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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर / शौर्यपथ / बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ में फंसे करीब 40 लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित निकालकर राहत शिविर पहुंचाया गया। तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया। पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भरने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों एवं पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया।
9 राहत शिविरों में 350 से अधिक लोगों को आश्रय
बस्तर जिले में 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। जगदलपुर के चार शिविरों में 175 लोग ठहरे हैं। शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक लोगों के भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था की गई है। नगरनार के नदी बोड़ना शिविर में करीब 40, भैंसगांव में 77, बेलगांव में 35 तथा ग्राम पंचायत भेजा में 26 प्रभावितों को आश्रय दिया गया है।
सभी शिविरों में भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कलेक्टर और एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के आसपास तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग सहित विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर राहत व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, निचले क्षेत्रों में सतर्कता
लगातार बारिश से इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ओडिशा स्थित खातीगुड़ा बांध के तीन और मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके मद्देनजर नदी तटीय एवं निचले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दल नावों और आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करने, अफवाहों पर ध्यान न देने और आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रशासन, पुलिस एवं आपदा प्रबंधन दल समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।
रायपुर । शहर को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के संदेश के साथ स्वच्छता ही सेवा एवं सेवा संकल्प अभियान के तहत मठपारा स्थित महाराजबंध तालाब में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नगर निगम की टीम, ग्रीन आर्मी, स्वयंसेवी-सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने एक साथ श्रमदान किया। उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने स्वयं अभियान में शामिल होकर लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और सफाई मित्रों का सम्मान किया।
उपमुख्यमंत्री साव ने कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना होगा, तभी शहर स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनेंगे। उन्होंने कहा कि हर नागरिक अपने आसपास सफाई रखने को अपनी जिम्मेदारी बनाए। सरकार के प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वच्छता के प्रयास स्थायी और प्रभावी होंगे।
तालाब परिसर में किया श्रमदान
महाराजबंध तालाब परिसर में श्रमदान के दौरान सभी ने मिलकर कचरा और गंदगी साफ की। लोगों को तालाबों और अन्य जलस्रोतों को स्वच्छ रखने, उनमें कचरा नहीं डालने तथा सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि शहर की स्वच्छता केवल नगर निगम या सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू एवं पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, महंत रामसुंदर दास, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन और सूडा सीईओ सुमित अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
पांच सफाई मित्रों का सम्मान
कार्यक्रम में सफाई मित्र रमेश सोना, अवधेश सोनी, घना कुर्रे, अमित धीवर और राहुल राजपूत को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने शहर को स्वच्छ रखने में सफाई मित्रों की भूमिका की सराहना की।
विधायक सुनील सोनी ने सेवा, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ स्वच्छता अभियानों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। अतिथियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। “सेवा मेरा योगदान” की भावना के साथ हुए श्रमदान में विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
रायपुर । प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हो रही भारी बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को बारिश, नदी-नालों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रखा गया है और भारी बारिश के कारण कहीं भी किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने कहा कि आमजन को किसी तरह की परेशानी न हो और जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचे।
नदी-नालों और जलमग्न रास्तों से रहें दूर
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों के पास जाने से बचें, क्योंकि पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। जलमग्न पुल-पुलियों और सड़कों को पार करने का प्रयास नहीं किया जाए। जिन स्थानों पर सुरक्षा के लिए बैरियर लगाए गए हैं, वहां प्रशासन के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।
