August 08, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / अगर आपका बच्चा दिखने में मोटा- तगड़ा लगता है, मगर उसे नींद नहीं आती है, चिड़चिड़ा है, खेलने में थक जाता है, रात में थकान की शिकायत करता है। पैरों में मालिश के बाद सोता है तो सतर्क होने की जरूरत है। यह बच्चे के शरीर में विटामिन डी की मात्रा बेहद कम होने के संकेत हैं जो आगे चलकर गंभीर बीमारियां दे सकते हैं।
    30 फीसदी बच्चे दिखने में सामान्य मगर विटामिन डी की बेहद कमी वाले मिले हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुए एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर हुए रिसर्च में दो तरह के बच्चों को शामिल किया गया है। एक तो ऐसे बच्चे जो दिखने में सामान्य थे।

    मानक का 50 फीसदी भी विटामिन डी नहीं मिल रहा है। बच्चा दिखने में स्वस्थ है मगर उसकी हडिडयां भुरभुरी हो रही हैं। विटामिन डी की कमी से बच्चों को कई तरह की बीमारियां घेरती हैं। भर्ती होने वाले या ओपीडी में आने वाले बच्चों की जांच की जाती है तो यह कमी दिख जाती है। यही बच्चे अति गम्भीर होकर भर्ती होते हैं। विटामिन डी की कमी पूरा होते ही बच्चे ठीक हो जाते हैं।रिसर्च में सभी पैरामीटर का इस्तेमाल किया गया है। इसे एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स के वाषिक सम्मेलन में रखा जाएगा।
    सैम बच्चों में लक्षण नहीं मिले
    सीवियर एक्यूट मेल न्यूट्रीशन यानी सैम बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण नहीं पाए गए, मगर उनके विटामिन डी की घोर कमी मिली है। इन बच्चों को सैम से बाहर निकालने और जीवन के खतरे से बचाने में तीन से छह महीने तक मशक्कत करनी पड़ी।
    बच्चों में इन बीमारियों का खतरा
    रोग प्रतिरोधक क्षमता शून्य तक पहुंच सकती है। विकास रुक सकता है। निमोनिया, डायरिया, कार्डियोमायोपैथी, बार बार फ्रैक्चर, अनिद्रा, स्किन बीमारी, साइनस इंसफेक्शन, मेनेनजाइटिस और ब्लड डिसआर्डर सम्बंधी बीमारी।
    डाइट बेहतर करें, धूप में रहने दें
    रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिली। विटामिन डी की कमी पूरा करने के लिए इमरजेंसी में सप्लीमेंट दे सकते हैं मगर उससे अच्छा है कि बच्चों की डाइट बेहतर करें। सबसे अधिक जरूरी धूप है। कम से कम 45 मिनट उसे रोजाना सुबह की धूप दें। धूप में ही सुबह होम वर्क कराएं और उसे खेलने दें।
    इस तरह हुआ रिसर्च
    -120 बच्चे शामिल किए
    -0-5 साल के बच्चे रिसर्च में लिए गए
    -03 साल तक बच्चों की मॉनीटरिंग
    -60 बच्चे दिखने में सामान्य स्वस्थ थे
    -60 बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित थे
    यह रहा रिजल्ट
    -30 फीसदी सामान्य दिखने वाले बच्चों में विटामिन डी की मात्रा बेहद कम
    -विटामिन डी की मात्रा 70 फीसदी कुपोषित बच्चों में सामान्य से बेहद न्यूनतम स्तर पर मिली
    -90 फीसदी अति कुपोषित यानी सीवियर एक्यूट मेलन्यूट्रीशन यानी सैम बच्चों में कम थी विटामिन डी

    सेहत / शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी उम्र के लोगों के लिए फिजिकल एक्सरसाइज को लेकर सिफारिशें लागू की हैं। डब्लूएचओ ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौर में सभी को व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ महिलाओं को कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान और उससे पहले वह शारीरिक तौर पर एक्टिव रहें और कुछ-न-कुछ गतिविधि करती रहें, इससे वह स्वस्थ रहेंगी।
    डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ऐडनॉम ने कहा कि शारीरिक रूप से सक्रिय होना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, हमारे जीवन में कुछ साल और जोड़ देता है। हर कदम मायने रखता है, हमें हर दिन बेहद सुरक्षित और रचनात्मक ढंग से आगे बढ़ना है और कोरोना वायरस से लड़ना है।

