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आस्था / शौर्यपथ /पिठोरी अमावस्या के दिन आटा गूंथ कर मां दुर्गा सहित 64 देवियों की आटे से मूर्ति बनाकर महिलाएं व्रत रखकर उनका पूजन करती हैं। आज के दिन आटे से बनी देवियों की पूजा होने के कारण ही यह दिन पिठोरी अमावस्या के नाम से जनमानस में प्रचलित हैं। इसे पिठौरा, कुशोत्पाटनी, कुशग्रहणी अमावस्या आदि नामों से भी जाना जाता है।
पौराणिक शास्त्रों में भाद्रपद अमावस्या के दिन कुशा इकट्ठी करने की मान्यता है। इस दिन सुहागिनें व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ और देवी दुर्गा का पूजन करती है। यह दिन पितरों की तृप्ति, पिंडदान, तर्पण और वंश वृद्धि के लिए अतिमहत्वपूर्ण माना गया है। अमावस्या की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया लगाने और पितरों का स्मरण और शिव जी और शनि देव की आराधना करने से जीवन में चारों तरफ से के लाभ मिलता है।
पिठोरी अमावस्या शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि का प्रारंभ- सोमवार, 06 सितंबर को सुबह 07 बजकर 38 मिनट से
अमावस्या तिथि का समापन- 07 सितंबर को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर।
आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पिठोरी अमावस्या के दिन यह कथा अवश्य पढ़नी चाहिए।
कथा-
सोमवती अमावस्या की पौराणिक एवं प्रचलित कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। उस परिवार में पति-पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी। वह पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उस पुत्री में समय और बढ़ती उम्र के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था। वह लड़की सुंदर, संस्कारवान एवं गुणवान थी। किंतु गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। वो उस कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए। कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधु ने कहा कि इस कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है।
तब ब्राह्मण दम्पति ने साधु से उपाय पूछा, कि कन्या ऐसा क्या करें कि उसके हाथ में विवाह योग बन जाए। साधु ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है।
साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है। यह बात सुनकर ब्रह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगल दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती।
एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता। बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं?
तब कन्या ने साधु द्बारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा। सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया,
उसका पति मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी।
उस दिन सोमवती अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो उठा।
इसीलिए सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के दिन भंवरी देता है, उसके सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है। अतः जो व्यक्ति हर अमावस्या को न कर सके, वह सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं कि भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ऐसी प्रचलित परंपरा है कि पहली सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिंदूर और सुपाड़ी की भंवरी दी जाती है। उसके बाद की सोमवती अमावस्या को अपने सामर्थ्य के हिसाब से फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने की सामग्री इत्यादि की भंवरी दी जाती है। और फिर भंवरी पर चढाया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननंद या भांजे को दिया जा सकता है। यह ध्यान रखें यह भंवरी का सामान अपने गोत्र या अपने से निम्न गोत्र में दान नहीं देना चाहिए।
रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना संकट काल में बस्तर अंचल के अबूझमाड़ और ओरछा जैसे दुर्गम और वन क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखना एक चुनौती थी। यहां न तो इंटरनेट और न ही अन्य किसी माध्यम से पढ़ाई संभव थी। ऐसी स्थिति में आश्रम शाला बेड़मा के सहायक शिक्षक श्री हेमंत बाम्बोड़े नई-नई शिक्षण सामग्री तैयार कर रोचक अंदाज में बच्चों की पढ़ाई कराई।
सहायक शिक्षक श्री हेमंत बाम्बोड़े ने बताया कि उनके आश्रम शाला में विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चे अध्ययनरत हैं। इन बच्चों को रोचक अंदाज में शिक्षा देने के लिए उन्होंने कई सहायक शिक्षण सामग्री तैयार की, जिससे ये बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई कर सकें। उन्होंने बताया कि गणितीय स्थानीय मान बॉक्स, यातायात संकेतक, भारतीय मुद्रा से स्थानीय मान की समझ, हांसिल जोड़ चार्ट, घटाव चार्ट, गुणा का बॉक्स, गुणा चार्ट, भाग चार्ट समय मिनट, कैलेंडर, गणितीय चिन्हों का संकेत साथ ही हिंदी वर्णों का बारहखड़ी मात्रा बॉक्स व मिलान जपउ, अंग्रेजी अल्फाबेट उच्चारण, अंग्रेजी मैजिक बॉक्स, सामान्य ज्ञान इत्यादि शिक्षण सहायक सामग्री तैयार की। इन शिक्षण सामग्रियों के जरिए अध्यापन से बच्चों को सीखने और समझने की प्रक्रिया आसान हुई। बच्चों की समझ और उनके कौशल में बढ़ोत्तरी हुई।
- पहले केवल 27 स्कूलों से आरंभ किया था, लोगों ने काफी पसंद किया और अब 172 स्कूल
- शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्यरत एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया मुख्यमंत्री ने
दुर्ग / शौर्यपथ / शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पाटन विधानसभा के सेवानिवृत्त और कार्यरत शिक्षकों का सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने स्वामी आत्मानंद विद्यालय के बच्चों से चर्चा भी की। इस मौके पर उन्होंने 70 सेवानिवृत शिक्षकों और समारोह में उपस्थित 500 से अधिक शिक्षकों का सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में शिक्षा की प्रगति हमारी सबसे जरूरी प्राथमिकताओं में से है। कुछ अभिभावक अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाना चाहते थे लेकिन आर्थिक दिक्कतों की वजह से एवं अन्य दिक्कतों की वजह से यह संभव नहीं हो रहा था। हमने आरंभिक रूप से 27 इंग्लिश मीडियम स्कूल आरंभ किये और लोगों ने इसे काफी सराहा।
यहाँ की उच्चस्तरीय सुविधा, शैक्षणिक स्तर, लाइब्रेरी, अधोसंरचना, विज्ञान लैब और हमारे शिक्षकों की कड़ी मेहनत ने इन संस्थानों को काफी ऊँचाई दी। अब यहाँ एडमिशन की काफी माँग होती है। अब हमारे बच्चे भी दिल्ली, चेन्नई और मुंबई में फर्राटे से अंग्रेजी बोलने में हिचकेंगे नहीं। यह बड़ा काम हुआ है। मुख्यमंत्री ने अपने विधानसभा के शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि पाटन क्षेत्र में हमारे पूर्वजों ने शिक्षा के लिए बड़ा काम किया। आजादी के पूर्व यहाँ 6 हाईस्कूल थे। शिक्षा को लेकर हमारे पूर्वजों का यह कार्य स्तुत्य है।
उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद ने विवेकानंद विद्यापीठ के माध्यम से अबुझमाड़ के बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य किया। यहाँ के बच्चे पढ़ाई में शानदार रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमने यह नवाचार आरंभ किया तब इन विद्यालयों का नाम स्वामी आत्मानंद के नाम पर रखने का निश्चय किया। मुख्यमँत्री ने अपने संबोधन के आरंभ में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृषणन के योगदान को भी नमन किया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भी अपना संबोधन दिया।
उन्होंने कहा कि पढ़ई तुंहर द्वार और अनेक नवाचारों के माध्यम से हमने प्रदेश में शिक्षा के लिए बहुत अच्छा कार्य किया है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अनेक तरह के नवाचार हमने किये हैं। इसके साथ ही लोगों के रोजगार के लिए, प्रदेश की जनजातीय आबादी एवं सभी वर्गों के लिए अच्छा कार्य किया है।
इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सभी नगरीय निकायों में लोगों की बुनियादी सुविधाओं के लिए बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इस मौके पर शिक्षाविद ओपी वर्मा ने भी अपना संबोधन दिया। इस मौके पर कुम्हारी नगर पालिका के अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर एवं अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे। साथ ही आईजी विवेकानंद सिन्हा, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं एसपी प्रशांत अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
*शुभ्रा सोनकर से पूछा, बेटा कैसा लग रहा है यहाँ*- मुख्यमंत्री ने आज कुम्हारी स्कूल में अपना कुछ वक्त बच्चों के साथ बिताया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि उन्हें इस स्कूल में कैसा लग रहा है। शुभ्रा सोनकर ने बताया कि उसे यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है। ऋतु चौधरी ने बताया कि यहाँ के टीचर बहुत अच्छे हैं। लाइब्रेरी भी अच्छी है और हम तेजी से अंग्रेजी सीख रहे हैं। नीलम साहू ने कहा कि हमारा स्कूल बहुत अच्छा है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को बहुत सी शुभकामनाएं दीं।
*98 करोड़ रुपए की राशि से पेयजल व्यवस्था होगी मुकम्मल*- मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि कुम्हारी नगर पालिका में पेयजल की किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी इसके लिए उन्होंने 98 करोड़ रुपए के माध्यम से पेयजल व्यवस्था के लिए कार्य करने की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि आज ही मुख्यमंत्री ने कुम्हारी में 15 करोड़ रुपए के कार्यों का लोकार्पण एवं 42 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन किया। इस तरह 57 करोड़ रुपए के कार्यों की सौगात दी।
कुम्हारी गौठान का किया मुख्यमंत्री ने निरीक्षण, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपे 2 लाख लाभांश के चेक
दुर्ग / शौर्यपथ / कुम्हारी में जहाँ पर डंप यार्ड था वहाँ पर अभी खूबसूरत फलोद्यान बना दिया गया है। यहाँ 6 प्रजातियों के पौधे रोपे गये हैं आज मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने यह फलोद्यान देखा। यह गौठान के पास बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने गौठान में उत्पादित हो रहे वर्मी कंपोस्ट भी देखे। मुख्यमंत्री ने यहां पर 3 एकड़ में लगाया गया केला बाड़ी भी देखा और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को लाभांश का दो लाख रुपए का चेक भी सौंपा। महिलाओं ने बताया कि गौठान में 9 लाख में गोबर क्रय किया गया और 14 लाख रुपए का वर्मी कंपोस्ट बेचा गया।
