September 30, 2026
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    भारत

    भारत (1110)

    19 नवंबर को प्रधानमंत्री ने कहा था, "देश से माफी मांगते हुए मैं सच्चे और शुद्ध मन से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या (समर्पण) में कुछ कमी थी कि हम अपने कुछ किसान भाइयों को सच्चाई नहीं समझा सके." उन्होंने तब प्रदर्शनकारी किसानों से घर लौटने की अपील भी की थी.

    नई दिल्ली/शौर्यपथ/

    केंद्र सरकार ने कहा है कि उसके पास किसान आंदोलन (Farmers Protest) के दौरान मरने वाले किसानों और उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामलों की जानकारी नहीं है. ऐसे में किसी को वित्तीय सहायता यानी मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में एक सवाल के जवाब में लोकसभा में ये लिखित जवाब दिया है.

    संसद में सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार के पास आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई आंकड़ा है और क्या सरकार उनके परिजनों को वित्तीय सहायता देने की सोच रही है? इसके जवाब में कृषि मंत्री का ये जवाब आया है. मंत्री ने ये सदन को ये भी बताया कि केंद्र सरकार ने किसान नेताओं के साथ 11 राउंड की बातचीत की थी लेकिन बात नहीं बनी.

    उधर, किसान संगठनों का दावा है कि आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हुई है. बता दें कि 11 दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया था और किसानों से इसके लिए माफी मांगी थी.

    19 नवंबर को प्रधानमंत्री ने कहा था, "देश से माफी मांगते हुए मैं सच्चे और शुद्ध मन से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या (समर्पण) में कुछ कमी थी कि हम अपने कुछ किसान भाइयों को सच्चाई नहीं समझा सके." उन्होंने तब प्रदर्शनकारी किसानों से घर लौटने की अपील भी की थी.

     

     

     

     

    संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य कुलवंत सिंह ने कहा कि पंजाब के ज्यादातर किसान संगठन चाहते हैं कि दिल्ली की सीमाओं से किसानों को लौटना चाहिए .

    नई दिल्ली/शौर्यपथ/

    तीनों कृषि कानून ( FARM LAWS) रद्द होने के बाद दिल्ली की सीमाओं से जाने के मामले पर किसान संगठनों में दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. ज्यादातर किसान संगठन चाहते हैं कि दिल्ली की सीमाओं से किसानों को लौट जाना चाहिए. MSP की गारंटी को लेकर अपने राज्यों में जाकर आंदोलन करना चाहिए. इस संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि कानून रद्द कर दिए हैं. इसलिए हम चाहते हैं कि आंदोलन का स्वरूप बदला जाए. ज्यादातर पंजाब के किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं से जाना चाहते हैं. हम सब लोगों को एकमत में लाने की कोशिश कर रहे हैं. हम 4 तारीख की बैठक में दिल्ली की सीमाओं से जाने के लिए एकमत फैसला लाने की कोशिश करेंगे. कुलवंत सिंह ने कहा कि हम जब भी उठेंगे, साथ में ही उठेंगे. उन्होंने कहा कि अब कुछ ही किसान संगठन हैं, जो रूकना चाहते हैं.

    बता दें कि कुलवंत सिंह संधू का बयान तब आया है, जब किसान नेता राकेश टिकैत अभी भी आंदोलन पर अड़े हुए हैं. राकेश टिकैत ने हाल ही में कहा था कि उनके पास और भी कई मुद्दे हैं. इसके आगे MSP का मुद्दा है, फसलों के वाजिब दाम का मुद्दा है. 10 साल पुराने ट्रैक्टर का मुद्दा है और सीड बिल का मुद्दा है. राकेश टिकैत ने कहा था कि हमें वो सरकार मिल नहीं रही है, जिससे बैठकर बात की जाए. सरकार ने हमको बातचीत के लिए एप्रोच नहीं किया है.

