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नई दिल्ली / एजेंसी / देश मे पिछले 24 घंटों में 43 हज़ार से ज्यादा कोरोना केस रिपोर्ट हुए है, उसमें से 32 हज़ार के करीब केस केरल राज्य से हैं. पिछले हफ्ते सामने आए केस में 68.59% केरल से रिपोर्ट हुए थे. यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दी. उन्होंने कहा कि हम अभी दूसरी लहर के बीच है, अभी ये खत्म नहीं हुई है. देश के 38 जिलों में अभी भी 100 से ज्यादा केस रिपोर्ट हो रहे हैं, 30 जून को ऐसे 108 जिले थे. ऐसी जगहों पर जहां केस आ रहे है . उसमें गिरावट आई है.
राजेश भूषण ने कहा कि एक्टिव केस बीच में कम हुए थे, फिर बढ़े लेकन अब घट रहे हैं.देश मे एक ही राज्य है केरल जहां कुल एक्टिव केस का 61% है और एक लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं जबकि 50 हज़ार से एक लाख के बीच एक्टिव केस सिर्फ एक राज्य, महाराष्ट्र में हैं.10 हज़ार से 50 हज़ार के बीच एक्टिव केस इस समय 4 राज्य में है और 10 हज़ार से कम एक्टिव केस 30 राज्यों में हैं. उन्होंने बताया कि 35 जिलों में वीकली पॉजिटिविटी रेट 10% ज्यादा है. वैक्सीनेशन को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि 18 साल से ज्यादा उम्र के 58% लोगों को पहली डोज दी जा चुकी है जबकि 18% लोगों को दोनो डोज दी जा चुकी है.आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया कि मृत्य दर को रोकने में वैक्सीन की एक डोज की प्रभावशीलता 96.6% तक है जो दो डोज के बाद 97.5% तक बढ़ जाती है.
देश की बात करें तो भारत में पिछले 24 घंटे में नए COVID-19 केसों में 14.2 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. पिछले 24 घंटे में 43, 263 नए केस सामने आए जबकि 338 लोगों की मौत हुई. देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 3,93,614 हो गई है. वहीं रिकवरी रेट की बात करें तो वह 97.48% पर बनी हुई है. पिछले 24 घंटे में 40,567 लोग कोरोना से ठीक हुए. जबकि कुल की बात करें तो
3,23,04,618 लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं. वीकली पोजिटिविटी रेट 2.43% है जो कि पिछले 76 दिनों से 3 प्रतिशत से नीचे है. वहीं डेली पोजिटिविटी रेट 2.38% है जो कि पिछले 10 दिनों से 3 प्रतिशत से नीचे है. पिछले 24 घंटे में 8651701 वैक्सीनेशन हुआ. वहीं अब तक कुल 71.65 करोड़ वैक्सीन की डोज लग चुकी हैं.
नई दिल्ली / एजेंसी / सरकार ने गुरुवार को कहा कि आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है. कोरोना महामारी को देखते हुए इससे पहले मई में इसे 30 सितंबर तक बढ़ाया गया था. वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि सीबीडीटी ने वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न और ऑडिट की विभिन्न रिपोर्ट दाखिल करने की नियत तारीखें बढ़ा दी है. आयकर अधिनियम, 1961 ("अधिनियम") के तहत निर्धारण वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न और ऑडिट की विभिन्न रिपोर्टों को दाखिल करने में करदाताओं और अन्य हितधारकों द्वारा रिपोर्ट की गई कठिनाइयों पर विचार करते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( सीबीडीटी) ने वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न और ऑडिट की विभिन्न रिपोर्टों को दाखिल करने की नियत तारीखों को और आगे बढ़ाने का फैसला किया है.
नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज गुरुवार को केंद्र की योजनाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देशवासियों को 4 एयरपोर्ट की सौगात देने की योजना है. केंद्र सरकार की ओर से इन एयरपोर्ट की आधारशिला जल्द ही रखी जाएगी. सिंधिया ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 100 दिन की योजना तैयार की है.
