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भिवंडी पुलिस की छापेमारी में खुला बड़ा नेटवर्क, 1.5 करोड़ की डील का खुलासा; 3 आरोपी गिरफ्तार, हरियाणा-बिहार कनेक्शन की जांच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIT जांच के दिए आदेश।
मुंबई । महाराष्ट्र में लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी Maha TET 2026 परीक्षा पेपर लीक के सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थगित कर दी गई है। परीक्षा शुरू होने से महज 24 घंटे पहले हुए इस खुलासे ने पूरे राज्य की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भिवंडी पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर शनिवार को की गई छापेमारी में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से बरामद संदिग्ध प्रश्नपत्रों का महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने सत्यापन कराया, जिसमें यह पुष्टि हुई कि बरामद प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। इसके बाद परिषद ने रविवार, 28 जून 2026 को आयोजित होने वाली परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र की बिक्री के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की बड़ी डील तय की गई थी। जांच एजेंसियों को इस पूरे रैकेट के तार हरियाणा और बिहार तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जिससे यह मामला एक अंतरराज्यीय संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के आदेश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। लाखों अभ्यर्थी अब नई परीक्षा तिथि की घोषणा और निष्पक्ष जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली / सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कुछ पोस्टों में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इन पोस्टों में भाषण के एक चुनिंदा अंश को उद्धृत करके यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। ये पोस्ट जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
रक्षा मंत्री के संसदीय भाषण को विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश करने वालों ने जानबूझकर उनके बयान के पूरे संदर्भ को नजरअंदाज किया है। यह याद रखना जरूरी है कि रक्षा मंत्री के भाषण के समय, मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रचलित और प्रभावी धारणा फैली हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट लापता हो गए थे। यह धारणा पूरी तरह से झूठी थी, फिर भी इसे ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के स्पष्ट इरादे से आक्रामक रूप से फैलाया जा रहा था। उसी संदर्भ में रक्षा मंत्री ने यह बयान दिया था इसलिए, उनकी टिप्पणी उस समय बेहद तेजी से फैल रहे झूठ का लक्षित और प्रासंगिक जवाब थी।
रक्षा मंत्री के भाषण को उसके संपूर्ण और उचित संदर्भ में समझना भी महत्वपूर्ण है। संसद में दिया गया उनका भाषण, संपूर्ण रूप से, ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता का गौरवपूर्ण और सटीक वर्णन था। इस ऑपरेशन में भारतीय रक्षा बलों ने अद्वितीय सटीकता, दृढ़ संकल्प और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाया गया था। इसके साथ ही नियंत्रण रेखा पर स्थित पाकिस्तानी हवाई ठिकानों और तैनाती क्षमता को व्यापक एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत क्षति भी पहुंची। यह भाषण भारतीय रक्षा बलों के साहस और क्षमता को उचित श्रद्धांजलि थी और भारत को नुकसान पहुंचाने की इच्छा रखने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश था।
रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय रक्षा बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति, और विशेष रूप से राष्ट्र की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति, अपना आदर, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। उनका बलिदान मातृभूमि की सर्वोच्च सेवा है और इसे सदा गरिमा, गौरव और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
उनके सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर अंकित हों। सरकार ने वीर शहीदों के परिवार/आश्रितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में रियायतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।
पीआईबी ने भ्रामक दावों का किया खंडन, शहीदों को समय पर मिली श्रद्धांजलि और वीरता सम्मान
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों के सम्मान को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर प्रसारित भ्रामक दावों का स्पष्ट खंडन किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने कहा है कि यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है कि इन सैनिकों के बलिदान को हाल ही में पहली बार आधिकारिक मान्यता दी गई या सार्वजनिक किया गया।
पीआईबी के अनुसार, राष्ट्र ने इन अमर वीरों को उनके बलिदान के तुरंत बाद ही पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए इन सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था।
इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन वीर सैनिकों को प्रदान किए गए वीरता पुरस्कारों की जानकारी सार्वजनिक की गई। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर तत्काल श्रद्धांजलि अर्पित कर इन वीरों के अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
पीआईबी ने बताया कि 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। वहीं 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित विशेष समारोह में वायु सेना प्रमुख ने संबंधित शहीदों के परिजनों को वीरता सम्मान सौंपा। यह भारतीय सशस्त्र बलों की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रत्येक सैनिक का सम्मान सर्वोच्च गरिमा के साथ किया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों के नाम अंकित करने की एक निर्धारित और सम्मानजनक प्रक्रिया होती है, जिसका भारतीय सशस्त्र बल पूरी गंभीरता और प्रोटोकॉल के साथ पालन करते हैं। इसलिए यह कहना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
