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बाकलीवाल की ‘नई कांग्रेस’ की मुहिम को झटका? निष्क्रिय और विवादित चेहरों की एंट्री से कार्यकर्ताओं में असंतोष
दुर्ग / शौर्यपथ / विशेष रिपोर्ट
दुर्ग शहर कांग्रेस में चार दशक तक वोरा परिवार के वर्चस्व के बाद जब प्रदेश नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए संगठन की कमान धीरज बाकलीवाल को सौंपी, तब कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा और बदलाव की उम्मीद जगी थी। लंबे समय से उठ रहे “परिवारवाद और अवसरवाद” के आरोपों के बीच यह बदलाव कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत माना गया।
धीरज बाकलीवाल ने अध्यक्ष पद संभालते ही जिस तरह जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिला कांग्रेस कमेटी में जगह दी, उसने न केवल संगठन में नई जान फूंकी, बल्कि वर्षों से उपेक्षित कार्यकर्ताओं को भी एक मंच दिया। इस फैसले की शहरभर में सराहना हुई और इसे कांग्रेस के पुनरुत्थान की दिशा में अहम कदम माना गया।
लेकिन…
यह “नई सोच” ब्लॉक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
? दक्षिण ब्लॉक की सूची: बदलाव या पुनरावृत्ति?
हाल ही में घोषित दुर्ग शहर दक्षिणी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सूची ने एक बार फिर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची सामने आते ही कांग्रेसी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
आरोप है कि—
कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो लंबे समय से निष्क्रिय रहे हैं
कुछ पदाधिकारी विवादित छवि के माने जाते हैं
और कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिनकी जनाधार क्षमता पर ही सवाल खड़े हैं
यहां तक कि संगठन के भीतर ही यह चर्चा है कि कुछ नाम ऐसे हैं जो “अपने घर या मोहल्ले के चार वोट तक कांग्रेस के पक्ष में नहीं ला सकते।”
? कार्यकर्ताओं में निराशा, सवालों की भरमार
जिस जोश और उम्मीद के साथ जिला स्तर पर नई टीम का गठन हुआ था, वह ब्लॉक स्तर पर आते-आते फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर ब्लॉक स्तर पर ही “पुरानी और निष्क्रिय सोच” हावी रही, तो संगठन की मजबूती केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
कई कार्यकर्ता इसे “अवसरवाद की वापसी” भी बता रहे हैं, जहां सक्रियता और संघर्ष की बजाय समीकरण और व्यक्तिगत हित हावी हो रहे हैं।
? क्या बाकलीवाल की रणनीति को लगेगा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो धीरज बाकलीवाल ने जिस साहस के साथ संगठन में नई शुरुआत की थी, उसे जमीनी स्तर पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है।
अगर ब्लॉक इकाइयों में पुराने और निष्क्रिय चेहरों को ही तवज्जो मिलती रही, तो यह न केवल संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि आगामी चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को भी कमजोर कर सकता है।
? आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
? क्या दक्षिण ब्लॉक के पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे?
? या फिर यह नियुक्तियां केवल “पद और प्रभाव” तक सीमित रह जाएंगी?
दुर्ग कांग्रेस के भीतर उठती यह असंतोष की लहर आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकती है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संगठन इन आलोचनाओं को गंभीरता से लेगा या फिर “पुरानी राह” पर ही आगे बढ़ेगा।
(विशेष टिप्पणी):
दुर्ग कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है—क्योंकि बदलाव केवल चेहरे बदलने से नहीं, सोच बदलने से आता है।
? दुर्ग / शौर्यपथ
भारतीय जनता पार्टी के 6 अप्रैल स्थापना दिवस को लेकर दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण तैयारी बैठक संपन्न हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला संगठन प्रभारी नंदन जैन, विधायक ललित चंद्राकर सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
बैठक में स्थापना दिवस एवं 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजन की रूपरेखा तय करते हुए विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्थापना दिवस को पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह “मां के जन्म उत्सव” के समान है, जिसे हर बूथ तक पहुंचाकर ऐतिहासिक बनाना है।
