September 30, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (5050)

    दुर्ग । शहर को स्वच्छ, सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम आयुक्त लीना कोसम के निर्देश पर प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। निगम प्रशासन द्वारा जनजागरूकता के साथ बाजार क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं डिस्पोजल के उपयोग, बिक्री और भंडारण की जांच की जा रही है।

    इसी क्रम में निगम के अतिक्रमण विभाग एवं बाजार विभाग की संयुक्त टीम ने इंदिरा मार्केट क्षेत्र में दुकानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पांच दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टिक पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई।

    कार्रवाई के दौरान जैन प्लास्टिक पर ₹1,200, गोयल डिस्पोजल पर ₹1,000, संजय प्लास्टिक पर ₹1,000, हरिराम प्लास्टिक पर ₹700 तथा पंकज ट्रेडर्स पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया। इस तरह पांच दुकानदारों से कुल ₹4,900 की जुर्माना राशि वसूल की गई।

    निगम की टीम ने दुकानदारों को प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग, बिक्री और भंडारण नहीं करने की समझाइश दी। साथ ही चेतावनी दी गई कि दोबारा उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।

    निगम प्रशासन ने व्यापारियों एवं दुकानदारों से प्रतिबंधित प्लास्टिक और डिस्पोजल का उपयोग नहीं करने तथा स्वच्छता नियमों का पालन करने की अपील की है। निगम के अनुसार बाजार क्षेत्रों में निरीक्षण और चालानी कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

    दुर्ग। दूसरे वाहन के नंबर की कूटरचना कर अपने वाहन में फर्जी नंबर प्लेट लगाने और उसके कारण दूसरे वाहन मालिक के खाते से ट्रैफिक चालान एवं टोल टैक्स की राशि कटने के मामले में मोहन नगर पुलिस ने फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों रोहित कुमार कांकरिया (51) और अनूप रवलामी (55) को 20 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।

    पुलिस के अनुसार मामले में थाना मोहन नगर में अपराध क्रमांक 600/2026 के तहत धारा 336(3), 340(2), 345(3) एवं 347(1) बीएनएस में अपराध दर्ज किया गया है।

    ऐसे सामने आया मामला

    पुलिस के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को रायपुर निवासी मोनिश सोनी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी टोयोटा यारिस कार क्रमांक CG 07 BZ 5226 का नंबर किसी अन्य वाहन में फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रार्थी को अपने वाहन से संबंधित न होने वाले ट्रैफिक चालान और टोल राशि कटने के संदेश मिलने के बाद फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल की जानकारी हुई।

    विवेचना के दौरान पुलिस ने वाहन का उपयोग करने वाले विजय सेन को पूर्व में गिरफ्तार किया था, जिसे न्यायालय में पेश किए जाने के बाद केंद्रीय जेल दुर्ग भेजा गया।

    इसके बाद फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस को रोहित कांकरिया और अनूप रवलामी की संलिप्तता के संबंध में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार दोनों को 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया।

    2018 में फाइनेंस कराया था वाहन

    पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित वाहन को अनूप रवलामी ने वर्ष 2018 में रायपुर से फाइनेंस कराया था, लेकिन उसका आरटीओ में पंजीयन नहीं कराया गया। पुलिस के अनुसार बाद में यह वाहन रोहित कांकरिया को और फिर रोहित कांकरिया द्वारा विजय सेन को दिया गया।

    पुलिस का आरोप है कि बिना वैध दस्तावेज एवं पंजीयन के वाहन का उपयोग करते हुए दूसरे वाहन के वैध नंबर की कूटरचना कर नंबर प्लेट लगाई गई। इसके चलते वास्तविक वाहन मालिक को ऐसे ट्रैफिक चालान एवं टोल भुगतान का सामना करना पड़ा, जो उसके वाहन से संबंधित नहीं थे।

    घटनास्थल: रजत होम के पास, हरी नगर, दुर्ग।

    गिरफ्तार आरोपी:

    रोहित कुमार कांकरिया (51), निवासी सिंधिया नगर, मोहन नगर, दुर्ग।

    अनूप रवलामी (55), निवासी ईस्ट नेहरू नगर, भिलाई।

    दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वाहन खरीदते या बेचते समय आरटीओ पंजीयन सहित सभी दस्तावेजों की पूरी जांच करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जीवाड़े की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

    दुर्ग। अवैध शराब के भंडारण एवं बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस ने सारथी मोहल्ला क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से 24 नग देशी शोले मसाला मदिरा और 5 नग शेरा मसाला मदिरा, प्रत्येक 180 एमएल की सीलबंद बोतलें, कुल 5.220 बल्क लीटर शराब बरामद की गई।

    पुलिस के मुताबिक 20 सितंबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सारथी मोहल्ला स्थित टप्पा तालाब के पास पीपल पेड़ के सामने एक व्यक्ति झोले में शराब रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना की तस्दीक और कार्रवाई के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर वहां से भागने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ा गया।

    पूछताछ में उसने अपना नाम देवेन्द्र सारथी उर्फ दाऊ अंडा (26), निवासी वार्ड क्रमांक 03, सारथी मोहल्ला, मठपारा, दुर्ग बताया। पुलिस के अनुसार आरोपी शराब रखने और बिक्री के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बरामद शराब की कीमत ₹2,900 तथा बिक्री की रकम ₹150, इस प्रकार कुल ₹2,950 का सामान जब्त किया है। मामले में पुलिस ने धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार धारा के तहत मामला अजमानतीय होने के कारण आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

    घटनास्थल: सारथी मोहल्ला, टप्पा तालाब के पास, पीपल पेड़ के सामने, दुर्ग।

    पुलिस कार्रवाई: दुर्ग पुलिस टीम द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी एवं प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों के संकलन की कार्रवाई की गई।

    करोड़ों के कामों में बार-बार एक ही समूह की हिस्सेदारी पर उठे सवाल, दूसरे ठेकेदारों की कड़ी जांच तो आरबीएस के कामों पर निगम की खामोशी क्यों?

    दुर्ग। नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर महापौर अलका बाघमार लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं। कहीं सड़क और पेवर ब्लॉक के निर्माण में बेस की जांच हो रही है तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को डांट-फटकार लगाई जा रही है। लेकिन इसी बीच निगम में काम पाने वाले आरबीएस ग्रुप को लेकर ठेकेदारों और निगम से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं।

    चर्चा का मुख्य विषय यह है कि महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में आरबीएस ग्रुप को नगर निगम के निर्माण कार्यों में लगातार काम मिलने की स्थिति क्यों बनी? निगम की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यदि अन्य ठेकेदार दस्तावेजी जांच में अपात्र होते हैं और किसी विशेष समूह को लगातार काम मिलता है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाई जानी चाहिए?

    तीन-चार करोड़ के काम में आधे काम का दावा—क्या है वास्तविकता?

    निगम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि यदि किसी अवधि में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य निकलते हैं तो उनमें बड़ी हिस्सेदारी आरबीएस ग्रुप को मिल रही है। हालांकि इस दावे की वास्तविकता निगम के टेंडर रिकॉर्ड, वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण से ही स्पष्ट हो सकती है।

    यदि आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं तो सवाल केवल आरबीएस ग्रुप को काम मिलने का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अन्य वर्षों से निगम में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदारों को समान अवसर मिल रहा है या नहीं।

    पोस्टरबाजी और ठेकेदारी का संयोग बना चर्चा का विषय

    महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के दौरान शहर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए बधाई पोस्टरों ने भी निगम की ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया। जनप्रतिनिधि को जन्मदिन की शुभकामना देना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यदि उसी अवधि में संबंधित ठेकेदारों को बड़ी संख्या में निगम के काम मिलते हैं तो क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?