    डब्लूएचओ ने नए दिशानिर्देश जारी कर सभी को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके साथ उन्होंने कहा कि व्यायाम, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो इसके दुष्परिणाम हमें झेलने पड़ सकते हैं।
    डब्लूएचओ के अनुसार, अगर लोग शारीरिक तौर पर अधिक सक्रिय होते तो साल में चार से पांच मिलियन लोगों को मरने से बचाया जा सकता था।
    WHO की नई गाइडलाइन्स
    1. बच्चों के लिए
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों को प्रति दिन कम से कम 60 मिनट और सप्ताह में कम से कम तीन दिन जोरदार एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इन एक्सरसाइज से बच्चों की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होंगी।
    2. 18 से 64 वाले लोग
    18 से 64 वर्ष वाले लोगों के लिए डब्लूएचओ ने कहा है कि इन्हे हर हफ्ते कम से कम 130 से 300 मिनट तक मॉडरेट इंटेंसिटी वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे वह स्वस्थ रहेंगे। इसके सेहत ही 75-150 मिनट वाली अधिक-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। हर हस्ते.2 दिन माशपेशियों वाली एक्सरसाइज करना भी बेहद जरूरी है।
    3. 65 वर्ष से अधिक
    स्वस्थ लोग जो 65 वर्ष से अधिक होते हैं, उन्हें उतना ही एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियों में ध्यान देना चाहिए जितना कि 18 से 64 वर्ष तक के लोग देते हैं। उन्हें सप्ताह में कम से कम तीन दिन फिजिकल एक्सरसाइज करनी चाहिए। यह उन्हें स्वस्थ रहने में मदद करेगी।
    4. गर्भवती महिलाएं
    डब्लूएचओ ने गर्भवती महिलाओं को विशेष सलाह देते हुए कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी महिलाओं को 1 हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए।

    सेहत /शौर्यपथ /‘शाकाहार खाने में मांसाहार की तरह प्रोटीन नहीं होता इसलिए आपको नॉनवेज खाना शुरू कर देना चाहिए’ आपने अपने दोस्तों या फिर किसी ओर को ऐसा ही कुछ कहते हुए सुना होगा कि प्रोटीन की पूर्ति के लिए नॉनवेज खाना बहुत जरूरी है लेकिन फिर भी आपका दिल नॉनवेज खाने को नहीं करता, अगर आपके या आपके किसी दोस्त के साथ कुछ ऐसा ही है, तो आपको जानकर खुशी होगी कि शाकाहार यानी वेज खाने की कुछ चीजों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। आइए, जानते हैं प्रोटीन से भरे शाकाहार स्रोत-
    हल्की आंच में भुने आलू
    आपको जानकर हैरानी होगी कि मीडियम साइज में कटे और हल्की आंच में भुने हुए आलू में प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
    ब्रोकली
    अगर अभी तक आप ब्रोकली खाने से परहेज कर रहे थे, तो आपको ब्रोकली खानी शुरू कर देनी चाहिए। आपको ब्रोकली में प्रोटीन की मात्रा और आयरन मिलेगा।
    फूलगोभी
    ज्यादातर लोगों को फूलगोभी पसंद होती है। इस सब्जी में प्रोटीन, कैलोरीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन के गुण होते हैं।
    मशरूम
    आप अगर बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो आपको मशरूम खाना शुरू कर देना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है।
    पालक
    पालक में प्रोटीन के अलावा आयरन, फाइबर और विटामिन बी पाया जाता है।
    मक्का
    सर्दियों में मक्का खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा है। इसमें प्रोटीन और फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है।
    मटर
    आलू हो या पनीर, मटर किसे अच्छा नहीं लगता। मटर प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है।

    वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ / देशी फेंगशुई कहें या फिर हमारे शास्त्रों में पहले से ही दर्ज की कई व्यवस्थाओं की, वे आज के फेंगशुई से ज्यादा बेहतर और प्रभावकारी हैं। इनमें से कुछ हैं दर्पण, काले घोड़े की नाल और घंटी। हमारे जीवन में ये कुछ ऐसी अनोखी वस्तुएं हैं जिनका हम नित्य प्रयोग करते हैं। किंतु उनके उपयोगी उपायों को कम लोग ही जानते हैं। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए दर्पण, घंटी और घोड़े की नाल का महत्व।
    दर्पण:चेहरा देखने वाला दर्पण वास्तु शास्त्र में बहुत ही उपयोगी माना गया है। दिशाओं को बढ़ाने का भ्रम करने वाला यह दर्पण कई बार तो चौकाने वाले प्रभाव दिखाता है। यदि घर का उत्तर पूर्व का कोना कटा हुआ है तो उस दिशा में एक बड़ा लुकिंग मिरर लगा देने से दिशा भ्रम हो जाता है। वह दिशा बढ़ती हुई प्रतीत होती है। इससे उसका वास्तु दोष समाप्त हो जाता है। यदि घर के सामने कोई खंबा, पेड़, किसी मकान का कोना, कूड़, खंडहर हो तो घर के मुख्य द्वार की चौखट के ऊपर एक गोल शीशा लगा देने से घर में आने वाली नकारात्मक शीशे से टकराकर बाहर चली जाती है। डाइनिंग रूम में उत्तर-पूरब की दीवार पर ओवल शेप का एक बड़ा शीशा लगा देना चाहिए, इससे भोजन करने वालों का और भोजन का प्रतिबिंब उसमें दिखाइए इससे घर में समृद्धि बढ़ती है। ड्रेसिंग रूम में शीशा सदैव उत्तर अथवा पूर्व की दीवार पर ही लगाना शुभ होता है। ‌भूलकर भी शीशे को दक्षिणी दीवार पर न लगाएं। कभी भी शयन कक्ष में शीशा न लगाएं ‌उस कक्ष में सोने वाले व्यक्तियों के संबंधों पर बुरा असर पड़ता है।
    घंटी: घंटा अथवा घंटी ऐसी वस्तु है जो प्राय मंदिरों में और अपने घरों के मंदिर में आसानी से मिल जाती है। इसका प्रयोग हम आरती के समय या मंदिर में प्रवेश के समय,भगवान जी को भोग लगाने के समय करते हैं। इसके अलावा भी घंटी के कई उपयोग हैं। घंटी वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है। जहां पर घंटी या घंटे की ध्वनि होती है वहां से नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती हैं। इसलिए हमें प्रात:काल उठकर स्नान करने के बाद अपने घर की घंटी को घर के मुख्य द्वार और मंदिर में अवश्य बजाएं। घर के मुख्य द्वार में के सामने दो अथवा तीन द्वार एक सीध में हो तो एक पीतल की छोटी घंटी बीच के द्वार पर टांग दें। यदि आपके छोटे बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं तो एक उपाय करें। जब वह अपनी पढ़ने को बैठें तो कम से कम एक मिनट पीतल की घंटी उसकी स्टडी टेबल के पास बजाएं। वहां का वातावरण हो उर्जित हो जाएगा और बच्चों का मन एकाग्र होकर पढ़ाई में लगेगा।
    काले घोड़े की नाल: प्राचीन काल से ही घोड़े की नाल अथवा नाव की कील को बहुत ही मान्यता प्राप्त हुई है। घोड़े की नाल घोड़े के पैर में रहती है और घिस-घिसकर ऊर्जावान हो जाती है। इसी प्रकार नाव की कील लगातार पानी के थपेड़े खाकर के ऊर्जित हो जाती है। यदि काले घोड़े की नाल मिल जाए तो बहुत अच्छी होती है। घर के द्वार के वास्तु दोष को समाप्त करने के लिए घर के द्वार पर टांग देते हैं। U शेप की घोड़े के नाल घरों में नीचे की ओर करके लगाते हैं। फैक्ट्री अथवा कार्यालय में ऊपर की ओर करके लगाते हैं। ऐसा माना जाता है घोड़े की नाल से घर हमारा बुरी ऊर्जाओं से संरक्षित हो जाता है। शनि की महादशा अथवा साढ़ेसाती के समय घोड़े की नाल की अंगूठी या छल्ला बनाकर भी लोग पहनते हैं।

    टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / फेंगशुई के बारे में आपने सुना तो जरूर होगा। कुछ लोग फेंगशुई में विश्वास रखते हैं, कुछ इसका बिलकुल विश्वास नहीं करते जबकि कुछ लोगों को पता ही नहीं है कि फेंगशुई क्या होता है। फेंगशुई डिजाइन और वास्तुशास्त्र का एक अभिन्न हिस्सा है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है। फेंग यानि वायु, शुई यानि जल। यह एक ऐसा कान्सेप्ट है जो प्रकृति और वातावरण के महत्व को स्थापित करता है। साथ ही यह आपको अपने आस पास के वातावरण से अवगत कराता है और संवेदनशील भी बनाता है।
    फेंगशुई चीजों और आस पास के वातावरण में संतुलन बनाने का प्रयास करता है। चीजों की बनावट, उनका रंग, आकार,रखने की जगह आदि के बारे में फेंगशुई विस्तार से बताता है। फेंगशुई में पौधों का भी बहुत महत्व है। इसके अनुसार बहुत से पेड़-पौधे आपके मूड को बदलने की क्षमता रखते हैं। साथ ही यह आपकी ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं और मानसिक रूप से आप ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही पांच फेंगशुई पौधों के बारे में बताएंगे जिन्हें लगाकर आप भी अपने आस पास के माहौल को बेहतर बना सकते हैं।
    1. बैम्बू प्लांट
    हरे रंग के बैम्बू प्लांट को लाल रंग के धागे से बांधकर धर में रखें। घर के सदस्यों की आयु में वृद्धि के साथ ही यह आर्थिक समृद्धि भी लाता है। यह बिजनेस के उद्देश्य से भी शुभ होता है। यह निगेटिविटी को दूर करता है। इसे पानी में लगाएं और पॉट में रंगीन पत्थर डालें।
    2. स्नेक प्लांट
    इसे बड़ी खिड़की या एंट्रेंस के पास लगाएं। यह एक रक्षक के रूप में काम करता है। घर में काम करने की जगह या ऑफिस में इसे लगाने से आप ज्यादा फोकस होकर काम कर पाएंगे। इसे बेडरूम या बच्चों के कमरे में ना लगाएं।
    3. रबर प्लांट
    घर के भीतर की निगेटिव ऊर्जा को कम करता है। इसे घर के वेल्थ एरिया में लगाएं। जहां धन आदि रखते हैं। साथ ही यह शांति और समृद्धि भी लाता है।
    4. मनी प्लांट
    इस पौधे से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो आपके मूड को अच्छा बनाती है। यह ऊर्जा सौभाग्य और सफलता को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे घर की दक्षिण पूर्व दिशा में लगाएं। इस दिशा को कुबेर दिशा भी कहते हैं।
    5. जेड प्लांट
    गोल पत्तों वाला ये प्लांट दिखने में जितना खूबसूरत है इसके फायदे उससे भी कहीं ज्यादा हैं। घर और ऑफिस में इस पौधे को लगाएं। आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी क्योंकि ये आपको पॉजिटिव एनर्जी देगा। इसे एंट्रेंस के पास लगाएं।
    नोट: इस आलेख में दी गई जानकारी का हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णत्या सत्य या सटीक हैं और इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र विशेषज्ञ की राय जरूर ले लें।

    खेल /शौर्यपथ / भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेल जा रहे पहले वनडे मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है। सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर और आरोन फिंच ने टीम को बेहतरीन शुरुआत दी है और ऑस्ट्रेलिया ने बिना कोई विकेट गंवाए 70 रन बना लिए हैं। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मैच में कमेंट्री के दौरान एडम गिलक्रिस्ट से बड़ी चूक हो गई, उन्होंने पिता के निधन के लिए सिराज की जगह नवदीप सैनी का नाम ले लिया, गिलक्रिस्ट ने हालांकि अपनी इस गलती के लिए थोड़ी देर बाद ही मोहम्मद सिराज और नवदीप सैनी दोनों से माफी मांगी।
    अभी कुछ दिन पहले मोहम्मद सिराज के पिता का निधन हो गया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में होने के चलते सिराज अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं गए थे और उन्होंने बीसीसीआई को भी अपना फैसला बता दिया था। मोहम्मद सिराज ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया की टेस्ट टीम का हिस्सा है। सिडनी में खेले जा रहे पहले वनडे मैच में एडम गिलक्रिस्ट इस बात को लेकर कंफ्यूज हो गए और उन्होंने पिता के निधन होने की बात करते हुए मोहम्मद सिराज की जगह नवदीप सैनी का नाम ले लिया। हालांकि, गिलक्रिस्ट ने अपने ट्विटर पर इस बात के लिए इन दोनों ही भारतीय तेज गेंदबाजों ने तुरंत माफी भी मांगी है।
    सीरीज के पहले वनडे मैच में भारतीय टीम ने बतौर ओपनर मयंक अग्रवाल को मौका दिया है, जबकि नवदीप सैनी को तीसरे तेज गेंदबाज के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। केएल राहुल इस मैच में नंबर चार पर बल्लेबाजी करते दिखाई देंगे। कुलदीप यादव पहले वनडे मैच में अपनी जगह बनाने में नाकाम रहे हैं और आईपीएल में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले रविंद्र जडेजा को प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई है।