    राकेश टिकैत ने कहा था कि अभी फिलहाल मामला नहीं सुलझा है. सरकार मीडिया वालों से बात कर रही है. तो फिर मीडिया वाले ही आंदोलन वापस ले लें. हमे सरकार ने कुछ नहीं कहा है. सरकार हमसे बात करे.आंदोलन के दौरान जो मुकदमे हुए उनको वापस लेने के बारे में कौन बात करेगा? राकेश टिकैत ने सरकार पर मामलों को उलझाने का आरोप भी लगाया था.

     

     

    LPG Cylinder Price Hike : LPG यानी Liquefied petroleum gas सिलिंडर की कीमतें बढ़ा दी गई हैं. शुक्र की बात बस इतनी है कि इस बार घरेलू गैस सिलिंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. मार पड़ी है कॉमर्शियल गैस सिलिंडर इस्तेमाल करने वालों पर.

    नई दिल्ली/शौर्यपथ/

    LPG Cylinder Price : देश में पेट्रोलियम उत्पादों के दामों पर कोई लगाम नहीं है. LPG यानी Liquefied petroleum gas सिलिंडर की कीमतें बढ़ा दी गई हैं. शुक्र की बात बस इतनी है कि इस बार घरेलू गैस सिलिंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. मार पड़ी है कॉमर्शियल गैस सिलिंडर इस्तेमाल करने वालों पर. 1 दिसंबर से कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की कीमतों में 100.50 रुपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि हो गई है. इसके बाद अब राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम का एक LPG गैस सिलिंडर 2,101 रुपये में मिलेगा. अब तक एक गैस सिलिंडर की कीमत 2,000.50 रुपये चल रही थी. इसके पहले 1 नवंबर को कीमतों में 266.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी.

    मुंबई में 19 किलो का कॉमर्शियल गैस सिलिंडर अब 1,950 रुपये से महंगा होकर 2,051 रुपये में मिलेगा. कोलकाता में कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडर का रेट 2,177 रुपये में हो गया है. वहीं, चेन्नई में एक कॉमर्शियल सिलिंडर 2,234.50 रुपये का हो गया है.

    देश में कुकिंग गैस सिलिंडर के दाम स्थिर रखे गए हैं. इसके पहले सब्सिडी वाले गैस सहित सभी कैटेगरी वाले गैस सिलिंडरों की कीमत में 6 अक्टूबर, 2021 को 15-15 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. उसके पहले 1 अक्टूबर को ही सब्सिडी और नॉन-सब्सिडी वाले गैस सिलिंडरों की कीमत 25 रुपये तक बढ़ाई गई थी.

     अगर घरेलू गैस सिलिंडर के दामों की बात करें तो गैर-सब्सिडाइज़्ड 14.2 किलोग्राम के एक सिलिंडर की कीमत दिल्ली मे ं899.50 रुपये प्रति सिलिंडर चल रही है.

     बता दें कि सरकार देश में हर घर को एक साल में सब्सिडी के तहत 14.2 किलोग्राम क 12 एलपीजी सिलिंडर देती है. इन 12 रीफिलंग पर सब्सिडी का अमाउंट हर महीने अलग-अलग हो सकता है. हर महीने एलपीजी के दामों में संशोधन किया जाता है.

     

     

     

     

     

     

    अखिलेश ने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘हम सब परिवार वाले लोग हैं, इसलिए जानते हैं कि अगर किसी मजदूर या किसान की जान चली गई तो उसके परिवार का क्या हाल होगा? '

    बांदा (उत्तर प्रदेश)/शौर्यपथ/

    UP Assembly polls 2022: परिवारवाद के आरोप को लेकर अक्सर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निशाने पर रहने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बुधवार को पलटवार करते हुए कहा कि जिनके पास परिवार नहीं है, वे जनता का दर्द नहीं समझ सकते.अखिलेश ने उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बांदा में एक जनसभा में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन किसानों के परिवार की सिर्फ सपा ने ही मदद की है.उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘हम सब परिवार वाले लोग हैं, इसलिए जानते हैं कि अगर किसी मजदूर या किसान की जान चली गई तो उसके परिवार का क्या हाल होगा? अगर किसी परिवार के सामने संकट आया, तो हम खड़े हुए. परिवार वाले ही परिवार वालों का दुख दर्द समझ सकते हैं. जिनके पास परिवार नहीं है, वे आपकी परवाह नहीं करेंगे.''उन्होंने आरोप लगाया कि बांदा में शराब के नशे में एक गरीब को मार दिया गया, लेकिन राज्य सरकार ने पीड़ित के परिवार की कोई मदद नहीं की. सिर्फ समाजवादी पार्टी के लोगों ने ही उनकी सहायता की.

