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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर/नई दिल्ली ।
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित “अमृत मित्र महोत्सव” में छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हुए देशभर के सामने अपने कार्यों और अनुभवों को साझा किया। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की 75 “अमृत मित्र” महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में बिलासपुर नगर निगम की श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की श्रीमती हेमलता खत्री ने केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर से आई लगभग 1000 अमृत मित्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए और शहरी जल प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
यह सम्मेलन अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के अंतर्गत महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आई महिलाओं ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और शहरी विकास से जुड़े अपने-अपने नवाचार और अनुभव साझा किए।
छत्तीसगढ़ से शामिल हुईं ये महिलाएं राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचनाओं के संचालन तथा सामुदायिक जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन तथा विकास मंत्री श्री अरुण साव ने 11 मार्च को रायपुर रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर इन महिलाओं के दल को नई दिल्ली के लिए रवाना किया था।
“वीमेन फॉर ट्री” अभियान से पर्यावरण संरक्षण और आजीविका
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं ‘वीमेन फॉर ट्री’ अभियान के तहत वृक्षारोपण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही वे शहरों में जल गुणवत्ता परीक्षण, जल उपचार संयंत्र (WTP) और वितरण नेटवर्क के संचालन में सहयोग भी कर रही हैं।
साथ ही ये महिलाएं जल संरक्षण, स्वच्छता और ‘कचरे से कंचन’ जैसे अभियानों के माध्यम से आम नागरिकों को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
राष्ट्रीय मंच पर साझा किए अनुभव
महोत्सव में अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी ने कहा कि
“हम केवल पौधे ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम भी कर रहे हैं। इस पहल से हमें आजीविका का अवसर मिला है, जिससे हम अपने परिवार की आय में भी योगदान दे पा रहे हैं।”
वहीं श्रीमती हेमलता खत्री ने कहा कि
“जल संरक्षण के लिए हम बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कर रहे हैं और पौधों की देखभाल अपने बच्चे की तरह करते हैं। उन्हें बढ़ते हुए देखकर हमें बेहद खुशी और संतोष मिलता है।”
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दी बधाई
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव ने इस उपलब्धि पर महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने कार्यों और अनुभवों को प्रस्तुत करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि “वीमेन फॉर ट्री – अमृत मित्र योजना” के माध्यम से महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है, जिससे वे समाज और पर्यावरण दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / ✈️
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो (IndiGo) ने विमान ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते 14 मार्च 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया देना होगा।
एयरलाइन कंपनी के अनुसार यह अतिरिक्त शुल्क नई टिकट बुकिंग पर ही लागू होगा, यानी 14 मार्च या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर यह सरचार्ज लिया जाएगा।
दूरी और सेक्टर के आधार पर बढ़ा किराया
इंडिगो द्वारा लागू किए गए फ्यूल सरचार्ज को यात्रा की दूरी और अंतरराष्ट्रीय सेक्टर के आधार पर तय किया गया है।
घरेलू उड़ानें और भारतीय उपमहाद्वीप: ₹425 प्रति सेक्टर
मिडल ईस्ट (Middle East): ₹900 प्रति सेक्टर
दक्षिण पूर्व एशिया और चीन: ₹1,800 प्रति सेक्टर
अफ्रीका और पश्चिम एशिया: ₹1,800 प्रति सेक्टर
यूरोप: ₹2,300 प्रति सेक्टर
इस निर्णय के बाद छोटी दूरी की उड़ानों से लेकर लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक यात्रियों के किराए में वृद्धि देखने को मिलेगी।
ईंधन की कीमतों में 85% से अधिक उछाल
इंडिगो ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालात के कारण वैश्विक बाजार में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
एयरलाइन उद्योग में ईंधन सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। इंडिगो के अनुसार कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है, जिसके कारण कंपनी को यह अतिरिक्त शुल्क लागू करना पड़ा।
पहले एयर इंडिया ने भी किया था ऐलान
गौरतलब है कि इंडिगो से पहले एयर इंडिया ने भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया था। अब इंडिगो के इस कदम के बाद अन्य एयरलाइनों के भी इसी दिशा में कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।
यात्रियों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की लागत बढ़ेगी, जिससे यात्रियों के बजट पर असर पड़ सकता है। हालांकि एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच परिचालन संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
✈️ विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में हवाई किराए में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली / शौर्यपथ /
भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस प्रस्तुत किया है। जानकारी के अनुसार, यह भारत के इतिहास में किसी मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की पहल का पहला मामला माना जा रहा है।
