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वनस्पति और जीवों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने तथा युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने में मददगार है ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा राज्य में जनजातीय वनवासियों के हितों के संरक्षण के लिए और पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने जनजातीय समुदायों के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता को बखूबी समझा है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में इन समुदायों को सशक्त बनाने एवं छत्तीसगढ़ राज्य की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है।
छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत एक अनूठा कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय युवाओं को विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करके उन्हें स्वावलंबी बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को पैराटैक्सोनॉमी जैसे महत्वपूर्ण विषय में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पैराटैक्सोनॉमी एक ऐसी विधा है जिसमें जैविक अनुसंधान के लिए विभिन्न प्रजातियों की त्वरित पहचान और वर्गीकरण किया जाता है। छत्तीसगढ़ जैसे जैव विविधता से भरपूर क्षेत्रों में यह विधा विशेष रूप से उपयोगी है। इस प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित युवा नेशनल पार्क गाइड, पर्यटक गाइड, नेचर कैंप मैनेजर, पारंपरिक चिकित्सक जैसे विभिन्न पेशों में काम कर सकते हैं एवं बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया तथा जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारे राज्य में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनजातियों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनाई है। जिसके उचित क्रियान्वयन से सभी लोगों को समय पर लाभ मिल रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पीछे की अवधारणा को साझा करते हुए कहा कि यह पहल स्थानीय समुदायों को छत्तीसगढ़ की जैव विविधता संरक्षण में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय वनस्पतियों और जीवों के बारे में पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और इसे अगली पीढ़ी को सौंपने का भी अवसर प्रदान करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी ने इस पहल के व्यापक प्रभाव पर जोर देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर है। पैराटैक्सोनॉमी में कौशल प्रदान करके हम एक ऐसी पीढ़ी को बढ़ावा दे रहे हैं जो न केवल अपने पर्यावरण के बारे में जानकार है, बल्कि उसे संरक्षित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव श्री राजेश कुमार चंदेले, आईएफएस ने पर्यावरण संरक्षण में पैरा टैक्सोनॉमी की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में कहा कि जैव संकेतक (बायो इंडिकेटर) पौधों की पहचान करके पैरा टैक्सोनॉमी पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी और संसाधन संरक्षण में सहायता करती है।
इस प्रशिक्षण में भाग लेने वाले 53 प्रतिभागियों में से 40 जनजातीय युवा थे, जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि 10$2 से लेकर स्नातक तक थी और वे कांकेर, कोंडागांव, केशकाल, भानुप्रतापपुर और नारायणपुर जैसे विभिन्न वन-मंडलों से आए थे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में 22 जुलाई से 18 अगस्त तक आयोजित किया गया था। 30 दिवसीय इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने कक्षा शिक्षण और फील्डवर्क दोनों में भाग लिया, जिसमें उन्होंने जंगल सफारी, मोहरेगा, सिरपुर, अर्जुनी, बारनवापारा और उदंती वन्यजीव अभयारण्य जैसे स्थलों पर जाकर विभिन्न प्रजातियों की पहचान और दस्तावेजीकरण किया। प्रशिक्षण के दौरान 93 प्रकार के मैक्रोफंगी, 153 प्रकार की वनस्पतियाँ, 47 औषधीय पौधे और 187 प्रकार के बीज का पहचान और दस्तावेजीकरण किया गया।
यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीतू हर्मुख ने इस प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि सभी प्रतिभागी पैराटैक्सोनॉमी में कौशल सीखने के लिए उत्सुक और तत्पर थे। कांकेर जिले के डुमरपानी गांव के 24 वर्षीय जनजातीय युवक त्रिभुवन कुमार करगा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “पैराटैक्सोनॉमी’’ में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मेरा आत्मविश्वास निश्चित रूप से बढ़ा है। अब मेरे लिए आय सृजन के नए रास्ते खुल गए हैं। इसी प्रकार ग्राम मुढ़ोवा चारामा, कांकेर जिले के 39 वर्षीय जनजातीय समुदाय के प्रतिभागी राकेश नेताम ने कहा इस प्रशिक्षण ने हमारे जंगलों की जैव विविधता को समझने का ज्ञान दिया है। अब मुझे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति एक अहम जिम्मेदारी का एहसास होता है।
