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सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस के खतरे ने कहीं न कहीं हर किसी की सेहत पर असर डाला है। ऐसे में सभी की यही कोशिश रहती है कि बाहर नहीं निकलना पड़े। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं, जो मॉर्निंग वॉक भी छोड़ रहे हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जिम खुलने के बाद भी कई लोग बाहर जाने से परहेज कर रहे हैं। अगर आप भी महामारी के डर की वजह से अपना वर्कआउट छोड़ बैठे हैं, तो ऐसी गलती बिल्कुल न करें। हम आपको कुछ ऐसे इनडोर वर्कआउट बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप बिना बाहर गए भी कर सकते हैं-
डांस करें
पॉल्यूशन में घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं तो आप इनडोर वर्कआउट्स जैसे योगा और जुंबा ट्राई कर सकते हैं। जुंबा के अलावा आप कोई भी डांस कर सकती हैं। इससे आप फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करेंगे।
योग और सूर्य नमस्कार
अगर आपको योग नहीं आता, तो बेसिक योगासन जैसे सूर्य नमस्कार से शुरुआत कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार से बॉडी की मसल्स स्ट्रेच होती हैं और आप पूरे दिन फ्रेश फील करेंगे। आप इंटरनेट पर ये आसन देख सकते हैं।
प्राणायाम करें
इसके अलावा प्राणायाम करना भी अच्छा ऑप्शन है। इसमें डीप ब्रीदिंग करनी होती हैजो कि आपके रिस्पिरेटरी सिस्टम को दुरुस्त रखता है।
ऐक्रोयोगा
घर के अंदर आप ऐक्रोयोगा भी ट्राई कर सकते हैं। यह ऐक्रोबेटिक्स और योग का मिलाजुला रूप है। मसल स्ट्रेंथ के लिए आप अपना बॉडी वेट, किताबें वगैरह यूज कर सकते हैं।
वॉल पुशअप्स
वॉल पुशअप्स, स्क्वैट्स, क्रंचेज वगैरह कुछ ऐसी एक्सर्साइज हैं जो 15-20 मिनट में हो जाती हैं।
मनोरंजन /शौर्यपथ / भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' की मूवी निरहुआ रिक्शावाला 2 यूट्यूब पर लगातार धमाल कर रही है। इस भोजपुरी मूवी को अब तक 220 मिलियन यानी 22 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। दिनेश लाल यादव ने फिल्म को पोस्टर इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए यह जानकारी दी है। इसके साथ ही दिनेश लाल यादव ने अपने प्रशंसकों से पूछा है कि क्या आप लोग निरहुआ रिक्शावाला ३ के लिए तैयार हैं? निरहुआ म्यूजिक वर्ल्ड चैनल पर अपलोड मूवी के वीडियो को इतनी बड़ी संख्या में व्यूज मिलना मायने रखता है। 2016 में मूवी को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था।
इस फिल्म में उनके साथ आम्रपाली दुबे ने एक्टिंग की थी। दोनों की जोड़ी को काफी पसंद किया जाता है। इस फिल्म के निर्देशक प्रवेश लाल यादव और राहुल खान थे। इंस्टाग्राम पर निरहुआ की ओर से शेयर किए गए पोस्टर पर कॉमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'निरहुआ हिंदुस्तानी, निरहुआ हिंदुस्तानी 2, राम लखन, निरहुआ रिक्शावाला 2, राजा बाबू और परिवार जैसी फिल्में हमेशा बनाते रहिए भैया। सिनेमा घर में भी धमाल मचाएगी और यूट्यूब में भी।' फिलहाल दिनेश लाल यादव अपनी नई फिल्म 'घर-परिवार' की शूटिंग में बिजी हैं। इस मूवी की शूटिंग उन्होंने 14 दिसंबर से शुरू की है।
दिनेश लाल यादव को राजा बाबू और पटना से पाकिस्तान समेत कई फिल्मों में देखा जा चुका है। जबरदस्त फैन फॉलोइंग के कारण भोजपुरी स्टार की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित होती हैं। बता दें कि 2019 में दिनेश लाल यादव की फिल्म निरहुआ बॉडीगार्ड आई थी। यूट्यूब पर इस मूवी को भी अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है।
अब तक इस फिल्म को 22 मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं। निरहुआ की फिल्मों को उनके गानों के लिए भी खूब पसंद किया जाता है। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दिनेश लाल यादव ने आजमगढ़ से चुनाव लड़ा था। हालांकि इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
शौर्यपथ / खगोलीय घटनाओं के दीवाने लोगों को बीत रहा साल अद्भुत नजारे का तोहफा देने जा रहा है। नासा के अनुसार, 1623 के बाद यानी करीब 400 साल बाद 21 दिसंबर 2020, दिन सोमवार को आसामन में दो ग्रहों वृहस्पति और शनि का संयोजन दिखेगा। भारतीय ज्योतिष में इस अद्भुत घटना को गुरु और शिन का महा मिलन कहा गया है तो नासा (NASA) ने इस 'क्रिसमस स्टार' नाम दिया है।
