September 30, 2026
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    भारत

    भारत (1110)

       इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर की गई टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है।
    मामला इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में नर्मदा लाइन सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम का बताया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए विजयवर्गीय ने संध्या यादव का उल्लेख करते हुए कहा— “संध्या दीदी की भी चौड़ाई बढ़ गई है थोड़ी सी।” वायरल वीडियो में यह टिप्पणी उस समय सुनाई देती है, जब संध्या यादव मंच पर माइक की ओर बढ़ रही थीं।

    कांग्रेस ने जताई आपत्ति
    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर बहस शुरू हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे महिला जनप्रतिनिधि की शारीरिक बनावट से जोड़ते हुए आपत्ति जताई और विजयवर्गीय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। कुछ कांग्रेस नेताओं ने मंत्री के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग भी उठाई।

    विजयवर्गीय ने दी सफाई, कहा— शब्दों पर खेद है
    विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने एक वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत अर्थ में लिया गया और उन्होंने संध्या यादव को अपनी बेटी के समान बताया। मंत्री ने अपने शब्दों पर खेद भी व्यक्त किया।
    विजयवर्गीय के अनुसार, संध्या यादव के परिवार से उनके पुराने संबंध हैं और उन्होंने उन्हें बचपन से देखा है। इसी पारिवारिक संबंध के संदर्भ में उन्होंने संध्या यादव को बेटी जैसा बताया।

    संध्या यादव ने भी किया मंत्री का बचाव
    विवाद के बीच भाजपा पार्षद संध्या यादव ने भी विजयवर्गीय के पक्ष में प्रतिक्रिया दी। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, यादव ने मंत्री को पिता तुल्य बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में गोद में खिलाया है। उन्होंने टिप्पणी को मालवा क्षेत्र की आम बोलचाल की भाषा का हिस्सा बताया और कांग्रेस पर मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।

    बयान के बाद आमने-सामने आए अलग-अलग पक्ष
    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर वायरल वीडियो में कही गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने महिला सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों के प्रति भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कैलाश विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर खेद जताते हुए अपनी मंशा स्पष्ट की है, जबकि संबंधित पार्षद संध्या यादव ने भी मंत्री का बचाव किया है।
    घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और ऐसी टिप्पणियों के सार्वजनिक प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में टिप्पणी के शब्दों, वक्ता की बताई गई मंशा और संबंधित महिला पार्षद की अपनी प्रतिक्रिया—तीनों अलग-अलग पहलू चर्चा में हैं।

      नई दिल्ली / एजेंसी / वंदे मातरम् के गायन और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यता या अंतरात्मा की आवाज के कारण राष्ट्रीय गीत की कुछ या सभी पंक्तियां नहीं गाता है, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

    2026 के संशोधन को दी गई है चुनौती

    विवाद की प्रमुख वजह अगस्त 2026 में संसद से पारित ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ और इसके तहत जारी किए गए प्रावधान बताए जा रहे हैं। याचिका में आरोप है कि संशोधित कानून के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण दिया गया है।बताया गया है कि कानून में वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका अपमान करने पर तीन वर्ष तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन का प्रावधान किए जाने को भी चुनौती दी गई है।

    टी. एम. कृष्णा ने उठाए धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल

    प्रसिद्ध कर्नाटक संगीत गायक टी. एम. कृष्णा ने कानून और गृह मंत्रालय के संबंधित सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

    याचिका में दलील दी गई है कि वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों के बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े धार्मिक संदर्भ हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, सभी नागरिकों के लिए इसके पूर्ण गायन को अनिवार्य करना संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांत से संबंधित सवाल उठाता है।याचिका में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मंचों पर वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों के गायन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और अब सभी छह अंतरों को अनिवार्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ‘राष्ट्रीय गीत क्या है, यह तय करना सरकार का काम’

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय गीत क्या है और उससे जुड़ी भावनाओं का निर्धारण करना सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। अदालत ने इस मुद्दे को लेकर अपनी भूमिका और सीमाओं पर भी टिप्पणी की।

    पीठ ने 1986 के बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले का संदर्भ लिया। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक आधार पर राष्ट्रगान नहीं गाने वाले छात्रों के मामले में कहा था कि यदि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते हैं, तो केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।सुनवाई के दौरान इसी सिद्धांत की प्रासंगिकता वंदे मातरम् के मामले में भी सामने आई।

    केंद्र और याचिकाकर्ता के वकील के बीच बहस

    केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि देशभक्ति और राष्ट्रीय गीत के सम्मान के लिए कानूनी दबाव या एडवाइजरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए तथा धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या अत्यधिक संकीर्ण तरीके से नहीं की जानी चाहिए।बहस के दौरान सॉलिसिटर जनरल की ओर से ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर याचिकाकर्ता के वकील डॉ. एस. मुरलीधर ने आपत्ति जताई।अब केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

