
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
*छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़ी उपलब्धि*
*भारत सरकार ने शहरी आवास योजना में उल्लेखनीय कार्य के लिए छत्तीसगढ़ को किया पुरस्कृत*
*नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मिला पुरस्कार*
* विगत चार वर्षो में मिले कई पुरस्कार *
रायपुर । शौर्यपथ । एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ की भाजपा प्रदेश सरकार पर प्रधानमंत्री आवास योजना गाड़ियों की आलोचना कर रही है और आंदोलन कर रही है वहीं केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किए गए कार्यों की सराहना की एवं छत्तीसगढ़ में द्वारा के जा रहे प्रयासों को उल्लेखनीय बताते हुए पुरस्कृत भी किया एवम भुपेश सरकार के प्रयासों की सराहना भी किया गया ।
बता दें कि विगत कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार प्रदेश सरकार को प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों के लिए घेरने की कोशिश कर रही है किंतु केंद्र द्वारा उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत होने पर विपक्षी दलों से एक और मुद्दा छिन गया । प्रदेश की भूपेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिस तरह से कार्य किया उस पर केंद्र सरकार खुश भी है और पुरस्कृत भी किया है ।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देशन में छत्तीसगढ़ राज्य ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़ी उपलब्धि हासिल की है । दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री मनोज जोशी ने छत्तीसगढ़ को आवास निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये पुरस्कृत किया है । हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हडको), नई दिल्ली के 53वें स्थापना दिवस के अवसर पर आवास निर्माण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य शहरी विकास अभिकरण छत्तीसगढ़ (State Urban Development Agency (SUDA) को सम्मानित तथा पुरस्कृत किया गया। दिल्ली में आयोजित इस समारोह में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ को दिया गया है, जिसे सूडा के सीईओ श्री सौमिल रंजन चौबे द्वारा ग्रहण किया गया।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सभी हितग्राहियों को आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए तत्त्पर है ।
उल्लेखनीय है कि नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिव कुमार डहरिया के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत सभी नगरीय निकायों में सभी के लिये आवास उपलब्ध कराने का कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है । वर्तमान में राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा )द्वारा राज्य के समस्त 33 जिलों के सभी 170 नगरीय निकायों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सबके लिए आवास मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है योजना अन्तर्गत अब तक 2 लाख 62 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति प्राप्त है, जिसमें अब तक 1 लाख 40 हजार घरों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, एवं शेष आवासों का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सबके लिए आवास मिशन के क्रियान्वयन में अद्यतन लगभग 42 सौ करोड़ का व्यय किया जा चुका है। छ.ग. शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग योजना अन्तर्गत समस्त स्वीकृत हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराये जाने हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस हेतु योजना अन्तर्गत निरंतर कार्यरत है।
1. आबादी भूमि पर निवासरत परिवारों को आवास निर्माण हेतु अधिकार प्रमाण-पत्र का वितरण एवं आवासीय पट्टों का नवीनीकरण।
2. योजना में बन रहे समूह आवासों को शासन द्वारा रेरा पंजीयन में छूट प्रदान की गई।
3. शासन द्वारा निर्माणाधीन आवासों के पर्यवेक्षण हेतु ख्याति प्राप्त सलाहकार संस्थाओं एवं वास्तुविदों की नियुक्ति की गई।
4. मोर मकान-मोर आस - योजना में समूह आवासों के माध्यम से किराये में निवासरत शहरी गरीबों को योजना में शामिल करने का अभूतपूर्व निर्णय शासन द्वारा लिया गया। इससे शहरी क्षेत्रों के लगभग 25 से 30 हज़ार आवासहीन किरायेदारों को आवास प्रदान किया जा रहा है।
5. नक्सलीय गतिविधियों से प्रभावित परिवारों को लाभ - राज्य द्वारा नगर पंचायत, अंतागढ़ में नक्सलीय गतिविधियों से प्रभावित 80 परिवारों के हितग्राहियों को सर्वसुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराया गया।