प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएं और प्रत्येक बूथ पर भाजपा का ध्वज फहराकर माहौल को पूर्णतः भाजपा-मय बनाएं।
जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने बताया कि 6 अप्रैल को ध्वजारोहण, मिष्ठान वितरण, सोशल मीडिया अभियान, बूथ स्तर पर कार्यक्रम, तथा 7 से 12 अप्रैल तक “गांव-बस्ती चलो अभियान” चलाया जाएगा। वहीं 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर स्वच्छता अभियान, दीप उत्सव और संगोष्ठी जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बैठक में महापौर अलका बाघमार, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
? कुल मिलाकर भाजपा ने स्थापना दिवस को बूथ से लेकर जिला स्तर तक व्यापक रूप से मनाने की रणनीति तय कर दी है।
भिलाई/दुर्ग | विशेष राजनीतिक विश्लेषण
भिलाई नगर निगम चुनाव में भले अभी लगभग छह महीने का समय शेष हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। आरक्षण के बाद महापौर पद के लिए पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी तय होना है, और इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के भीतर नामों की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। इन नामों में सबसे प्रमुख नाम महेश वर्मा का उभरकर सामने आ रहा है—जो वर्तमान में भिलाई नगर निगम के पार्षद हैं और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण संगठन के भीतर एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
महेश वर्मा: अनुभव बनाम समीकरण
महेश वर्मा का नाम केवल “सांसद विजय बघेल के करीबी” होने के कारण ही नहीं, बल्कि
नगर निगम की राजनीति में सक्रिय भूमिका
स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ
संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव
के चलते भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।
यही वजह है कि उन्हें एक ग्राउंडेड और अनुभवी चेहरा माना जा रहा है, जो महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हो सकते हैं।
दुर्ग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ बना सियासी मुद्दा
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद हुए नगरीय निकाय चुनाव में विजय बघेल की पसंद को प्राथमिकता मिली थी। लेकिन दुर्ग की महापौर अलका बाघमार की कार्यप्रणाली पिछले एक साल में कई विवादों में घिरी रही।
मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
गरीबों के ठेले-गुमटी पर सख्ती, लेकिन अमीरों के अतिक्रमण पर नरमी
गणेश मंदिर के सामने कथित अवैध निर्माण पर चुप्पी
बस स्टैंड की जमीन पर अनुबंध समाप्ति के बाद भी कब्जा
शनिवार बाजार और चौक-चौराहों पर लगातार बढ़ता अतिक्रमण
सफाई व्यवस्था की बदहाली और पेयजल संकट
इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई न होने से जनता ही नहीं, पार्टी के पार्षदों में भी असंतोष बढ़ा है।
जब अपनी ही पार्टी ने उठाए सवाल
हाल ही में सामान्य सभा में जो हुआ, उसने इस असंतोष को सार्वजनिक कर दिया।
सभापति ने खुलकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए
कई भाजपा पार्षदों ने इसे पार्टी की साख से जोड़ते हुए नाराज़गी जताई
यह घटनाक्रम बताता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट बन चुका है।
भिलाई में प्रत्याशी चयन पर असर तय
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुर्ग के अनुभव का असर भिलाई नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी चयन पर पड़ेगा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:
संगठन इस बार सिर्फ “पसंद” नहीं, “परफॉर्मेंस” को भी तवज्जो देगा
महेश वर्मा का नाम मजबूत जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय में कई अन्य समीकरण भी प्रभाव डालेंगे
इसी बीच, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की धर्मपत्नी के भी दावेदारी पेश करने की चर्चाएं हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है।
विजय बघेल की भूमिका पर नजर
दुर्ग में महापौर चयन में अहम भूमिका निभाने वाले सांसद विजय बघेल की राय इस बार भी महत्वपूर्ण रहेगी।
लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि
“क्या इस बार उनकी पसंद को उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी?”
