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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती और बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की मांग
भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या और विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को लेकर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का शिक्षित युवा डिग्री और हुनर लेकर रोजगार की तलाश में भटक रहा है, जबकि सरकारी विभागों में कर्मचारियों की आवश्यकता के बावजूद अनेक पद रिक्त हैं।
कुरैशी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, कृषि, वन, पुलिस, तकनीकी सहित अन्य विभागों में मानव संसाधन की जरूरत है। सरकार को विभागवार समीक्षा कर आवश्यक पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी कार्यालयों में पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने से आम जनता के काम प्रभावित होते हैं, वहीं बेरोजगार युवाओं को नौकरी की तलाश में वर्षों इंतजार करना पड़ता है।
पूर्व राज्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर सहित दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में केवल स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी भवन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, तकनीकी कर्मचारी और प्रशासनिक अमले की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी है। उन्होंने योग्य स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर देने की बात कही।
कुरैशी ने कहा कि अनेक शिक्षित युवा केवल निर्धारित मेरिट सूची में स्थान नहीं बना पाने के कारण रोजगार से वंचित रह जाते हैं, जबकि उनके पास संबंधित क्षेत्र का कौशल, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक दक्षता होती है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब प्रदेश को कर्मचारियों की जरूरत है और युवा रोजगार के लिए तैयार हैं, तो रिक्त पदों को भरने में देरी क्यों की जा रही है।
उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने, बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने तथा योग्य और हुनरमंद युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
जिला चिकित्सालय में संकल्प वाचन, स्वास्थ्य परीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश
राजनांदगांव / शौर्यपथ / सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग तथा माय भारत के संयुक्त तत्वावधान में जिला चिकित्सालय राजनांदगांव के कांफ्रेंस हॉल में नशामुक्ति एवं वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में युवा, खिलाड़ी, विद्यार्थी, शिक्षक, प्रशिक्षक एवं माय भारत के स्वयंसेवक शामिल हुए।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के नशामुक्ति जनजागरूकता अभियान के तहत युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने नशामुक्ति के साथ वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, सम्मान एवं उनके प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती वैशाली मरडवार ने कहा कि युवाओं को नशाखोरी से व्यक्ति, परिवार और समाज को होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने जिले एवं प्रदेश में संचालित नशामुक्ति केंद्रों की जानकारी देते हुए बताया कि राजनांदगांव में समाज कल्याण विभाग के माध्यम से अनुदानित समता जन कल्याण समिति द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्र से अब तक सैकड़ों लोग लाभान्वित हो चुके हैं।
कार्यक्रम में डॉ. विकास राठौर ने स्वस्थ जीवनशैली तथा डॉ. रूपा मानकर ने नशामुक्ति एवं नशे की लत से बाहर निकलने के उपायों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने युवाओं को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, सकारात्मक दिनचर्या अपनाने और नशे से पूरी तरह दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान जिला चिकित्सालय के विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपस्थित युवाओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। इस अवसर पर माय भारत के समन्वयक श्री शुभजीत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, युवा, खिलाड़ी, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, प्रशिक्षक एवं कोच उपस्थित रहे।
जनपद पंचायत दुर्ग में कर्मचारी संगठनों ने तय की आंदोलन की रूपरेखा
— प्रांतीय महामंत्री विजय लहरे
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर 30 सितंबर 2026 को प्रस्तावित एक दिवसीय ‘मोदी की गारंटी’ हड़ताल की तैयारियों को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के सभाकक्ष में संभाग स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रांतीय नेतृत्व सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लेकर आंदोलन की रणनीति, तैयारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में प्रांतीय संरक्षक पी. आर. यादव, प्रदेश समन्वयक जी. आर. चंद्रा, प्रांताध्यक्ष पवन शर्मा, वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रदीप बाबा चौहान, प्रांतीय महामंत्री विजय लहरे एवं हिमाचल साहू तथा संभाग अध्यक्ष आनंद कुमार श्रीवास्तव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
पदाधिकारियों ने कर्मचारी हितों से जुड़ी विभिन्न मांगों पर चर्चा करते हुए 30 सितंबर के प्रस्तावित आंदोलन में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रांतीय आह्वान के तहत हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी विभागों और संबद्ध कर्मचारी संगठनों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