    नगांव उपचुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं के वाहनों पर कथित हमला, शीशे टूटे; मनोज चौहान के घायल होने का दावा—कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर लगाया आरोप

    नगांव/गुवाहाटी। असम के नगांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के बीच सोमवार को कांग्रेस के चुनावी काफिले पर कथित पथराव ने राज्य की चुनावी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया। समागुरी क्षेत्र में चुनावी सभा के लिए जा रहे काफिले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के असम प्रभारी भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, AICC सचिव मनोज चौहान, कांग्रेस प्रत्याशी सिबामोनी बोरा सहित कई नेता मौजूद थे।

    कांग्रेस के अनुसार, काफिले के वाहनों पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं, जिससे कुछ वाहनों के शीशे क्षतिग्रस्त हुए। गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि हमले के पीछे भाजपा समर्थक थे। कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया कि AICC सचिव मनोज चौहान को पत्थर लगने से चोट आई।

    घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

    सवाल सिर्फ एक काफिले का नहीं, चुनावी माहौल का है

    चुनावी प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच विरोध या नारेबाजी लोकतांत्रिक राजनीति में देखी जा सकती है, लेकिन यदि किसी चुनावी काफिले पर वास्तव में पथराव हुआ है तो यह कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    सबसे अहम सवाल अब यही हैं—

    काफिले पर हमला किसने किया?

    हमले की शुरुआत कैसे हुई?

    क्या पहले से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी प्रशासन को थी?

    वाहनों को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कब होगी?

    और शिकायत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई का अगला कदम क्या होगा?

    आरोपों पर सियासी टकराव भी तेज

    कांग्रेस ने घटना के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराते हुए असम सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है और घटना को लेकर अलग दावा किया है। इसलिए हमले के वास्तविक जिम्मेदारों का निर्धारण जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

    नगांव लोकसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान हुई यह घटना प्रशासन और निर्वाचन तंत्र के सामने एक सीधी चुनौती है—चुनावी मुकाबला राजनीतिक बहस और जनसमर्थन से होगा या सड़क पर टकराव से?

    अब निगाहें पुलिस की जांच और निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर हैं।

     ₹3.82 करोड़ की घोषित संपत्ति, ₹13 करोड़ की बताई जा रही कार; CA ने आयकर विभाग को टैग कर उठाए सवाल, लेकिन कार की मालिकाना हक की पुष्टि नहीं

    मुम्बई। मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान बिहार की लोक गायिका एवं अलीनगर से विधायक मैथिली ठाकुर के रोल्स-रॉयस कलिनन से पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    2025 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार मैथिली ठाकुर ने कुल ₹3,82,33,255 की संपत्ति घोषित की थी। इसमें करीब ₹2.32 करोड़ की चल संपत्ति और ₹1.50 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है। हलफनामे में उनकी 2023-24 की आय ₹28.67 लाख बताई गई है।

    इसी के बाद सोशल मीडिया पर वायरल रोल्स-रॉयस कलिनन की कीमत करीब ₹13 करोड़ बताए जाने लगी और दोनों आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल उठाए गए। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, रुचिता वघानी, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मामले को उठाते हुए आयकर विभाग को टैग कर उनकी आय की जांच की मांग की।

    हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। किसी व्यक्ति का किसी महंगी कार में दिखाई देना अपने आप में उस वाहन का मालिक होने का प्रमाण नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी रोल्स-रॉयस की वास्तविक मालिकाना स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में मैथिली ठाकुर को मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी की मेहमान बताया गया है, लेकिन इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि वायरल कार अंबानी परिवार की ही थी या आयोजनकर्ताओं ने ही उपलब्ध कराई थी।

    इसी तरह, सोशल मीडिया पर आयकर विभाग से जांच की मांग किए जाने को 'आयकर विभाग ने जांच शुरू कर दी' के रूप में प्रस्तुत करना भी सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी में आयकर विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं मिली है।

    इसलिए फिलहाल तथ्य यह है कि मैथिली ठाकुर रोल्स-रॉयस में लालबागचा राजा पहुंचीं, उनकी चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्ति ₹3.82 करोड़ है और इस अंतर को लेकर एक CA ने आयकर विभाग से जांच की मांग की है। लेकिन कार की मालिक मैथिली ठाकुर हैं या किसी अन्य व्यक्ति/संस्था की—इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

