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April 05, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ /आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को वैवस्वत सूर्य की पूजा की जाती है। अंग्रेजी माह के अनुसार इस बार यह तिथि 16 जुलाई 2021 शुक्रवार को पड़ रही है। वैवस्वत पूजा क्या है? क्यों की जाती है? जानिए महत्व।
वैवस्वत पूजा क्या है?
12 आदित्यों में से एक भगवान सूर्य को विवस्वान भी कहा जाता है। इन्हीं विवस्वान और विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा के पुत्र थे वैवस्वत मनु। वैवस्वत मनु को कई जगहों पर श्राद्धदेव या सत्यव्रत भी कहा गया है। इन्हीं की पूजा की जाती है जिसे वैवस्वत पूजा कहा जाता है। वैवस्वत मनु की शासन व्यवस्था में देवों में पांच तरह के विभाजन थे: देव, दानव, यक्ष, किन्नर और गंधर्व। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे। इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध पुत्र थे। इसमें इक्ष्वाकु कुल का ही ज्यादा विस्तार हुआ। इक्ष्वाकु कुल में कई महान प्रतापी राजा, ऋषि, अरिहंत और भगवान हुए हैं।
क्यों की जाती है?
द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत (वैवस्वत मनु) के समक्ष भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में प्रकट होकर कहा कि आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय के समुद्र में डूब जाएगी। तब तक एक नौका बनवा लो। समस्‍त प्राणियों के सूक्ष्‍म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्‍तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी तब मैं मत्स्य रूप में बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बाँध देना। तब प्रलय के अंत तक मैं तुम्‍हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी ‘नौकाबंध’ से बांध दिया। भगवान ने प्रलय समाप्‍त होने पर वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्‍यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्‍त हो वैवस्‍वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे उन्हीं से संसार में जीवन चला। इसी घटना की याद में वैवस्वत मनु की पूजा की जाती है। यह भी कहा जाता है कि वैवस्वत मनु पूर्वाषाढ़ को प्रकट हुए थे। इसीलिए इस दिन का महत्व है।
महत्व :
1. भगवान सूर्य के साथ उनके पुत्र वैवस्वत मनु की पूजा करने का महत्व है। आषाढ़ महीने की सप्तमी तिथि पर भगवान सूर्य के साथ उनके पुत्र वैवस्वत मनु की भी पूजा की जाती है।
2. सूर्य सप्तमी का व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य का आशीष मिलता है, साथ ही वह सूर्य कृपा से अपने शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त करता है।
3. ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार अभी वैवस्वत मनवंतर चल रहा है। सूर्यदेव ने देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लिया था और विवस्वान एवं मार्तण्ड कहलाए। इन्हीं की संतान वैवस्वत मनु हुए जिनसे सृष्टि का विकास हुआ है। इन्हीं के नाम पर ये मन्वंतर है। शनि महाराज, यमराज, यमुना और कर्ण भी भगवान सूर्य की ही संतान हैं।
4. यह भी कहा जाता है कि वैवस्वत मनु पूर्वाषाढ़ को प्रकट हुए थे। इसीलिए इस दिन का महत्व है।
5. वैवस्वत मनु की पूजा से शनि और यम का भय भी नहीं रहता है।

- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बनाया गया प्रस्ताव, डीएमएफ से भी दी गई राशि
- 885 एकड़ क्षेत्रफल में लगाए जाएंगे 80 हजार से अधिक पौधे
- कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं डीएफओ श्री धम्मशील गणवीर ने किया साइट निरीक्षण
- पूरा जंगल 2500 एकड़ में फैला होगा
- पर्यावरण के पुनः संरक्षण अथवा इकोलॉजिकल रीस्टोरेशन के लिए बनेगा नजीर, किस तरह से खनन आधारित प्रोजेक्ट को नेचुरल हैबिटेट के रूप में बदला जा सकता है इसका होगा अनुकरणीय उदाहरण

