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April 05, 2026
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टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / बारिश के मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठंडक होते ही बच्‍चे मलेरिया और डेंगू की चपेट में आ जाते हैं। इस मौसम में खान -पान से लेकर हर तरह की सावधानी बरतना जरूरी होता है। दूषित पानी या भोजन करने से बहुत जल्‍दी पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। जिस वजह से कमजोरी आ जाती है, उल्‍टी दस्‍त हो जाती है। वहीं अधिकतर लोग यही जानते हैं मच्‍छरों के काटने से मलेरिया हो जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कौन से प्रकार का मलेरिया आपको हुआ है। अगर आप सोच में पड़ गए है तो बता दें कि मलेरिया एक नहीं 5 प्रकार के होते हैं। आइए जानते हैं कैसे पहचाने हैं और क्‍या है लक्षण -
मलेरिया के लक्षण
-बदन दर्द करना
-ठंड लगकर बुखार आना
-उल्‍टी होना
- सिर दर्द होना
5 प्रकार के होते हैं मलेरिया
1.प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम - मच्‍छर काटने पर जब इस टाइप के मलेरिया बुखार की चपेट में आते हैं तो इंसान को लगातार उल्टियां होती रहती है। वह बेसुध हो जाता है। लगातार उल्टियां होने से इंसान को बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है। ऐसे में इंसान की जान भी जा सकती है। हालांकि इस तरह के मलेरिया से ग्रसित होने पर ठंड बहुत अधिक लगती है।
2.सोडियम विवैक्‍स - विवैक्‍स परजीवी नामक मच्‍छर दिन में काटता है। लेकिन इसका असर 48 घंटे बाद होता है। अधिकतम लोग इस बीमारी से पीडि़त होते हैं। इस मच्‍छर के काटने से बिनाइन टर्शियन मलेरिया पैदा करता है। इस तरह के मलेरिया से ग्रसित होने के बाद हाथ-पैर में दर्द, भूख नहीं लगना, सिर दर्द, कमर दर्द प्रभाव रहते हैं।
3.प्‍लास्‍मोडियम मलेरिया - यह मलेरिया बेनाइन म‍लेरिया के लिए जिम्‍मेदार होता है। अन्‍य मलेरिया के मुकाबले यह बहुत अधिक खतरनाक नहीं है। हालांकि इसमें इंसान को हर चौथे दिन बुखार आ जाता है। यूरिन के साथ प्रोटीन भी निकलता है। इस वजह से शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है और सूजन आने लगती है। इस टाइप के मलेरिया क्‍वाटर्न मलेरिया उत्‍पन्‍न करता है।
4. प्लाज्मोडियम नॉलेसी - इस प्रकार के मलेरिया मुख्‍य रूप से दक्षिण पूर्व एशिया में पाएं जाते हैं। यह प्राइमेट मलेरिया परजीवी है। इनके काटने से इंसान को ठंड लगती है, बुखार आता है, सिरदर्द होता है साथ ही भुख नहीं लगने की समस्‍या पैदा हो जाती है।
5. प्लास्मोडियम ओवेल - यह एक परजीवी प्रोटोजोआ की प्रजाति का है। इसके काटने के बाद टरसियन मलेरिया होता है। यह मलेरिया प्‍लास्‍मोडियम फैल्‍सीपैरम से अधिक खतरनाक नहीं होता है।
मलेरिया से बचने के उपाय
- कोशिश करें घर में मच्‍छर नहीं हो साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखें।
- घर बाहर खुली नालियों की सफाई करवाते रहे।
-कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करवाते रहे।
-घर में कहीं भी नमी या पानी जमा नहीं हो।
-घर में अधिक मच्‍छर होने पर कंडे का धुआं करें उससे भी मच्‍छर भाग जाते हैं।