बैठक में दुर्ग जिला अध्यक्ष भानु प्रताप यादव, बालोद जिला अध्यक्ष गोविंद दास मानिकपुरी, आईटीआई कर्मचारी अधिकारी संघ के संभाग अध्यक्ष चंद्रकांत साहू, प्रांतीय सांस्कृतिक सचिव हितेंद्र कुमार साहू, जीएसटी कर्मचारी संघ प्रदेश संगठन के मनीष तिवारी, आदिवासी विकास विभाग छात्रावास अधीक्षक संघ के अनिल कुमार दुबे, कर्मचारी कांग्रेस अध्यक्ष अनुरूप साहू, पशु चिकित्सा क्षेत्र सहायक अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश साहू, स्वास्थ्य विभाग कार्यकारी प्रांताध्यक्ष वी. एस. राव एवं जिला सचिव शिवदयाल घृत लहरे, शिक्षा विभाग संयोजक सुखेंद्र देवांगन एवं धर्मेंद्र देशमुख, लघु वेतन कर्मचारी संघ जिला अध्यक्ष मोतीराम खिलाड़ी, समाज कल्याण विभाग संयोजक जंत राम ठाकुर तथा आदिवासी विकास विभाग से संजय साहू एवं चतुर यादव सहित विभिन्न विभागों एवं संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के अंत में विभिन्न विभागों से पहुंचे कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों ने 30 सितंबर 2026 की प्रस्तावित ‘मोदी की गारंटी’ हड़ताल को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
28 से 30 सितंबर तक शाखाओं में कामकाज प्रभावित; पांच दिन तक बैंकिंग सेवाओं पर असर की संभावना, डिजिटल सेवाओं का ले सकेंगे सहारा
नई दिल्ली। बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। आज 27 सितंबर 2026, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) सामान्य रूप से खुले रहेंगे। यह विशेष व्यवस्था आगामी तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल के मद्देनजर की गई है, ताकि ग्राहक जरूरी बैंकिंग कार्य पहले ही निपटा सकें। वित्त मंत्रालय के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 सितंबर को बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम-लिंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट को संचालित रखने की अनुमति दी है।
28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना सहित अन्य सेवा संबंधी मुद्दे शामिल हैं। सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से हड़ताल टालने की अपील की गई है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार हड़ताल का आह्वान जारी है।
लगातार पांच दिन बैंक शाखाओं पर असर की स्थिति
ग्राहकों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 26 सितंबर चौथा शनिवार था और 27 सितंबर रविवार होने के बावजूद सरकारी बैंक एवं RRB आज विशेष रूप से खुले हैं। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में सामान्य शाखा सेवाओं के लिहाज से ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में नकद लेन-देन, चेक संबंधी कार्य, शाखा स्तर के भुगतान, खाता संबंधी काम और अन्य प्रत्यक्ष बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। वित्त मंत्रालय ने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आवश्यक सेवाएं बनाए रखने और एटीएम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
UPI और डिजिटल बैंकिंग से मिल सकती है राहत
शाखाएं बंद रहने की स्थिति में ग्राहक UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी उपलब्ध डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि किसी विशेष सेवा की उपलब्धता बैंक और तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है। इसलिए जिन ग्राहकों को चेक जमा करने, बड़ी नकद निकासी, ड्राफ्ट, शाखा में दस्तावेज जमा करने या अन्य प्रत्यक्ष बैंकिंग कार्य की जरूरत है, उन्हें आज ही अपना काम निपटा लेना बेहतर होगा।
ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह
27 सितंबर: सरकारी बैंक और RRB खुले रहेंगे।
28–30 सितंबर: UFBU की प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल।
जरूरी शाखा संबंधी काम आज ही पूरा कर लें।
पर्याप्त नकदी की जरूरत हो तो समय रहते ATM से व्यवस्था कर लें।
UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का विकल्प इस्तेमाल करें।
बड़े या समयबद्ध बैंकिंग लेन-देन के लिए अपने बैंक की ताजा सूचना जरूर देखें।
यानी बैंक ग्राहकों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। सरकार ने रविवार को बैंक खोलने की व्यवस्था इसी उद्देश्य से की है कि 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से वर्षों पुरानी मांग पूरी, किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और पेंशनधारियों को स्थानीय स्तर पर मिलेंगी बैंकिंग सेवाएं
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील क्षेत्र के पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक की नई शाखा शुरू हो गई है। इससे पंडरीपानी सहित आसपास के करीब 60 गांवों के ग्रामीणों को अब स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलेगा। बैंकिंग कार्यों के लिए दूर जाने की परेशानी कम होने से ग्रामीणों के समय और यात्रा खर्च की बचत होगी।
अब तक पंडरीपानी और आसपास के ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर फरसाबहार जाना पड़ता था। नई शाखा शुरू होने से जमा-निकासी सहित आवश्यक बैंकिंग सेवाएं क्षेत्र में ही उपलब्ध हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों के लिए बैंकिंग सुविधाएं अधिक सुलभ और सुविधाजनक हुई हैं।
किसानों से पेंशनधारियों तक को मिलेगा लाभ
नई शाखा से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं, कर्मचारियों और पेंशनधारियों सहित विभिन्न वर्गों को सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को कृषि ऋण एवं अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं व्यापारियों और ग्रामीणों के लिए दैनिक लेन-देन तथा अन्य बैंकिंग कार्य आसान होंगे।
होम, कार और शिक्षा ऋण की सुविधा भी
एसबीआई की नई शाखा के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को होम लोन, कार लोन और शिक्षा ऋण सहित विभिन्न ऋण एवं बैंकिंग सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। इससे क्षेत्रवासियों को अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए फरसाबहार जाने की आवश्यकता कम होगी।
पंडरीपानी में बैंक शाखा शुरू होने पर क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के नजदीक बैंकिंग सुविधा मिलने से सामान्य बैंकिंग कार्यों के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल
सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद
रायपुर / सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया।
आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए।
महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।
रायपुर / छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी।
प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति
लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की।
डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ
प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है।
भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ
प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।
पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है।
आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम
शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है।
साभार - विष्णु प्रसाद वर्मा
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आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान, पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन
रायपुर । आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान मिला है।
भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष एवं आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पांच वर्ष पूर्ण होने पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘आरोग्य मंथन 2026’ में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने छत्तीसगढ़ को सम्मानित किया। राज्य की ओर से आयुष्मान भारत योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने पुरस्कार ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि आर्थिक कठिनाई के कारण किसी पात्र नागरिक को उपचार से वंचित न होना पड़े। उन्होंने कहा कि बीमारी के समय उपचार के साथ परिवार को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिले, इसी उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों में उपचार लेने वालों के लिए पोर्टेबिलिटी बनी संबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोर्टेबिलिटी सुविधा उन नागरिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिन्हें रोजगार, कामकाज या बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। पात्र हितग्राही देश के अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में योजना से संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों के दूसरे राज्यों में उपचार के दौरान क्लेम का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा क्लेम प्रोसेसिंग, तकनीकी निगरानी और अस्पतालों के साथ समन्वय को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
क्लेम प्रोसेसिंग और तकनीकी निगरानी पर जोर
प्रदेश में पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के त्वरित निराकरण के लिए क्लेम प्रोसेसिंग व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, अस्पतालों के साथ समन्वय और लंबित प्रकरणों के निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य है कि हितग्राहियों को उपचार के बाद योजना का लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि यह सम्मान पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विभाग का प्रयास है कि आयुष्मान भारत का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को और मजबूत किया जाएगा।
पोर्टेबिलिटी से देशभर में लाखों हितग्राहियों को उपचार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। 30 जून 2026 तक पोर्टेबिलिटी सुविधा के तहत देशभर में 29.05 लाख अंतर-राज्यीय अस्पताल प्रवेश अधिकृत किए गए, जिनकी अधिकृत राशि ₹8,383.97 करोड़ से अधिक है।
यह सुविधा विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों, दूसरे राज्यों में रोजगार करने वाले नागरिकों और गृह राज्य से बाहर उपचार की आवश्यकता वाले परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा स्वास्थ्य सेवा तंत्र
‘आरोग्य मंथन 2026’ में स्वास्थ्य आश्वासन एवं डिजिटल हेल्थ के अगले चरण पर भी चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्लेम प्रोसेसिंग को तकनीक-सक्षम बनाने, डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम मजबूत करने तथा स्वास्थ्य डेटा के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर विचार-विमर्श किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि गंभीर बीमारी किसी परिवार के लिए आर्थिक संकट न बने और प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के साथ किया सामूहिक गायन, सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा
विद्यार्थियों से आह्वान—बड़ा सपना देखें, लक्ष्य तय करें और पूरी लगन से उसे हासिल करने के लिए मेहनत करें
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने विद्यार्थियों, आचार्यों एवं नागरिकों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। राष्ट्रगीत के सामूहिक स्वर से विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से गूंज उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यालय के विकास के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि मां भारती की वंदना, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का सशक्त स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने देशवासियों में स्वाधीनता की चेतना जगाई और स्वतंत्रता सेनानियों को मातृभूमि के लिए त्याग एवं समर्पण की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होना गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने के साथ नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराने का अवसर है। विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों एवं नागरिकों द्वारा सामूहिक गायन किया जा रहा है।
दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी मिल रहे बेहतर अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। प्रयास है कि शहरों के साथ बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा निखारने के समान अवसर मिलें। प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन एवं वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई है। वहां अध्ययनरत प्रदेश के 13 विद्यार्थियों ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रभक्ति जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान या डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, चरित्र और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण का आधार है। उन्होंने विद्या भारती के विद्यालयों द्वारा शिक्षा के साथ संस्कार, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने के प्रयासों की सराहना की तथा शिक्षकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बड़ा सपना देखें, लक्ष्य तय करें और पूरी लगन, अनुशासन एवं ईमानदारी से उसे हासिल करने के लिए मेहनत करें। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सफलता को समाज और राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ में 1500 स्थानों पर हुआ सामूहिक गायन
कार्यक्रम में माणिक लाल साहू ने बताया कि देशभर में 25 हजार स्थानों पर लगभग एक करोड़ लोगों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में करीब 1500 स्थानों पर पांच लाख लोगों ने इसमें सहभागिता की।
मां सरस्वती बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री नीलेश अग्रवाल ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय चेतना, त्याग और गौरव की अभिव्यक्ति बताते हुए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक कर्तव्य जैसे पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत, राजीव लोचन महाराज, मयंक बैस, राघवेंद्र सिंह ठाकुर, अजय कुलश्रेष्ठ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, आचार्यगण, विद्यालय परिवार के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
एक साल में 901 किसानों के खातों में डीबीटी से पहुंचे 30.34 करोड़ रुपये
चेक और बैंक के चक्कर से मिली राहत, मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की राशि सीधे खाते में
रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए शासकीय सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लगातार सरल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में रायगढ़ जिले में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित करने की व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी सहूलियत साबित हो रही है। बीते एक वर्ष में रायगढ़ अनुविभाग के 901 किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये अंतरित किए जा चुके हैं।
रायगढ़ अनुविभाग में 26 सितम्बर 2025 से भू-अर्जन से संबंधित भुगतान ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद किसानों को चेक जारी करने के स्थान पर स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। 21 सितम्बर 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से 901 किसानों को 30 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भू-अर्जन मुआवजे के रूप में 391 किसानों के खातों में 20 करोड़ 67 लाख 53 हजार 163 रुपये अंतरित किए गए हैं। इसी तरह पुनर्वास एवं बोनस के तहत 510 किसानों को 9 करोड़ 67 लाख 24 हजार 739 रुपये का भुगतान किया गया है। इस प्रकार दोनों मदों में कुल 901 किसानों को 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुए हैं।
चेक से सीधे खाते तक, आसान हुई भुगतान प्रक्रिया
पूर्व में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाता था। चेक प्राप्त करने के बाद किसानों को उसे बैंक में जमा कराने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता था। कई बार इसके लिए कार्यालय और बैंक के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को इस प्रक्रिया से राहत मिली है।
अब स्वीकृत मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंच रही है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हुई है।
किसानों ने कहा—बिना परेशानी सीधे खाते में मिल रही राशि
ग्राम कोतासुरा के किसान श्री टंकधर मालाकार ने बताया कि भू-अर्जन मुआवजा वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए काफी सुविधाजनक है। पहले की तुलना में अब मुआवजा राशि आसानी से प्राप्त हो रही है।
ग्राम दनौट की श्रीमती चम्पाबाई अगरिया ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है। अब बिना किसी परेशानी के मुआवजे की राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो रही है।
ग्राम मुरालीपाली के श्री हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले भू-अर्जन की राशि प्राप्त करने के लिए चेक मिलने के बाद बैंक जाना पड़ता था। अब मुआवजा एवं पुनर्वास की राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिली है।
भू-अर्जन मुआवजे की ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने किसानों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया है। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से एक ओर किसानों को कार्यालय और बैंक के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ी है।
24 सितंबर तक लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों ने लगभग 19.58 लाख क्विंटल चावल का किया उठाव
रायपुर, / सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य में सितंबर एवं अक्टूबर 2026 माह के लिए खाद्यान्न का आबंटन 14,186 उचित मूल्य दुकानों को जारी किया गया है। सितंबर माह के लिए आबंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूर्ण हो चुका है तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न वितरण की कार्यवाही निरंतर जारी है।
