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April 05, 2026
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खाना खजाना / शौर्यपथ / राजस्थानी व्यंजन अपने तीखे स्वाद के लिए देशभर में काफी फेमस है। सत्तू और प्याज के पकौड़े राजस्थान की ऐसे ही फेमस स्नैक्स रेसिपी है, जिसे मानसून या शाम की चाय के साथ खाना काफी पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं इस राजस्थानी स्नैक्स रेसिपी को आप घर पर होने वाली किसी छोटी-मोटी पार्टी में भी शामिल कर सकती हैं। तो देर किस बात की आइए जान लेते हैं कैसे बनाए जाते हैं ये टेस्टी सत्तू और प्याज के पकौड़े।
सत्तू और प्याज के पकौड़े बनाने के लिए सामग्री-
-प्याज-2
-सत्तू-1 कप
- धनिया पत्ता-2 चम्मच
- नमक-स्वादानुसार
- हींग-1/4 चम्मच
- हल्दी-1/2 चम्मच
- मिर्च पाउडर-1/2 चम्मच
- अजवाइन-1/3 चम्मच
- तेल-2 कप

सत्तू और प्याज के पकौड़े बनाने का तरीका-
सत्तू और प्याज के पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले आप प्याज को साफ करके बारीक काटकर एक बर्तन में रख दें। अब एक दूसरे बर्तन में सत्तू, नमक, हींग, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर आदि सामग्री डालकर अच्छे से मिक्स कर दें। इसके बाद सत्तू वाले मिश्रण को प्याज के बर्तन में डालें। अब इसमें हल्का पानी डालकर मिक्स कर लें। अब आप एक कढ़ाही में तेल गरम होने के लिए रख दें। तेल गरम होने बाद मिश्रण को पकौड़े के आकार में कढ़ाही में डालकर अच्छे से तल लें। आपके टेस्टी सत्तू और प्याज के पकौड़े बनकर तैयार हैं, गर्मा-गर्म सर्व करें।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / अदरक का उपयोग खाने में तो किया जाता है लेकिन दवा के रूप में भी इसका उपयोग बहुत किया जाता है। अदरक की तासीर गर्म होती है इसलिए इसके सेवन से कई बीमारियों में भी राहत मिलती है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है तो सर्दी-खांसी के लिए यह बेहद कारगर दवा है। अभी
त कतो हो गई सेहत संबंधी बातें लेकिन यह यह आपकी सुंदरता को भी बढ़ाता है। जी हां, बाल आपकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। अक्सर लड़कियां दुखी हो जाती है जब उनके बाल अधिक झड़ने लगते हैं या बाल बढ़ते ही नहीं है। आइए आज आपको बताते हैं अदरक का तेल कैसे बनाएं और कितना फायदेमंद है अदरक का तेल -
अदरक का तेल लगाने के फायदे
रूसी को करें खत्म – अगर आपकी स्कैल्प ड्राई है तो रूसी की समस्या होना आम बात है। अपने स्कैल्प को हाइड्रेट करने के लिए अदरक के तेल के साथ बादाम या नारियल दोनों में से कोई से भी तेल को मिक्स करके लगा सकते हैं। दरअसल अदरक के तेल में मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व रूसी को खत्म करने में मदद करते हैं।
लंबे बालों की चाह – लंबे बाल किसी नहीं पसंद है। अगर आप भी अपने बालों को लंबा करना चाहते हैं तो अदरक तेल से अच्छे से बालों में मालिश करें। इसके बाद ही बालों को धोएं। इससे बाल लंबे होने के साथ मजबूत भी होंगे।
बालों को झड़ने से रोके – आज के वक्त में झड़ते बालों की समस्या से हर कोई परेशान है। जब भी आप सिर धोए
उससे करीब 1 घंटे पहले अपने स्कैल्प पर अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े घिसे। करीब 1 महीने तक ऐसा ही करते रहे आपको आराम मिलेगा।
अदरक का तेल कैसे बनाएं –
अदरक का तेल बनाने के लिए पहले अदरक को घिस लें, इसमें 1 चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाएं। दोनों को मिक्स करके गैस पर
कम से कम 15 मिनट तक उबालें।
-इसके बाद उस मिश्रण को ठंडा करके कांच की शीशी में भर दें।
