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दुर्ग । शौर्य पथ । केंद्र सरकार के 7 साल का कार्यकाल पूरा होने पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह समेत अन्य प्रमुख भाजपा नेताओं के बयानों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने शर्मनाक करार दिया है। राजेंद्र ने कहा कि कोविड संकट से पूरा देश त्रस्त है। वहीं डॉ. रमन सिंह सहित अन्य भाजपा नेता दूसरी पार्टी के नेताओं पर छींटाकशी कर रहे हैं। झूठे आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं को हंसी-ठिठोली करना छोड़ केंद्र सरकार की 7 साल की उपलब्धियां बताना चाहिए। राजेंद्र ने सवालों की झड़ी लगाते हुए कहा कि रमन समेत अन्य भाजपा नेता देश की जनता को बताएं कि 2014 और 2019 के चुनावों में किए गए वायदों में से कितने वादे पूरे किए गए? देश की विकास दर कितनी बढ़ी और कितने युवाओं को रोजगार मिला? भाजपा नेता यह भी बताएं कि सात साल में किसानों की आय में कितनी बढ़ोतरी हुई। विदेशों से कितना काला धन आया? पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों से आम जनता को कितनी राहत मिली? राजेंद्र ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने 7 साल में देश को कई साल पीछे धकेल दिया है। जनहित के कार्य नहीं हुए। केंद्र सरकार की विफलताओं को छिपाने की नीयत से भाजपा नेता अपना राजधर्म निभाना छोड़कर विपक्षी दलों पर आरोप लगाने का काम कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। राजेंद्र ने कहा कि भाजपा के खासमखास बाबा रामदेव ने पहले एलोपैथिक दवाइयों को स्टूपिड और दिवालिया साइंस कहकर कोरोना वारियर्स का अपमान किया। अब वैक्सिनेशन को लेकर दिग्भ्रमित करने वाले बयान दे रहे हैं। इससे देश की जनता असमंजस की स्थिति में है। बाबा रामदेव ने अपने वक्तव्य में कहा है कि वे वैक्सीन नहीं लगवाएंगे और उन्हें कोरोना से बचाव के लिए एलोपैथी वैक्सीन की जरूरत नहीं है। राजेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जनहित में देश की जनता से वैक्सिनेशन की अपील की जा रही है। आम जनता को वैक्सीन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में बाबा रामदेव का यह बयान देशवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि बाबा रामदेव की बात मानें या वैक्सिनेशन करवाएं। राजेंद्र ने कहा कि विपक्षी दलों समेत राज्य सरकारों द्वारा वैक्सीन की कमी को दूर करने वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने दूसरी कंपनियों को आर्डर देने की सलाह दी गई लेकिन भाजपा नेताओं ने विपक्षी दलों पर आरोप-प्रत्यारोप लगा दिए। आज बाबा रामदेव का वैक्सीन न लगाने संबंधी बयान आया है। इसमें एलोपैथी दवाई को स्टूपिड और दिवालिया साइंस कहा गया है। इस विवादित बयान पर केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं की चुप्पी समझ से परे हैं। भाजपा नेताओं का दोहरा चरित्र उजागर हो रहा है।