नासा के अनुसार, गुरु और शनि का यह महामिलन अगले एक-दो सप्ताह तक आसमान में दृश्य रहेगा। लेकिन भारतीय समयानुसार लोग अपनी आंख से ही 21 दिसंबर की शाम को सूरज ढलते ही पश्चिम दिशा में देख सकेंगे। इस महामिलन दोनों ग्रह एक-दूसरे के पार करते दिखेंगे।
वृहस्पति जहां सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है वहीं शनि नीले रंग की वलय वाला ग्रह है। सोमवार की शाम को दोनों ग्रह एक दूसरे से मिलते दिखाई देंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूर्य की परिक्रमा करते हुए दोनों ग्रह 20 साल में एक दूसरे के करीब आते हैं लेकिन करीब 400 साल बाद ऐसा होगा जब दोनों ग्रह एक-दूसरे के बेहद समीप दिखाई देंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, गुरु और शनि के ग्रेट कंजक्शन की इस घटना के समय वृहस्पति की पृथ्वी से दूरी लगभग 5.924 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी, जबकि शनि की दूरी 10.825 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी।
ऐसे देखें वृहस्पति और शनि का महा मिलन:
गुरु और शिन के संयोजन को आप बिना किसी टेलीस्कोप की मदद से भी देख सकेंगे। इसके लिए आपको बिल्डिंगों और पेड़ो से दूसर खुले आसमान के नीचे या पास की सबसे ऊची छत पर जाना होगा। यहां से आप पश्चिम दिशा में सूर्यास्त के साथ ही दो ग्रहों का मिलन देख सकेंगे। इन ग्रहों को और भी करीब से देखना चाहें तो आप अच्छी क्वालिटी की टेलीस्कोप के जरिए इसे देख पाएंगे।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू मान्यता के अनुसार चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व है, इन्हें तीर्थ भी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। जहां हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए, जो हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद करेंगे। इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। ये चारों ही धाम चार दिशाओं में स्थित है। उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण रामेश्वर, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारिका। प्राचीन समय से ही चारधाम तीर्थ के रूप मे मान्य थे, लेकिन इनकी महिमा का प्रचार आद्यशंकराचार्यजी ने किया था। माना जाता है, उन्होंने चार धाम व बारह ज्योर्तिलिंग को सुचीबद्ध किया था।
चारों धाम चार दिशा में स्थित करने के पीछे जो सांस्कृतिक लक्ष्य था, वह यह कि इनके दर्शन के बहाने भारत के लोग कम से कम पूरे भारत का दर्शन कर सकें। वे विविधता और अनेक रंगों से भरी भारतीय संस्कृति से परिचित हों, वे अपने देश की सभ्यता और परंपराओं को जानें।
किस धाम की क्या विशेषता
बद्रीनाथ धाम : बद्रीनाथ उत्तर दिशा मेंओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। यह भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल है। प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बद्रीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य ही करे। यहां पर यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं। यहां वनतुलसी की माला, चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है : उत्तर दिशा में हिमालय पर अलकनंदा नदी के पास
मूर्ति: विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी चतुर्भुज मूर्ति। इसके आसपास बाईं ओर उद्धवजी तथा दाईं ओर कुबेर की प्रतिमा।
रामेश्वर धाम: रामेश्वर में भगवान शिव की पूजा लिंग रूप में की जाती है। यह शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है।
कहां है: दक्षिण दिशा में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के बीच रामेश्वर द्वीप।
मूर्ति: शिवलिंग
पुरी धाम: पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। यहां मुख्य रूप से भात का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है: पूर्व दिशा में उड़ीसा राज्य के पुरी में।
मूर्ति: विष्णु की नीलमाधव प्रतिमा जो जगन्नाथ कहलाती है। सुभद्रा और बलभद्र की मूर्ति भी हैं।