दुर्ग / शौर्यपथ / देश में पर्यावरण की मानव निर्मित सबसे बड़ी धरोहर दुर्ग जिले में बनने वाली है। नंदिनी की खाली पड़ी खदानों की जमीनों में यह 885 एकड़ क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है। 3 सालों में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार होगा। लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से यह प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसके लिए डीएमएफ तथा अन्य मदों से राशि ली गई है। पर्यावरण संरक्षण के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। यह प्रोजेक्ट देश दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि किस तरह से निष्प्रयोज्य माइंस एरिया को नेचुरल हैबिटैट के बड़े उदाहरण के रूप में बदला जा सकता है।
इस प्रोजेक्ट के बनने से नंदिनी क्षेत्र का प्राकृतिक बहुत समृद्ध होगा और पर्यावरण के क्षेत्र में यह छत्तीसगढ़ ही नहीं देश की भी सबसे बड़ी धरोहर साबित होगा। उल्लेखनीय है कि 17 किलोमीटर क्षेत्र में फैले नंदिनी के जंगल में पहले ही सागौन और आंवले के बहुत सारे वृक्ष मौजूद हैं। अब खाली पड़ी जगह में 80,000 अन्य पौधे लगाने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए डीएमएफ से राशि भी स्वीकृत कर ली गई है आज कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। डीएफओ श्री धम्मशील गणवीर ने विस्तार से प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए कहा कि 80,000 पौधों के लगाने के पश्चात 3 साल में यह क्षेत्र पूरी तरह जंगल के रूप में विकसित हो जाएगा। यहां पर विविध प्रजाति के पौधे लगने की वजह से यहां का प्राकृतिक परिवेश बेहद समृद्ध होगा। श्री गणवीर ने बताया कि यहां पर पीपल, बरगद जैसे पेड़ लगाए जाएंगे जिनकी उम्र काफी अधिक होती है साथ ही हर्रा, बेहड़ा, महुवा जैसे औषधि पेड़ भी लगाए जाएंगे
पक्षियों के लिए होगा आदर्श रहवास- गणवीर ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट को इस तरह से विकसित किया गया है कि यह पक्षियों के लिए भी आदर्श रहवास बन पाए तथा पक्षियों के पार्क के रूप में विकसित हो पाए। यहां पर एक बहुत बड़ा वेटलैंड है जहां पर पहले ही विसलिंग डक्स, ओपन बिल स्टार्कआदि लक्षित किए गए हैं यहां झील को तथा नजदीकी परिवेश को पक्षियों के ब्रीडिंग ग्राउंड के रूप में विकसित किया जाएगा।
इको टूरिज्म का होगा विकास- इसके साथ ही इस मानव निर्मित जंगल में घूमने के लिए भी विशेष व्यवस्था होगी। इसके लिए भी आवश्यक कार्य योजना बनाई जा रही है ताकि यह छत्तीसगढ़ ही नहीं अपितु देश के सबसे बेहतरीन घूमने की जगह में शामिल हो सके।
साल पौधों का होगा प्लांटेशन- मानव निर्मित जंगल में साल पौधों का भी प्लांटेशन होगा। इसके पहले अभी तक साल पौधों का संकेंद्रण बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में ही रहा है। पहली बार इस तरह का प्रयोग क्षेत्र में होगा। कलेक्टर ने इसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरा प्रोजेक्ट नेचुरल हैबिटेट को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से बेहद अहम साबित होगा तथा यह प्रोजेक्ट इस बात को इंगित करेगा कि किस तरह से इकोलॉजिकल रीस्टोरेशन या पर्यावरण के पुनर संरक्षण के क्षेत्र में कार्य किया जा सकता है। यह बेहतरीन नजीर देश के सामने और दुनिया के सामने रखेगा।

