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सेहत / शौर्यपथ /बदलते वक्त के साथ खान-पान में बदलाव अहम हिस्सा हो गया है। अगर आपको लंबे वक्त तक जवां रहना है तो उसकी चिंता भी अभी से ही करना पड़ेगी। जी हां, भले ही आपकी उम्र 20 बरस की ही क्यों नहीं हो लेकिन 40 में भी 20 जैसा दिखने के लिए अभी से मेहनत करना पड़ेगी। आपका खानपान और इसके बाद आपकी लाइफ स्टाइल सबसे अधिक महत्वपूर्ण चीज है। आइए जानते हैं 10 ऐसे फूड आइटम्स के बारे में जो आपको समय से पहले मोटा और बूढ़ा कर देगी – > 1.प्रोसेस्ड फूड आइटम्स – जी हां, अगर आप छोटी उम्र से ही जवां रहना चाहते हैं तो प्रोसेस्ड फूड आइटम्स खाना छोड़ दें। इस प्रकार के खानपान में सभी न्यूट्रिशन नष्ट हो जाते हैं। क्योंकि लंबे वक्त तक उन्हें संरक्षित किया जाता है। इसके लिए उसमें अलग – अलग प्रकार के रंग, फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है। > 2. जंक फूड – इसे फास्ट फूड भी कहा जाता है। यह बच्चों का सबसे पसंदीदा फूड आइटम्स में से एक है। लेकिन जंक फूड पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, मोमोज यह मैदे से बने होते हैं, और पचाने में काफी वक्त लगता है। धीरे-धीरे वह आपके पेट में जमा होने लगता है। जिससे आपका वजन लगातार बढ़ने लगता है।
3. फ्राइड आइटम्स – तेल में भुने हुए आइटम्स खाने में बड़े अच्छे लगते हैं। लेकिन तेजी से वजन बढ़ने का कारण भी यहीं होते हैं। जी हां, फ्रेंच फ्राइस, समोसे, कचोरी,ब्रेड बड़ा, बैक समोसा आदि। इन सभी आइटम्स में अधिक मात्रा में तेल होता है। लगातार इन चीजों को सेवन करने से कम उम्र में ही बीमारियां घेरने लग जाती है। और युवाओं में कोलेस्ट्रॉल की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
4. सफेद ब्रेड – लोग नाश्ते में सफेद ब्रेड का सेवन सबसे अधिक करते हैं। सफेद ब्रेड में मौजूद ग्लाइसेमिक इंडेक्स रहता है। इसके लगातार सेवन से आप उम्र से पहले ही बूढ़ा नजर आने लगेंगे।
5. चीनी का सेवन – एक तय मात्रा में चीनी का सेवन करना हेल्थ के लिए अच्छा होता है। अत्यधिक सेवन आपको समय से पहले बूढ़ा कर देगी। जी हां, अधिक सेवन से ग्लाइसेशन नामक एक प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे आपकी त्वचा के कोलेजन को नुकसान पहुंचता है और चेहरे पर असमय झुर्रियां धीरे – धीरे बढ़ने लग जाती है। इसकी जगह आप रिफाइंड शुगर और गुड़ का भी सेवन कर सकते हैं।
6. चाय और कॉफी – कुछ लोग काम के दौरान हर थोड़ी-थोड़ी देर में चाय या कॉफी का सेवन करने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सेवन करने से आपके चेहरे की सुरत भी बदल सकती है। चाय और कॉफी में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। इससे आपके चेहरे पर लाइन, आंखों के पास झुर्रियां होना, काले घेरे होना जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती है।
7. शराब – शराब का सेवन शरीर के लिए हानिकारक होता ही है। इसमें मौजूद अल्कोहल शरीर में विषाक्त पदार्थों का निर्माण करते हैं, जिससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती है। शराब के सेवन से बॉडी में कोलेजन की कमी, पानी की कमी और विटामिन ए की गुणवत्ता कम हो जाती है। इस वजह से चेहरे पर फुंसी होने लगती है और आपकी त्वचा ढीली होने लगती है।
8.अधिक आंच पर पका खान – अगर आप भी हाई हिट पर पका खाना खाते हैं तो सावधान हो जाएं। इससे आपकी उम्र तेजी से बढ़ने लगती है। साथ ही हाई हिट पर पके खाने के सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
9. अधिक से अधिक पानी का सेवन – कई बार लोग एक दिन में सिर्फ 3 या 4 गिलास पानी ही पीते है। लेकिन अधिक पानी पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। जिससे त्वचा पर ग्लो भी बना रहता है चमक भी।
10. नमक का सेवन – नमक में सोडियम की तादाद ज्यादा होती है। इसका अत्यधिक सेवन करने से शरीर की कोशिकाएं सिकुड़ने लगती है। जिससे आप डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।
सेहत / शौर्यपथ /डिप्रेशन के दौरान इंसान को अपने आप को संभालना बहुत बड़ी बात होती है। क्योंकि वह अपनी ओवरथिंकिंगको रोक नहीं पाते हैं।हालांकि कोरोना काल में कोविड से उभरने के बाद कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। लेकिन सही समय पर इसका इलाज मिलना भी जरूरी है। ताकि इस बीमारी से बाहर आ सकें। मेडिसिन के साथ कुछ एक्टिविटी होती है जिन्हें फॉलो करके इस बीमारी को ओवरकम किया जा सके। तो आइए जानते हैं डिप्रेशन को ओवर कम करने के उपाय -
1.धूप जरूर लें -अगर आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं तो धूप जरूर लें। सुबह 7 से 9 बजे तक की धूप सबसे अच्छी होती है। कम से कम 15 मिनट तक धूप जरूर लेना चाहिए।
2. डार्क चॉकलेट खाएं -
जी हां, इस दौरान अपनी डाइट में कुछ बदलाव करना जरूरी होता है। टॉक्सिन हार्मोन को आसानी से रिलीज किया जा सकें। यह आप कभी भी खा सकते हैं।
