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March 24, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

महिला सरपंच ने लगाया धमकी और अभद्रता का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे बुंदेली चौकी

संतराम कुर्रे की रिपोर्ट 

पिथौरा/महासमुंद। जिले के पिथौरा क्षेत्र में रेत उत्खनन को लेकर विवाद तूल पकड़ता नजर आ रहा है। ग्राम कोड़ोपली की सरपंच सरिता राज सिंह दीवान ने आरोप लगाया है कि 26 फरवरी को गांव में रेत से जुड़े विवाद के दौरान एक व्यक्ति ने उनके साथ धक्का-मुक्की करते हुए अभद्र व्यवहार किया और जान से मारने की धमकी दी।

सरपंच के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने और गांव की करीब 50 महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा बुंदेली चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई दिनों बाद भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया।

इसी के विरोध में ग्राम भुरकोनी और आसपास के लगभग 100 ग्रामीण सरपंच के समर्थन में बुंदेली थाना पहुंचे और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरपंच सरिता राज सिंह दीवान ने कहा कि घटना के बाद से वे और गांव की महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं और प्रशासन से सुरक्षा तथा न्याय की मांग कर रही हैं।

वहीं, इस संबंध में चौकी प्रभारी ने बताया कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई एसडीओपी एवं संबंधित थाना स्तर से की जाएगी

एसडीओपी ने कहा कि शिकायत के आधार पर प्रक्रिया चल रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन को लेकर क्षेत्र में पहले भी विवाद की स्थिति बन चुकी है और प्रशासन को इस पर प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

मृणेन्द्र चौबे

राजनांदगांव।शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नीलू शर्मा आज पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के मानबाजार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित परिवर्तन यात्रा (रथ यात्रा) में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भीड़ उमड़ी और लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

नीलू शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण की नई दिशा देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा में कार्यकर्ताओं और नागरिकों का उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की मजबूत इच्छा दिखाई दे रही है और जनता भाजपा के विज़न को स्वीकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है। भाजपा का उद्देश्य प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई शुरुआत करना है।

कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली सहित प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। मानबाजार विधानसभा में आयोजित परिवर्तन यात्रा ने यह संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल अब बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है और भाजपा के नेतृत्व में विकास का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

महासमुंद से संतराम कुर्रे की खास रिपोर्ट 

पिथौरा/महासमुंद। पुराने सिक्कों से करोड़ों रुपये दिलाने का लालच देकर ठगी करने का एक मामला सामने आया है। पिथौरा विकासखंड के ग्राम बुंदेली निवासी यशवंत साहू ने आरोप लगाया है कि पूजा-पाठ कराने के बहाने घर आए एक व्यक्ति ने उन्हें चार लाख रुपये की ठगी का शिकार बना दिया।

इस संबंध में पीड़ित यशवंत साहू ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पिथौरा में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि उन्होंने वासुदेव महाराज नामक व्यक्ति को पूजा-पाठ कराने के लिए अपने घर बुलाया था। पूजा के दौरान घर में रखे पुराने सिक्कों को देखकर वासुदेव ने दावा किया कि वह इन सिक्कों के बदले करोड़ों रुपये दिलवा सकता है।

पीड़ित के अनुसार, इसी लालच में आकर उन्होंने वासुदेव महाराज को करीब चार लाख रुपये दे दिए। बाद में जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो आरोप है कि आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

यशवंत साहू ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की है तथा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी भी मांगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कार्रवाई नहीं होने से आहत पीड़ित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


नकद, मोबाइल व ताश सहित 58,100 रुपये का मशरूका जब्त, जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई

    धमतरी। जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए धमतरी पुलिस द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना अर्जुनी पुलिस ने ग्राम आमदी स्थित शराब दुकान के पीछे चल रहे जुआ फड़ पर दबिश देकर 09 जुआरियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, थाना अर्जुनी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम आमदी की शराब दुकान के पीछे कुछ लोग ताश पत्ती के माध्यम से रूपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी करते हुए दबिश दी।

दबिश के दौरान पुलिस ने मौके से 09 लोगों को सार्वजनिक स्थान पर 52 पत्ती ताश से जुआ खेलते हुए पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से 23,100 रुपये नगद, 07 मोबाइल फोन (लगभग 35,000 रुपये) तथा ताश पत्ती जब्त की गई। जब्त मशरूका की कुल कीमत 58,100 रुपये आंकी गई है।

इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध थाना अर्जुनी में अपराध क्रमांक 36/26 धारा 3(2) जुआ एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।

गिरफ्तार जुआरियों के नाम:
शेखर साहू (33) निवासी भानपुरी,
द्वारिका साहू (26) निवासी आमदी,
टिमेश साहू (27) निवासी आमदी,
सोमेश्वर पटेल (30) निवासी पेण्डरवानी, जिला बालोद,
धनेश्वर चंदेल (42) निवासी पलारी, जिला बालोद,
टीकम महार (33) निवासी परसतराई,
गोकुल राम साहू (36) निवासी परसतराई,
पवन कुमार सतनामी (50) निवासी पलारी, जिला बालोद,
भूपेन्द्र सेन (27) निवासी रत्नाबांधा धमतरी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

   दुर्ग / शौर्यपथ / हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के शोधार्थी आदित्य नारंग को “दुर्ग संभाग के नगर निगम क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में बैंकिंग एवं नॉन-बैंकिंग साख की भूमिका का अध्ययन” विषय पर 2 मार्च 2026 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
यह शोध कार्य डॉ. विजय कुमार वासनिक, सहायक प्राध्यापक, शासकीय कन्या महाविद्यालय दुर्ग के मार्गदर्शन तथा डॉ. एस.एन. झा, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (वाणिज्य), शासकीय विश्वनाथ यादव तमस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के सह-निर्देशन में संपन्न हुआ।
आदित्य नारंग के पिता श्री आलोक कुमार नारंग दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। वे कलेक्टर रीडर तथा जिला नाजिर जैसे पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में दुर्ग में ही निवासरत हैं।
अपने शोध में आदित्य नारंग ने दुर्ग संभाग के नगरीय क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख की भूमिका का अध्ययन किया है। शोध में यह बताया गया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को एनबीएफसी के माध्यम से अपेक्षाकृत सुलभ ऋण सुविधा प्राप्त होती है, जिसका उनके व्यवसाय और आर्थिक सशक्तिकरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में परंपरागत बैंकिंग प्रणाली और एनबीएफसी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख व्यवस्था के बीच के अंतर, उससे जुड़ी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है। शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन व्यवस्थाओं का नगर निगम क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के व्यवसायिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
शोधार्थी की मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोसे) हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के टैगोर हॉल में आयोजित की गई। इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. उमेश होलानी, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर (मध्यप्रदेश) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आंतरिक परीक्षक डॉ. विजय कुमार वासनिक, डॉ. एस.एन. झा, विश्वविद्यालय पीएचडी प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव सहित डॉ. अनिल जैन, डॉ. के.एल. राठी, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा, डॉ. आर.पी. अग्रवाल, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. प्रदीप कुमार जांगड़े, डॉ. लाली शर्मा, डॉ. प्रीति तन्ना टांक, डॉ. हरीश कश्यप सहित अनेक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर आदित्य नारंग ने अपने मार्गदर्शकों, विश्वविद्यालय परिवार, सहयोगियों, शुभचिंतकों और परिवारजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के सहयोग और विश्वास का परिणाम है, जिनसे उन्हें समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली।

  रायपुर / शौर्यपथ / बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।
कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।

बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।

   रायुपर / शौर्यपथ / श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।

श्रीमती सगो तेता ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान बना चुकी
कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।

समूह ने बढाया आगे श्रीमती सगो को
एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।

खेतों में द्विफसली सिंचाई की मिली सुविधा
समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।

आजीविकामूलक गतिविधियों ने बनाई लखपति दीदी
इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।

जीवन में आया बड़ा बदलाव, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ
लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं।