सामाजिक चुनाव कार्यक्रम घोषित, कार्यकाल पूर्ण कर चुके सभी ईकाई का होगा चुनाव

राजनांदगाँव / शौर्यपथ / जिला साहू संघ राजनांदगाँव के प्रबंधकारणी की बैठक जिला साहू सदन जिला चिकित्सालय के सामने राजनांदगांव में जिला अध्यक्ष कमल किशोर साहू की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिला महामंत्री अमर नाथ साहू ने बताया कि जिले के अंतर्गत जिन तहसील, परिक्षेत्र व ग्राम ईकाई का कार्यकाल अवधि पूर्ण हो चुका है, उन सभी का चुनाव प्रक्रिया 15 जुलाई से 15 अक्टूबर के मध्य कराने का निर्णय लिया गया है।
समाज द्वारा वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम पखवाड़ा चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत जिले के प्रत्येक गांव में समाज के ग्राम ईकाई को कम से कम 10 पौधा लगाने व उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसी तरह सभी परिक्षेत्र, व तहसील को भी लक्ष्य दिया गया है। इस तरह कुल 15000 पौधा लगाने का संकल्प लिया गया है, जिसका शुभारंभ जिला मुख्यालय राजनांदगाँव से किया जाएगा।
जिला साहू संघ द्वारा द्वारा पूर्व से संचालित वैक्सीन लगाओ-जीवन बचाओ अभियान, कर्मा सेवा शक्ति कलश यात्रा के माध्यम से वैक्सीनेशन के प्रति जन जागरूकता कार्यक्रम व जिला राजनीति प्रकोष्ठ के माध्यम से प्रचार रथ के माध्यम से किए गए कार्यों का बहुत अच्छा परिणाम देखने को मिला है, शेष बचे लोगों को भी आगामी तीसरी लहर की आशंकाओं के चलते शत प्रतिशत टीकाकरण कर समाज को सुरक्षित रखने सभी ईकाई को जिम्मेदारी दी गई है।
बैठक में आय व्यय पर चर्चा, कोरोना संक्रमण काल में चलाए गए एम्बुलेंस सेवा की समीक्षा कर न्यूनतम दर पर सबके लिए एम्बुलेंस सेवा जारी रखने, प्रत्येक परिवार से संबद्धता शुल्क अनिवार्य रूप से जमा करने, सामाजिक न्याय प्रणाली सरल, सुलभ बनाए जाने व नियमानुसार सभी ईकाई की अंशदान राशि वितरण अनिवार्य करने, भवन व परिसर के निर्माण व मरम्मत कार्यों के अलावा कोरोना संक्रमण काल में समाज के रूके सामाजिक, व रचनात्मक गतिविधियों को कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए किए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में कोषाध्यक्ष विवेक साहू, उपाध्यक्षद्वय डीडी साहू व श्रीमती नीरा साहू, संगठन सचिव हेमंत साहू, सहसचिव धरम साहू, उपकोषाध्यक्ष भुवाल साहू, अंकेक्षक अंजोर सिंह साहू शामिल थे।

प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं होने पर परीक्षार्थी आबंटित रोल नंबर की पावती लेकर परीक्षा केन्द्र से प्राप्त कर सकते हैं प्रवेश पत्र की द्वितीय प्रति

   राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले के 3 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेण्ड्री राजनांदगांव, मोहला, मानपुर में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा 15 जुलाई 2021 को आयोजित की गई है। चयन परीक्षा सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक चलेगी। इसके लिए 4 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेण्ड्री राजनांदगावं में रोल नंबर 10001 से 10096 तक, शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक शाला मोहला में रोल नंबर 12001 से 12100 तक, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला मोहला में रोल नंबर 12101 से 12183 तक तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मानपुर में रोल नंबर 13001 से 13058 तक परीक्षा केन्द्रों में रोल नंबर के आधार पर चयन परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजनांदगांव एमएल देशलहरे द्वारा बताया गया कि प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं होने की स्थिति में परीक्षार्थी आबंटित रोल नंबर वाले पावती लेकर संबंधित परीक्षा केन्द्र में एक घण्टा पूर्व उपस्थित होकर प्रवेश पत्र की द्वितीय प्रति प्राप्त कर परीक्षा में बैठ सकते हैं।

सेहत / शौर्यपथ / वैसे तो अंकुरित अनाज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है और इसे नियमित तौर पर अपनी डाइट में शामिल करना आपको सेहत और ब्यूटी के कई फायदे दे सकता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर सेहतमंद चीज, हर वक्त एक सा ही परिणाम दे। जी हां, अंकुरित अनाज के चाहे कितने भी फायदे हों, ले‍किन बारिश के दिनों में इसे खाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अंकुरित अनाज कैसे सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है... तो हम आपको बताते हैं इसका कारण-
दरअसल बरसात के दिनों में फूड पॉइजनिंग और पेट खराब होने की समस्या सबसे ज्यादा होती है। इसका सबसे बड़ा कारण है, पानी या अन्य खाद्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण, जो आपके पेट को न सिर्फ खराब करता है बल्कि उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं को जन्म देकर आपके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
डाइ‍टीशियन इस मौसम में अंकुरित अनाज न खाने की सलाह देते हैं, जिसका पहला कारण है कि इन्हें ज्यादा समय तक पानी में भिगोया जाता है और उससे भी अधिक समय तक इसमें नमी बनी रहती है। ऐसे में इनमें खतरनाक बैक्टीरिया होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।
दूसरा कारण यह है कि इसमें फाइबर की मात्रा अत्यधिक होती है जो मोशन होने में सहायक होते हैं। ऐसे में यह डायरिया जैसी समस्या का कारण भी बन सकता है जिससे शरीर में पानी एवं पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
हालांकि अगर आप इस मौसम में अंकुरित अनाज खाना ही चाहते हैं, तो इसे अच्छी तरह से उबालकर ताजा रहते ही इसका प्रयोग कर लें, ताकि यह आपको हानि न पहुंचा सके।