उन्होंने अनावश्यक यात्रा से बचने, विशेषकर रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की। गिरे हुए बिजली के तारों और अन्य विद्युत खतरों से दूर रहने तथा इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग, पुलिस या स्थानीय प्रशासन को देने कहा।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देने की अपील की। पहाड़ी क्षेत्रों और भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर भी सतर्क रहने कहा गया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक डायल 112 अथवा स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें। मौसम और राहत संबंधी जानकारी के लिए केवल शासन-प्रशासन एवं अन्य अधिकृत स्रोतों से जारी सूचनाओं पर भरोसा करें तथा अफवाहों और भ्रामक संदेशों को आगे न बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सतर्कता, संयम और परस्पर सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। आसपास किसी व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता होने पर यथासंभव मदद करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें।
दुर्ग/रायपुर / विकसित भारत-जीरामजी योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए राज्य स्तरीय जिला मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शुक्रवार को ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में आयोजित किया गया। विकसित भारत-जीरामजी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में हुए प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों ने हिस्सा लिया।
आयुक्त सिन्हा ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना की सफलता के लिए ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। ग्राम सभाओं में प्रत्येक गांव की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर खुलकर संवाद किया जाए तथा बस्ती एवं वार्ड स्तर तक पहुंचकर अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागी विकास योजना तैयार करने, डिजिटल मैपिंग, परिसंपत्तियों के सत्यापन और विभिन्न योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य जिला मास्टर ट्रेनर्स को योजना निर्माण की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराना है, ताकि निर्धारित समय-सीमा में ग्राम पंचायतों की योजनाएं तैयार हो सकें।
2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में शुरू होगा योजना निर्माण
प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को गांव के आधारभूत आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, मानचित्रों और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण स्वयं गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताएं तय करने में भागीदारी करेंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायत की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार होगी।
अक्टूबर-नवंबर में होगा स्थल सत्यापन, दिसंबर में अनुमोदन
अक्टूबर और नवंबर में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इस दौरान समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित कार्यों पर ग्रामीणों से सुझाव लिए जाएंगे। गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी होगा। भौतिक रूप से उपलब्ध लेकिन डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं परिसंपत्तियों को युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। प्रस्तावित विकास कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर भी चिह्नित किया जाएगा।
दिसंबर में तैयार योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष रखा जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों एवं विचार-विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप देकर ग्राम सभा से अनुमोदन लिया जाएगा और विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं का विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन 15 जनवरी तक पूरा किया जाएगा।
जल सुरक्षा और आजीविका पर रहेगा जोर
वीजीपीपी में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़ी अधोसंरचना तथा प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना बनाते समय गांवों के प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का भी आकलन किया जाएगा।
प्रशिक्षण में संयुक्त आयुक्त रामाधन श्रीवास, दीपक शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनय गुप्ता, सहायक आयुक्त यशवत चंद्राकर, राज्य एमआईएस नोडल अधिकारी मजहर शामी एवं वीबी-जीरामजी संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी ने योजना निर्माण की प्रक्रिया और तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी असर
रायपुर, / कभी बारिश की बूंदें सरिता बैगा के परिवार के लिए चिंता लेकर आती थीं। कच्ची दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में रहने वाले इस परिवार को हर बरसात में छत टपकने और घर को सुरक्षित रखने की चिंता सताती थी। आज वही सरिता अपने पक्के घर के आंगन में खड़ी होकर अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रही हैं। यह बदलाव उनके लिए केवल एक पक्के मकान का मिलना नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी चिंता से मुक्ति और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया अवसर है।
पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी श्रीमती सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे घर में रहता था। बारिश शुरू होते ही घर की छत से पानी टपकने लगता था। खपरैल को संभालना और हर साल उसकी मरम्मत करना परिवार के लिए बड़ी परेशानी थी। बच्चों को बारिश से बचाने की चिंता अलग रहती थी। ऐसे समय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम जनमन आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