1. भारत सरकार द्वारा PMAY Awards 2019 अन्तर्गत Best State for Convergence with Other Missions में न.नि राजनांदगांव, नगर पंचायत अन्तागढ़ एवं नगर पंचायत गण्डई, को पुरस्कार प्रदान किया गया।
2. भारत सरकार द्वारा PMAY Awards 2019 अन्तर्गत नगर पालिका परिषद, डोंगरगढ़ को बेस्ट परफॉर्मिंग म्युनिसिपल काउंसिल श्रेणी का पुरस्कार प्रदान किया गया।
3. HUDCO Award 2019-2020 में न.नि. राजनांदगांव को हाउसिंग, अरबन पॉवर्टी एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर की श्रेणी पुरस्कार प्रदान किया गया।
4. भारत सरकार द्वारा Indian Urban Housing Conclave (IUHC) 2022 में PMAY Award, 2021 में छत्तीसगढ़ राज्य को बेस्ट कम्यूनिटी ओरिएन्टेड प्रोजेक्ट्स की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन का पुरस्कार प्रदान किया गया।
5. भारत सरकार द्वारा Indian Urban Housing Conclave (IUHC), 2022 में PMAY Awards, 2021 में नगर पंचायत पाटन को बेस्ट परफॉर्मिंग नगर पंचायत की श्रेणी में पूरे भारत में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
मुम्बई। शौर्यपथ। अजित पवार के महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गठबंधन में शामिल होने की चर्चा के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता (एनसीपी) चीफ शरद पवार ने पार्टी में टूट की अटकलों को लेकर रविवार (23 अप्रैल) को बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी में इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई है. अगर कोई (अजित पवार) एनसीपी से अलग होने की कोशिश कर रहा है तो यह उनकी रणनीति है.
शरद ने कहा कि अगर हमें इसपर कोई स्टैंड लेना है तो हम इस पर कड़ा रुख अपनाएंगे. इस मामले पर कुछ भी बोलना सही नहीं है क्यों इस बारे में पार्टी में कोई भी चर्चा नहीं की गई है. इससे पहले रविवार (23 अप्रैल) को राकांपा नेता सुप्रिया सुले ने अजित पवार के बयान का समर्थन किया था कि वह राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार हैं और कहा कि राजनीति में महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है.
सुप्रिया ने कहा था कि राजनीति में महत्वाकांक्षा या सपना होना गलत नहीं है, सबके पास होता है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसके बारे में खुलकर कहने में कुछ गलत है. सुले ने एएनआई को बताया कि वास्तव में, वह अपनी महत्वाकांक्षा के बारे में बात करने में बहुत ईमानदार हैं. इससे पहले एक इंटरव्यू में 2024 के चुनाव में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की उनकी आकांक्षा के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी नेता अजित पवार ने कहा था, ‘‘2024 क्यों, हम अभी भी मुख्यमंत्री पद पर दावा करने को तैयार हैं.
सुप्रिया सुले से यह पूछे जाने पर कि अजित पवार के एनसीपी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अटकलें क्यों लगाई जा रही हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि मुझे यह बहुत मजेदार लगाता है. सुले ने कहा कि अभी गपशप चल रही है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी किसान मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है. मीडिया में अजित पवार के बारे में अफवाहों और अटकलों के बजाय इन मुद्दों को एजेंडे में ऊपर होना चाहिए.
नई दिल्ली। शौर्यपथ। कट्टर उपदेशक और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को आज मोगा जिले से गिरफ्तार कर लिया गया. 36 दिन से फरार चल रहा अमृतपाल आज पुलिस के हत्थे चढ़ गया. अमृतपाल सिंह ने गिरफ्ताप होने से पहले मोगा जिले के रोडे गांव में एक गुरुद्वारे में एक सभा को संबोधित किया था. अमृतपाल सिंह कथित तौर पर युवाओं को “बंदूक संस्कृति” की ओर ले जाना चाहता था और पंजाब को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रहा था.
बता दें कि मोगा खालिस्तानी अलगाववादी और आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का पैतृक गांव है। अमृतपाल सिंह उसका अनुयायी होने का दावा करता रहता है और उसके समर्थ उसे “भिंडरावाले 2.0” के रूप में मानते हैं. मोगा स्थित रोडेवाल गुरुद्वारा के ग्रंथी ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले आज सुबह अमृतपाल ने गुरुद्वारे के अंदर मौजूद लोगों को संबोधित भी किया था. न्यूज एजेंसी एएनआई से फोन पर बात करते हुए साहिब ज्ञानी जसबिर सिंह ने दावा किया कि अमृतपाल रोडेवाल गुरुद्वारे में शनिवार की रात को आया था. उसने खुद पुलिस को अपने ठिकाने की सूचना दी और बताया कि आज सुबह 7 बजे वो आत्मसमर्पण करेगा.