उन्होंने कहा कि 100 दिन की योजना में तीन प्राथमिकताएं हैं. इन प्रथामिकताओ में संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर), नीतिगत बदलाव/ परिवर्तन (पॉलिसी), रिफॉर्म्स हैं. अलग-अलग क्षेत्र के लिए अलग-अलग एडवाइजरी ग्रुप बनाया गया है. इस योजना को पूरा करने के लिए 30 अगस्त से 30 नवंबर की अवधि तय की गई है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 255 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट तैयार होगा. इस एयरपोर्ट पर एयरबस 321 और बोइंग 737 की लैंडिंग की जा सकेगी. उत्तराखंड के देहरादून में एयरपोर्ट में 457 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इस योजना के पूरे होने पर देहरादून एयरपोर्ट पर 1800 यात्रियों की आवाजाही हो सकेगी. ऐसे ही त्रिपुरा में अगरतला एयरपोर्ट की 490 करोड़ की लागत से क्षमता बढ़ाई जाएगी. जिसके बाद इस एयरपोर्ट पर 1200 यात्री प्रति घंटा आवाजाही कर सकेंगे. ऐसे ही जेवर एयरपोर्ट 30,000 करोड़ रुपये की लागत से यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं देगा.
नई दिल्ली / एजेंसी / साल 2022 में यूपी समेत पांच राज्यों में चुनावों के लिए EVM और VVPAT को रिलीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला सिर्फ चुनाव आयोग तक सीमित नहीं है बल्कि और भी मुद्दे हैं. इसलिए हम अपील दायर करने की समय सीमा पर फिर से विचार करेंगे और सारी याचिकाओं को अगले हफ्ते सूचीबद्ध करेंगे. दरअसल, 2022 में यूपी समेत पांच राज्यों में चुनावों के लिए EVM और VVPAT को रिलीज करने के मुद्दे पर चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. सुप्रीम कोर्ट से छह राज्यों में हो चुके विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव याचिकाएं दायर करने की समयसीमा तय करने की गुहार लगाई गई है. आयोग ने इस्तेमाल हुए ईवीएम व वीवीपीएटी को रिलीज करने की मांग की है.
चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अपनी उस याचिका पर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी जिसमें आरोप लगाया कि छह राज्यों के विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल ईवीएम और वीवीपीएटी अप्रयुक्त पड़े हैं क्योंकि कोविड-19 के कारण चुनाव याचिका समेत अन्य याचिकाओं के दायर करने की समयसीमा को बढाने के कारण उन्हें संरक्षित रखा गया है. आयोग की ओर से पेश वकील वकील विकास सिंह ने पीठ से कहा था कि बड़ी संख्या में ईवीएम) और वीवीपीएटी को अभी भी संरक्षित कर रखा गया है और इन सभी को रिलीज करने की आवश्यकता है. उन्होंने मांग की कि असम, पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से संबंधित चुनाव याचिकाएं को दाखिल करने के लिए एक समयसीमा तय की जाए. दरअसल, चुनाव आयोग ने कहा है कि अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में आयोग की याचिका पर जल्द सुनवाई जरूरी है.
दरअसल, कोरोना की दसरी लहर की शुरुआत में CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने गत 27 अप्रैल, को चुनाव याचिकाओं समेत अन्य याचिकाएं दायर करने की वैधानिक अवधि में ढील दी थी. नतीजन अब भी कोई उम्मीदवार चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका दायर कर सकता है. यही वजह है कि चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपीएटी को सुरक्षित रखना है. कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल लाखों ईवीएम और वीवीपीएटी ब्लॉक पड़े हैं और इनका इस्तेमाल आने वाले विधानसभा चुनावों में नहीं किया जा सकता है.
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से असम, केरल, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से संबंधित चुनाव याचिकाएं दायर करने के लिए समय सीमा तय करने का आग्रह किया है. यह भारत के चुनाव आयोग के लिए चिंता का कारण है क्योंकि यह अगले साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने वाला है गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश की विधानसभाओं का कार्यकाल 2022 में समाप्त हो रहा है. आवेदन में, यह बताया गया है कि चुनावों के दौरान उचित शारीरिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने चुनावों में एक मतदान केंद्र में मतदाताओं की संख्या को 1000 मतदाताओं तक सीमित कर दिया है. इसलिए उन मतदान केंद्रों में अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए गए जहां मतदाताओं की संख्या 1000 से अधिक थे. इसलिए, आगामी चुनावों में लगभग 37.73 प्रतिशत अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाने की आवश्यकता होगी.