खेल /शौर्यपथ /आज का दिन भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास है, क्योंकि आज विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक अपना 36वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1 जून 1985 को चेन्नई में जन्मे कार्तिक ने साल 2004 में भारतीय टीम में जगह बना ली थी, लेकिन उनका जगह कभी भी टीम में पक्की नहीं रही। कार्तिक उस विश्व विजेता टीम क सदस्य भी रहे हैं, जिसने पहली बार 2007 में आयोजित हुए टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हराकर खिताब पर कब्जा जमाया था। उनके जुड़े यादगार लम्हों में 2018 में निदाहास ट्रॉफी के फाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई 34 रनों की वह पारी शामिल है, जब उन्होंने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तरह छक्का लगाकर टीम को खिताब दिलाया था।
कोलंबो में खेले गए इस मुकाबले में कार्तिक ने 8 गेंद पर 29 रनों की पारी खेली थी। भारत को फाइनल मुकाबले में आखिरी दो ओवरों में 34 रन चाहिए थे। कार्तिक ने 19वें ओवर में 22 रन ठोके। भारत को आखिर गेंद पर पांच रनों की जरूरत थी और उस गेंदबाजी बांग्लादेश के पार्टटाइम गेंदबाज सौम्य सरकार कर रहे थे। कार्तिक ने यहां आखिरी गेंद पर एक्सट्रा कवर के ऊपर से छक्का लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। टीम को इस तरह जीत दिलाने से फैन्स उन्हें धोनी के बाद यहा मिस्टर फिनिशर बुलाने लगे थे।
कार्तिक ने मैच को लेकर बाद में बताया था कि, 'पहले मैं नंबर-5 पर बल्लेबाजी करने के लिए तैयार था, लेकिन कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि मैं नंबर-6 पर बल्लेबाजी के लिए जाऊंगा। इसलिए मैं इसके साथ भी खुश था। मैं इसे लेकर पूरी तरह से आश्वस्त था कि मैं नंबर-6 पर बल्लेबाजी करने के लिए जाऊंगा। उन्होंने कहा कि, 'जब चौथा विकेट आउट हो गया था तो मैं बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरने के लिए तैयार था, लेकिन तभी रोहित ने कहा कि विजय शंकर को बल्लेबाजी के लिए जाना चाहिए। इसलिए उस समय मैं काफी निराश और गुस्से में था। लेकिन जाहिर है कि आप कप्तान से सवाल नहीं कर सकते।'
मनोरंजन /शौर्यपथ बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से लाखों दिलों पर राज करने वाली दिगवंत एक्ट्रेस नरगिस दत्त आज अगर हमारे बीच होती हैं तो वह अपना 92वां बर्थ-डे सेलिब्रेट करतीं। आज 1 जून को उनकी बर्थ एनिवर्सरी है। ऐसे में एक्टर संजय दत्त अपनी मां नरगिस को याद करते हुए उनके साथ अपनी एक बपचन की फोटो शेयर किया है।
संजय दत्त ने अपने इंस्टाग्राम पर अपने पिता सुनील दत्त और अपनी बहनों के संग अपनी मां की कई तस्वीरें शेयर किया है, जो अब वायरल हो चुकी हैं।
संजय दत्त ने शेयर की ब्लैक एंड ह्वाइट फोटो
इन तस्वीरों को शेयर करते हुए संजय दत्त ने कैप्शन में लिखा, ''तुम्हारे जैसा और कोई नहीं है... जन्मदिन मुबारक हो मां''। एक्टर द्वारा शेयर की गई सभी तस्वीरें ब्लैक एंड ह्वाइट है। इन तस्वीरों नरगिस अपने पति और बच्चों के संग मुस्कुराते हुए पोज दे रही हैं।
नरगिस दत्त का बॉलीवुड डेब्यू और निधन
नरगिस दत्त ने अपने करियर की शुरुआत साल 1935 में बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस तलाश-ए-हक से की थी। 1949 में उन्होंने महबूब खान की फिल्म अंदाज से बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया था। नरगिस दत्त का नाम उन अभिनेत्रियों में शुमार होता है जिन्होंने फिल्म जगत में अपनी अलग और एक मजबूत पहचान बनाई। इस पहचान ने उन्हें बुलंदियों पर पहुंचाया लेकिन नरगिस कम ही उम्र में कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार हो गई थीं। जिसके बाद उन्होंने 3 मई 1981 को अंतिम सांस ली।