नई दिल्ली । शौर्यपथ ।
भारतीय सेना के इतिहास का वह काला दिन जब एक साथ भारतीय सेना के 40 जवान शहीद हुए 2019 को हुई इस घटना ने सारे देश को झंझार कर रख दिया 300 किलो आरडीएक्स के विस्फोट से भारत के 40 जवान शहीद हो गए घटना के 4 साल के बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मोदी सरकार पर बड़ा सवाल दाग दिया जिसके बाद पुलवामा कांड के जांच और जिम्मेदारी को लेकर विपक्ष के द्वारा लगातार सवाल दागे जा रहे हैं वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने भी मामले की जांच की बात कही वही अब पूर्व सेना प्रमुख जनरल शंकर राय ने भी मामले की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर होने की बात कही पूर्व सेना प्रमुख जनरल शंकर राय चौधरी ने निजी न्यूज़ चैनल को दिए अपने बयान में कई गंभीर आरोप लगाया और मामले के बारे में अपनी बात रखी
जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से पुलवामा हमले को लेकर मोदी सरकार पर लगाए आरोपों के संबंध में पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि पुलवामा में जानमाल के नुकसान की प्राथमिक ज़िम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा सलाह दी जाती है। अभी तक पुलवामा हमले को लेकर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को देशद्रोही और पाकिस्तान समर्थक करार दिया जाता रहा है। अब एक बार पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और उनके बाद पूर्व सेना प्रमुख के बयानों से बीजेपी की बेचैनी बढ़नी स्वाभाविक है।
भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ जवानों की मौत की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा सलाह दी जाती है। द टेलीग्राफ से बात करते हुए 18वें थल सेनाध्यक्ष रॉयचौधरी, द वायर के साथ एक साक्षात्कार में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खुलासे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे ।
द वायर को दिए गए इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने कहा था कि 2019 का पुलवामा हमला, जिसमें विस्फोटकों से लदी एक कार के सीआरपीएफ के काफिले में घुस जाने के बाद 40 जवान शहीद हो गए थे, सरकार की अक्षमता और लापरवाही का परिणाम था। मलिक ने द वायर को बताया था कि सीआरपीएफ ने जम्मू से श्रीनगर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने के बजाय विमान से यात्रा करने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय (तब राजनाथ सिंह के नेतृत्व में था) ने उन्हें विमान प्रदान नहीं किया। भाजपा नेता सत्यपाल मलिक ने कहा था कि अगर उनके अनुरोध को मान लिया जाता तो मौतों को रोका जा सकता था।
जनरल रॉयचौधरी ने द टेलीग्राफ से कहा कि पुलवामा में जानमाल के नुकसान की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) द्वारा सलाह दी जाती है. यह एक धक्का था। उन्होंने कहा कि हमले के पीछे खुफिया विफलता के लिए एनएसए अजीत डोभाल को भी उनके हिस्से का दोष मिलना चाहिए।
मलिक ने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने उन विफलताओं के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया, जिनके चलते हमला हुआ था तो मोदी ने उन्हें 'चुप रहने' के लिए कहा. उन्होंने बताया था कि एनएसए डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने को कहा था। मलिक ने कहा था कि हमले में इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थ आरडीएक्स पाकिस्तान से आया था, तथ्य यह है कि एक कार जो हमले से पहले कई दिनों तक कश्मीर में 'घूमती रही और पता ही नहीं चला, वह एक खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता थी।
मलिक की बातों से सहमति व्यक्त करते हुए जनरल रॉय चौधरी ने अखबार को बताया कि 2,500 से अधिक कर्मचारियों को ले जा रहे 78 वाहनों के काफिले को ऐसे राजमार्ग से नहीं जाना चाहिए था, जो पाकिस्तान सीमा के इतने करीब हो । जनरल रॉयचौधरी ने इससे सहमति जताई। टेलीग्राफ के अनुसार उन्होंने कहा कि जम्मू और श्रीनगर के बीच अंतरराज्यीय राजमार्ग पर चल रहे सीआरपीएफ के काफिले पर पुलवामा में मुजाहिदीन के एक समूह ने घात लगाकर हमला किया था। अगर सैनिकों ने हवाई यात्रा की होती, तो जानमाल के नुकसान को टाला जा सकता था।