मुंबई/एजेंसी /कोरोना महामारी के बाद पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लास बच्चों के लिए घातक साबित हो रही है. ऑनलाइन क्लास से बढ़े स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में आंख की बीमारी बढ़ रही है. ऑनलाइन क्लास, मोबाइल, टीवी से बच्चों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है और बच्चे ‘मायोपिया' के शिकार हो रहे हैं. मायोपिया आंखों का ऐसा दोष है जिसमें निकट की चीजें तो साफ-साफ दिखतीं हैं, लेकिन दूर की रोशनी धुंधली हो जाती है. चाहे बच्चे हों या बड़ें, सभी का अधिकांश समय ऑनलाइन बीत रहा है.
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले 12 साल के छात्र आदी चंद्रा ने बताया, ''पैंडेमिक के पहले मैं करीब 2 घंटा स्क्रीन पर रहता था, कोविड में ऑनलाइन क्लासेस शुरू होने के बाद करीब 12 घंटे स्क्रीन पर रहता था. जिससे मेरी आंखें दुखती थीं, सर दुखता था, चक्कर आता था, उल्टी जैसा फील होता था.''
फोर्टिस हीरानंदानी अस्पताल में के डॉ. हर्षवर्धन घोरपड़े ने बताया, ''बच्चों में ड्राई आइज़ बहुत कॉमन हो चुका है. आइ इन्फ़ेक्शन भी कॉमन हो चुका है. सबसे जरूरी है मयोपिया माइनस पॉवर बढ़ना. आगे चलकर ये बड़ा प्रॉब्लम हो सकता है, बहुत सारे बच्चे माईनस 1-2 से लेकर सीधे माइनस 4-5 तक जा रहे हैं और सबसे कॉमन एज ग्रुप है 6-10 साल. ये ग्रोइंग एज है, इसमें मायोपिया बढ़ने का चांस ज़्यादा रहता है और ऑनलाइन की वजह से ये बहुत बढ़ गया है.''
आई स्पेशलिस्ट डॉ ऊषा जौहारी बताती हैं कि वो एक दिन में ऐसे 10 बच्चों का इलाज कर रही हैं. उन्होंने कहा, ''दो साल पहले हफ़्ते में हम क़रीब 15 मरीज़ देखते थे, लेकिन अब हर रोज़ क़रीब 10 बच्चे आंख की शिकायत के साथ आ रहे हैं. बच्चों का स्क्रीनटाईम बढ़ने से ये हुआ है. मोबाइल 1 फ़ीट दूर, लैपटॉप देख रहे हैं तो 2 फ़ीट दूर हो और टीवी 10 फ़ीट दूर से देखें.''
डॉ.संदीप कटारिया , Opthalmologist, Wockhardt Hospital ने कहा, ''बीते दो साल में काफ़ी पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ कम्प्लेंट लेकर आ रहे हैं की आंख से ठीक से दिखायी नहीं दे रहा है, आंख लाल हो रही है. बड़ों को भी ये दिक्कत आ रही है. जब आप स्क्रीन के ऊपर देखते हो तो ब्लिंक किया करो, ताकि वो मॉईस्ट रहे, ब्लिंक करना बहुत ज़रूरी है. नहीं तो आंख ड्राई रहती है. ये कुछ सावधानियां आप खुद बरत सकते हैं.''
पटना / एजेंसी / बिहार में बच्चों के बीच वायरल फीवर के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र राज्य सरकार ने अलर्ट जारी किया हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह अलर्ट जारी किया गया है. बुखार के बढ़ रहे इस प्रकोप के चलते कई स्कूल अब पांचवीं तक क्लास फिर ऑनलाइन करने जा रहे हैं. पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के शिशु वार्ड में गुरुवार को सभी बेड भरे हुए थे. छपरा से आई नीता देवी पिछले शुक्रवार से यहां अपने बच्चे का इलाज करा रही हैं. बच्चों पहले वहां के अस्पताल में था लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर यहां रेफ़र कर दिया था. नीता कहती हैं, 'मेरे बच्चे को फ़ीवर हुआ फिर जॉंडिस. अभी भी स्थिति में सुधार नहीं है.
