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April 05, 2026
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शौर्यपथ / गुड़हल का फूल जिसके बारे में आपने प्राइमरी स्कूल की किताबों में पढ़ा था। यह सिर्फ देखने में ही सुंदर नहीं होता बल्कि यह सेहत और सुंदरता का खजाना लिए हुए होता है। इसे हिबिसकस या जवाकुसुम भी कहते हैं।
इसके सभी हिस्सों का इस्तेमाल खाने, पीने या दवाओं के काम के लिए किया जा सकता है। यूनानी दवाओं में गुड़हल का बहुत उपयोग होता है और इससे कॉलेस्ट्रॉल, मधुमेह, रक्तचाप, गुर्दे की बीमारियों और गले के संक्रमण जैसे रोगों का इलाज किया जाता है।
यह विटामिन सी, कैल्शियम, वसा, फाइबर, नाइट्रोजन, फासफोरस, टेटरिक और ऑक्सीलिक एसिड, फ्लेवोनॉयड्स और फ्लेवोनॉयड ग्लाइकोसाइड्स का बढ़िया स्रोत है।
गु़ड़हल को हर्बल चाय, कॉकटेल या काढ़े के तौर पर लिया जा सकता है। फूलों को सुखाकर इसकी हर्बल चाय बनाई जा सकती है। पानी उबलने पर सूखे फूल डाल दीजिए और थोड़ी चीनी मिलाकर चाय तैयार हो जाएगी। कॉकटेल के लिए इसे ठंडा होने दें और बर्फ के साथ पिएं। यह सेहत के लिए गुणकारी चाय है।
गुड़हल का फूल विटामिन सी का बढ़िया स्रोत है और इससे कफ, गले की खराश, जुकाम और सीने की जकड़न में फायदा मिलता है।
गुड़हल की पत्तियां प्राकृतिक हेयर कंडीशनर का काम देती हैं और इससे बालों की मोटाई बढ़ती है। बाल समय से पहले सफेद नहीं होते। बालों का झड़ना भी बंद होता है। सिर की त्वचा की अनेक कमियां इससे दूर होती है।
इसकी पत्ती से बनी दवा से प्रसव संबंधी विकार, फोड़े-फुंसियाँ, और सूजन के उपचार में भी मदद मिलती है। गुड़हल का सत्व त्वचा में निखार और दमक लाता है।
गुड़हल के फूल का सत्व दिल की मजबूती के लिए उपयोगी है। यह जीवन शैली से जुड़ी समस्याओं जैसे कॉलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और मधुमेह की बीमारी में लाभ पहुँचाता है जो हृदय रोगों का कारण बनते हैं।
गुड़हल फूल में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं।
यूनानी दवाओं में गुड़हल काढ़े या चाय के तौर पर दिया जाता है। इसमें चीनी नहीं मिलाई जाती और इससे शरीर में ग्लकोज का संतुलित स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है।

खाना खजाना /शौर्यपथ /भारतीय रसोई में काली मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इन्हीं मसालों में और भी तरह की मिर्चियां होती है जैसे सफेद, हरी और गुलाबी, जिनका इस्तेमाल कम ही लोगों को पता है। आइए, आपको बताएं अन्य रंगों की मिर्चियों के बारे में -
ये छोटी फली होती है। इसे कच्चा तोड़कर कुछ समय पानी में भिगोया जाता है जिससे उसकी ऊपरी परत मुलायम होकर हट जाए। ये हल्की तीखी होती है और इसका इस्तेमाल क्रीम सॉस, मसले हुए आलू, हल्के रंग और क्रीम युक्त व्यंजनों में किया जाता है। यह मिर्च डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है...
2 हरी मिर्च -
जब फली हरे रंग की होती है, तभी ये तोड़कर सुखाई जाती है। इस अवस्था में ये काफी खुशबूदार होती है जो किसी फल की तरह महकती है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल सॉस, सूप, सलाद ड्रेसिंग, आलू सलाद और पास्ता में किया जाता है। फ्रांस के व्यंजनों में ये मुख्य सामग्री होती है। यह मिर्च इम्यून सिस्टम के लिए बेहतर मानी गई है....
3 गुलाबी मिर्च -
ये मिर्च पेरूवियन पेड़ से मिलती है। ये सुंदर गुलाबी रंग की होती है, इसे भोजन को सजाने और रंगत लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ये सलाद ड्रेसिंग, सूप, डिजर्ट, सॉस या हल्के रंग के भोजन में ऊपर से डाली जाती है। इसे तेज आंच में पकाने पर इसका स्वाद खराब हो जाता है। इसलिए इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है। दिल के हर तरह के रोग को भगाने में इस मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है....