3.मेडिटेशन -मन और दिमाग को शांत करने का सबसे अच्छा उपाय। कहते है 21 दिन तक किसी रूटीन को फॉलो करने पर वह आपकी आदत बन जाती है। इसलिए मेडिटेशन जरूर करें। सुबह कम से कम 15 मिनट जरूर करें।
4.खुद को व्यस्त रखें -
जी हां, डिप्रेशन के दौरान जितना अधिक आप खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करेंगे। उस बीमारी से उबरने में मदद मिलेगी। डिप्रेशन के दौरान इंसान किसी भी चीज को समझ नहीं पाते हैं क्योंकि किसी भी कार्य में उनका मन नहीं लगता है, और मन लगातार उदास रहता है।
5. फ्रूट्स और नट्स खाएं -इस दौरान अधिक से अधिक फ्रूट्स और नट्स खाएं। ताकि आपके शरीर में हो रही पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में वृक्षों का बहुत महत्व माना गया है। वृक्षों को जहां देवी और देवताओं से जोड़कर देखा जाता है वहीं ग्रह नक्षत्रों से जोड़कर भी देख गया है। शमी वृक्ष को शनिदेव और शनिग्रह का कारक माना जाता है। इसीलिए उसकी पूजा का महत्व है। आओ जानते हैं इस बारे में कुछ खास।
क्यों करते हैं शमी वृक्ष की पूजा :
1. शमी में शनिदेव का निवास होता है। इसीलिए इसकी पूजा का महत्व है। इसकी प्रतिदिन पूजा करने से कई तरह से संकटों से व्यक्ति बच जाता है और हर क्षेत्र में वह विजयी पाता है।
2. शमी वृक्ष की पूजा करने से शनि ग्रह संबंधी सभी प्राकर के दोष समाप्त हो जाते हैं। जैसे शनि की साढ़े साती, ढैय्या आदि।
3. विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष पूजा करने से घर में तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है।
4. जहां भी यह वृक्ष लगा होता है और उसकी नित्य पूजना होती रहती है वहां विपदाएं दूर रहती हैं।
5. आयुर्वेद के अनुसार यह वृक्ष कृषि विपदा में लाभदायक है। इसके कई तरह के प्रयोग होते हैं।
जानें इसका धार्मिक महत्व :
1. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी। बाद में लंका पर विजय पाने के बाद उन्होंने शमी पूजन किया था। दशहरे के दिन आज भी दशहरा मिलने के बाद लोगों को शमी के पत्ते भेंट करते हैं, लेकिन शमी के पत्तों को तोड़ने से पहले पौधे का पूजन किया जाता है। यह शत्रु पर विजयी दिलाता है।
2. यह भी कहा जाता है कि लंका से विजयी होकर जब राम अयोध्या लौटे थे तो उन्होंने लोगों को स्वर्ण दिया था। इसीके प्रतीक रूप में दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में शमी की पत्तियां बांटी जाती है। कुछ लोग खेजड़ी के वृक्ष के पत्ते भी बांटते हैं जिन्हें सोना पत्ति कहते हैं।
3. महाभारत अनुसार पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। बाद में उन्होंने वहीं से हथियार प्राप्त किए थे तब उन्होंने हथियारों के साथ ही शमी की पूजा भी की थी। इन्हीं हथियारों से पांडवों ने युद्ध जीता था। संभवत: तभी से शमी के वृक्ष की पूजा और हथियारों की पूजा कर प्रचलन प्रारंभ हुआ होगा।
4.एक अन्य कथा के अनुसार महर्षि वर्तन्तु ने अपने शिष्य कौत्स से शिक्षा पूरी होने के बाद गुरू दक्षिणा के रूप में 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं मांग ली। यह मांग सुनकर कौत्स महाराज रघु के पास गए और उनसे यह रकम मांगी। महाराज रघु ने कुछ दिन पहले ही एक महायज्ञ करवाया था, जिसके कारण खजाना खाली हो चुका था। तब उन्होंने कौत्स से तीन दिन का समय मांगा। राजा धन जुटाने के लिए उपाय खोजने लग गया। कोई उपाय नहीं सुझा तो उन्होंने स्वर्गलोक पर आक्रमण करने का निश्चय किया। राजा ने सोचा स्वर्गलोक पर आक्रमण करने से उसका शाही खजाना फिर से भर जाएगा। राजा के इस विचार से देवराज इंद्र घबरा गए और कोषाध्याक्ष कुबेर से रघु के राज्य में स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करने का आदेश दिया। इंद्र के आदेश पर रघु के राज्य में कुबेर ने शमी वृक्ष के माध्यम से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करा दी। माना जाता है कि जिस तिथि को स्वर्ण की वर्षा हुई थी उस दिन विजयादशमी थी। इस घटना के बाद से ही विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा और उसकी पत्तियां एक दूसरे को बांटने की परंपरा प्रारंभ हुई।
शमी पूजा विधि :
1 प्रदोषकाल में शमी वृक्ष के समीप जाकर पहले उसे प्रणाम करें फिर उसकी जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें।
2. जल अर्पित करने के बाद वृक्ष के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं तो यह अत्यंत शुभ होता है।
3. तत्पश्चात शमी वृक्ष का यथाशक्ति धूप, दीप, नैवेद्य, आरती से पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करें। पूजन के उपरांत हाथ जोड़कर निम्न प्रार्थना करें-
'शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी।।
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता।।'
अर्थात हे शमी वृक्ष, आप पापों का क्षय करने वाले और शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। आप अर्जुन का धनुष धारण करने वाले हैं और श्रीराम को प्रिय हैं। जिस तरह श्रीराम ने आपकी पूजा की, हम भी करेंगे। हमारी विजय के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं से दूर करके उसे सुखमय बना दीजिए।