पटना से दूर मोतिहारी के ज़िला अस्पताल के पिकु वार्ड में भी लोग अपने बच्चों के साथ इलाज करा रहे हैं. हालाँकि विशेषज्ञ डॉक्टरों का यह भी कहना है कि इस बार हर जगह बढ़ी हुई संख्या के पीछे कोरोना के कारण डर भी है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर निगम प्रकाश नारायण कहते हैं, ‘इस मर्तबा बहुत लोग अधिक जागरूक हैं. कोविड के कारण जागरूकता बहुत अधिक हैं. इसलिए लोग जल्द से जल्द रिपोर्ट करते हैं. लोगों ने कोविड के अनुरूप व्यवहार छोड़ दिया है.' हालांकि बिहार सरकार ने सतर्कता बरतने का सभी ज़िला और सरकारी मेडिकल कॉलेज को अलर्ट भेजा हैं साथ ही यह भी दावा किया है कि मरीज़ भले बढ़ रहे हो लेकिन चिंता की बात नहीं है. राज्य के हेल्थ मिनिस्टर मंगल पांडे ने कहा, 'जो छोटे बच्चे हैं, उनका अस्पताल आना ज़्यादा हुआ हैं लेकिन कई डॉक्टर्स से बात की हैं और सभी का कहना हैं ये वायरल फीवर है.' वैसे, राज्य सरकार अब विद्यालयों को इस बढ़ती बीमारी के मद्देनज़र फिर से ऑनलाइन क्लास पर वापस जाने को सलाह दे रही है.
नई दिल्ली / एजेंसी / सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश की वयस्क आबादी में 58 प्रतिशत को कोविड-19 टीकों की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है, वहीं 18 प्रतिशत को दोनों खुराकें दी गयी है. इसके साथ ही सरकार ने कहा कि देश में अब तक 72 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं. अधिकारियों ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब भी कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है और यह अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि देश के 35 जिलों में साप्ताहिक कोविड संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक है जबकि 30 जिलों में यह दर 5 से 10 प्रतिशत के बीच है. उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आ रहे नए मामलों का ब्योरा उपलब्ध कराते हुए कहा कि पिछले हफ्ते सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों में से 68.59 प्रतिशत केरल से थे.
टीकाकरण अभियान के संदर्भ में अधिकारियों ने कहा कि सिक्किम, दादरा एवं नगर हवेली, हिमाचल प्रदेश में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोविड टीकों की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है. एक अधिकारी ने बताया कि भारत में बृहस्पतिवार तक कोविड टीकों की कुल 72 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं.
स्कूलों को नियमित रूप से पुन: खोले जाने के बारे में अधिकारियों ने कहा कि किसी वैज्ञानिक संस्था या साक्ष्य में यह नहीं कहा गया है कि स्कूलों को फिर से खोलने के लिए बच्चों का टीकाकरण पूर्व शर्त होनी चाहिए. उन्होंने हालांकि कहा कि शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों का टीकाकरण वांछनीय है.
नई दिल्ली /एजेंसी / तालिबान के काबुल पर कब्जा करने के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की. अफगानिस्तान में बदलते हालात के साथ कश्मीर घाटी में बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर चिंता है. आज की बैठक में सेना प्रमुख एमएम नरवणे, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सचिव रॉ सामंत गोयल और जम्मू कश्मीर के अन्य हितधारकों ने भाग लिया. अर्धसैनिक सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख पंकज सिंह और सीआरपीएफ के कुलदीप सिंह भी मौजूद थे.
नॉर्थ ब्लॉक में सबसे पहले पहुंचने वाले मनोज सिन्हा ने एनडीटीवी को बताया कि वे केंद्र शासित प्रदेश के विकास और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे. बढ़ते कट्टरपंथ की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "सैयद अली शाह गिलानी के निधन के बाद कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अब उन्हें हटा लिया गया है और गिलानी की मौत के बाद का पहला शुक्रवार भी शांतिपूर्वक बीत गया है."
नॉर्थ ब्लॉक तक पहुंचने वाली रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में कट्टरता बढ़ रही है, खासकर सोपोर, शोपियां और श्रीनगर शहर में. कश्मीर घाटी के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, "अफगानिस्तान की स्थिति ने कश्मीर में कट्टरपंथी तत्वों के लिए एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में काम किया है और हम लगातार निगरानी कर रहे हैं." उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान हिंसा के स्तर को बढ़ाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने जा रहा है, इसलिए हमें अपनी सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करने की जरूरत है."
जमीनी स्तर पर मौजूद अधिकारी यह भी दावा करते हैं कि स्थानीय लोग उन मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान दे रहे हैं जो अफगानिस्तान से रिपोर्ट किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमें डर है कि यह एक प्रेरक (कट्टरपंथ के लिए) के रूप में कार्य कर सकता है."