जनजातीय महिलाओं ने भी इस कार्यक्रम से काफी लाभ उठाया है। कोंडागांव जिले के बड़ेराजपुर विश्रामपुरी गांव की 22 वर्षीय महिला सुश्री दिव्या मरकाम ने कहा कि एक जनजातीय क्षेत्र की महिला के रूप में विशेष शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। पैरा टैक्सोनॉमी के इस प्रशिक्षण से मुझे एक नया अनुभव प्राप्त हुआ है, इससे हमें रोज़गार के नए अवसर प्राप्त होंगे एवं जनजातीय महिला सशक्तिकरण भी होगा। साथ ही साथ क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण की सफलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ वन विभाग इस कार्यक्रम का विस्तार राज्य के अन्य हिस्सों जैसे जगदलपुर, सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग में भी करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा वन विभाग ने आगामी पैराटैक्सोनॉमी प्रशिक्षण सत्रों के लिए पहले बैच के प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई है, जिससे न केवल पहले बैच के प्रतिभागियों को अनुभव और रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि कार्यक्रम की निरंतरता और स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने जैव विविधता संरक्षण में पहले ही महत्वपूर्ण परिणाम दिखाए हैं। प्रतिभागियों ने अपने स्थानीय क्षेत्रों में कई दुर्लभ वनस्पति और जीवों की प्रजातियों की पहचान और दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें पीले चमकदार खोल वाला एक अनूठा कछुआ और दुर्लभ पौधे जैसे Gloriosa superba, Ophioglossum और Nervelia शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाने और राज्य की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने के इस प्रयास ने यह सुनिश्चित किया है कि हमारी प्राकृतिक धरोहरें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।
जशपुर /शौर्यपथ / जिला प्रशासन की टीम द्वारा जशपुर विकास खंड ग्राम गम्हरिया स्थित अरिहंत डेली नीड्स का जांच किया गया । जांच में प्रोपराइटर विमल जैन के पास 100 बैग यूरिया स्टॉक पाया गया । जांच के आधार पर पंचनामा बनाकर विधिवत कार्यवाही की जा रही है। वर्तमान में खेती किसानी का सिजन चल रहा है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि खाद की कालाबजारी खत्म हो और किसानों को समय सीमा में खाद उपलब्ध हो।
हितग्राहियो को राशन लेने आठ किलोमीटर पदयात्रा से मिली मुक्ति
ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार
जशपुरनगर/शौर्यपथ /बगिया स्थित सीएम कैम्प कार्यालय की पहल पर मड़ियाझरिया में सार्वजनिक राशन वितरण दुकान (पीडीएस) संचालित करने का आदेश बगीचा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने जारी कर दिया है। इससे ग्रामीणों को राशन लेने के लिए 8 किलोमीटर की दौड़ लगाने से बड़ी राहत मिली है। इस पहल के लिए ग्रामीणों ने सीएम कैम्प कार्यालय का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापन सौंपा है। उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व ही जिले के कांसाबेल ब्लाक के ग्राम पंचायत केनाडांड़ के आश्रित ग्राम मड़ियाझरिया से आए ग्रामीणों ने सीएम कैम्प में ज्ञापन सौंपा था। इसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंर्तगत,सरकार द्वारा दिया जाने वाला राशन लेने के लिए हर महिने 8 किलोमीटर की दौड़ लगानी होती है। भीषण गर्मी के महिना हो या बरसात का,मौसम का मार झेलते हुए वे चेटबा,ठूठरूडांड़ पार कर बंदरचुआं पहुंचते भी है लेकिन शाम हो जाने के कारण उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस समस्या को देखते हुए उन्होनें मड़ियाझरिया में ही राशन दुकान संचालित करने का अनुरोध किया था। इस पर कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत ने प्रशासन को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव का निरीक्षण कर,खाद्य विभाग प्रशासन को प्रतिवेदन भी भेज चुकी है। लेकिन गाँव में दुकान का संचालन शुरू नहीं हो पाया था । इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही थी।सीएम कैंप कार्यालय ने ग्रामीणों इस समाधान को निराकरण के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया था,जिस पर जिला प्रशासन ने संज्ञान में लेते हुए अब एसडीएम के आदेश के बाद,मड़ियाझरिया में जल्द ही सरकारी राशन दुकान का संचालन शुरू हो जाएगा। ग्रामीणों को अपने गांव में ही अब राशन मिल जायेगा,जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर है।