द्वारिका धाम : द्वारका भारत के पश्चिम में समुद्र के किनारे पर बसी है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने इसे बसाया था। कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होने द्वारका में ही किया। यहीं बैठकर उन्होने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांडवों को सहारा दिया। कहते हैं असली द्वारका तो पानी में समा गई, लेकिन कृष्ण की इस भूमि को आज भी पूज्य माना जाता है। इसलिए द्वारका धाम में श्रीकृष्ण स्वरूप का पूजन किया जाता है।
कहां है : पश्चिम दिशा में गुजरात के जामनगर के पास समुद्र तट पर।
मूर्ति: भगवान श्रीकृष्ण।
सेहत / शौर्यपथ / महिलाओं में प्रजनन क्षमता का कम होना और गर्भधारण न कर पाने की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी खराब जीवन शैली के चलते हम अपने खानपान पर खास ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे हम कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार होने लगते हैं। प्रजनन क्षमता कम होने की समस्या महिला व पुरुष दोनों को हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन हमारे पास कुछ ऐसा है जो इस समस्या से राहत पाने में आपकी कुछ मदद कर सकता है। वह है काली किशमिश या मुनक्?का क्या आप जानती हैं कि काली किशमिश या मुनक्का आपकी बांझपन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है, और गर्भधारण में मददगार हो सकता है। चलिए बिना देर किए हम आपको बताते हैं कि कैसे काली किशमिश या इसका पानी गर्भधारण में आपकी मदद कर सकता है।
क्या है बांझपन का कारण
महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या का एक मुख्य कारण प्रजनन क्षमता का कम होना या बांझपन है। जिसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जिसमें आपका खानपान और कुछ अन्य कारक शामिल हैं।
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन प्रजनन क्षमता के कम होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। कई महिलाओं में अंडे समय पर नहीं बनते हैं। साथ ही उनका ओवुलेशन भी समय पर नहीं हो पाता है। कुछ का ओवुलेशन समय पर होता तो है, लेकिन ठीक से नहीं हो पाता। कई महिलाओं में अंडाशय में अंडे बनते तो हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सही नहीं होती है।
इसके अलावा इन दिनों महिलाओं में पीरियड्स की समस्या बहुत आम है। उन्हें समय पर पीरियड्स नहीं होते हैं, साथ ही अगर पीरियड्स होते भी हैं तो ठीक से नहीं होते हैं। इसके अलावा कई ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हैं जिनके कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी आती है। और वह गर्भधारण नहीं कर पाती।
गर्भधारण के लिए कैसे फायदेमंद है काली किशमिश का पानी
काली किशमिश का पानी आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और गर्भधारण की समस्या से राहत पाने में आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। क्योंकि काली किशमिश के पानी में सोडियम, पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन-ई, सी, कैल्शियम, आयरन, विटामिन-डी, मैग्नीशियम, जिंक, एंटिऑक्सीडेंट्स समेत कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
काली किशमिश आपकी शारीरिक कमियों को दूर करने के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यह य़ह आपके प्रजनन की क्षमता को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, और इसके नियमित सेवन से आप गर्भधारण कर पाने में भी सक्षम हो सकती हैं।
कैसै कर सकते हैं इस्तेमाल
रात में सोते समय 5-7 काली किशिमिश को एक कप पानी में भिगो दें।
इसे रात भर के लिए छोड़े दें।
सुबह उठकर खाली पेट किशमिश के पानी का सेवन करें।
जो मुनक्के आपने भिगोए थे आप उन्हें दिन में किसी भी समय खा सकती हैं।
ऐसा रोजाना नियमित रूप से करने से आपकी प्रजनन की क्षमता में सुधार होगा और आप जल्दी गर्भधारण करने में मदद मिलेगी।
यह भी ध्?यान रहे
गर्भधारण के लिए किशमिश के पानी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्योंकि वह आपको आपकी समस्या के अनुसार इसका सेवन करने की सलाह बेहतर दे सकते हैं। क्योंकि कई बार इसका सेवन अधिक करने से आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आज हम आपके लिए सर्दियों की फेवरेट डिश सरसों का साग और मक्के की रोटी लेकर आए हैं। मक्के की रोटी और सरसों का साग का कॉम्?बिनेशन जबरदस्?त होता है। सरसों का साग स्?वास्?थ्?य के नजरिए से भी बेहद फायदेमंद होता है। तो लीजिए आप भी सरसों साग बनाने की विधि आज ही ट्राई करें।
सामग्री :