योजना के माध्यम से सरिता बैगा के परिवार को पक्का आवास मिला। अब उनका घर बारिश में नहीं टपकता। परिवार के पास एक सुरक्षित छत है, जहां बच्चे निश्चिंत होकर रह सकते हैं और पूरा परिवार सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकता है। सरिता के लिए यह बदलाव उनके चेहरे पर आई मुस्कान में साफ दिखाई देता है।
सरिता कहती हैं कि पहले बारिश आते ही चिंता होने लगती थी कि घर की छत कहां से टपकेगी और बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। अब पक्का घर मिलने के बाद बारिश का डर खत्म हो गया है। उनके लिए उनका नया घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और खुशहाल जीवन की मजबूत नींव है।
महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल
सरिता बैगा को हर माह महतारी वंदन योजना की राशि भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों और परिवार के छोटे-बड़े खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। एक ओर पक्का आवास परिवार को सुरक्षा दे रहा है, वहीं नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू बजट को संभालने में उनका साथ दिया है।
सरिता के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वित प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय एवं वंचित परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इन योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
सरिता बैगा के लिए सरकार की योजनाएं अब कागज पर दर्ज प्रावधान नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन में महसूस किया गया बदलाव हैं। पक्के घर की सुरक्षित छत और आर्थिक सहायता ने उनके परिवार में आत्मविश्वास बढ़ाया है। वह कहती हैं कि सरकार की योजनाओं ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी है और बच्चों के भविष्य को लेकर उनका भरोसा मजबूत हुआ है।
सरिता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की योजनाएं जीवन बदलने का माध्यम बन रही हैं। उनके लिए पक्का घर उस सपने के पूरा होने जैसा है, जिसे कभी उन्होंने केवल मन में संजोया था। कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का यह सफर सरिता बैगा के परिवार की कहानी भर नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जब शासन की योजनाएं गांव के अंतिम छोर तक पहुंचकर किसी परिवार की जिंदगी में सुरक्षा, सम्मान और खुशियों की नई सुबह लेकर आती हैं।
साहित्य, लोककला, संगीत, नृत्य, सिनेमा और रंगकर्म सहित 13 क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान, 5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेज सकेंगे आवेदन
रायपुर, / संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रदान किए जाने वाले राज्य सम्मान 2026 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। विभाग द्वारा स्थापित 12 राज्य स्तरीय सम्मान एवं 1 राष्ट्रीय सम्मान के लिए निर्धारित प्रारूप में 5 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित प्रतिभाओं को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
राज्य सम्मान के लिए इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन में आवेदक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि एवं आयु के साथ प्रस्तावक का विवरण तथा आवेदक की उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्यौरा देना होगा। आवेदक द्वारा पूर्व में प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों की जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश एवं जिला स्तर पर प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों का विवरण शामिल किया जाना है।
शासकीय सेवा में कार्यरत आवेदकों को सामान्य प्रशासन विभाग से अनुमति पत्र संलग्न करने का प्रावधान भी रखा गया है। सम्मान की नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
13 प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा सम्मान
संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए विभिन्न विधाओं और क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया जाएगा। पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में, दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में तथा चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार लोक नृत्य के क्षेत्र में तथा लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में दिया जाएगा। हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म के लिए प्रदान किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं के नाटक शामिल हैं।
इसी क्रम में देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में और खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
सिनेमा के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को सम्मान
किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय एवं पटकथा निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। वहीं किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर रहकर सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास, कला, साहित्य अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अप्रवासी भारतीयों को प्रदान किया जाएगा। डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाएगा।
दीर्घ साधना और उपलब्धियों के आधार पर होगा चयन
संबंधित क्षेत्रों में उपलब्धि, योगदान एवं दीर्घ साधना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभाओं को ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में राज्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा।