-अदरक का मिश्रण तैयार है। बाल धोने से 45 मिनट पहले अपने स्कैल्प पर आराम से लगा लें। और फिर इसे माइल्‍ड शैंपू से धो लें। सप्ताह में कम से कम 2 बार जरूर लगाएं।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /देश में पनीर की डिमांड हर साल करीब 25 फीसदी तक बढ़ती है। लेकिन
जैसे-जैसे डिमांड बढ़ रही है मिलावट और अधिक बढ़ती जा रही है। कुछ खाद्य पदार्थ में बहुत अधिक तेजी से मिलावट हो रही है। जिसमें पनीर भी शामिल है। बता दें कि पनीर का सेवन लोगों के बीच पिछले कुछ सालों में काफी अधिक बढ़ गया है। क्योंकि पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होता है,
डाइट को मेंटेन करता है,
इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। लेकिन नकली पनीर खाने से आपकी तबीयत भी बिगड़ सकती है इसलिए आइए जानते हैं कैसे पहचान करें असली और नकली पनीर –
नकली पनीर की पहचान
-नकली पनीर रबड़ की तरह होता है।
-अगर उसकी चिकनाहट की बात की जाए तो नकली पनीर में नहीं होती है।
-वह खाते वक्त भी बिलकुल रबड़ की तरह ही लगता है।
-पनीर चेक करने का दूसरा तरीका है। पनीर को पानी में डालकर उबालकर ठंडा कर लें। ठंडा होने के बाद उसमें कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालें। इसके बाद अगर पनीर का रंग नीला पड़ने लगता है तो वह
मिलावटी पनीर है।

सेहत / शौर्यपथ /बारिश के मौसम में गरमा-गरम जंक फूड सभी को अच्‍छे लगते हैं।लेकिन ओवर ईटिंग आपकी सेहत को भारी पड़ सकता है। दरअसल,
बारिश के दिनों में बहुत कम और एकदम सात्विक भोजन ही करना चाहिए। ऐसा इसलिए मानसून सीजन में पाचन प्रक्रिया थोड़ी कमजोर हो जाती है जिससे आपका भोजन बहुत तेजी से नहीं पच पाता है। साथ ही आपको कई प्रकार की पेट से संबंधित समस्या भी होने लग जाती है। ऐसे में बारिश के दिनों में इन 5 चीजों को भूलकर भी सेवन नहीं करें। आइए जानते हैं क्‍या है –
पत्‍तेदार सब्जियां –
बारिश के मौसम में हरे पत्‍तेदार सब्जियों के सेवन से बचें। क्योंकि बरसात में
बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इस मौसम में बारीक कीड़े तेजी से पनपते हैं। अगर आप गलती से इसका सेवन कर लेते हैं तो डायरिया जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में पालक,
पत्ता गोभी,
ब्रोकली,
मशरूम,मेथी के सेवन से बचना चाहिए।
कच्चा सलाद –
बारिश के मौसम में कच्चे सलाद का सेवन कम से कम करें। सब्जियों में बारीक जानवर अधिक होते हैं। अगर वह आपको पेट में चले जाते हैं तो आपको पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में आप सब्जियों को उबालकर भी खा सकते हैं।
सी फूड –
बारिश के मौसम में सी फूड का सेवन कम से कम करना चाहिए। यह समय मछलियों के प्रजनन का होता है। ऐसे में खाने से फूड प्वाइजनिंग का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही इस मौसम में पानी भी बहुत हद तक दूषित होता है इसलिए सादा खाना ही खाएं।
मशरूम –
बारिश के मौसम में मशरूम का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इन दिनों पेट में इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। मशरूम भी अलग –अलग तरह से उगते हैं।
ऑयली फूड –
बारिश के मौसम में गरमा-गरम पकोड़े सभी को अच्छे लगते हैं,
लेकिन पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण ऑयली फूड पूरी तरह से नजरअंदाज करना चाहिए। क्योंकि इतना हैवी आयटम खाने के बाद बारिश की वजह से घूम भी नहीं सकते हैं।
बारिश में खतरनाक हैं हरी सब्जियां, इन 5 सब्जियों से जरूर बचें
बरसात के मौसम में चटपटा खाने का मन करता है, गरमा-गरम प्याज, पालक के भजिए की याद आ जाती है लेकिन बारिश के दिन में आपको सेहत का अधिक ख्याल रखना होता है। जी हां, बरसात के दिन में इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है, दूषित पानी पीने से भी आम बीमार पड़ सकते हैं।