4 काली मिर्च -
इसके बारे में तो आप जानते ही होंगे, ये काफी तेज व गर्म होती है। इसका इस्तेमाल हम कई तरह की सब्जियों व व्यंजनों में डालने के लिए करते है। भारत, नेपाल, उत्तरी अफ्रीका, मलेशिया और इंडोनेशिया में भोजन में इस्तेमाल की जाती है। यह गले और फेफड़े के हर रोग में लाभदायक है....

आस्था /शौर्यपथ /मंदिर में जब भी कोई जाता है तो पंडितजी उसे चरणामृत या पंचामृत देते हैं। लगभग सभी लोगों ने दोनों ही पीया होगा। लेकिन बहुत कम ही लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। आओ जानते हैं पंचामृत आत्मोन्नति के 5 प्रतीक और सेवन के 10 फायदे।
कैसे बनता है पंचामृत : पंचामृत का अर्थ है 'पांच अमृत'। दूध, दही, घी, शहद, शकर को मिलाकर पंचामृत बनाया जाता है। पांचों प्रकार के मिश्रण से बनने वाला पंचामृत कई रोगों में लाभदायक और मन को शांति प्रदान करने वाला होता है। इसका एक आध्यात्मिक पहलू भी है। वह यह कि पंचामृत आत्मोन्नति के 5 प्रतीक हैं। जैसे-
1. दूध- दूध पंचामृत का प्रथम भाग है। यह शुभ्रता का प्रतीक है अर्थात हमारा जीवन दूध की तरह निष्कलंक होना चाहिए।
2. दही- दही का गुण है कि यह दूसरों को अपने जैसा बनाता है। दही चढ़ाने का अर्थ यही है कि पहले हम निष्कलंक हो सद्गुण अपनाएं और दूसरों को भी अपने जैसा बनाएं।
3. घी- घी स्निग्धता और स्नेह का प्रतीक है। सभी से हमारे स्नेहयुक्त संबंध हो, यही भावना है।
4. शहद- शहद मीठा होने के साथ ही शक्तिशाली भी होता है। निर्बल व्यक्ति जीवन में कुछ नहीं कर सकता, तन और मन से शक्तिशाली व्यक्ति ही सफलता पा सकता है।
5. शकर- शकर का गुण है मिठास, शकर चढ़ाने का अर्थ है जीवन में मिठास घोलें। मीठा बोलना सभी को अच्छा लगता है और इससे मधुर व्यवहार बनता है।
उपरोक्त गुणों से हमारे जीवन में सफलता हमारे कदम चूमती है।
पंचामृत सेवन के 5 लाभ :
1. पंचामृत का सेवन करने से शरीर पुष्ट और रोगमुक्त रहता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, अर्थात इम्युनिटी बढ़ती है।
2. पंचामृत से जिस तरह हम भगवान को स्नान कराते हैं ऐसा ही खुद स्नान करने से शरीर की कांति बढ़ती है।
3. इसका उचित मात्रा में नियमित सेवन करने से बाल काले और घने होते हैं।
4. यह मानसिक विकास में सहायक है। मस्तिष्क से कार्य करने वालों के लिऐ यह लाभदायक है।
5. यह पित्त दोष को संतुलित करता है।
6. यह पुरुषों में वीर्य की ताकत बढ़ाता है।
7. गर्भवती महिलाएं यदि डॉक्टर से पूछकर इसका उचित मात्रा में सेवन करे तो यह बहुत ही ज्यादा लाभदायी है।
8. पंचामृत में तुलसी का एक पत्ता डालकर इसका नियमित सेवन करते रहने से आजीवन किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता।
9. माना जाता है कि इससे कैंसर, हार्ट अटैक, डायबिटिज, कब्ज और ब्लड प्रेशर जैसी रोगों से बचा जा सकता है।
10. पंचामृत सेवन से आत्मिक शांति मिलती है और चिंताएं दूर होती हैं।
नोट : पंचामृत उसी मात्रा में सेवन करना चाहिए जिस मात्रा में किया जाता है। उससे ज्यादा नहीं।

आस्था / शौर्यपथ /भगवान श्रीकृष्ण की नीति के चलते अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को चक्रव्यूह को भेदने का आदेश दिया गया। यह जानते हुए भी कि अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदना तो जानते हैं, लेकिन उससे बाहर निकलना नहीं जानते। दरअसल, अभिमन्यु जब सुभद्रा के गर्भ में थे तभी चक्रव्यूह को भेदना सीख गए थे लेकिन बाद में उन्होंने चक्रव्यूह से बाहर निकलने की शिक्षा कभी नहीं ली। अभिमन्यु श्रीकृष्ण के भानजे थे। श्रीकृष्ण ने अपने भानजे को दांव पर लगा दिया था।
अभिमन्यु के चक्रव्यूह में जाने के बाद उन्हें चारों ओर से घेर लिया गया। घेरकर उनकी जयद्रथ सहित 7 योद्धाओं द्वारा निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई, जो कि युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। कहते हैं कि श्रीकृष्ण यही चाहते थे। जब नियम एक बार एक पक्ष तोड़ देता है, तो दूसरे पक्ष को भी इसे तोड़ने का मौका मिलता है।
चक्रव्यूह क्या होता है?