    इसका जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि निगम के निविदा रिकॉर्ड और ठेकेदारवार कार्य आवंटन के आंकड़ों से मिल सकता है।

    वार्ड 17-18 की नाली ने खड़ा किया गुणवत्ता का बड़ा सवाल

    सबसे गंभीर सवाल वार्ड क्रमांक 17-18 में हुए नाली निर्माण को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि निर्माण में सरिया निर्धारित मानक के अनुरूप लगभग 8 इंच की दूरी पर लगाए जाने के बजाय करीब एक फीट की दूरी पर लगाया गया।

    यदि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के विपरीत हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच होना आवश्यक है। खासकर तब, जब महापौर स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर सक्रिय दिखाई देती हैं।

    अब सवाल यह है कि क्या इस नाली के निर्माण की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत ड्राइंग, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी? क्या आवश्यकता पड़ने पर निर्माण को खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच होगी?

    दूसरों के काम में सख्ती, आरबीएस के काम में भी वही पैमाना लागू होगा?

    महापौर द्वारा पेवर ब्लॉक के नीचे बेस की जांच करना और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को जवाबदेह बनाना स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है। लेकिन इसी कसौटी को निगम के प्रत्येक ठेकेदार और प्रत्येक निर्माण पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

    यही वह बिंदु है जहां आरबीएस ग्रुप से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़ा होता है—क्या निगम प्रशासन आरबीएस के कार्यों की भी उसी कठोरता से जांच करेगा, जिस तरह अन्य ठेकेदारों के कार्यों की जांच की जा रही है?

    कसारीडीह नाला और सुराना कॉलेज का पाथवे भी सवालों में

    दुर्ग शहर में निर्माण कार्यों की संख्या भले ही बढ़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन कई पुराने काम अब भी अधूरे हैं। कसारीडीह का नाला लंबे समय से पूर्णता की प्रतीक्षा में है। वहीं वर्ष 2024 में सुराना कॉलेज के सामने पाथवे पार्क का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ था, लेकिन उसके पूर्ण होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

    दूसरी ओर शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण हैं। ऐसे में केवल नए निर्माणों की संख्या नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पूर्णता भी निगम की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।

    अब सवाल महापौर से नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता से है

    नगर निगम में ठेकेदारी व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर ठेकेदारवार कितने काम मिले, कितनी राशि के मिले, कितने काम पूरे हुए और कितने कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आईं—इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    यदि आरबीएस ग्रुप को लगातार काम मिलना पूरी तरह निविदा नियमों और तकनीकी पात्रता के आधार पर हुआ है तो दस्तावेज स्वयं सारी चर्चाओं का जवाब दे सकते हैं।

    और यदि किसी निर्माण में वास्तव में तकनीकी मानकों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।

    जनता का सवाल सीधा है—निगम की जांच व्यवस्था क्या सभी ठेकेदारों के लिए समान है?

    क्या पोस्टर लगाने वाला ठेकेदार हो या पोस्टर से दूरी रखने वाला—दोनों के निर्माण कार्यों की जांच एक ही पैमाने से होगी?

    अब वार्ड 17-18 की नाली से लेकर आरबीएस ग्रुप को मिले कार्यों तक, निष्पक्ष तकनीकी जांच ही तय करेगी कि चर्चाओं में कितना तथ्य है और कितना भ्रम।

    न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति का 42वां आयोजन देगा पर्यावरण और पक्षी संरक्षण का संदेश

      भिलाई / शौर्यपथ / न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति, सेक्टर-2 भिलाई द्वारा गणेशोत्सव का 42वां वर्ष इस बार भव्यता, श्रद्धा और सामाजिक सरोकार के साथ मनाया जा रहा है। समिति की ओर से भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापना के साथ पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारापीठ स्थित मनोकामना मंदिर की तर्ज पर आकर्षक पंडाल और झांकी तैयार की जा रही है।
    आयोजन की जानकारी देने आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद जे. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष झांकी को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संरक्षण की थीम पर तैयार किया जा रहा है। झांकी के माध्यम से लोगों को पेड़-पौधों, हरियाली और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ पक्षियों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यदि समाज को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जाए तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी उद्देश्य से समिति ने प्रकृति रक्षा, वृक्षारोपण और पक्षी संरक्षण को इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय बनाया है।
    श्री राव ने कहा कि समिति का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लेकर लौटें। उन्होंने भिलाईवासियों और श्रद्धालुओं से सेक्टर-2 स्थित गणेश पंडाल में पहुंचकर दर्शन करने तथा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प में सहभागी बनने की अपील की।