मुख्यमंत्री ने इसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि इसी तरह के नवाचार के माध्यम से कड़ी मेहनत करते रहें। मुख्यमंत्री ने आमों की प्रजाति के बारे में भी पूछा। सीएमओ ने बताया कि यहां आम्रपाली, तोतापरी जैसे आम की प्रजाति भी लगाई गई है। मुख्यमंत्री ने गौठान में आने वाले मवेशियों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि गौधन न्याय योजना के माध्यम से लोगों को इसी तरह लाभ देते रहें। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मांगलिक भवन का लोकार्पण भी किया।
सेहत / शौर्यपथ /कोरोना के समय में दुनिया अब तक के सबसे घातक वायरस हमलों से जूझ रही है, खुद को संक्रमित होने से बचाने के लिए हर कोई पूरी सावधानी बरत रहा है। यही कारण है कि स्वस्थ्य खाना खाने और इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत रखने की जरूरत इस समय सभी को है। बीमारियों से सुरक्षित रखने में इम्यूनिटी बहुत बड़ा रोल प्ले करती है। हम में से बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि क्या खाएं और क्या ना खाएं। ऐसे में आज आपको बताने वाले हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जो आपके इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाती है और आपको बीमार होने का खतरा हो सकता है।
कॉफी
कैफीन के अधिक सेवन से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो इम्यून सिस्टम पर गलत तरीके से असर करता है। कैफीन के नियमित सेवन से टी कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जो शरीर की संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार ।
नमक
यूनिलर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ बॉन के अध्ययन के मुताबिक नमक खाने से इम्यूनिटी की कमी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जब किडनी में अतिरिक्त सोडियम होता है, तो एक डोमिनो प्रभाव होता है, जो हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने की शरीर की क्षमता को कम कर देता है। इसलिए, अमेरिकियों को लिए डाइट गाइडलाइन के मुताबिक प्रति दिन 2,300 एमजी से कम नमक खाना चाहिए।
कोल्ड ड्रिंक
गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक काफी मजेदार लगती है। लेकिन ये सेहत के लिए उतनी ही खराब होती है। बहुत ज्यादा मात्रा में अगर आप इसका सेवन करते हैं तो अब समय है कि आप इनका सेवन कम कर दें। ये ड्रिंक्स एस्पार्टेम, सैकरीन और सुक्रालोज जैसे मिठास से भरे हुए हैं, जो इम्यूनिटी के लिए हानिकारक होते हैं।
शक्कर
लंबे समय तक खूब शक्कर का सेवन हेल्थ पर भारी पड़ सकता है। कई अध्ययन के मुताबिक शक्कर का अधिक सेवन से सूजन हो सकती है और धीरे धीरे ये व्हाइट ब्लड सेल्स को कमजोर कर सकता है। ये हमारे शरीर के लिए विटामिन सी को अवशोषित बना देता है, जो एंड में हमारी हड्डियों और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है।
स्ट्रॉबेरी
बहुत ज्यादा स्ट्रॉबेरी खाने से आपकी इम्यूनिटी का स्तर काफी कम हो जाता है। स्ट्रॉबेरी हिस्टामाइन नामक एक घटक को छोड़ती है, जिससे कंजेशन और साइनस की समस्या होती है ।
सेहत / शौर्यपथ /वैसे तो अंकुरित अनाज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है और इसे नियमित तौर पर अपनी डाइट में शामिल करना आपको सेहत और ब्यूटी के कई फायदे दे सकता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर सेहतमंद चीज, हर वक्त एक सा ही परिणाम दे। जी हां, अंकुरित अनाज के चाहे कितने भी फायदे हों, लेकिन बारिश के दिनों में इसे खाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अंकुरित अनाज कैसे सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है... तो हम आपको बताते हैं इसका कारण -
दरअसल बरसात के दिनों में फूड पॉइजनिंग और पेट खराब होने की समस्या सबसे ज्यादा होती है। इसका सबसे बड़ा कारण है, पानी या अन्य खाद्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण, जो आपके पेट को न सिर्फ खराब करता है बल्कि उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं को जन्म देकर आपके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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डाइटीशियन इस मौसम में अंकुरित अनाज न खाने की सलाह देते हैं, जिसका पहला कारण है कि इन्हें ज्यादा समय तक पानी में भिगोया जाता है और उससे भी अधिक समय तक इसमें नमी बनी रहती है। ऐसे में इनमें खतरनाक बैक्टीरिया होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।
दूसरा कारण यह है कि इसमें फाइबर की मात्रा अत्यधिक होती है जो मोशन होने में सहायक होते हैं। ऐसे में यह डायरिया जैसी समस्या का कारण भी बन सकता है जिससे शरीर में पानी एवं पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / विटामिन डी शरीर को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा स्त्रोत है। इसकी कमी होने पर शरीर का ढांचा भी बदलने लगता है। विटामिन डी की कमी से शरीर में कई तरह के रोग जन्म लेने लगते हैं तो कई बार लोग समय से पहले बूढ़े होने लगते हैं और कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। डॉक्टर के पास जब शुरुआती इलाज के लिए जाते हैं तो वह दवा कम और धूप लेने की सलाह ज्यादा और सबसे पहले देते हैं। तो आइए जानते हैं धूप लेने का सही तरीका और समय क्या है? और धूप लेने के क्या फायदे हैं?