इस प्रस्ताव को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह कदम उठाया है।
ममता बनर्जी की पहल पर तैयार हुआ प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार इस महाभियोग प्रस्ताव की रणनीति और निर्णय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पहल पर तैयार किया गया। टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह प्रस्ताव लाया गया है।
193 सांसदों के हस्ताक्षर
महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जिनमें
लोकसभा के 130 सांसद
राज्यसभा के 63 सांसद शामिल हैं।
संवैधानिक नियमों के अनुसार महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इस लिहाज से प्रस्ताव को प्रारंभिक समर्थन की आवश्यक संख्या प्राप्त हो चुकी है।
17 विपक्षी दलों का समर्थन
टीएमसी के इस कदम को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), द्रमुक (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), शरद पवार की एनसीपी सहित लगभग 17 विपक्षी दलों का समर्थन बताया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि हाल के समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न खड़े हुए हैं, जिन्हें संसद के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
लगाए गए गंभीर आरोप
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
प्रमुख आरोपों में शामिल हैं –
चुनावी अनियमितताओं की जांच में कथित रूप से बाधा उत्पन्न करना
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव
बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर आपत्ति
विपक्ष का दावा है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
क्या कहता है संविधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन और कठोर होती है। यह प्रक्रिया लगभग उसी प्रकार होती है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया।
इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है, जिसमें:
सदन के कुल सदस्यों का बहुमत
तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन शामिल होता है।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
अब यह महाभियोग नोटिस लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास जाएगा। यदि वे इसे स्वीकार करते हैं तो आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की जा सकती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संसद में आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक और संवैधानिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक बहस छिड़ सकती है।
यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो यह आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परीक्षण साबित हो सकता है।
नवा रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत राज्य में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को गति देने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी कड़ी में गठित “छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता निर्माण क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति” की पहली बैठक 17 मार्च 2026 को अपराह्न 4 बजे मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित की जाएगी।
यह बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाइब्रिड मोड (भौतिक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की होगी समीक्षा
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के प्रशासनिक मार्गदर्शन में गठित यह समिति राज्य में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने पर भी कार्य किया जाएगा।
iGOT प्लेटफॉर्म के उपयोग की होगी समीक्षा
राज्य नोडल अधिकारी (मिशन कर्मयोगी – iGOT), सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार बैठक में राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा iGOT डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के उपायों पर भी चर्चा होगी।
नई तकनीकों के उपयोग पर होगा विचार
बैठक के एजेंडे में राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों (ATI सहित अन्य संस्थानों) की भूमिका को सुदृढ़ करने, डिजिटल लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श भी शामिल है।
इसके अलावा राज्य स्तर से प्राप्त सुझावों को संकलित कर आगामी राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के लिए अनुशंसाएँ तैयार की जाएंगी।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ, रैंप शो में दिखा आदिवासी परिधानों का आकर्षण
रायपुर / शौर्यपथ /
राजधानी रायपुर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के उत्सव ‘आदि परब’ का रंगारंग आगाज हो गया। दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्सव को जीवंत बना रहे हैं।
इस वर्ष आदि परब की थीम ‘परम्परा से पहचान तक’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और जीवन शैली को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया। इस अवसर पर राज्य अंत्यावसायी आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक श्री हिना अनिमेष नेताम, श्रीमती गायत्री नेताम सहित विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।
रैंप शो में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक
आदि परब के उद्घाटन अवसर पर जनजातीय युवाओं ने पारंपरिक आदिवासी परिधानों में सजे-धजे रैंप शो के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधान, आभूषण और पारंपरिक शैली ने दर्शकों का खूब मन मोह लिया और लोगों ने उत्साह के साथ इस प्रस्तुति का आनंद लिया।