बरसात का मौसम आते ही चहु ओर हरियाली छा जाती है, सुखी-सुखी सब्जियां भी हरी-भरी हो जाती है लेकिन बरसात में कई तरह की सब्जियां खाने की मनाही होती है, अगर आप नहीं जानते हैं तो आज जान लीजिए-
1.पालक- जी हां, पालक बरसात के दिनों में हरा-भरा जरूर हो जाता है लेकिन इस सब्जी पर हद से ज्यादा बारीक कीड़ें होते हैं इसलिए बरसात के दिनों में पालक का सेवन नहीं करना चाहिए।

2.पत्तागोभी- पत्तागोभी का सलाद के रूप में अधिक प्रयोग किया जाता है लेकिन अधिक परते होने पर बारीक-बारीक कीड़े अंदर तक होते हैं। ऐसे में खाने में कीड़े आपके शरीर में चले जाते हैं तो आप बीमार भी पड़ सकते हैं इस वजह से बारिश के दिनों में पत्तेदार सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
3. बैंगन- गरमा गरम बैंगन का भर्ता किसे अच्छा नहीं लगता है। बरसात के मौसम में और भी अधिक स्वादिष्ट लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं बरसात में फल और फूल आते ही कीड़े लगने लग जाते हैं। पौधों पर कीड़े इस तरह हमला बोलते हैं कि करीब 70 फीसदी तक बैंगन नष्ट हो जाता है।

4. टमाटर- बरसात के मौसम में पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। टमाटर में कुछ क्षारीय तत्व मौजूद होते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में एल्कालॉयड्स कहा जाता है। यह एक प्रकार का जहरीला केमिकल होता है जिन्हें पौधे कीड़ों से बचाने के लिए प्रयोग करते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में टमाटर का अधिक सेवन करने से त्वचा संबंधित बीमारी भी हो सकती है। जैसे- रैशेज होना, नॉजिया, खुजली। ऐसे में बारिश में इसका सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
5. मशरूम- बारिश के मौसम में खान-पान पर लगाम लगाना बेहद जरूरी होता है। मशरूम प्रदूषित जगह और वातावरण में पैदा होता है। मशरूम अलग-अलग प्रजाति के होते हैं कुछ जहरीले तो कुछ खाने योग्य। ऐसे में खाने योग्य मशरूम भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

आस्था /शौर्यपथ / इस वर्ष शुक्रवार, 9 जुलाई को हलहारिणी अमावस्या मनाई जा रही है। हिन्दू धर्म में आषाढ़ मास में आनेवाली इस अमावस्या का बहुत महत्व माना गया है। किसानों के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। किसानों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आषाढ़ मास की इस अमावस्या के समय तक वर्षा ऋतु का आरंभ हो जाता है और धरती भी नम पड़ जाती है। अत: फसल की बुआई के लिए यह समय अतिउत्तम होता है।
इस दिन किसान विधि-विधान से हल का पूजन करके फसल हरी-भरी बनी रहने के प्रार्थना करते हैं ताकि घर में अन्न-धन की कमी कभी भी महसूस न हो। इस दिन हल पूजन तथा पितृ पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन को आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन पितृ निवारण करने के लिए दिन बहुत ही उत्तम माना गया है, पितृ पूजन से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। इस दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराना चाहिए। आषाढ़ी अमावस्या के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर पितृ तर्पण करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं बनाकर किसी तालाब या नदी में रह रहे मछलियों को खिलाने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
पूजा विधि-
1. हलहारिणी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठ कर ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करें।
2. सूर्य उदय होने के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