जनरल शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले सभी बड़े वाहनों और काफिलों पर हमेशा हमले का जोखिम रहता है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में पुलवामा आतंकी हमला हुआ था, वह हमेशा एक बहुत ही 'जोखिम भरा क्षेत्र' रहा है। उन्होंने द टेलीग्राफ को बताया कि जम्मू में सांबा (सतवारी हवाईअड्डे से 31 किमी) के साथ जाने वाली सड़क घुसपैठ के कारण हमेशा असुरक्षित रहती है, जो टनलों के जरिये होती है।
1991 और 1992 के बीच जम्मू कश्मीर में 16 कोर की कमान संभालने वाले जनरल ने कहा कि अंतरराज्यीय राजमार्ग पर आप जितना अधिक ट्रैफिक ले जाते हैं, आप उन्हें जोखिम में डालते हैं, क्योंकि सीमा पाकिस्तान से बहुत दूर नहीं है। जनरल रॉयचौधरी भी मलिक के इस बयान से सहमत थे कि आतंकी हमला खुफिया तंत्र की विफलता का परिणाम था।
जनरल रॉयचौधरी ने टेलीग्राफ से कहा कि यह एक गलती है जिससे सरकार अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि सैनिकों को विमान से ले जाना चाहिए था, नागरिक उड्डयन विभाग, वायु सेना या बीएसएफ के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि विफलता का कोई दावेदार नहीं होता है।
14 फरवरी 2019 को, जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को ले जाने वाले सीआरपीएफ के वाहनों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 40 भारतीय सुरक्षा कर्मियों की जान गयी थी । यह हमला जम्मू और कश्मीर के पुलवामा ज़िले के अवन्तिपोरा के निकट लेथपोरा इलाके में हुआ था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित इस्लामिक आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने ली। हालांकि, पाकिस्तान ने हमले की निंदा की और जिम्मेदारी से इनकार किया ।
नई दिल्ली । शौर्यपथ ।
जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल मलिक के बयान के बाद भारत की राजनीति गरमा गई है वहीं विपक्षियों द्वारा लगातार आरोप लगाते हुए पुलवामा कांड के निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए केंद्र की मोदी सरकार को भी घेर रही है ऐसे में भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व राज्यपाल के दावों की निष्पक्ष जांच की बात कह कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय आरंभ कर दिया ।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा पुलवामा आतंकी हमले के संबंध में कही गई बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।
मलिक ने हाल ही में दावा किया था कि 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे, उस समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में उन्होंने कुछ खामियों की ओर इशारा किया था, लेकिन उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया था।
स्वामी ने यहां कानून के छात्रों के एक सम्मेलन से इतर कहा, मैं 1977 से सत्यपाल मलिक को जानता हूं, वह बहुत वरिष्ठ नेता हैं। वह पूर्व सांसद, केंद्रीय मंत्री और तीन राज्यों केराज्यपाल भी रहे। उनकी राजनीतिक हैसियत बहुत ऊंची रही है। मैंने उन्हें कभी झूठ बोलते नहीं सुना। इसलिए केंद्र को इस पर ध्यान देना चाहिए कि उन्होंने पुलवामा हमले के बारे में क्या कहा।
स्वामी ने कहा, जांच एजेंसियां उनसे उनके दावों के सबूत के बारे में सम्मानपूर्वक पूछ सकती हैं, ताकि वे मामले में कार्रवाई कर सकें। उन्हें कोई खतरा नहीं होना चाहिए या उनके घर पर छापेमारी नहीं होनी चाहिए। पुलवामा हमला एक बहुत ही दर्दनाक घटना थी और यदि हमारी ओर से हुई कुछ चूक के कारण यह हादसा हुआ, तो इस मामले में कार्रवाई की जानी चाहिए। इसलिए उन्होंने जो कुछ भी कहा है, उस पर गौर करने की जरूरत है।
स्वामी ने राज्य में शराबबंदी का भी समर्थन करते हुए कहा कि सिर्फ सिगरेट पीने से कैंसर होता है, मगर शराब पीने से दिमाग खराब हो जाता है। उन्होंने शराब पीने वालों को देशद्रोही करार दिया।
दुर्योगवश, जब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाया है, तब से राज्य में अवैध शराब के सेवन से बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