4. शमी पूजा के कई महत्वपूर्ण मंत्र का प्रयोग भी करें। इससे सभी तरह का संकट मिटकर सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
5. शमी के पत्ते तोड़ना नहीं चाहिए, नीचे ताजा गिरे हुए पत्ते को या तो अपने पास संभालकर रख लें या शिवजी पर चढ़ाते समय ये मंत्र बोलें- अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च। दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
आस्था /शौर्यपथ / वास्तु पुरुष की कल्पना भूखंड में एक ऐसे औंधे मुंह पड़े पुरुष के रूप में की जाती है जिसमें उनका मुंह ईशान कोण व पैर नैऋत्य कोण की ओर होते हैं। उनकी भुजाएं व कंधे वायव्य कोण व अग्निकोण की ओर मुड़ी हुई रहती हैं।
मत्स्य पुराण के अनुसार वास्तु पुरुष की एक कथा है। देवताओं और असुरों का युद्ध हो रहा था। इस युद्ध में असुरों की ओर से अंधकासुर और देवताओं की ओर से भगवान शिव युद्ध कर रहे थे। युद्ध में दोनों के पसीने की कुछ बूंदें जब भूमि पर गिरीं तो एक अत्यंत बलशाली और विराट पुरुष की उत्पत्ति हुई। उस विराट पुरुष ने पूरी धरती को ढंक लिया।
उस विराट पुरुष से देवता और असुर दोनों ही भयभीत हो गए। देवताओं को लगा कि यह असुरों की ओर से कोई पुरुष है जबकि असुरों को लगा कि यह देवताओं की तरफ से कोई नया देवता प्रकट हो गया है। इस विस्मय के कारण युद्ध थम गया और उसके बारे में जानने के लिए देवता और असुर दोनों उस विराट पुरुष को पकड़कर ब्रह्मा जी के पास ले गए।
उसे उन लोगों ने इसलिए पकड़ा कि उसे खुद ज्ञान नहीं था कि वह कौन है, क्योंकि वह अचानक उत्पन्न हुआ था। उस विराट पुरुष ने उनके पकड़ने का विरोध भी नहीं किया। फिर ब्रह्मलोक में ब्रह्मदेव के सामने पहुंचने पर उन लोगों नें ब्रह्मदेव से उस विराट पुरुष के बारे में बताने का आग्रह किया।
ब्रह्मा जी ने उस वृहदाकार पुरुष के बारे में कहा कि भगवान शिव और अंधकासुर के युद्ध के दौरान उनके शरीर से गिरे पसीने की बूंदों से इस विराट पुरुष का जन्म हुआ है इसलिए आप लोग इसे धरतीपुत्र भी कह सकते हैं।
ब्रह्मदेव ने उस विराट पुरुष को संबोधित कर उसे अपना मानस पुत्र होने की संज्ञा दी और उसका नामकरण करते हुए कहा कि आज से तुम्हें संसार में 'वास्तु पुरुष' के नाम से जाना जाएगा और तुम्हें संसार के कल्याण के लिए धरती में समाहित होना पड़ेगा अर्थात धरती के अंदर वास करना होगा।
ब्रह्मदेव ने कहा कि मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि जो भी कोई व्यक्ति धरती के किसी भी भू-भाग पर कोई भी मकान, तालाब या मंदिर आदि का निर्माण कार्य करते समय वास्तु पुरुष को ध्यान में रखकर करेगा तो उसको सफलता और हर कार्य में सिद्धि मिलेगी और जो कोई बिना तुम्हारा पूजन करे निर्माण कार्य करेगा, तो उसे तकलीफें और जीवन में अड़चनों का सामना करना पड़ेगा।
ऐसा सुनकर वह वास्तु पुरुष धरती पर आया और ब्रह्मदेव के निर्देशानुसार एक विशेष मुद्रा में धरती पर बैठ गया जिससे उसकी पीठ नैऋत्य कोण व मुख ईशान कोण में था। इसके उपरांत वह अपने दोनों हाथों को जोड़कर पिता ब्रह्मदेव व धरती माता को नमस्कार करते हुए औंधे मुंह धरती में समाने लगा।
खाना खजाना /शौर्यपथ / कच्चे आम की चटनी या फिर आम पन्ना तो आपने कई बार खाया-पिया होगा लेकिन क्या आपने कच्चे आम का रायता खाया है? अगर नहीं, तो देर किस बात की। आइए, जानते हैं कच्चे आम का रायता
सामग्री-
1 कच्चा आम
एक बड़ी कटोरी दही
एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
एक छोटा चम्मच जीरा पाउडर
आधा छोटा चम्मच राई
चुटकीभर हींग
4-5 करी पत्ता
एक छोटा चम्मच तेल
नमक स्वादानुसार
विधि :
सबसे पहले आम को छीलकर इसे कद्दूकस कर लें।
अब एक बर्तन में दही, नमक, लाल मिर्च पाउडर और जीरा पाउडर अच्छे से मिक्स कर लें।
अब इसमें कद्दूकस किया हुआ आम डालकर मिलाएं।
तड़के के लिए मीडियम आंच में एक पैन में तेल गरम करने के लिए रखें।
तेल के गरम होते ही इसमें राई, करी पत्ता और हींग डालें।
राई के चटकते ही आंच बंदकर तड़के को दही में डाल दें।
ऊपर से नमक डालकर अच्छे से मिलाएं।
तैयार है कच्चे आम का रायता।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / ज्यादातर लोगों को खाने के साथ सलाद खाने की आदत होती है। वहीं, कुछ लोग अपना डाइट प्लान फॉलो करने के इरादे से दिन में एक टाइम सलाद ही खाना पसंद करते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को सलाद खाने से जुड़ी कुछ बातें नहीं पता, जिनसे उनकी सेहत खराब हो सकती है। आइए, जानते हैं कुछ टिप्स-
खाने से पहले खाएं सलाद
सलाद में सबसे ज्यादा फाइबर होते हैं। सलाद को खाना खाने से पहले खाना चाहिए। आधे से एक घंटा पहले अगर आप सलाद खाते हैं तो इससे आपको खाना खाते समय कम भूख लगती है जिस वजह से आप कम रोटी या चावल खाते हैं यानि आप कम कार्बोज लेते हैं जिस वजह से आपका वजन भी कंट्रोल हो रहा है।
