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April 05, 2026
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आस्था / शौर्यपथ / भारत में शैव, नागा या नाथपंथी साधु धूनी रमाते और भस्म धारण करते हैं। आदिदेव शिव के समय से ही परंपरा से भस्म धारण करने का प्रचलन रहा है। भस्म को नागा साधुओं का वस्त्र माना जाता है। भस्म कई प्रकार की होती है। खाने की भस्म को विभूति या भभूत कहा जाता है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ के समय में भभूति का प्रचलन व्यापक स्तर पर प्रारंभ हुआ। शिरडी के साईं बाबा जिस भभूति को लोगों को देते थे उसे उदी भी कहा जाता है। आओ जानेत हैं कि किस तरह इसे रोग नाशक मानते हैं और क्या है इसके प्रकार। हिन्दू धर्म में भभूति या भस्म, विभूति आदि को राख
भी कहते हैं।
क्या है भस्म : किसी भी पदार्थ का अंतिम रूप भस्म होता है। किसे भी जलाओ तो वह भस्म रूप में एक जैसा ही होगा। मिट्टी को भी जलाओ तो वह भस्म रूप में होगी। सभी का अंतिम स्वरूप भस्म ही है। भस्म इस बात का संकेत भी है कि सृष्टि नश्वर है। हवन की सामग्री जलकर भस्म बन जाती है, सभी जड़ी बूटियों को जलाकर भस्म बनाई जाती है। किसी भी पतार्थ को कूट-पीसकर भी भस्म बनाई जाती है।
भस्म का प्रयोग : भस्म का प्रयोग साधु लोग शरीर पर लगाने, आम लोग माथे पर तिलक लगाने और खाने के रूप में उपयोग करते हैं। इसमें से भस्म तिलक का अधिकतर प्रयोग दक्षिण भारत में होता है जबकि नागा साधु, नाथपंथी साधु भी भभूति का तिलक लगाते हैं। नागा साधु मस्तक पर आड़ा भभूतलगा तीनधारी तिलक लगा कर धुनी रमाकर रहते हैं। नागा बाबा या तो किसी मुर्दे की राख को शुद्ध करके शरीर पर मलते हैं या उनके द्वारा किए गए हवन की राख को शरीर पर मलते हैं या फिर यह राख धुनी की होती है। कई सन्यासी तथा नागा साधु पूरे शरीर पर भस्म लगाते हैं।
भस्म के प्रकार : श्रौत, स्मार्त और लौकिक ऐसे तीन प्रकार की भस्म कही जाती है। श्रुति की विधि से यज्ञ किया हो वह भस्म श्रौत है, स्मृति की विधि से यज्ञ किया हो वह स्मार्त भस्म है तथा कण्डे को जलाकर भस्म तैयार की हो तो वह लौकिक भस्म कही जाती है। विरजा हवन की भस्म सर्वोत्कृष्ट मानी है। इसके अलावा हवन कुंड में पीपल, पाखड़, रसाला, बेलपत्र, केला व गऊ के गोबर को भस्म (जलाना) करते हैं। आयुर्वेद में कई तरह की भस्म का उल्लेख किया गया है। जैसे जड़ी-बूटियों या स्वर्ण, रजत, शंख, हीरक, मुक्ताशुक्ति गोदंती, अभ्रक आदि कई तरह की भस्म होती है। उक्त भस्म को खाने से लाभ मिलता है। भस्म की हुई सामग्री की राख को कपड़े से छानकर कच्चे दूध में इसका लड्डू बनाया जाता है। इसे सात बार अग्नि में तपाया और फिर कच्चे दूध से बुझाया जाता है। इस तरह से तैयार भस्मी को समय-समय पर लगाया जाता है। यही भस्मी नागा साधुओं का वस्त्र होता है।