सरसों का साग- 500 ग्राम,
पालक– 150 ग्राम,
बथुआ– 100 ग्राम,
टमाटर– 250 ग्राम,
प्याज– 01 (बारीक कटी हुई),
लहसुन– 05 कलियां (बारीक कटी हुई),
हरी मिर्च– 02 नग,
अदरक– 01 बड़ा टुकड़ा,
सरसों का तेल– 02 बड़े चम्मच,
बटर/घी– 02 बड़े चम्मच,
हींग– 02 चुटकी,
जीरा– 1/2 छोटा चम्मच,
हल्दी पाउडर – 1/4 छोटा चम्मच,
मक्के का आटा– 1/4 कप,
लाल मिर्च पाउडर– 1/4 छोटा चम्मच,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
सरसों का साग बनाने के लिए सबसे पहले सरसों, पालक और बथुआ को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। इन्हें छलनी में रख दें, जिससे पानी निथर जाए। इसके बाद इन्हें मोटा-मोटा काट लें और कुकर में एक कप पानी के साथ डालें और मध्यम आंच पर एक सीटी आने तक उबाल लें। इसके बाद कुकर को उतार कर रख दें और उसकी सीटी निकलने तक प्रतीक्षा करें। अब टमाटर और अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और फिर उसे हरी मिर्च के साथ मिक्सी में डाल कर बारीक पीस लें। कढ़ाई में एक चम्मच तेल डालें और गरम करें। तेल गरम होने पर उसमें मक्के का आटा डालें और हल्का ब्राउन होने तक भून लें। आटे को एक प्याली में निकालने के बाद कढ़ाई में बचा हुआ तेल डालें और उसे गरम करके उसमें हींग और जीरा डाल दें और दस सेकेंड तक भून लें। उसके बाद प्याज और लहसुन डालें और हल्का गुलाबी होने तक भून लें। उसके बाद हल्दी पाउडर, टमाटर का पेस्ट और लाल मिर्च डालें और मसाले को तब तक भूनें, जब तक कि वह तेल न छोडऩे लगे। मसाले के भुनने के दौरान कुकर से साग निकाल लें और उन्हें ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब भुने हुए मसाले में पिसा साग डाल दें। साथ ही आवश्यकतानुसार पानी, मक्के का आटा और नमक भी डालें और अच्छी तरह से चला दें। इसके बाद इसे मध्यम आंच पर पकाएं और उबाल आने के 5-6 मिनट बाद तक पकाने के बाद गैस बंद कर दें।
मक्के की रोटी के बिना अधूरा है मजा
मक्?की की रोटी और सरसों का साग वैसे तो लोकप्रिय पंजाबी जायका है। मगर अब असका स्वाद हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। मक्का या भुट्टा में कार्बोहाइड्रेट, फोलिक एसिड, कैरोटीन, मिनरल्स, विटामिन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह कई रोगों से लडऩे में सहायक होता है और शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाता है। इसीलिए ठंड के मौसम में मक्?के की रोटी और सरसों का साग खाया जाता है। तो चलिए बनाते हैं मक्के की रोटी
सामग्री :
मक्की का आटा– 400 ग्राम,
मक्खन– 02 बड़े चम्मच,
गरम पानी– आवश्यकतानुसार,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
मक्?का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले मक्के/मक्की के आटा को एक बर्तन में निकाल कर छान लें। इसके बाद आटा में स्वादानुसार नमक मिला लें और फिर गुनगुने पानी की सहायता से आटा को गूंथ लें। इसके बाद आटे को ढक कर 15-20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा फूल कर सेट हो जायेगा और रोटियां बेहद स्वादिष्ट बनेंगीं।मक्के की रोटियां बनाने के पहले इसे एक बार हथेलियों की सहायता से खूब अच्छी तरह से मसल लें, जिससे यह बेहद मुलायम हो जाए। जब आटा अच्छी तरह से मुलायम हो जाए, तब उसमें से लोई बनाने भर का आटा लें और उसे हथेली से दबा कर बड़ा कर लें। इसके बाद हाथों में थोड़ा पानी लगाएं और लोई को उंगलियों की सहायता से दबा कर 5-6 इंच व्यास की रोटी बना लें।अब रोटी को गरम तवा पर डालें। जब एक तरफ की रोटी सिक जाए, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेक लें। इसके बाद रोटी को गैस की आंच पर साधारण रोटी की तरह घुमा-घुमाकर सेंंक लें। आपकी मक्?का की रोटी तैयार है। इसपर मक्खन या देशी घी लगाएं और गर्मा-गरम सरसों के साग के साथ आनंद लें।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के तहत गौठान प्रारंभ किए गए हैं। सुव्यवस्थित संचालन के लिए गौठान समितियों को जिम्मेदारी दी गयी है। अब गौठान आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे है। स्थानीय स्व सहायता समूह को रोजगार मिलने से वे आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी गौठान से जुड़कर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। ऐसा ही एक गौठान जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के औराईकला गौठान में गांव के ही चार स्व-सहायता समूहो को काम मिल रहा है। अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नही है। गौठान से जुड़े समूहों को मिनी राईस मिल, मशरूम उत्पादन, सब्जी-भाजी और जैविक खाद के माध्यम से रोजगार का अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