स्वामी ने कहा, मैंने अपने पूरे जीवन में कभी भी सिगरेट या शराब को छुआ नहीं है। लोगों को शराब पीना छोड़ देना चाहिए और रसम पीना चाहिए। लोगों के लिए यह मानना गलत है कि शराब पुरुष होने का प्रतीक है। शराब पीना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर स्वामी ने कहा, नीतीश कुमार और एनडीए में एक ही डीएनए है। मैं सोच रहा हूं कि क्या वह एनडीए में वापस आएंगे। मुझसे मिलने के बाद वह अपना विचार बदल सकते हैं।
सत्यपाल मलिक पूर्व राज्यपाल जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर लगाए गए आरोपों के बाद आखिरकार देश के गृह मंत्री अमित शाह को सामने आकर जवाब देना पड़ा श्री मंत्री अमित शाह ने मलिक के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टे उन पर ही सवाल दाग दिए ।
जम्मू कश्मीर के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने 2019 के पुलवामा आतंकी हमले, जम्मू कश्मीर में एक ग्रुप बीमा योजना और एक प्रोजेक्ट के बारे में सनसनीखेज आरोप जड़ दिए जिसके बाद वह खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। मलिक ने ये आरोप एक सार्वजनिक सभा और एक यूट्यूब इंटरव्यू में लगाये थे जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमले किये हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने सत्यपाल मलिक और उनके समर्थन में बयान दे रहे विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा है। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब अमित शाह से पूछा गया कि सरकार के खिलाफ बयान देने के बाद क्या सीबीआई ने मलिक को समन भेजा है, तो शाह ने कहा, ''ऐसा नहीं है। मेरी जो जानकारी है, उसके हिसाब से उन्हें दूसरी-तीसरी बार बुलाया गया है। जांच चल रही है। हमारे खिलाफ बोलने की वजह से उन्हें बुलाया गया है, ऐसा नहीं है।''
अमित शाह ने साथ में ये भी कहा - लेकिन आपको यह भी पूछना चाहिए कि हमसे अलग होने के बाद ही सब बातें क्यों याद आती हैं? आत्मा तब जागृत क्यों नहीं होती, जब सत्ता में बैठे होते हैं? इसकी क्रेडिबिलिटी के बारे में सोचना चाहिए। जब आपने जो कहा, वह सब कुछ सही है तो जब आप गवर्नर थे, तब क्यों चुप रहे?
दरअसल सत्यपाल मलिक ने दो आरोप लगाये थे - एक तो पुलवामा कांड के बारे में था कि सीआरपीएफ को जवानों के लिए एयरलिफ्ट की सुविधा मांगने के बावजूद नहीं दी गई और इस हमले के पीछे सुरक्षा खामियां थी। दूसरा आरोप था कि उन्हें जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान दो फाइलों को निपटाने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। ये दोनों आरोप मलिक ने कई साल बाद जड़े हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''मैं इतना जरूर देश की जनता को कहना चाहता हूं कि भाजपा की सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे छुपाना पड़े। कोई अपने निहित राजनीतिक स्वार्थ के लिए हमसे अलग होकर कुछ कहता है तो उसका मूल्यांकन जनता और मीडिया को करना चाहिए। आप जब सत्ता में नहीं हैं, हमसे अलग हो गए हैं और जब आप आरोप लगाते हैं तो आरोप की वैल्यू और उसका मूल्यांकन दोनों करना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''हमारी पार्टी में वे लंबे समय से काम कर रहे थे। वे राजनाथ सिंह जी की टीम में थे। मेरे साथ भी रहे। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि वे लंबे अरसे से काम कर रहे थे। समय-समय पर कोई अपना रूप बदलता है तो इसमें क्या कर सकते हैं? जनता को उन्हें पहचानना चाहिए।''
सत्यपाल मलिक के मामले में जातीय राजनीति भी गरमा गई है। चूंकि मलिक अपने को किसान व जाट नेता मानते हैं सो जाट समुदाय और खाप पंचायतों ने उनका समर्थन कर दिया है। ये लोग दिल्ली में पहुंच कर अपना समर्थन जताने के लिए एक सार्वजनिक पार्क में जमावड़ा करने लगे जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटा दिया कि जमावड़े की कोई इजाजत नहीं ली गई थी। इसके बाद मलिक खुद थाने पहुंच गए। पुलिस ने कहा है कि मलिक को थाने बुलाया ही नहीं गया था, वो अपने समर्थकों के साथ खुद थाने चले आये।
नई दिल्ली । शौर्यपथ ।