यदि संगठन महेश वर्मा के नाम को दरकिनार करता है, तो इसे सीधे तौर पर
दुर्ग महापौर के प्रदर्शन और अंदरूनी नाराज़गी से जोड़कर देखा जाएगा।
कांग्रेस नहीं, भाजपा में ज्यादा हलचल
आम तौर पर चुनावी हलचल कांग्रेस में ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति उलट दिख रही है।
भाजपा के भीतर ही खींचतान, असंतोष और रणनीतिक मंथन तेज हो गया है।
निष्कर्ष:
भिलाई नगर निगम चुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि
भाजपा के लिए “आंतरिक संतुलन और विश्वसनीयता” की परीक्षा बनता जा रहा है।
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि—
? पार्टी अनुभव और जमीनी पकड़ वाले चेहरों को आगे लाती है
या
? फिर राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देती है
लेकिन इतना तय है कि
दुर्ग की सियासत ने भिलाई की रणनीति को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
रायपुर/शौर्यपथ / रसोई गैस के लिए जनता परेशान और भाजपा के नेता मोदी की चाटुकारिता में धृतराष्ट्र बने हुए है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रदेश की कोई ऐसी एजेंसी नहीं है जहां सुचारू रूप से गैस मिल रहा हो। भाजपा के हर बड़े-छोटे नेता बड़ी बेशर्मीपूर्वक गैस के संकट को नकार रहे है। भाजपा नेता, जनता के जले पर नमक छिड़क रहे है। एक तरफ सरकार जनता को गैस नहीं दिला पा रही, दूसरी ओर झूठ बोल कर जनता का मजाक बना रहे है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि गैस एजेंसियों में लगी कतारें यदि भाजपा नेताओं को नहीं दिख रही तो उनको अपने नजर और नजरिये दोनों का इलाज कराने की जरूरत है। जब कोई राजनैतिक दल जनता की समस्या से इस प्रकार मुंह मोड़कर जनता को झूठा ठहराने लगती है तो उसकी विदाई तय हो जाती है। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा की हो गयी है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि लोगों के घर में गैस नहीं होने के कारण चूल्हे नहीं जल रहे और भाजपा कहती है अफवाहों पर ध्यान मत दे। सरकार ने अचानक से कमर्शियल गैस की सप्लाई क्यों बंद कर दिया? अचानक से कमर्शियल गैस की सप्लाई अघोषित तौर पर रोक देने से घरेलू गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग हो रहा कालाबाजारी होगी और होटल व्यवसाईयों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा, जिससे कुक्ड फूड के दाम भी प्रभावित हो रहे है। प्रदेश के लगभग आधे रेस्टोरेंट गैस की किल्लत के कारण बंद होने की स्थिति में है।
रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2.5 रू. और औद्योगिक डीजल के दाम 22 रू. जनता पर अत्याचार है। औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाने से औद्योगिक उत्पादों के रेट बढ़ेगे और महंगाई और बढ़ोगी। सरकार ने तथा पेट्रोलियम कंपनियो पिछले 8 सालो में पेट्रोलियम पदार्थो पर बेतहाशा मुनाफा कमाया है। पेट्रोलियम कंपनिया 32 लाख करोड़ रू. क्रूड आयल के दाम जब सस्ते हुये थे, तब अतिरिक्त कमाई की थी। पूरी दुनिया में जब क्रूड आयल का दाम 116 रू. से घटकर 75 रू. हुआ था, तब भी पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं किया गया था। आज जब वैश्विक संकट की स्थिति है तो केन्द्र सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों को अपने जमा किये गये अतिरिक्त मुनाफे से जनता को राहत दे।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि ने कहा कि केन्द्र सरकार पेट्रोल डीजल पर बेतहाशा एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। करोनाकाल में मोदी सरकार ने युक्तीयुक्त करण के नाम पर जो एक्साईज ड्यूटी बढ़ाकर बेतहाशा कमाई की थी, अब समय आ गया है कि जनता को उस कमाई से राहत दिया जाये।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि ने कहा कि अभी केवल प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाये गये है। लेकिन सरकार को जो रवैया है वह ठीक नही है। सरकार बहुत जल्दी सामान्य पेट्रोल-डीजल के भी रेट बढ़ायेगी। रसोई गैस के कारण जनता परेशान तो है आने वाले समय में पेट्रोल भी जनता की परेशानी का कारण बनेगी।
दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ प्रदेश के एकमात्र A+ शासकीय महाविद्यालय साइंस कॉलेज दुर्ग में जमीन को लेकर एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव आदित्य नारंग के नेतृत्व में तथा एनएसयूआई के पदाधिकारीयो एवं छात्र-छात्राओं द्वारा दो दिवसीय उपवास सत्याग्रह का आयोजन महाविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने किया गया।
एनएसयूआई की मांग जो कि कॉलेज में पार्किंग की असुविधा को लेकर प्राचार्य महोदय को ज्ञापन के द्वारा पूर्व में अवगत कराया गया था। जिसे कॉलेज प्रशासन द्वारा पूर्ण नहीं किया अतः पार्किंग की जमीन को अन्य विभाग को आबंटित कर दिया गया। जिसके विरोध मे पदाधिकारियों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा दो दिवसीय सत्याग्रह उपवास किया। छात्रो की मांग है कॉलेज पार्किंग को कॉलेज को वापस सौंप दिया जाए।
साथ ही कॉलेज का एकमात्र ग्राउंड जो की फुटबॉल ग्राउंड बनाया जा रहा है, जिससे एनसीसी का कैंप एवं भर्ती प्रक्रिया अन्य महाविद्यालय के खेल का आयोजन किया जाता था तथा अन्य खेल जैसे की क्रिकेट, गोला फेक, जैवलिन थ्रो, तथा अन्य खेल का आयोजन नहीं हो पाएगा !