प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच एवं सिनेमा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने की यह पहल राज्य की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजें आवेदन
संस्कृति विभाग ने संबंधित क्षेत्र के पात्र कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों एवं अन्य प्रतिभाओं से निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां 5 अक्टूबर 2026 तक पंजीकृत डाक से भेजने का आग्रह किया है।
आवेदन इस पते पर भेजे जा सकते हैं:
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा
द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27,
नवा रायपुर अटल नगर, छत्तीसगढ़
आवेदन निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों एवं उपलब्धियों के विवरण के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजना होगा। सम्मान से संबंधित विस्तृत जानकारी, नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप संस्कृति विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
रायपुर,/ किसी भी समृद्ध और सर्वसुविधायुक्त राज्य का निर्माण केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कार्यकुशलता से संभव होता है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में 'GYAN' यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को रखा गया है। युवाओं को आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मुख्य आधार मानते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक और परिणामोन्मुख कायाकल्प की शुरुआत की जा चुकी है। अब शिक्षा को केवल औपचारिक डिग्रियों तक सीमित न रखकर आधुनिक उद्योगों की माँग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक बनाया जा रहा है।
उच्च शिक्षा में मिशन मोड: उपलब्धियां और लक्ष्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उच्च शिक्षा विभाग पूरी तरह से 'मिशन मोड' में कार्य कर रहा है। 'उच्च शिक्षा मिशन योजना' के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए वर्तमान में 27.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही, शोध और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना' का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा को जड़ों से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल किया गया है।
गुणवत्ता, अवसंरचना और रोजगार के नए अवसर
शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नैक (NAAC) मूल्यांकन पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके तहत पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 तथा 09 में से 05 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सफलता से पूर्ण हो चुका है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए शैक्षणिक अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है; वर्ष 2025–26 में 08 नए शासकीय महाविद्यालय, 05 नए निजी महाविद्यालय और 03 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। संस्थाओं में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये समन्वित प्रयास वर्ष 2047 के स्वर्णिम और विकसित प्रदेश की एक सुदृढ़ नींव रख रहे हैं।
साभार -विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
बस्तर, नारायणपुर और बलरामपुर में झमाझम बरसे बादल
रायपुर, /
छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून की बारिश ने राज्य स्तर पर सामान्य आंकड़े को छू लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी 25 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार प्रदेश में अब तक 100.1% यानी शत-प्रतिशत सामान्य वर्षा दर्ज की जा चुकी है। 1 जून से 25 सितंबर की अवधि में राज्य में औसतन 1082.4 मि.मी. वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि बीते 10 वर्षों के आधार पर इस अवधि की संभावित औसत वर्षा 1081.5 मि.मी. मानी जाती है। बीते 24 घंटों में ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में औसतन 52.8 मि.मी. पानी बरसा है।
क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें तो इस बार सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है। बलरामपुर जिला 169.4% बारिश के साथ प्रदेश में प्रतिशत के हिसाब से सबसे आगे बना हुआ है, जहाँ अब तक 1527.7 मि.मी. पानी गिर चुका है। वहीं कुल वर्षा की मात्रा के मामले में नारायणपुर जिला शीर्ष पर है, जहाँ अब तक रिकॉर्ड 1600.4 मि.मी. बारिश दर्ज हो चुकी है। बस्तर जिले में एक ही दिन में सर्वाधिक 188.2 मि.मी. और कोंडागांव में 161.8 मि.मी. बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद नारायणपुर में 151.9 मि.मी. तथा गरियाबंद में 110.3 मि.मी. बारिश हुई।
मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। रायपुर जिले में अब तक 1180.2 मि.मी. (129.5%), गरियाबंद में 1357.7 मि.मी. (126.5%), धमतरी में 1201.7 मि.मी. (113.4%), महासमुंद में 1204.2 मि.मी. (121.7%), और बालोद में 1192.1 मि.मी. (115.0%) बारिश के साथ सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।इसी तरह बिलासपुर संभाग के मुंगेली में 1026.5 मि.मी. (108.8%), सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1161.3 मि.मी. (134.1%), तथा सूरजपुर में 1173.6 मि.मी. (111.2%) वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से पीछे चल रहा है। सरगुजा जिले में अब तक 606.6 मि.मी. (75.5%), जशपुर में 828.7 मि.मी. (79.7%), कबीरधाम में 672.0 मि.मी. (82.2%), बेमेतरा में 597.1 मि.मी. (74.5%), और कांकेर में 1110.7 मि.मी. (75.9%) बारिश दर्ज की गई है, जो औसत के मुकाबले कम की श्रेणी में आता है। इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (74.7%) तथा बीजापुर (78.7%) में भी प्रतिशत के लिहाज से औसत से कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य के काफी करीब बना हुआ है।
राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रदेश भर की नदियों के जलस्तर और बारिश के आंकड़ों की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन जिलों में हाल ही में भारी वर्षा हुई है, वहाँ निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
समन्वय और तकनीकी सहायता के लिए खेल विभाग ने अधिकारियों को दी जिम्मेदारी
सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में होगा ट्रायल, 6 टीमें बनेंगी
रायपुर. / रायपुर में होने वाले छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन के टीमों के चयन के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। टीमों के चयन के लिए रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के पिच-1 में 28 सितम्बर और 29 सितम्बर को दो दिवसीय चयन ट्रायल का आयोजन किया जा रहा है। चयन ट्रायल के सुचारू आयोजन, आवश्यक समन्वय एवं तकनीकी सहायता के लिए विभाग ने तीन अधिकारियों की टीम बनाई है। चयन ट्रायल के लिए आवश्यक तकनीकी एवं आयोजन संबंधी कार्यवाही छत्तीसगढ़ हॉकी संघ द्वारा निर्धारित नियमों एवं मापदंडों के अनुसार की जाएगी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो ने छत्तीसगढ़ हॉकी संघ को परिपत्र जारी कर खिलाड़ियों के चयन ट्रायल के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। विभाग ने निर्धारित तिथियों एवं समय पर चयन ट्रायल के आयोजन के साथ ही ट्रायल प्रारंभ होने के पहले चयन पूर्व मानदंडों और चयन प्रक्रिया का लिखित विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। विभाग ने चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निर्धारित मानदंडों के अनुरूप संपादित कर चयनित 6 टीमों की सूची एवं चयन प्रक्रिया से संबंधित प्रतिवेदन खेल संचालनालय को उपलब्ध कराने को कहा है।
इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
खिलाड़ियों के चयन के लिए होने वाले ट्रायल को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने आवश्यक तकनीकी और आयोजन संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तीन अधिकारियों को सौंपी है। इनमें खेल अधिकारी श्री दीनू प्रसाद पटेल, रायपुर में हॉकी की वरिष्ठ प्रशिक्षक श्रीमती रश्मि संध्या एक्का और बिलासपुर में वरिष्ठ हॉकी प्रशिक्षक श्री राकेश टोप्पो शामिल हैं।
21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक होगी छत्तीसगढ़ हॉकी लीग, 6 टीमें उतरेंगी
छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली छह टीमें मैदान में उतरेंगी। इनमें राजधानी रॉयल्स, चित्रकूट चैलेंजर्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, न्यायधानी नाइट्स और मैनपाट टाइटन्स शामिल हैं। इन टीमों में खेलने वाले खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल 28-29 सितम्बर को रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के पिच-1 में सवेरे 9 बजे से आयोजित किए जा रहे हैं।
दिवंगत शिक्षक के वेतन निर्धारण का समय पर अनुमोदन नहीं कराने और लंबित पेंशन के संबंध में गलत जानकारी भेजने का मामला
रायपुर,/ लोक शिक्षण संचालनालय ने मुंगेली जिले में दिवंगत शिक्षक के पेंशन प्रकरण से जुड़े कार्यों में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर छह अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालक श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आदेश जारी किया है।
आदेशानुसार, शासकीय हाईस्कूल लाखासार में पदस्थ सहायक शिक्षक विज्ञान अंजनी त्रिपाठी का 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद परिवार पेंशन और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान के प्रकरण की प्रक्रिया में यह पाया गया कि वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक एल बी संवर्ग संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण की सक्षम प्राधिकारी से समय पर जांच और अनुमोदन नहीं कराया गया। विलंब से अनुमोदन के कारण अधिक भुगतान की वसूली की स्थिति बनी।साथ ही लंबित पेंशन के संबंध में संचालनालय लोक शिक्षण को गलत जानकारी भेजे जाने का भी उल्लेख है।
इस मामले में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन सिंह राजपूत, सहायक ग्रेड-3 मोतीराम यादव, सहायक ग्रेड-2 त्रिवेणी ध्रुव, सहायक ग्रेड-3 अशोक ध्रुव तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पेंशन कक्ष प्रभारी एवं कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुघन कुलमित्र को निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में नियम विरुद्ध कार्य, गंभीर लापरवाही और शासकीय कार्य में विलंब पाया गया। निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
रायपुर, / छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 14 करोड़ 78 लाख 61 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।
जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के टेकापार जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 94 लाख 42 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूरा होने से 133 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह से साल्हेवारा जलाशय का जीर्णोद्धार, नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 33 रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 164 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। सिंगारपुर व्यपवर्तन शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार एवं नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 98 लाख 86 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 111 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एकात्म मानववाद के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रचिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने विचारों और सिद्धांतों के माध्यम से राष्ट्र के समग्र विकास की ऐसी दृष्टि प्रस्तुत की, जिसके केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति है। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनका ‘अंत्योदय’ का सिद्धांत गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाना उनके विचारों के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प को अभिव्यक्त करता है। एकात्म मानववाद और अंत्योदय का उनका दर्शन आज भी राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण की दिशा में प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार, आदर्श और राष्ट्रसेवा का भाव सदैव देश और समाज को प्रेरित करता रहेगा।
मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा जलस्तर, जेवरा-सिरसा पुलिस ने दोनों ओर की बेरिकेडिंग
दुर्ग। मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने और अन्य बैराजों से पानी की आवक बढ़ने के बाद शिवनाथ नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से समोदा नाला पर दुर्ग-बेमेतरा मार्ग की पुलिया पानी में डूब गई, जिसके चलते इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस ने सड़क के दोनों ओर बेरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। पुलिस द्वारा वाहन चालकों को मार्ग पर आगे नहीं बढ़ने तथा वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की गई है।
जलस्तर बढ़ने से बढ़ी सतर्कता
शिवनाथ नदी सहित आसपास के नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से लोगों को नदी और नालों के आसपास जाने से बचने तथा पानी के तेज बहाव वाले स्थानों पर किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।
पुलिस द्वारा मार्ग पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि जलभराव और तेज बहाव के बीच कोई वाहन या व्यक्ति जोखिम में न पड़े। फिलहाल दुर्ग-बेमेतरा मार्ग पर समोदा नाला की पुलिया से आवागमन बंद है।
‘मेरी पौष्टिक थाली’ से लेकर स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता तक हुए आयोजन, ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ का दिया संदेश
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो / संतराम कुर्रे
पिथौरा। विकासखंड पिथौरा के गौरव ग्राम बुंदेली में पोषण माह के अंतर्गत पांचों आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘सेवा संकल्प आंगन मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पिथौरा सेक्टर भुरकुनी के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता को लेकर विभिन्न गतिविधियां कराई गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनपद सदस्य श्रीमती जयंती सिदार एवं वक्ता श्रीमती अलका शर्मा उपस्थित रहीं। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती क्षमा ताड़े ने कार्यक्रम की गतिविधियों और उद्देश्य की जानकारी दी।
हल्दी-चावल से अतिथियों को न्योता
सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन कार्यक्रम में अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक रूप से हल्दी-चावल देकर सादर आमंत्रित किया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। बच्चों को मिठाई एवं फल का वितरण किया गया।
‘मेरी पौष्टिक थाली’ और स्वास्थ्य जांच बनी आकर्षण
बुंदेली के पांचों आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘मेरी पौष्टिक थाली’ और पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, बच्चों की खेल गतिविधियां और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया गया।
पोषण वाटिका को बढ़ावा देने के लिए पौधरोपण किया गया तथा ग्रामीणों को ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य परिवारों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों एवं माताओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना रहा।
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा आंगन मिलन
महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती क्षमा ताड़े ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न चरणों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां होंगी।
इस दौरान महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाएं अपने अनुभव साझा करेंगी तथा पात्र हितग्राहियों का पंजीयन भी किया जाएगा। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग स्वयं एवं बच्चों के पोषण के लिए करने वाली माताओं को ‘पोषण शक्ति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।
पहले दिन 25 सितंबर को कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसके बाद निर्धारित तिथियों के अनुसार यह आयोजन 7 अक्टूबर तक जारी रहेगा। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं, बच्चों और समुदाय की सहभागिता से पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
