मणी ओढ़नी और सुहाग का पिटारा और दान-दक्षिणा देकर विदा करें।
5. अब अपनी सास को मिठाई और रुपये देकर उनका आशीर्वाद लें और सबसे आखिरी में खुद भोजन करें।
हरतालिका तीज पर हरगिज न करें ये 10 काम
हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस साल यह 9 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं कड़ा उपवास करके रातभर जागरण करती है। आओ जानते हैं कि इस दिन कौन से 10 कार्य नहीं किए जाते हैं।
1. क्रोध नहीं करते हैं : इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को क्रोध नहीं करना चाहिए। इसीलिए महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती है ताकि उनका दिमाग ठंडा रहे।
2. व्रत नहीं तोड़ा जाता : ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन व्रती महिला जिस भी तरह का भोजन या अन्य कोई पदार्थ ग्रहण कर लिया जाता है तो अन्न की प्रकृति के अनुसार उसका अगला जन्म उस योनि में ही होता है। इसीलिए व्रत को तोड़ा नहीं जाता है।
3. रात में सोना है मना :
इन दिन महिलाओं को रातभर जागना जरूरी होता है, क्यों आठों प्रहर पूजा भी करना होती है और यह भी मान्यता या अंधविश्वास है कि जो महिला सो जाती है उसे अजगर या मगरमच्छ की योनि प्राप्त होती है।
4. दूध का नहीं करते हैं सेवन : ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन महिलाएं यदि भूल से भी दूध का सेवन कर लेती है तो अगले जन्म में सर्प योनि को प्राप्त होती है।
5. पति के साथ न करें झगड़ा : यह व्रत पति की दीर्घायु अथार्त लंबी उम्र के लिए रखा जाता है अत: व्रती महिलाएं इस दिन पति से किसी भी प्रकार का कलेश या झकड़ा नहीं करें।
6. छोटे या बड़े-बुजुर्गों का न करें अपमान : इस दिन अपने से बड़े-बजुर्गों सहित छोटों का भी अपमान नहीं करें। इससे आपको अपने व्रत का फल नहीं मिलता है।
7. एक बार व्रत रख लिया तो रखना होता है जीवनभर : मान्यता है कि यदि कोई भी कुंवारी या विवाहित महिला एक बार इस व्रत को रखना प्रारंभ कर देती हैं तो उसे जीवनभर यह व्रत रखना ही होता है। बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है। अत: यदि आप स्वस्थ हैं तो इस व्रत को किसी भी हालत में तोड़े नहीं।
8. कथा जरूर सुनें : विधि-विधान से पूजा के बाद के बाद कथा सुनना ना भूलें। पूजन के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी मना जाता है।
9. मन में न लाएं खोट : व्रत करने वाली महिलाओं को अपने मन में किसी तरह का खोट नहीं लाना चाहिए अर्थात किसी के भी प्रति गलत भावना ना रखें और भूलकर भी किसी को भला बुरा न कहें। मन को निर्मल बनाकर रखें।
10. फल खाना भी है मना : फल खाने से अगला जीवन वानर का मिलता है। शक्कर खाने से मक्खी और जल पीने से मछली का जीवन मिलता है।
सेहत / शौर्यपथ /बच्चे खाने-पाने को लेकर बहुत नखरे करते हैं जिसकी वजह से उनको पूरा पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में बच्चों का पौष्टिक चीजें न खाने के कारण उन्हें आगे चलकर कई परेशानियां हो सकती हैं इसलिए माता-पिता को बच्चों की डाइट में ऐसी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, जिन्हें खाकर उनकी ग्रोथ और इम्यूनिटी मजबूत हो सके। आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वे चीजें-
दूध
दूध बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इसमें कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होती है, जिससे हड्डि्यां मजबूत बनती हैं।साथ ही दूध में विटामिन A,B2 और B12 भी होते हैं जो शारीरिक विकास के लिए जरूरी हैं।
अंडे