धूप लेने का सही समय और तरीका
- धूप में बैठने का सबसे अच्छा समय होता है सुबह 7 से 9 बजे तक। यानी सिर्फ 2 घंटे। इसके बाद धूप तीखी होने लगती है जिससे स्किन को खतरा होता है।
- अक्सर धूप लेते समय सूरज की ओर पीठ करके बैठना चाहिए। आप कुछ देर अपने हाथ-पैर और पेट को भी धूप में रख सकते हैं। गुनगुनी धूप में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। अधिक तेज किरण होने पर कैंसर का खतरा भी रहता है।
- त्वचा का रंग अधिक डार्क नहीं होने पर आपको 15 मिनट बैठना चाहिए। वहीं अगर ज्यादा त्वचा का रंग डार्क है तो कम से कम 1 घंटे बैठना चाहिए।
धूप लेने के फायदे
- धूप से विटामिन डी मिलता है। साथ ही शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन भी बनता है जिससे आपको नींद आने लगती है। यदि आपके शरीर में मेलाटोनिन पर्याप्त मात्रा में हैं तो आपको रात में अच्छी नींद आएगी।
- शरीर के लिए 80 प्रतिशत विटामिन डी धूप से मिलता है और 20 फीसदी डाइट से।
- धूप लेने से पाचन प्रक्रिया अच्छी होती है। साथ ही शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है।
- धूप लेने से डिप्रेशन कम होता है। इससे आपको अच्छा महसूस करने वाले हार्मोन बनते हैं। जिसमें मुख्य रूप से सेरोटोनिन और एंडोर्फिन का धूप के असर से शरीर में पहुंचने पर काफी हद तक आराम मिलता है। धूप लेने से डिप्रेशन के साथ ही सीजनल अफेक्टिव ऑर्डर डिसऑर्डर, साइकोलॉजिकल और इमोशनल हेल्थ में काफी आराम मिलता है।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /पुदीना का गर्मी में अलग-अलग तरह से उपयोग किया जाता है। गन्ने के ज्यूस में, चटनी बनाने में, ठंडा बनाने में तो कभी चाय पीने में इसका उपयोग किया जाता है। लेकिन इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटी इंफ्लामेटरी, और सूथिंग प्रॉपर्टी होती है। इसमे सैलिसिलिक एसिड मौजूद होता है। इससे चेहरे पर पिंपल्स नहीं होती है।
गर्मी में खाने में इसका तड़का लगता है तो स्किन के लिए भी फायदेमंद है। तो आइए जानते हैं पुदीना को कैसे 3 तरीकें से इस्तेमाल किया जा सकता है-
1. फैस पैक- पुदीना का फेस बनाकर भी चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसका पैक बनाने के लिए पत्तियों को सूखाकर पीसे लें और गुलाबजल मिक्स कर लगा लें। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में 3 बार ऐसा कीजिए। आपको ताजगी महसूस होगी। इसे आप चाहे तो टमाटर के गूदे में भी मिक्स कर सकते हैं।
2. फेस वॉश- पुदीना का फेस वॉश आप तुरंत बनाकर यूज कर सकते हैं। यह चेहरे की ऑइलीनेस को कम करता है। इसके लिए नींबू का रस, गुलाब जल और पुदीने की पत्तियों को भिगोकर रख दें। एक घंटे बाद इससे चेहरा धो लें। अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप नींबू की जगह शहद का इस्तेमाल कीजिए।
3. मुहांसे - अगर गर्मी की वजह से आपके चेहरे पर मुंहासे हो रहे हैं तो आप पुदीने का फैस पैक लगा सकते हैं। पुदीना पाउडर में हल्दी और गुलाब जल मिक्स कर चेहरे पर लगा लें। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /पुदीना का गर्मी में अलग-अलग तरह से उपयोग किया जाता है। गन्ने के ज्यूस में, चटनी बनाने में, ठंडा बनाने में तो कभी चाय पीने में इसका उपयोग किया जाता है। लेकिन इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटी इंफ्लामेटरी, और सूथिंग प्रॉपर्टी होती है। इसमे सैलिसिलिक एसिड मौजूद होता है। इससे चेहरे पर पिंपल्स नहीं होती है।
गर्मी में खाने में इसका तड़का लगता है तो स्किन के लिए भी फायदेमंद है। तो आइए जानते हैं पुदीना को कैसे 3 तरीकें से इस्तेमाल किया जा सकता है-