शौर्यपथ /कोविड-19 के टीका आने के बाद से लोगों को कोविड वैक्सीन लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। ताकि इस बीमारी से जल्द से जल्द छुटकारा पा सकें। जी हां, कोरोना वायरस से बचाव का एक ही उपाय है टीकाकरण। लेकिन टीकाकरण के बाद ऐसा नहीं है कि आपको कोविड नहीं हो सकता है।टीकाकरण के बाद भी कोविड हो सकता है लेकिन बहुत अधिक गंभीर नहीं। हालांकि कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि टीकाकरण के एक हफ्ते बाद तक जिम जाने से क्यों बचना चाहिए। तो आइए जानते हैं ऐसा क्यों -
- वैक्सीनेशन के बाद लोगों में अलग - अलग साइड इफैक्ट्स दिखे हैं। ऐसे में कमजोरी आना लाजमी है। इसलिए सिर्फ घर पर ही हल्की एक्सरसाइज करें।
के तुरंत बाद ही शरीर में एंटी बाॅडीज नहीं बन जाती है इसलिए संक्रमित के संपर्क में आने से खतरा बढ़ सकता है।
- जिम में आप हैवी प्रोडक्ट्स को उठाकर एक्सरसाइज करते हैं लेकिन बाह में टीका लगा होने से आपको परेशानी हो सकती है। साइड इफैक्ट के तौर पर आपको दर्द हो रहा है लेकिन एक्सरसाइज करने के दौरान वह अधिक बढ़ सकता है।
- सीडीसी यानी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक कोविड-19 वैक्सीन लेने के बाद असुविधा हो रही है। इसलिए टीकाकरण के बाद कुछ दिनों तक जिम नहीं जाएं। आप घर पर रहकर हल्का योग कर सकते हैं।
- कई लोगों ने टीकाकरण के बाद जिम भी शुरू की थी लेकिन जिस हाथ पर वैक्सीन लगी थी उसमें दर्द बढ़ गया। इसलिए बहुत अधिक जरूरी नहीं होने पर बाॅडी को आराम दें और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने दें।

व्रत त्यौहार / शौर्यपथ /भारत के अधिकांश हिस्सों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है। भारत के प्राचीन ग्रंथ वेदों में भी गाय की महत्ता और उसमें दिव्य शाक्तियां होने का वर्णन मिलता है। मान्यतानुसार जो मनुष्य प्रात: स्नान करके गौ स्पर्श करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है। शास्त्रों में कामधेनु गाय को सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला बताया गया है।
1. पौराणिक संदर्भ में गाय की महत्ता : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गाय के गोबर में लक्ष्मी, गोमूत्र में भवानी, चरणों के अग्रभाग में आकाशचारी देवता, रंभाने की आवाज में प्रजापति और थनों में समुद्र प्रतिष्ठित हैं। अत: जो मनुष्य प्रात:काल में स्नान के पश्चात गौ माता को स्पर्श करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
2. मिट्टी का तिलक : सनातन धर्म में गाय को देवताओं की प्रतिनिधि माना गया है। अत: प्रतिदिन अथवा गोवत्स द्वादशी के दिन गाय के पैरों में लगी मिट्टी का तिलक लगाने से तीर्थ स्नान का पुण्य प्राप्त है।
3. चारा खिलाने मात्र से होगी पुण्य प्राप्ति : प्रतिदिन गौ माता को चारा या हरी घास खिलाने से जो पुण्य मिलता है, वह तीर्थों में स्नान, जप-तप, दान, ब्राह्मण भोज और हवन-यज्ञ आदि करने से भी नहीं प्राप्त होता। श्री कृष्ण भगवान गौ माता की सेवा अपने हाथों से किया करते थे और उन्होंने गाय का निवास गोलोक बताया गया है। अगर कोई व्यक्ति काली गाय को एक मुट्ठी घास खिलाता है तो उसके 30 दिन के किए पाप नष्ट हो जाते हैं, ऐसी मान्यता है।
4. पाप होंगे नष्ट : जो मनुष्य गौ माता का श्रद्धापूर्वक पूजन और सेवा करते हैं, अपने भोजन से पहले गौ-ग्रास निकालते है, उस परिवार में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं रहती तथा देवता भी उस पर हमेशा प्रसन्न रहते हैं। जिस घर में गौ माता का भरण-पोषण होता है या जहां गायों का समूह बैठकर आराम से सांस लेता है, उस स्थान के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
5. दूर होगा दुर्भाग्य : विशेष कर भाद्रपद मास के गोवत्स द्वादशी के दिन गौ सेवा करने से दुख और दुर्भाग्य दूर होता है। घर में सुख-समृद्धि का वास होने लगता हैं।
जो मनुष्य तीर्थ स्नान जाकर स्नान या दान नहीं कर सकते वो मात्र गौ सेवा करके ही कई जन्मों के पापों से मुक्ति पा सकते हैं।
6. गाय की परिक्रमा : जो मनुष्य प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर भक्तिपूर्वक काली गाय अथवा दूसरी गायों की परिक्रमा करता है, उसे पृथ्वी के समान फल प्राप्त होना माना जाता है। इतना ही नहीं गौ माता का पूजन करने से समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होने की मान्यता है।