3. इस दिन पितृ तर्पण करें। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
4. आटे की गोलियां बनाएं बनाकर किसी तालाब या नदी में मछलियों अथवा अन्य जीव-जंतुओं को खिलाएं।
5. गरीब या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
6. ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा दक्षिणा अथवा सीदा दें।
हलहारिणी अमावस्या के शुभ मुहूर्त-
आषाढ़ी/ हलहारिणी अमावस्या वर्ष 2021 में 9 जुलाई, शुक्रवार के दिन है। इस दिन अमावस्या तिथि प्रारंभ- 9 जुलाई को प्रातःकाल 5.16 मिनट पर होगा तथा अमावस्या तिथि शनिवार, 10 जुलाई प्रातःकाल 6.46 मिनट पर समाप्त होगी।
पारण 10 जुलाई को किया जाएगा।
जानें हलहारिणी अमावस्या के खास उपाय-
1. अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष महत्व है।
2. अमावस्या की रात्रि अगर आप काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाते हैं और उसी समय वह कुत्ता यह रोटी खा लेता है तो इस उपाय से आपके सभी दुश्मन उसी समय से शांत होना शुरू हो जाएंगे।
3. रुद्राभिषेक, पितृदोष शांति पूजन और शनि उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे।
4. इस दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप-कर्मों का क्षय होगा और पुण्य-कर्म उदय होंगे। यही पुण्य-कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।
5. अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर ये आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है।
अन्य उपाय
* इस दिन कालसर्प दोष निवारण हेतु सुबह स्नान के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत पाने का ये अचूक उपाय है।
*बेरोजगार व्यक्ति अगर अमावस्या की रात ये उपाय करें तो निश्चित ही उसे रोजगार प्राप्त होगा। इसके लिए 1 नींबू को साफ करके सुबह से ही अपने घर के मंदिर में रख दें। फिर रात के समय इसे 7 बार बेरोजगार व्यक्ति के सिर से उतार लें और 4 बराबर भागों में काट लें। फिर एक चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में इसको फेंक दें। इस उपाय से बेरोजगार व्यक्ति को लाभ की संभावना बनेगी।
*जिसे कालसर्प दोष हो, उन व्यक्तियों को अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजन एवं हवन करवाना चाहिए।
*शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीये में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।
*अमावस्या वाली रात्रि को 5 लाल फूल और 5 जलते हुए दीये बहती नदी के पानी में छोड़ें। इस उपाय से धन का लाभ प्राप्त होने के प्रबल योग बनेंगे।
*हलहारिणी अमावस्या के दिन हल पूजन का पूजन करना शुभदायी होता है।

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / लॉकडाउन के दौरान फिटनेस और ब्यूटी का ख्याल रखना आसान नहीं है लेकिन फिर भी आयुर्वेद में त्वचा को निखारने के लिए ऐसे कई ब्यूटी टिप्स बताए गए हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपना खोया निखार वापस पा सकते हैंl आइए, जानते हैं किचन में मौजूद ब्यूटी एजेंट्स के बारे में-
नींबू का रस
नींबू में विटामिन सी होता हैl जो आपके चेहरे की रंगत को निखारता हैl नींबू के रस में थोड़ा सा पानी मिला कर एक कॉटन बॉल से इसे अपने चेहरे पर लगाएंl इस तरह से नींबू को चेहरे पर लगाने से यह एक टोनर का काम करता हैl नींबू का रस कुछ लोगों की त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकता है खासतौर पर जब आपकी स्किन सेंसिटिव होती है इसलिए इसे लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करेंl
मेथी के बीज