औराईकला की जय मां वैष्णो देवी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती पार्वती साहू ने बताया कि जैविक पद्धति से खाद तैयार कर सोसायटी को अब तक गौठान के माध्यम से 48 क्विंटल जैविक खाद 8 रूपए प्रति किलो की दर से दे चुके हैं। इससे स्व सहायता समूह के सदस्यों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि प्रथम बार उन्होंने 40 क्विंटल जैविक खाद उद्यानिकी विभाग को सहकारी सोसायटी के माध्यम से बेचा था। आज कृषि विभाग के माध्यम से 8 क्विंटल जैविक खाद बेचा है। बेचे गए जैविक खाद की राशि सोसायटी के द्वारा समिति के बैंक अकाउंट में भुगतान की जाती है। श्रीमती साहू ने बताया कि उनकी समिति 8 वर्ष पुरानी है। गौठान प्रारंभ होने से अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें जैविक खाद तैयार करने के लिए गौठान से ही गोबर मिल जाता है। शासन की योजना के तहत केंचुआ भी उपलब्ध कराया गया है एवं समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। गौठान परिसर में ही वर्मी टांका व वर्मी बेड तैयार किया गया है। समूह के सदस्यों में लाभ मिलने से उत्साह का माहौल है।
इसी गौठान से जुड़े मिनीमाता महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों ने चरागाह परिसर पर सब्जी-भाजी लगाया है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो गया है। समूह की अध्यक्ष बहोरीन बाई ने बताया कि वे अभी लाल भाजी, पालक भाजी, गोभी, मूली आदि लगाए हैं। इसके बाद बाद वे धनिया, भिंडी, लौकी, मेथी, खीरा भी लगाएंगे। वे स्थानीय बाजार एवं समीप के शहरों से को सब्जी भाजी की सप्लाई कर रहे हैं। पिछले फसल में सब्जी भाजी का मूल्य कम होने के कारण केवल लागत और समूह के सदस्यों को मजदूरी मिल गई थी। इस मौसम में सब्जी भाजी की कीमत अच्छी मिलने से और अधिक लाभ मिल रहा है।
जय मां संतोषी महिला स्व सहायता समूह के सदस्य उमा पटेल ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए गौठान परिसर में ही स्थान दिया गया है। निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। वह अब मशरूम उत्पादन की तैयारी में लगे हुए हैं। इसी प्रकार गौठान से जुड़े एक अन्य समूह को सरकार की योजना के तहत मिनी राइस मिल अभी कुछ दिन पहले ही उपलब्ध कराया गया है। जिससे अति शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,समाज सुधारक और प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय पंडित सुंदरलाल शर्मा की जयंती 21 दिसम्बर पर छत्तीसगढ़ के लिए उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने सामाजिक चेतना की आवाज हर घर तक पहुंचाने का अविस्मरणीय कार्य किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास,छुआ-छूत,रूढिवादिता जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए अथक प्रयास किया। वे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े और छत्तीसगढ़ में स्वाधीनता आंदोलनों की मजबूती और जनजागरण के लिए भरसक प्रयत्न किया। वे किसानों के अधिकारों की लड़ाई के रूप में प्रसिद्ध कंडेल सत्याग्रह के प्रमुख सूत्रधार थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित सुदरलाल शर्मा के जीवन मूल्य सदा प्रेरणा देते रहेंगे।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में सालो से ऐसे कबाड़ी अपना व्यापार निगम क्षेत्र में चला रहे है जो अवैधानिक तो है ही साथ ही चोरी के सामन को खरीदने बेचने के कार्य में लिप्त है . पुलिस प्रशासन द्वारा समय समय पर कबाडियों पर कार्यवाही की जाती है किन्तु मामूली आपराध पंजीबद्ध होने से और आसानी से जमानत मिलने से ऐसे कबाडियों के हौसले बुलंद होते जा रहे है .अभी तक तो सिर्फ यही होता था कि छोटी मोती चोरी के सामन के साथ कबाड़ी पकडाते और मामूली धारा के बदौलत आसानी से जमानत पर छुट जाते किन्तु बीते दिनों कबाड़ी के इस व्यापार में शामिल लोगो के बुलंद हौसले ने शासकीय कार्य में लगे अमृत मिशन के लाखो के पाइप पर ही अपना हाँथ साफ़ कर दिया .