    मनोरंजन / शौर्यपथ /बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया है कि आखिर ठंड में घर पर वर्क आउट करना क्यों मजेदार होता है। मीरा ने हाल ही में अपने वर्कआउट सेशन की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसके बाद ही उन्होंने कड़ाके की ठंड में घर पर पसीना बहाने के पीछे का 'बेस्ट पार्ट' बताया।
    मीरा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर टाइट्स के ऊपर ऊनी मोजे में योगा मैट के ऊपर खड़े होकर अपने पैरों की फोटो शेयर की है। मीरा ने दावा किया कि घर पर काम करने के बारे में सबसे अच्छी बात यह थी कि वह जो चाहे पहन सकती थी। इतना ही नहीं, मीरा ने अपना होम वर्कआउट जिम लुक दिखाया और इसे फनी भी बताया।
    मीरा राजपूत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और फैन्स के साथ स्किन और हेयर केयर के टिप्स भी शेयर करती रहती हैं। फैन्स के बीच ब्यूटी टिप्स से जुड़े मीरा के वीडियो खूब पसंद भी किए जाते हैं। हाल ही में दिवाली पर मीरा पति शाहिद कपूर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते नजर आई थीं, जो इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं। शाहिद और मीरा ने अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था।
    आपको बता दें कि शाहिद कपूर और मीरा राजपूत कपूर की जोड़ी बॉलीवुड के परफेक्ट कपल्स में से एक हैं। शाहिद ने 7 जुलाई 2015 को दिल्ली की रहने वालीं मीरा से अरेंज मैरिज की थी। शाहिद और मीरा के दो बच्चे बेटी मीशा और बेटा जैन कपूर हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो शाहिद कपूर की अपकमिंग फिल्म 'जर्सी' है। फिल्म में शाहिद एक क्रिकेटर के रोल में नजर आएंगे। फिल्म के डायरेक्टर गौतम तिन्नानुरी हैं। फिल्म में शाहिद के अलावा मृणाल ठाकुर, शरद केलकर और पंकज त्रिपाठी भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म साल 2021 में रिलीज हो सकती है।

    ➡️पंचायत सचिवों को शासकीय करण करने बाबत
    ➡️साथ में छत्तीसगढ़ के 65 विधायक गणों का अनुशंसा पत्र

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में प्रदेश पंचायत सचिव संघ जिला इकाई राजनांदगांव ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई प्रदेश उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ एवं जिला अध्यक्ष राजनांदगांव रामदुलार साहू के नेतृत्व में संघ के सभी साथी एवं पदाधिकारियों ने धरना प्रदर्शन में उपस्थित होकर अपने संगठन की मांगों को रखा इस दौरान सचिव संघ के जिला अध्यक्ष रामदुलार साहू ने उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया संघ के ऊर्जावान जिला अध्यक्ष रामदुलार साहू ने कलेक्टर महोदय जिला राजनांदगांव को छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के नाम ज्ञापन देकर अपने संघ की मांगों को भी रखा।
    जिला अध्यक्ष साहू ने बताया कि पंचायत सचिव जो कि 29 विभाग के 200 प्रकार के कार्यों को जमीनी स्तर पर इमानदारी पूर्वक निर्वहन करते हुए शासन प्रशासन की योजनाओं को और उनकी सेवाओं को लोकतंत्र के ग्रामीण क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाते हैं एवं शासन प्रशासन के आदेश अनुसार समय-समय पर अन्य कार्यों पर भी अपनी सेवा प्रदान करते हैं ऐसे में सचिवों की नियुक्ति के साथ जैसे शिक्षाकर्मी को शासन के द्वारा शासकीय करण कर दिया गया है परंतु पंचायत सचिव अभी तक वंचित हैं ऐसे में पंचायत सचिवों को शासकीय करण करने शासन प्रशासन से मांग की है पंचायत सचिवों के शासकीय करण के लिए छत्तीसगढ़ के 65 विधायकों ने भी अपनी अनुशंसा पत्र प्रेषित किया है सचिवों के कठिन कार्य को देखते हुए शासन प्रशासन से अनुरोध करते हुए परीक्षा अवधि समाप्ति के पश्चात छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिव को शासकीय करण करने का कष्ट करें माननीय जिलाधीश महोदय को ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष रामदुलार साहू के साथ रेख चंद्र यादव ब्लॉक अध्यक्ष छुरिया एवं निलेश क्षत्रिय जी भागवत साहू जी महेंद्र साहू जी योगेश साहू जी आदि पदाधिकारी गण उपस्थित रहे।।

