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21 नवंबर से 4 दिसंबर तक आयोजित होगा पुरुष नसबंदी पखवाड़ा
पहले चरण में दंपती संपर्क सप्ताह, दूसरे चरण में सेवा वितरण सप्ताह मनेगा
रायपुर / शौर्यपथ / परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 21 नवंबर से 4 दिसंबर तक किया जायेगा । विश्व पुरुष नसबंदी पखवाड़े को दो चरणों में मनाया जायेगा।
प्रथम चरण में मोबिलाइजेशन सप्ताह 21 से 27 नवंबर तक तथा द्वितीय चरण में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक सेवा वितरण सप्ताह मनाया जाएगा। यह अभियान` परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी, जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली’ के नारे के साथ चलाया जाएगा।
इस पखवाड़े की जानकारी देते हुए ज़िला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने बताया पखवाड़े के माध्यम से पुरुष नसबंदी के बारे में समाज में जागरूकता लाना और पुरुषों में नसबंदी को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना है। दंपती संपर्क 21 से 27 नवंबर तक चलेगा और 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक द्वितीय चरण में सेवा वितरण सप्ताह मनाया जाएगा।यह सेवा उपलब्धता पर केंद्रित रहेगा जो कोविड-19 के संदर्भ में संशोधित किया गया है । पखवाड़े के अंतर्गत समस्त गतिविधियों को कोविड-19 संबंधित समस्त सावधानियां एवं सलाह को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त रूप से संशोधित किया है मुख्यत: शारीरिक दूरी, मास्क पहनने, संक्रमण की रोकथाम का पूर्णता पालन सुनिश्चित किया जाएगा ।
परिवार नियोजन के लिए दी जाने वाली सेवाएं दिशा निर्देशों के अनुसार ही प्रदान की जाएंगी । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग से सूचनाओं का आदान प्रदान के साथ ही जिला एवं विकासखंड के अधिकारियों का क्षमता वर्धन भी किया जाएगा शारीरिक दूरी एवं कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पखवाड़ा 21 नवंबर से 2 सप्ताह तक मुख्यता वेसेक्टॉमी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा । इस सप्ताह के दौरान पुरुष नसबंदी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित होने वाली गतिविधियां
केंद्र पर पुरुष नसबंदी सेवा और इसके फायदे को प्रदर्शित किया जाएगा । नसबंदी के तीन माह उपरांत (जांच में शुक्राणु संख्या शून्य पाए जाने पर) ही प्रमाण पत्र हितग्राही को प्रदान किया जाएगा । भारत सरकार द्वारा निर्देशित समस्त मानकों एवं दिशा निर्देशों का पालन समस्त स्तरों पर सुनिश्चित किया जाएगा ।
मोबिलाइजेशन फेस में आयोजित की जाने वाली गतिविधियां
अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया जाएगा जिसमें व्यक्तिगत चर्चा और पुरुष नसबंदी के फायदे हितग्राहियों को बताये जाऐंगे। ‘मोर मितान मोर संगवारी’ का आयोजन दिशा निर्देश के अनुसार किया जाएगा । साथ ही पुरुष नसबंदी से संबंधित मिथकों को दूर करने के लिए परामर्श भी प्रदान किया जाएगा । प्रचार प्रसार के लिए डिजिटल माध्यम के प्रयोग को बल दिया जाएगा । कंटोनमेंट एवं बफर जोन में मोबाइल वेन की व्यवस्था कर प्रचार प्रसार किया जाएगा। प्रचार प्रसार के दौरान कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरी सावधानी रखी जाएगी कहीं भी अधिक भीड़ एकत्रित ना हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा
दुर्ग / शौर्यपथ / गोवर्धन पूजा के दिन निकाली जानी वाली गौरा गौरी शोभायात्रा में कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए गया नगर वार्ड 4 में समितियो के लोगो द्वारा कोरोना से बचाव हेतु मास्क पहन कर भगवान शंकर व माता पार्वती की शोभा यात्रा निकालकर मोहल्ले में भ्रमण करते हुए तालाब में विसर्जन किया इसके लिए गया नगर वार्ड 4 कि पार्षद श्रीमती लीना दिनेश देवांगन ने वार्ड में राजीव नगर व गया नगर से निकाली जाने वाली गौरा गौरी यात्रा के सभी चारो समितियों को अपनी ओर सौ से अधिक मास्क वितरित किया था ताकि जीवन की सुरक्षा के साथ साथ त्योहार का धार्मिक सांस्कृतिक पहचान भी कायम रह सके वार्ड में राजीव नगर,शिव नगर व गया नगर गौरा चौरा सहित कुल 4 स्थानों से शोभायात्रा निकाली गई थी जो विभिन्न गलियों में भ्रमण करते हुए पुलिस सुरक्षा के बीच तालाबों में विसर्जित की गई इस अवसर पर वार्ड पार्षद लीना दिनेश देवांगन ने गया नगर में निकली गौरा गौरी का पूजन व स्वागत कर समिति के लोगो को दीपावली पर्व की शुभकामना दी तथा कोविड 19 को ध्यान में रखकर ही त्योहार मानने की अपील की वार्ड पार्षद द्वारा किए गए इस पहल की लोगो ने सराहना करते हुए उनके इस कार्य की। इस अवसर पर गया नगर गौरा समिति अध्यक्ष भारत ठाकुर,राजू गो ड,सावित्री ठाकुर,कुमारी यादव,मुकेश ठाकुर,गंगा राम वर्मा सहित अनेक लोग मौजूद थे ।
मीडिया जगत सूचना प्रदान कर लोकतांत्रिक विमर्श को देता है नई दिशा
छत्तीसगढ़ सरकार लगातार बढ़ा रही है पत्रकारों के लिए सुविधाएं
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया जगत के लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि मीडिया जगत निडरतापूर्वक निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से देश मे लोकतांत्रिक विमर्श को एक नई दिशा प्रदान करता है। नागरिको को उनके अधिकार और दायित्व के प्रति सचेत कर देशहित व लोकहित में सक्षम बनाते है। उन्होंने कहा कि मीडिया प्रतिनिधियों ने
कोविड 19 जैसे महामारी में भी लोगो मे जागरूकता लाने में अहम भूमिका निभाई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्री प्रेस हमारे लोकतंत्र की विशेषता और आधारशिला है । राष्ट्रीय प्रेस दिवस प्रेस की स्वतन्त्रता और जिम्मेदारियो की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पत्रकारों के लिए लगातार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। जनसंपर्क विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की पात्रता एवं प्रावधानों में संशोधन कर ज्यादा से ज्यादा पत्रकारों को इनके दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए पिछले वर्ष ही वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि को पांच हजार रूपए से बढ़ाकर दस हजार रूपए प्रति माह किया है। अधिमान्यता नियमों में संशोधन कर विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। पत्रकार कल्याण कोष से जरूरतमंद पत्रकारों को आर्थिक सहायता की सीमा को 50 हजार रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए किया गया है। राज्य शासन के श्रम विभाग ने पत्रकारों के हित में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश जारी किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकार के रूप में पहचान देने एवं उनके काम में सहूलियत के लिए साल भर पहले नए अधिमान्यता नियम लागू किए गए हैं। मीडिया के बदलते स्वरूप को देखते हुए टी.वी. चैनलों, वेब-पोर्टल, समाचार पत्रिका और समाचार एजेंसी के पत्रकारों को भी अधिमान्यता देने का प्रावधान किया गया है। मीडिया संस्थानों के लिए अधिमान्यता कोटा करीब-करीब दुगुना कर दिया गया है। नए नियमों के तहत राज्य में पहली बार विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। साथ ही लंबे समय तक इस पेशे में रहे सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए दीर्घकालिक सेवा पत्रकार अधिमान्यता भी शुरू किया गया है। नए अधिमान्यता नियमों के फलस्वरूप वर्तमान में 233 राज्य स्तरीय और 287 जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार हैं।
पत्रकारों को गंभीर बीमारी के इलाज, वृद्धावस्था में आर्थिक संकट, दैवीय विपत्ति जैसी परिस्थितियों में मदद का दायरा बढ़ाने के लिए पत्रकार कल्याण कोष के नियमों में पिछले वर्ष व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब आर्थिक सहायता की सीमा 50 हजार रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए कर दी गई है। साथ ही दंगों, बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में समाचार कवरेज के दौरान कैमरा एवं अन्य उपकरणों के नुकसान पर भी आर्थिक मदद का प्रावधान नए नियम में जोड़ा गया है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश के 49 पत्रकारों को साढ़े 41 लाख रूपए से अधिक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है।
वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि की राशि दुगुनी करने के साथ ही इसके दायरे में अधिक से अधिक पत्रकारों को लाने के लिए पात्रता की शर्तें शिथिल की गई हैं। योजना के तहत पहले जहां हर माह पांच हजार रूपए दिए जाते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। पात्रता के लिए आयु सीमा भी 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष की गई है। पहले इस योजना में शामिल पत्रकारों की पात्रता की हर पांच वर्ष में समीक्षा की जाती थी। नए नियमों के तहत समीक्षा का प्रावधान समाप्त करते हुए अब इसे आजीवन कर दिया गया है। योजना में शामिल पत्रकारों को अक्टूबर-2019 से हर महीने दस हजार रूपए की सम्मान निधि दी जा रही है। वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि योजना के फलस्वरूप दो वर्ष पूर्व जहां आठ वरिष्ठ पत्रकारों को योजना का लाभ मिल रहा था, अब यह संख्या 23 हो गई है।
राज्य शासन द्वारा निर्भीक एवं निष्पक्ष पत्रकारिता में मदद के लिए छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून तैयार करवाया जा रहा है। इसके लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश न्यायमूर्ति श्री आफताब आलम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, वरिष्ठ पत्रकार और महाधिवक्ता की 12 सदस्यीय समिति ने कानून का प्रथम प्रारूप तैयार कर माह नवम्बर-2019 में राज्य के पत्रकारों, पत्रकार संगठनों और आम नागरिकों की राय को शामिल कर इसका द्वितीय प्रारूप तैयार किया है। अभी इसके द्वितीय प्रारूप पर ऑनलाइन सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं जिसके आधार पर इस कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
बस्तर में लगने वाले स्टील प्लांट्स को 30 प्रतिशत डिस्काउंट पर मिले लौह अयस्क : इससे निवेश बढेगा और बड़ी संख्या में युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
बस्तर में लगाए जाएं बड़ी संख्या में सौर उर्जा संयंत्र
लघु वनोपज, वन औषधियां की प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड चैन स्थापना हेतु उदारता से मिले अनुदान
इन्द्रावती नदी पर बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए केंद्र से मिले सहयोग
आकांक्षी जिलों में आजीविका के साधन विकसित करने कलेक्टरों हर वर्ष दिए जाएं कम से कम 50-50 करोड़ रूपये
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर बस्तर अंचल में नक्सल समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान में जारी रणनीति के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाए, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बेरोजगार विवश होकर नक्सली समूहों में शामिल न हो ।
मुख्यमंत्री ने नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में वृहद पैमाने पर रोजगार उपलब्ध करने के लिए सुझाव दिया है कि बस्तर अंचल में लौह अयस्क प्रचुरता से उपलबध है। यदि बस्तर में स्थापित होने वाले स्टील प्लांट्स को 30 प्रतिशत डिस्काउन्ट पर लौह अयस्क उपलब्ध कराया जाए, तो वहां सैकड़ों करोड़ का निवेश तथा हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के कारण बड़े भाग में अभी तक ग्रिड की बिजली नहीं पहुंच पाई है । सौर उर्जा संयंत्रों की बड़ी संख्या में स्थापना से ही आमजन की उर्जा आवश्यकता की पूर्ति तथा उनका आर्थिक विकास संभव है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी सुझाव दिया है कि वनांचलों में लघु वनोपज, वन औषधियां तथा अनेक प्रकार की उद्यानिकी फसलें होती है । लेकिन उनके प्रसंस्करण एवं विक्रय की व्यवस्था न होने के कारण