अंडे खाना बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए फायदेमंद है।इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत होती है।अंडों में विटामिन D, फैट और आयरन होता है जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है।
ब्रोकली
ब्रोकली में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, इससे बच्चों की हड्डियां मजबूत होती है।हो सकता है आपके बच्चे को इसका स्वाद पसंद नहीं आए।ऐसे में आप अपने बच्चे को इसका सूप दे सकती हैं।या फिर दूसरी सब्जिआयों के साथ मिलाकर इसकी सब्जी तैयार कर सकते हैं।
ब्लू बैरी
ब्लू बैरी खाने में बहुत स्वादिष्ट और बच्चों के लिए बेहद हेल्दी होती है।इसमें विटामिन C और B, आयरन, फाइबर पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।ब्लू बैरी खिलानें में आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि इसे बच्चे बड़े शौक से खाते हैं।
दही
दही बढ़ते बच्चों के लिए एक जरूरी चीज है।दही हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाती है और ताकत भी देती है। दही को आप लस्सी के रूप में या फिर छाछ के रूप में अपने बच्चे को दे सकती हैं।
शकरकंद
पोषण के मामले में शकरकंद से बेहतर कुछ भी नहीं।ये आंखो के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसमें विटामिन A, C, E, कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन होता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /पौराणिक शास्त्रों में भाद्रपद अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों के निमित्त कुशा या घास इकट्ठी करने की मान्यता है। इसे भाद्रपद अमावस्या को पिठौरा, कुशोत्पाटनी, कुशग्रहणी अमावस्या, पोला पर्व आदि नामों से भी जाना जाता है।
इस दिन सुहागिनें संतान प्राप्ति एवं अपनी संतान के अच्छे जीवन की कामना से व्रत-उपवास रखकर भगवान भोलेनाथ और देवी दुर्गा का पूजन करती है। इस दिन देवताओं को जो भोग लगाया जाता है, उनमें पूजा के लिए विशेष तौर पर गुड़ के पारे, गुजिया, शकरपारे, मठरी, पूरन पोली, खीर आदि पकवान बनाकर देवी-देवताओं को उनका भोग लगाया जाता है।
गुजिया
सामग्री : 250 ग्राम खोया, 250 ग्राम मैदा, 1/2 कटोरी घी (मोयन के लिए), 200 ग्राम पिसी चीनी, आधा कटोरी मेवा कतरन, 1/2 छोटा चम्मच इलायची पावडर, पाव कटोरी खोबरा बूरा, थोड़ी-सी चारोली एवं किशमिश, केसर के कुछ लच्छे, तलने के लिए घी, थोड़ा-सा दूध अथवा पानी एक कटोरी में अलग से।
विधि : एक कड़ाही गरम करके धीमी आंच पर मावा गुलाबी होने तक भून लें। उसके बाद उसे ठंडा करके पिसी चीनी, मेवे की कतरन, खोबरा पूरा, इलायची पावडर, चारोली, किशमिश और केसर डालकर अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। अब मैदे में घी का मोयन डाल कर गूंथ लें। थोड़ी देर कपड़े से ढंककर रख दें। अब आटे की छोटी-छोटी लोई पूरी की तरह बेलने के बाद उसमें एक से डेढ़ छोटा चम्मच गुजिया का मिश्रण भरकर हाथ से हल्का दबा दें और चारों तरफ पानी या दूध की ऊंगली घूमाकर उसे बंद कर दें। गुजियों को गोठते समय ध्यान रखें कि वे खुलें नहीं। इन्हें थोड़ी देर कपड़े पर फैला दें। कड़ाही में घी गरम कर के गुजियों को गुलाबी होने तक तल लें।
पूरन पोली
पूरन पोली सामग्री: 200 ग्राम चना दाल, 300 ग्राम आटा, 300 ग्राम शकर, 1/2 चम्मच पिसी हुई इलायची, 2 ग्राम जायफल, कुछेक केसर के लच्छे, शुद्ध घी।
पूरन की तैयारी: सबसे पहले चने की दाल को अच्छी तरह से धोकर, दाल से डबल पानी लेकर प्रेशर कुकर में कम आंच पर 30 से 35 मिनट पकने दें। कुकर ठंडा होने के बाद चना दाल को स्टील की छन्नी में निकालकर उसका सारा पानी निकल दें। दाल ठंडी होने पर मिक्सी में पीस लें। अब पीसी हुई दाल के मिश्रण को एक कड़ाही में थोड़ा-सा घी डालकर सेंकें और शकर भी मिला दें। अब इस मिश्रण को कम आंच पर निरंतर चलाते हुए तब तक पकाएं, जब तक पूरन की गोली न बनने लगे। जब पूरन बन जाए तब आंच से उतार लें और ठंडा करें। ऊपर से जायफल, इलायची, केसर डालकर मिश्रण के आवश्यकतानुसार गोले बना लें।