    गुवाहाटी। असम प्रवास के दौरान सोनापुर, गुवाहाटी स्थित दिवंगत कलाकार जुबीन गर्ग के समाधि स्थल ‘जुबीन क्षेत्र’ पहुंचकर कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नेताओं ने जुबीन गर्ग को असम की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रमुख कलाकार बताया। उन्होंने कहा कि जुबीन गर्ग की आवाज और संगीत ने असम की संस्कृति तथा लोगों की भावनाओं को व्यापक पहचान दिलाई। उनके निधन के बाद उनके प्रशंसकों और असम के लोगों के बीच उनकी कमी महसूस की जा रही है।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष गौरव गोगोई, AICC सचिव एवं असम सह-प्रभारी मनोज चौहान सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    कांग्रेस नेताओं ने जुबीन गर्ग की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके सांस्कृतिक योगदान को याद किया और समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

    राष्ट्रीय संकल्प समारोह में युवाओं ने लिया नशे से दूर रहने का संकल्प; जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक भागीदारी का दिया संदेश

    नई दिल्ली, । ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा–100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान’ के तहत आयोजित राष्ट्रीय संकल्प समारोह में देशभर के युवाओं और नागरिकों ने नशामुक्त भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया। देश के 1,000 से अधिक स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में 4 लाख से अधिक युवाओं और नागरिकों ने भाग लेकर नशे के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश दिया।

    देशव्यापी इस जनभागीदारी में युवाओं के साथ विभिन्न साझेदार संगठन और समुदाय भी जुड़े। कार्यक्रम का आयोजन 460 MY Bharat जिलों, MY Bharat के साझेदार संगठनों के 240 स्थानों तथा आध्यात्मिक संगठनों, उद्योग संघों और विश्वविद्यालय संघों द्वारा 300 से अधिक स्थानों पर किया गया।

    राष्ट्रीय संकल्प समारोह में प्रतिभागियों ने नशा-मुक्ति की शपथ लेने और हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया। इसके अलावा युवाओं के नेतृत्व में संवाद, जागरूकता गतिविधियां और स्थानीय स्तर पर विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं तक नशामुक्त और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाना रहा।

    अभियान के माध्यम से जागरूकता, रोकथाम, स्वास्थ्य, फिटनेस और जीवन कौशल को युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके शुरुआती चरण में तीन प्रमुख विषयों—‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गौरव’, ‘फिट युवा, नशा मुक्त युवा’ और ‘जीवन कौशल माह’—के जरिए समुदाय आधारित और युवा-केंद्रित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

    यह देशव्यापी कार्यक्रम 18 सितंबर को हुई जनभागीदारी के बाद आयोजित किया गया। दो दिनों की इन गतिविधियों में शपथ, हस्ताक्षर, संवाद और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से युवाओं और नागरिकों को नशे के खिलाफ एकजुट किया गया।

    राष्ट्रीय संकल्प समारोह ने यह संदेश दिया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि युवाओं, संस्थानों और समुदायों की निरंतर जागरूकता एवं सक्रिय भागीदारी से संभव होने वाला सामूहिक प्रयास है।

    युवा मामले और खेल मंत्रालय के अनुसार, ‘100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान’ के अंतर्गत युवाओं की भागीदारी को आगे भी लगातार बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि युवा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ें और नशे से दूर स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

    नई दिल्ली / पीआईबी / एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन और विदरसा के विनोद को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने खिलाडिय़ों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाले समय में देश के कई एथलीटों को प्रेरित करेगी।
    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर खिलाडिय़ों को बधाई दी। उन्होंने लिखा, "कड़ी मेहनत और टीम वर्क से ही शानदार परिणाम मिलते हैं!"
    उन्होंने आगे कहा, "सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन और विदरसा के विनोद पर गर्व है, जिन्होंने एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीता।"
    प्रधानमंत्री ने खिलाडिय़ों की उपलब्धि को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाले समय में कई एथलीटों को प्रेरित करेगी।

    भारतीय निशानेबाजों की इस उपलब्धि से खेल जगत में खुशी का माहौल है। महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय निशानेबाजी की मौजूदगी को एक बार फिर रेखांकित किया है।

    रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता साफ; भारत समेत शीर्ष खरीदार निशाने पर, लेकिन शुल्क अभी लागू नहीं

    वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह कानून रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है। 

    इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील पहलू यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत और चीन जैसे देश इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। 

    सबसे पहले समझिए—क्या भारत पर 100% टैरिफ लग चुका है?