सलाद में नहीं डालें नमक
आप सलाद में नमक डाल ही रहे हैं, तो फिर काला नमक या सेंधा नमक डालें, ये ज्यादा हेल्दी होता है और रात को खाने से पहले आपको वेज सलाद खाना चाहिए इससे आपको ज्यादा फायदा मिलेगा।
फ्रूट सलाद को दिन में खाएं
फ्रूट सलाद ना तो रात को खाना खाने से पहले खाएं और ना ही फ्रूट सलाद को आप खाना खाने के बाद खाएं दोनों की कंडीशन में ये आपको नुकसान पहुंचाता है। इससे आपका शुगर लेवल बढ़ सकता है। आपको फलों वाला सलाद थोड़ा सा नमक डालकर दिन में किसी समय खाना चाहिए।
सलाद को न खाएं चीज या मियोनीज के साथ
सलाद को बिना मियोनीज और चीज के खाना चाहिए अगर आपको लगता है यह सब चीजें डालने से सलाद के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं और आपको सलाद खाने का कोई फायदा नहीं मिल पाता।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / शैतानी करने पर बच्चों को पिटाई का डर दिखाया जाता है पर यह तरीका न सिर्फ बच्चों के अंदर बुरी आदतों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनके विकास में भी बाधक बन जाता है। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन समेत नौ देशों में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों की एक समीक्षा के आधार पर यह कहा गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिटाई से बच्चों का व्यवहार और ज्यादा खराब हो जाता है। यह समीक्षा प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका द लांसेट में प्रकाशित हुई है।
इस समीक्षा के वरिष्ठ लेखक और टेक्सास विश्वविद्यालय के मानव विकास व परिवार विज्ञान के प्रो.
एलिजाबेथ गेर्शंफ का कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों को मारते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके व्यवहार में सुधार होगा। पर दुर्भाग्य से इस तरह की पिटाई अथवा शारीरिक दंड बच्चों के व्यवहार में सुधार नहीं करता है, बल्कि इसे और भी खराब बना देता है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने बच्चों पर शारीरिक हिंसा की श्रेणी में आने वाले तरीकों को अलग करके उन तरीकों के बच्चों पर असर का अध्ययन किया जो आमतौर पर अभिभावक अपनाते हैं। यह समीक्षा अमेरिका, कनाडा, चीन, कोलंबिया, ग्रीस, जापान, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर की गई।
इस समीक्षा के वरिष्ठ लेखक और टेक्सास विश्वविद्यालय के मानव विकास व परिवार विज्ञान के प्रो.
एलिजाबेथ गेर्शंफ का कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों को मारते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके व्यवहार में सुधार होगा। पर दुर्भाग्य से इस तरह की पिटाई अथवा शारीरिक दंड बच्चों के व्यवहार में सुधार नहीं करता है, बल्कि इसे और भी खराब बना देता है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने बच्चों पर शारीरिक हिंसा की श्रेणी में आने वाले तरीकों को अलग करके उन तरीकों के बच्चों पर असर का अध्ययन किया जो आमतौर पर अभिभावक अपनाते हैं। यह समीक्षा अमेरिका, कनाडा, चीन, कोलंबिया, ग्रीस, जापान, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर की गई।
अधिकांश देशों में पिटाई वैध
यूनिसेफ के मुताबिक, सबसे चिंता की बात यह है कि दुनिया में 2 से 4 वर्ष की आयु के लगभग 63% बच्चे या या लगभग 25 करोड़ बच्चे, ऐसे देशों में रहते हैं जहां का कानून अभिभावकों को उनकी पिटाई की अनुमति देते हैं। यही वजह है कि आम अभिभावक इस प्रवृत्ति से बाहर ही नहीं आ पाता कि बच्चों को पीटे बिना भी उनके व्यवहार में सुधार लाया जा सकता है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / भारत में पैदा हुए बच्चे को बूरी नजरों से बचाने के लिए काजल का टीका लगाया जाता है। साथ ही ये भी कहा जाता है कि इससे बच्चे की आंखें और पलके बड़ी होती हैं। हालांकि बच्चों के डॉक्टर (पिडियाट्रिशियन) इस बात की सलाह बिलकुल नहीं देते हैं। डॉक्टर की माने तो ऐसा करना बेहद नुकसानदायक होता है। इसके बावजूद बच्चों की कोमल आंखों में काजल लगाया जाता है। डॉक्टर के मुताबिक बच्चों की सेहत के लिए यह जहर की तरह काम करता है। बच्चों को हाइअर गट ऑप्जर्पशन होता है और उनका नर्वस सिस्टम विकास की प्रक्रिया में होता है। ऐसे में काजल में मौजूद लेड जहर की तरह काम कर सकता है। आइए जानते हैं कि क्यों नहीं लगाना चाहिए बच्चों को काजल।
क्यों ना करें काजल का इस्तेमाल
काजल बनाने में लेड का इस्तेमाल किया जाता है। जो सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। यह किडनी, मस्तिष्क, बोन मैरो और शरीर के अन्य अंगों को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। यदि ब्लड में लेड का स्तर बढ़ जाए तो कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती है और बात इतनी बिगड़ सकती है कि इंसान की मौत भी हो जाए। ऐसे में ये नवजात की सेहत के लिए खतरों से भरा है।
क्या घर में बना काजल सेफ है?