जशपुरनगर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री बने अभी सिर्फ 8 महीनें ही हुए है। इतने कम समय में जिले में शिक्षा, अधोसंरचना निर्माण, स्वास्थ्य सुविधा सहित दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास का लाभ आम लोगों को मिले इसके लिए कार्ययोजना बना कर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में रोजगार सृजन के साथ कृषि क्षेत्र में इसका लाभ मिले इसके लिए मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, सड़क निर्माण सहित अन्य कार्य कराए जा रहे हैं।
प्राचीन काल से अब तक जहां भी आबादी बसती गई, वहां परंपरागत ढंग से जल स्रोत के साधनों के रूप में तालाबों का निर्माण किया जाता रहा है जोकि पेयजल, सिंचाई और निस्तारी का प्रमुख साधन रहा है। आधुनिक दौर में जल स्रोतों के उन्नत रूप में बोरिंग और नलकूप जैसी सुविधाओं के चलते पारंपरिक जलस्रोत उपेक्षा का शिकार हो गए। इससे आज भी गांवो में तालाबों की सुरक्षा के प्रति ग्रामीण सजग है। ऐसा ही एक कार्य जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत सामरबार में देखने को मिलता है। जनजाति बाहुल्य इस ग्राम में महात्मा गांधी मनरेगा योजना के तहत नवीन तालाब निर्माण कराया गया है। इससे एक और जहां ग्रामीणों को रोजगार मिला वहीं दूसरी और आदिवासी परिवारों को खेती कार्य के लिए सिंचाई का साधन मिल गया है।
जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 105 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सामरबार अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। पूर्व में बिरनी पोखर आदिवासी परिवारों के निस्तारी का प्रमुख साधन था। इसके अलावा यह तालाब पशुओं के पेयजल का स्रोत भी है। महात्मा गांधी मनरेगा योजना से नवीन तालाब निर्माण होने से बरसात के पानी से तालाब पूरी तरह भर गया है। इससे निस्तारी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी के साथ-साथ स्थायी स्रोत भी मिल गया है। साथ ही इससे भू-जल स्तर भी सुधर रहा है। तालाब के पानी का उपयोग कर कंदरु राम पिता कलुवा राम और सिंगरु राम पिता बिरना राम धान, मक्का टमाटर और अन्य सब्जियों की खेती कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन
रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने समाज सुधारक और शिक्षाविद् स्वामी आत्मानंद की पुण्यतिथि 27 अगस्त पर उन्हें नमन करते हुए कहा है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में मानव सेवा एवं शिक्षा संस्कार की अलख जगाई। पीड़ित मानवता की सेवा को उन्होंने सबसे बड़ा धर्म बताया। स्वामी विवेकानंद के विचारों का भी उन पर भी गहरा असर हुआ और उन्होंने अपना पूरा जीवन दीन-दुःखियों की सेवा में बिता दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वामी आत्मानंद के पद चिन्हों पर चलते हुए किसानों, वनवासियों, गरीबों और मजदूरों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के हर संभव प्रयास कर रही है। स्वामी आत्मानंद ने वनवासियों के उत्थान के लिए नारायणपुर आश्रम में उच्च स्तरीय शिक्षा केन्द्र और वनवासी सेवा केन्द्र प्रारंभ किए। श्री साय ने कहा कि स्वामी अत्मानंद के आदर्श और जीवन मूल्य सदा जनसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
श्रद्धालु काशी विश्वनाथ का भी करेंगे दर्शन
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के पहल पर शुरू की गई श्री रामलला दर्शन योजना के तहत चलाई जा रही विशेष ट्रेन आज रायपुर रेल्वे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-07 से रवाना हुई। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। इस विशेष ट्रेन से 850 श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ। इस यात्रा से श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। श्रद्धालुगण भगवान राम का जय-जयकार करते हुए अयोध्या धाम के लिए निकल चुके हैं। ट्रेन में श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भक्तिमय माहौल में श्री रामलला के दर्शन को जा रहे है।
इस दौरान विधायक श्री मोतीलाल साहू, पूर्व विधायक श्रीमती रंजना डीपेन्द्र साहू, श्री नन्दे साहू, पूर्व अध्यक्ष सीएसआईडीसी श्री छगनलाल मुंदड़ा सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