संग्राहकों को इनका समुचित लाभ प्राप्त नही हो रहा है । उन क्षेत्रों में स्थापित होने वाली प्रसंस्करण इकाईयों एवं कोल्ड चेन निर्मित करने के लिये उदारतापूर्वक अनुदान दिये जाने की आवश्यकता है । इसी प्रकार के बस्तर में इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन से सिंचाई एवं उर्जा क्षमता के विकास से बस्तर अन्चल के बड़े भाग का काया कल्प हो जायेगा। इस परियोजना की स्थापना हेतु भी केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा है कि वर्तमान में आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) को केन्द्र सरकार की ओर से पृथक से कोई आर्थिक अनुदान नहीं दिया जा रहा। राज्य के बस्तर अन्चल के सातों जिले आकांक्षी जिलों के रूप में चिन्हांकित है। उचित होगा कि लोगों की आजीविका के साधनों के विकास हेतु कलेक्टरों को कम से कम 50-50 करोड़ रूपये की राशि प्रतिवर्ष दी जाये।
मुख्यमंत्री ने पत्र में केंद्रीय गृहमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के संबंध में 03 सितम्बर, 2020 को मेरे द्वारा लिखे गये पत्र के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर आपका ध्यान आकर्षित किया गया था। मुझे खुशी है कि तत्संबंध में आपके द्वारा संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य हेतु वर्ष 2018 में आबंटित की गई 07 अतिरिक्त सीआरपीएफ बटालियन में से तत्काल 05 बटालियन बस्तर क्षेत्र में तैनात किए जाने हेतु निर्देशित किया गया । मुझे यह भी ज्ञात हुआ है कि बस्तर क्षेत्र के युवाओं को राष्ट्रीय पटल पर देश सेवा एवं रोजगार के अवसर प्रदाय करने हेतु सेना की विशेष भर्ती रैली मार्च 2021 में बस्तर संभाग में आयोजित करने का विचार किया जा रहा है । निश्चित रूप से इन दोनों विषयों पर आपके द्वारा की गई पहल के माध्यम से नक्सल विरोधी अभियान में हमें निर्णायक बढ़त प्राप्त होगी ।
विगत वर्षों में भारत सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों को सुरक्षा बल, आधुनिकीकरण, अधोसरंचना निर्माण एवं संचार साधनों के विकास हेतु उदारतापूर्वक सहायता उपलब्ध कराई गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है ।नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान में जारी रणनीति के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाए जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बेरोजगार विवश होकर नक्सली समूहों में शामिल न हो ।
मुख्यमंत्री बघेल ने लिखा है कि यदि उपरोक्त सुझावों का क्रियान्वयन किया जाये तो आगामी कुछ ही वर्षों में बस्तर अन्चल से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने में सहायता मिलेगी। अनुरोध है कि उक्त समस्त गतिविधियों के संचालन हेतु केन्द्र से अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल के नेता शिवानंद तिवारी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि शिवानंद एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें ऐसे बयान देने के पहले सोचना चाहिए. कांग्रेस राजद की तरह नहीं है. राष्ट्रीय जनता दल एक क्षेत्रीय पार्टी है औऱ उसके नेता वहीं तक सीमित रहते हैं. राहुल गांधी ने कहा था कि जब कभी भी जरूरत होगी तो वह बिहार आएंगे. उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर ऐसा किया भी. वह आरजेडी के नेताओं की तरह काम नहीं कर सकते.
दरअसल, राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा था, "महागठबंधन को कांग्रेस ले डूबी. कांग्रेस ने 70 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 70 चुनावी रैलियां भी प्नचार नहीं कीं. राहुल गांधी महज तीन दिन के लिए बिहार चुनाव प्रचार के दौरान आए, प्रियंका गांधी नहीं आईं. जिन्हें बिहार की जमीनी हकीकत की जानकारी भी नहीं था, उन्हें प्रचार में भेजा गया. यह सही नहीं है. ” राजद, कांग्रेस और वामपंथी दलों का महागठबंधन नतीजों में 110 सीटों पर सिमट गया. वह बहुमत से करीब एक दर्जन सीट दूर रह गया.
कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन सिर्फ 19 सीटों पर जीत दर्ज की. राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और छोटे वाम दलों ने भी अच्छी खासी संख्या में सीटें जीतीं. तिवारी ने कहा था कि बिहार ही नहीं अन्य राज्यों में भी कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर देती है, लेकिन सीटें जीतने में नाकाम रहती है. उन्होंने आरोप लगाया था, " जब चुनाव चरम पर थे, तब राहुल गांधी शिमला में प्रियंका जी के घर पर पिकनिक मना रहे थे. क्या पार्टी इस तरह से चलती है?
सबरीमाला / शौर्यपथ / कोरोनावायरस महामारी के बीच केरल के सबरीमाला में भगवान अयप्पा की दो महीने तक चलने वाली तीर्थ यात्रा आज शुरू हो गई. सबरीमाला मंदिर को वार्षिक तीर्थ यात्रा कार्यक्रम के लिए रविवार को खोला गया था. हालांकि, कड़े कोरोना रोकथाम उपायों के बीच श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट आज खोले गए हैं. मंदिर अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रियों को एक वर्चुअल कतार प्रणाली के माध्यम से सुबह 3 बजे ट्रेकिंग शुरू करने की अनुमति दी गई थी.
सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले अधिकांश तीर्थ यात्री आज पहुंचे. मास्क पहने मंदिर बोर्ड के कर्मचारी और पुलिसकर्मी तीर्थयात्रा में शामिल लोगों पर करीब से नजर रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी श्रद्धालु कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें. जिसमें कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट, फिटनेस सर्टिफिकेट और मास्क पहनाना अनिवार्य है.
मंदिर बोर्ड ने कहा, "62 दिन तक चलने वाले तीर्थयात्रा कार्यक्रम में हर साल लाखों लोग आते हैं. हालांकि, इस बार केवल 85000 श्रद्धालुओं को पूजा करने के लिए आने की अनुमति दी जाएगी. कोरोनावायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए भीड़भाड़ से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है."
बोर्ड की ओर से कहा गया है कि हर दिन केवल 1000 श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दी जाएगी, जिन्होंने वर्चुअल कतार प्रणाली के माध्यम से दर्शन के लिए बुकिंग की होगी. शनिवार और रविवार को 2000 लोगों को दर्शन की अनुमति दी जाएगी."
अमेरिका / शौर्यपथ / अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी मॉडर्ना (Moderna) ने दावा किया है कि उसकी कोरोना वैक्सीन 94 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है. मॉडर्ना के इस दावे ने जल्द ही कोरोना वैक्सीन दुनिया को मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. इसके पहले अमेरिका की ही एक और दवा कंपनी फाइजर ने भी उसकी वैक्सीन के 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावी होने का दावा किया था. मॉडर्ना, फाइजर के साथ ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका भी टीका विकास की दौड़ में सबसे आगे हैं. भारत में सीरम, भारत बायोटेक के साथ कई कंपनियां कोरोना के टीके के विकास में भी जुटी हुई हैं.
Moderna ने सोमवार को ऐलान किया कि उसकी प्रायोगिक वैक्सीन कोरोना वायरस का खात्मा करने में 94.5 फीसदी असरदार साबित हुई है. मॉडर्ना ने करीब 30 हजार प्रतिभागियों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरा करने के बाद यह प्रतिक्रिया दी है.मॉडर्ना ने के सीईओ स्टीफेन बैंसेल ने कहा, तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के अध्ययन से हमें सकारात्मक नतीजे मिले हैं और हमारी वैक्सीन कई गंभीर बीमारियों के साथ Covid-19 वैक्सीन को रोकने में कारगर साबित हो सकती है.