1. फैस पैक- पुदीना का फेस बनाकर भी चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसका पैक बनाने के लिए पत्तियों को सूखाकर पीसे लें और गुलाबजल मिक्स कर लगा लें। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में 3 बार ऐसा कीजिए। आपको ताजगी महसूस होगी। इसे आप चाहे तो टमाटर के गूदे में भी मिक्स कर सकते हैं।
2. फेस वॉश- पुदीना का फेस वॉश आप तुरंत बनाकर यूज कर सकते हैं। यह चेहरे की ऑइलीनेस को कम करता है। इसके लिए नींबू का रस, गुलाब जल और पुदीने की पत्तियों को भिगोकर रख दें। एक घंटे बाद इससे चेहरा धो लें। अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप नींबू की जगह शहद का इस्तेमाल कीजिए।
3. मुहांसे - अगर गर्मी की वजह से आपके चेहरे पर मुंहासे हो रहे हैं तो आप पुदीने का फैस पैक लगा सकते हैं। पुदीना पाउडर में हल्दी और गुलाब जल मिक्स कर चेहरे पर लगा लें। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें।
सेहत / शौर्यपथ / पिछले करीब 5 सालों से हर दिन नहाने के बाद 15 मिनट ताली बजाता हूं। मेरा अनुभव रहा है कि बेहद खराब जीवन शैली व रोगों के घर मोटापे के बावजूद केवल इस आदत ने अब तक मेरी रक्षा की है। ताली बजाने के फायदे पर मेरा भरोसा इस कदर बढ़ा है कि कोई पेट या सिर में होने वाली किसी भी परेशानी के लिए अच्छे डॉक्टर की सलाह मांगता है तो मैं पहले ताली की महिमा का बखान करने लग जाता हूं। जिन लोगों ने मेरी यह सलाह मानी वे सभी मेरे शुक्रगुजार हैं ।
एक घटना के बाद लगा कि मुझे अपना यह अनुभव विशाल पाठक वर्ग से भी बांटना चाहिए। खबरों की टोह लेने कुछ लंबे छरहरे स्वास्थ्य रिपोर्टरों के साथ शास्त्री भवन में था। वहां खुली सस्ती जेनेरिक दवा की सरकारी दुकान में घुस गया। वहां कक्ष में बैठे एमबीबीएस डॉक्टर से हम सब ने अपना ब्लड-प्रेशर नपवाया। मेरे ब्लड-प्रेशर की 120/80 रीडिंग देख कर उन्हें सहज यकीन ही नहीं आया।
50 से अधिक उम्र और इतनी बड़ी तोंद के बावजूद इतना 'आदर्श' ब्लड-प्रेशर, कैसे संभव है। दूसरे साथियों का ब्लड-प्रेशर भी सामान्य था लेकिन इतना सामान्य नहीं था। जब मैंने डॉक्टर को ताली बजाने की बात बताई तो उन्हें बात तुरंत समझ में आ गई। वे भी ताली के फायदे से अच्छी तरह वाकिफ थे। उन्होंने कहा कि नियमित ताली बजाने वाले को कम से कम ब्लड-प्रेशर की बीमारी तो नहीं हो सकती ।
लेकिन अगर अपने अनुभव की बात करूं तो ताली बजाने के अनगिनत फायदे हैं। नियमित रूप से ताली बजा कर कीर्तन-भजन करने वालों पर 'भगवान' की कितनी कृपा होती है यह तो किसी को पता नहीं लेकिन मेरा विश्वास है कि निश्चित रूप से कई रोग उनके पास नहीं फटक पाते होंगे।
दक्षेस देशों के स्वास्थ्य पत्रकारों के संगठन 'हेल्थ एसेईस्ट एंड ऑथर्स लीग' (हील) के संस्थापक सेक्रेटरी जनरल की हैसियत से पत्रकारों के वर्कशॉप में मैं यही कहते हुए शुरू करता था कि इतनी बड़ी तोंद होते हुए मुझे स्वास्थ्य पर भाषण देने का हक नहीं है।
तोंद होना कई बीमारियों का घर माना जाता है लेकिन मैं अपने लंबे अनुभव के आधार पर अब स्वास्थ्य संपादक की हैसियत से यह दावे के साथ कह सकता हूं कि ताली बजाने के कई फायदे हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में लंबे अनुभव को इलाज की किसी विधि के प्रभावी होने के प्रमाण के रूप पेश किया जा सकता है ।
