August 15, 2026
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    भारत

    भारत (1082)

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी है। दूसरी ओर, आंदोलन की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच आज संविधान क्लब में उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो गई है।

    सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में दोपहर 12:30 बजे दूसरे दौर की औपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक में छात्रों की मांगों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने तथा अन्य प्रमुख मांगों पर विचार करने का लिखित आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।

    हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अडिग हैं। जंतर-मंतर पर धरना जारी है और देशभर में समर्थन प्रदर्शन आयोजित करने का भी ऐलान किया गया है।

    उधर, राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जंतर-मंतर, संविधान क्लब और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई प्रमुख मार्गों और मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

    अब देशभर की निगाहें सरकार और CJP के बीच चल रही वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल "अनशन खत्म, प्रदर्शन जारी" की स्थिति बनी हुई है।

    नई दिल्ली। निजी भूमि पर बने मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंधन और कथित नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार तथा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका 237 वंशानुगत पुजारियों और निजी मंदिरों के मालिकों की ओर से दायर की गई है।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी भूमि पर बने मंदिरों की संपत्तियों की सरकारी स्तर पर नीलामी की जा रही है और वर्ष 1974 के एक शासनादेश के आधार पर जिला कलेक्टरों को इन मंदिरों का प्रबंधक बना दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये मंदिर उनके पूर्वजों द्वारा निजी भूमि पर स्थापित किए गए थे और हमेशा से निजी मंदिर रहे हैं। उनका आरोप है कि अब प्रशासन मंदिरों की जमीन की नीलामी की कार्रवाई कर रहा है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने सवाल किया कि यदि वर्ष 1974 से ही राजस्व अभिलेखों में जिला कलेक्टरों का नाम दर्ज था, तो याचिकाकर्ताओं ने इतने वर्षों तक इस पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई।

    खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि "कई मामलों में पुजारी मंदिरों की संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। वास्तव में यह संपत्ति देवता की होती है।"

    अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रथम दृष्टया इस विवाद के समाधान के लिए दीवानी अदालत (सिविल कोर्ट) का रास्ता अधिक उपयुक्त हो सकता है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने अपने मथुरा दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 22 वर्ष पहले मंदिर की स्थिति काफी खराब थी, जबकि हालिया दौरे में सरकारी प्रबंधन के बाद रखरखाव में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया।

    याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि एक स्वतंत्र प्राधिकरण या अधिकरण गठित किया जाए, जो यह तय करे कि संबंधित मंदिर निजी हैं या सार्वजनिक। साथ ही वर्ष 1974 के शासनादेश और उससे जुड़े राजस्व अभिलेखों को रद्द करने, वंशानुगत पुजारियों के नाम पुनः दर्ज करने तथा मंदिर की संपत्तियों की नीलामी, ध्वस्तीकरण या किसी भी प्रकार की सरकारी दखलअंदाजी पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है।

    ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में केवल नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं की मांगों पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।

      देहरादून । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महा-संवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट से गुजर रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

    राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब तक करीब 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े मामलों के बावजूद अब तक किसी भी प्रमुख दोषी को सजा क्यों नहीं मिली। उनके अनुसार, इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है।

    'शिक्षा नहीं, वसूली का तंत्र बन गई है व्यवस्था'

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय परीक्षा शुल्क के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर छात्रों से इतनी फीस वसूली जा रही है कि उसका आंकड़ा शिक्षा बजट के बराबर पहुंच जाता है। राहुल गांधी ने इसे "एक्सटॉर्शन मॉडल" बताते हुए सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया।

    '1 प्रतिशत को फायदा, 99 प्रतिशत छात्र परेशान'

    राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ केवल 1 प्रतिशत ऐसे लोगों को मिलता है जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक के नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और मेहनती छात्र इसकी कीमत चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत एक पेपर लीक से बर्बाद हो जाती है, जो युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है।

    NEET अभ्यर्थियों को दिया भरोसा

    नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 24 लाख से अधिक छात्रों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र खुद को अकेला न समझें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ता रहेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाता रहेगा।

    'यह राजनीतिक सभा नहीं, छात्रों की आवाज है'

    अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई चुनावी या पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं की समस्याओं, संघर्षों और भविष्य पर केंद्रित संवाद है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों की चिंताओं को सुनना और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है।

    सियासी संदेश भी स्पष्ट

    राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले आगामी राजनीतिक विमर्श में भी प्रमुख मुद्दा बने रहने की संभावना है।

       नई दिल्ल / केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश और सुशासन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के लिए ₹19,400 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। वहीं, नीति आयोग ने राज्यों के निवेश माहौल का आकलन करने वाली बहुप्रतीक्षित 'निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index)' रिपोर्ट जारी की। स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    हरियाणा को ₹14,700 करोड़ की विकास सौगात

