August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

    नई दिल्ली / एजेंसी / राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की पैरवी करते हुए मंगलवार को कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार के तहत पूरी सरकारी मशीनरी लखीमपुर खीरी में हुई घटना से जुड़े सच को दबाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष को रोकने के लिए कठोरता बरत रही है. चौधरी का कहना है कि उन्हें लखीमपुर के पीड़ित किसानों के परिवारों से मिलने के लिए वहां तक पहुंचने के लिए छिप-छिपाकर जाना पड़ा.
      उन्होंने कहा, ‘लखीमपुर तक पहुंचना बहुत मुश्किल काम था क्योंकि योगी ने पूरी सरकारी मशीनरी को विपक्ष के प्रयास को विफल करने में लगा दिया था. सरकार और पार्टी में फर्क होना चाहिए जो उत्तर प्रदेश में नहीं है...ऐसा लगता है कि जिला अधिकारी से लेकर पुलिस तक, सबने भाजपा की सदस्यता ले ली हो.' रालोद नेता के अनुसार, उन्हें दिल्ली से लखीमपुर तक पहुंचने के लिए 13 घंटे का समय लगा और वहां पर उन्होंने हिंसा में मारे गए किसानों के परिवारों से मुलाकात की.
      बता दें, प्रशासन ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेताओं को लखनऊ एवं निकट के इलाकों में ही रोक दिया और लखीमपुर खीरी तक नहीं पहुंचने दिया.
       चौधरी ने कहा, ‘अगर आपको राजनीतिक प्रक्रिया में विश्वास नहीं है तो इसका क्या मतलब हुआ? अगर उनको राजनीतिक आवाज में विश्वास नहीं है तो वे चुनाव क्यों लड़ते हैं? आप देखिए, अब भी कई नेताओं को रोके रखा गया है. ये शर्मनाक घटनाएं हैं और प्रशासन के कठोर रवैये को दिखाती हैं.'
      गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में रविवार को उप मुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य द्वारा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पैतृक गांव के दौरे के विरोध को लेकर भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में मिश्रा के बेटे आशीष समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.
      जयंती चौधरी ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की कुछ विपक्षी दलों की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाने के कुछ आधार होते हैं और उत्तर प्रदेश में ये आधार मौजूद हैं. रालोद प्रमुख ने आरोप लगाया, ‘गृह विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री ने किसानों का मुकाबला करने के लिए अपने समर्थकों को उकसाया. इसके बाद उसके बेटे ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी. यह जानबूझकर किया गया अपराध है और यह सुनियोजित भी था.'
      उनके मुताबिक, किसानों ने उन्हें बताया कि गाड़ी के अगले हिस्से में बल्लियां बांधी गईं थी जिससे किसान नीचे गिरें और ज्यादा चपेट में आएं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस दावे को सत्यापित नहीं कर सकते. चौधरी ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की ओर से किसी भी व्यक्ति ने किसानें की मौत पर सामने आकर कुछ नहीं कहा.
      प्रियंका गांधी वाड्रा और दीपेंद्र हुड्डा को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से दोंनो नेताओं के साथ ‘धक्कामुक्की' की गई, वह हैरान करने वाला है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य हुड्डा का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस का व्यवहार संसदीय विशेषाधिकार का हनन है. चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की घोषणा करनी चाहिए तथा इस पर अफसोस जताना चाहिए कि किसान 10 महीनों से सड़कों पर बैठे हुए हैं.