ताली बजाना इलाज की प्रभावी विधि एक्यूप्रेशर का एक सहजतम रूप है। कभी मुझे अक्सर डिप्रेशन (अवसाद) घेरे रहता था। सिर हमेशा भारी भारी, अक्सर दर्द, पेट में गैस, कभी भी कुछ हो जाने का डर सवार रहता था। केवल ताली बजाने मात्र से मेरी सारी समस्याएं दूर हो गई हैं। आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है। लगता है, ताली बजाता रहूं तो कभी कोई रोग होगा ही नहीं ।
ताली का इतना मुरीद इसलिए भी हूं क्योंकि मेरी जीवन शैली अच्छे स्वास्थ्य के अनुरूप कतई नहीं है। रात को काफी देर से खाना खाता हूं। टीवी देखने की इतनी बुरी आदत है कि नींद भाग जाती है। मुश्किल से 2-3 घंटे सो पाता हूं। सुबह टहलने का तो सवाल ही नहीं। सोचिए, जीवन शैली ठीक होती तो ताली से और कितने फायदे हाते। ताली मुझे इस खराब जीवन शैली के दुष्प्रभाव से बचा रही है। ठीक से सो नहीं पाने की वजह से सुबह मन भारी जरूर लगता है लेकिन ताली बजाते ही इतना तरोताजा महसूस करने लगता हूं कि मत पूछिए। सोचता हूं कोई जादू तो नहीं हो गया।
कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि कोई गंभीर रोग है तो सबकुछ छोड़कर ताली पीटना शुरू कर दें। किडनी खराब हो गई है तो ताली पीटने से वह ठीक नहीं होने वाली। यह रोगों से बचाव में बहुत अधिक प्रभावी है लेकिन रोग हो गया है तो ताली उसकी दवा नहीं हो सकती। हां, इतना तय है कि इलाज के साथ-साथ ताली बजाएं तो जल्दी फायदा जरूर होगा। मैं कांटेदार बेलन पर तलवे को 10 मिनट घिसता भी हूं। यह भी एक्यूप्रेशर की ही विधि है।
मेरा एक दूसरा अनुभव भी बांटने योग्य है। सिर के बाल के तेजी से झड़ने को रोकने की कवायद में खासा परेशान था । सिर के बीच में चांद निकल आया था। कई उपाय किए। बाल झड़ना बंद नहीं हुआ। लगा इस गति से तो जल्द ही सफाचट हो जाएगा। तभी किसी ने सरसों तेल आजमाने की सलाह दी।
तब से रोज नहाने के पहले पूरे माथे में चुपड़ लेता हूं। फिर कुछ मिनट बाद तेल का प्रभाव खत्म करने के लिए शैंपू लगा लेता हूं। मानें या न मानें, इस विधि के प्रयोग के बाद बाल का झड़ना जो रुका तो आज तक एक बाल भी बांका नहीं हुआ है। इन सहज उपायों को देखकर तो आर्कमीडीज की तरह यूरेका (मिल गया) ! यूरेका ! कहने का मन होता है। कहीं यह कोई दवा तो नहीं !
आस्था / शौर्यपथ /भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की दूज को राजस्थान के महान संतों में से एक बाबा रामदेवरा जिन्हें रामापीर भी कहते हैं उनकी जयंती मनाई जाती है। इस बार यह जयंती 8 सितंबर को रहेगी। जनश्रुति के आधार पर आओ जानते हैं उनके जीवन से जुड़ा एक रोचक किस्सा।
बाबा रामदेव (1352-1385) : 'पीरों के पीर रामापीर, बाबाओं के बाबा रामदेव बाबा' को सभी भक्त बाबारी कहते हैं। जहां भारत ने परमाणु विस्फोट किया था, वे वहां के शासक थे। हिन्दू उन्हें रामदेवजी और मुस्लिम उन्हें रामसा पीर कहते हैं बाबा रामदेव को द्वारिकाधीश का अवतार माना जाता है। इन्हें पीरों का पीर 'रामसा पीर' कहा जाता है। सबसे ज्यादा चमत्कारिक और सिद्ध पुरुषों में इनकी गणना की जाती है। हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बाबा रामदेव के समाधि स्थल रुणिचा में मेला लगता है। उन्होंने रुणिचा में जीवित समाधि ले ली थी।
पांच पीर : स्थानीय जनश्रुति के आधार पर कहा जाता है कि चमत्कार होने से लोग गांव-गांव से रुणिचा आने लगे। यह बात रुणिचा और आसपास के गांव के मौलवियों को नहीं भाई। उन्हें लगा की इस्लाम खतरे में है। उनको लगा कि मुसलमान बने हिन्दू कहीं फिर से मुसलमान नहीं बन जाएं तो उन्होंने बाबा को नीचा दिखाने के लिए कई उपक्रम किए। जब उन पीरों और मौलवियों के प्रयास असफल हुए तब उन्होंने यह बात मक्का के मौलवियों और पीरों से कही। उन्होंने कहा कि भारत में एक ऐसा पीर पैदा हो गया है, जो अंधों की आंखें ठीक कर देता है, लंगड़ों को चलना सिखा देता है और यहां तक वह मरों को जिंदा भी कर देता है। मक्का के मौलवियों ने इस पर विचार किया और फिर उन्होंने अपने पूज्य चमत्कारिक 5 पीरों को जब बाबा की ख्याति और उनके अलौकिक चमत्कार के बारे में बताया तो वे पांचों पीर भी बाबा की शक्ति को परखने के लिए उत्सुक हो गए। कुछ दिनों में वे पीर मक्का से चलकर रुणिचा के रास्ते पर जा पहुंचे।