    अखिलेश ने राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि दमदार सरकार चलाने का दावा करने वाले लोग झूठ बहुत ‘दमदार' बोलते हैं. बीजेपी ने शिक्षामित्रों से नौकरी का वादा किया था, लेकिन अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में इस पार्टी ने नौजवानों के नौकरी के सपने को ही खत्म कर दिया.उन्होंने कहा, ‘‘अब सुनने में आया है कि मुख्यमंत्री नौजवानों को स्मार्टफोन और टैबलेट देंगे. जो लैपटॉप नहीं चला सकता, वह आपको लैपटॉप नहीं दे सकता. क्या मुख्यमंत्री योगी लैपटॉप चला सकते हैं? अब तो सुनने में आया है कि वह स्मार्ट फोन भी नहीं चला सकते. अगर चला सकते होते तो हमारे नौजवानों के हाथ में अब तक राज्य सरकार ने स्मार्ट फोन दे दिया होता.आपको योगी सरकार चाहिए, या योग्य सरकार चाहिए?''

    हाल में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का पर्चा लीक होने की घटना का जिक्र करते हुए सपा अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर जानबूझकर पर्चा लीक कराने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार जानबूझकर पेपर लीक कराती है. वह ऐसा इसलिए करती है क्योंकि वह हमारे नौजवानों को रोजगार नहीं देना चाहती. बीटीसी और बीएड पास नौजवान रोजगार के लिए भटक रहे हैं. हम आपको भरोसा दिला रहे हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार लाइए और नौकरी तथा रोजगार पाइए.''अखिलेश ने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों ने पिछले कई चुनावों में भाजपा को पूरा समर्थन दिया, लेकिन बुंदेलखंड को कुछ नहीं मिला. इस डबल इंजन की सरकार का इंजन बुंदेलखंड आते-आते फेल हो गया है. सरकार यहां के विकास का कोई इंतजाम नहीं कर पाई, आखिर यह किस बात की डबल इंजन की सरकार है.सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने महामारी के समय जनता को अनाथ छोड़ दिया. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश को पीछे कर दिया. राज्य सरकार का विकास तो सिर्फ तस्वीरों में दिख रहा है और इस ‘विकास' की कलई तस्वीरों और विज्ञापनों ने ही खोल दी. भाजपा के लोग विज्ञापन में भी झूठ दिखाते हैं.नीति आयोग के मुताबिक बुंदेलखंड में 32 लाख से ज्यादा लोगों के गरीबी रेखा के नीचे होने का जिक्र करते हुए अखिलेश ने वादा किया कि विधानसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर सरकारी बजट से इन गरीबों की मदद की जाएगी, समाजवादी पेंशन योजना से भी अच्छी योजना चलाई जाएगी और महिलाओं तथा परिवारों को पहले से दी जाने वाली 500 रुपए प्रतिमाह की धनराशि में तीन गुना इजाफा किया जाएगा.

     

     

     

    ममता ने बीजेपी को क्रूर और अलोकतांत्रिक पार्टी करार दिया. उन्‍होंने एकता की जरूरत बताते हुए मामले में आगे की 'जंग' के लिए सलाह और मार्गदर्शन भी मांगा.