सेहत /शौर्यपथ /उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर फैलने लगता है और चेहरे पर झुर्रियां भी दिखाई देने लगती है। माथे पर की त्वचा पर भी लाइंस दिखाई देने लगती हैं, जिसे त्वचा पर दिखाई देने वाली सिलवटें भी कहा जाता है। माथे की सलवटें को देखकर ऐसा लगता है कि हम अधेड़ता या बुढापे की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में जानिए कि माथे कि सलवटें कैसे दूर करें योग से।
1. चेहरे और माथे को रिलेक्स रखें : कई लोग बात करते वक्त, क्रोध तरते वक्त, चिंता करते वक्त या भावुकता के क्षणों में माथे पर सलवटें बना लेते हैं। इसके अलावा दूर तक देखते वक्त या किताब पढ़ते वक्त भी माथे पर सलवटें बना लेते हैं। कई बार यह अनावश्यक होती है। बार-बार ऐसा करने से यह सलवटें स्थायी रूप से बन जाती है। ऐसे में यह ध्यान देते रहे कि यदि मैं किसी भी प्रकार की कोई क्रिया कर रहा हूं तो क्या मेरे चेहरे पर तनाव बन रहा है। यह ऐसा लगे तो तुरंत ही रिलेक्स हो जाएं।
2. प्राणायम : इसके लिए सबसे पहले आपको अनुलोम विलोम में अभ्यस्त होना पड़ेगा फिर इसके बाद भ्रस्तिका और कपालभाति प्राणायाम करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है जो हमारे शरीर को तरोताजा और रिफ्रेश करके के लिए जरूरी है।
3. ब्रह्म मुद्रा करें : ब्रह्म मुद्रा से गर्दन, चेहरा और आंखों की एक्सरसाइज होती है जिसके चलते चेहरे की झुरियां भी मिट जाती हैं। ब्रह्म मुद्रा से गर्दन में लचीलापन आएगा और गर्दन के आसपास की जमा चर्बी भी हटेगी। अब गर्दन स्थिर रखते हुए आंखों को दाएं-बाएं, उपर-नीचे घुमाएं, फिर गोलाकार दाएं से बाएं, फिर बाएं से दाएं घुमाएं। इससे आंखें स्वस्थ्य और सुंदर बनी रहेगी।
4. काली मुद्रा करें : अपनी जीभ को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। आपने मां कालीका का फोटो देखा होगा, बस उसी तरह की मुद्रा में 30 सेकंड तक रहें। इससे आपकी आंखों में जमा पानी और विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाता है या अंदर पेट में पहुंच जाता है। इससे आंखें स्वस्थ होकर अच्छा महसूस करती है। साथ ही यह माथे की सलवटें मिटाने के साथ ही आंखों के नीचे बनी झुर्रियां भी मिटाता है।
3. चेहरा बनाएं मछलीनुमा : गालों को अंदर भींचकर चेहरे को मछलीनुमा बनाएं। इसे आप स्माइल फिश फेस योगा कह सकते हैं। फिर हाथों की मुठ्टियां बांधकर ऊपर चेहरे तक उठाएं और दोनों आंखों को जोर से बंदरकर अंदर मींच लें। इससे मस्तिष्क पर पड़ी सलवटें मिटती है।
4. शेर मुद्रा : शेर जैसा चेहरा बनाने से चेहरे की सभी मांसपेशियां संचालित होकर स्वस्थ बनती है। पहले जीभ को पुरी ताकत के साथ बाहर निकाले और फिर आंखों को तान दें। बिल्कुल शेर की तरह। अब मुंह का फुग्गा फुलाएं अर्थात मुंह में हवा भरें और उसे दाएं-बाएं घुमाएं।
5. किस की आकृति : किस (चूमना) लेने जैसी आकृति बनाएं और इसी तरीके को बार-बार दोहराएं। फिर गर्दन ऊंची करके बत्तीसी मिलाकर हंसे।
6.बुद्धा फेस : अंत में आंखें बंद कर विश्राम की मुद्रा में बैठ जाएं और दोनों भोओं के बीच ध्यान को लगाएं। कुछ देर तक इसी तरह शांत बैठें रहें।
