August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

    रायपुर । शौर्यपथ । लखीमपुर हिंसा पीड़ितों से मिलने लखनऊ जाने की ऐलान कर चुके पंजाब और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को लखनऊ में उतरने से रोक लगा दी गई है। योगी सरकार मे आदेश देते हुए कहा कि इन्हें एयरपोर्ट पर उतरने नहीं दिया जाए।

    लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसानों को लेकर विपक्ष मोदी-योगी सरकार पर पूरी तरह से हमलावर हो चुका है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत कई नेता पीड़ित किसानों से मिलने के लिए लखीमपुर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। प्रियंका गांधी को जहां बीच रास्ते से गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के घर के बाहर पुलिस का सख्त पहरा है।

    इसके अलावा अब योगी सरकार ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लखनऊ में उतरने में पर रोक लगा दी। भूपेश बघेल ने इस रोक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है- “उत्तरप्रदेश की सरकार मुझे राज्य में न आने देने का फरमान जारी कर रही है। क्या उत्तरप्रदेश में नागरिक अधिकार स्थगित कर दिए गए हैं? अगर धारा 144 लखीमपुर में है, तो लखनऊ उतरने से क्यों रोक रही है तानाशाह सरकार”?

    इससे पहले रविवार को भूपेश बघेल ने किसानों की मौत पर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश में किसानों के साथ जो वहशी व्यवहार हुआ वह अक्षम्य है। किसान हूं। किसान का दर्द समझता हूं। इन कठिन परिस्थितियों में उनके साथ खड़े होने के लिए कल सुबह लखीमपुर जाऊंगा।

    वहीं सीएम योगी ने घटना पर दुख जताते हुए कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा- “मौके पर शासन द्वारा अपर मुख्य सचिव नियुक्ति, कार्मिक एवं कृषि, ए.डी.जी. कानून-व्यवस्था, आयुक्त लखनऊ तथा आई.जी. लखनऊ मौजूद हैं तथा स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए घटना के कारणों की गहराई से जांच कर रहे हैं। घटना में लिप्त जो भी जिम्मेदार होगा, सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही करेगी”।

    बता दें कि रविवार को लखीमपुर में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम के विरोध में किसान वहां प्रदर्शन करने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे ने किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में किसान और बीजेपी के कार्यकर्ता दोनों शामिल हैं।

    शौर्य गाथा । शौर्य पथ । 

     

    #स्वाधीनता_संग्राम की मार्मिक गाथा , नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी:

    नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी | 

    नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है -

    5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था। 

    इन्हें नीरा ​नागिनी के नाम से भी जाना जाता है। इनके भाई बसंत कुमार भी आजाद हिन्द फौज में थे। इनके पिता सेठ छज्जूमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जिनका व्यापार देशभर में फैला हुआ था। खासकर कलकत्ता में इनके पिताजी के व्यापार का मुख्य केंद्र था, इसलिए इनकी शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता में ही हुई। 

    नीरा नागिन और इनके भाई बसंत कुमार के जीवन पर कई लोक गायकों ने काव्य संग्रह एवं भजन भी लिखे | 1998 में इनका निधन हैदराबाद में हुआ।

    नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | 

    नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी।

    आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद जब लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया, लेकिन इन्हें पति की हत्या के आरोप में काले पानी की सजा हुई थी, जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गई। 

    आजादी के बाद इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया, लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।

    नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है - 

    ‘‘मैं जब कोलकाता जेल से अंडमान पहुंची, तो हमारे रहने का स्थान वे ही कोठरियाँ थीं, जिनमें अन्य महिला राजनैतिक अपराधी रही थी अथवा रहती थी।

    हमें रात के 10 बजे कोठरियों में बंद कर दिया गया और चटाई, कंबल आदि का नाम भी नहीं सुनाई पड़ा। मन में चिंता होती थी कि इस गहरे समुद्र में अज्ञात द्वीप में रहते स्वतंत्रता कैसे मिलेगी, जहाँ अभी तो ओढ़ने बिछाने का ध्यान छोड़ने की आवश्यकता आ पड़ी है?