    मुंबई /शौर्यपथ/

    बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बुधवार को मुंबई में राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, हाईकोर्ट्स के पूर्व जजों और सेलिब्रिटीज की मौजूदगी के बीच कहा कि बॉलीवुड स्‍टार शाहरुख खान को टारगेट किया जा रहा है. ममता ने बीजेपी को क्रूर और अलोकतांत्रिक पार्टी करार दिया. उन्‍होंने एकता की जरूरत बताते हुए मामले में आगे की 'जंग' के लिए सलाह और मार्गदर्शन भी मांगा. राज्‍य के दो दिन के दौरे पर आईं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने कहा, 'भारत मैनपावर से प्‍यार करता है न कि मसल पावर से. हम बीजेपी के रूप में एक क्रूर और अलोकतांत्रिक पाटर्ह का सामना कर रहे हैं. यदि हम एकजुट हुए जो हम जीतेंगे. '

    पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, 'महेश जी (फिल्‍म निर्देशक महेश भट्ट ) आप टारगेट किया जा चुका, शाहरुख खान को भी निशाना बनाया गया. यदि हमें जीतना है तो लड़ना होगा और आवाज उठानी होगी. राजनीतिक पार्टी के तौर पर हमारा, आप मागदर्शन कीजिए और सलाह दीजिए. 'गौरतलब है पश्चिम बंगाल में इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की बड़ी जीत ने उन्‍हें राष्‍ट्रीय परिदृश्‍य में लाकर खड़ा कर दिया है. इस धमाकेदार जीत के बाद कई पार्टियों के नेताओं ने हाल के समय में ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को ज्‍वॉइन किया है, इसमें बड़ी संख्‍या में कांग्रेस के नेता शामिल हैं. ममता इस समय बीजेपी के खिलाफ इस समय राष्‍ट्रीय स्‍तर पर विपक्ष को एकजुट करने के अभियान मे लगी हुई हैं. उनकी योजना विपक्ष को एकजुट करके वर्ष 2024 के आम चुनाव में बीजेपी के समक्ष चुनौती पेश करने की है.

    ममता के आज के इस कार्यक्रम में हाईकोर्ट के पूर्व जज शफी परकार और अभय ठिप्‍से के अलावा तुषार गांधी, एक्टिविस्‍ट तीस्‍ता सीतलवाड़, मेधा पज्ञटकर, पूर्व कांग्रेस नेता संजय झा, सुधींद्र कुलकर्णी, शत्रुध्‍न सिन्‍हा, शोभा डे, स्‍वरा भास्‍कर, राहुल बोसऔर कोंकणा सेन शर्मा ने शिरकत की.

     

     

     

    मुंबई/शौर्यपथ/

    मुंबई के लिए उड़ान भर रहे यात्रियों को अब निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट जरूरी होगी. कोविड वेरिएंट ओमिक्रॉन के मद्देनजर लागू किए गए नए नियमों में यह बात कही गई है.

    मुंबई के लिए उड़ान भर रहे यात्रियों को अब निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट जरूरी होगी. कोविड वेरिएंट ओमिक्रॉन के मद्देनजर लागू किए गए नए नियमों में यह बात कही गई है.

    मुंबई में लैंड करने वालों के लिए RT-PCR टेस्‍ट रिपोर्ट जरूरी, यात्रा के 5 नए नियम

    मुंबई के लिए उड़ान भर रहे यात्रियों को अब निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट जरूरी होगी. कोविड वेरिएंट ओमिक्रॉन के मद्देनजर लागू किए गए नए नियमों में यह बात कही गई है.
    ट्रैवल गाइडलाइस की 5 बातें 

    मुंबई एयरपोर्ट को सभी डोमिस्टिक एयरलाइंस को यह बताने को कहा गया है कि वे निगेटिव RT-PCR के बगैर यात्रियों को फ्लाइट में स्‍थान न दें. बयान के अनुसार, पारिवारिक संकट जैसे अपवाद के मामलों में टेस्टिंग, मुंबई एयरपोर्ट पर आगमन पर की जाएगी.  

    क्‍वारंटाइन नियमों को दो दिन टालने की जानकारी देते हुए आधिकारिक बयान में कहा गया था कि कई यात्रियों ने पहले से ही अपने ट्रेवल प्‍लान को अंतिम रूप दे दिया था. कई लोग फ्लाइट में हो सकते हैं और उन्‍हें नए नियमों की जानकारी नहीं होगी.  