प्रदर्शनी और हाट बना आकर्षण का केंद्र
आदि परब में जनजातीय समाज के खान-पान, वेशभूषा, पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।
इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया गया है, जहां छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है।
समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री
आदि परब का समापन 14 मार्च को होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, जनजातीय समाज के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्ति
रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। विभाग द्वारा कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद शामिल हैं।
उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण कर उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा 24 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को विस्तृत जानकारी सहित पत्र भी भेजा जा चुका है।
विषयवार पदों का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक प्राध्यापक पदों के लिए विभिन्न विषयों में भर्ती की जाएगी, जिनमें—
हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पद
अर्थशास्त्र, इतिहास और भूगोल के 25-25 पद
कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15 पद
वाणिज्य के 75 पद
विधि (लॉ) के 10 पद
इसके अलावा ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद भी भरे जाएंगे।
जल्द जारी होगा विज्ञापन
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा का पाठ्यक्रम और विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मिलेगा बल
इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।
अतिथि प्राध्यापकों की व्यवस्था जारी
यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है।
विभाग के अनुसार अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट और सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं में योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ /
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल करना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नजर रखना और जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाना भी है। लेकिन जब प्रशासन स्वयं मीडिया को सवाल पूछने या स्वतंत्र रूप से कवरेज करने से रोकने लगे, तो स्वाभाविक रूप से कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।
ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से सामने आया है, जहां मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
क्या है पूरा मामला
डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का विशाल मेला प्रारंभ होने वाला है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।
इस बैठक में संभाग आयुक्त, राजनांदगांव आईजी, कलेक्टर जितेंद्र यादव, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस बैठक की वीडियो कवरेज कर रही थी, ताकि नवरात्रि मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जा सके।
लेकिन इसी दौरान राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया को यह कहते हुए कवरेज करने से रोक दिया कि “खबर आपको पीआरओ से मिल जाएगी।”
इस बयान के बाद बैठक में मौजूद पत्रकारों में असंतोष फैल गया और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया।
खड़े हो रहे हैं कई बड़े सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जगत में कई सवाल उठने लगे हैं —
क्या अब मीडिया को सिर्फ पीआरओ द्वारा जारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाएगा?
क्या प्रशासन नहीं चाहता कि मीडिया सीधे घटनास्थल से सच्चाई दिखाए और सवाल पूछे?
या फिर कहीं प्रशासन को यह आशंका तो नहीं कि मीडिया के सवालों से व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर हो सकती हैं?
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करना नहीं होती।
मीडिया का कार्य है
घटनास्थल से वास्तविक स्थिति सामने लाना
प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करना
जनता की समस्याओं को उठाना
और शासन की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना
अगर मीडिया को केवल पीआरओ द्वारा जारी जानकारी तक सीमित कर दिया जाए, तो स्वतंत्र पत्रकारिता का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।
संविधान क्या कहता है
भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसी अधिकार के अंतर्गत मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से समाचार जुटाने और प्रसारित करने की आज़ादी प्राप्त होती है।
हालांकि प्रशासनिक प्रोटोकॉल और सुरक्षा कारणों से कुछ परिस्थितियों में कवरेज सीमित किया जा सकता है, लेकिन सामान्य समीक्षा बैठक में मीडिया को रोकना कई बार पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर देता है।
पत्रकारों में नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों में नाराजगी देखी गई। कई पत्रकारों का कहना है कि —
“अगर खबर केवल पीआरओ के माध्यम से ही दी जाएगी, तो फिर स्वतंत्र रिपोर्टिंग कैसे होगी?
और अगर अधिकारी मीडिया के सवालों से बचने लगें, तो जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?”
प्रशासन की संभावित दलील
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कई बार प्रशासन व्यवस्था, सुरक्षा या बैठक की गोपनीयता के कारण मीडिया की कवरेज सीमित करता है।
लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब बैठक में मीडिया को आमंत्रित किया गया था, तो फिर कवरेज से रोकना कितना उचित है?