बालों को चमकदार और इसकी अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए आपको मेथी के बीच का इस्तेमाल करना चाहिएl आप इन बीजों को रातभर पानी में भिगो कर रखें और इसका मास्क बना लेंl इससे चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाएंगेl इसके लिए आप बीज को पीसकर नारियल का तेल मिलाएं और मिश्रण को एक से दो घंटे के लिए अपने बालों में लगाए रखेंl इस पैक का यदि आप नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं तो इससे आपके बाल घने और मजबूत होंगेl
चावलों का पानी
चावल को जापानी और कोरियन स्किन थेरेपी के लिए इस्तेमाल किया जाता हैl चावल के पानी में पाए जाने वाले इनोसिटोल, खराब बालों को ठीक करते हैंl इसलिए, यदि आपके बाल टूटते हैं या फिर आपके बाल कमजोर और पतले हैं, तो चावल को पानी में भिगाकर आप इसके पानी को चेहरे और बालों को धोने में इसका इस्तेमाल कर सकते हैंl

खाना खजाना / शौर्यपथ / आपका दिल अगर कुछ चटपटा खाने का कर रहा है, तो आप चने की दाल क पकौड़े ट्राई कर सकते हैं। इन पकौड़ों की सबसे खास बात यह है कि यह बेसन से ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं चना दाल पकौड़े-
सामग्री :
आधा कप चना दाल
एक छोटा चम्मच जीरा
लहसुन की 2-3 कलियां (बारीक कटी हुई)
आधा इंच अदरक (बारीक कटा हुआ)
एक हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
एक प्याज (बारीक कटा हुआ)
एक प्याज (बड़े टुकड़ों में कटा हुआ)
चुटकीभर हींग
दो बड़ा चम्म(च हरा धनिया ( बारीक कटा हुआ)
नमक स्वादानुसार
तेल तलने के लिए
विधि :
सबसे पहले चने की दाल को धोकर पानी में 3 से 4 घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
तय समय के बाद दाल में बड़े टुकड़ों में कटा हुआ प्याटज, हरी मिर्च, अदरक , लहसुन, हींग, जीरा और थोड़ा सा पानी डालकर पीस लें।
अब इस पेस्टा को एक बॉउल में निकाल लें और इसमें बारीक कटा प्याटज और नमक मिलाएं।
अब इस पेस्टा में चुटकीभर बेकिंग सोडा डालें।
मीडियम आंच में एक कड़ाही में तेल गरम करें।
तेल के गरम होते ही इसमें चना दाल के पेस्टो को पकौड़ों के शेप में डालें।
पकौड़ों को सुनहरा होने तक दोनो साइड से तले और आंच बंद कर दे।
तैयार है चना दाल प्याज पकौड़ा। हरी चटनी या टोमैटो सॉस के साथ सर्व करें।

सेहत / शौर्यपथ /डायबिटीज बीमारी भारत देश में आम बात हो गई है। लेकिन
इस बीमारी
के साइड इफेक्ट जानलेवा
भी हो जाते हैं। इसलिए समय रहते डायबिटीज को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। एलोपैथिक दवा के साथ कुछ घरेलू उपाय भी होते हैं जिससे इस पर काबू पाया जा सकता है। उन्हीं में से एक है धनिया। जी हां,

धनिया

के पानी से ब्लड
शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। भारतीय मसाले खाने में तो तड़का लगाते ही है साथ ही स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। तो आइए जानते हैं कैसे धनिया का पानी लाभदायक है
रिसर्च के मुताबिक धनिया में इथेनॉल पाया जाता है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। धनिया की पत्ती में और धनिया के बीज में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट रहते हैं जो कई तरह से फायदा करती है।
आइए जानते हैं कैसे करें उपयोग
धनिया के पत्ती का पानी
- सबसे पहले रात को धनिया की पत्ती को पानी में भिगोकर रख दें।
- अगले दिन सुबह पानी को छानकर पी लें।
- खाली पेट ही इस पानी का सेवन करें।

धनिया के बीज का पानी
- 10 ग्राम साबुत धनिया लें और रात को पानी में भिगोकर रख दें।
- एक लीटर पानी में भिगोकर ढक दें।
- सुबह खाली इस पानी का सेवन करें।
- अगर आप एक साथ नहीं पी सकते हैं तो दिनभर में थोड़ा -थोड़ा करके भी पानी पी सकते हैं।
करीब 15 दिन तक इसका लगातार प्रयोग करें। इसके बाद आपको कुछ आराम जरूर मिलेगा।