    दुर्ग / शौर्यपथ / इलाज में घोर लापरवाही और व्यावसायिक कदाचार के चलते मरीज की मृत्यु होने पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने डॉ. दिलीप रत्नानी, अपोलो बीएसआर हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर पर 07 लाख 73 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

    परिवादी की शिकायत
    परिवादी राज पंजवानी और विक्रम पंजवानी के पिता तथा श्रीमती सुशीला पंजवानी के पति खेराज मल पंजवानी (मरीज) को दिनांक 21.08. 2015 को सीने में दर्द होने से बीएम शाह हॉस्पिटल में चेकअप के लिए भर्ती कराया गया। जहां से इलाज हेतु मरीज को अपोलो बीएसआर हॉस्पिटल जुनवानी में इलाज हेतु दिखाने को कहा गया। अपोलो बीएसआर हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर दिलीप रत्नानी ने लगातार मरीज का इलाज किया। शुरू में मरीज को नॉर्मल बताया गया किंतु आईसीयू में रखा गया और ऑपरेशन के लिए टालते हुए 3 दिन व्यतीत कर दिए और 24 अगस्त 2015 को डॉ. दिलीप रत्नानी ने आउट ऑफ स्टेशन जाने की बात कह कर मरीज को नारायणा हॉस्पिटल रायपुर के डॉ. चंदेल को रेफर करने को कहा। दिनांक 27 अगस्त 2015 के बाद अचानक मरीज को सीरियस बताते हुए डॉ. दिलीप रत्नानी ने रु. 50000 जमा करने को कहा। इसके बाद डॉ. दिलीप रत्नानी ने कंप्यूटर पर दिखाया कि जो भी ब्लॉकेज उसे क्लियर कर ऑपरेशन कर दिया गया है किंतु शाम 3:15 बजे हॉस्पिटल की नर्स ने बताया कि मरीज की डेथ हो गई है। अनावेदकगण का कृत्य सेवा में कमी और व्यवसायिक कदाचार की श्रेणी में आता है।

    अनावेदकगण का बचाव
    हॉस्पिटल और डॉक्टर ने यह बचाव लिया कि मरीज की हालत अत्यंत गंभीर थी, उसे गंभीर हृदयाघात हुआ था। उसके हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज थे जिसके कारण हृदय की क्षमता मात्र 20 प्रतिशत थी उसका हृदय कभी भी बंद हो सकता था, जिसे बैलूनपंप सपोर्ट दिया गया तथा अस्थाई तौर पर पेसमेकर भी लगाया गया था, इसके साथ ही आवश्यक बाईपास सर्जरी हेतु मरीज के परिजनों को समझाया गया था लेकिन अपोलो बीएसआर हॉस्पिटल में कोई कार्डियक सर्जन ना होने के कारण उसे रायपुर स्थित कार्डियक सेंटर में भिजवाने की व्यवस्था करने को कहा गया लेकिन मरीज के परिजन काफी गरीब थे इसलिए मरीज को अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए सहमत नहीं थे, ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर दिलीप रत्नानी ने मजबूरी में मरीज का एंजियोप्लास्टी करके ब्लॉकेज हटाने की कोशिश की एवं स्टेंट भी लगाया लेकिन हर संभव प्रयास करने के बावजूद मरीज की जान नहीं बच पाई।

    अनावेदक क्रमांक 3 बीमा कंपनी द्वारा यह कहा गया कि यदि डॉ दिलीप रत्नानी के विरुद्ध यदि चिकित्सकीय उपेक्षा का मामला सिद्ध होता है तो डॉ रत्नानी द्वारा बीमा कंपनी के खिलाफ नियम और शर्तों के तहत दावा कर करने पर उन्हें दावा भुगतान किया जाएगा किंतु बीमा कंपनी परिवादीगण को कोई क्षतिपूर्ति भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है।