लोकतंत्र की मजबूती पारदर्शिता से
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता और जवाबदेही है। जब प्रशासन खुलकर मीडिया के सवालों का जवाब देता है, तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।
लेकिन यदि मीडिया को केवल सरकारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत नहीं माना जाता।
अब बड़ा सवाल
डोंगरगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि —
क्या प्रशासन और मीडिया के बीच दूरी बढ़ रही है?
क्या पत्रकारों को केवल पीआरओ की जानकारी तक सीमित किया जाएगा?
या फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उसका पूरा अधिकार मिलेगा?
यह सवाल केवल राजनांदगांव जिले का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बन गया है।
भाजपा सरकार बताये प्रति पशु चारा के लिए प्रतिदिन 10 रु में पशुधन को भरपेट खुराक कैसे मिलेगा?
रायपुर। भाजपा सरकार के गौधाम योजना को हवा हवाई बताते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार की गौधाम, गौ-अभ्यारण बनाने की योजना सिर्फ हवा हवाई है, सवा दो साल में धरातल पर कही नजर नही आ रही है। सरकार जब मान रही है, प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 993 से अधिक छुट्टा घुमन्तु गौवंश पशुधन है, जिसका कोई मालिक नही है। ऐसे में सवा दो साल में मात्र 3 गौधाम बनाकर पशुधन की संरक्षण की दावा झूठा एवं नकली है। सवा दो साल में 11 गौधाम का पंजीयन हुआ जिसमें मात्र 3 ही बन पाये है, एक गौधाम की क्षमता 200 पशुधन की है, ऐसे में 600 पशुधन को ही गौधाम में जगह मिला, शेष 1 लाख 84 हजार 303 पशुधन अभी भूखे प्यासे सड़क पर भटक रहे है। दुर्घटना और खुली चराई का कारण बन रहे है, ये सब भाजपा सरकार की गोठान के प्रति राजनीतिक द्वेष के चलते हो रहा है, गोठान में तालाबंदी के कारण हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश में 10000 से अधिक गोठान बनाए थे, उसमें से 7000 से अधिक गोठान आत्मनिर्भर थे। सरकार की उसमें फूटी कौड़ी नहीं लगती थी, महिला स्वसहायता समूह और गौठान समिति मिलकर उसका संचालन करती थी, गांव-गांव में पैरा दान होता था और डे केयर के रूप में वह पशुधन को संरक्षण देते थे, भाजपा की सरकार ने गोठानों में ताला लगाकर पशुधन के साथ अन्याय किया है, महिला स्व सहायता समूह से भी काम छीना है। गोठानो में तालाबंदी के चलते किसान भी खुली चराई से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। परेशान है दुर्घटनाएं हो रही है अभी सरकार ने सवा दो साल में पशुधन संरक्षण के लिए कोई काम नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार बताये गौधाम योजना में चारा के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 10 रु. निर्धारित किया गया है, इसमें कौन सा चारा मिलेगा? 10 रु. में पशुधन को भरपेट भोजन कैसे मिलेगा? 10 रु. में पशुधन के लिए चारा की व्यवस्था करने का निर्णय हास्यपद है। सरकार दावा कर रही है कि 1460 गौधाम बनायेगे तो जिसमे 5 एकड़ चारागाह के लिए जमीन दी जायेगी तो कितने स्थानों पर चारागाह की जमीन की व्यवस्था की गई है। भाजपा का गौधाम योजना सिर्फ फर्जी विज्ञापन बाजी है। भाजपा आरएसएस से जुड़े लोगों को पालने पोसने एवं सरकारी जमीन पर कब्जा देने की योजना है। इससे पशुधन को कोई लाभ नही होगा बल्कि संघ भाजपा के नेता मालामाल होंगे।
बिजली दरों में कटौती और 400 यूनिट तक रियायत दे सरकार, समाधान योजना से ईमानदार उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं - कांग्रेस
रायपुर। बिजली बिल के समाधान योजना 2026 को सरकार का प्रोपोगेंडा बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार ईमानदारी से अपने बकाया का भुगतान करने वाले बिजली उपभोक्ताओं को हतोत्साहित करना चाहती है, यदि सरकार वास्तविक राहत और रियायत देना चाहती है तो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की तरह बिना किसी भेदभाव के 400 यूनिट तक घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में आधी छूट का लाभ दे और दो सालों में 5-5 बार की गई भारी भरकम मूल्य वृद्धि वापस ले। स्मार्ट मीटर की बाध्यता खत्म करे, अनियंत्रित मुनाफाखोरी, लूट और अधिक वसूली तत्काल बंद करें।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एक तरफ यह सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज लगा दी है, दूसरी तरफ समाधान योजना का ढोल पीटकर केवल पुराने बकायादारों के बिलों पर सरचार्ज में शत प्रतिशत और मूल राशि में 75 प्रतिशत की मामूली राहत को मास्टर स्ट्रोक बताने केवल विज्ञापनबाजी कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बिजली बिल हॉफ योजना में दुर्भावना पूर्वक किए गए संशोधन और बार-बार बिजली के दाम बढ़ाने से आम लोगों के घरों का बिजली बिल 4 गुना अधिक आ रहा है। महंगी बिजली के बाद भी यह सरकार जनता को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में 8 से 9 घंटे तक बिजली कटौती से जनता परेशान है। ज़मीन हमारी, कारखाने हमारे, कोयला हमारा, पानी हमारा, हमारे ही राज्य में बिजली का सरप्लस उत्पादन फिर भी हमें ही महंगी दरों पर बिजली बेची जा रही है। सारे राहत और रियायत, छत्तीसगढ़ के संसाधनों को केवल भाजपा के चहेतों पर ही लुटाए जा रहे हैं। अब तो कोयले पर लगने वाला सेस भी हट गया है जिसके कारण कोयले के दाम पर न्यूनतम 400 रुपए प्रति टन कम हुआ है लेकिन बिजली के उत्पादन लागत में कमी का लाभ भी यह सरकार आम जनता से छिन रही है।