माथे पर लगाई जाने वाली भस्म मूलत: चावल की भूसी से तैयार होती है जिसे दक्षिण भारत के लोग उपयोग करते हैं। दूसरी गोबर और कुछ अन्य मिश्रण से तैयार भस्म को उत्तर भारत के लोग उपयोग में लाते हैं। तीसरी गुग्गल, लकड़ी आदि की भस्म भी होती है। इसके अलावा श्‍मशान भूमि की भस्म का उपयोग शैवपंथी लोग करते हैं।
भस्म लगाने के फायदे :
1. कहते हैं कि भस्म का स्नान करने के कई चमत्कारिक फायदे हैं। नवनाथ पंथ में कहते हैं कि उलटन्त बिभूत पलटन्त काया। अर्थात यह भभूत काया को शुद्ध तथा तेजस्वी बनाती है।
2. चढ़ी भभूत घट हुआ निर्मल। अर्थात भभूत मन की मलिनता को हटाकर मन को निर्मल तथा पवित्र करती है।
3. नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते हैं। कहते हैं कि यह भस्म उनके शरीर की कीटाणुओं से तो रक्षा करता ही है तथा सब रोम कूपों को ढंककर ठंड और गर्मी से भी राहत दिलाती है। रोम कूपों के ढंक जाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती इससे शीत का अहसास नहीं होता और गर्मी में शरीर की नमी बाहर नहीं होती। इससे गर्मी से रक्षा होती है।
4. मच्छर, खटमल आदि जीव भी भस्म रमे शरीर से दूर रहते हैं। नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत मले, निर्वस्त्र रहते हैं।
5. कई बार आपने सुना होगा कि किसी बाबा ने भभूत खिलाकर रोगी को ठीक कर दिया या फलां जगह मंदिर आश्रम आदि की भभूत खाकर लोग चमत्कारिक रूप से ठीक हो गए।
6. दरअसल, आयुर्वेद में कई तरह की भस्म का उल्लेख किया गया है। जैसे जड़ी-बूटियों या स्वर्ण, रजत, शंख, हीरक, मुक्ताशुक्ति गोदंती, अभ्रक आदि कई तरह की भस्म होती है। उक्त भस्म को खाने से लाभ मिलता है, क्योंकि यह विश्वसनीय होती है।
7. यज्ञ या हवन की सामग्री से बनी भभूत को भी कई तरह के रोग का नाशक माना गया है, लेकिन इस तरह की भभूत खाने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह विश्वसनीय स्थान की है या नहीं।
8. माथे पर विभूति लगाने से आपके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और आज्ञाचक्र सक्रिय होता है। इससे मानसिक रूप से शांति मिलती है और विचार शुद्ध होते हैं। गले में लगाने से विशुद्ध चक्र जागृत होता है। छाती के मध्य में लगाने से अनाहत चक्र जागृत होता है। उपरोक्त बिंदुओं पर भभूति लगाने से विवेक जागृत होता है।

शौर्यपथ / पौराणिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत सभी हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए श्रेयस्कर बताया गया है। वैष्णवों के लिए तो एकादशी का व्रत करना अनिवार्य है। शास्त्रों में एकादशी व्रत महान पुण्यदायी व समस्त पापों को नाश करने वाला बताया गया है। एकादशी श्रीहरि विष्णु को समर्पित व्रत है। प्रत्येक माह में दो एकादशी व्रत आते हैं और हर मास की एकादशी का एक विशेष नाम होता है।
वर्ष 2021 में कुल 25 एकादशी व्रत हैं। आइए जानते हैं वर्ष 2021 में आने वाली संपूर्ण एकादशी का नाम एवं तारीखें...