    आयोग का फैसला
    प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह निष्कर्ष निकाला कि अनावेदक हॉस्पिटल में कोई कार्डियक सर्जन उपलब्ध नहीं था और पाया कि परिवादी राज पंजवानी अपने पिता के अच्छे इलाज के लिए गंभीर था और वह गरीब होने के बावजूद हैदराबाद में इलाज कराने हेतु संपूर्ण दस्तावेज और सीडी के साथ राय लेना चाहता था किंतु अनावेदक डॉक्टर और हॉस्पिटल इस बात से सहमत नहीं थे और इसकी जानकारी होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और ऐसी परिस्थितियां निर्मित की जिससे परिवादी को बीच में ही यात्रा रोक कर भिलाई वापस आना पड़ा। किसी भी चिकित्सक का प्रथम दायित्व अपने मरीज के प्रति होता है और डॉक्टरी पेशे को ईश्वर के समकक्ष का दर्जा दिया गया है और उक्त पेशे में इस तरह की गतिविधियां निश्चित रूप से पेशे के सम्मान को कम करती है और यदि कोई डॉक्टर किसी मरीज का सिर्फ अपने लाभ के लिए इलाज करना चाहता है या अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए अपने परिचित डॉक्टर के पास भेजना चाहता है, जिसके लिए मरीज का परिवार सहमत नहीं है तो निश्चित रूप से डॉक्टर का उक्त कृत्य घोर व्यवसायिक कदाचरण की श्रेणी का है। आयोग ने यह भी प्रमाणित पाया कि अनावेदकगण ने मरीज का बाईपास संबंधी इलाज करने में अत्यधिक देरी की यदि वास्तव में मरीज दिनांक 21 अगस्त 2015 को भर्ती करने के दिन सीरियस होता तो उसके लंग्स और हार्ट बेडहेड टिकट के अनुसार सामान्य नहीं होते। अनावेदक डॉक्टर और हॉस्पिटल ने मरीज का संदेहास्पद इलाज किया है।

    जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह अभिनिर्धारित किया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार मृत्यु की क्षति के रूप में परिवादीगण 672000 रूपये और मानसिक क्षति के एवज में 100000 रुपये कुल मिलाकर 772000 रुपये अनावेदकगण से प्राप्त करने के अधिकारी हैं, आयोग ने यह आदेश भी दिया कि 672000 रुपये पर दिनांक 15.03.2016 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा तथा वाद व्यय के रूप में पृथक से 1000 रुपये देना होगा।

    अमित के सामने भिलाई में भिड़े दुर्ग और भिलाई के भाजयुमों कार्यकर्ता ,दिनेश देवांगन के साथ भिलाई के कार्यकर्ताओं ने किया झूमा झटकी