    बयान में कहा गया है कि महाराष्‍ट्र सरकार के आदेश के मद्देनजर यह जरूरी माना गया कि जोखिम वाले देशों के यात्रियों को अपने यात्रा की योजना के लिए कुछ समय दिया जाए. 

    भारत ने कहा है कि जोखिम वाले देशों के सभी यात्रियों को आगमन पर सेल्‍फ पेड कोविड टेस्‍ट कराने की जरूरत होगी.महाराष्‍ट्र में ऐसे सभी यात्रियों को दो सप्‍ताह के institutional quarantine में रहना होगा.  

    जोखिम वाले देशों के यात्रियों को महाराष्‍ट्र में आगमन के बाद दूसरे, चौथे और सातवें दिन भी RT-PCR टेस्‍ट कराना होगा. यदि वे पॉजिटिव आते हैं तोआइसालेशन और इलाज के लिए अस्‍पताल में शिफ्ट किए जाएंगे.

     

     

     

    बिना चर्चा के बिल पारित करने के आरोपों का सरकार ने जवाब दिया है और कहा है कि बिलों को संसदीय समितियों के पास भेजना लोकतंत्र मापने का पैमाना नहीं है.

    नई दिल्ली/शौर्यपथ/

    बिना चर्चा के बिल पारित करने के आरोपों का केंद्र सरकार ने जवाब दिया है और कहा है कि बिलों को संसदीय समितियों के पास भेजना लोकतंत्र मापने का पैमाना नहीं है. केंद्र सरकार ने बिलों को संसदीय समितियों को न भेजने के आरोपों पर कहा कि संसदीय समितियों की स्थापना साल 1993 में हुई थी यानी 41 वर्षों तक बिल बिना संसदीय समितियों की चर्चा के संसद में रखे जाते थे. क्या इसका ये मतलब है कि देश में 41 वर्षों तक लोकतंत्र नहीं था और पंडित नेहरु, राजीव गांधी के समय बनाए गए कानून गलत थे. बाबा साहब आंबेडकर का बनाया गया संविधान भी सेलेक्ट कमेटी को नहीं भेजा गया था.

    सरकार का कहना है कि 2014 के पहले 25 वर्षों तक केंद्र में बनी सरकारें कमजोर थीं और गठबंधन की सरकारें थीं. इसलिए आम राय के अभाव में सत्तारूढ़ दल के भीतर ही विभिन्न विचारों और मतभेद के कारण बिलों को संसदीय समितियों को भेजा जाना जरूरी थी. लेकिन 2014 के बाद से सत्तारूढ़ दल को पूर्ण बहुमत है. इसलिए जब कोई बिल चर्चा के लिए आता है. तो बहुसंख्यक सदस्यों में आम राय होती है. इसलिए इन्हें संसद की स्थायी समितियों को भेजने की गुंजाइश कम रह जाती है.

     दरअसल केंद्र सरकार पर आरोप लगे हैं कि बिना चर्चा के बिल पारित कराए जा रहे हैं. जहां 2004-2009 के बीच 60 प्रतिशत बिल संसदीय समितियों के पास भेजे गए. वहीं साल 2009-2014 में 71 प्रतिशत बिल समितियों के पास भेजे गए. लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से ये संख्या तेजी से गिरी है.

     साल 2014-2019 में केवल 27 प्रतिशत बिल संसदीय समितियों के पास भेजे गए और 2019 क बाद से अभी तक केवल 12 प्रतिशत बिल संसदीय समितियों के पास गए हैं. वहीं सरकार का कहना है कि संसदीय समितियां संसद का हिस्सा हैं. वे किसी बिल को पारित नहीं कर सकती. संसद सर्वोच्च है. सारे कानून संसद ही पारित करती है. सारे बिल संसदीय समितियों को नहीं भेजे जाते. उदाहरण के लिए बिलों की जगह लाए जाने वाले अध्यादेश, मनी बिल और महत्वपूर्ण संवैधानिक बिल.