पीआईबी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के निराधार दावे न केवल तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करते हैं, बल्कि शहीदों के परिजनों को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाने और राष्ट्र के वीर सपूतों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का जोखिम भी पैदा करते हैं। सभी मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और तथ्यात्मकता का पालन करें तथा अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार से बचें।
राष्ट्र का प्रण
भारतीय सशस्त्र बलों ने दोहराया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के छहों वीर सैनिक राष्ट्र के अमर नायक हैं। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी स्मृति का सम्मान हमेशा पूर्ण गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाता रहेगा।
नई दिल्ली। नागर विमानन मंत्रालय ने चारधाम यात्रा-2026 के पहले चरण में हेलीकॉप्टर संचालन को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बताया है। अप्रैल से 26 जून 2026 तक चले इस चरण में 12,032 शटल उड़ानों के जरिए 67,064 तथा 2,065 चार्टर उड़ानों से 11,715 श्रद्धालुओं को यात्रा सुविधा मिली। इस प्रकार कुल 78,779 तीर्थयात्रियों ने हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ उठाया।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम यात्रा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। उन्होंने उत्तराखंड सरकार, डीजीसीए, एएआई, यूकाडा और अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़े मानक लागू किए गए। प्रतिदिन लगभग 400 हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन हुआ। हेलीकॉप्टर ट्रैकिंग, उन्नत मौसम निगरानी, एटीसी सेवाएं, 33 पीटीजेड कैमरों से निगरानी, दो एकीकृत कमांड सेंटर, सख्त पायलट योग्यता मानक और नियमित सुरक्षा ऑडिट जैसे उपायों के कारण पूरा संचालन बिना किसी घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
मंत्रालय ने इसे देश के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय विमानन क्षेत्रों में सुरक्षित संचालन का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए कहा कि भविष्य में भी हेलीकॉप्टर सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।
नई दिल्ली / भारतीय तटरक्षक बल ने 27 जून, 2026 को गोवा स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में नई पीढ़ी के त्वरित गश्ती जहाज (एफपीवी) आईसीजीएस अक्षय को अपने बेड़े में शामिल कर आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
अक्षय नाम का यह तेज गश्ती पोत देश के समुद्री हितों की रक्षा के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता, दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक है। यह पोत भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा तथा समुद्री सुरक्षा और स्वच्छ समुद्री वातावरण बनाए रखने के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
यह पोत तटरक्षक बल के विभिन्न अभियानों को पूरा करने में सक्षम है, जिनमें समुद्री कानून का प्रवर्तन, तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री पर्यावरण संरक्षण व संकटग्रस्त नाविकों को सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी।
इस पोत को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अपर सचिव (कार्मिक) श्रीमती परमा सेन ने भारतीय तटरक्षक बल में कमीशन किया। इस अवसर पर तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा, पीटीएम, टीएम, डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एचआरडी) इंस्पेक्टर जनरल ज्योतिंद्र सिंह, टीएम और केंद्र व राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा डिजाइन एवं निर्मित आईसीजीएस अक्षय स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पोत के भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होने से देश की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को और बल मिलेगा तथा भारत के समुद्री इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) विवाद पर अंतिम सुनवाई पूरी; मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय की संभावना, दलबदल कानून बनेगा सबसे बड़ी कसौटी
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष दोनों मामलों में अंतिम दौर की सुनवाई पूरी हो चुकी है और संसदीय सूत्रों के अनुसार जुलाई में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।
टीएमसी ने अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि सांसदों द्वारा 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI)' में विलय का दावा संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अनुरूप नहीं है। पार्टी का कहना है कि केवल सांसदों का समूह किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता और वैध विलय के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने भी बागी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। पार्टी का कहना है कि दलबदल के मामलों में संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए। महाराष्ट्र में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
स्पीकर का फैसला अंतिम नहीं होगा
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है, लेकिन 1992 के 'किहोतो होलोहान बनाम जाचिल्हू' फैसले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आता है। ऐसे में स्पीकर का कोई भी फैसला सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में चुनौती दिया जा सकता है।
मानसून सत्र में वोटिंग का क्या होगा?