2019 में हुए पुलवामा कांड पर तात्कालिक राज्यपाल मालिक का बयान इन दिनों भारत की राजनीतिक फिजा में भूचाल ला दिया है । सोशल मीडिया पर आज सत्यपाल मलिक ट्रेंड कर रहा है, जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर एक बड़ा खुलासा किया है। बिहार, जम्मू.कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल और पीएम मोदी के बेहद करीबी रह चुके सत्यपाल मलिक के पुलवामा कांड पर बड़े खुलासे से राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गयी हैं।
‘मोदी सरनेम’ कंट्रोवर्सी के बाद अपनी सांसदी खोने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी सत्यपाल मलिक के बयान के हवाले से कहते हैं, ‘ प्रधानमंत्री जी को करप्शन से कोई बहुत नफरत नहीं है। सत्यपाल मलिक ने हाल ही एक इंटरव्यू में सनसनीखेज दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी को करप्शन से नफरत नहीं है।’
गौरतलब है कि पूर्ण राज्य के तौर पर जम्मू कश्मीर के आखिरी राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक के कार्यकाल में ही वहां से आर्टिकल 370 खत्म किया गया था और राज्य को दो हिस्सों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांटकर मोदी सरकार ने केंद्रशासित प्रदेश बना दिया था ।
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक यू ट्यूब चैनल को दिये इंटरव्यू में दावा किया है, ‘प्रधानमंत्री जी को करप्शन से कोई बहुत नफरत नहीं है। उसका बड़ा सबूत है कि मैंने गोवा में उनसे शिकायत की कि ये करप्शन हो रहा है, लो लेवल करप्शन हो रहा है। तीन दिन बाद उन्होंने खुद मुझे फोन करके कहा कि सत्यपाल भाई आपकी जानकारी गलत है।’ मैंने पूछा, ‘आपने किससे मालूम किया, उन्होंने कहा कि फलां आदमी से मालूम किया।’ मैंने कहा कि ये आदमी तो खुद चीफ मिनिस्टर के घर में बैठकर पैसे ले रहा है। उसके एक हफ्ते बाद मेरा ट्रांसफर कर दिया गया तो मैं कैसे मान लूं कि प्रधानमंत्री मोदी को करप्शन से दिक्कत है।
सत्यपाल मलिक के जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहते 2019 में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर बड़े आतंकी हमले पर सत्यपाल मलिक कहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी को जम्मू-कश्मीर के बारे में जानकारी नहीं है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 जवानों के शहीद होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें चुप रहने को कहा था।
सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी पुलवामा हमले पर चुपचाप रहने की हिदायत दी थी। जाहिर तौर पर इसका मकसद चुनावों में सरकार और बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए पुलवामा हमले का सारा ठीकरा पाकिस्तान पर फोड़ना था, जिसका अहसास मुझे बाद में हआ। मलिक की मानें तो पाकिस्तान से 300 किलो आरडीएक्स लेकर गाड़ी जम्मू-कश्मीर के गांवों में 10-15 दिन घूमती रही और किसी को पता ही नहीं चला। आखिर यह खुफिया विभाग की बड़ी नाकामयाबी नहीं है तो क्या है।
सत्यपाल मलिक के मुताबिक, ’सीआरपीएफ ने जवानों को ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट मांगा था, लेकिन उन्हें नहीं दिया गया। हमले के दिन ही मैंने प्रधानमंत्री से कहा था कि ये हमारी गलती से हुआ था। अगर हम एयरक्राफ्ट दे देते तो ये न होता। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे हिदायत देते हुए कहा था तुम अभी चुप रहो।’
सत्यपाल मलिक ने न सिर्फ मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल बल्कि भाजपा नेता राम माधव पर भी गंभीर आरोप जड़ते हुए कहा, ‘राम माधव ने एक पनबिजली योजना और रिलायंस इंश्योरेंस स्कीम की मंजूरी के लिए उनसे संपर्क किया था, लेकिन मैंने साफ साफ कह दिया था कि मैं गलत काम नहीं करूंगा। हालांकि राम माधव ने सत्यपाल मलिक के इस दावे को झूठा बताते हुए उनपर मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है।