युद्ध को लड़ने के लिए पक्ष या विपक्ष अपने हिसाब से व्यूह रचना करता था। व्यूहरचना का अर्थ है कि किस तरह सैनिकों को सामने खड़ा किया जाए। आसमान से देखने पर यह व्यूह रचना दिखाई देती है। जैसे क्रौंच व्यूह है, तो आसमान से देखने पर क्रौंच पक्षी की तरह सैनिक खड़े हुए दिखाई देंगे। इसी तरह चक्रव्यूह को आसमान से देखने पर एक घूमते हुए चक्र के समान सैन्य रचना दिखाई देती है।
इस चक्रव्यूह को देखने पर इसमें अंदर जाने का रास्ता तो नजर आता है, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता नजर नहीं आता। यह तो कोई बहुत ध्यान से देखें तो ही संभव होगा लेकिन इसके लिए आपको आकाश से देखना होगा। यदि देख भी लें तो यह चक्रव्यूह तो घूमता ही रहता है।
कहते हैं कि चक्रव्यूह की रचना द्रोण ने की थी। इस व्यूह को एक घूमते हुए चक्के की शक्ल में बनाया जाता था, जैसे आपने स्पाइरल को घूमते हुए देखा होगा। कोई भी नया योद्धा इस व्यूह के खुले हुए हिस्से में घुसकर वार करता है या किसी एक सैनिक को मारकर अंदर घुस जाता है। यह समय क्षणभर का होता है, क्योंकि मारे गए सैनिक की जगह तुरंत ही दूसरा सैनिक ले लेता है अर्थात योद्धा के मरने पर चक्रव्यूह में उसके बगल वाला योद्धा उसका स्थान ले लेगा, क्योंकि सैनिकों की पहली कतार घूमती रहती है। जब कोई अभिमन्यु जैसा योद्धा व्यूह की तीसरी कतार में पहुंच जाता है तब उसके बाहर निकलने के रास्ते बंद हो जाते हैं। यदि वह पीछे मुड़कर देखेगा तो पता चलेगा कि पीछे तो सैनिकों की कतारबद्ध फौज खड़ी है। व्यूह के घुस जाने के बाद अब योद्धा चौथे स्तर के बलिष्ठ योद्धाओं के सामने खुद को खड़ा पाता है।
इस चक्रव्यूह में योद्धा लगातार लड़ते हुए अंदर की ओर बढ़ता जाएगा और थकता भी जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे वो अंदर जाता जाएगा, अंदर के जिन योद्धाओं से उसका सामना होगा वो थके हुए नहीं होंगे। ऊपर से वे पहले वाले योद्धाओं से ज्यादा शक्तिशाली व ज्यादा अभ्यस्त भी होंगे। शारीरिक और मानसिक रूप से थके हुए योद्धा के लिए एक बार अंदर फंस जाने पर जीतना या बाहर निकलना कठिन हो जाता है। अभिमन्यु के साथ यही हुआ होगा।
कैसे फंसे अभिमन्यु चक्रव्यूह में?