    शौर्यपथ/ दुर्ग / अनुशासन का दंभ भरने वाली भाजपा में आज कल अनुशासन तार तार होने लगा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गुरूवार को नवनियुक्त प्रदेश भाजयुमों अध्यक्ष अमित साहू के आगमन के दौरान दिखाई दिया। यहां आज फिर जमकर कर सरोज पाण्डेय औेर प्रेमप्रकाश पाण्डेय के समर्थकों मे ंजमकर गुटबाजी दिखी। अमित साहू के स्वागत का प्रमुख कार्यक्रम पहले भिलाई एवं उसके बाद दुर्ग में रखा गया था। भिलाई में कार्यक्रम के दौरान अमित साहू को दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय ले जाने दुर्ग जिला भाजयुमों अध्यक्ष दिनेश देवांगन अपने पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या मे ंकार्यकर्ताओं को लेकर भिलाई पहुंचे थे, इस दौरान तयशुदा कार्यक्रम के तहत दुर्ग जाने में अत्यधिक देर होने पर जब दिनेश देगवांगन और उनके पदाधिरियों ने अमित साहू से कहा कि आपका दुर्ग के कार्यकर्ता भी बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे है, इस बात को लेकर दिनेश देवांगन के साथ आये लोगों के साथ भिलाई के भाजयुमों कार्यकर्ताओं पीपीपी गुट के लोगों और सरोज गुट के लोगों में जमकर तकरार हो गया और मामला हाथा बाई तक पहुंच गया। मामले को बढता देख प्रदेश भाजयुमों अध्यक्ष अमित साहू ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया।
    उसके बाद यहां से दुर्ग भाजयुमों के कार्यकर्ता वापस दुर्ग पहुंचे और वहां इस घटना की जानकारी भाजपा कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं को दी। उसके बाद दुर्ग भाजयुमों के कार्यकर्ताओं ने जितनी भी भाजपा कार्यालय में श्री साहू के सम्मान के लिए सजाया था उसे उन्होंनें स्वयं ही उजाडऩे के साथ तोडफोड कर दिये।
    ज्ञातव्य हो कि ज्ञातव्य हो कि भाजयुमो के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के जिला आगमन पर लगभग एक सप्ताह से दुर्ग जिला एवं भिलाई जिला के कार्यकर्ताओं ने काफी जोश खरोश से उनके स्वागत की तैयारी की थी, परन्तु जैसे जैसे अमित साहू के आगमन की तिथि नजदीक आती जा रही थी वैसे वैसे ही दोनों जिलों के भारतीय जनता युवा मोर्चा में गुटबाजी अपने चरम पर दिखाई पडऩे लगी थी, जिसके फलस्वरूप भिलाई एवं दुर्ग जिला के कार्यकर्ताओं में जो जोश खरोश दिखाई दे रहा था वह आज आपसी गुटबाजी का भेट चढ गया, इसी का परिणाम यह रहा की प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू अपने तय कार्यक्रम के हिसाब से भिलाई में स्थित कार्यक्रम में लगभग सही समय से पहुचे इसके विपरीत दुर्ग जिला भाजपा युवा मोर्चा के कार्यक्रम में जिले से आये हुए कार्यकर्ताओं में बेचैनी के साथ ही आक्रोश भी नजर आया, जिसके चलते दुर्ग जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश देवांगन को अपने ही कार्यकर्ताओं से आक्रोश का झेलना पड़ा, इस बात को मद्देनजर रखते हुए जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन ने प्रदेश अध्यक्ष से दूरभाष पर लोकेशन की जानकारी ली तो ऐसा उन्हें ज्ञात हुआ कि प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू भिलाई के कार्यक्रम में व्यस्त है, इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के कार्यक्रम स्थल पर पहुचकर अपने अध्यक्ष से गुहार लगाईं कि आपके तय कार्यक्रम के अनुसार लगभग एक घंटा विलम्ब हो गया है और हमारे कार्यकर्ता आपका बी बेताबी से इंतजार कर रहे है, इतनी बात होनी ही थी कि मनीष पाण्डेय के समर्थक अमित साहू के साथ दुर्ग जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन की चर्चा को लेकर आग बबूला हो गए और कहने लगे की यहाँ क्यों आया है, भिलाई का मामला है हमारी मर्जी के हिसाब से हम प्रदेश अध्यक्ष को बिदा करेंगे और दिनेश देवांगन से झूमा झटकी करने लगे, परिस्थिति किसी अनहोनी में ना तब्दील हो जाए इसलिए प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू ने वक्त की नजाकत को समझते हुए दोनों गुट के कार्यकर्ताओं को समझाकर शांत कराया और दिनेश देवांगन को यह बोलकर बिदा कर दिया की आप जाइए मै आ रहा हूँ, चूँकि दिनेश देवांगन के साथ हुए अभद्र व्यव्हार व झुमा झटकी की खबर आग की तरह दुर्ग कार्यालय जा पहुची जहा पर जिला कार्यलय में प्रतीक्षारत कार्यकता आक्रोशित हो प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम का बहिष्कार करने की मंशा बनाते हुए लगभग तीन घंटे विलम्ब से पहुचे प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और अमित साहू वापस जाओ के नारे भी लगाए गए स्थिति इतनी विकट थी कि आक्रोशित युवा कार्यकर्ता अमित साहू के लिए बनाए गए स्वागत द्वार को भी तोड दिया और सुदूर क्षेत्र से आये भाजयूमो कार्यकर्ता अपने घरों को लौटने लगे, जिसके फलस्वरूप जिला अध्यक्ष दिनेश देवांगन बड़ी मुश्किल से अपने अध्यक्ष को कार्यलय में उपरी मंजिल में ले जाकर चर्चा की और मनीष पाण्डेय समर्थकों के कच्चे चिठ्ठे को भी सौपकर जिले में व्याप्त गुटबाजी को समाप्त करने की गुहार भी लगाईं !
    अमित साहू के दुर्ग भाजपा कार्यालय पहुंचते ही हंगामा,वापस जाओं के लगे नारे
    नवनियुक्त भाजयुमों के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के सामने भिलाई में हुए घटना के कारण तथा अमित साहू द्वारा अपने निर्धारित समय से तीन घंटा देर से आने के कारण दुर्ग भाजयुमों कार्यकर्ताओं ने जमकर उनके सामने ही भाजपा कार्यालय में हंगामा किया और अमित साहू वापस जाओं के जमकर नारे लगाये। बहुत देर के बाद अमित साहू के दौरा कार्यक्रम के प्रभारी जे पी यादव ने बाद मेें कैसे भी मामला को शांत कराया।

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