7. आहार : पानी का उचित सेवन करें, ताजा फलों के जूस, दही की छाछ, आम का पना, इमली का खट्टा-मीठा जलजीरा, बेल का शर्बत आदि तरल पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, बेल तथा पुदीने का भरपूर सेवन कारते हुए मसालेदार या तैलीय भोज्य पदार्थ से बचें।
8. मालिश : इसके बाद कभी भी जेतुन या सरसों के तेल की मालिश करें। इससे मांस-पेशियां पुष्ट होती हैं। दृष्टि तेज होती है। सुख की नींद आती है। मालिश से रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है।
सेहत /शौर्यपथ /एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम को सर्वोच्च औषधि के रूप में जाना जाता है। यह स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं। वैसे तो नीम के पास आपकी हर समस्या का इलाज है, लेकिन आइए अभी जान लेते हैं, नीम के 10 औषधीय गुण -
1 बिच्छू ततैया जैसे विषैले कीटों द्वारा काट लेने पर, नीम के पत्तों को महीन पीस कर काटे गए स्थान पर उसका लेप करने से राहत मिलती है, और जहर भी नहीं फैलता।
2 किसी प्रकार का घाव हो जाने पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से काफी लाभ मिलता है। इसके अलावा जैतून के तेल के साथ नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर लगाने से नासूर भी ठीक हो जाता है।
3 दाद या खुजली की समस्याएं होने पर, नीम की पत्तियों को दही के साथ पीसकर लगाने पर काफी जल्दी लाभ होता है। और दाद की समस्या समाप्त हो जाती है।
4 गुर्दे में पथरी होने की स्थिति में नीम के पत्तों की राख को 2 ग्राम मात्रा में लेकर, प्रतिदिन पानी के साथ लेने पर पथरी गलने लगती है, और मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाती है।
5 मलेरिया बुखार होने की स्थिति में नीम की छाल को पानी में उबालकर, उसका काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े को दिन में तीन बार, दो बड़े चम्मच भरकर पीने से बुखार ठीक होता है और कमजोरी भी ठीक होती है।
6 त्वचा रोग होने पर, नीम के तेल का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नीम के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर शरीर पर मालिश करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।
7 नीम के डंठल में, खांसी, बवासीर, प्रमेह और पेट में होने वाले कीड़ों को खत्म करने के गुण होते हैं। इसे प्रतिदिन चबाने या फिर उबालकर पीने से लाभ होता है।
8 सिरदर्द, दांत दर्द, हाथ-पैर दर्द और सीने में दर्द की समस्या होने पर नीम के तेल की मालिश से काफी लाभ मिलता है। इसके फल का उपयोग कफ और कृमिनाशक के रूप में किया जाता है।
9 नीम के दातुन से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया की बीमारी भी समाप्त होती है। नीम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करने पर दांत व मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं, और मुंह से दुर्गंध भी नहीं आती।
10 चेहरे पर कील मुहांसे होने पर नीम की छाल को पानी में घिसकर लगाने से फायदा होता है। इसके अलावा नीम की पत्तियों का लेप करने से भी त्वचा रोग के कीटाणु नष्ट होते हैं। नीम के तेल में कपूर मिलाकर त्वचा लगाने से भी फायदा होता है।
सेहत /शौर्यपथ /आपमें से ज्यादातर लोग सर्दी के दिनों में भीगे बादाम का सेवन करते हैं। लेकिन बादाम का सेवन आखिर भिगोकर ही क्यों किया जाता है, सूखे बादाम क्यों नहीं? अगर आप नहीं जानते इसका जवाब, तो चलिए हम बता देते हैं।