कोई भी योद्धा व्यूह की दीवार तोड़कर अंदर जाने के लिए सामने वाले योद्धा को मारकर अंदर जाने का प्रयास करेगा, लेकिन वह तभी अंदर जा पाएगा जबकि मारे गए योद्धा की जगह कोई दूसरा योद्धा न आ पाया हो। इसका मतलब यह कि उसे सामने खड़े योद्धा को मारकर तुरंत ही अंदर घुसना होगा, क्योंकि मारे गए योद्धा की जगह तुरंत ही दूसरा योद्धा लड़ने के लिए आ जाता है। इस तरह यह दीवार कभी टूटती नहीं है। दीवार को तोड़ने के लिए ठीक सामने वाले योद्धा को मारकर अंदर के योद्धा को भी मारते हुए अंदर घुसना होता है। लेकिन नया या अनभिज्ञ योद्धा अगल-बगल के योद्धाओं से ही लड़ने लग जाता है।
अभिमन्यु चक्रव्यूह में घुसना जानता था। उसने सामने वाले योद्धा को मारा और बहुत ही थोड़ी-सी देर के लिए मिली खाली जगह से वह अंदर घुस गया। घुसते ही यह जगह फिर से बंद हो गई, क्योंकि मारे गए योद्धा की जगह किसी अन्य योद्धा ने ले ली। अभिमन्यु दीवार तोड़ते हुए अंदर तो घुस गया लेकिन वह पीछे यह भी देख पाया कि दीवार पुन: बन गई है। अब इससे बाहर निकलना मुश्किल होगा। वह दीवार पहले की अपेक्षा और मजबूत होती है।
प्रारंभ में यही सोचा गया था कि अभिमन्यु व्यूह को तोड़ेगा और उसके साथ अन्य योद्धा भी उसके पीछे से चक्रव्यूह में अंदर घुस जाएंगे। लेकिन जैसे ही अभिमन्यु घुसा और व्यूह फिर से बदला और पहली कतार पहले से ज्यादा मजबूत हो गई तो पीछे के योद्धा, भीम, सात्यकी, नकुल-सहदेव कोई भी अंदर घुस ही नहीं पाए। जैसा कि महाभारत में द्रोणाचार्य भी कहते हैं कि लगभग एक ही साथ दो योद्धाओं को मार गिराने के लिए बहुत कुशल धनुर्धर चाहिए। युद्ध में शामिल योद्धाओं में अभिमन्यु के स्तर के धनुर्धर दो-चार ही थे यानी थोड़े ही समय में अभिमन्यु चक्रव्यूह के और अंदर घुसता तो चला गया, लेकिन अकेला, नितांत अकेला। उसके पीछे कोई नहीं आया।
जैसे-जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह के सेंटर में पहुंचते गए, वैसे-वैसे वहां खड़े योद्धाओं का घनत्व और योद्धाओं का कौशल उन्हें बढ़ा हुआ मिला, क्योंकि वे सभी योद्धा युद्ध नहीं कर रहे थे बस खड़े थे जबकि अभिमन्यु युद्ध करता हुआ सेंटर में पहुंचता है। वे जहां युद्ध और व्यूहरचना तोड़ने के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से थके हुए थे, वहीं कौरव पक्ष के योद्धा तरोताजा थे। ऐसे में अभिमन्यु के पास चक्रव्यूह से निकलने का ज्ञान होता, तो वे बच जाते या उनके पीछे अन्य योद्धा भी उनका साथ देने के लिए आते तो भी वे बच जाते।
दरअसल, अर्जुन-पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने के लिए उसमें घुस गया। चक्रव्यूह में प्रवेश करने के बाद अभिमन्यु ने कुशलतापूर्वक चक्रव्यूह के 6 चरण भेद लिए। इस दौरान अभिमन्यु द्वारा दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध किया गया। अपने पुत्र को मृत देख दुर्योधन के क्रोध की कोई सीमा न रही। तब कौरवों ने युद्ध के सारे नियम ताक में रख दिए।
6 चरण पार करने के बाद अभिमन्यु जैसे ही 7वें और आखिरी चरण पर पहुंचे, तो उसे दुर्योधन, जयद्रथ आदि 7 महारथियों ने घेर लिया। अभिमन्यु फिर भी साहसपूर्वक उनसे लड़ते रहे। सातों ने मिलकर अभिमन्यु के रथ के घोड़ों को मार दिया। फिर भी अपनी रक्षा करने के लिए अभिमन्यु ने अपने रथ के पहिए को अपने ऊपर रक्षा कवच बनाते हुए रख लिया और दाएं हाथ से तलवारबाजी करता रहा। कुछ देर बाद अभिमन्यु की तलवार टूट गई और रथ का पहिया भी चकनाचूर हो गया।
अब अभिमन्यु निहत्था था। युद्ध के नियम के तहत निहत्‍थे पर वार नहीं करना था। किंतु तभी जयद्रथ ने पीछे से निहत्थे अभिमन्यु पर जोरदार तलवार का प्रहार किया। इसके बाद एक के बाद एक सातों योद्धाओं ने उस पर वार पर वार कर दिए। अभिमन्यु वहां वीरगति को प्राप्त हो गया। अभिमन्यु की मृत्यु का समाचार जब अर्जुन को मिला तो वे बेहद क्रोधित हो उठे और अपने पुत्र की मृत्यु के लिए शत्रुओं का सर्वनाश करने का फैसला किया। सबसे पहले उन्होंने कल की संध्या का सूर्य ढलने के पूर्व जयद्रथ को मारने की शपथ ली।
कैसे तोड़ते हैं चक्रव्यूह को?