आस्था / शौर्यपथ / पुराणों के अनुसार अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी तिथि को शुक्ल पक्ष में देवी राधा का जन्म भी हुआ था। बरसाने में राधाष्टमी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। राधाष्टमी का पर्व जन्माष्टमी के 15 दिन बाद भद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार राधा अष्‍टमी 14 सितंबर 2021 मंगलवार को मानाई जाएगी।
पद्म पुराण के अनुसार राधा वृषभानु नामक वैष्य गोप की पुत्री थीं। इसीलिए उनका नाम वृषभानु कुमारी पड़ा। उनकी माता का नाम कीर्ति था। बरसाना राधा के पिता वृषभानु का निवास स्थान था। आओ जानते हैं कि श्रीराधा और श्रीकष्ण की उम्र में कितना अंतर था।
1. इस संबंध में हमें पुराणों में अलग अलग मत मिलते हैं परंतु एक बात तो तय थी कि राधा की उम्र कृष्ण से बड़ी थी।
2. ऐसी कथा मिलती है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर श्रीराधा अपनी माता कीर्ति के साथ नंदरायजी के घर नंदगांव आई थी। उस समय राधा लगभग 11 माह की थी और माता की गोद में बैठी थी जबकि श्रीकृष्ण पालने में झुल रहे थे।
3. कुछ पुराणों में श्रीराधा को श्रीकृष्ण से 5 वर्ष बड़ी बताया गया है। श्रीमद्भागवत और विष्णुपुराण के अनुसार कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुम्बियों और सजातियों के साथ नंदगांव से वृंदावन में आकर बस गए थे, जहां बरसाने के लोग भी थे। मान्यता है कि यहीं पर वृंदावन में श्रीकृष्‍ण और राधा एक घाट पर युगल स्नान करते थे। उस वक्त कृष्ण 7 साल के थे और राधे 12 की, उनके साथ उन्हीं की उम्र के बच्चों की एक बड़ी टोली रहा करती थी, जो गांव की गलियों में धमाचौकड़ी मचाया करती थी।

मनोरंजन / शौर्यपथ / स्टार प्लस का पॉपुलर शो 'अनुपमा' की फेम रुपाली गांगुली ने अपना एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया हैं। इस वीडियो के जरिए रुपाली बॉडी और एज शेमिंग जैसे मुद्दों पर अपनी डांस के जरिए बड़ी शानदार मैसेज देते हुए दिख रही हैं। हालांकि वीडियो में वह बहुत ही गुस्से में नजर आ रही हैं।
शानदार कैप्शन के साथ शेयर किया वीडियो
वीडियो में रुपाली कैजुअल लुक और खुले बालों में दिख रही है। वह बहुत ही जोश और गुस्से में दिख रही हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए रुपाली ने कैप्शन में लिखती हैं, ''एक बार में एक मिथक का बुलबुला फोड़ना!''।

वीडियो में शानदार दिखीं रुपाली गांगुली
वीडियो में रुपाली जोशिले म्यूजिक पर एक्टिंग करती दिख रही हैं। वहीं वीडियो में एक के बाद बाद क्लिपबोर्ड दिख रहा है,जिस पर कुछ लिखा हुआ नजर आ रहा है, जिसका रिप्लाई वह अपने डांस एक्ट के जरिए देती हैं। वीडियो पर पहले लिखा दिखता है, क्या उम्र में शर्म करना ठीक है? जिसका बाद जवाब नो में लिखा होता है। इसके बाद फिर, क्या बॉडी को शर्म करना ठीक है? इसका जवाब भी नो में होता है। क्या नाम-कॉल करना ठीक है? इसका भी जवाब नो है। इसके बाद क्लिप के अंत में रुपाली शानदार मैसेज देते हुए वार्निंग पोज में दिखती हैं। वीडियो में लिखा, ''आगे बढ़ने के लिए किसी और को नीचे मत खींचो! राइजिंग का मलतब एकसाथ है।''