पूरन पोली बनाने के लिए: एक थाली में छना आटा लें। उसमें 1 बड़ा चम्मच शुद्ध घी का मोयन डालकर रोटी के आटे जैसा गूंथ लें। अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर पूरी जितना बेलें और 1-1 लोई में 1-1 पूरन का गोला रखकर आटा लगाकर मोटी रोटी की तरह बेल लें। अब तवा गरम करके धीमी आंच पर शुद्ध घी लगाकर पूरन पोली को दोनों तरफ गुलाबी सेंक लें। अब पूरन पोली पर ज्यादा मात्रा में घी लगाकर भगवान को नैवेद्य चढ़ाएं। इसके साथ कढ़ी या आमटी आप अपनी पसंद के अनुसार बना सकते हैं।
शकरपारे
सामग्री : 500 ग्राम मैदा, 200 ग्राम रवा, 350 ग्राम शकर, घी (आधा कप गरम किया हुआ मोयन के लिए), चुटकी भर नमक, बेकिंग पावडर, तलने के लिए पर्याप्त घी।
विधि : शकरपारे बनाने के लिए एक बर्तन में एक-दो घंटे पहले शकर को आधा गिलास पानी में गला दें ताकि शकर का पानी बन जाए। अब मैदा और रवा मिक्स करके घी का मोयन, चुटकी भर नमक, बेकिंग पावडर डालकर मिक्स कर लें तथा तैयार शकर के पानी से आटे को कड़ा गूंथ लें और थोड़ी देर कपड़े से ढंककर रख दें।
अब मैदे की मोटी लोई बनाकर थाली या बड़े पटिए पर मोटी बेल लें। चाकू या सांचे की सहायता से मनचाहे आकार में शकरपारे काट लें और कपड़े पर फैला दें। सारे शकरपारे बन जाने के बाद एक कड़ाही में घी गरम करके शकरपारे को गुलाबी कुरकुरे होने तक तल लें, फिर पेपर पर डालकर अतिरिक्त तेल अलग कर दें। ठंडे होने के बाद कुरकुरे मीठे शकरपारे को डिब्बे में भर कर रख दें।
मालपुए
सामग्री : एक कप मैदा छना हुआ, एक कप दूध, एक चम्मच सौंफ, डेढ़ कप शकर, एक चम्मच नींबू रस, तलने और मोयन के लिए रिफाइंड तेल, डेकोरेशन के लिए पाव कटोरी मेवे की कतरन और इलायची पावडर एक चम्मच।
विधि : सबसे पहले मैदे में दो बड़े चम्मच तेल का मोयन डालें। तत्पश्चात दूध और सौंफ मिलाएं और घोल तैयार कर लें। एक मोटे पेंदे के अलग बर्तन में शकर, नींबू रस और तीन-चौथाई कप पानी डालकर चाशनी तैयार कर लें। अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके एक बड़े चम्मच से घोल डालते जाएं और करारा फ्राय होने तक तल लें। फिर चाशनी में डुबोएं और एक अलग बर्तन में रखते जाएं। इसी तरह सभी मालपुए तैयार कर लें और ऊपर से मेवे की कतरन और पिसी इलायची बुरका कर लजीज मैदे के शाही मालपुए पेश करें।
खीर
सामग्री : 50 ग्राम मावा, 2 लीटर गाय का दूध, 2 मुट्ठी चावल, 1/2 कटोरी मेवा कतरन, 4 बड़े चम्मच शकर, 1/2 चम्मच पिसी इलायची, कुछेक लच्छे केसर या मीठा पीला रंग।
विधि : एक-दो घंटे पूर्व चावल धोकर पानी में गला दें। दूध को मोटे तले वाले बर्तन में लेकर गरम करके 10-15 उबाल लेकर पका लें। चावल का पूरा पानी निथार कर दूध में डाल दें। बीच-बीच में चलाती रहें। चावल पकने के बाद शकर डाल कर पूरी तरह शकर घुलने तक दूध को लगातार चलाती रहें। अब मावे को किस कर उसमें मिला दें। खीर अच्छी तरह गाढ़ी हो जाने पर कटा मेवा, इलायची डालें और केसर उबलती खीर में डाल दें। अगर रंग कम आ रहा हो तो चुटकी-भर मीठा पीला रंग घोलकर डाल दें। अब तैयार खीर कुछ देर उबालें और आंच बंद कर दें। तैयार खीर से भगवान को भोग लगाएं।
सेहत / शौर्यपथ /ऐसे कई फूड है जिन्हें एक पूरी रात भिगोकर रखने के बाद, अगले दिन खाना अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद होता है। क्योंकि अंकुरित होने के बाद उनकी नुट्रिशन वैल्यू बढ़ जाती है, साथ ही ये आसानी से पच जाते है जो सेहत के लिए अच्छा है। हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही 8 चीजों के बारे में जिन्हें रातभर भिगोकर खाना आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करने में सहायक होगा -