कुशल योद्धा देखता है कि बाहर की ओर योद्धाओं का घनत्व कम है जबकि अंदर के योद्धाओं का घनत्व ज्यादा। घनत्व को बराबर या कम करने के लिए ये जरूरी होगा कि बाहर की ओर खड़े अधिक से अधिक योद्धाओं को मारा जाए। इससे व्यूह को घुमाते-चलाते रखने के लिए अधिक से अधिक योद्धाओं को अंदर से बाहर धकेलना होगा। इससे अंदर की तरफ योद्धाओं का घनत्व कम हो जाएगा।
पहेलीनुमा इस व्यूह रचना में योद्धाओं के स्थान परिवर्तन से ये पूरा घूम जाता है। निश्‍चित ही एक कुशल योद्धा को यह भी मालूम होता है कि घूमते हुए चक्रव्यूह में एक खाली स्थान भी आता है, जहां से निकला जा सकता है। यह भी कि वह अपने बल से हर कतार के एक-एक योद्धाओं को मारते हुए बाहर निकल आए।

धर्म संसार /शौर्यपथ /यह तो सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ। गोकुल और वृंदावन में उनका बचपन बिता और फिर किशोरावस्था में वे मुथरा में रहकर कंस वध के बाद जरासंध से युद्ध करते रहे। बाद में उन्होंने प्रभाष क्षेत्र में समुद्र के किनारे बसी उजाड़ नगरी कुशस्थली पर द्वारिका नगर का निर्माण कराया और वे वहां रहने लगे। प्रभास क्षेत्र में ही उन्होंने देह त्याग दी थी। इस विशिष्ट स्थल या देहोत्सर्ग तीर्थ नगर के पूर्व में हिरण्या, सरस्वती तथा कपिला के संगम पर बताया जाता है। इसे प्राची त्रिवेणी भी कहते हैं। इसे भालका तीर्थ भी कहते हैं। आओ जानते हैं प्रभु श्रीकृष्ण की दिनचर्या क्या है या वे प्रतिदिन क्या करते हैं।
1. कहते हैं कि प्रभु श्रीकृष्ण प्रतिदिन उत्तराखंड में चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम में सरोवर में स्नान करते हैं।
2. स्नान करने के बाद श्रीकृष्ण गुजरात के समुद्र तट पर स्थित द्वारिका धाम में अपने वस्त्र बदलते हैं।
3. द्वारिका में वस्त्र बदलने के बाद प्रभु श्रीकृष्ण ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ धाम में भोजन करते हैं।
4. जगन्नाथ में भोजन करने के बाद प्रभु श्रीकृष्ण तमिलनाडु के रामेश्वरम धाम में विश्राम करते हैं। विश्राम करने के बाद भगवान पुरी में निवास करते हैं।
5. इस दौरान प्रभु श्रीकृष्ण अपने भक्तों की सेवा भी करते हैं। जो भी भक्त उन्हें पुकारता है वे वहां तुरंत ही उपस्थित हो जाते हैं।
6. प्रभु अपने सभी प्रमुख धाम की आरती भी ग्रहण करते हैं।
7. समय-समय पर प्रभु वृंदावन के निधिवन और मथुवन में रास भी करते हैं। वहां के मंदिरों में भ्रमण भी करते हैं।

सेहत /शौर्यपथ / गर्मियों के मौसम में सुपरफुड में शुमार आम हर किसी को पसंद है। आम स्वाद में जितना स्वादिष्त होता है उतना ही इसे खाने के फायदे हैं, क्योंकि इसमें विटामिन ए, सी, के, फोलेट, मैग्निशियम, कोलीन और पोटेशियम होता है। जितना फायदेमंद आम है, उतना ही आम का छिलका फायदेमंद होता है। इसके छिलके को पका कर आप अपने खाने में शामिल कर सकते हैं।