दरअसल छिलके सहित बादाम खाना उतना फायदेमंद नहीं होता, जितना बगैर छिलके वाले बादाम खाने से होता है। इसका प्रमुख कारण है छिलकों का आपके पोषण में रूकावट पैदा करना। जी हां, बादाम के छिलके में टैनीन नाम का एक तत्व मौजूद होता है जो कि इन पोषत तत्वों के अवशोषण को रोक लेता है।
अगर आप सूखे बादाम का सेवन करते हैं, तो छिलकों को निकालना संभव नहीं होता, जबकि बादाम को पानी में भिगो देने पर इससे छिलका आसानी से निकल जाता है। ऐसे में आपको बादाम का पूरा पोषण मिल पाता है, जो छिलकों के रहते नहीं मिल पाता। यही कारण है कि कच्चे यानी सूखे बादाम की जगह भीगे हुए बादाम खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।
चलिए अब जानते हैं इसके 5 फायदे-
1 भीगे बादाम खाने से पाचन क्रिया भी संतुलित रहती है।
2 इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होता है, जो बढ़ती उम्र को कंट्रोल करता है।
3 बादाम से ब्लड में अल्फाल टोकोफेरॉल की मात्रा बढ़ती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।
4 भीगे बादाम से गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ता है और बैड कॉलेस्ट्रॉल कम होता है।
5 इसमें भरपूर फॉलिक एसिड होता है, जो प्रेगनेंसी में शिशु के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के विकास में सहायक होता है।
जानिए किन लोगों को नहीं खाने चाहिए बादाम-
ऊपर आलेख में जाना कि बादाम खाने के कई फायदे होते है। सही भी है लेकिन सभी लोगों के लिए नहीं। जी हां, ऐसे भी कुछ लोग हैं जिनके लिए बादाम का सेवन करना उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। आइए, जानते हैं ऐसे लोगों के बारे में जिन्हें बादाम खाने को अवॉइड करना चाहिए -
1. हाई ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स को बादाम के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इन लोगों को नियमित ब्लड प्रेशर की दवाइयां लेनी रहती हैं। इन दवाओं से साथ बादाम खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है।
2. जिन लोगों कि किडनी में पथरी या गॉल ब्लेडर संबंधी परेशानी हो, तो ऐसे में उन्हें भी बादाम नहीं खानी चाहिए।
3. अगर किसी को पाचन संबंधी परेशानी है, तो उन्हें भी बादाम खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है जो आपकी परेशानी को और बढ़ा सकता है।
4. अगर कोई व्यक्ति एंटीबायोटिक मेडिसन ले रहा हो, उस दौरान उसे भी बादाम खाना बंद कर देना चाहिए। बादाम में ज्यादा मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जिसके सेवन से शरीर में दवाइयों का जो असर होना चाहिए, वह प्रभावित हो सकता है।
5. जो लोग मोटापे से परेशान हैं, उन्हें भी बादाम का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें कैलोरी और वसा बहुत अधिक मात्रा में होती है, जो वजन बढ़ाने का काम करता है।
6. यदि किसी को एसिडिटी की शिकायत रहती हो, तो उन्हें भी बादाम नहीं खाना चाहिए।
आस्था /शौर्यपथ / बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जब भी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की पैड़ी,सीढ़ी या ओटले पर थोड़ी देर बैठते हैं। क्या आप जानते हैं इस परंपरा का क्या कारण है?