रामलला दर्शन के लिए जाने वाले दर्शनार्थियों ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री रामलला दर्शन के लिए योजना की शुरूआत की है। इसके लिए मुख्यमंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद। अयोध्या के दर्शन हम जैसे लोगों के लिए असंभव था, लेकिन मुख्यमंत्री की पहल पर आज हमें अयोध्या में श्री रामलला के दर्शन संभव हुआ है। आज अयोध्या के लिए रवाना हो रहे है और हमें बहुत खुशी हो रही है। अयोध्या में श्री रामलला के भव्य और सुंदर मंदिर बनाए गए है। श्री रामलला के दर्शन के लिए यात्रा से बहुत खुशी हो रही है। यात्रा के दौरान हम सभी को काशी विश्वनाथ जी के दर्शन का लाभ भी प्राप्त होगा। यात्रा को लेकर यात्रियों में उत्साह का माहौल देखा गया।
रायपुर /शौर्यपथ /राज्यपाल श्री रमेेन डेका ने आज यहां राजभवन में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री इंदर सिंह उबोवेजा को छत्तीसगढ़ लोक आयोग के प्रमुख लोकायुक्त पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति श्री इंदर सिंह उबोवेजा ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती रेणु पिल्ले ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। षपथ के पष्चात् राज्यपाल श्री डेका एवं मुख्यमंत्री श्री साय ने पुष्पगुच्छ से श्री उबोवेजा का अभिवादन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व सांसद श्री सुनील सोनी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, पूर्व प्रमुख लोकायुक्त श्री टी.पी. शर्मा, राज्य सूचना आयुक्त श्री एन.के. शुक्ला, पूर्व सूचना आयुक्त श्री मनोज पवार, पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा, राज्यपाल के सचिव श्री यशवंत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, संयुक्त सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम सहित, वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस अधिकारी तथा श्री उबोवेजा के परिजन उपस्थित थे।
दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग निगम प्रशासन में भ्रष्टाचार अपनी पूरी चरम सीमा पर है सड़को पर अतिक्रमण का बोल बाला है बाजार की व्यवस्था चरमराई हुई है । गुमठी घोटाला को अंजाम दिया जा चुका है , कचरो के खेल में लाखो का घोटाला के साथ बदबूदार वातावरण पर आम जनता जीने को मजबूर है । ऐसे कई मामले है जिसमे निगम आयुक्त लोकेश चंद्राकर की निष्क्रियता जग जाहिर है । दुर्ग निगम प्रशासन के पिछले कार्यकाल की तुलना की जाए तो निष्क्रियता एवम भ्रष्टाचार वर्तमान आयुक्त लोकेश चंद्राकर के कार्यकाल में पुरे उफान पर है।
निगम प्रशासन की मनमानी का आलम यह है कि निगम प्रशासन कलेक्टर जनदर्शन की शिकायतों को भी मानो रद्दी की टोकरी में डाल चुका है । बाजार विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी की माने तो निगम का बाज़ार विभाग भ्रष्टाचार की पूरी किताब लिख चुका है वर्तमान में बाजार अधिकारी ईश्वर वर्मा को विभाग की जिम्मेदारी मिली हुई है किंतु इतनी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद भी बाजार अधिकारी ईश्वर वर्मा अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग न करते हुए निष्क्रियता का परिचायक बनते जा रहे है। वही अगर सूत्रों की माने तो ईश्वर वर्मा की निष्क्रियता का यह आलम है कि जिला प्रमुख जिलाधीश कार्यालय से आए हुए शिकायतों को भी बाजार अधिकारी ईश्वर वर्मा द्वारा कार्यवाही के नाम पर टाला जा रहा है वही कुछ विभागीय कर्मचारियों का मानना है कि शिकायत को दबाने के लिए बाजार अधिकारी को मोटी रकम मिल रही है । कही न कही इस बात को भी बल मिलता है क्योंकि बाजार अधिकारी के रूप में लगभग तीन माह हो जाने के बाद भी बाजार अधिकारी के रूप में ईश्वर वर्मा की निष्क्रियता के चर्चे आम है । वही आयुक्त लोकेश चंद्राकर की प्रशासनिक कार्य कुशलता पर भी सवाल उठ रहे हैं ।
सप्ताह के प्रत्येक मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा बैठक होती है जिसमें जिलाधीश द्वारा विभागों के कार्यों की एवं जनदर्शन की शिकायतों की समीक्षा की जाती है परंतु यह समीक्षा बैठक कितनी कारगर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कलेक्टर चंद्रासन में शिकायत किए हुए मीना की जाए परंतु शिकायत का निवारण नहीं होता ऐसे में आम जनता यह कैसे मान ले की कलेक्टर जनदर्शन का कोई औचित्य है एवं समीक्षा बैठक का आयोजन सिर्फ एक प्रशासनिक दिखावा ?