आम के छिलके में इसके गुदे की तुलना में अधिक एंटी ऑक्सीडेंट और कैंसर-रोधी गुण होते हैं। इसके छिलके में विटामिन, कैरोटीनॉयड, पॉलीफेनोल्स का सोर्स होता है।
कैंसर और शुगर रोग में मददगार
आम के छिलके में फाइटोन्यूट्रिएंट्स होता है, जो अकसर पौधों में पाया जाता है। आम का छिलका कई तरह के कैंसर, कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, ब्रेन कैंसर और स्पाइनल कॉर्ड के लिए फायदेमंद माना जाता हैं। वहीं शुगर के पैशेंट के लिए भी इसके छिलके फायदा देते हैं। साथ ही इसमें फाइबर की मात्रा होती है।
टैनिंग हटाने में मिलेगी मदद
आम का छिलका टैनिंग हटाने में भी मदद करता है। इसके लिए आप छिलके को टैनिग वाले हिस्से पर लगाएं और मसाज करें, कुछ देर में साफ पानी से धो लें। इसे डेली इस्तेमाल करें। ये आपकी स्किन को ग्लो करने में मदद करेगा।
स्मूदी
इसके छिलके से आप स्मूदी बनाएं या फिर इसकी पका कर खाने के साथ खा सकते हैं। आम के छिलके का इस्तेमाल करने से पहले इसे अच्छे से धो लें।
पोषकतत्वों से भरपूर आम के छिलके आपकी सेहत के लिए खूब अच्छे हैं। इन दिनों जहां हर को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है, ऐसे में सभी विटामिन और फाइबर से भरपूर ये छिल्के आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करेंगे।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / नॉस्‍टेलजिया एक मानसिक स्थिति और मानवीय स्‍वभाव हैं। जब हम स्‍मृतियों में दाखिल होते हैं, तो उन चीजों को भी बहुत शिद्दत से याद करते हैं, जिनसे हम अपनी सुविधा के कारण आगे बढ़ आए होते हैं। ऐसा ही नॉस्‍टेलजिया हाथ से चलने वाले रसोई के पुराने उपकरणों के प्रत‍ि भी है। इन दिनों सोशल मीडिया पर सिलबट्टे की सिफारिश की जा रही है। पर हम हमेशा किसी भी बात को स्‍वास्‍थ्‍य के तर्क पर कसते हैं। तो आइए जानने की कोशिश करते हैं क‍ि क्‍या वाकई सिलबट्टे का आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर कोई असर पड़ता है।
यकीनन यादगार है सिल बट्टे का स्वाद
आधुनिक मशीनी युग में रसोई के बढ़ते उपकरणों नें भोजन बनाना बेहद आसान कर दिया है परंतु कभी - कभी ऐसा भी लगता है कि वो परंपरिक स्वाद अब खाने में नहीं रहा। आखिर ऐसा क्यों है? हाथ की बनी रोटी हो या सिल बट्टे की चटनी, लोग आज भी इनका स्वाद याद करते हैं।
मुझे आज भी याद है कि दादी हमेशा सिल बट्टे पर चटनी पीस कर खिलाती थीं, इसी तरह घर का मसाला भी हर रोज़ सिल बट्टे पर ही ताज़ा पीसा जाता था। लेकिन मेरे लिए या मेरी मम्‍मी के लिए ये कभी भी संभव नहीं हो पाया। हमारी ही तरह कई भारतीय घरों में शायद आपको आज भी सिल बट्टा किसी कोने में रखा हुआ मिल जाएगा, मगर प्रोफेशनल जरूरतों और भागदौड़ के बीच इसका इस्तेमाल कितना किया जाता होगा, इसका अंदाज़ा हम सभी लगा सकते हैं!