एक अधिकारी ने कहा, "पिछली सरकारों और वर्तमान प्रशासन के बीच तुलना की जाए तो, रोजगार या विकास के मामले में बहुत कुछ दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे अलगाव की भावना पैदा हो रही है." उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं पर जोर देना समय की मांग है.
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 82 लोग अपने घरों से लापता हो गए हैं और रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि वे आतंकी समूहों में शामिल हो गए हैं. एक और बात जो चिंता का कारण है, वह यह है कि इस साल पहले 8 महीनों के बीच मारे गए 120 आतंकवादियों में से केवल 10 प्रतिशत विदेशी आतंकवादी थे और बाकी सभी स्थानीय थे.
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि कश्मीर घाटी में अब भी करीब 200 आतंकवादी सक्रिय हैं. उनमें से ज्यादातर जैश और लश्कर के हैं और कुछ अल बद्र के हैं.
नई दिल्ली / एजेंसी / सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने आज भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए मैसर्स एयरबस डिफेंस एंड स्पेस एस.ए स्पेन की 56 C-295MW परिवहन विमान की खरीद को मंजूरी दी. C-295MW विमान समकालीन तकनीक के साथ 5-10 टन क्षमता का एक परिवहन विमान है जो IAF के पुराने एवरो विमान की जगह लेगा. त्वरित प्रतिक्रिया और सैनिकों और कार्गो के पैरा ड्रॉपिंग के लिए विमान में एक रियर रैंप दरवाजा है. अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 48 महीनों के भीतर स्पेन से सोलह विमानों की डिलीवरी की जाएगी और अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के दस वर्षों के भीतर टाटा कंसोर्टियम द्वारा भारत में 40 विमानों का निर्माण किया जाएगा.
यह अपनी तरह की पहली परियोजना है जिसमें एक निजी कंपनी द्वारा भारत में एक सैन्य विमान का निर्माण किया जाएगा. सभी 56 विमानों को स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट के साथ स्थापित किया जाएगा. यह परियोजना भारत में एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगी, जिसमें देश भर में फैले कई एमएसएमई विमान के कुछ हिस्सों के निर्माण में शामिल होंगे.
यह कार्यक्रम भारत सरकार के ''आत्मनिर्भर भारत'' अभियान को बड़ा बढ़ावा देगा, क्योंकि यह भारतीय निजी क्षेत्र को प्रौद्योगिकी गहन और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी विमानन उद्योग में प्रवेश करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा. यह परियोजना घरेलू विमानन निर्माण को बढ़ावा देगी, जिसके परिणामस्वरूप आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात में अपेक्षित वृद्धि होगी.
भारत में बड़ी संख्या में डिटेल पार्ट्स, सब-असेंबली और एयरो स्ट्रक्चर के प्रमुख कंपोनेंट असेंबलियों का निर्माण किया जाना है. यह कार्यक्रम देश के एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र में रोजगार सृजन में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा और उम्मीद है कि 600 उच्च कुशल रोजगार सीधे, 3000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार और अतिरिक्त 3000 मध्यम कौशल रोजगार के अवसर के साथ ही भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में कई रोजगार के अवसर सृजित करेगा.
इसमें हैंगर, भवन, एप्रन और टैक्सीवे के रूप में विशेष बुनियादी ढांचे का विकास शामिल होगा. भारत में निर्माण की प्रक्रिया के दौरान, यह उम्मीद की जाती है कि टाटा कंसोर्टियम के सभी आपूर्तिकर्ता जो विशेष प्रक्रियाओं में शामिल होंगे, वे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एयरोस्पेस और रक्षा ठेकेदार प्रत्यायन कार्यक्रम (एनएडीसीएपी) मान्यता प्राप्त करेंगे और इसे जारी रखेंगे.
डिलीवरी के पूरा होने से पहले, भारत में C295MW विमानों के लिए 'D' लेवल सर्विसिंग सुविधा (MRO) स्थापित करने की योजना है. उम्मीद है कि यह सुविधा सी-295 विमान के विभिन्न रूपों के लिए एक क्षेत्रीय एमआरओ हब के रूप में कार्य करेगी. इसके अलावा, ओईएम भारतीय ऑफसेट पार्टनर्स से योग्य उत्पादों और सेवाओं की सीधी खरीद के माध्यम से अपने ऑफसेट दायित्वों का निर्वहन भी करेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिलेगा.
यह कार्यक्रम स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की एक अनूठी पहल है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