इनमें फाइबर्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो कब्ज को दूर कर आंतों को साफ रखने में मदद करते हैं। डायबिटीज के रोगियों के लिए भी मेथीदाने फायदेमंद हैं। साथ ही इनका सेवन महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता हैं।
2 खसखस -
ये फोलेट, थियामिन और पैंटोथेनिक एसिड का अच्छा सोर्स होता हैं। इसमें मौजूद विटामिन बी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है जिससे वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
3 अलसी -
अलसी या फ्लैक्स सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड का एकमात्र शाकाहारी सोर्स माना जाता हैं। अलसी का सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर हमारे दिल को भी हेल्दी रखता हैं।
4 मुनक्का -
इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन काफी मात्रा में होते हैं। मुनक्के का नियमित सेवन कैंसर कोशिकाओं में बढ़ोतरी को रोकता है। इससे हमारी स्किन भी हेल्दी और चमकदार रहती है। एनीमिया और किडनी स्टोन के मरीजों के लिए भी मुनक्का फायदेमंद है।
5 खड़े मूंग -
इनमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी भरपूर मात्रा में होता है। इनका नियमित सेवन कब्ज दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। इसमें पोटेशियम और मैग्नेशियम भी भरपूर मात्रा में होने की वजह से डॉक्टरस हाई बीपी के मरीजों को इसे रेगुलर खाने की सलाह देते है।
इनमें फाइबर्स और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती हैं जो कब्ज दूर करने में सहायक होते है।
7 बादाम -
इसमें मैग्नीशियम होता है जो हाई बीपी के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से भीगी हुई बादाम खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है।
8 किशमिश -
किशमिश में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। भीगी हुई किशमिश को नियमित रूप से खाने से स्किन हेल्दी और चमकदार बनती है। साथ ही शरीर में आयरन की कमी भी दूर होती है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /क्या आप दूसरों के मुकाबले तेजी से वजन कम करना चाहते हैं? अगर हां तो केवल एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है बल्कि आपको अपनी डाइट में ऐसा आहार शामिल करना चाहिए, जो विटामिन-सी से भरपूर हो। जी हां, ऐसा सिर्फ हम नहीं कह रहे बल्कि एक स्टडी में पाया गया है। तो आइए, हम आपको बताए विटामिन-सी रिच फूड कौन से होते हैं -
1 शिमला मिर्च -
शिमला मिर्च में कई जरूरी विटामिन्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। ये न्यूट्रिएंट्स कई बीमारियों को दूर करने के साथ वजन भी कम करने में मदद करते हैं।
2 पपीता -
पपीता पाचन को दुरुस्त रखकर लिवर को डीटॉक्सीफाई करता है। साथ ही इसमें फाइबर के अलावा विटामिन-ए और विटामिन-सी भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैं।
3 स्ट्रॉबेरीज -
स्ट्रॉबेरीज में भी विटामिन और फाइबर की भरमार होती है। दरअसल, फाइबर के सेवन से भूख कम लगती है जिससे आप अनहेल्दी और अत्यधिक खाने से बच जाते हैं, जिससे आपको वजन कम करने में मदद मिलती है।
4 किवी -
वजन कम करने के लिए किवी को सुपरफूड में शुमार किया जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन्स और कई न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इसके सेवन से शरीर को एनर्जी मिलती है और वजन भी कम होने में मदद मिलती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