    लक्ष्मीपति राजू की ओबीसी दावेदारी पर उठी नजरें, केंद्रीय सूची और छत्तीसगढ़ की आरक्षण व्यवस्था के बीच पात्रता का पेच

     शौर्यपथ राजनितिक विश्लेषण
    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर निगम के आगामी महापौर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। महापौर पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद कांग्रेस के भीतर संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। इन्हीं नामों में सेक्टर-7 के पार्षद लक्ष्मीपति राजू का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि उनकी दावेदारी के साथ ही अब एक ऐसा सवाल भी चर्चा में है, जिसका संबंध सीधे जाति प्रमाण-पत्र और ओबीसी आरक्षण की पात्रता से है।
    लक्ष्मीपति राजू आंध्र प्रदेश मूल के बताए जाते हैं और उनकी जाति किंतल कलिंगा बताई जा रही है। उनका कहना है कि उनके पास सक्षम एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र मौजूद है और वे महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।
    यहीं से चुनावी गणित का महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—क्या राज्य के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र अपने आप नगर निगम की ओबीसी आरक्षित सीट पर चुनाव लडऩे की पात्रता सुनिश्चित करता है, या उम्मीदवार की जाति का छत्तीसगढ़ की लागू ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में होना भी जांच का विषय बनेगा?
    केंद्रीय ओबीसी सूची और राज्य की सूची—दोनों का महत्व अलग
    आरक्षण व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य स्तर की सूचियां अलग-अलग प्रयोजनों के लिए लागू होती हैं। किसी जाति का केंद्रीय ओबीसी सूची में होना अपने आप यह नहीं बताता कि संबंधित व्यक्ति को छत्तीसगढ़ की राज्य स्तरीय आरक्षण व्यवस्था में भी वही लाभ मिलेगा।
    27 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में सुमन कुमारी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने राज्य-विशिष्ट आरक्षण के सिद्धांत पर विस्तार से विचार किया। न्यायालय ने कहा कि आरक्षण लाभ और सामाजिक स्थिति का प्रमाण-पत्र संबंधित राज्य की व्यवस्था से जुड़ा होता है तथा दूसरे राज्य में प्रवास मात्र से आरक्षण का अधिकार स्वत: प्राप्त नहीं होता। मामले में यह भी देखा गया कि संबंधित भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता थी। ?
    ढ्ढठ्ठस्रद्बड्डठ्ठ ्यड्डठ्ठशशठ्ठ +1
    लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला शिक्षा विभाग में नियुक्ति से जुड़े मामले में आया था। इसलिए इसे भिलाई नगर निगम महापौर चुनाव पर सीधे लागू मान लेना उचित नहीं होगा। नगर निगम चुनाव के लिए लागू निर्वाचन कानून, आरक्षण संबंधी प्रावधान, उम्मीदवार की सामाजिक स्थिति और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र—इन सभी की जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
    लक्ष्मीपति राजू की दावेदारी मजबूत, लेकिन सवाल का जवाब जरूरी
    राजनीतिक रूप से देखें तो लक्ष्मीपति राजू भिलाई की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा हैं। वे सेक्टर-7 से लगातार चार बार पार्षद रहे हैं। छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए राजू ने अपने क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है। वे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं।
    जनता के बीच सक्रियता और संगठन में प्रभाव के चलते महापौर पद के लिए उनका नाम मजबूत दावेदारों में लिया जाना स्वाभाविक है। लेकिन आरक्षित सीट पर दावेदारी केवल राजनीतिक स्वीकार्यता से नहीं, बल्कि वैधानिक पात्रता से भी तय होती है।
    इसीलिए जाति प्रमाण-पत्र को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट समाधान चुनावी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।
    सवाल प्रमाण-पत्र के अस्तित्व से आगे का है
    इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण अंतर यही है कि "जाति प्रमाण-पत्र है या नहीं" और "उस प्रमाण-पत्र के आधार पर संबंधित आरक्षित पद के लिए उम्मीदवार कानूनी रूप से पात्र है या नहीं"—ये दोनों अलग-अलग प्रश्न हैं।
    यदि लक्ष्मीपति राजू के पास छत्तीसगढ़ के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण-पत्र है, तो उस प्रमाण-पत्र की वैधानिकता, उसमें दर्ज जाति तथा प्रमाण-पत्र जारी करने के आधार की जांच संबंधित प्रक्रिया के अनुसार होगी।
    वहीं, यदि किसी जाति की केंद्रीय सूची और राज्य की लागू आरक्षण सूची में स्थिति अलग है, तो उसका प्रभाव भी चुनावी पात्रता की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
    बाहरी राज्य से आए उम्मीदवारों की पात्रता पर भी उठ सकता है सवाल
    यह मुद्दा केवल लक्ष्मीपति राजू तक सीमित नहीं है। भिलाई-दुर्ग की राजनीति में दूसरे राज्यों से आकर लंबे समय से रहने वाले कई लोग सक्रिय राजनीति में हैं। ऐसे में आरक्षित सीटों पर चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों की सामाजिक स्थिति और आरक्षण पात्रता भविष्य में भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।
    सिर्फ यह तथ्य कि कोई व्यक्ति लंबे समय से छत्तीसगढ़ में रह रहा है, अपने आप आरक्षित वर्ग की चुनावी पात्रता का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। लागू कानून, संबंधित आरक्षण सूची, सामाजिक स्थिति प्रमाण-पत्र और निर्वाचन नियमों का परीक्षण ही निर्णायक होगा।
    अधिवक्ता की नजर में भी नियम-कानून ही आधार
    इस विषय पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर सिंह का कहना है कि आरक्षण से संबंधित मामलों में नियम और कानून का पालन ही मूल आधार है। उनके अनुसार केवल प्रमाण-पत्र होना ही पूरी प्रक्रिया का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी हुआ, उसमें कौन-सी जाति दर्ज है और संबंधित राज्य की आरक्षण व्यवस्था में उस जाति की स्थिति क्या है—इन पहलुओं को देखना आवश्यक होगा।
    कांग्रेस के सामने भी आसान नहीं होगा फैसला
    महापौर पद के लिए कांग्रेस में कई नामों की चर्चा है और लक्ष्मीपति राजू उनमें प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी ने अभी किसी नाम पर अंतिम फैसला नहीं किया है।
    ऐसे में जाति प्रमाण-पत्र और ओबीसी आरक्षण से जुड़ा सवाल पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रत्याशी चयन से पहले यदि संबंधित उम्मीदवार की चुनावी पात्रता पूरी तरह स्पष्ट हो जाए तो भविष्य में किसी कानूनी विवाद की संभावना भी कम की जा सकती है।
    फिलहाल स्थिति दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ी दिखाई देती है—एक ओर लक्ष्मीपति राजू के पास एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र होने का उनका दावा है, दूसरी ओर उनकी जाति की राज्य एवं केंद्रीय आरक्षण व्यवस्था में स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    अब निगाह चुनावी प्रक्रिया पर
    अंतत: यह तय करना कि लक्ष्मीपति राजू भिलाई नगर निगम की ओबीसी आरक्षित महापौर सीट से चुनाव लडऩे के लिए पात्र हैं या नहीं, सक्षम निर्वाचन प्राधिकारी और लागू कानून-नियमों के आधार पर ही संभव होगा।
    इसलिए फिलहाल इसे किसी व्यक्ति की पात्रता पर अंतिम फैसला नहीं, बल्कि चुनाव से पहले उठे एक महत्वपूर्ण वैधानिक सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए।
    भिलाई की महापौर की कुर्सी के लिए सियासी दौड़ अभी शुरू ही हुई है, लेकिन लक्ष्मीपति राजू की दावेदारी ने एक अहम प्रश्न जरूर सामने ला दिया है—
    "क्या राज्य के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र ही पर्याप्त है, या ओबीसी आरक्षित महापौर पद की पात्रता के लिए संबंधित जाति का छत्तीसगढ़ की लागू आरक्षण व्यवस्था में होना भी आवश्यक है?"
    *इस सवाल का आधिकारिक और कानूनी जवाब सामने आने के बाद ही भिलाई महापौर चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।*