धनिया के पानी के अन्य फायदे भी है
1.अगर आप भी अपच की समस्या से परेशान है तो धनिया की पत्ती सबसे अधिक कारगर है। जी हां, आप छाछ में धनिया की पत्तियों को बारीक सुधार कर डाल लें और फिर पी लें। खाना खाने के बाद छाछ पी लें। आपको पेट हल्का लगेगा।
2.अगर अपने बढ़ते वजन से परेशान है तो धनिया के बीज का इस्तेमाल करें। 3 चम्मच
धनिया के बीज लें। और एक गिलास पानी डालकर तब तक उबालें जब तक वह आधा नहीं रह जाए। इसके बाद छानकर गुनगुना पी लें। इससे आपका वजन घटाने में आसानी होगी।

3. पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग से महिलाएं परेशान हो जाती है। इसके लिए 6 ग्राम धनिया के बीज को करीब आधा लीटर पानी में डालकर उबाल लें। छानकर ठंडा कर लें और थोड़ा थोड़ पी लें। इससे बहुत हद तक आराम मिलेगा।
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आस्था / शौर्यपथ / हमारे देश में लगभग सभी नदियां पवित्र एवं पूजनीय मानी जाती हैं। उनमें से जो नदियां सीधे समुद्र में जाकर मिलती हैं, वे और नदियों से श्रेष्ठ हैं एवं उनमें से भी 4 नदियां सर्वश्रेष्ठ मानी गई हैं- गंगा, यमुना, सरस्वती एवं नर्मदा। गंगा नदी ऋग्वेदस्वरूप, यमुना युजुर्वेदस्वरूपा, नर्मदा सामवेदस्वरूपा एवं सरस्वती अथर्ववेदस्वरूपा है।
नर्मदाजी ने अपनी योग्यता से प्रथम श्रेणी में तो स्थान प्राप्त कर लिया किंतु वे चाहती थीं कि प्रथम श्रेणी में भी मुझे सर्वप्रथम स्थान मिले। और यह संभव तपस्या के द्वारा ही हो सकता था और इसे लोकपितामह ब्रह्मा ही दे सकते थे। इसके लिए नर्मदाजी ने घोर तपस्या प्रारंभ कर दी। तपस्या से ब्रह्माजी प्रसन्न होकर प्रकट हुए एवं वरदान मांगने को कहा। तब नर्मदाजी ने विनम्रता से कहा कि मुझे गंगा के समान सर्वश्रेष्ठ पद प्रदान कर दीजिए। तब ब्रह्माजी ने कहा, बिटिया, हम तुमसे कुछ प्रश्न पूछते हैं। पहले उसका उत्तर दो, तब हम तुम्हारी बात सुनेंगे।
तब ब्रह्माजी ने पूछा, बताओ, भगवान पुरुषोत्तम के समान कोई और पुरुष हो सकता है?
नर्मदाजी ने कहा, 'नहीं।'
ब्रह्माजी ने पूछा, क्या सती पार्वती गौरी के समान कोई और नारी हो सकती है?
नर्मदाजी ने कहा, 'नहीं।'
पुन: ब्रह्माजी ने पूछा, काशी के समान परम पावन कोई और पुरी हो सकती है?
नर्मदाजी ने फिर कहा, 'नहीं।'
तब ब्रह्माजी ने कहा, तब बिटिया, तुम कैसे कह सकती हो कि मैं गंगा के समान सर्वश्रेष्ठ बन जाऊं?
यह सुनकर नर्मदाजी चुप हो गईं एवं मन-ही-मन सोचा, भूल हो गई। मैं तो अनुपयुक्त परीक्षक के पास पहुंच गई जिन्हें मोह, ममता व अपनापन नहीं है। अब ऐसे परीक्षक की शरण में जाऊं जिसके हृदय में अपनापन हो।
यह सोचकर वे अपने पिता शिवजी की शरण में काशी गईं और घोर तपस्या की। अपने नाम के नर्मदेश्वर की स्‍थापना कर उनकी आराधना करने लगीं। इनकी सेवा से संतुष्ट होकर शंकरजी उनके सम्मुख प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। अबकी बार नर्मदाजी संभल गईं और अपने स्वार्थ की बात न कहकर बोलीं, प्रभु आपके चरणविंदों में मेरी अहैतु की भक्ति बनी रहे, यही वरदान आप मुझे दें।
आशुतोष भगवान शंकर बड़े प्रसन्न हुए एवं सोचा, यह तो अपनी पुत्री ठहरीं, कुछ मांग नहीं रही हैं। केवल मेरे चरणों की भक्ति मांग रही हैं।
शिवजी बोले, वह तो तुम्हें प्राप्त होगी ही किंतु मैं तुम्हें अपनी ओर से कुछ वरदान देना चाहता हूं।
तब शिवजी बोले, अच्छा सुन, भक्ति के अतिरिक्त पहला वर यह मैं देता हूं कि तेरे दोनों किनारे के जितने भी पाषाण होंगे, वे सब मेरे स्वरूप ही शिवलिंग समझे जाएंगे। दूसरा वर यह देता हूं कि गंगा, यमुना, सरस्वती और तू 4 सर्वश्रेष्ठ में। तू इन चारों में सर्वश्रेष्ठ समझी जाएगी।
नर्मदाजी ने बात पक्की करने के लिए पूछा, सो कैसे जाना जाएगा भगवन्?