    मुंबई / एजेंसी / जिस क्रूज शिप ड्रग्स पार्टी मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी हुई है, उसमें हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. एनसीबी ने कोर्ट को बताया है कि जो ड्रग्स शिप से बरामद की गई है, उसकी कीमत क्रिप्टो करेंसी में चुकाई गई थी. साथ ही बताया कि उस शिप के पास भारतीय समुद्र में परिचालन का लाइसेंस ही नहीं था. इसके अलावा एनसीबी ने 8 और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से 4 को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 11 अक्टूबर तक NCB हिरासत में भेज दिया गया.
     4 में से 2 ड्रग्स पैडलर हैं और 2 क्रूज शिप से लौटे यात्री हैं. मनीष के पास से 2.4 ग्राम गांजा मिला है तो अविन साहू ने शिप में गांजा सेवन किया था. NCB के मुताबिक ड्रग्स पैडलर श्रेयस के पास से भी 2 ग्राम चरस मिली है. NCB ने अदालत में दावा किया कि ये एक बड़ा नेक्सस है जिसकी जांच के लिए आरोपियों की कस्टडी जरूरी है. जबकि बचाव पक्ष ने NCB के आरोपों को निराधार बताया.
    NCB के मुताबिक एक आरोपी ने इंटरनेशनल मार्केट से ड्रग्स खरीदने के लिए डार्क नेट का इस्तेमाल किया था और उसकी कीमत क्रिप्टो करेंसी में चुकाई थी. इस बीच कॉर्डेलिया शिप के परिचालन पर ही सवाल उठने लगे हैं. NCB के वकील ने कोर्ट में बताया कि जिस शिप पर ड्रग्स पार्टी चल रही थी, उसके पास भारतीय समुद्र में परिचालन का लाइसेंस ही नहीं था. यह शिप मुंबई से गोवा जाकर वापस लौटा है.
      इधर, क्रूज शिप पर म्युजिकल पार्टी की सूचना मिलने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही मुंबई पुलिस भी अब जाग गई है. मुंबई पुलिस ने डीजी शिपिंग से क्रूज शिप परिचालन नियम और कॉर्डेलिया शिप से जुड़ी जानकारी मांगी है.  इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के 4 आरोपियों को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. चारों इवेंट ऑर्गनाइजर कंपनी से जुड़े हैं और दिल्ली के रहने वाले हैं.

    नई दिल्‍ली / एजेंसी / दिल्ली की रोहिणी कोर्ट से ओलिंपिक खेलों के पदक विजेता रेसलर सुशील कुमार  को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने सुशील कुमार की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है. जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभी मामले में जांच चल रही है लिहाजा जमानत देना न्यायोचित नहीं है.अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाजी आनंद ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कुमार को राहत देने से इनकार कर दिया.गौरतलब है कि सुशील कुमार ने यह कहते हुए जमानत का अनुरोध किया था कि पुलिस ने उसके विरुद्ध गलत मामला बनाया और ऐसे छवि पेश की जैसे वह दोषी हों.
     सुशील को 23 मई को गिरफ्तार किया गया था और वह दो जून 2021 से जेल में है. कथित तौर पर कुमार और अन्य लोगों ने मिलकर पूर्व जूनियर राष्ट्रीय पहलवान सागर धनकड़ और उसके दोस्तों पर मई में हमला किया था. यह हमला कथित तौर पर संपत्ति को लेकर किसी विवाद के चलते किया गया था.बाद में धनकड़ की मौत हो गई थी. पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, किसी भोथरी चीज से उसके सिर पर वार किया गया था जिससे उसका सिर फट गया था.

    नई दिल्‍ली / एजेंसी / यूपी में किसानों की मौत के बाद लखीमपुर खीरी जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने रोक दिया था और हिरासत में ले लिया था. प्रियंका को सीतापुर जिले में गेस्‍ट हाउस में रखा गया है. प्रियंका की ओर से मंगलवार को जारी बयान में कहा गया है, '38 घंटे बीत चुके हैं. मुझे न तो कोई ऑर्डर (गिरफ्तारी को लेकर) दिया गया है और न नोटिस 'प्रियंका की ओर से जारी बयान में  कहा गया है, 'मुझे  चार अक्‍टूबर को शाम 4.30 बजे अरेस्‍ट किया गया. अरेस्‍ट करने वाले अधिकारी डीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने मौखिक तौर पर बताया कि सेक्‍शन 151 के अंतर्गत यह गिरफ्तारी की गई है. '
      प्रियंका के बयान के अनुसार, 'जिस समय मुझे अरेस्‍ट किया गया, मैं सीतापुर जिले में यात्रा कर रही थी जो कि लखीमपुरी खीरी जिले की सीमा से करीब 20 KM दूर है जहां धारा 144 लगी थी. मेरी जानकाीर के अनुसार, सीतापुर में धारा 144 लागू नहीं थी.बहरहाल, मैं, चार अन्‍य लोगों के साथ एक वाहन पर यात्रा कर रही थी, इसमें दो स्‍थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता के अलावा दीपेंद्र हुड्डा और संदीप सिंह थे. इन चार लोगों के अलावा कोई सुरक्षा वाहन या कांग्रेस  कार्यकर्ता मेरे साथ नहीं था.इसके बाद मुझे दो महिला और दो पुरुष कांस्‍टेबल की साथ सीतापुर के PAC कंपाउंड ले जाया गया.'