    तेज बारिश ने नालों-नालियों से बहाया प्लास्टिक कचरा, अब प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर निर्णायक पहल कर सकती हैं आयुक्त

    दुर्ग// पिछले शाम हुई तेज बारिश ने जहां दुर्ग शहर की जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी, वहीं इस बारिश ने नगर निगम प्रशासन को एक ऐसा अवसर भी दिया है, जिसे यदि समय रहते इस्तेमाल किया जाए तो शहर की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

    तेज बारिश के कारण गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक जलभराव की स्थिति बनी और कई स्थानों पर सड़क, नाली और नाले एक समान दिखाई देने लगे। तेज बहाव के साथ नालों-नालियों में जमा प्लास्टिक कचरा भी काफी हद तक बहकर निकल गया। ऐसे में नवनियुक्त नगर निगम आयुक्त IAS लीना कोसाम के सामने अब दुर्ग को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक अभियान शुरू करने का एक बेहतरीन अवसर है।

    बारिश से साफ हुए नाले, अब दोबारा प्लास्टिक से भरने से रोकना चुनौती

    बारिश के तेज बहाव ने नालों और नालियों में लंबे समय से जमा कचरे को बहा दिया। लेकिन यदि शहर में प्लास्टिक के अनियंत्रित उपयोग और विक्रय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली बारिश में यही स्थिति दोबारा उत्पन्न होना तय है।

    शहर के छोटे-बड़े बाजारों और गली-कूचों में प्लास्टिक गिलास, कप, पन्नियां तथा अन्य ऐसी प्लास्टिक सामग्री का उपयोग और विक्रय दिखाई देता है, जिनमें से कई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने की स्थिति में पर्यावरण और जलनिकासी व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।

    यही प्लास्टिक जब कचरे के साथ नालियों तक पहुंचता है तो जलनिकासी अवरुद्ध होने का एक बड़ा कारण बनता है।

    नए आयुक्त के लिए पहला बड़ा संदेश बन सकता है अभियान

    नगर निगम की प्रशासनिक कमान संभालने वाली नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम के लिए यह अभियान उनके कार्यकाल की एक प्रभावी और जनहितकारी शुरुआत बन सकता है।

    यदि आयुक्त अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नगर निगम के संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दें, बाजार क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कराएं, नियमों के विपरीत प्लास्टिक सामग्री के विक्रय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और कार्रवाई को केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रखने के बजाय थोक विक्रेताओं तथा आपूर्ति स्रोतों तक ले जाएं, तो इसका सीधा असर शहर की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

    सिर्फ सफाई नहीं, प्लास्टिक के स्रोत पर कार्रवाई जरूरी

    शहर को साफ रखने के लिए हर बारिश के बाद नालियों की सफाई करना स्थायी समाधान नहीं है। असली जरूरत यह सुनिश्चित करने की है कि प्लास्टिक कचरा नालियों और नालों तक पहुंचे ही नहीं।

    इसके लिए नगर निगम को प्लास्टिक के खिलाफ लगातार अभियान चलाना होगा। दुकानों और बाजारों में जांच, नियमों के अनुरूप सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहन, प्रतिबंधित अथवा मानकों के विपरीत सामग्री पर नियमानुसार कार्रवाई और नागरिकों में जागरूकता—इन सभी कदमों को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