रायपुर /\ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा की पूर्व सदस्य श्रीमती मंगली बाई रावटे के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय मंगली बाई रावटे अत्यंत सरल, विनम्र और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व की धनी थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के लोगों के सुख-दुःख में सदैव सहभागिता निभाते हुए सेवा और सहयोग की भावना से कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता था। उनके निधन से समाज ने एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी कमी सदैव महसूस की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
रायपुर, । छत्तीसगढ़ विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम तथा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग से संबंधित वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं। इनमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 1567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपये तथा श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रुपये शामिल हैं।
उद्योग मंत्री Laxmi Lal Devangan (लखनलाल देवांगन) ने सदन में बताया कि Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
मंत्री देवांगन ने बताया कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बजट में 1750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें:
652 करोड़ रुपये उद्योगों को अनुदान के लिए
लगभग 700 करोड़ रुपये औद्योगिक भूमि अर्जन, भूमि विकास और अधोसंरचना विकास के लिए रखे गए हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन अब ई-निविदा प्रणाली से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और राजस्व में 20% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, आईटी, बीपीओ और क्लीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं।
पिछले एक वर्ष में
951 नए उद्योग स्थापित हुए
8000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ
45 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित हुए।
बस्तर से सरगुजा तक 23 नए औद्योगिक क्षेत्र और पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना भी शामिल हैं।
महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ाने के लिए बिलासपुर जिले में दो कामकाजी महिला हॉस्टल बनाए जा रहे हैं, जिनके लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
साथ ही स्टार्ट-अप मिशन को बढ़ावा देने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
श्रम मंत्री देवांगन ने बताया कि असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 श्रेणियों के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए 128 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए अभिनव पहल करते हुए:
वर्तमान में 96 बच्चों को डीपीएस और राजकुमार कॉलेज सहित उत्कृष्ट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है।
अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
इसके अलावा श्रमिक हित में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:
श्रमिक आवास योजना की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये
ई-रिक्शा सहायता भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये
राज्य में 32.58 लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं पर वर्ष 2025 में लगभग 387 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान
इंडस्ट्रियल हाइजीन लैब के लिए 5 करोड़ रुपये
कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए
10 जिला अधिकारी
85 आबकारी उपनिरीक्षक
की भर्ती की गई है, जबकि 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्धारित 10,500 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 10,145 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के 8430 करोड़ रुपये की तुलना में 20.35% अधिक है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 12,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 28 फरवरी 2026 तक 9660 करोड़ रुपये (80.50%) प्राप्त हो चुके हैं।