    लखीमपुर खीरी / एजेंसी / उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार की हिंसा में मारे गए लोगों में 19 वर्ष का एक किसान भी था. मौत के क्षणों में लवप्रीत सिंह ने अपने अस्‍पताल के बेड से पिता को बुलावा भेजा और जल्‍दी आने की गुहार लगाई. हालांकि जब तक परिवार पहुंच पाता, देर हो चुकी थी.  लवप्रीत और तीन अन्‍य किसान रविवार को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में मारे गए 8 लोगों में शामिल हैं. मंत्री के काफिले में शामिल एक कार ने चार किसानों को कुचल दिया था.
        किसानों का आरोप है कि कार को 'मंत्रीजी' का बेटा, आशीष मिश्रा चला रहा था. यूपी पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया है. ताबूत में रखे शव के बगल में फफककर रोते हुए आज लवप्रीत के परिवार ने  ऑटोप्‍सी रिपोर्ट और आशीष मिश्रा के खिलाफ हुई एफआईआर की कॉपी दिए जाने तक अंतिम संस्‍कार करने से इनकार कर दिया.
       लवप्रीत के पिता ने कहा, 'मेरा बेटा कार के नीचे कुचला गया ...इन्‍होंने इसके लिए जिम्‍मेदार शख्‍स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है.' लवप्रीत की दो बहने अपने इकलौत भाई की मौत से सदमे की सी स्थिति में हैं. लवप्रीत यह कहते हुए घर से निकला था कि वह अच्‍छे काम के लिए बाहर जा रहा है. लवप्रीत के पिता ने बताया, 'जब वे उसे अस्‍पताल लेकर गए तो उसने फोन किया. मैंने पूछा-बेटा तुम कैसे हो तो उसने कहा-पापा मैं ठीक हूं, कृपया जल्‍दी आइए. मैंने कहा कि हम रास्‍ते में है लेकिन जब हम लखीमपुर खीरी पहुंचे,  उसकी मौत हो चुकी थी. '

    नई दिल्ली / एजेंसी / लखीमपुर हिंसा को लेकर सरकार ने किसानों की सारी शर्तें मान ली हैं, लेकिन गुनहगारों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. किसानों ने भी सोमवार को सरकार के साथ सुलह के बाद अपना आंदोलन खत्म कर दिया था, लेकिन सवाल ये है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी आजाद कैसे घूम रहे हैं. इस हादसे में चार किसानों को गाड़ी से कुचल मार डाला गया, जबकि कई जख्मी हो गए. हादसे में जख्मी किसान नेता तजिंदर विर्क गंभीर हालत में मेदांता अस्पताल में भर्ती है. जहां उनका इलाज चल रहा है.
       लखीमपुर में किसानों के प्रदर्शन को बुलाने वाले किसान नेता तजिंदर विर्क ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि ये हमें मारने की साजिश रची गई थी. विर्क ने हादसे का आँखों देखा हाल बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ने बयान दिया था कि वो किसानों को लखीमपुर में क्या यूपी में नहीं रहने देंगे. अजय मिश्रा के इसी बयान के खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान हम लगातार एसपी और डीएम के संपर्क में थे.
       विर्क ने बताया कि वहां यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य आ रहे थे तो हम लोग रास्ते में काले झंडे दिखाने के लिए खड़े थे. फिर 3 बजे के करीब हमें बताया गया कि रूट बदल दिया गया है. हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से वापस जाने लगे. अचानक से पीछे से बहुत तेज रफ्तर में गाड़ियों आईं और हमें पीछे से टक्कर मारी. वापस जा रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी गई और उस गाड़ी में अजय मिश्रा का बेटा और उसके लोग सवार थे. उसके बाद मुझे कुछ होश नहीं था.
      साथ ही उन्होंने बताया कि गाड़ी की रफ़्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा थी. हमें जानबूझकर कर पीछे से टक्कर मारी गई. हमारा पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था. हमारी तरफ से पहले कोई लाठी या पत्थर नहीं चलाया गयाा था. आक्रोशित भीड़ ने बाद में उन पर हमला कर दिया. हमारे ही लोगों ने कुछ लोगों को बचाया और पुलिस के हवाले किया. पुलिसवाले वहां मौजूद थे. मैं इमानदारी से गवाही देने को तैयार हैं.
      किसान नेता ने कहा कि 72 घंटे हो गए हैं लेकिन अभी तक अजय मिश्रा की गिरफ्तारी नहीं हुई है. अजय मिश्रा को मंत्री पद से हटाया जाए. मैं सभी किसानों से अपील करता हूं कि शांति बनाए रखें. योगी सरकार की पुलिस ही हमलावरों की मदद कर रही है. बिना किसी हिंसा के हम लोग शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे.