  
साभार - धनंजय राठौर, सयुक्त संचालक,
ताराशंकर सिन्हा, सहायक संचालक जनसंपर्क

बिहान मिशन ने बदली जिंदगी – किराना से कपड़ा व्यवसाय तक आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर / शौर्यपथ।
मेहनत, दृढ़ संकल्प और अटूट लगन से अभावों को अवसरों में बदलकर अपने विकास की कहानी लिखना संभव है। यह प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की रहने वाली श्रीमती हरमानिया देवी राजवाड़े ने, जो कभी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए संघर्ष करती थीं। आज वही हरमानिया देवी एक सफल उद्यमी बनकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं और अपने बच्चों को बड़े शहरों में उच्च शिक्षा दिला रही हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा लेकर आई है। इसी योजना से जुड़कर हरमानिया देवी ने अपने जीवन की दिशा ही बदल दी।


शून्य से लखपति दीदी बनने तक का सफर

हरमानिया देवी बताती हैं कि बिहान मिशन से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब वे आकांक्षा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष बनीं, तो उनके जीवन में नई उम्मीद जगी।

समूह के माध्यम से उन्होंने पहला ऋण प्राप्त किया और अपने गांव में ही छोटी सी किराना और श्रृंगार दुकान की शुरुआत की।


मेहनत और ऋण से बढ़ता गया कारोबार

लगन और ईमानदारी से किए गए प्रयासों से उनका किराना व्यवसाय सफल हुआ। व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद उन्होंने समय पर ऋण चुकता किया और फिर आगे बढ़ते हुए दूसरा ऋण लेकर कपड़ों का व्यवसाय भी शुरू किया।

आज उनका व्यापार लगातार बढ़ रहा है और वे गांव में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जा रही हैं। हरमानिया देवी कहती हैं कि “बिहान ने हमें सिखाया कि छोटे-छोटे कदमों से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।”


बच्चों की शिक्षा बना सबसे बड़ा सपना

आर्थिक मजबूती का सबसे सकारात्मक असर उनके बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। हरमानिया देवी गर्व से बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब वे बच्चों को सामान्य शिक्षा दिलाने में भी असमर्थ थीं, लेकिन आज उनकी आमदनी इतनी बढ़ चुकी है कि उनके बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

वे अब बिना किसी कठिनाई के बच्चों की पढ़ाई और फीस की जिम्मेदारी निभा पा रही हैं।


शासन की योजनाओं के लिए जताया आभार

हरमानिया देवी ने अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उनका मानना है कि बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल करने का अवसर दिया है।


आज छत्तीसगढ़ में हरमानिया देवी जैसी हजारों महिलाएं बिहान मिशन के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही है।

बिहान मिशन ने बदली जिंदगी – सिलाई और फैंसी स्टोर से आत्मनिर्भर बनीं अमृता साहू

राजनांदगांव / शौर्यपथ।
“उम्मीदों के जुगनू झिलमिलाते हैं, मन में हौसला हो तो ख्वाब पूरे होते हैं।”
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम खुटेरी की लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू की कहानी महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव में अपनी एक अलग पहचान भी स्थापित की।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर अमृता साहू को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा मिली। वे जय मां शारदा स्व सहायता समूह की सदस्य बनीं और नियमित बचत की शुरुआत की। समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त कर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और फैंसी स्टोर की शुरुआत की।

सिलाई और फैंसी स्टोर बना आत्मनिर्भरता का आधार

अमृता साहू ने बताया कि सिलाई का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्हें गांव और आसपास से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे। साथ ही अपने फैंसी स्टोर में श्रृंगार सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुएं रखने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई।

वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 8 हजार रुपये और वार्षिक आय लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। इस आय से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

अमृता साहू बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले वे मजदूरी का कार्य करती थीं, जबकि उनके पति कृषि कार्य पर निर्भर थे। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। लेकिन बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

शासन की योजनाओं से मिला सहारा

अमृता साहू वर्तमान में शासन की कई योजनाओं से भी लाभान्वित हो रही हैं, जिनमें

  • राशन कार्ड

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • आयुष्मान कार्ड

  • महतारी वंदन योजना

शामिल हैं। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है।

भविष्य के सपनों को दे रही नई उड़ान

अमृता साहू का सपना है कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाएं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए भविष्य में कपड़ों की दुकान का विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मिले सहयोग ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमृता साहू की यह कहानी बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प साथ हो, तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।

 कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं : सीएम साय

रायपुर / शौर्यपथ / संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुश्री वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सुश्री वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर सुश्री वैभवी अग्रवाल के पिता श्री शीतल अग्रवाल और भाई श्री विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।

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