जानिए वर्ष 2021 की संपूर्ण एकादशी व्रत की लिस्ट-
1. 9 जनवरी- सफला एकादशी
2. 24 जनवरी- पौष पुत्रदा एकादशी
3. 7 फरवरी- षट्तिला एकादशी
4. 23 फरवरी- जया एकादशी
5. 9 मार्च- विजया एकादशी
6. 25 मार्च- आमलकी एकादशी
7. 7 अप्रैल- पापमोचिनी एकादशी
8. 23 अप्रैल- कामदा एकादशी
9. 7 मई- वरूथिनी एकादशी
10. 22 मई- मोहिनी एकादशी
11. 6 जून- अपरा एकादशी
12. 21 जून- निर्जला एकादशी
13.5 जुलाई- योगिनी एकादशी
14. 20 जुलाई- देवशयनी, हरिशयनी एकादशी
15. 4 अगस्त- कामिका एकादशी
16. 18 अगस्त- श्रावण पुत्रदा एकादशी
17. 3 सितंबर- अजा एकादशी
18. 17 सितंबर- परिवर्तिनी एकादशी
19. 2 अक्टूबर- इन्दिरा एकादशी
20. 16 अक्टूबर- पापांकुशा एकादशी
21. 1 नवंबर- रमा एकादशी
22. 14 नवंबर- देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी
23. 30 नवंबर- उत्पन्ना एकादशी
24. 14 दिसंबर- मोक्षदा एकादशी
25. 30 दिसंबर- सफला एकादशी
एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही कथा भी सुनी जाती है। इस व्रत से सभी पाप नष्ट होते है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वास्तु /शौर्यपथ / घर में तमाम सुख-सुविधाएं होने के बाद भी तनाव बना रहता है या अक्सर परिवार में विवाद रहता है तो ऐसे में घर के वास्तु दोष को देखना बेहद जरूरी है। घर के वास्तु का असर घर में रहने वाले हर सदस्य पर पड़ता है। घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहे। सुख-शांति हो और परिवार में हमेशा प्रेम बना रहे। इसके लिए वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाया जा सकता है।
अगर घर का निर्माण कराना चाह रहे हैं तो ध्यान रखें कि घर को कभी भी तिराहे या चौराहे पर, वीरान जगह पर नहीं बनवाना चाहिए। घर का निर्माण करने से पहले भूमि पूजन अवश्य कराएं। गली या सड़क जहां खत्म होती है, उसके अंतिम प्लॉट पर घर नहीं बनाना चाहिए। घर बनवाते समय पुरानी लकड़ी, ईंटों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। घर के बीच की जगह को हमेशा खाली रखें। घर में कोई भी कमरा तिरछा नहीं होना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे मंदिर नहीं होना चाहिए। घर के मुख्य दरवाजे पर रोली से दाईं ओर शुभ और बाईं ओर लाभ लिखें। दरवाजे के ऊपर रोली से ॐ की आकृति बनाएं। स्वास्तिक बनाएं। घर की छत, बालकनी में कभी कबाड़ भरकर न रखें। घर में कभी भी सामान अस्त-व्यस्त न रखें। बैठक में फूलों का गुलदस्‍ता लगाएं। घर में घुसते ही शौचालय नहीं होना चाहिए। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे इसके लिए रोजाना सुबह और शाम कर्पूर को देसी घी में डुबोकर जलाएं। घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए कमरों में सुगंधित धूपबत्ती, अगरबत्‍ती जलाएं। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीया जलाकर रखें। सुबह और शाम भगवान की पूजा करते समय कुछ देर के लिए घंटी जरूर बजाएं। मंदिर की घंटी बजाने से नकारात्‍मक ऊर्जा दूर होती है।

ब्यूटी /शौर्यपथ /महंगे प्रॉडक्ट्स पर खर्च करना हमेशा समझदारी नहीं है। आप अगर अपनी स्किन का ख्याल रखना चाहते हैं, तो रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों से भी अपनी स्किन को निखार सकते हैं। आयुर्वेद में इन चीजों को प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है।
कच्चा दूध
कच्चे दूध में मौजूद फैट और लैक्टिक ऐसिड आपके चेहरे से गंदगी हटाने में मदद करते हैं जिससे स्किन के पोर्स खुल जाते हैं इसलिए अगर आपके चेहरे पर कोई भी परेशानी है, तो आप कच्चा दूध इस्तेमाल कर सकते हैं।