फाइजर ने भी कहा था, 90 फीसदी प्रभावी है टीका
फाइजर और बायोनटेक ने भी कोविड टीके के प्रभावी होने का दावा किया था. दोनों कंपनियों ने कहा था, ‘‘इस साल के अंत में या अगले साल की शुरुआत'' में उपलब्ध कराना शुरू कर दिया जाएगा. पिछले सप्ताह बायोएनटेक और फाइजर ने कहा था कि उसके टीके के विश्लेषण से पता चला है कि यह 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को कोविड-19 से बचाने में कारगर हो सकता है. टीका निर्माण की इस कवायद में 43,000 वालंटियर ने जांच में भाग लिया था. बायोनटेक के सह-संस्थापक और सीईओ प्रो.उगुर साहिन का कहना है कि अगले साल अप्रैल तक दुनिया में 30 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.
मॉडर्ना कुछ हफ्तों में मंजूरी हासिल करेगी
मॉडर्ना ने कहा कि यह ऐतिसाहिक दिन है और वह अगले कुछ हफ्तों में वैक्सीन को मंजूरी के लिए आवेदन दाखिल करेगी. मॉडर्ना की इस वैक्सीन की दो खुराक चार हफ्तों के अंतराल में 50 फीसदी प्रतिभागियों को दी गई थी. बाकी 50 फीसदी को प्लेसबो यानी नाममात्र का टीका दिया गया. ट्रायल के दौरान 11 ऐसे प्रतिभागियों को चुना गया, जो कोरोना के गंभीर मरीज थे. हालांकि टीकाकरण के कारण अन्य वालंटियर में वायरस नहीं फैला. मॉडर्ना के मुख्य चिकित्सा अधिकारी टैल जैक्स ने कहा, वैक्सीन करीब-करीब पूरी तरह प्रभावी रही है.
पटना / शौर्यपथ / तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी के बयान से बिहार चुनाव में हार के बाद विपक्षी महागठबंधन में पहली बार दरार सामने आई. तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बिहार में आधी-अधूरी लड़ाई लड़ी.
शिवानंद तिवारी ने कहा, "कांग्रेस महागठबंधन को ले डूबी. उन्होंने 70 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 70 रैलियां भी नहीं कीं. राहुल गांधी तीन दिन के लिए आए, प्रियंका [गांधी वाड्रा] नहीं आईं, जो आए वो बिहार से अपरिचित थे. यह सही नहीं है. ” बता दें कि राजद, कांग्रेस और वामपंथी दलों का महागठबंधन नतीजों में 110 सीटों पर सिमट गया.
तिवारी ने 243 सीटों में से 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस को व्यापक रूप से दोषी ठहराया. बता दें कि कांग्रेस ने सिर्फ19 सीटों पर जीत दर्ज की. नतीजों में राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और वाम दलों ने भी आश्चर्यजनक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया.
तिवारी ने कहा, "मुझे लगता है कि यह केवल बिहार में ही नहीं है. अन्य राज्यों में भी कांग्रेस अधिक से अधिक संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर देती है, लेकिन वे अधिक से अधिक संख्या में सीटें जीतने में विफल रहती हैं. कांग्रेस को इस बारे में सोचना चाहिए."
उन्होंने कहा, "यहां चुनाव पूरे शबाब पर थे और राहुल गांधी शिमला में प्रियंका जी के घर पर पिकनिक मना रहे थे. क्या पार्टी इस तरह से चलती है? जिस तरह से कांग्रेस पार्टी चलाई जा रही है, उससे बीजेपी को फायदा हो रहा है?"
हालांकि, कांग्रेस ने पार्टी की बड़ी हार पर कहा कि बिहार चुनाव के लिए सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने में देरी ने गठबंधन के प्रदर्शन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया. पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा कि परिणाम निश्चित रूप से "खराब" रहे.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कटिहार से चौथी बार निर्वाचित विधायक तारकिशोर प्रसाद को रविवार को बीजेपी विधानमंडल दल का नेता और बेतिया से पांचवी बार विधायक चुनी गईं रेणु देवी को उपनेता चुना गया. बाद में इन दोनों को बिहार का उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया. नीतीश कुमार नीत नई एनडीए सरकार में तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. रेणु देवी अति पिछड़ा वर्ग के तहत नोनिया समुदाय से आती हैं. रेणु देवी ने शपथ लेकर बिहार की पहली महिला उप मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रच दिया है.