अनुपमा की सहेली ने किया कॉमेंट
रुपाली का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। फैंस सहित टीवी के सितारे भी इस पर कॉमेंट कर रुपाली की तारीफ कर रहे हैं। इस वीडियो को देखकर 'अनुपमा' शो में रुपाली की बेस्ट फ्रेंड का रोल प्ले कर रही जसवीर कौर (जस्सी) ने भी कॉमेंट किया है। जसवीर कौर ने रुपाली के वीडियो पोस्ट पर 'एट्टीट्यूड' लिखकर इसे लाइक किया है।

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / सौंदर्य की दुनिया में हर रोज नए ट्रेंड आते रहते हैं। इन सभी का उद्देश्य कुछ आसान तकनीकों की मदद से आपके सौंदर्य में निखार लाना है। ऐसा ही एक ट्रेंड है हेयर प्लॉपिंग। जो खास तौर से घुंघराले बालों को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या आप जानना चाहती हैं हेयर प्लॉपिंग क्या है और आपका इस्तेमाल कैसे कर सकती है? तो बस हम आपको सब कुछ बताने वाले हैं।
कर्ली बालों को मैनेज करने का तरीका है हेयर प्लॉपिंग
घने और घुंघराले बालों को संभाल पाना हर किसी के वश की बात नहीं होती। आप भी आए दिन सैलून जाकर हेयर स्पा लेती होंगी या ब्लो ड्रायर से उनके कर्ल कम करने की कोशिश करती होंगी। पर हेयर प्लॉपिंग एक ऐसी तकनीक है जो आपके बालों के कर्ल को बरकरार रखते हुए उन्हें और बाउंसी लुक देता है।
हेयर प्लॉपिंग?
ब्यूटी एक्सपर्ट, सोमाली अधिकारी, बताती हैं कि यह बालों को ड्राई करने की एक हीट मुक्त तकनीक है। जो कर्ली हेयर वाली महिलाओं के लिए बहुत काम की है। इस तकनीक में आपको एक हेयर सीरम या लीव इन कंडीशनर का प्रयोग करना होता है। ताकि आपके बाल थोड़े गीले हो जाएं।
इसके बाद आपको अपने बाल एक टी शर्ट में ढंक कर रखने होते हैं। 20 मिनट के लिए अपने बालों को ऐसे ही कवर किए रहना होता है। इस तरीके द्वारा आपको बाउंसी और बहुत सुंदर कर्ल्स मिलेंगे।
यहां है बालों को घर पर ही प्लॉप करने का स्टेप बाय स्टेप तरीका
1 सबसे पहले बालों में लीव इन कंडीशनर लगाएं :
हेयर प्लॉपिंग तकनीक में आपको अच्छे नतीजे पाने के लिए थोड़े गीले और डेंप बालों की आवश्कता होगी। इसलिए आपको नहाने के बाद अपने बालों की एंड्स में मॉइश्चराइज करने के लिए लीव इन कंडीशनर लगा लेना है।
आप एक कर्ल क्रीम का भी चुनाव कर सकती हैं। अपने बालों को एक बार थोड़ा झाड़ लें ताकि वॉल्यूम
मिल सके।
2 टी शर्ट या तौलिया से बालों का कवर करना :
अब आपको दूसरे स्टेप में बालों को लपेटने के लिए एक पुराना तैलिया या पुरानी टीशर्ट लेनी है। अगर आप तौलिया लेना चाहती हैं, तो माइक्रो फाइबर टॉवल का ही प्रयोग करें। याद रखिए आपको एकदम सॉफ्ट कपड़े का ही इस्तेमाल करना है ताकि आपके बाल अधिक उलझे नहीं।
टी शर्ट या तौलिया को एक फ्लैट सर्फेस पर बिछा लें। अगर आप टी शर्ट का प्रयोग कर रही हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए कि टी शर्ट की बाजू आपकी साइड हो। अपने बालों को आगे ले कर आए और उसे कपड़े के बीच में रख कर तोलिया से लपेट लें।
3 ढीले एंड को टाई कर लें :
जो कपड़े की साइड आपने अपने सिर के पीछे की हैं, उनकी साइड बदल लें। उन एंड को फ्रंट साइड की ओर कर लें। अपने सिर के उपर एक नोट बांध लें। इस प्रक्रिया द्वारा आपके बालों से एक्स्ट्रा पानी बाहर निकल आएगा।
4 अपने कर्ल्स को एंजॉय करें :
अब अपने बालों को इसी प्रकार 20 मिनट तक बंधे रहने दें। अब टी शर्ट या कपड़े को उतार लें और अपने बालों को अलग अलग करने और कर्ल्स को खोलने के लिए उंगलियों का प्रयोग करें। इस तरीके से आपके बाल काफी ज्यादा मैनेज करने लायक हो जाते हैं और आपको एक बहुत ही सुंदर हेयर स्टाइल भी मिलता है।