नीम
नीम में ऐंटी-इंफ्लेमेटरी, ऐंटी-बैक्टीरियल, ऐंटी-वायरल और ऐंटीऑक्सिडेंट प्रॉपर्टी पाई जाती है। ऐसे में आपको नीम का इस्तेमाल करते रहना चाहिए। आप नीम फेसपैक बनाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही अगर आपको चेहरे पर नीम पैक लगाने में परेशानी हो, तो आप गुनगुने पानी में 5-10 मिनट नीम की पत्तियां डालकर इससे चेहरा भी धो सकते हैं।
हल्दी
इसमें ऐंटीसेप्टिक, ऐंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी मौजूद होती है। हल्दी के साथ दूध मिलाकर इसे फेस पैक के तौर पर लगाने से आपकी स्किन लंबे समय तक जवां और चमकदार रह सकती है। वहीं, हल्दी आपके चेहरे के दाग-धब्बों को भी दूर करती है।
नारियल तेल
नारियल तेल सिर्फ बालों के लिए ही नहीं बल्कि आपकी स्किन के लिए भी सर्दियों में वरदान साबित हो सकता है। ऐंटिसेप्टिक गुणों से भरपूर नारियल तेल ड्राई स्किन की प्रॉब्लम दूर करने में मददगार है। सर्दियों में त्वचा के फटने और रैशेज होने की दिक्कत भी नारियल तेल से दूर हो जाएगी। ऐसे में सर्दियों में नारियल लगाना बहुत ही फायदेमंद होता है।
चंदन
चंदन को चेहरे की हर एलर्जी के लिए रामबाण माना जाता है।ऐसे में चंदन का इस्तेमाल करने से आपका चेहरा बेदाग हो जाता है।आपको गर्मियों में चंदन का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / एक्सरसाइज करने से न सिर्फ आपका शरीर फिट रहता है बल्कि इससे आपकी स्किन भी ग्लोइंग बनती है। आप एक्ससाइज करते हुए डाइट का ख्याल भी रखते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्सरसाइज करते हुए कपड़े भी काफी मैटर करते हैं। जैसे, टाइट कपड़े पहनने से आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचता है। वहीं, लड़कियों को एक्सरसाइज करते वक्त स्पोर्ट्स ब्रा पहननी चाहिए। आइए, जानते हैं कि ऐसा क्यों है-
-वर्कआउट के समय ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिए ताकि आपकी बॉडी कम्फर्टेबल महसूस करे। एक्सरसाइज के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा पहनने की सलाह इसलिए दी जाती है कि इससे आपके ब्रेस्ट की वाल को सपोर्ट मिले क्योंकि अगर आप बहुत हैवी एक्सरसाइज करते हैं, तो आपके ब्रेस्ट के चारों तरफ के लिगामेंट में खिंचाव पैदा होने के कारण स्ट्रेच मार्क्स हो सकते हैं। इससे आगे जाकर आपके ब्रेस्ट काफी सैगी (लटकते हुए से) हो सकते हैं।
-एक अच्छी क्वालिटी की स्पोर्ट्स ब्रा आपके ब्रेस्ट को एक्सरसाइज के दौरान पूरी तरह से बेहतर सपोर्ट देती है। इससे आपके ब्रेस्ट अपने शेप में रहते हैं और सैगी होने से बचते हैं। इसे पहनने से ब्रेस्ट का ज्यादा मूवमेंट नहीं होता जिस वजह से ये खिंचाव से बचे रहते हैं।
-जब आप एक्सरसाइज करती हैं तो उसका पूरा असर आपकी बॉडी पर भी पड़ता है। ऐसे में ब्रेस्ट इससे कैसे अछूते रह सकते हैं। कई बार ज्यादा कसरत करने की वजह से पूरी बॉडी में ही नहीं बल्कि ब्रेस्ट में भी दर्द होता है। इस दर्द से बचने के लिए भी आपको स्पोर्ट्स ब्रा कैरी करनी चाहिए।

खाना खजाना / शौर्यपथ /आपका मन अगर झटपट स्नैक्स खाने का कर रहा है और आपके पास किचन में ज्यादा सामान भी नहीं है, तो आप आलू से ही देसी स्नैक्स बना सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं आलू का चीला बनाने की रेसिपी-
सामग्री :आलू- 3
कॉर्न फ्लोर- 2 चम्मच
बेसन- 2 चम्मच
काली मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