दुर्ग / शौर्यपथ / बजरंग कार्यकर्ता को बंधक बनाकर मारपीट वाले में पुलिस ने चरोदा निगम के सभापति कृष्णा चंद्राकर की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। आज सुबह भिलाई 3 थाने की एक टीम ने घर में दबिश दी।कृष्णा चंद्राकर की गिरफ्तारी की भनक लगते ही उनके समर्थक और महिला उनके घर पहुंच गई। उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके चलते पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा, लेकिन जाते-जाते पुलिस कृष्णा चंद्राकर की एसयूवी (सीजी07 एलआर 2121) को सीज कर अपने साथ थाने ले आई। जांच अधिकारियों का कहना है कि अपहरण और मारपीट की वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपी सभापति ने इसी गाड़ी का इस्तेमाल किया था। वहीं, मामले में राजनीतिक रंग चढ़ने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघले थाने का घेराव करने पहुंचने वाले हैं। इसकी भनक लगते ही खुद जिला पुलिस कप्तान जितेंद्र शुक्ला दल बल के साथ मौके पर मौर्चा संभालने पहुंच गए। कांग्रेसियों के प्रदर्शन की आशंका चलते थाने के चारों तरफ बेरिकेड्स लगा दिए गए हैं। इसके अलावा आसपास के थानों का फोर्स भी मौके पर पहुंच गया है।
हितग्राहियो को राशन लेने आठ किलोमीटर पदयात्रा से मिली मुक्ति
ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार
जशपुरनगर / शौर्यपथ / बगिया स्थित सीएम कैम्प कार्यालय की पहल पर मड़ियाझरिया में सार्वजनिक राशन वितरण दुकान (पीडीएस) संचालित करने का आदेश बगीचा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने जारी कर दिया है। इससे ग्रामीणों को राशन लेने के लिए 8 किलोमीटर की दौड़ लगाने से बड़ी राहत मिली है। इस पहल के लिए ग्रामीणों ने सीएम कैम्प कार्यालय का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापन सौंपा है। उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व ही जिले के कांसाबेल ब्लाक के ग्राम पंचायत केनाडांड़ के आश्रित ग्राम मड़ियाझरिया से आए ग्रामीणों ने सीएम कैम्प में ज्ञापन सौंपा था। इसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंर्तगत,सरकार द्वारा दिया जाने वाला राशन लेने के लिए हर महिने 8 किलोमीटर की दौड़ लगानी होती है। भीषण गर्मी के महिना हो या बरसात का,मौसम का मार झेलते हुए वे चेटबा,ठूठरूडांड़ पार कर बंदरचुआं पहुंचते भी है लेकिन शाम हो जाने के कारण उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस समस्या को देखते हुए उन्होनें मड़ियाझरिया में ही राशन दुकान संचालित करने का अनुरोध किया था। इस पर कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत ने प्रशासन को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव का निरीक्षण कर,खाद्य विभाग प्रशासन को प्रतिवेदन भी भेज चुकी है। लेकिन गाँव में दुकान का संचालन शुरू नहीं हो पाया था । इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही थी।सीएम कैंप कार्यालय ने ग्रामीणों इस समाधान को निराकरण के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया था,जिस पर जिला प्रशासन ने संज्ञान में लेते हुए अब एसडीएम के आदेश के बाद,मड़ियाझरिया में जल्द ही सरकारी राशन दुकान का संचालन शुरू हो जाएगा। ग्रामीणों को अपने गांव में ही अब राशन मिल जायेगा,जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर है।
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