रास्ते में भी बाबा रामदेव से उनकी मुलाकात हुई। पांचों पीरों ने रामदेवजी से पूछा कि हे भाई! रुणिचा यहां से कितनी दूर है? तब रामदेवजी ने कहा कि यह जो गांव सामने दिखाई दे रहा है वही तो रुणिचा है। क्या मैं आपके रुणिचा आने का कारण पूछ सकता हूं? तब उन पांचों में से एक पीर बोला कि हमें यहां रामदेवजी से मिलना है और उसकी पीराई देखनी है। तब रामदेवजी बोले- हे पीरजी! मैं ही रामदेव हूं और आपके सामने खड़ा हूं, कहिए मेरे योग्य क्या सेवा है? पांचों पीर बाबा की बात सुनकर कुछ देर उनकी ओर देखते रहे फिर हंसने लगे और सोचने लगे कि साधारण-सा दिखाई देना वाला व्यक्ति ये पीर है क्या?
रामदेवजी बाबा ने उनकी आवभगत की और 'अतिथि देवो भव:' की भावना से उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। बाबा के घर जब पांचों पीरों के भोजन हेतु जाजम बिछाई गई, तकिए लगाए गए, पंखे लगाए गए और सेवा-सत्कार के सभी सामान सजाए गए, तब भोजन पर बैठते ही एक पीर बोला कि अरे, हम तो अपने खाने के कटोरे मक्का ही भूल आए हैं। हम तो अपने कटोरों में ही खाना खाते हैं, दूसरे के कटोरों में नहीं, यह हमारा प्रण है। अब हम क्या कर सकते हैं? आप यदि मक्का से वे कटोरे मंगवा सकते हैं तो मंगवा दीजिए, वर्ना हम आपके यहां भोजन नहीं कर सकते।
तब बाबा रामदेव ने उन्हें विनयपूर्वक कहा कि उनका भी प्रण है कि घर आए अतिथि को बिना भोजन कराए नहीं जाने देते। यदि आप अपने कटोरों में ही खाना चाहते हैं तो ऐसा ही होगा। इसके साथ ही बाबा ने अलौकिक चमत्कार दिखाया और जिस पीर का जो कटोरा था उसके सम्मुख रखा गया। इस चमत्कार (परचा) से वे पीर सकते में रह गए। जब पीरों ने पांचों कटोरे मक्का वाले देखे तो उन्हें अचंभा हुआ और मन में सोचने लगे कि मक्का कितना दूर है। ये कटोरे तो हम मक्का में छोड़कर आए थे। ये कटोरे यहां कैसे आए? तब उन पीरों ने कहा कि आप तो पीरों के पीर हैं।
पांचों पीरों ने कहा कि आज से आपको दुनिया रामापीर के नाम से पूजेगी। इस तरह से पीरों ने भोजन किया और श्रीरामदेवजी को 'पीर' की पदवी मिली और रामदेवजी, रामापीर कहलाए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /कोरोना काल में कपल्स लंबे समय तक एक दूसरे से दूर रहे हैं। ऐसे में लॉन्ट टर्म रिलेशनशिप के बाद शादी करने का फैसला करते हैं। हालांकि, अगर आप अपन पार्टनर के साथ शादी का फैसला करते हैं, तो आपको अपना मन बनाने से पहले कुछ बातों पर विचार करने की जरूरत है। जीवन में शादी फैसला बहुत बड़ा होता है। ये एक अलग ही पड़ाव होता है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अगर इन बातों पर ध्यान ना दिया जाए तो आगे चलकर विवाहित जीवन में परेशानियां हो सकती हैं। तो चलिए जानते हैं कि पार्टनर की किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
1) बार-बार टोकना
एक दूसरे की अच्छाई के लिए कई बार चीजों को बोलना अच्छा होता है, लेकिन बार बार अगर आपका पार्टनर चीजों के लिए रोकता-टोकता है और आपकी हर बात को नकारात्मक प्रतिक्रिया करता है, तो इससे भविष्य में बहुत सारी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में आपको इस परेशानी के बारे में अपने पार्टनर से बात करनी चाहिए।