जीरा- 1/2 चम्मच
बारीक कटी मिर्च- 1
बारीक कटा हरा प्याज- 2 चम्मच
नमक- 1/2 चम्मच
तेल- आवश्यकतानुसार

विधि :
आलू को अच्छी तरह से धोकर छिलका छील लें और आलू को कद्दूकस कर लें। कद्दूकस किए आलू को पानी में डुबोकर पांच से सात मिनट तक छोड़ दें। आलू को पानी से निकालें और पानी को पूरी तरह से निचोड़ लें। कद्दूकस किए आलू को एक बाउल में डालें और उसमें कॉर्न फ्लोर और बेसन डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। अगर मिश्रण बहुत गीला है तो उसमें थोड़ा-सा कॉर्न फ्लोर और बेसन मिलाएं। मिश्रण में काली मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर, हरी मिर्च, हरा प्याज और नमक डालकर मिलाएं। मिश्रण अगर अभी भी गीला है तो उसमें थोड़ा-सा बेसन और मिला दें। नॉनस्टिक पैन गर्म करें और उसमें थोड़ा-सा तेल डालें। पैन के बीच में एक बड़ा चम्मच मिश्रण डालें और उसे मनचाहा आकार देते हुए फैलाएं। हल्का-सा तेल और डालें। मध्यम आंच पर उसे दोनों ओर से सुनहरा होने तक पकाएं। चटनी या सॉस के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

ब्यूटी /शौर्यपथ / मुल्तानी में पाई जाने वाली मुल्तानी मिट्टी को चेहरे पर निखार और बालों में शाइन के लिए इस्तेमाल करते हैं। मड थैरेपी में भी मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल गर्मियों में किया जाता है क्योंकि ये शरीर को ठंडक देता है। कई बार लू लग जाने पर इसके लेप को हाथ और पैर में लगाया जाता है। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन, सोडियम और गोल्ड पाया जाता है। इसके इस्तेमाल से दाग-धब्बों, डेड स्किन सेल्स, एक्ने और स्किन से ऑयल कम करने में मदद करता है। तो चलिए जानते हैं कैसे बनाएं मिल्तानी मिट्टी फेस पैक...
हल्दी और मुल्तानी मिट्टी
1 टेबलस्पून मुल्तानी मिट्टी में 1 चुटकी हल्दी पाउडर और 1 चम्मच गुलाबजल मिलाएं। इस पेस्ट को चेहरे पर 15-20 मिनटच के लिए लगाएं और धो लें। इसके इस्तेमाल से रिंक्लस, फाइन लाइन्स और एक्ने से छुटकारा मिलेगा।
दूध और मुल्तानी मिट्टी
इस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में दो बार जरूर करें। इसे बनाने के लिए 2 से 3 टेबलस्पून मुल्तानी मिट्टी लें और उसमें 2 टेबलस्पून दूध मिलाएं। इसका गाढ़ा पेस्ट बनाएं और चेहरे पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं। 15-20 मिनट बाद चेहरे को साफ करें। इससे आपकी स्किन सेफ्ट रहेगी।
मुल्तानी मिट्टी और शहद
आप मुल्तानी मिट्टी का पैक बनाने के लिए शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से स्किन से दाग धब्बों को हटाने में मदद मिलती है। इसे बनाने के लिए 1 चम्मच मुलतानी मिट्टी में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच गुलाब जल मिक्स करें और इसे चेहरे पर लगाएं। सुखने के बाद ठंडे पानी से धो लें।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /जो भी हम खाते हैं उसका असर लम्बे समय तक हमारे शरीर पर पड़ता है। खासतौर पर कुछ भी खाने के बाद करीब दो घंटे तक उसका असर सबसे ज्यादा रहता है। इस कारण कुछ ऐसी फिजिकल एक्टिविटीज हैं, जिन्हें करने से पहले और बाद में कुछ चीजों को खाने की मनाही की जाती है। जैसे, सेक्स करने से पहले भी कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें खाने की मनाही की जाती है क्योंकि इससे एसिडिटी और थकान का खतरा होता है। आइए, जानते हैं कौन-सी है वे चीजें
फल