आजकल तो लोग मंदिर की पैड़ी पर बैठकर अपने घर की व्यापार की राजनीति की चर्चा करते हैं परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई। वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर के हमें एक श्लोक बोलना चाहिए। यह श्लोक आजकल के लोग भूल गए हैं। आप इस श्लोक को आने वाली पीढ़ी को बताएं । यह श्लोक इस प्रकार है -
अनायासेन मरणम् ,बिना देन्येन जीवनम्।
देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम् ।।
इस श्लोक का अर्थ है अनायासेन मरणम्...... अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं ।
बिना देन्येन जीवनम्......... अर्थात परवशता का जीवन ना हो मतलब हमें कभी किसी के सहारे ना पड़े रहना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हो । ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सके ।
देहांते तव सानिध्यम ........अर्थात जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए। उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले ।
देहि में
परमेश्वरम्..... हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें देना।
यह प्रार्थना करें।
विशेष:दर्शन करने के बाद बैठकर यह प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए.... यह प्रार्थना है, याचना नहीं है। याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है जैसे घर, व्यापार, नौकरी ,पुत्र ,पुत्री ,सांसारिक सुख, धन या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है वह याचना है वह भीख है।
हम प्रार्थना करते हैं प्रार्थना का विशेष अर्थ होता है अर्थात विशिष्ट, श्रेष्ठ। अर्थना अर्थात निवेदन। ठाकुर जी से प्रार्थना करें और प्रार्थना क्या करना है ,यह श्लोक बोलना है।
जब हम मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो खुली आंखों से भगवान को देखना चाहिए, निहारना चाहिए । उनके दर्शन करना चाहिए। कुछ लोग वहां आंखें बंद करके खड़े रहते हैं । आंखें बंद क्यों करना हम तो दर्शन करने आए हैं । भगवान के स्वरूप का, श्री चरणों का ,मुखारविंद का, श्रंगार का, संपूर्णानंद लें।
आंखों में भर ले स्वरूप को। दर्शन करें और दर्शन के बाद जब बाहर आकर बैठें तब जो दर्शन किए हैं नेत्र बंद करके उस स्वरूप का ध्यान करें। मंदिर में नेत्र नहीं बंद करना। बाहर आने के बाद पैड़ी पर बैठकर जब ठाकुर जी का ध्यान करें तब नेत्र बंद करें और अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए तो दोबारा मंदिर में जाएं और भगवान का दर्शन करें। नेत्रों को बंद करने के पश्चात उपरोक्त श्लोक का पाठ करें।
शौर्यपथ / हिन्दू पंचांग अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसी भी मान्यता या धारणा है कि इन दिनों में मरने वाले व्यक्ति परिवार के अन्य पांच लोगों को भी साथ ले जाते हैं। आओ जानते हैं पंचक के पांच रहस्य।
1. पंचक क्या है : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है।
पंचक के नक्षत्रों का प्रभाव:-
1. धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।
2. शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है।
3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है।
4. उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है।
5. रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है।
2. पंचक में नहीं करते हैं ये पांच कार्य:-
'अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः।
संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।'-मुहूर्त-चिंतामणि
अर्थात:- पंचक में तिनकों और काष्ठों के संग्रह से अग्निभय, चोरभय, रोगभय, राजभय एवं धनहानि संभव है।
1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना, 2. मकान पर छत डलवाना, 3. शव जलाना, 4. पलंग या चारपाई बनवाना और दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।