घर में बने काजल को प्राकृतिक होने की बात कही जाती है, लेकिन घर में बने काजल भी सुरक्षित नहीं होते। इन काजलों में कार्बन मौजूद होता है, जो बच्चे की आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों की आंखों में इनफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है, क्योंकि इस काजल को उंगली से लगाया जाता है।
मिथ और सच्चाई
मिथ- नजर से बचाता है
सच्चाई- इसका कोई वैज्ञानिक आधार मौजूद नहीं है।
मिथ- लोगों की माने तो काजल लगाने से बच्चे ज्यादा देर तक सोते हैं।
सच्चाई- डॉक्टर्स की मानें तो बच्चे रोजाना 17-19 घंटे सोते हैं।
मिथ- आंखें और पलके बड़ी होती हैं
सच्चाई- ये तर्कहीन बात है
खाना खजाना / शौर्यपथ / चाय के साथ आपने गोभी, प्याज और आलू के पकौड़े तो कई बार खाए होंगे, लेकिन इस बार ट्राई करें कटहल के टेस्टी पकौड़े। यह पकौड़े खाने में जितने टेस्टी और क्रिस्पी होते हैं बनने में उतने ही आसान भी हैं। तो देर किस बात की आइए जानते हैं क्या है कटहल के पकौड़े बनाने का आसान और टेस्टी तरीका।
कटहल के पकौड़े बनाने के लिए सामग्री-
-कच्चा कटहल- 500 ग्राम
-नमक- 1.5 छोटी चम्मच
-हींग- ½ चुटकी
-बेसन- 1 कप
-चावल का आटा- ½ कप
-हरी मिर्च- 2 बारीक कटी हुई
-लाल मिर्च पाउडर- 1.5 छोटी चम्मच
-धनिया पाउडर- 1.5 छोटी चम्मच
-अमचूर पाउडर- ½ छोटी चम्मच
-गरम मसाला- ½ छोटी चम्मच
-अजवाइन- ½
-तेल- तलने के लिए
कटहल के पकौड़े बनाने का तरीका-
कटहल के पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले कटहल को छोटे छोटे पीस में काटकर उसके बीज के पीछे का भाग निकाल लें। अब कुकर में ½ कप पानी, ¾ चम्मच नमक और 1 चुटकी हींग डालकर कटा हुआ कटहल डालकर ढक्कन बंद कर आंच पर रखकर एक सीटी आने का इंतजार करें। थोड़ी देर बाद कुकर का ढक्कन खोलकर कटहल को निकाल लें और बचा हुआ पानी फेंक दीजिए। अब एक गहरे तले वाले पैन में तेल डालकर हल्की आंच पर गर्म करें। एक गहरे बर्तन में बेसन, चावल का आटा, स्वादानुसार नमक और अंदाज से थोड़ा सा पानी डालकर एक घोल बना लें। इस घोल में लाल मिर्च पाउडर, हरा मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर, गरम मसाला और अजवाइन डालकर अच्छे से मिला लीजिए और इसमें 1 स्पून तेल भी डालकर मिलाएं।
अब इस घोल में उबले हुए कटहल के टुकड़े डालें। इसके बाद इसमें हल्दी डालकर मिलाएं। कटहल के क्रिस्पी पकौड़े बनाने के लिए आपका घोल तैयार है। अब एक कड़ाही में तेल डालकर अच्छे से गर्म कर लें। इसके बाद पकौड़े के घोल को थोड़ा थोड़ा कर इस तेल में टपकाएं। मीडियम आंच पर पकौड़ों को गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें। अब इन पकौड़ों को एक पेपर नैपकिन लगी प्लेट पर निकाल लें, ताकि पेपर अतिरिक्त तेल सोख ले। इसी तरह सारे पकौड़ों को तल लीजिए। अब इन पकौड़ों को सर्विंग प्लेट में निकालकर टोमेटो केचप या धनिए की चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ /लोगों की लाइफस्टाइल में तेजी से बदलाव आ रहा है। लेकिन खान- पान की बात की जाए तो गाड़ी अटक जाती है। जी हां, रहन - सहन और पहनावे में टाइम के साथ सब कुछ बदल रहा है पर पहले से अब और अधिक जंक फूड पर जोर दिया जाने लगा है। युवाओं की पहली पसंद जंक फूड बन गई है। लेकिन इसका असर हेल्थ पर आने वाले समय में दिखता है। जिससे कई तरह की बीमारियां कम उम्र में ही हमें घेर लेती है।
लेकिन अगर आप खानपान में बदलाव नहीं कर सकते तो बर्तनों में बदलाव कर अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं, जी हां, आज हम आपको बताएंगे मिट्टी के बर्तन से मिलने वाले लाभ के बारे में - सेहत रहे तंदुरुस्त - आज के वक्त में आधुनिक बर्तन में खाना पकाते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी होता है। लेकिन मिट्टी के बर्तन में ऐसा नहीं है। बल्कि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से करीब 10 तरह के पोषक तत्वों का लाभ मिलता है। जिसमें मुख्य रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, कोबाल्ट, जिप्सम, सिलिकॉन, आयरन आदि शामिल होते हैं।
कब्ज से दिलाए राहत -
आज के वक्त में कब्ज की समस्या होना आम बात हो गई है। ऑफिस टाइम में अक्सर खाना खाकर बैठने पर गैस की समस्या होने लगती है। इसलिए मिट्टी के तवे पर रोटी पकाने से गैस और कब्ज की समस्या से निजात दिलाने में मदद मिलेगी।
पोषक तत्व नहीं होते हैं नष्ट -
मिट्टी के बर्तन में पकी हुई दाल और सब्जियों के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं। इस बर्तन में बने दाल और सब्जी के 99.9 फीसदी माइक्रो न्यूट्रीएंट्स बचे रहते हैं हालांकि कुकर में सब्जी पकाने से अधिकतम पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