24 सितंबर 2026 तक राज्य में लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों द्वारा सितंबर माह के खाद्यान्न का उठाव किया जा चुका है। इस दौरान कुल 19 लाख 57 हजार 880 क्विंटल चावल का उठाव हुआ है। शेष राशनकार्डधारियों को भी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से किया जा रहा है।
राज्य के सभी जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण का कार्य प्रचलित है। राज्य शासन द्वारा खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी और मानिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न समय पर उपलब्ध कराया जा सके। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत बेटियों को मिली स्वच्छता और सम्मान की सुविधा
रायपुर, / कांकेर जिले के जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत केसकोड़ी में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत केसकोड़ी में पहला बालिका शौचालय निर्मित किया गया है। यह निर्माण बेटियों की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में निर्मित बालिका शौचालय इस अभियान को धरातल पर उतारने का उदाहरण है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वच्छता संबंधी आवश्यक सुविधा उपलब्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाना है। प्रत्येक शौचालय के निर्माण के लिए 4 लाख 30 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का उद्देश्य गांव की हर बेटी को विद्यालय में सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी गांव की बेटी को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में वीबी-जी राम जी योजना से निर्मित पहला बालिका शौचालय इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कभी नक्सल समस्या के कारण विकास की गति प्रभावित रही, वहां आज बेटियों की शिक्षा, स्वच्छता और सम्मान के लिए कार्य हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा हो, ताकि हमारी बेटियां बिना किसी असुविधा के आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
वीबी- जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के विकास कार्य अनुमेय हैं। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। इन कार्यों का चयन ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा के अनुमोदन से किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी भी प्राप्त होगी।
महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत छूट का भी मिला लाभ
कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में कांकेर की महिला किसान ने साझा किया अनुभव
रायपुर / अपने नाम जमीन होना किसी भी महिला के लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कांकेर जिले के सरोना निवासी महिला किसान श्रीमती चंद्रकांता नेताम के लिए जमीन की रजिस्ट्री अब पहले की तुलना में कम खर्चीली हुई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किए जाने और स्टाम्प शुल्क में पहले से लागू 1 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलने से उन्हें रजिस्ट्री में कुल 9,510 रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस बदलाव से मिला अपना अनुभव साझा किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने के साथ महिलाओं को आर्थिक राहत देने की दिशा में पहल की गई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में दी जा रही रियायत का लाभ श्रीमती चंद्रकांता नेताम जैसी महिला किसानों तक सीधे पहुंच रहा है।
4 से 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क, बचत बनी बड़ी राहत
श्रीमती नेताम ने बताया कि अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिलाओं के लिए लागू शुल्क रियायत का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत के स्थान पर 2 प्रतिशत लगने से रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ। इसके साथ ही महिला क्रेता को स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत की छूट का लाभ भी मिला। दोनों रियायतों के कारण उन्हें कुल 9,510 रुपये की बचत हुई।
एक किसान परिवार के लिए रजिस्ट्री में बची यह राशि मायने रखती है। श्रीमती नेताम ने इस आर्थिक राहत को महिलाओं के हित में उपयोगी पहल बताते हुए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
महिलाओं के नाम संपत्ति को मिल रहा प्रोत्साहन
महिलाओं के नाम संपत्ति के पंजीयन पर शुल्क में रियायत केवल रजिस्ट्री का खर्च कम करने तक सीमित नहीं है। इससे परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी मिल रहा है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनकी आर्थिक सुरक्षा और परिवार में वित्तीय भागीदारी को भी मजबूती मिलती है।
डिजिटल सुविधाओं ने भी आसान की रजिस्ट्री
आर्थिक राहत के साथ पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुविधाओं के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है। संपत्ति की लोकेशन आधारित फोटो जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक हैं।
ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करने और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिलती है।
चंद्रकांता की कहानी में आर्थिक राहत और महिला सशक्तिकरण का संदेश
श्रीमती चंद्रकांता नेताम को मिली 9,510 रुपये की बचत बताती है कि शुल्क में किया गया बदलाव किस तरह सीधे हितग्राही को आर्थिक राहत पहुंचा सकता है। जमीन अपने नाम होने से संपत्ति में महिला की भागीदारी मजबूत होती है और शुल्क में रियायत इस प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाती है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सेवाओं में आए बदलाव, उनके अनुभव और सुझावों को सामने ला रहा है। चंद्रकांता की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर है—जहां तकनीक से प्रक्रिया आसान हो रही है और शुल्क में राहत से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति का पंजीयन अधिक किफायती बन रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