सेहत /शौर्यपथ / बारिश का मौसम, हरियाली और रिमझिम फुहारों के बीच किसका दिल नहीं करेगा भीगने का? हर कोई बारिश की इन बूंदों से तरबतर न सही तो कम से कम दो-चार होना तो चाहता ही है।
आप भी शौकीन हैं बारिश में भीगने के, तो स्वास्थ्य का भी जरा ध्यान रखें और भीगने के बाद जरूर अपनाएं यह 5 टिप्स-
1 अगर भीग ही रहे हैं तो कोशिश कीजिए कि आपके बाल ज्यादा न भीगें। क्योंकि यही बीमार होने और सर्दी लग जाने की एक बड़ी वजह होती है। इसके लिए हेयर मास्क या पॉलिथिन का सहारा लिया जा सकता है, ताकि भीगने का लुत्फ भी मिल जाए और बाल भी न भीगें।
2 भीगने के बाद घर में आते ही जल्दी से जल्दी कपड़े बदलकर अपने शरीर को पोंछे और सूखे कपड़े पहनकर शरीर को आग के सामने ले जाएं ताकि शरीर को तपन मिल जाए और सर्दी न बैठने पाए।
3 अगर गलती से भी बाल भीग गए हैं, तो इन्हें सुखाने में देरी न करें। तौलिये और हेयर ड्रायर की मदद से बालों को अच्छी तरह सुखा लें। इससे बाल खराब होने से बचेंगे और सर्दी भी नहीं लगेगी।
4 गर्मागर्म हल्दी वाला दूध या अदरक वाली चाय अथवा कॉपी पीजिए जिससे शरीर को गर्माहट मिले। बुखार और सर्दी से बचने के लिए शरीर को अंदरूनी गर्माहट देना बेहद आवश्यक है।
5 आप चाहें तो गर्मागर्म वेलिटेबल या अपना पसंदीदा सूप बनाकर पी सकते हैं। यह प्रतिरोधकता भी बढ़ाएगा और शरीर में गर्मी भी पैदा करेगा। यह बेहतरीन और स्वादिष्ट विकल्प है।

सेहत / शौर्यपथ / एक उम्र के बाद शरीर में कुछ बीमारियां जड़ से चिपक जाती है। जिसके बाद लगातार अलग-अलग बीमारियां उससे बढ़ने लगती है। इन दिनों महिलाओं में यूरिक एसिड की तादाद
अधिक पाई जा रही है जिससे मांसपेशियों में दर्द होता रहता है और सीधे किडनी पर प्रभाव पड़ता । आइए जानते हैं क्या होता है यूरिक एसिड, से किडनी पर किस तरह प्रभाव पड़ता है,बचाव के उपचार।
क्या होता है यूरिक एसिड
अन्‍य फूड्स को बचाने के लिए शरीर में से यूरिक एसिड नामक नेचुरल वेस्ट प्रोडक्ट निकलता है। यह किडनी से होते हुए यूरिन के द्वारा बाहर निकलता है। लेकिन जब खून में यूरिक
एसिड की तादाद बढ़ जाती है तो सीधा प्रभाव किडनी पर पड़ता है। किडनी पहले एसिड को आराम से फिल्‍टर कर लेती थी लेकिन खून में मिक्स होने के बाद किडनी फिल्टर नहीं कर
पाती है। जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है। इस वजह से कई लोगों को किडनी की परेशानी भी होने लग जाती है। क्योंकि वह
फिल्‍टर नहीं कर पा रही और वेस्ट प्रोडक्ट अंदर ही जमा हो रहा।
इन फलों से करें तोबा
ऐसे में लोगों को उस दौरान हाई प्रोटीन डाइट लेने से बचना चाहिए। साथ ही दाल, फलियां, मटर, राजमा, छोले,काला चना नहीं खाना चाहिए। साथ ही ब्रोकली, मशरूम, मीठे फल,बर्गर,पेस्ट्री भी
दूरी बना लेना है।
हाई यूरिक एसिड पर ये खा सकते हैं
इलायची,लौंग,दालचीनी,एंटी-बैक्‍टीरियल और तेजपान के पत्ते के सेवन से यूरिक एसिड का लेवल कम होता है। हाई फाइबर फूड्स के सेवन से भी यूरिक एसिड को कंट्रोल किया जा
सकता है। इस दौरान विटामिन सी फूड्स का सेवन करने से भी वेस्‍ट एसिड की क्‍वांटीटी को भी कम किया जा सकता है।