बेड पर जाने से पहले फल खाना आपकी सेक्स लाइफ को बोरिंग बना सकता है। दरअसल, फल तेजी से पचते हैं जिसके चलते इंटिमेसी दौरान यह गैस और मरोड़ की समस्या उत्पन्न कर सकते हैं, इसलिए कभी भी खाने के बाद फ्रूट्स ना खाएं और पार्टनर के करीब जाने से पहले तो फल खाने की गलती भूलकर भी ना करें।
कॉफी
कॉफी में मौजूद कैफीन की अधिक मात्रा आपकी सेक्स लाइफ के लिए खराब हो सकती है। दरअसल, कैफीन शरीर में कार्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन के लेबल को बढ़ा देता है। जिससे आपको रिलेक्स फील नहीं होता। कई बार यह आपकी सेक्स करने की इच्छा को भी कम कर देता है।
अल्कोहल
सेक्स से पहले वाइन या बीयर के सेवन से बचें। वाइन और बीयर पीने से शरीर में मेलाटॉनिन की मात्रा बढ़ जाती है। जो शरीर में स्लीप हार्मोन प्रोड्यूस करता है। यानी, अगर आप सेक्स से पहले मूड को रोमांटिक बनाने के लिए बीयर या वाइन पीते हैं तो यह आपके मूड को रोमांटिक करने के बजाय आपकी गहरी नींद का कारण बन सकता है।
फूलगोभी, ब्रोकली
सब्जियां सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं लेकिन अगर आप खाने में फूलगोभी और ब्रोकली जैसी मिथेन प्रोड्यूसिंग सब्जियों का इस्तेमाल करते हैं तो यह गैस की समस्या का कारण बन सकती हैं।
सोया
सेक्स के दौरान शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का लेवल अच्छा होना बेहद जरूरी होता है। लेकिन, सोया एक ऐसी चीज है, जो हार्मोंस के संतुलन को बिगाड़ सकता है।

खाना खजाना / शौर्यपथ / सामग्री :1 कप पिसा हुआ काजू,
5-6 बड़े चम्मच शुगर फ्री,
4-5 केसर के लच्छे,
1/2 चम्मच इलायची पाउडर, पानी आवश्यकतानुसार और चांदी का वर्क।
विधि :एक कड़ाही में पानी, शुगर फ्री और केसर डालें। पानी में शुगर फ्री पूरी तरह से घुलने तक चलाएं। अब उसमें इलायची पाउडर डालें। मिश्रण गाढ़ा होने पर थोड़ा-थोड़ा करके पिसा काजू डालें, लगातार चलाती रहें ताकि गुठलियां ना पड़ें, अच्छी तरह मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं।
अब तैयार मिश्रण को ठंडा करने के लिए रख दें। मिश्रण ठंडा हो जाने पर एक थाली में घी का हाथ लगाकर तैयार मिश्रण को पूरी तरह एक जैसा फैला दें। ऊपर से चांदी का वर्क लगाएं और अपने मनपसंद आकार में चाकू की सहायता से काजू कतली काट लें।
घर पर आसान तरीके से तैयार की गई शुगर फ्री काजू क‍तली सर्व करें।

शौर्यपथ / जिंदगी कितनी खूबसूरत है यह तब पता चलता है जबकि हम आंखें खोलकर जीना प्रारंभ कर देते हैं। कई लोग बेहोशी में ही जी रहे हैं और कब जवानी गुजर गई पता ही नहीं चलता है। किसी भी कारणवश आपकी जीने की चाह खत्म हो गई है तो आप ऐसे 10 कार्य करें जिससे आपकी जीने की उमंग फिर से जाग उठे। 10 काम बताने के पहले एक बात जान लें कि पशु आत्महत्या नहीं करता क्योंकि वह जीना जानता है।
1. भोजन का लें मजा : दुनिया में ऐसे 1 हजार व्यंजन होंगे जो अभी तक आपने खाए नहीं होंगे। आप उन व्यंजनों की लिस्ट बनाएं और उन्हें खाने के स्थान ढूंढे या खुद बनाना सीखें। यदि आप यह पसंद नहीं करते हैं तो गरीबों को भोजन कराएं। आपको बहुत सुकून मिलेगा।

2. घूमने का लें मजा : दुनिया को तो छोड़ दें आपके आसपास ऐसे 1 हजार स्थान होंगे जहां आप अभी तक नहीं गए हैं। एक बार आप अपने देश का भ्रमण ही कर लें तो पता चल जाएगा कि दुनिया कितनी खूबसूरत है। चलिए यदि आपने ये कार्य कर लिया है तो जरा सोचे कुछ लोग ऐसे हैं जो तीर्थ यात्रा करना चाहते हैं परंतु धन के अभाव में कहीं नहीं जा पा रहे हैं। क्या आप उनके लिए कुछ कर सकते हैं?