    निष्क्रियता के दौर से निकलकर निर्णायक कार्रवाई का समय

    सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नगर निगम प्रशासन को समय-समय पर सवालों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे माहौल में नए आयुक्त के पास केवल व्यवस्था संभालने का नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव का संदेश देने का भी अवसर है।

    तेज बारिश ने जहां शहर के लिए असुविधा और जलभराव जैसी समस्या पैदा की, वहीं उसी बहाव ने नालियों से पुराने प्लास्टिक कचरे को बाहर निकाल दिया। अब यदि इसी स्थिति को आधार बनाकर नगर निगम प्लास्टिक के खिलाफ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई शुरू करता है तो यह “आपदा में अवसर” का वास्तविक उदाहरण बन सकता है।

    लीना कोसाम के लिए मौका—शहर की दशा और दिशा बदलने का

    नवनियुक्त आयुक्त IAS लीना कोसाम के लिए यह सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि शहर की कार्यप्रणाली में अपनी प्रशासनिक प्राथमिकता स्पष्ट करने का अवसर हो सकता है।

    यदि उनके कार्यकाल की शुरुआत ही “प्लास्टिक मुक्त दुर्ग” जैसे ठोस जनहित अभियान से होती है और इसके परिणाम जमीन पर दिखाई देते हैं, तो यह पहल लंबे समय तक शहर के लिए यादगार बन सकती है।

    बारिश ने नालियों से प्लास्टिक बहा दिया है, अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन उसे दोबारा नालियों तक पहुंचने देगा?

    जवाब और कार्रवाई—दोनों की उम्मीद अब नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम से है।

      दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 54 पोटियाकला स्थित दशहरा मैदान में कर्मा भवन (सांस्कृतिक भवन) के प्रथम तल के निर्माण कार्य का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार द्वारा किया गया। लगभग 20 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य से क्षेत्रवासियों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
    भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार के साथ आयुक्त लीना कोसम, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पार्षद हीरौंदी चंदानिया, सविता साहू, सजान जोसफ, मंडल अध्यक्ष कौशल साहू, लालेश्वरी साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, करण यादव सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
    इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि कर्मा भवन का प्रथम तल बनने से वार्डवासियों को विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक बेहतर और सुविधायुक्त स्थान मिलेगा। निगम क्षेत्र में नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय-सीमा में पूरा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    -महापौर एवं आयुक्त ने वार्ड 13 एवं 25 में नाली निर्माण कार्य का किया निरीक्षण,
    -खटाल संचालक को गंदगी फैलाने पर नोटिस,पालन नहीं करने पर होगी जुर्माने की कार्रवाई,

       दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत आज महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 13 एवं 25 में आईएएम चौक से अग्रसेन चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी, दुर्ग द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की प्रगति एवं मौके पर आ रही समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का तत्काल निराकरण कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसे लंबित न रखा जाए, बल्कि संबंधित विभागों से समन्वय कर तत्काल समाधान करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
    महापौर अलका बाघमार ने क्षेत्र में खटाल संचालक द्वारा आसपास गंदगी फैलाए जाने की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित संचालक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नोटिस के बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित के विरुद्ध जुर्माने की कार्रवाई की जाए।

    महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं का मौके पर ही संज्ञान लेकर उनका शीघ्र निराकरण करें, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ सके और नागरिकों को इसका लाभ जल्द मिल सके।

    निरीक्षण के दौरान लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, राजस्व एवं बाजार विभाग प्रभारी शेखर चन्द्राकर, पार्षद मनीषा सोनी, विद्यावती सिंह, रंजीता पाटिल, सावित्री दमाहे, अरुण सिंह, सहायक अभियंता संजय ठाकुर, करण यादव, विकास दमाहे सहित संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदार उपस्थित रहे।

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