जब तक किसी सांसद को औपचारिक रूप से अयोग्य घोषित नहीं किया जाता, तब तक वह संसद का सदस्य बना रहता है और सदन की कार्यवाही में भाग लेने तथा मतदान करने का अधिकार रखता है। यदि स्पीकर का फैसला सत्र से पहले नहीं आता या मामला अदालत में लंबित रहता है, तो बागी सांसद सामान्य रूप से वोट कर सकते हैं, जब तक कि अदालत विशेष रूप से उनके मतदान पर रोक न लगाए।
यदि स्पीकर बागियों के पक्ष में फैसला देते हैं, तो मूल राजनीतिक दल अदालत से अंतरिम रोक (Stay) की मांग कर सकते हैं। वहीं यदि स्पीकर उन्हें अयोग्य घोषित करते हैं, तो बागी सांसद राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसी स्थिति में अदालत अंतरिम राहत, सशर्त भागीदारी या अन्य उपयुक्त आदेश दे सकती है।
राजनीतिक महत्व भी बड़ा
इस पूरे विवाद पर देश की नजर इसलिए भी टिकी है क्योंकि आगामी मानसून सत्र में सरकार महत्वपूर्ण विधेयक और संभावित संवैधानिक संशोधन ला सकती है, जिनके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में बागी सांसदों की सदस्यता और उनके मतदान के अधिकार पर आने वाला फैसला राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
फिलहाल मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के बाद इसके सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की पूरी संभावना बनी हुई है।
अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम
किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस
रायपुर / शौर्यपथ / अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।
श्री परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन एवं चोरी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर के दान पात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी तथा सोना, चांदी और हीरे के आभूषणों में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर ली है।
मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के आधार पर इस कथित घोटाले का आकार ₹200 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है, हालांकि इस राशि की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच भारी अंतर सामने आने के दावे किए गए। आरोप है कि 14 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने कई कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन समेत कुछ दानदाताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण और धार्मिक उपयोग के लिए भेजी गई लगभग 60 किलो चांदी तथा कई बहुमूल्य हार, चरण पादुकाएं और अन्य आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई दान वस्तुओं की रसीद और आधिकारिक अभिलेख भी नहीं मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। जांच के दौरान दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार उसके घर से अलमारी और उपलों के ढेर के नीचे छिपाकर रखी गई लगभग 10 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है। मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, रामशंकर यादव (टिन्नू) सहित कई पुजारियों और बैंक अधिकारियों से बंद कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई। SIT ने अयोध्या के ग्रीन हाउस में छह दिनों तक डेरा डालकर दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और दान प्रबंधन प्रणाली की जांच की।
जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी बाधा मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम को लेकर सामने आई है। परिसर में लगभग 1,000 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे होने के बावजूद फुटेज का बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद डेटा स्वतः नष्ट हो जाता है। जांच एजेंसियों को कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ रवाना हो चुकी है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई, संभावित अभियोजन और विस्तृत वित्तीय ऑडिट पर निर्णय लिया जा सकता है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मामले की जांच अभी जारी है। ₹200 करोड़ की कथित हेराफेरी, आभूषणों की चोरी और अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही तय होगी।
कोलकाता।
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। लाखों लोगों की उपस्थिति और विश्व के अनेक देशों की सहभागिता के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी कला है जिसे प्रत्येक व्यक्ति, परिवार और आने वाली पीढ़ियों की दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में योग को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया इसे स्वास्थ्य, संतुलन और शांति के माध्यम के रूप में स्वीकार कर रही है। उन्होंने योग को मानवता के लिए भारत का अमूल्य उपहार बताते हुए इसके वैश्विक विस्तार पर प्रसन्नता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने "हेल्दी एजिंग" अर्थात स्वस्थ बुढ़ापे की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि योग को नियमित जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो 70 वर्ष की आयु में भी व्यक्ति स्वयं को 50 वर्ष जैसा स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय महसूस कर सकता है। योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
योग को दैनिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने ‘योग 365’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके तहत 100 दिनों का एक ऑनलाइन अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसमें अब तक 130 देशों के लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई है। यह पहल योग को एक दिन के कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर वर्ष के 365 दिनों की जीवनशैली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग का महत्व केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह समाज में सकारात्मकता, राष्ट्रों के बीच सद्भाव और विश्व शांति का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, तब योग मानवता को संतुलन, संयम और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखा रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने उन करोड़ों लोगों का आभार व्यक्त किया जो दुनिया के विभिन्न देशों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है और यह दिखाता है कि योग की शक्ति सीमाओं से परे मानवता को जोड़ने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं लोगों के बीच जाकर विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास कराया और प्रतिभागियों को सुरक्षित तथा वैज्ञानिक तरीके से योग करने के लिए प्रेरित किया। रेड रोड पर आयोजित यह विशाल योगाभ्यास कार्यक्रम अनुशासन, ऊर्जा और सामूहिक चेतना का अद्भुत उदाहरण बन गया।
कोलकाता के रेड रोड से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था—
“योग को एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन की दिनचर्या बनाइए। स्वस्थ शरीर, शांत मन और बेहतर भविष्य का यही सबसे सरल मार्ग है।”
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