मामला अमृत मिशन के कार्य में लगे लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विस प्राईवेट लिमिटेड के सामन का है . जैसा कि सभी जानते है इन दिनों दुर्ग में अमृत मिशन के तहत पुरे निगम क्षेत्र में नया पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है . कंपनी यह कार्य पिछले दो साल से कर रही है ऐसे में दुर्ग निगम के कई स्थानों पर सीमेंट कोटेट जीआई पाइप शहर के कई हिस्सों में फैले हुए है इन्ही पाइप पर अब कबाड़ के व्यापार करने वालो की नजर लग गयी .
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात वार्ड 1 में कुछ लोगो द्वारा अमृत मिशन के पाइप को एक निजी वाहन टाटा एस में लोड किया जा रहा था तब कंपनी के लोगो को किसी स्थानीय द्वारा जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे और वाहन टाटा एस ष्टत्र07/रुक्क/5186 को पकड़ लिया गया तथा ड्राईवर व उसके दो सहयोगी भी पकड़ में आ गए . कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा क्षेत्र के कोतवाली पुलिस को सूचित किया गया और मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई . वाहन में तकरीबन सवा लाख की कीमत के पाइप बरामद हुए जिसे कोतवाली पुलिस ने जप्त कर आरोपी ड्राईवर रमेश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया . वही मामले पर कंपनी के अधिकारी का कहना है कि काफी दिनों से हमारे पाइप गायब हो रहे थे . एक अनुमान के मुताबिक लगभग 7 से 8 लाख तक के पाइप गायब हो चुके है . बारीकी से निरिक्षण किया जा रहा है और स्टाक मिलाने पर स्पष्ट हो जायेगा कि कितने के पाइप अब तक चोरी हो चुके है . आज जो पाइप पकडाया वो 8 इंच पाइप था .
जैसा कि कंपनी के अधिकारी बता रहे है कि चोरी में उपयोग होने वाले वाहन के ड्राईवर ने कंपनी के अधिकारियों को बताया कि पहले भी इस तरह से पाइप को ले जाया गया है . बड़ा सवाल उठता है कि चोरी के कटे हुए पाइप को आखिर कहा और किस को बेचा जा रहा था . चोरी के पाइप जो टुकडो के आकार में काट के ले जाए गए वो किसी उपयोग के काबिल नहीं है सिर्फ कबाड़ के भाव में ही ऐसे पाइप बिक सकते है ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि शहर के ही किसी कबाड़ी का इस कार्य में हाँथ है , कयास तो यह भी लगाए जा रहे है कि कबाडियों पर सख्त कार्यवाही का ना होना ही इनके हौसले बुलंद करता है . शहर के हर गली मोहल्ले में ऐसे लोग घूमते देखे जाते है जो कबाड़ का सामन खरीदने के लिए भटकते है किन्तु यह भी बड़ा सवाल है कि किया पुलिस शहर के सभी कबाडियों के गोदाम की बारीकी से जाँच करेगी क्योकि इन दिनों शहर में गाडिया भी बहुत चोरी हो रही है आखिर ये चोरी का सामान कैसे और कहा खप रहा है आज जब शासकीय कार्य में लगे लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विस प्राईवेट लिमिटेड की पाइप चोरी का मामला सामने आया तो बहुत सी बाते सामने आ गयी अब देखना यह है कि दुर्ग पुलिस इस मामले की तह तक जाती है या मामला आसान तरीके से रफा दफा होता है ...