तेल का प्रयोग कम - मिट्टी के बर्तन में खाने पकाने का सबसे बड़ा फायदा है तेल का प्रयोग कम होता है। जी हां, अगर आपको ऑयली खाना बिल्कुल भी नहीं पसंद है तो मिट्टी के बर्तन सबसे अच्छे हैं। साथ ही इसमें खाना चिपकने का कोई डर भी नहीं।
खाना बार - बार गर्म नहीं करना पड़ता - जी हां, मिट्टी के बर्तन में खाना एक बार गर्म करने के बाद अन्य बर्तन के मुकाबले खाना जल्दी ठंडा नहीं होता है। अंदर का तापमान भी बना रहता है। साथ ही मिट्टी के बर्तन में खाना बार-बार गर्म करने से पोषक तत्व भी बहुत अधिक खत्म नहीं होते हैं।
मिट्टी के बर्तन में खाने बनाने से पहले कुछ नियम और सावधानियां जरूर रखें -
- अगर आप मिट्टी के नए बर्तन में खाना बना रहे हैं तो सबसे पहले उसे रातभर पर पानी में डुबोकर निकाल कर उल्टा रख दें।
- अगले दिन में किसी बर्तन में पानी गर्म करके मिट्टी के बर्तन में डाल दें। ऐसा 4-5 दिन तक करें।
- इसके बाद ब्रश की सहायता से इसे हल्के हाथों से रगड़े ताकि अन्य जमा मिट्टी निकल जाएं। बाद में धोकर धूप में सुखा दें।
- इसके बाद बर्तन के चारों ओर अंदर तेल लगा दें और गैस पर धीमी आंच में गर्म करें।
- गैस पर करीब 1 घंटे के गर्म होने के बाद ही इसमें खाना बनाएं।
सावधानियां
- कभी भी मिट्टी के बर्तन को तेज आंच पर नहीं रखें।
- खाने को मध्यम आंच पर ही पकाएं।
- बार - बार आंच को तेज या धीमा नहीं करें। एक ही जैसी आंच रखें। इससे बर्तन क्रैक नहीं होंगे।
- खाना बनाते समय लकड़ी के चम्मच का इस्तेमाल करें।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / हम नमक की आपूर्ति के लिए या तो नमक के खदानों पर निर्भर है या फिर समुद्र और झीलों पर। दोनों ही स्रोतों से प्राप्त नमक हमारे भोजन को न केवल स्वादिष्ट बनाते हैं बल्कि हमारे शरीर में खनिजों की भी पूर्ति करते हैं। चट्टानी या पहाड़ी नमक जिसे आम बोलचाल की भाषा में सेंधा नमक भी बोला जाता है समुद्री नमक या साधारण नमक से गुणों में थोड़ा भिन्न होता है। अपने कुछ विशिष्ट गुणों की वजह से यह आयुर्वेदाचार्यों की पसंद तो होता ही है उपवास व्रत आदि में भी यह प्रयुक्त होता है। आइए जानते हैं सेंधा नमक क्या है तथा साधारण या समुद्री नमक क्या है और सेंधा नमक और साधारण नमक में क्या अंतर है....
सेंधा नमक क्या होता है
सेंधा नमक जिसे सैंधव नमक या लाहौरी नमक भी कहा जाता है क्रिस्टल के रूप में पाया जाने वाला एक खनिज है। यह पाकिस्तान के सिंधु नदी के आस पास के हिमालयी क्षेत्रों में चट्टानों के रूप में पाया जाता है। इस नमक का रंग सफ़ेद, हल्का गुलाबी या बैंगनी होता है जो प्रायः आयरन ऑक्साइड तथा कई अन्य खनिजों की उपस्थिति की वजह से होता है।
सेंधा नमक का आयुर्वेद में काफी महत्त्व दिया जाता है। माना जाता है कि उच्च रक्त चाप में इसका प्रयोग करने से कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। हिन्दू पर्व त्योहारों में इस नमक का प्रयोग खाने के नमक की जगह किया जाता है। हाजमे के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला काला नमक भी एक तरह का सेंधा नमक ही होता है।
सेंधा नमक पाकिस्तान के सिंध तथा पश्चिमी पंजाब के सिंधु नदी से लगे हिस्से खैबर पख्तूख्वा के कोहाट जिले से खनन किया जाता है। पश्चिम पंजाब में नमक कोह नामक पहाड़ी श्रृंखला में इसकी खानें हैं। इस इलाके में प्रसिद्ध खेवड़ा नमक की खान है।
सेंधा नमक को लाहौरी नमक हिमालियन साल्ट या हाइलाइट भी कहा जाता है। सेंधा नामक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड है। इसे तमिल में यिन्तुपू , तेलगु में रति अपूपु, गुजरती में सिंधु लुन और बंगाली में साइनधाव लवण कहा जाता है।
साधारण या समुद्री नमक किसे कहते हैं
समुद्री नमक या साधारण नमक समुद्र से प्राप्त किया जाता है। यह समुद्र जल के वाष्पीकरण के द्वारा प्राप्त किया जाता है। साधारण नमक का रंग प्रायः एकदम सफ़ेद होता है। किन्तु कई बार यह गुलाबी, हल्का काला या हरापन लिए हुए सफ़ेद होता है। नमक का रंग उसके निकलने वाले स्थान की प्रकृति पर निर्भर करता है। प्रायः ये रंग उसमे उपस्थित अन्य पदार्थों या अशुद्धियों की वजह से होता है। आमतौर पर घरों में यही नमक प्रयोग किया जाता है। साधारण नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड होता है।