3. दूसरों के लिए जीएं : चलो मान लिया आपकी जीने की चाह खत्म हो गई है तो आप दूसरों के लिए भी तो जी सकते हो? क्या आपने अपने माता पिता की कभी सेवा की? क्या आपने गौ सेवा की? देश सेवा की बात तो छोड़िए क्या आपने कभी अपने परिवार या समाज की सेवा की? चलो जाने तो इन्हें भी कभी किसी अनाथ बच्चे की सेवा कर देना क्योंकि वो तो बिचारा तो अभी जीना चाहता है, पढ़ना चाहता है और जीवन में कुछ बनना चाहता है। किसी गरीब की बेटी की शादी भी करवा सकते हो तो करवा देना। जरा देश में घूमे, कितने ही लोग हैं जो जीना चाहते हैं परंतु गरीबी या बुरे लोग उन्हें जीने नहीं दे रहे हैं।
4. प्रकृति या भगवान को कभी ‍दिया धन्यवाद? : आपको यह जन्म प्रकृति ने दिया या भगवान ने। किसी ने भी दिया हो आपने उन्हें कभी धन्यवाद कहा? कभी नि:स्वार्थ भगवान की पूजा या मंदिर की सेवा करके देखें या प्रकृति के लिए कोई कार्य करने का सोचे। मरने से पहले इतने सारे वृक्ष लगा जाएं कि लोग आपको याद करें और जब दूसरा जन्म लें तो वही लहलहाते वक्त आपका स्वागत करें।

5.
कुछ नया सीखें : ऐसी बहुत सी बातें हैं जो आपने अब तक नहीं सीखी होगी। जैसे तैरना, घुड़सवारी, कार चलाना, कोई नई भाषा, गिटार बजाना, शरतरंज, योगासन या किसी से प्यार करना सीखें आदि सैंकड़ों बातों में से कुछ तो होगी जो आप सीखना चाहते होंगे।

6. प्रवचन सुनें : आप ओशो रजनीश, जग्गी वासुदेव महाराज, श्रीश्री रविशंकर जैसे लोगों के प्रवचन सुनें। आपने अब तक जिंदगी में यह नहीं जाना है कि यह आत्मा, परमात्मा या सृष्टि क्या है। यह भी नहीं जाना है कि जीवन क्या है, जीना किसे कहते हैं। तभी तो आप अवसाद में जी रहे हैं। तभी तो अपमें जीने की इच्छा खत्म हो गई है। आप दु:खों से घबराकर पलायन करना चाहते हैं। युद्ध का मैदान छोड़कर भागना चाहते हैं। यदि किसी के प्रवचन नहीं सुनना चाहते हैं तो मोटिवेशनल स्पीच सुनें।
7. खेल से खुद को जोड़ें : आपको यदि शतरंज का शौक है तो उससे फिर से जुड़ें। नहीं है तो किसी भी प्रकार के खेल से खुद को जोड़ें। आप कोई स्पोर्ट्स क्लब ज्वाइन करें।

8. आत्मकथा लिखें : आप लेखन से जुड़कर कविता, कहानी या खुद की आत्मकथा लिखें और उसे दुनिया के सामने लाएं। जरूरी नहीं है कि आत्मकथा लिखने वाले कोई महान लोग होते हैं। सिर्फ आत्मकथा लिखकर भी महान बना जा सकता है।
9. किताबें पढ़ें फिल्में देखें : आपने अभी तक वह किताबें नहीं पढ़ी है जिन्हें पढ़ना चाहिए। दुनिया में ऐसी कई किताबें हैं जो आपमें जीने की उमंग जगा देगी। रहस्य, रोमांच और ज्ञान से भरपूर हजारों किताबें मिलेगी। आप उन्हें पढ़कर खुद में बदलाव कर सकते हैं। ऐसी कई फिल्में और सीरिज हैं तो आपने अभी तक नहीं देखी होगी। आप उन सभी की एक लिस्ट बनाएं जो आप देखना चाहते हो और देख डालो।
10. अपना शहर छोड़ दें : यदि आप अपने शहर से ऊब गए हैं तो आपन किसी ऐसे शहर में रहने जाएं जहां पर प्रकृति के साथ मनोरंज के भी कई साधन हो। कहते हैं कि स्थान बदलने से भी जीने का उत्साह बढ़ जाता है और आपन वहां जाकर कुछ नया करने लगते हैं। आपको आपने जीवन का उद्देश्य ढूंढना चाहिए।

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