शिवजी बोले, गंगा स्नान से तुरंत निष्पाप हो जाओगे। यमुनाजी के किनारे 7 दिन रहो, स्नान-पूजन करो, तब निष्पाप होंगे। सरस्वती के किनारे 3 दिन रहो, तब निष्पाप, किंतु रेवे (नर्मदाजी का एक नाम) तुम्हारे तो केवल दर्शन मात्र से ही प्राणी निष्पाप बन जाएंगे।
त्रिमि: सारस्वतं पुण्यं सप्ताहेन तु यामुनय्,
सद्य: पुनाति गांगेय दर्शनादेव नर्मदा।
गंगा कनखले पुण्या कुरुक्षेत्रं सरस्वती,
ग्राम वायदि वारण्ये पुण्या नर्मदा सर्वत्र।
गंगा कनखल व सरस्वती कुरुक्षेत्र में विशेषतया पुण्य रूप हैं। पर नर्मदा कहीं भी बहे, वन में, ग्राम में सर्वत्र पुण्यमयी मानी गई है। इसके अतिरिक्त तुम्हारे इस स्थापित नर्मदेश्वर के काशी में दर्शन करके पापी, निष्पाप हो जाएंगे। इन वरदानों को प्राप्त कर नर्मदाजी काशी से अपने विंध्यप्रदेश में स्वस्थान को चली गईं।
इसके अलावा नर्मदाजी की अन्य विशेषताओं में-
1. नर्मदाजी आदि से अंत तक पहाड़ों में ही होकर बही है। इसलिए स्वराज से पूर्व कोई नहर नहीं निकली। हालांकि अब बांध बन रहे हैं।
2. नर्मदाजी उल्टी दिशा में बही है। पूर्व से पश्चिम की ओर।
3. जितने तीर्थ नर्मदाजी के तट पर स्थित हैं, उतने तीर्थ किसी भी नदी के तट पर नहीं हैं। इसका प्रत्येक पत्थर शंकर है।
4. जितने पक्के घाट नर्मदा के हैं, उतने घाट किसी नदी पर नहीं हैं।
5. जितने घने जंगल, वन इनके किनारे-किनारे हैं, उतने कहीं नहीं हैं।
6. किसी भी नदी के जयकार में उनके पिता का नाम नहीं लिया जाता है। इनके साथ पिता का नाम लिया जाता है- नर्मदेहर, नर्मदेहर।
7. अनादिकाल से जैसी इनकी विधिवत् परिक्रमा होती है, वैसी किसी भी नदी की नहीं होती है।
वायुपुराण, स्कंदपुराण में तो रेवा (नर्मदा) खंड एक पृथक खंड ही है। संपूर्ण देश के शिव मंदिरों में नर्मदाजी से लाए हुए शिवलिंग ही स्थापित होते हैं। नर्मदाजी के किनारे आकर ब्रह्मा-विष्णु-महेश, लोकपाल, देवता, उरग, राक्षस, वानर, भालू, अप्सरा, यक्ष, गंधर्व, किंपुरुष आदि सभी ने तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की है।
रेवा तपस्थली है- अत: कहा गया है-
'रेवातीरे तप: कुर्यात मरणं जाह्नवी तट।'
अर्थात् नर्मदाजी के तट पर जाकर तपस्या करें और मृत्यु के समय जाह्नवी (गंगाजी) के तट पर आ जाएं।

आस्था / शौर्यपथ /हिन्दू कैलेंडर अनुसार श्रावण और भाद्रपद 'वर्षा ऋतु' के मास हैं। इस माह में वर्षा नया जीवन लेकर आती है। इस माह से ही चातुर्मास लगता है। खासकर यह संपूर्ण माह भगवान शिव का माह माना जाता है लेकिन इस मास का संबंध श्रीकृष्ण से भी है। आओ जानते हैं 4 रोचक बातें।
1. एक माह तक होती है श्रीकृष्ण पूजा : श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी अर्थात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक एक महीने तक श्रीकृष्ण आराधना की जाती है। कहते हैं कि जो इस दौरान कृष्ण आराधना करता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है। कहते हैं कि इस मास में भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न रहते हैं और मनचाहे वर देते हैं।