    नई दिल्‍ली / शौर्यपथ / NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा 2021 में आखिरी मौके पर बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर नाराजगी जताई है. केंद्र सरकार के परीक्षा दो महीने टालने के नए प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर किया. शीर्ष अदालत ने  केंद्र सरकार को बुधवार को फिर से विचार कर आने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि या तो सरकार खुद पुराने पैटर्न पर परीक्षा कराए वरना कानून के हाथ लंबे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरी वक्त में परीक्षा पैटर्न में बदलाव तार्किक होना चाहिए. सरकार के कदम से संदेश मिल रहा है कि मेडिकल पेशा एक बिजनेस बन गया है. .मेडिकल शिक्षा एक बिजनेस बन गई है.हम भविष्य के लिए योजना नहीं बनाते, यही समस्या है.आखिरी वक्त में पैटर्न बदलने की जरूरत क्या है? सरकार नया पैटर्न ला सकती है ये उसके डोमैन में है लेकिन ये अगले साल ये लागू हो.
       जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, 'आपको उन्हें कुछ समय देने की जरूरत है,  बदलाव करने की क्या जल्दी है? सरकार को छात्रों के लिए कुछ चिंता करनी चाहिए. इन छात्रों ने इतने लंबे समय से तैयारी की है.जिस दिन से वे MBBS में शामिल होते हैं, उनका लक्ष्य सुपरस्पेशलिटी में जाने का होता है.वे लगातार अध्ययन करते हैं और प्रतिबद्ध हैं.अब आप कह रहे हैं कि परीक्षा दो महीने और टाल दी जाए.क्यों दो महीने और बर्बाद होने दें .ये छात्र इतने लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं. ' जब केंद्र की ओर से उपस्थित एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि केवल 41 छात्रों ने याचिका दायर की है जबकि पांच हजार छात्र परीक्षा में बैठते हैं तो जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले लोगों की संख्या कोई मायने नहीं रखती.जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इन 41 के पास कोई विकल्प नहीं है. यह उनके जीवन और करियर का मामला है .उन्हें भी अंततः परीक्षा में शामिल होना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बुधवार तक का समय दिया है.
       इससे पहले नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा 2021 के परीक्षा पैटर्न को छात्रों के लिए अधिक लचीलापन लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए बदला गया था कि ये टेस्ट उन पाठ्यक्रमों के आधार पर किया जाए जिन्हें वे पहले से जानते हैं. NBE ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि  संशोधित पैटर्न यह भी सुनिश्चित करेगा कि सुपर स्पेशियलिटी सीटें खाली न रहें. PG  डॉक्टरों को संशोधित पैटर्न के अनुसार तैयारी के लिए अधिक समय देने के लिए, NBE ने परीक्षाओं को दो महीने के लिए टालने का प्रस्ताव दिया है. सुप्रीम कोर्ट से नवंबर 13/14 की बजाए 10-11 जनवरी, 2022 को आयोजित करने की अनुमति मांगी है. पिछली सुनवाई में NEET PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा 2021 (NEET PG Super-Speciality exam 2021) के पाठ्यक्रम में अंतिम समय में बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई  थी.अदालत ने केंद्र से कहा था कि युवा डॉक्टरों के साथ 'सत्ता के खेल में फुटबॉल' की तरह बर्ताव बंद हो. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाने और जवाब देने को कहा था.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में रविवार को हुई हिंसा में किसानों की मौत को लेकर सियासत जारी है. इस मामले में यूपी सरकार ने किसानों की सारी मांगें मान ली हैं. यूपी पुलिस ने केंद्रीय मंत्री के बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. इस पर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि बुधवार तक अगर केंद्रीय मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी नहीं हुई तो पंजाब कांग्रेस लखीमपुर खीरी तक मार्च करेगी. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को रिहा करने के लिए भी कहा है.
       सिद्धू ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'किसानों की हत्या के पीछे जिस केंद्रीय मंत्री के बेटे का हाथ है, उसे बुधवार तक गिरफ्तार नहीं किया गया और किसानों के हक में लड़ रहीं गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार की गईं हमारी नेता प्रियंका गांधी को रिहा नहीं किया गया तो पंजाब कांग्रेस लखीमपुर खीरी तक मार्च करेगी.'
      बता दें, सोमवार को भी इस घटना के खिलाफ सिद्धू ने पार्टी के कई विधायकों के साथ चंडीगढ़ में राजभवन के बाहर प्रदर्शन किया था. सिद्धू, मदनलाल जलालपुर, गुरप्रीत सिंह समेत कांग्रेस के अन्य विधायक और पंजाब युवा कांग्रेस के कई सदस्य राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के आवास के बाहर धरने पर बैठ थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ नारेबाजी की थी. उन्होंने लखीमपुर खीरी में हुई घटना में कथित संलिप्तता के लिए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे की गिरफ्तारी की मांग की थी.
      वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सोमवार को यूपी सरकार ने लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जबकि उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और कांग्रेस के कुछ विधायकों को हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा के पास रोकने के बाद उन्हें ‘हिरासत' में ले लिया गया था.
      बता दें, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी गई थी. इस हादसे में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद पूरे देश में किसानों ने प्रदर्शन किया था. वहीं, सभी पार्टियों के नेताओं ने लखीमपुर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन यूपी सरकार ने किसी भी नेता को वहां नहीं पहुंचने दिया.