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल भारत के हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा मिशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ₹14,700 करोड़ से अधिक लागत की रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़क संपर्क, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    चंडीगढ़ में ₹4,700 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का शुभारंभ

    केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा संस्थानों के उन्नयन, सड़क संपर्क और शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ₹4,700 करोड़ से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की। इन योजनाओं का उद्देश्य नागरिक सुविधाओं में सुधार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देना है।

    नीति आयोग ने जारी किया 'निवेश अनुकूलता सूचकांक'

    नीति आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण का मूल्यांकन करने वाली 'Investment Friendliness Index' रिपोर्ट जारी की। यह सूचकांक राज्यों के प्रशासनिक सुधार, उद्योग-अनुकूल नीतियों, निवेश प्रक्रियाओं की सरलता और कारोबारी वातावरण का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। सरकार का मानना है कि यह रिपोर्ट राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की समीक्षा बैठक सम्पन्न

    केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में 16-17 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का समापन हुआ। बैठक में रोग निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, महामारी नियंत्रण, टीकाकरण और स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की गई। राज्यों के अधिकारियों के साथ भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

    भारतीय वन सेवा अधिकारियों से राष्ट्रपति का संवाद

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारतीय वन सेवा (IFoS) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्हें देश की प्राकृतिक विरासत का संरक्षक बताया। उन्होंने अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

    विकास और सुशासन की दिशा में अहम दिन

    17 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की पहलें देश में हरित परिवहन, आधुनिक अवसंरचना, निवेश प्रोत्साहन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्णयों से देश की विकास गति को और मजबूती मिलेगी तथा राज्यों में प्रतिस्पर्धात्मक निवेश वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।

    हरियाणा के जींद में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को मिली नई दिशा

    जींद । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह की झलकियां साझा करते हुए देशवासियों को एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने पर बधाई दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसे देश के रेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रतिभा तथा समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इसे "आत्मनिर्भर भारत" और भविष्य के लिए तैयार आधुनिक परिवहन व्यवस्था का प्रतीक बताया।

    स्वच्छ और हरित भारत की ओर बड़ा कदम

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन तकनीक आधारित यह ट्रेन भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित यह पहल न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।

    उन्होंने कहा, "देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है। यह स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।"

    21वीं सदी की तकनीक का प्रतीक बनी हाइड्रोजन ट्रेन

    प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई यह ट्रेन भारत को भविष्य की उन्नत परिवहन तकनीकों की दिशा में आगे ले जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना की सफलता से देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि ट्रेन की तकनीकी विशेषताओं और इसकी क्षमता के बारे में जानकर हर भारतीय गर्व महसूस करेगा।

    हरियाणा की धरती को बताया वीरता और आस्था की भूमि

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शक्तिपीठ माता जयंती के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए जींद क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वीरतापूर्ण और आध्यात्मिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम में उमड़े जनसमूह के उत्साह को विकास और प्रगति की नई ऊर्जा बताया।

    दूरदर्शी नीतियों का परिणाम: प्रधानमंत्री

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि देश आज भी पुरानी सोच और व्यवस्थाओं पर निर्भर होता, तो वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर रेलवे व्यवस्था पर पड़ता। लेकिन बीते वर्षों में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में दूरदर्शी निर्णय लिए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार केवल समस्याओं की पहचान नहीं करती, बल्कि समय रहते उनके स्थायी समाधान भी तैयार करती है, जिससे देश को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

    नई ऊर्जा, नई तकनीक और नया भारत

    जींद में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से आगे बढ़कर हरित और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    नोकिया, वीटीटी, केओएनई और केम्पी के साथ 5जी-6जी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, अनुसंधान और निवेश पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच प्रौद्योगिकी, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं में डिजिटल तकनीक, उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, स्मार्ट अवसंरचना और सतत विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया गया।

    नोकिया के साथ 5जी और 6जी तकनीक पर चर्चा

    श्री गोयल ने नोकिया कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों, 5जी और 6जी नेटवर्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं नवाचार सहयोग को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया। बैठक में भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इकोसिस्टम और नोकिया की दीर्घकालिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।

    वीटीटी के साथ अनुसंधान एवं नवाचार साझेदारी को बढ़ावा

    यूरोप के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों में शामिल वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर के साथ हुई बैठक में उन्नत प्रौद्योगिकियों, औद्योगिक परिवर्तन, डिजिटलीकरण, नई सामग्रियों और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने भारतीय और फिनिश संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग तथा तकनीक हस्तांतरण को और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में केओएनई की बढ़ेगी भागीदारी