    सरकार पर आरोप लगाते समय आंकड़ों का मनमाना उपयोग किया गया. साल 2014-19 के बीच राज्यसभा में केवल 18 विधेयक लाए गए और इनमें से 11 बिल यानी 61 प्रतिशत बिल राज्यसभा की समितियों को भेजे गए. 5 बिल यानी 28 प्रतिशत बिल लोकसभा की स्थाई समिति को भेजे गए. यूपीए एक में 2004-09 में राज्यसभा में 100 बिल रखे गए और इनमें से 48 बिल यानी 48 प्रतिशत राज्यसभा की स्थायी समिति को भेजे गए. जबकि 30 बिल यानी 30 प्रतिशत लोकसभा की स्थायी समिति को भेजे गए. यूपीए-2 में 2009-14 में 78 बिल राज्यसभा में रखे गए जिनमें से 40 बिल यानी 51 प्रतिशत राज्यसभा की और 21 बिल यानी 27 प्रतिशत लोकसभा की स्थायी समिति को भेजे गए.

     

     

     

    केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा, ' कई देशों ने ऑमिक्रान प्रभावित देशों से आने वाली उड़ानें बंद कर दी हैं. हम देरी क्यों कर रहे हैं? पहली वेव में भी हमने विदेशी उड़ानें रोकने में देरी कर दी थी.'

    नई दिल्‍ली /शौर्यपथ/

    कोविड-19 के नए वेरिएंट Omicron के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने पूरी तैयारी की है. दिल्ली सरकार ने LNJP अस्पताल को नए वैरिएंट Omicron के लिए डेडिकेटेड अस्पताल बनाया. इसके तहत LNJP में Omicron से संक्रमित मरीजों के आइसोलेशन और ट्रीटमेंट के लिए एक या दो वार्ड रिजर्व रखने का आदेश दिया गया है. सीएम अरविंद केजरीवाल ने (CM Arvind Kejriwal) मंगलवार सुबह एक ट्वीट करते हुए Omicron प्रभावित देशों से आने वाली उड़ानें तुरंत बंद करने का आग्रह पीएम नरेंद्र मोदी से किया है. केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा, ' कई देशों ने ऑमिक्रान प्रभावित देशों से आने वाली उड़ानें बंद कर दी हैं. हम देरी क्यों कर रहे हैं? पहली वेव में भी हमने विदेशी उड़ानें रोकने में देरी कर दी थी. अधिकतर विदेशी उड़ानें दिल्ली में आती हैं, दिल्ली सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है. PM साहिब कृपया उड़ानें तुरंत बंद करें.'

    इससे पहले, दिल्‍ली के सीएम ने नए वेरिएंट के मुद्दे पर पीएम को लेटर भी लिखा था, इसमें उन्‍होंने लिखा था कि कोरोना के नए वैरिएंट को भारत में घुसने से रोकने के लिए हम सभी को हर संभव प्रयास करना चाहिए. यूरोप समेत कई देशों ने कोरोना के नए वेरिएंट से प्रभावित इलाकों में यात्रा पर रोक दी है. भारत में भी इस वेरिएंट से प्रभावित जगहों से आने वाली फ्लाइट पर रोक लगा दी जानी चाहिए. इस संबंध में थोड़ी भी देरी नुकसानदेह साबित हो सकती है.

    गौरतलब है कि Omicronवैरिएंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में मिला था. वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि संक्रमण की दर बहुत तेज हो सकती है और मरीजों में गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नए वैरिएंट में कम से कम 10 म्यूटेशन हैं. जबकि डेल्टा में सिर्फ दो तरह के म्यूटेशंस पाए गए थे. म्यूटेट होने का मतलब है वायरस के जेनेटिक मटेरियल में बदलाव होना. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक समिति ने कोरोना वायरस के इस नये स्वरूप को ‘ओमीक्रॉन' नाम दिया है और इसे ‘बेहद संक्रामक चिंताजनक स्वरूप' करार दिया है.