2. कृष्ण मंदिरों में सावन उत्सव : जिस तरह शिव के शिवालयों को श्रावण मास में अच्छे से सजाकर भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है उसी तरह दुनियाभर के कृष्ण मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और आराधाना धूमधाम से की जाती है। यह संपूर्ण माह कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ माह माना जाता है।
3. द्वारिकाधीश की पूजा : मान्यता है कि इस श्रावण मास में द्वारकाधीश की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उपासक को आरोग्य का वरदान मिलता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
4. ब्रज मंडल में सावन उत्सव :
*ब्रज मंडल में धूम : श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा, गोकुल, बरसाना और वृंदावन में सावन उत्सव का आयोजन होता है। ब्रज मंहल के इस सावन उत्सव को कृष्ण जन्माअष्टमी तक विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। जैसे इन उत्सवों में हिंडोले में झूला, घटाएं, रासलीला और गौरांगलीला का आयोजन होता हैं।
*हिंडोला : यहां श्रावण मास के कृष्णपक्ष से मंदिर में दो चांदी के और एक सोने का हिंडोला डाला जाता है। इन हिंडोलों में भगवान कृष्ण को झुलाया जाता है। इस माह में अधिकतर जगह पर श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। इसमें हिंडोला सजाने और बालमुकुंद को झूला झूलाने की परंपरा है।
*हरियाली तीज : ब्रज मंडल में खासकर वृंदावन में हरियाली तीज की धूम होती है। यहां के प्राचीन राधावल्लभ मंदिर में हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक चांदी, केले, फूल व पत्ती आदि के हिंडोले डाले जाते हैं तथा पवित्रा एकादशी पर ठाकुरजी पवित्रा धारण करते हैं। हरियाली तीज से पंचमी तक ठाकुरजी स्वर्ण हिंडोले में और उसके बाद पूर्णिमा तक चांदी, जड़ाऊ, फूलपत्ती आदि के हिंडोले में झूलते हैं।
*कृष्‍ण के साथ बलराम भी झूलते हैं : ब्रज मंडल के अन्य मंदिरों में जहां हिंडोले में कृष्ण झूलते हैं वहीं ब्रज में एक ऐसा मंदिर है, जहां पूरे श्रावण मास में हिंडोले में कृष्ण के साथ बलराम भी झूलते हैं। दाऊजी मंदिर बल्देव एवं गिरिराज मुखारबिन्द मंदिर जतीपुरा में हिंडोले में ठाकुरजी की प्रतिमा के प्रतिबिम्ब को झुलाया जाता है।
*रासलीला : इस माह को प्रेम और नव जीवन का माह भी कहा जाता है। मोर के पांव में नृत्य बंध जाता है। संपूर्ण सृष्टि नृत्य करने लगती हैं। वसंत के बाद श्रीकृष्ण इसी माह में रास रचाते हैं। ब्रजमंडल में श्रावण मास में मनायी जाने वाली रासलीला कम आकर्षक नहीं होती है। वृन्दावन का प्रमुख आकर्षण विश्वप्रसिद्ध रासाचार्यो द्वारा रासलीला प्रस्तुत की जाती है। जिनमें कृष्ण लीलाओं का जीवन्त प्रस्तुतीकरण होता है।
*घटा उत्सव : सावन मास में ब्रजमंडल में सावन उत्सव के अलावा घटा महोत्सव का भी आयोजन होता है जिसमें विभिन्न रंग की आकर्षक घटा में कान्हा की लीलाओं का प्रस्तुतीकरण होता है। मंदिरों की कालीघटा देखने के लिए लाखों लोग इन मंदिरों में आते हैं।

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