    केओएनई कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ हुई बैठक में स्मार्ट शहरी अवसंरचना, लिफ्ट एवं एस्केलेटर तकनीक, हरित निर्माण समाधान और उन्नत विनिर्माण पर फोकस रहा। भारत के तेजी से विस्तार करते बुनियादी ढांचे और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्थानीयकरण के अवसरों पर भी विचार किया गया।

    केम्पी के साथ औद्योगिक नवाचार और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंथन

    श्री गोयल ने केम्पी समूह के शीर्ष नेतृत्व के साथ उन्नत औद्योगिक मशीनरी, वेल्डिंग तकनीक, विनिर्माण नवाचार और स्मार्ट औद्योगिक समाधानों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में निवेश के अवसरों को भी तलाशा गया।

    भारत बना वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का भरोसेमंद केंद्र

    इन बैठकों के दौरान भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। उद्योग जगत के नेताओं के साथ हुए सीधे संवाद ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

    भारत-फिनलैंड सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत

    फिनलैंड दौरे के दौरान हुई ये रणनीतिक बैठकें भारत-फिनलैंड व्यापार मंच की सफलता को आगे बढ़ाते हुए तकनीक, निवेश, अनुसंधान और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खोलने वाली साबित हुई हैं। दोनों देशों ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नई दिल्ली । देशभर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।

    बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देशों के प्रकाशन और बांध सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तैयारी में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी), व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) मैनुअल तथा जोखिम आकलन अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

    नए खतरों से निपटने के लिए बनेंगे विशेष नियम

    समिति ने जल संरचनाओं के सामने उभर रहे नए खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम तैयार करने, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट में संशोधन करने तथा बांध निर्माण और संशोधन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा अध्याय को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया।

    इसके अलावा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के मान्यता मानकों को तय करने, बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने और विशेषज्ञों के पैनल के गठन पर भी सहमति बनी। समिति ने जोखिम वर्गीकरण, खतरा मूल्यांकन, उपकरण स्थापना, आपातकालीन कार्य योजना और जलाशय संचालन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

    आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के सहयोग से बढ़ेगी विशेषज्ञता

    बैठक में बांध सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रमों में इंजीनियरों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    गाद जमाव और बांध विफलताओं पर विशेष चर्चा

    समिति ने जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्टेशन) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए नए नियामकीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया। बैठक में हाल के वर्षों में हुई कुछ प्रमुख बांध विफलताओं और तकनीकी चुनौतियों पर भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए।

    इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही ड्रेजिंग गतिविधियों से जुड़े तकनीकी अनुभव साझा किए गए।

    दिसंबर 2026 तक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य

    बैठक के समापन पर अध्यक्ष ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे दिसंबर 2026 तक निर्धारित बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजनाओं की तैयारी और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसे सभी अनिवार्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि देश के बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।

    16 जुलाई को केंद्र सरकार ने ऊर्जा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए। ईंधन निर्यात कर में बदलाव, यूरिया उत्पादन बढ़ाने की नई नीति और झारखंड-ओडिशा में रेल नेटवर्क विस्तार को मंजूरी दी गई।

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश की ऊर्जा सुरक्षा, कृषि आत्मनिर्भरता और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य ईंधन निर्यात व्यवस्था को संतुलित करना, उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और रेल संपर्क का विस्तार करना है।

    सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में संशोधन किया है। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप कर व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है।

    कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति’ को मंजूरी दी। इस नीति के माध्यम से देश में घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इसी क्रम में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए झारखंड और ओडिशा में लगभग ₹397 करोड़ लागत की दो नई रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं से दोनों राज्यों में रेल संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    16 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता, मध्यस्थता और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई करते हुए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और समयबद्ध न्याय पर जोर दिया।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नागरिकता निर्धारण, वाणिज्यिक मध्यस्थता (Arbitration) और वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अदालत ने कई अहम कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    नागरिकता से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर होता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसा गंभीर निर्णय बिना उचित जांच, पर्याप्त सुनवाई और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाए नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल को एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई से बचते हुए प्रत्येक मामले में तर्कसंगत और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना होगा।

    मध्यस्थता (Arbitration) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें गैर-हस्ताक्षरकर्ता कंपनियों के विरुद्ध मध्यस्थता कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार से संबंधित आदेशों को सीधे संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में अंतिम मध्यस्थता निर्णय आने के बाद ही उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

    इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने वर्षों से लंबित लगभग 800 पुराने सिविल और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रोस्टर और विशेष पीठों (Special Benches) के गठन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

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