बीजेपी की विधायक रेणु देवी बिहार की पहली महिला उप मुख्यमंत्री बनी हैं. बिहार में एनडीए के मुख्य घटक बीजेपी और जेडीयू में सत्ता के सर्वोच्च पदों का बंटवारा यूपी की तर्ज पर किया गया है. जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार जहां एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री बने हैं वहीं बीजेपी की तरफ से उप मुख्यमंत्री दो बनाए गए हैं. इसमें से एक पद महिला और एक पद पुरुष को दिया गया है. डिप्टी सीएम के लिए बीजेपी ने जहां पहला नाम कटिहार से विधायक तारकिशोर प्रसाद का तय किया था, तो वहीं दूसरा नाम रेणु देवी का है.
बिहार में पहली बार महिला उप मुख्यमंत्री बनीं रेणु देवी बेतिया की विधायक हैं. वे इस विधानसभा क्षेत्र से पांचवीं बार चुनी गई हैं. रेणु देवी पहली बार सन 2000 में एमएलए बनी थीं. इसके बाद वे साल 2005 और 2010 में भी विधायक बनीं. इसके बाद 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था.
इस बार के चुनाव में बीजेपी ने उन पर विश्वास किया और उन्हें फिर एक बार टिकट दिया. वे अपनी खोई हुई सीट फिर से जीतने में सफल रहीं. रेणु देवी 62 साल की हैं और उन्हें लंबा राजनीतिक अनुभव है. रेणु देवी की मां भी संघ परिवार से जुड़ी थीं. उनके ननिहाल पर भी बीजेपी और आरएसएस का प्रभाव रहा है. रेणु देवी बीजेपी के महिला मोर्चा में विभिन्न तरह की जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. वे नीतीश के नेतृत्व वाली साल 2005 में बनी सरकार में भी मंत्री का पद संभाल चुकी हैं. वे बीजेपी की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस नेता शशि थरूर ने रविवार को एक साथ कई ट्वीट करके पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आगामी संस्करण 'A Promised Land' के बारे में टिप्पणियां कीं. उनका यह ट्वीट ओबामा के इस संस्करण में राहुल गांधी के जिक्र के बाद आया है. पिछले हफ्ते बराक ओबामा की इस किताब में राहुल पर एक टिप्पणी के चलते बहस छिड़ गई थी. बराक ओबामा की किताब के कुछ एक्सर्प्ट सामने आए हैं, जिसके मुताबिक ओबामा ने अपनी किताब में राहुल गांधी का जिक्र करते हुए उन्हें एक 'नर्वस नेता' बताया है.
इसपर ट्वीट करते हुए शशि थरूर ने लिखा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'मनमोहन सिंह की लंबी तारीफ' की है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर जिक्र भी नहीं है. थरूर ने बताया कि उनके पास ओबामा की दो हिस्सों में आ रहे इस संस्मरण के पहले पार्ट की एडवांस कॉपी है और उन्होंने इंडेक्स में भारत का जहां-जहां जिक्र है, वो सारे पेज पढ़ लिए हैं.
उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, 'बड़ी खबर : ज्यादा कुछ कहने को नही है. उससे भी बड़ी खबर : पूरे 902 पेज में नरेंद्र मोदी का एक बार भी नाम लेकर जिक्र नहीं है.' उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'मनमोहन सिंह की तारीफ की गई है, जिसमें उन्हें 'बुद्धिमान, विचारपूर्ण और ईमानदार' 'असामान्य तौर पर ज्ञानी और शालीन व्यक्ति' बताया गया है, जिनके साथ उनके 'जोशीले और फलदायक संबंध' रहे, हालांकि, मनमोहन सिंह अपनी विदेश नीति को लेकर बहुत ही सजग रहते थे, उनके प्रति दूसरों का सम्मान दिखता है.'
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