रायपुर । शौर्यपथ । प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के द्वारा पुलवामा हमले के बारे में खुलासे के बाद सीबीआई द्वारा उनको सम्मन भेजना इस बात का सबूत है कि जो भी व्यक्ति मोदी सरकार के खिलाफ बोलेगा चाहे कितनी भी प्रमाणिक बात बोलेगा उसके खिलाफ मोदी सरकार किसी भी स्तर तक जाकर प्रताड़ना की कार्यवाही करेगी। सारी केंद्रीय जांच एजेंसियों को उसके पीछे लगा दिया जायेगा। यह भाजपा, आरएसएस और मोदी सरकार का फासीवादी चरित्र है जो अपने खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज को सुनना पसंद नहीं करते है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पुलवामा पर सत्यपाल मलिक ने जो खुलासा किया है उसके बारे में पूरे देश को इंतजार था कि शायद सरकार की तरफ से इस मामले में कोई सफाई आयेगी तथ्य रखे जायेंगे लेकिन मोदी सरकार बौखला गयी और वह अपने ही पुराने सहयोगी को प्रताड़ित करने में लग गयी है। देश की जनता जानना चाहती है कि मलिक के खुलासे पर सरकार का क्या पक्ष है? यह देश की जनता जानना चाहती है।
पुलवामा हमले में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के द्वारा उठाये गये सवालों का जवाब मोदी सरकार को देना चाहिये। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश की जनता जानना चाहती है कि पुलवामा का सच क्या है? पुलवामा हमले के तुरंत बाद जब राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री से इस मसले पर सवाल खड़ा किया तथा जांच को कहा तो उनसे चुप रहने को क्यों कहा गया? तत्कालीन राज्यपाल मलिक दावा कर रहे कि सीआरपीएफ ने अपने जवानों को ले जाने जहाज की मांग किया था लेकिन गृह मंत्रालय ने मना कर दिया था ऐसा क्यों हुआ? देश जानना चाहता है। सत्यपाल मलिक यह भी कह रहे कि उन्होंने प्रधानमंत्री से पुलवामा हमले के तुरंत बाद जिम कार्बेट पार्क में फोन पर बात किया था। उन्होंने इस मामले में चुप रहने किसी से भी बात नहीं करने को कहा था प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों कहा था? इसके बारे में भी देश को बताना चाहिये।
मुम्बई. शौर्यपथ. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार शुक्रवार को पार्टी की मुंबई इकाई की एक बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनकी भावी रणनीति को लेकर लगाई जा रही अटकलों का बाजार एक बार फिर गर्म हो गया. इतना ही नहीं, कर्नाटक चुनाव के लिए NCP द्वारा जारी पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से भी अजित पवार का नाम नदारद है.
गौरतलब है कि शुक्रवार को पुणे में पत्रकारों से बातचीत में पवार ने कहा था कि वह NCP की बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उन्हें उसी समय होने वाले कुछ अन्य कार्यक्रमों में उपस्थित रहना होगा, और उनके इस कदम को लेकर ज्यादा सोच-विचार नहीं किया जाना चाहिए.
एक महीने पहले बन गई थी बैठक की योजना- क्रास्टो
मुंबई में दिनभर चली पार्टी की बैठक को NCP सुप्रीमो शरद पवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं-प्रफुल्ल पटेल, जितेंद्र अवहाद, सुप्रिया सुले, छगन भुजबल और प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने संबोधित किया. बैठक में अजित पवार की अनुपस्थिति के संबंध में NCP के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि इस बैठक की योजना एक महीने पहले बन गई थी.
उन्होंने कहा, ‘‘अजित पवार ने पुणे में कई कार्यक्रमों का न्योता स्वीकार कर लिया था. उन्होंने (बैठक में) शामिल होने में असमर्थता जताई है. सभी नेताओं का अपना-अपना कार्यक्रम होता है. सिर्फ इसलिए कि वह एक कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो पाए, इसका मतलब यह नहीं है कि वह पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं. वह इस सप्ताह की शुरुआत में मुंबई में हुई NCP की इफ्तार पार्टी में शरद पवार के साथ मौजूद थे.’’
वहीं, NCP ने शुक्रवार को कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए अपने 10 उम्मीदवारों और पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची जारी की. स्टार प्रचारकों में शरद पवार, उनकी बेटी व सांसद सुप्रिया सुले सहित 15 लोगों का नाम शामिल है, लेकिन उसमें पार्टी सुप्रीमो के भतीजे अजित पवार को जगह नहीं दी गई है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