साधारण नमक बनाने के लिए समुद्र, खारे पानी की झील आदि का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए छोटे छोटे किन्तु छिछले गड्ढों या खेत का प्रयोग किया जाता है। इन गड्ढों में समुद्र या झील के पानी को इक्कट्ठा कर लिया जाता है जिनका धुप द्वारा वाष्पोत्सर्जन होता है। वाष्पोत्सर्जन के बाद इन खेतों में नमक बच जाता है। जिन्हें बाद में निकाल लिया जाता है। इस तरह से प्राप्त नमक में काफी अशुद्धियाँ होती हैं जिसे प्रोसेसिंग करके शुद्ध नमक प्राप्त किया जाता है।
सेंधा नमक और साधारण या समुद्री नमक में क्या अंतर है,
जानिए सेहत के बड़े फायदे
सेंधा नमक हिमालय पर्वत की श्रेणियों में स्थित नमक की खानों से जो पाकिस्तान में स्थित है निकाला जाता है वहीँ साधारण या समुद्री नमक समुद्र या खारे पानी के झीलों से प्राप्त किया जाता है।
सेंधा नमक हलका गुलाबी रंग का होता है जो इसमें उपस्थित ऑक्साइड की उपस्थित की वजह से होता है वहीँ साधारण नमक गुलाबी, हल्का काला, हरापन लिए सफेद होता है। इसका यह रंग उसके निकाले जाने वाले स्थान की प्राकृत पर निर्भर करता है।
सेंधा नमक के क्रिस्टल एकदम शुष्क होते हैं परन्तु साधारण नमक के क्रिस्टल नम होते हैं।
सेंधा नमक सीधे चट्टानों से प्राप्त किया जाता है जबकि साधारण नमक को वाष्पोत्सर्जन द्वारा प्राप्त किया जाता है।
सेंधा नमक भोजन से नमी को अवशोषित कर लेता है पर साधारण नमक उतना शीघ्र नमी अवशोषित नहीं कर पाता।
सेंधा नमक नमी अवशोषण करने के बाद आसानी से पिघल जाता है पर साधारण नमक जल्दी मेल्ट नहीं करता। इसकी वजह यह है कि यह जल्दी नमी को अवशोषित नहीं करता।
सेंधा नमक हमारे शरीर में तुरंत अवशोषित हो जाता है। इसका कारण यह है कि इसे पाचन की आवश्यकता नहीं होती वहीँ साधारण नमक को पाचन की आवश्यकता होती है। अतः यह हमारे शरीर में अपेक्षाकृत देरी से समाहित होता है।
सेंधा नमक हमारे शरीर में पानी के लेवल को बनाये रखता है जबकि साधारण नमक हमारे शरीर को डिहाइड्रेट करता है।
ऐसा माना जाता है कि सेंधा नमक उच्च रक्तचाप में लाभकारी है जबकि उच्च रक्तचाप में साधारण नमक नुकसानदायक होता है।
हाजमे आदि बीमारी में सेंधा नमक लाभदायक होता है जबकि साधारण नमक नहीं।
उपवास और व्रत में सेंधा नमक का प्रयोग हो सकता है किन्तु उपवास या व्रत में साधारण नमक निषिद्ध है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / शीतलाष्टमी देशभर में अलग-अलग जगह पर शुक्ल और कृष्ण पक्ष की तिथियों पर मनाया जाता है। इस पर्व को बसोरा भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ है बासी भोजन। शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है। इसीलिए बाजी भोजन करने की परंपरा है। आओ जानते हैं माता शीतला के बारे में 10 रोचक बातें।
1. स्कंद पुराण अनुसार देवी शीतला चेचक जैसे रोग की देवी हैं, यह हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण किए होती हैं तथा गर्दभ की सवारी पर अभय मुद्रा में विराजमान हैं।
2. शीतला माता के संग ज्वरासुर ज्वर का दैत्य, हैजे की देवी, चौंसठ रोग, घेंटुकर्ण त्वचा रोग के देवता एवं रक्तवती देवी विराजमान होती हैं इनके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणुनाशक जल होता है।
3. कहते हैं यह शक्ति अवतार हैं और भगवान शिव की यह जीवनसंगिनी है।
4. पौराणिक कथा के अनुसार माता शीतला की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा से हुई थी।
5. स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना स्तोत्र को शीतलाष्टक के नाम से व्यक्त किया गया है। मान्यता है कि शीतलाष्टक स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शिव जी ने लोक कल्याण हेतु की थी।
6. गुड़गांव गुरुग्राम में शीतला माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। देश के सभी प्रदेशों से श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने आते हैं। यहां के शीतला माता मंदिर की कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है। महाभारत के समय में भारतवंशियों के कुल गुरु कृपाचार्य की बहन और महर्षि शरद्वान की पुत्री शीतला देवी (गुरु मां) के नाम से गुरु द्रोण की नगरी गुड़गांव में शीतला माता की पूजा होती है। लोगों की मान्यता है कि यहां पूजा करने से शरीर पर निकलने वाले दाने, जिन्हें स्थानीय बोलचाल में (माता) कहते हैं, नहीं निकलते।
7. देवलोक से धरती पर माता शीतला अपने साथ भगवान शिव के पसीने से बने ज्वरासुर को अपना साथी मानकर लाईं थी। तब उनके हाथों में दाल के दाने भी थे। उस समय के राजा विराट ने माता शीतला को अपने राज्य में रहने के लिए स्थान नहीं दिया तो माता क्रोधित हो गई। उस क्रोध की ज्वाला से राजा की प्रजा को लाल लाल दाने निकल आए और लोग गर्मी के मारे मरने लगे। तब राजा विराट ने माता के क्रोध को शांत करने के लिए ठंडा दूध और कच्ची लस्सी उन पर चढ़ाई। तभी से हर साल शीला अष्टमी पर लोग मां का आशीर्वाद पाने के लिए ठंडा भोजन माता को चढ़ाने लगे।