समाधान : यदि लकड़ी खरीदना अनिवार्य हो तो पंचक काल समाप्त होने पर गायत्री माता के नाम का हवन कराएं। यदि मकान पर छत डलवाना अनिवार्य हो तो मजदूरों को मिठाई खिलने के पश्चात ही छत डलवाने का कार्य करें। यदि पंचक काल में शव दाह करना अनिवार्य हो तो शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी आवश्य जलाएं। इसी तरह यदि पंचक काल में पलंग या चारपाई लाना जरूरी हो तो पंचक काल की समाप्ति के पश्चात ही इस पलंग या चारपाई का प्रयोग करें। अंत में यह कि यदि पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में फल चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं। ऐसा करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।
3. पंचक के प्रकार जानिए:-
1.रविवार को पड़ने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है।
2.सोमवार को पड़ने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है।
3.मंगलवार को पड़ने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है।
4.शुक्रवार को पड़ने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है।
5.शनिवार को पड़ने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है।
6.इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को पड़ने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में पड़ने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।
4. पंचक में मौत का समाधान:-
गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके साथ उसी के कुल खानदान में पांच अन्य लोगों की मौत भी हो जाती है।
शास्त्र-कथन है-
'धनिष्ठ-पंचकं ग्रामे शद्भिषा-कुलपंचकम्।
पूर्वाभाद्रपदा-रथ्याः चोत्तरा गृहपंचकम्।
रेवती ग्रामबाह्यं च एतत् पंचक-लक्षणम्।।'
आचार्यों के अनुसार धनिष्ठा से रेवती पर्यंत इन पांचों नक्षत्रों की क्रमशः पांच श्रेणियां हैं- ग्रामपंचक, कुलपंचक, रथ्यापंचक, गृहपंचक एवं ग्रामबाह्य पंचक।
ऐसी मान्यता है कि यदि धनिष्ठा में जन्म-मरण हो, तो उस गांव-नगर में पांच और जन्म-मरण होता है। शतभिषा में हो तो उसी कुल में, पूर्वा में हो तो उसी मुहल्ले-टोले में, उत्तरा में हो तो उसी घर में और रेवती में हो तो दूसरे गांव-नगर में पांच बच्चों का जन्म एवं पांच लोगों की मृत्यु संभव है।
मान्यतानुसार किसी नक्षत्र में किसी एक के जन्म से घर आदि में पांच बच्चों का जन्म तथा किसी एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर पांच लोगों की मृत्यु होती है। मरने का कोई समय नहीं होता। ऐसे में पांच लोगों का मरना कुछ हद तक संभव है, परंतु उत्तरा भाद्रपदा को गृहपंचक माना गया है और प्रश्न है कि किसी घर की पांच औरतें गर्भवती होंगी तभी तो पांच बच्चों का जन्म संभव है।
पंचक में जन्म-मरण और पांच का सूचक है। जन्म खुशी है और गृह आदि में विभक्त इन नक्षत्रों के तथाकथित फल पांच गृहादि में होने वाले हैं, तो स्पष्ट है कि वहां विभिन्न प्रकार की खुशियां आ सकती हैं। पांच मृत्युओं का अभिप्राय देखें तो पांच गृहादि में रोग, कष्ट, दुःख आदि का आगम हो सकता है। कारण व्यथा, दुःख, भय, लज्जा, रोग, शोक, अपमान तथा मरण- मृत्यु के ये आठ भेद हैं। इसका मतलब यह कि जरूरी नहीं कि पांच की मृत्यु ही हो पांच को किसी प्रकार का कोई रोग, शोक या कष्ट हो सकता है।
5. पंचक का उपाय:-
'प्रेतस्य दाहं यमदिग्गमं त्यजेत् शय्या-वितानं गृह-गोपनादि च।'- मुहूर्त-चिंतामणि
पंचक में मरने वाले व्यक्ति की शांति के लिए गरुड़ पुराण में उपाय भी सुझाए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य विद्वान पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि विधि अनुसार यह कार्य किया जाए तो संकट टल जाता है। दरअसल, पंडित के कहे अनुसार शव के साथ आटे, बेसन या कुश (सूखी घास) से बने पांच पुतले अर्थी पर रखकर इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है। ऐसा करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है।
दूसरा यह कि गरुड़ पुराण अनुसार अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसमें कुछ सावधानियां बरतना चाहिए। सबसे पहले तो दाह-संस्कार संबंधित नक्षत्र के मंत्र से आहुति देकर नक्षत्र के मध्यकाल में किया जा सकता है। नियमपूर्वक दी गई आहुति पुण्यफल प्रदान करती हैं। साथ ही अगर संभव हो दाह संस्कार तीर्थस्थल में किया जाए तो उत्तम गति मिलती है।