    जैसे-तैसे जमीन पर ही लोट लगाई और नींद भी आ गई। लगभग 12 बजे एक पहरेदार दो कम्बल लेकर आया और बिना बोले-चाले ही ऊपर फेंककर चला गया। कंबलों का गिरना और नींद का टूटना भी एक साथ ही हुआ। बुरा तो लगा, परंतु कंबलों को पाकर संतोष भी आ ही गया। 

    अब केवल वही एक लोहे के बंधन का कष्ट और रह-रहकर भारत माता से जुदा होने का ध्यान साथ में था।

    ‘‘सूर्य निकलते ही मुझको खिचड़ी मिली और लुहार भी आ गया। हाथ की सांकल काटते समय थोड़ा-सा चमड़ा भी काटा, परंतु पैरों में से आड़ी बेड़ी काटते समय, केवल दो-तीन बार हथौड़ी से पैरों की हड्डी को जाँचा कि कितनी पुष्ट है। 

    मैंने एक बार दुःखी होकर कहा, ‘‘क्याअंधा है, जो पैर में मारता है?’’‘‘पैर क्या हम तो दिल में भी मार देंगे, क्या कर लोगी?’’ 

    उसने मुझे कहा था।‘‘बंधन में हूँ तुम्हारे कर भी क्या सकती हूँ...’’ फिर मैंने उनके ऊपर थूक दिया था, ‘‘औरतों की इज्जत करना सीखो?’’

    जेलर भी साथ थे, तो उसने कड़क आवाज में कहा, ‘‘तुम्हें छोड़ दिया जाएगा,यदि तुम बता दोगी कि तुम्हारे नेताजी सुभाष कहाँ हैं?’’

    ‘‘वे तो हवाई दुर्घटना में चल बसे,’’ मैंने जवाब दिया, ‘‘सारी दुनिया जानती है।’’

    ‘‘नेताजी जिंदा हैं....झूठ बोलती हो तुम कि वे हवाई दुर्घटना में मर गए?’’ जेलर ने कहा। 

    ‘‘हाँ नेताजी जिंदा हैं।’’

    ‘तो कहाँ हैं...।’’

    ‘‘मेरे दिल में जिंदा हैं वे।’’ 

    जैसे ही मैंने कहा तो जेलर को गुस्सा आ गया था और बोले, ‘‘तो तुम्हारे दिल से हम नेताजी को निकाल देंगे।’’ और फिर उन्होंने मेरे आँचल पर ही हाथ डाल दिया और मेरी आँगी को फाड़ते हुए फिर लुहार की ओर संकेत किया...लुहार ने एक बड़ा सा जंबूड़ औजार जैसा फुलवारी में इधर-उधर बढ़ी हुई पत्तियाँ काटने के काम आता है, उस ब्रेस्ट रिपर को उठा लिया और मेरे दाएँ स्तन को उसमें दबाकर काटने चला था...लेकिन उसमें धार नहीं थी, ठूँठा था और उरोजों (स्तनों) को दबाकर असहनीय पीड़ा देते हुए दूसरी तरफ से जेलर ने मेरी गर्दन पकड़ते हुए कहा, ‘‘अगर फिर जबान लड़ाई तो तुम्हारे ये दोनों गुब्बारे छाती से अलग कर दिए जाएँगे...’’ 

    उसने फिर चिमटानुमा हथियार मेरी नाक पर मारते हुए कहा, ‘‘शुक्र मानो महारानी विक्टोरिया का कि इसे आग से नहीं तपाया, आग से तपाया होता तो तुम्हारे दोनों स्तन पूरी तरह उखड़ जाते।’’ सलाम हैं ऐसे देश भक्त को। आजादी के बाद इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया, लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।

    नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थी, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था। इनका जन्म खेकडा, उत्तर प्रदेश के एक धनी वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सेठ छज्जूमल था। इनके जन्मदिवस पर इनके पिता ने खेकडा आर्य समाज का निर्माण करवाया था, जिसका भव्य भवन आज तक भी है। सरस्वती पुस्तकालय भी निर्मित हुआ था, जो अब नहीं है। मानवती आर्या, सरस्वती राजामणि और दुर्गा एवं युवक डेनियल काले संग इन्होंने नेताजी के लिए अंग्रेजों की जासूसी भी की। इन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अफसर अपने पति श्रीकांत रंजनदास की हत्या कर दी थी, इन्हें नेताजी की हार के बाद काला पानी ले जाया गया, जहां कठोर यातनाएं दी गई, अंतत: एक दिन यातनाओं से मरा समझकर समुद्र में फेंक दिया गया, लेकिन जारवा आदिवासियों ने इन्हें निकालकर बचा लिया और उनकी मदद से ये किसी तरह इंडोनेशिया पहुंच गई थी। काले पानी से जिंदा बचकर भाग निकलने वाली ये एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी हैं। आजादी के बाद इन्होंने हैदराबाद मुक्ति आंदोलन में भी भाग लिया और रामचंद्रराव वंदेमातरम, नरेंद्र नामक युवा समेत अनेक वीरों को प्रोत्साहित किया। आजादी के बाद इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया, लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की। करीब 100 वर्ष की उम्र में 1998 में इनका निधन हैदराबाद में हुआ।। ऐसी सभी वीरांगनाओं और वीरों को हृदय से साष्टांग नमन्।।     

                 

    #संदर्भ:- 1. आजाद हिन्द फौज के गुमनाम सैनिक, मन्मथनाथ गुप्त, हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण, 1968

    2. भूली बिसरी ऐतिहासिक कहानियां, सूर्या भारती प्रकाशन चावड़ी बाजार नई दिल्ली, संस्करण 2012

    3. मेरी जेल डायरी, नीरा आर्या, हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण 1965

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने सिवनी जिले के ग्राम-चुरनाटोला में महान बलिदानी राजा अमर शहीद शंकरशाह व कुंवर रघुनाथ शाह के प्रतिमा का अनावरण किया। इस कार्यक्रम का आयोजन गोंड समाज महासभा मध्यप्रदेश द्वारा किया गया। राज्यपाल ने अमर शहीद शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को नमन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की अमर बलिदान गाथा हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत है, जो हम सभी को राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा देते है।
    राज्यपाल ने कहा कि समाज के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। इस समय कुछ विघटनकारी तत्व समाज को विघटित करने का प्रयास कर रहे हैं, धर्म, सम्प्रदाय, जाति के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे हैं, उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि मैं भी स्वयं गोंड समाज से हूं। गोंडी भाषा को स्थान मिले और उसके विकास के लिए मैं हरसंभव प्रयास करूंगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी प्रकृति का पूजक होता है। मेरा आग्रह है कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को न भूलें। उन्होंने आदिवासियों के जमीन अधिग्रहण के समय शेयर होल्डर बनाने का भी सुझाव दिया।
    राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज में वीर नारायण सिंह, टंट्या भील, राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह जैसे अनेकों महानायक हैं, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है। इनमें से कई का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो पाए और गुमनामी में खो गए। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर उन्हें याद किये जाने की आवश्यकता है। उनकी जानकारी नई पीढ़ियों को दी जानी चाहिए, ताकि अपने पूर्वजों के योगदान को जान सकें। सुश्री उइके ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष पद के तौर पर किए गए कार्यों की जानकारी दी।
    राज्यपाल ने कहा कि अमर शहीद गोंड महाराजा शंकरशाह व कुंवर रघुनाथ शाह गढ़ा साम्राज्य के गोंडवाना शासक थे। यह भूमि शुरू से ही वीरों की भूमि रही है। राजा शंकर शाह अंग्रेजों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के विरुद्ध थे और अंग्रेजों से स्वतंत्रता चाहते थे। डलहौजी की हड़प नीति के बाद भारत में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि तैयार हो रही थी, जिसकी जानकारी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को भी लग गई थी। पिता-पुत्र ने तत्कालिक परिस्थितियों में शक्तिशाली संगठन तैयार कर लिया और मध्य प्रांत में धीरे-धीरे उनके नेतृत्व में मोर्चा तैयार हो गया।
    सुश्री उइके ने कहा कि राजा शंकर शाह ने मध्यप्रांत में बैठक बुलाकर अंग्रेजों से विद्रोह के लिए योजना बनाई। उसी समय गुप्तचरों के माध्यम से जबलपुर केंटोनमेंट छावनी के कमिश्नर को राजा शंकर शाह के योजना की भनक मिल गई और उन्होंने गढ़ा पुरवा में हमला बोल कर राजा शंकर शाह और रघुनाथशाह को गिरफ्तार कर लिया। इन पिता-पुत्र के समक्ष अंग्रेजों ने संधि की शर्त रखी और कहा कि शर्तें मानने के बाद इन उन्हें माफ कर दिया जाएगा। पिता-पुत्र ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया फलस्वरूप उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और 18 सितंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई। उन्होंने कहा कि जब उन्हें फांसी की सजा दी गई तब भी उनमें भय का कोई चिन्ह नहीं था। अंग्रेजों ने यह सोचा कि सार्वजनिक रूप से फांसी देने के पश्चात जनता में भय व्याप्त होगा, जबकि इसके उलट परिणाम हुए और पूरे मध्यप्रांत में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी। उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सका।
    राज्यपाल ने कहा कि इस समय आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं। हम सभी स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले नायकों को याद कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी याद करना चाहिए जिसका नाम किन्हीं कारणों से सामने नहीं आ पाया। हमें यह याद रखना चाहिए कि जब हमारा देश गुलाम था, तो उस समय हमारे पूर्वजों के समक्ष अनेक चुनौतियां थी। इसके बावजूद वे पथ से नहीं डिगे, उनका लक्ष्य था अंग्रेजों से मुक्ति दिलाना। फलस्वरूप 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन आज हमारे समक्ष अलग प्रकार की कई चुनौतियां है। हमें इनका सामना करना चाहिए और एकजुट होकर राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना चाहिए।
    इस अवसर पर केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, गोंड समाज महासभा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री बी.एस.परतेती, पूर्व मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम, पूर्व विधायक श्री कमल मर्सकोले, श्री कौशल सिंह पोर्ते, श्रीमती कामनी शाह, श्री शोभाराम भलावी, श्री अमान सिंह पोर्ते, श्री श्याम सिंह मरकाम उपस्थित थे।