8. शीतला पूजन में शुद्धता का पूर्ण ध्यान रखा जाता है। इस विशिष्ट उपासना में शीतलाष्टमी के एक दिन पूर्व देवी को भोग लगाने के लिए बासी खाने का भोग बसौड़ा उपयोग में लाया जाता है।
9. हिंदू व्रतों में केवल शीतलाष्टमी का व्रत ही ऐसा है जिसमें बासी भोजन किया जाता है। इसका विस्तृत उल्लेख पुराणों में मिलता है। शीतला माता का मंदिर वटवृक्ष के समीप ही होता है। शीतला माता के पूजन के बाद वट का पूजन भी किया जाता है। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि जिस घर की महिलाएं शुद्ध मन से इस व्रत को करती है, उस परिवार को शीतला देवी धन-धान्य से पूर्णकर प्राकृतिक विपदाओं से दूर रखती हैं।
10. इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख देते हैं। फिर दूसरे दिन प्रात:काल महिलाओं द्वारा शीतला माता का पूजन करने के बाद घर के सब व्यक्ति बासी भोजन को खाते हैं। जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो उसे यह व्रत नहीं करना चाहिए।
धर्म संसार / शौर्यपथ / जीवन हो मर्यादा जैसा लेकिन धर्म और न्याय की रक्षार्थ श्री कृष्ण होना ही होता है। मानव मन भेद में जिता है। इसलिए सामान्यजनों के लिए श्रीराम और श्री कृष्ण के दांपत्य जीवन
1. भगवान श्रीराम सामाजिक नियमों का पालन करते हुए सिर्फ एक पत्नी व्रत ही धारण करते हैं जबकि कृषण की 8 पत्नियां थीं।
2. भगवान श्री राम ने स्वयंवर प्रतियोगिता में धनुष तोड़कर किया था सीता से स्वयंवर जबकि श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी लक्ष्मणा, जामवंती, सत्यभामा को छोड़कर बाकी का हरण किया था।
3. भगवान श्रीराम ने अपनी पत्नी के वियोग में 2 वर्ष बिताए जबकि श्रीकृष्ण को कभी पत्नी का वियोग नहीं हुआ। हालांकि वे जिंदगी भर श्री राधा के वियोग में रहे।
4. श्रीकृष्ण की विवाह परिस्थितियां भी भिन्न थीं। परन्तु श्रीराम ने मुरली और रास माधुर्य नहीं दिखाया। एक पत्नी व्रत रखा। श्रीराम ने सबके प्रेम निवेदन ठुकरा दिए।
5. श्रीराम ने सीताजी से प्रेम किया उन्हीं से विवाह भी, परन्तु श्री कृष्ण ने प्रेम तो राधा से किया लेकिन विवाह रुकमणी, सत्यभामा, जामवंती, कालिंदी, इत्यादि से किया।
6. श्रीराम का विवाह विधिवत रीती रिवाज से संपन्न हुआ परन्तु कृष्ण ने कुछ विवाह गन्धर्व रीती से किया था।
7. श्री राम को देखा जाए तो गृहस्थी का सुख उन्हें नहीं के बराबर ही मिला। इसके ठीक विपरीत कृष्ण को सदैव ही गृहस्थी का सुख मिला।
8. श्री राम का नाम उनकी पत्नी के साथ लिया जाता है, जबकि कृष्ण का नाम उनकी प्रेमिका राधा के साथ लिया जाता है।
9. श्रीराम की सीता श्रीकृष्ण की रुक्मिणी थी। अर्थात दोनों को ही माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है।
10. श्रीराम की सीता श्रीराम के पूर्व ही अपने अंतिम समय में धरती में समा गई थी जबकि श्रीकृष्ण की पत्नियां श्रीकृष्ण के अपने धाम जाने के बाद अगल-अलग परिस्थिति में मृत्यु को प्राप्त हुई थीं। कुछ तपस्या करने जंगल में चली गई और कुछ सती हो गई।
खानाखाजना / शौर्यपथ / गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए लोग सबसे ज्यादा नींबू पानी पीना पसंद करते हैं। भारतीय लोगों के लिए तेज धूप और गर्मी से राहत पाने के लिए यह एक बेहतरीन ड्रिंक माना जाता है। अगर आप भी नींबू पानी पीने के शौकीन हैं तो सिंपल नहीं इस बार ट्राई करें मसाला नींबू पानी। यकीन मानिए सेहत के साथ स्वाद भी मिलेगा डबल।
मसाला नींबू शिकंजी बनाने के लिए सामग्री-
-नींबू का रस-1 चम्मच
- धनिया पाउडर-1/2 चम्मच
- काली मिर्च पाउडर-1/2 चम्मच
- चीनी पाउडर-1 चम्मच
- चाट मसाला-1/2 चम्मच
- जीरा पाउडर- 1/2 चम्मच भूना हुआ
- आइस क्यूब-2
- सोडा वाटर- 1 कप
मसाला नींबू शिकंजी बनाने का तरीका-
मसाला नींबू शिकंजी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में धनिया पाउडर, काली मिर्च पाउडर आदि मसाले डालकर उन्हें अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस बर्तन में एक से दो गिलास पानी और सोडा वाटर डालकर अच्छे से मिक्स करें। आप चाहें तो इन सामग्री को मिक्सर में भी डालकर मिक्स कर सकते हैं। पानी मिक्स करने के बाद नींबू का रस डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। नींबू रस मिक्स करने के बाद मिश्रण को गिलास में डालें और ऊपर से चाट मसाला, नींबू स्लाइस से गार्निश करके पीने के लिए सर्व करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