सेहत / शौर्यपथ / चाय पीने के शौकीनों की कमी नहीं है। भारत में ज्यादातर घरों में सुबह की शुरुआत चाय से ही होती है। वहीं, चाय के दीवाने दिन में 3-4 कप तक चाय पी जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि चाय पीने के कई फायदों के साथ सबसे बड़ा घाटा यह है कि चाय पीने से पेट की चर्बी सबसे ज्यादा बढ़ती है। साथ ही ज्यादा चाय पीने से आप धीरे-धीरे मोटापे की ओर अग्रसर होने लगते हैं। ऐसे में अगर आप फिटनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, तो कुछ दिन चाय पीना छोड़कर जरूर देखें। इससे न सिर्फ आपके वजन में कमी आएगी बल्कि इससे पेट की चर्बी भी कम होगी। आप चाय की जगह पर कुछ और हेल्दी ड्रिंक्स ट्राई कर सकते हैं-
शहद और नींबू
इसके सेवन से आपको वजन कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यह आपके शरीर को स्वस्थ रखता है। लेकिन डायबिटीज रोगियों को शहद से बचना चाहिए।
तुलसी और अदरक का काढ़ा
इसके सेवन से आपके गले के संक्रमण दूर होते हैं और आपका गला साफ होता है। ये काढ़ा दमा के रोगियों के लिए भी उपयोगी है।
दालचीनी या सौंफ का पानी
ये दोनों एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होते हैं। ये आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं और इससे आपका शरीर भी स्वस्थ रखता है।
संतरे का रस
संतरा विटामिन सी का एक बहुत अच्छा स्रोत होता है और साथ ही ये इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है।
मेथी का पानी
मेथी के बीजों का पानी आपके वजन को कम करता है। इसके साथ ही यह ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करने में मददगार होता है।
जीरा पानी
जीरे में आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है और साथ ही ये ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।
व्हीटग्रास जूस एंटी

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /गर्भावस्था के दौरान शरीर के साथ-साथ त्वचा में भी कुछ परिवर्तन होते हैं, जो आपके सौंदर्य को चुरा लेते हैं। ऐसे में कुछ टिप्स अपनाकर आप अपने सौंदर्य को बरकरार रख सकती हैं।
1 इस अवस्था में शरीर को पोषक तत्वों की आवश्यकता अधिक होती है, जिनकी कमी सौंदर्य चुरा सकती है, अत: स्वास्थ्य और खानपान का विशेष ध्यान रखें। दूध, दही, हरी सब्जियां, दालें आदि शामिल करें।
2 आंखों के लिए विटामिन से भरपूर आहार लें, जिससे आंखों के नीचे काले घेरे की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा नींद भी पर्याप्त लें।
3 इस अवस्था में कैल्शियम की कमी बच्चे के लिए तो नुकसानदायक है ही, आपको भी दांत संबंधी समस्या दे सकती है, अत: डॉक्टर की सलाह के अनुसार कैल्शियम और विटामिन सी जरूर लें।
4 पेट, कूल्‍हे और स्तनों पर स्ट्रैच मार्क्स से बचने के लिए बेबी ऑइल की हल्के हाथों से मालिश करवाएं और शरीर को झुकाने के बजाए सीधा रखें।
5 बालों को हानिकारक शैंपू के बजाए, मुल्तानी मिट्टी या रीठा व शिकाकाई से धोएं और दो मुंहे बालों को ट्र‍िम कराएं।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /गोल-गोल और हल्के पीले और नारंगी रंग की खूबानी जितना सुन्दर दिखती है उससे कहीं ज्यादा पौष्टिक और गुणकारी होती है। कई बार यह गुलाबी रंग की भी होती हैं।
1 आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 5 खूबानी से उतनी ही कैलोरी मिलती हैं, जितनी कि एक सेब से।
2 लेकिन इसमें सेब से कहीं अधिक प्रोटीन, कैल्सियम, आयरन, विटामिन 'के' विटामिन 'ए' और फोलिक एसिड की मात्रा पाई जाती है।
3 खूबानी में पोटेशियम और फाइबर की अपेक्षा बीटा कैरोटीन ज्यादा होती है। यदि उपलब्धता हो तो आपको इस फल को अपने रोजाना भोजन में शामिल करना चाहिए क्योंकि एक छोटे से फल में इतने सारे तत्व एक साथ मिल जाते हैं।
4 खासकर संरक्षित खूबानी बीटा कैरोटीन, पोटेशियम और फाइबर के अच्छे स्त्रोत होते हैं। लेकिन संरक्षित खूबानी को खरीदने से पहले डब्बे पर लगे लेबल की जांच अच्छी तरह कर लें। उसकी ताजगी बनाए रखने के लिए जो रसायन इस्तेमाल किए गए हैं कहीं वो आपके शरीर के लिए हानिकारक तो नहीं। क्योंकि इसमें ज्यादातर सल्फाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो कभी-कभी एलर्जी का भी कारण हो सकते हैं।
5 कोशिश करें कि ताजा खूबानी ही खाएं। वैसे आप सल्फाइट के बिना तैयार की गई खूबानी खरीद सकते हैं।