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में 103 एमओयू हुए हैं। इनके माध्यम से प्रदेश में 42 हजार 155 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए 62 हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
छत्तीसगढ़ की नयी उद्योग नीति और कोरोना-काल में उद्योगों के हित में शासन द्वारा उठाए गए कदमों से राज्य में बेहतर औद्योगिक वातावरण का निर्माण हुआ है। कोरोना-संकट काल में पूरा देश आर्थिक मंदी से प्रभावित था, वहीं छत्तीसगढ़ में उद्योग जगत मंदी से अछूता रहा। लॉकडाउन के दौरान देश में सबसे पहले माह अप्रैल में छत्तीसगढ़ के उद्योगों में काम प्रारंभ हुआ। उद्योगों की कठिनाइयों को देखते हुए ही कई तरह की रियायतें और सुविधाएं दी गईं। कोर सेक्टर के उद्योगों को विद्युत शुल्क में छूट दी गई। कच्चे माल की आवक बनी रहे, और तैयार माल बाजार तक पहुंचता रहे, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए। दूसरे राज्यों से कच्चा माल आसानी से छत्तीसगढ़ आ सके, इसके लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। स्टील और सीमेंट उद्योग की गतिविधियां चलती रहें, इसके लिए सड़क और भवन निर्माण का काम जारी रखा गया। बिजली की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। नियम शर्तों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। राइस मिलों को ऊर्जा प्रभार में पांच प्रतिशत की छूट दी गई। उद्योगों को बिजली बिलों के भुगतान की अवधि में भी छूट दी गई। लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ में 27 लाख टन इस्पात का उत्पादन हुआ, जो दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था। प्रदेश में नयी औद्योगिक नीति का निर्माण किया गया है। यह नयी नीति यहां के उद्योग धंधों के लिए संभावनाओं के नये दरवाजे तो खोल रही है साथ ही एग्रीकल्चर सेक्टर को भी मजबूत प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार की नयी उद्योग नीति में कृषि और वनोपज आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। खनिज आधारित उद्योगों को हर तरह का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के तहत अब इस्पात (स्पंज आयरन एण्ड स्टील) क्षेत्र के मेगा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट में निवेश हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज की व्यवस्था की गई है। मेगा निवेशकों के लिए इस पैकेज में अधिकतम 500 करोड़ रुपए तक निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बस्तर संभाग के लिए 1000 करोड़ का निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। निवेशकों को सिर्फ छूट और सुविधा ही नहीं दी जा रही, बल्कि इस बात का भी खयाल रखा गया है कि वे प्रदेश में आसानी के साथ उद्योग स्थापित कर सकें। इसके लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन के लिए भू-प्रब्याजी में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। भू-भाटक में एक प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में 10 एकड़ तक आवंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए नियम बनाए गए हैं। औद्योगिक भूमि और भवन प्रबंधन नियमों का सरलीकरण किया गया है।
असामान्य परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में 464 स्टार्टअप शुरु करने में सफलता पाई है। 01 जनवरी 2019 से लेकर अब तक 103 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनमें 42 हजार 154 करोड़ रुपए से अधिक का पूंजी निवेश होगा। स्टील सेक्टर में 80 एमओयू हुए हैं, जिसमें 37022.22 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। सीमेंट सेक्टर में एक एमओयू हुआ, जिसमें 2000 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। एथेनॉल सेक्टर में 7 एमओयू हुए, जिनमें 1082.82 करोड़ का पूंजी निवेश होगा। फूड सेक्टर में 5 एमओयू के माध्यम से 283.61 करोड़, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 56.41 करोड़ रुपए, डिफेंस सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 529.50 करोड़ रुपए तथा अन्य सेक्टरों में 4 एमओयू के माध्यम से 1179.99 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे स्टील सेक्टर में 52,206, सीमेंट सेक्टर में 450, एथेनॉल सेक्टर में 986, फूड सेक्टर में 2,434, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 393, डिफेंस सेक्टर में 4494 तथा अन्य सेक्टरों में 1,105 रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