2) मॉनिटरिंग पार्टनर्स
केयर करने वाला पार्टनर हर किसी को पसंद होता है, लेकिन देखभाल और तांकझांक में फर्क होता है। अगर आपके पार्टनर की हर एक चीज पर बारीक नजर रखने की आदत है, तो शादी की जल्दबाजी का फैसला न लें।
3) कंफ्यूजन
अगर आपका पार्टनर आपके साथ घूमना फिरना, पार्टी करना पसंद करता है, लेकिन फिर भी शादी की बात आते ही कतराने लगता है, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। हालांकि कोई भी एक जैसा नहीं होता, लेकिन अगर आप दोनों एक दूसरे से सभी पहलू में अलग हैं, तो शादी के बाद ये लड़ाई का कारण बन सकता है।
सेहत / शौर्यपथ /आप दिन में एक या दो कप ही कॉफी पीते हैं, तो यह सामान्य बात है लेकिन 5-6 बार कॉफी का सेवन करने से आपकी सेहत खराब हो सकती है। ऐसे में आप ग्रीन कॉफी का सेवन कर सकते हैं। इसे अधिक मात्रा में पीने से आपकी सेहत पर असर नहीं पड़ता, क्योंकि इस ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा न के बराबर होती है। ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा न के बराबर है। इसका सेवन आप अधिक से अधिक मात्रा में कर सकते हैं। इससे आप 24 घंटे चुस्त, मस्त व स्वस्थ रहते हैं।
ग्रीन कॉफी के फायदे :
ग्रीन कॉफी बीन्स में क्रोनॉलॉजिकल एसिड होता है। इस तरह की कॉफी का सेवन करने से आपका मेटाबॉलिज्म सही रहता है। मेटाबॉलिज्म रेट सही मात्रा में होने से आप में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इससे आप जो भी काम करते हैं उसमें आपका मन सही रूप से लगता है।
ग्रीन कॉफी बीन्स में भरपूर विटामिन और खनिज पाया जाता है। यह हमारे शरीर में पोषक तत्वों के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। इससे आपका वजन नियंत्रण में रहता है। ग्रीन कॉफी का सेवन करने से आप अपने वजन को बढ़ने से रोक सकते हैं।
ग्रीन कॉफी बीन्स एंटीऑक्सिडेंट्स से समृद्ध है। शरीर में आने वाली हर हानिकारक प्रभाव से यह आपको दूर व स्वस्थ रखता है। ग्रीन बीन्स 1०० प्रतिशत भुने हुए और स्वस्थ्य हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आप अगर मोमोस मिस कर रहे हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको मोमोस बनाने की ऐसी आसान रेसिपी बताने जा रहे हैं, जिसे आप बिना स्टीमर के भी बना सकते हैं।
सामग्री-
1 कप मैदा
1 छोटी चम्मच तेल
1 कप पानी
आधा कप गोभी कटी हुई
1 कद्दूकस की हुई गाजर
1 प्याज़ कद्दूकस
2 छोटा चम्मच पनीर मसला हुआ
2 छोटा चम्मच हरा धनिया पत्ती कटा हुआ
1 चम्मच तेल
नमक
1 चम्मच सोया सॉस
विधि-
मैदा में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर आटा बनाएं आटा ज्यादा गाढ़ा भी न हो न ज्यादा टाइट।
बाद में आटे पर थोड़ा तेल लगाके हल्का गूंथ लें और बाद में 15 मिनट को ढककर रख दें।
अब पैन में तेल गरम करें
इसके बाद इसमें बारी-बारी से पत्तागोभी, गाजर, प्याज मिलाकर भून लें।
इसके बाद इसमें नमक, सोया सॉस, पनीर मिलाएं। हरा धनिया मिलाकर गैस से उतार लें।
आटा से छोटी लोई लेकर नॉर्म साइज में बेलें।
बाद में बीच में भरावन भरें और एक कॉर्नर पकड़ के घुमाते हुए प्लेट बनाते हुए बंद करें आप हल्का सा हॉल भी छोड़ सकते हो, जिससे सब्जियां भी स्टीम हो जाएं।
अब आप के पास स्टिमर है, तो आप आसानी से तेल लगाकर स्टीम कर सकते हैं लेकिन अगर नहीं है, तो कड़ाही में पानी उबालें बाद में स्टीमर की छलनी में तेल लगाएं और अब मोमोज रखें।
बाद में प्लेट से ढक के 20 मिनट स्टीम करें और चटनी के साथ परोसें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