आस्था / शौर्यपथ /आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति के पास तिरूमाला पहाड़ी पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां भगवान विष्णु की पूजा होती है। इनकी ख्याति तिरुपति बालाजी के रूप में हैं। आओ जानते हैं इस हिन्दू मंदिर के 10 चौंकाने वाले रहस्य।
1. स्वामी पुष्करणी कुंड : श्री विष्णु ने कुछ समय के लिए तिरुमला स्थित स्वामी पुष्करणी नामक कुंड के किनारे निवास किया था। आज भी यह कुंड विद्यमान है जिसके जल से ही मंदिर के कार्य सम्पन्न होते हैं।
2. प्रतिमा से आता है पसीना : मंदिर में बालाजी की जीवंत प्रतिमा एक विशेष पत्थर से बनी हुई है। ऐसा कहते हैं कि बालाजी की प्रतिमा को पसीना आता है और उनकी प्रतिमा पर पसीने की बूंदें स्पष्‍ट रूप से देखी जा सकती हैं। बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है। इसलिए मंदिर में तापमान कम रखा जाता है।
3. स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र धारण करते हैं बालाजी : कहते हैं कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं इसीलिए यहां बालाजी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की यहां परम्परा है। बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।
4. असली है बालाजी के बाल : कहते हैं कि भगवान वेंकेटेश्वर के सिर के बाल असली हैं जो कभी उलझते नहीं और हमेशा मुलायम बने रहते हैं। यह बाल कैसे असली है इसका रहस्य बताना मुश्‍किल है।
5. छड़ी से हुई थी बालाजी की पिटाई : कहते हैं कि यहां मंदिर में दाहिनी ओर एक ऐसी छड़ी रखी है जिससे बचपन में कभी बालाजी की पिटाई की जाती थी। पिटाई करने से इस छड़ी से भगवान की ठोड़ी पर चोट लग गई थी। इसी कारण उनकी ठोड़ी पर चंदन का लेप लगाया जाता है। बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं।
6. मूर्ति के भीतर से आती है रहस्यमयी आवाज : कहते हैं कि भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर कान लगाकर सुनें तो भीतर से समुद्र की लहरों जैसी ध्वनि सुनाई देती है। यह आवाज कैसे और किसकी आती है यह रहस्य अभी तक बरकरार है।
7. हृदय में लक्ष्मीजी की आकृती : प्रत्येक गुरुवार को बालाजी का श्रृंगार हटाकर स्नान कराकर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब ये लेप हटाया जाता है तो बालाजी के हृदय में मां लक्ष्मी जी की आकृति दिखाई देती है।
8. कभी नहीं बुझता दीपक : बालाजी के मंदिर में एक दीपक हमेशा जलता रहता है। अचंभा यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता। यहां तक कि ये भी नहीं ज्ञात है कि दीपक को सबसे पहले किसने और कब प्रज्वलित किया था।
9. पचाई कर्पूर : भगवान बालाजी पर पचाई नामक कर्पूर लगाया जाता है। इस कपूर के बारे में कहा जाता है कि ये किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो पत्थर में कुछ समय में दरार पड़ जाती है, परंतु भगवान बालाजी की मूर्ति पर इस पचाई कर्पूर का कोई प्रभाव नहीं होता है।
10. मध्य भाग में खड़े हैं बालाजी : बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं मगर बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि वे दाईं तरफ के कोने में खड़े हैं।

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