    नहीं।

    यह इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण तथ्यात्मक बात है। कानून ने 100% शुल्क को स्वतः लागू नहीं किया है। बल्कि ट्रंप प्रशासन को यह अधिकार दिया गया है कि वह रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले संबंधित देशों के खिलाफ टैरिफ कार्रवाई करे। कब, किस देश पर और कितनी दर से कार्रवाई होगी, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा। 

    यानी फिलहाल स्थिति को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहना सही नहीं होगा; अधिक सटीक बात है—“भारत पर 100% तक अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने का रास्ता कानून ने खोल दिया है।”

    भारत क्यों आया अमेरिकी निशाने पर?

    भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। अमेरिका की नई नीति का मूल उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जो रूसी ऊर्जा खरीदकर रूस की ऊर्जा आय को बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उसके ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल पहुंचाने वाले टैंकर नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा रूसी अधिकारियों, बैंकों और अन्य संस्थाओं पर प्रतिबंधों का प्रावधान है। 

    कानून को भारी बहुमत से मिली मंजूरी

    यह कानून अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ। सीनेट में इसे 86-11 वोट से मंजूरी मिली, जबकि प्रतिनिधि सभा में 262-159 वोट से पारित हुआ। इसके बाद 18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए। 

    कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम इस रूस-विरोधी प्रतिबंध पैकेज के प्रमुख समर्थकों में रहे थे। 

    भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

    पहली—ऊर्जा सुरक्षा।

    यदि रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो भारत को अपने ऊर्जा आयात के विकल्पों और कीमतों पर फिर से रणनीतिक विचार करना पड़ सकता है।

    दूसरी—अमेरिकी बाजार।

    यदि भविष्य में भारत पर ऊंचा अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय उद्योगों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन किस दर, किन उत्पादों और किस समयावधि के लिए शुल्क लागू करता है। 

    तीसरी—भारत-अमेरिका संबंध।

    रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंध और अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक एवं रणनीतिक संबंध—दोनों को संतुलित रखना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण तथ्य—यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं

    कानून का निशाना केवल भारत नहीं है। चीन भी प्रमुख संभावित प्रभावित देशों में है, क्योंकि वह भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। कानून का प्रभाव अन्य प्रमुख खरीदारों पर भी परिस्थितियों के अनुसार पड़ सकता है। 

    इसके अलावा कानून रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव को केवल तेल खरीद तक सीमित नहीं रखता। रूसी ऊर्जा एवं रक्षा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्कों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। 

    ईरान के लिए भी कड़ा संदेश

    कानून के शीर्षक में रूस के साथ ईरान भी शामिल है। इसके तहत मौजूदा ईरान प्रतिबंध व्यवस्था को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया है। इस तरह यह कानून केवल रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक रूस-ईरान प्रतिबंध नीति का हिस्सा बन गया है। 

    भारत के लिए असली सवाल अब शुरू होता है

    ट्रंप के हस्ताक्षर के साथ कानूनी अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में आ गया है, लेकिन भारत पर 100% शुल्क लगने का अंतिम निर्णय अभी अलग चरण है। इसलिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं, भारत को किस श्रेणी में रखता है और यदि कार्रवाई होती है तो किन भारतीय वस्तुओं पर कितनी दर लागू की जाती है।

    13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं अभियान से जुड़ीं
    1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र बने अभियान का हिस्सा, 31.40 लाख जागरूकता गतिविधियां आयोजित
    पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित

    नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्र सरकार के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ ने देशभर में व्यापक जनभागीदारी के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान के तहत अब तक 34.54 करोड़ से अधिक नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई जा चुकी है। इनमें 13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने बताया कि नशे के दुरुपयोग की पहचान, परामर्श और देखभाल के लिए 1.67 लाख से अधिक स्वयंसेवकों, सामुदायिक नेताओं और कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए 1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र भी अभियान से जुड़े हैं।

    देशभर में अब तक 31.40 लाख से अधिक जागरूकता एवं संपर्क गतिविधियां आयोजित की गई हैं। उपचार सुविधाओं का विस्तार करते हुए पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें जिला नशामुक्ति केंद्र, नशा उपचार केंद्र और जेलों में संचालित नशामुक्ति केंद्र शामिल हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि नशामुक्ति, जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी अस्पतालों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

    10 करोड़ नागरिकों को सामूहिक संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य

    अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक नशामुक्ति संकल्प लिए जा चुके हैं। मंत्रालय का लक्ष्य प्रत्यक्ष और ऑनलाइन सहभागिता के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक संकल्प से जोड़ना है। अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर इस माह के अंत तक राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    उपचार सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने ‘नशामुक्त भारत 2.0’ मोबाइल अनुप्रयोग भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने निकटतम नशामुक्ति केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समुदायों को साथ जोड़कर नशामुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी को मजबूत करना भी है।

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