आज, इलैक्ट्रिक ब्लैंडर, मिक्सर, ग्राइंडर और फूड प्रोसेसर के आगमन के साथ, खाना तो जल्दी बन जाता है। मगर हम उस स्वाद को आज भी मिस करते हैं।
सिल बट्टे के बारे में क्‍या है लोगों की राय
इंस्‍टाग्राम पर बकायदा सिलबट्टा नाम से एक पेज है, जिसमें लोग इसके स्‍वाद को याद करते हैं। इसका समर्थन करने वाले मानते हैं क‍ि सिल बट्टे पर चटनी या मसाले पीसने से उनका प्राकृतिक तेल बाहर आता है। साथ ही, सिल बट्टे पर सब्जी के एक-एक कण पर दबाव ज्यादा पड़ता है, जिससे सुगंध और स्वाद दोनों बढ़ता है।
वहीँ मिक्सी में चटनी या मसाले पीसने से कोई दबाव नहीं पड़ता है, सिर्फ गर्मी और तेज़ ब्लेड की मदद से सामग्री बारीक हो जाती है।
इससे आपकी भूख बढ़ती है
सिल बट्टे पर मसाला पीसने से मसालों की खुशबू धीरे-धीरे फैलती है। यह खुशबू आपकी नाक के ज़रिए आपके मस्तिष्क तक पहुंचती है और आपको इसके प्रति आकर्षित करती है। इस तरह सिल बट्टे पर पिसे भोजन में आपकी रूचि भी बढ़ती है, जिससे आपकी भूख भी बढ़ती है।
प्राकृतिक तौर पर बना भोजन ज्यादा फायदेमंद होता है
सेलिब्रिटी डायटीशियन रुजुता दिवेकर भी इसकी सिफारिश करती हैं। वे मानती हैं क‍ि आहार सस्‍टेनेबल होना चाहिए और हमें अपने पूर्वजों के उपकरणों और आहार को अपनाना चाहिए। साथ ही वे इसे फि‍ट रहने का भी बढ़ि‍या माध्‍यम मानती हैं।
सिल बट्टे पर चटनी या कुछ भी पीसने में थोड़ी मेहनत लगती है, क्योंकि आपको बट्टे को खुद अपने हाथों से चलाना पड़ता है। सिल पर मसाला रख कर उसे बट्टे की मदद से पीसने में आपके हाथों की अच्छी खासी कसरत हो जाती है।
पर क्‍या इस पर कोई वैज्ञानिक शोध है
तो जवाब है नहीं! दुर्भाग्‍य से इसकी सिफारिश करने वालों ने अभी तक इसके शोध पर ध्‍यान नहीं दिया है। सिर्फ भारत में ही नहीं दक्षिण अमेरिका में भी पारंपरिक रसोई के उपकरणों में सिल बट्टा शामिल रहा है। जिसे बेटन और उना कहा जाता है। पर वहां भी अभी तक इसके स्‍वास्‍थ्‍य लाभों पर कोई शोध हमें नहीं मिलता। अगर आपको मिलता है, तो हमें जरूर बताएं। आखिर सेहत के लिए हमें खुद को अपडेट करना ही चाहिए।

सेहत / शौर्यपथ / अगर खाने-पीने में ज्यादा शकर लेते है तो हो जाएं सावधान, ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जी हां, ज्यादा शकर खाने से इन 7 बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है -
1 सबसे आम लेकिन गंभीर बीमारी ही नहीं बल्कि कई बीमारियों की जड़ है मोटापा। जब हम शुगर खाते है तो हमारे बॉडी में लीपोप्रोटीन लिपोज बनता है जिसकी वजह से हमारी कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है, नतीजतन मोटापा हमें घेर लेता है।
2 जब हम ज्यादा शुगर लेते हैं तो इसका सीधा असर प्रतिरक्षा तंत्र पर पड़ता है और वह कमजोर होता है। ऐसा होने पर बीमारियां हमें आसानी से घेर लेती हैं।
3 शुगर में कैलोरी के अलावा ऐसे कोई पोषक तत्व नहीं होते जो कि हमारे शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में मदद करें, इसलिए जब भी आप शुगर की मात्रा अधिक लेंगे, कुछ समय बाद आप ऊर्जा की कमी और आलस महसूस करेंगे। यह स्थिति लंबे समय तक घातक हो सकती है।
4 अधिक शुगर का सेवन हमारे लीवर का काम बढ़ा देता है और शरीर में लिपिड का निर्माण बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में फैटी लीवर डिसीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
5 ज्यादा मात्रा में शुगर लेने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है जो दिमाग के लिए नुकसानदायक है। इस स्थिति में दिमाग तक सही मात्रा में ग्लूकोज नहीं पहुंच पाता और दिमाग सही तरीके से काम नहीं कर पाता, जिससे मेमोरी लॉस भी हो सकता है।
6 समय से पहले बूढ़ा दिखना भी ज्यादा शुगर लेने का एक बड़ा साइड इफेक्ट है। जब हम ज्यादा मात्रा में शुगर खाते हैं तो यह बॉडी में इंफ्लेमेटरी इफेक्ट बनाती है जिससे त्वचा पर दाने निकलना, बूढ़ा होना और झुर्रियां पड़ने की समस्याएं हो सकती है।
7 ज्यादा शुगर का सेवन हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक जैसी समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है, क्योंकि यह ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ाती है, जो दिल के लिए घातक है।

सेहत / शौर्यपथ /कैंसर की तरह ब्रेन ट्यूमर भी जीवन घातक बीमारी है। समय रहते इस बीमारी का इलाज कराने पर जीवन को बचाया जा सकता है। लेकिन गंभीर बीमारी के लक्षण पता नहीं होने पर समय हाथ से निकल जाता है। आम जानकारी के तौर पर ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ संकेत हैं जिन्हें पहचान कर समय पर इलाज संभव हो सकता है। आइए जानते हैं क्या है 10 लक्षण -
क्या होता है ब्रेन ट्यूमर?