     

     

     

    संसदीय कार्य मंत्री प्रल्‍हाद जोशी (Pralhad Joshi) ने मंगलवार सुबह ट्वीट करकहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सरकार को मजबूरी में निलंबन का यह प्रस्ताव सदन के सामने रखना पड़ा.

    नई दिल्‍ली /शौर्यपथ/

    संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन की हंगामेदार शुरुआत हुई. संसद के मॉनसून सत्र के दौरान हंगामा करने के लिए राज्य सभा से 12 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित (Suspension) कर दिए गए हैं. संसदीय कार्य मंत्री प्रल्‍हाद जोशी (Pralhad Joshi)ने मंगलवार सुबह ट्वीट करकहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सरकार को मजबूरी में निलंबन का यह प्रस्ताव सदन के सामने रखना पड़ा. लेकिन यदि ये 12 सांसद अभी भी अपने दुर्व्यवहार के लिए सभापति और सदन से माफी मांग लें, तो सरकार भी उनके प्रस्ताव पर खुले दिल से सकारात्मक रूप से विचार करने को तैयार है. उन्‍होंने यह भी कहा, 'सरकार हर मुद्दे पर नियमानुसार बहस करने और हर सवाल का जवाब देने को तैयार है. कल से सदन में कई महत्वपूर्ण बिल सदन में पेश किए जाने हैं. मैं एक बार फिर सभी पार्टियों से सदन को चलने देने और इन सभी बिलों पर सार्थक एवं स्वस्थ चर्चा करने की अपील करता हूं. 'विपक्ष चाहता हैं कि 12 सांसदों का निलंबन वापस हो, इस मुद्दे पर उन्‍होंने कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक के बाद राज्‍यसभा के चेयरमैन से भी मुलाकात की है.

    इस बीच, उधर, मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में विपक्ष के सांसदों ने वॉक आउट किया. शोरशराबे के बीच उनको अपनी बात कहने का मौका नही मिला. हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्‍थगित करनी पड़ीगौरतलब है कि मॉनसून सत्र में हंगामा करने के लिए सांसदों के खिलाफ यह कार्रवाई हुई है.उच्‍च सदन के जिन 12 सांसदों को सोमवार को सस्‍पेंड किया गया उनके नाम एल्‍मारम करीम (माकपा), फुलो देवी नेताम (कांग्रेस), छाया वर्मा (कांग्रेस), रिपुन बोरा (कांग्रेस), बिनोय विस्‍वाम (भाकपा), राजमणि पटेल (कांग्रेस), डोला सेन ( तृणमूल कांग्रेस), शांत छेत्री ( तृणमूल कांग्रेस), सैयद नासिर हुसैन ( कांग्रेस), प्रियंका चतुर्वेदी ( शिवसेना), अनिल देसाई (शिवसेना) और अखिलेश प्रसाद सिंह ( कांग्रेस) शामिल हैं. उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी.

    संसद के मॉनसून सत्र में राज्यसभा में हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की करने और सदन की मर्यादा का कथित तौर पर उल्लंघन करने के आरोपों के बाद राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी. इस समिति की सिफारिशों के आधार पर इन सांसदों के खिलाफ सोमवार को कार्रवाई की गई. संजय सिंह, प्रताप सिंह बाजवा वगैरह को इसलिए सस्पेंड नहीं किया गया क्योंकि उनका मामला दस अगस्त का था. जिन्हें सस्पेंड किया गया उनका मामला 11 अगस्त का है जो मॉनसून सत्र का अंतिम दिन था, इसीलिए उनके खिलाफ आज कार्रवाई की गई है. दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि 12 सांसदों का निलंबन नियमों के खिलाफ है. नियम 256 के अनुसार सदस्य को सत्र के बाकी बचे समय के लिए निलंबित किया जाता है. चूंकि मॉनसून सत्र 11 अगस्त को ही समाप्त हो चुका है ऐसे में इस सत्र में सदस्यों का निलंबन गलत है. विपक्ष इस मामले में सरकार के खिलाफ सामूहिक रूप से रणनीति बनाकर 'हमले' की तैयारी कर रहा है.

     

     

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