    चंडीगढ़ / शौर्यपथ / पंजाब कांग्रेस में चल रहे लंबे सियासी ड्रामे के बाद आज चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री के तौर पर 11 बजे शपथ लेंगे. चरणजीत सिंह चन्नी चंडीगढ़ के पांच सितारा होटल से पंजाब प्रभारी हरीश रावत और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को अपनी गाड़ी में बिठाकर राजभवन के लिए निकले. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी शपथ ग्रहण में शामिल होंगे. शपथ लेने से पहले चन्नी रूपनगर के एक गुरुद्वारे पहुंचे और माथा टेका. दलित सिख समुदाय से आते हैं और अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. वह पंजाब के पहले दलित नेता हैं, जो राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे.
    वहीं, सूत्रों के हवाले से खबर है कि पंजाब में उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे. सूत्रों का कहना है कि सुखजिंदर सिंह रंधावा को उप मुख्यमंत्री बनाया जाना तय है जबकि दूसरे डिप्टी सीएम का नाम अभी तक तय नहीं हुआ है.
    चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री होंगे. विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वो राज्यपाल से कल मिलने पहुंचे. राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद चन्नी ने कहा, ‘‘हमने अपना दावा पेश किया. राज्यपाल महोदय ने 11 बजे शपथग्रहण का समय दिया है.'' हालांकि, कोई और मंत्री शपथ लेंगे या नहीं इस पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा.
    चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बनने के ऐलान के बाद पंजाब के खराड़ में जश्न का माहौल है. उनके परिजनों, दोस्तों और समर्थकों ने उनके घर के बाहर जमकर जश्न मनाया. इस दौरान मिठाइयां भी बांटी गईं. इस मौके पर चन्नी की बहन ने कहा, "वह (चन्नी) बहुत मेहनत करने वाले शख्स हैं और राज्य के लिए बहुत अच्छा काम करेंगे."
    चन्नी दलित सिख समुदाय से आते हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. वह रूपनगर जिले के चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. चन्नी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के शासनकाल के दौरान साल 2015-16 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी थे.
    विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश में है. प्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी है.बता दें कि अमरिंदर सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और कहा था कि विधायकों की बार-बार बैठक बुलाए जाने से उन्होंने अपमानित महसूस किया, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया.