नवा रायपुर में आबकारी विभाग का कम्पोजिट कार्यालय भवन बनाने की योजना है, जिसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और ओबीसी-अल्पसंख्यक विभाग के लिए 6,976 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 6,976 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इस दौरान विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं अब SANKALP मॉडल पर आधारित होंगी।
मंत्री जायसवाल ने कहा, “मैं जीवन की रक्षा का संकल्प लेकर सेवा का दीप जलाने आया हूं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का हर नागरिक स्वस्थ रहे।”
मंत्री ने बताया कि SANKALP के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को सात प्रमुख आधारों पर विकसित किया जाएगा—
S – Strengthened Institutions (सशक्त संस्थान)
A – Academic Excellence (उत्कृष्ट अकादमिक गुणवत्ता)
N – Next Generation Research (नवोन्मेषी अनुसंधान)
K – Knowledge & Clinical Competency (कौशल एवं क्लीनिकल दक्षता)
A – Advance Medical Facilities (आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं)
L – Life Saving Infrastructure (जीवन रक्षक अधोसंरचना)
P – Professional & Transparent Governance (पारदर्शी प्रबंधन)
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज सुविधा प्रदान करने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार द्वारा स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत—
प्रदेश में 25 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
आम नागरिकों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 जन औषधि केंद्रों का विस्तार किया जाएगा।
रायपुर में प्रदेश का पहला होम्योपैथी कॉलेज खोला जाएगा।
बिलासपुर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाएगा।
रायपुर में अत्याधुनिक कार्डियक इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी।
सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में अधोसंरचना विकास के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने बताया कि अंबिकापुर और धमतरी में जिला अस्पतालों के नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा रायपुर के कालीबाड़ी क्षेत्र में 200 बिस्तरों वाला मातृ एवं शिशु चिकित्सालय तथा चिरमिरी में नया जिला अस्पताल बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने हेतु दुर्ग, कोंडागांव, जशपुर और रायपुर में जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
रायपुर में मध्य भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिसके लिए 95 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश को जांच के लिए अन्य महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आसपास के राज्यों को भी लाभ मिलेगा।
राज्य में एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने के लिए 300 नई एम्बुलेंस की खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 70 वेंटिलेटर युक्त अत्याधुनिक एम्बुलेंस और नवजात शिशुओं के लिए 10 विशेष एम्बुलेंस भी जल्द खरीदी जाएंगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।
राज्य में बनने वाले पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों (दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम) के लिए 1,240 पद तथा संबंधित अस्पतालों के लिए 500 पद स्वीकृत किए जाएंगे।
इसके अलावा डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के ट्रामा सेंटर भवन निर्माण और उपकरणों की खरीदी के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में छात्रावास निर्माण के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। इसके तहत रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर और जगदलपुर में छात्रावास बनाए जाएंगे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयुष विभाग हेतु 544 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
इसके अंतर्गत—
औषधियों के लिए 25.73 करोड़ रुपये
उपकरणों के लिए 4.16 करोड़ रुपये
जनभागीदारी के माध्यम से 7 आयुर्वेद चिकित्सालय, 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 692 आयुष औषधालयों के उन्नयन का भी प्रावधान है।
इस विभाग के लिए 251 करोड़ 68 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना शुरू करेगी, जिसके तहत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा और आवासीय सुविधा दी जाएगी।
इसके अंतर्गत—
बिलासपुर में 500 सीटर कन्या प्रयास आवासीय विद्यालय
रायपुर में 200 सीटर पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास
रायगढ़ और मनेन्द्रगढ़ में 100-100 सीटर छात्रावास
जशपुर में 50 सीटर प्री-मैट्रिक छात्रावास
निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए CG-ACE योजना के तहत उड़ान, शिखर और मंजिल योजनाएं शुरू की जाएंगी, जिसके लिए 9.63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट चर्चा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कई विधायकों ने भाग लिया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