दिमाग में करीब 100,000,000,000 ब्रेन सेल्स होती है। जिसकी मदद से मस्तिष्क काम करता है। लेकिन कोशिकाओं का नियंत्रण बिगड़ने से दिमाग के सेल्स नष्ट होने लगते हैं और वह एक कैंसर के रूप में फैलने लगती है। इससे ब्रेन ट्यूमर हो जाता है।
ब्रेन ट्यूमर के 10 लक्षण -
1. बहुत अधिक सिरदर्द होने पर दवा लेना, लेकिन इसके बाद भी आराम नहीं मिलने पर डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
2. जब दिमाग को आराम नहीं मिलता है तो वह सुन्न पड़ने लगता है। यह सुन्नपन चेहरे से भी हो सकता है। थोड़ी देर में आराम नहीं मिलने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
3. ब्रेन ट्यूमर होने के कई तरह के संकेत है। अगर बॉडी में किसी प्रकार के झटके महसूस होते हैं, चक्कर आना, बिना किसी कारण के कंपन होना भी इस बीमारी के संकेत है।
4. कई बार लोग चीजें रखकर भूल जाते हैं लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है। अगर आपके साथ बार-बार ऐसा हो रहा है, छोटी-छोटी चीजें रखकर भूलने लग जाते हैं। साथ ही नींद से जुड़ी परेशानी भी होने लगती है।
5. कई बार आंखों से संबंधित परेशानी होने लगती है उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार धुंधलापन दिखना, रंगों को समझने में परेशानी होना, आंखों का कमजोर होना।
6. ब्रेन ट्यूमर दिमाग में होता है और बॉडी पूरी तरह से दिमाग के कंट्रोल में रहती है। लेकिन ब्लैडर पर कंट्रोल नहीं होने पर उल्टी, मितली, बेहोशी जैसी समस्या होने लगती है।

7. ब्रेन ट्यूमर के सांकेतिक लक्षण में चेहरे का रंग भी बदलने लगता है। कभी पर्पल, सफेद, ब्लू, ग्रीन रंग में त्वचा दिखने लगती है। ऐसे लक्षण दिखने पर हल्के में नहीं लें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
8. अगर आपको लगता है कि बोलने या सुनने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इस तरह के लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें।
9. गले में अकड़न होने के साथ ही आपका वजन लगातार बढ़ता जाएं तो आपको सावधान होने की जरूरत है।
10. कई बार नसों में खिंचाव और तेज दर्द होने पर इंसान खुद को कंट्रोल नहीं कर पाता है। कुछ लोगों को ट्यूमर के कारण दौरे भी पड़ने लगते हैं।
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खाना खजाना / शौर्यपथ / इस मौसम में स्वीट डिश से भले ही जुबान का शौक पूरा हो जाए पर बढ़ती हुई कैलोरी से आपको तनाव जरूर हो जाता है। तो चलिए इस बार आपको शुगर फ्री डेजर्ट के बारे में बता रहे हैं जिसे आप बिना झिझक के सबको खिला सकती हैं।
सामग्री :
300 ग्राम शुगर फ्री चॉकलेट पिघली हुई, 6 अंडे का पीला भाग, 6 चम्मच डाइट स्वीटनर, 200 ग्राम ताजा विप क्रीम, 1 संतरे का गूदा, स्ट्रॉबेरी, पपीता, तरबूज आदि 200 ग्राम (ताजे व कटे हुए फल)।
विधि :
शुगर फ्री और अंडे के पीले भाग को एक कटोरे में देर तक फेंटें। चाहें तो इसमें पिघली हुई जिलेटिन मिला लें। इसमें विप क्रीम मिलाकर फेंटें। पिघली हुई चॉकलेट और कटे फल व संतरे का गूदा मिलाएं। इसे छोटे कप में डालकर एक घंटे तक फ्रिज में रखें। फ्रिज से निकालकर फ्रूट्‍स शुगर फ्री डेजर्ट तुरंत परोसें।

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