    गुवाहाटी / शौर्यपथ / असम से एक हैरान कर देना वाला मामला सामने आया है. एक परीक्षा में शॉर्ट्स पहनने वाली 19 वर्षीय छात्रा को परीक्षा में बैठने से पहले अपने पैरों के चारों ओर पर्दा लपेटने के लिए मजबूर किया गया. छात्रा के साथ इस व्यवहार के बाद बढ़ते आक्रोश को देखते हुए असम कृषि विश्वविद्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है. छात्रा के परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई है.
    छात्रा बुधवार को अपने गृहनगर बिश्वनाथ चरियाली से गिरिजानंदा चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज की प्रवेश परीक्षा देने के लिए तेजपुर गई थी. परीक्षा हॉल में निरीक्षक ने उसके शॉर्ट्स पर आपत्ति जताई.
    छात्रा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों बात करने के बाद निरीक्षक को बताया कि प्रवेश पत्र में कोई ड्रेस कोड नहीं है. उसने उन्हें यह भी बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में भी वह शॉर्ट्स पहनकर गई थी.
    छात्रा के परिवार का आरोप है कि निरीक्षक ने उसकी एक नहीं सुनी.
    छात्रा भागकर परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े अपने पिता के पास पहुंची और उनसे ट्राउज़र लाने को कहा. छात्रा के पिता बाबुल तमुली ने कहा कि जब तक वह बाजार से ट्राउज़र लेकर लौट पाते तब तक कॉलेज के अधिकारियों ने उनकी बेटी को पैरों को ढकने के लिए एक पर्दा दिया था.
    तमुली ने पीटीआई को बताया, "मेरी बेटी को आघात पहुंचा और उसने कुछ स्थानीय पत्रकारों से अपमानजनक घटना के बारे में बात की और यह मुद्दा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. कई लोगों ने इस घटना की निंदा की है, लेकिन कई ने मेरी बेटी पर एक शैक्षणिक संस्थान में ड्रेस कोड का पालन नहीं करने के लिए हमला किया है, जिसने उसे और अधिक मानसिक रूप से परेशान कर दिया है.''
    उन्होंने कहा, "हमने आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है और मेरी बेटी की मानसिक भलाई के हित में मामले को यहीं रहने दिया है. हम चाहते हैं कि वह अपने शैक्षणिक भविष्य पर ध्यान केंद्रित करे." कांग्रेस प्रवक्ता बोबीता शर्मा ने कहा कि एक युवा लड़की को शॉर्ट्स पहनने के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देना एक खतरनाक और प्रतिगामी मानसिकता को दर्शाता है.
    उन्होंने कहा, "यह एक पहाड़ बना रहा है और परीक्षा से ठीक पहले छात्र के मानसिक उत्पीड़न के समान है. मुझे खेद है कि एक लड़की जो पहनती है उसके बारे में समाज इतना प्रतिगामी हो गया है. ऐसी मानसिकता लड़कियों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है."
    केके हांडिक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में जनसंचार के प्रोफेसर जयंत सरमा ने कहा, "लोगों को तालिबान जैसा रवैया छोड़ देना चाहिए."