खाना खजाना / शौर्यपथ /सामग्री 2 बर्गर, 150 ग्राम फ्रेश पनीर, 3 हरी मिर्च, 2 प्याज बारीक कटे हुए, 1/2 चम्मच चाट
मसाला, 1 चम्मच भूना मैदा, 2 बड़े चम्मच तेल, हरा धनिया बारीक कटा हुआ, नमक स्वादानुसार।
विधि : सबसे पहले पनीर को कद्दूकस करके रख लें।
अब उसमें बारीक कटी हुई प्याज, हरी मिर्च, धनिया, नमक, चाट मसाला और मैदा मिलाकर टिकिया बनाकर रख लें।
अब तेल गरम करके सभी टिकिया तल लें।
फिर बर्गर को बीच में से काटकर उल्टा करके सेंक लें।
बर्गर में बीच में टिक्की रखें, टोमॅटो कैचअप और हरी चटनी के साथ सर्व करें।

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / लीची बारिश का सीजनल फल है। लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसके सेवन से कई सारे हेल्‍थ बेनिफिट्स भी हैं। लीची में पानी की क्‍वांटीटी भी सबसे अधिक होती है। इसमें
मौजूद तत्व शरीर के साथ स्किन का भी ख्याल रखते हैं। लीची में मौजूद विटामिन सी, बी 6,फोलेट,तांबा, पोटेशियम, फास्फोरस,मैग्नीशियम और मैगनीज जैसे खनिज पाए जाते
हैं। इसके प्रतिदिन सेवन से आपकी बढ़ती उम्र पर भी पूर्ण विराम लग जाता है। लीची खाने से स्किन में कसावट भी पैदा होती है। साथ ही शारीरिक विकास में भी सहायता करती है। खाने से तो बहुत सारे लाभ जान लिए। लेकिन क्‍या आप जानते हैं लीची का फेस पैक भी लगाया जाता है। जी हां, इसका फेस पैक लगाने से चेहरा एकदम खिल
जाएगा। क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व आपके चेहरे का ग्लो बढ़ देते हैं। तो आइए जानते हैं लीची का फेस पैक कैसे बनाएं और उससे होने वाले फायदे -
सामग्री
- 4 लीची और 1 पका केला
विधि -दोनों को अच्‍छे से मिक्‍स कर लें और चेहरे पर 30 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद नॉर्मल पानी से चेहरे को धो लें। और हल्‍के हाथों से नैपकिन की मदद से पुंछें। अगर आपको अपनी त्वचा रूखी लगती है तो हल्का सा क्रीम लगाएं। अन्यथा नहीं लगाएं।
लीची फेस पैक लगाने के फायदे
जैसे - जैसे उम्र बढ़ती जाती है स्किन ढीली पड़ने लगती है। लीची में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भरपूर तादाद में होता है,जो चेहरे में कसावट पैदा करता है। साथ ही चेहरे पर ग्लोबढ़ जाता है। यह आपके सनटैन को कम करने में मदद करेगा। सूरज की हानिकारक किरणों में बचाव करने में मदद करेगा।

आस्था / शौर्यपथ / आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। आदिकाल में देवर्षि नारद ने एक हजार साल तक एकादशी का निर्जल व्रत कर भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति प्राप्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने योगिनी एकादशी व्रत को लेकर कहा कि यह व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फल प्रदान करने वाला है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने से समस्त पाप मिट जाते हैं। रोगों से मुक्ति मिलती है। एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
एकादशी तिथि एक दिन की होती है, लेकिन इसका व्रत तीन दिनों तक रहता है। व्रत के नियम दशमी को सूर्यास्त के बाद से लागू हो जाते हैं और द्वादशी के दिन पारण तक रहते हैं। एकादशी के दिन गाजर, शलजम, गोभी, पालक का सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन से परहेज रखें। एकादशी के दिन किसी भी वृक्ष से पत्ते ना तोड़ें। पौधों को जल दें। इस दिन बाल न कटाएं। एकादशी व्रत में रात्रि जागरण कर श्री हरि भगवान विष्णु के नाम का जाप करें। इस व्रत में नमक नहीं खाया जाता है। इस व्रत में किसी दूसरे के दिए हुए अन्न का सेवन न करें। दूसरी बार भोजन न करें। किसी की निंदा न करें। पापी मनुष्यों के साथ बातचीत त्याग दें। एकादशी के दिन क्रोध, मिथ्या भाषण का त्याग करना चाहिए। कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करें।इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु को पीले फूल अर्पित करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। एकादशी पर पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।

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