    अहमदाबाद / एजेंसी / भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को गांधीनगर नगर निगम (जीएमसी) में अपनी सत्ता बरकरार रखी और दो अन्य नगर निकायों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस ने भगवा पार्टी से देवभूमि-द्वारका जिले में भानवड नगरपालिका को छीन लिया. जीएमसी में भाजपा ने सुबह नौ बजे मतगणना शुरू होने के बाद से ही बढ़त बना ली थी और अंत में प्रतिद्धंद्वी कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी (आप) को बड़े अंतर से शिकस्त दी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हाल में राज्य में अचानक मुख्यमंत्री समेत पूरी कैबिनेट को बदले जाने के बाद जीएमसी चुनाव को भाजपा की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था. पार्टी ने इस साल फरवरी में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी जीत हासिल की थी.
       राज्य निर्वाचन आयुक्त (एसईसी) की ओर जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, जीएमसी की कुल 44 सीटों में से भाजपा ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस को दो और आप को एक सीट मिली है. तीन अन्य नगर पालिकाओं- देवभूमि-द्वारका जिले के ओखा और भानवड और बनासकांठा जिले की थारा नगरपालिका के लिए भी मतगणना हुई. मतगणना के बाद एसईसी द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने थारा की 24 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि चार सीटें कांग्रेस को मिली हैं. वहीं भाजपा ने ओखा नगरपालिका की 36 में से 34 सीटें जीत कर अपनी सत्ता बरकरार रखी जबकि शेष दो सीटें कांग्रेस के खाते में गईं. हालांकि भानवड में भाजपा को झटका लगा है जहां कांग्रेस ने 24 में से 16 सीटें जीतीं है और भगवा दल को सिर्फ आठ सीटें मिली हैं. भानवड पर भाजपा का 1995 से कब्जा था.
      जीएमसी और तीन अन्य नगरपालिकाओं के लिए मतदान रविवार को हुआ था. इसके अलावा, विभिन्न अन्य स्थानीय निकायों की 104 रिक्त सीटों पर प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए उपचुनाव भी उसी दिन हुए थे. गांधीनगर में कुल 2.8 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 56.24 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. ओखा और भानवड में क्रमश: 55.07 और 62.27 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि थारा में 73.55 फीसदी वोट डाले गए. गांधीनगर में, पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों भाजपा और कांग्रेस के अलावा आप ने भी काफी जोर लगाया था. जीएमसी चुनाव में कुल 161 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था. भाजपा और कांग्रेस ने सभी 44 सीटों पर और आप ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
      2016 के जीएमसी चुनावों में, उस वक्त की 32 सीटों में से कांग्रेस और भाजपा दोनों ने 16-16 सीटें जीती थीं. तब दोनों पार्टियों के पास ड्रॉ के माध्यम से बोर्ड बनाने की समान संभावना थी लेकिन आखिरी समय में, कांग्रेस पार्षद प्रवीण पटेल ने पाला बदल लिया और भाजपा को नगर निकाय में सत्ता में आने में मदद की. यह चुनाव इस साल अप्रैल में होने थे, लेकिन कोविड-19 के अधिक मामलों को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था.

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