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पत्रकारों को बैठक के मुख्य फैसलों के बारे में जानकारी दी. निर्मला सीतारमण ने बताया कि कोरोना की दवाओं पर जीएसटी छूट की अवधि बढ़ाई गई है. उन्होंने कहा कि पहली बार हम ऑनलाइन मोड से बाहर निकले हैं. हमने आज लोगों के अनुकूल फैसले लिए हैं. दो जीवन रक्षक दवाओं - ज़ोल्गेन्स्मा और एक और को जीएसटी में छूट दी गई है.
    उन्होंने कहा कि कोरोना संबंधित दवाओं पर हमने 31 दिसंबर, 2021 तक जीएसटी रियायतें बढ़ा दी हैं. इससे पहले इन दवाओं पर छूट 30 सितंबर, 2021 तक वैध थीं. कैंसर से संबंधित दवाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है. दिव्यांगों के लिए रेट्रोफिटमेंट किट पर अब 5% जीएसटी लगेगा.
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा या नहीं, इस पर मीडिया में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. मैं यह पूरी तरह से स्पष्ट कर देती हूं कि यह आज के एजेंडे में विशुद्ध रूप से केरल उच्च न्यायालय के आदेश के कारण आया है. कोर्ट ने इस मामले को पहले जीएसटी काउंसिल के सामने रखने का सुझाव दिया था. उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद का मानना है कि यह समय पेट्रोलियम पदार्थों को माल एवं सेवा कर के दायरे में लाने का नहीं है.
    कलम पर 18 प्रतिशत की एकल दर से जीएसटी लगेगा, वहीं विशिष्ट नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर 12 प्रतिशत माल एवं सेवा कर लगेगा. जीएसटी परिषद ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं पर कर दर को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत किया है.सीतारमण ने कहा कि बायो-डीजल पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि जिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सरकार 75% खर्च करती है, ऐसे कार्यक्रमों को जीएसटी से बाहर रखा गया है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को हुई बैठक के बाद वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उसके फैसलों के बारे में बताया. पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केरल हाईकोर्ट के आदेश की वजह से इस पर चर्चा की गई थी. लेकिन कुछ सदस्यों ने कहा कि वो यह नहीं चाहते हैं. इसके बाद जीएसटी काउंसिल ने फैसला किया कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का अभी वक्त नहीं है.

    नई दिल्‍ली /एजेंसी / जम्‍मू-कश्‍मीर के श्रीनगर के चानपोरा इलाके में अज्ञात आतंकियों ने शुक्रवार को सीआरएपीएम के काफिले को टारगेट कर ग्रेनेड से हमला किया, इसमें एक जवान जितेंदर कुमार यादव घायल हो गया. जवान की जांघ और बाएं हाथ में चोट आई है. उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत स्थिर है. विस्‍तृत जानकारी का इंतजार है.

    नई दिल्ली / एजेंसी / भारतीय वायुसेना को मिलेंगे 6 'आई इन द स्काई' विमान मिलेंगे. इसके लिए केंद्र ने 11000 करोड़ के बड़े सुरक्षा सौदे को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 6 नए एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल विमान तैयार किए जाएंगे. भारतीय वायुसेना अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल करने को तैयार है. इस सौदे को सुरक्षा कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को हरी झंडी दे दी है. इन्हें आकाश में भारत की आंख के तौर पर देखा जा रहा है. डीआरडीओ द्वारा बनाए जा रहे इस रडार को एयर इंडिया के ए-321 में फिट किया जाएगा.
    डीआरडीओ द्वारा बनाया जाने वाला ये रडार मौजूदा AESA रडार का आधुनिक संस्करण होगा, जो आईएएफ द्वारा पहले से तैनात दो नेत्रा हवाई चेतावनी विमानों में स्थापित किया गया है. भारतीय वायु सेना रूस से खरीदे गए 3 बड़े A -50 EI विमानों को भी संचालित करती है, जो इज़राइली EL/W -2090 'फाल्कन' रडार सिस्टम से सुसज्जित है.
    A-321 विमान में लगाने के लिए जो अत्याधुनिक रडार भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे, ये विमान के चारों और सैंकड़ों किलोमीटर के हवाई क्षेत्र में 360 डिग्री कवरेज सुनिश्चित करेंगे. ये रडार आईएएफ के मौजूदा नेत्र जेट की क्षमता से अधिक शक्तिशाली होंगे.
    एयरबॉर्न वार्निंग एयरक्राफ्ट ने उस समय अधिक ध्यान खींचा, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर एयर स्पेस में संघर्ष बढ़ गया था. पाकिस्तान की ओर से हो रहे हमलों को रोकने के लिए भारतीय वायुसेना के फाइटर्स बहुत हद तक IAF नेत्रा और A-50 जेट पर निर्भर हैं, जो कि पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं. विंग कमांडर वर्धमान ने भी पाकिस्तानी वायुसेना के विमान F-16 को मार गिराया था, जिसे इसी रडार के जरिए इंटरसेप्ट किया गया था. इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में सात साल का समय लगेगा और पहला A-321 एयरक्राफ्ट को इस पूरी तकनीक के साथ वायुसेना के बेड़े में शामिल करने में चार साल का समय लगेगा.

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