दुर्ग। शौर्य पथ । दुर्ग नगर निगम के द्वारा पन्ना स्वीट्स स्टेशन रोड पर दूसरी बार छापा मारकर कार्यवाही की गई पूर्व में ही नगर निगम लॉक डाउन का उल्लंघन करने को लेकर कार्रवाई की गई । पर निगम के ही अधिकारियों की रजामंदी से ही 2 दिनों में यह दुकान पुनः संचालित हो गई फिर भी ये लोकडॉन के नियमों का उल्लंघन करने से बाज़ नही आए और आज पुनः इनके दुकान पर छापे मारे की कार्यवाही की गई । उपरोक्त कार्यवाही में नए बाजार प्रभारी शिव शर्मा व उनके नगर निगम के सहयोगी के द्वारा आज फिर पन्ना स्वीट्स पर तालाबंदी की गई शिव शर्मा के द्वारा मीडिया को बताया गया जी यह समय सीमा के बाद भी ग्राहकों को सामान देता है और बहुत सारी इनके द्वारा कंप्लेन भी आ चुकी है और इनका दुकान रविवार को भी संचालित रहता है जिससे कई आम जनता खुश नहीं है और वहां नगर निगम को कॉल कर के इनके बारे में जानकारी दी जाती है तथा आज दिनांक 31 मई सोमवार को फिर यह अपने कुछ ग्राहकों को अंदर से सामान दे रहे थे जिसे नगर निगम की टीम ने आकर रंगे हाथों पकड़ा और उस पर कार्यवाही भी की और जनता को समझाई के तौर पर बताया गया कि जो भी लॉकडाउन का उल्लंघन करेगा उस पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी ।
-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अनुकंपा नियुक्ति पर दस प्रतिशत की सीमा को किया गया था शिथिल
-चार युवाओं को मिली कलेक्ट्रेट में नियुक्ति
दुर्ग / शौर्यपथ / अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में दस प्रतिशत की सीमा शिथिल करने के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय से युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के द्वार खुल गये हैं। यह सीमा 31 मई तक शिथिल की गई है। 10 प्रतिशत की सीमा के शिथिल होने से कलेक्ट्रेट में चार अधिकारी-कर्मचारियों के बच्चों के लिए रोजगार का रास्ता खुल गया जो इस सीमा के बाहर थे। आज कलेक्ट्रेट में इन युवाओं को कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के लिए नियुक्ति पत्र सौंपे। आज चार युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले। इनमें सौरभ भादुड़ी को सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति मिली। उनके पिता श्री सुमीत कुमार भादुड़ी पाटन तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार के रूप में कार्यरत थे। सुमीत की बीते दिनों मृत्यु हो गई थी। इनमें सहायक ग्रेड -3 पर सुश्री ऐश्वर्या राव को नियुक्ति मिली। इनके पिता श्री ए शंकर राव धमधा में सहायक ग्रेड-3 पद पर नियुक्ति थे। इनकी हार्ट अटैक से मृत्यु हुई थी। इसी पद पर एस. अभिषेक की नियुक्ति भी हुई, वे कलेक्ट्रेट में वाहन चालक श्री सुरेश कुमार के पुत्र हैं श्री कुमार की मृत्यु 27 फरवरी 2020 को हुई थी। चौथी नियुक्ति तेजेंद्र साहू की हुई इनकी माता श्रीमती खेमिन साहू तहसील कार्यालय में रीडर थीं। इन्हें भी सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त किया गया है। अभी दो प्रकरणों पर कार्रवाई जारी है जिन्हें शीघ्र ही नियुक्ति मिल जाएगी।
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के पश्चात इन युवाओं ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय से हमारे परिवार को बड़ी राहत मिली है। सुश्री ऐश्वर्या ने बताया कि इस निर्णय से अनेक परिवारों को लाभ पहुँचेगा जिनके अभिभावक शासकीय सेवा में थे और जिनका असमय देहावसान हो गया। सुश्री ऐश्वर्या ने बताया कि कैबिनेट के निर्णय के बाद यह उम्मीद थी कि जल्द ही अनुकंपा नियुक्ति मिल जाएगी लेकिन यह नियुक्ति एक हफ्ते के भीतर ही हो जाएगी, यह मालूम नहीं था। आज 11 बजे मेरे पास फोन आया और बताया गया कि आपका नियुक्ति आदेश आ गया है। मैंने घर में सभी को जानकारी दी और सबको बहुत अच्छा लगा। तेजेंद्र साहू ने बताया कि मेरी मम्मी तहसील आफिस में थीं, कोविड की वजह से वो नहीं रहीं। माँ हम सबका संबल थीं, अब मुझे भी उनकी जिम्मेदारियों का अपनी क्षमता से निर्वाह करना है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