इन्हीं दो मुद्दों को लेकर एनएसयूआई के पदाधिकारी एवं छात्र-छात्राओं ने उपवास सत्याग्रह का कार्यक्रम किया !
जिससे कॉलेज का अस्तित्व बचाया जा सके !
इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर महोदय एवं प्राचार्य महोदय जी को ज्ञापन सौंपा गया !
इस कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए मुख्य रूप से दुर्ग शहर के पूर्व महापौर एवं शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल जी, दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुरदीप भाटिया, कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अभिषेक बोरकर, एनएसयूआई के उपाध्यक्ष सोनू साहू, छात्र नेता उस्मान रजा, युवा तिरुपति चंद्राकर, चैतन्य बंछोर, पियुष सिन्हा, मृदुल सिंह, तुषार कुमार, आयुष शर्मा, लक्ष्य शर्मा, कर्तिक विश्वकर्मा, भानुप्रताप कोरेटी, चेतनलाल निषाद, लीलेश्वर पोहाई, देवानंद कोड़ापे, खुशांन कुमार यादव, विपुल साहू, गितेश कुमार साहू, तरुण देव, मोहित कुमार, विवेक सिंह, मयंक देशमुख, दीपेश बंजारे, योगेश सिन्हा एवं महाविद्यालय के सैकड़ो छात्र उपस्थित रहे।
दुर्ग।
दुर्ग शहर कांग्रेस इन दिनों संगठनात्मक राजनीति और अंदरूनी समीकरणों के चलते चर्चा के केंद्र में है। खासकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज होती नजर आ रही है, जहां एक ओर पुराने और अनुभवी नाम हैं, वहीं दूसरी ओर नई सक्रियता के सहारे उभरती दावेदारियां भी सामने आ रही हैं।
इसी कड़ी में शहर कांग्रेस की महामंत्री निकिता मिलिंद का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। हाल के दिनों में उनके द्वारा लगातार प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाना और मीडिया में सक्रिय बने रहना, पार्टी के भीतर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
क्या सक्रियता का लक्ष्य ‘कुर्सी’?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि—
क्या यह सक्रियता संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति है?
या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की नजरों में जगह बनाकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश?
हालांकि, इस पद के लिए अब तक महापौर प्रत्याशी प्रेमलता साहू का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है। उनके संगठन में पुराने और मजबूत संबंध, खासकर शहर अध्यक्ष के साथ, उन्हें स्वाभाविक दावेदार बनाते हैं।
विपक्ष की भूमिका पर उठते सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि शहर कांग्रेस स्थानीय मुद्दों पर कितनी सक्रिय है?
जहां एक ओर शहरी सरकार पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप लग रहे हैं, वहीं कांग्रेस के पार्षदों की अपेक्षित आक्रामक भूमिका नजर नहीं आ रही।
दिलचस्प बात यह है कि निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष (भाजपा) के पार्षद ही अपनी सरकार को घेरते दिखे, जबकि कांग्रेस अपेक्षाकृत शांत नजर आई।
सोशल मीडिया बनाम ज़मीनी राजनीति
दुर्ग कांग्रेस में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि राजनीति का केंद्र जमीनी आंदोलनों से हटकर सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमटता जा रहा है।
निकिता मिलिंद की बढ़ती मीडिया सक्रियता को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है—जहां जमीनी मुद्दों की बजाय राष्ट्रीय राजनीति पर बयानबाजी ज्यादा दिख रही है।
बदलते समीकरण, नई टीम की तैयारी
दुर्ग कांग्रेस की राजनीति में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव आया है। एक समय तक प्रभावी रहे वोरा परिवार का वर्चस्व अब लगभग समाप्त हो चुका है, और शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में नई टीम और नए चेहरे उभर रहे हैं।
पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे राजेश यादव और धीरज बाकलीवाल का साथ आना भी इन बदलते समीकरणों का संकेत है।
क्या संभव है ‘तेज प्रमोशन’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महामंत्री पद मिलने के तुरंत बाद महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन
“राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं”—खासकर तब, जब संगठन में बड़े बदलाव की प्रक्रिया चल रही हो।
अब देखना यह होगा कि—
क्या अनुभव और पुराने संबंध बाजी मारेंगे?
या फिर नई सक्रियता और रणनीति संगठन में नया समीकरण बनाएगी?
फिलहाल, दुर्ग कांग्रेस में एक बात साफ है—
“कुर्सी एक, दावेदार कई… और सियासत अपने पूरे रंग में!”
लेख - राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर
दुर्ग/रायपुर: प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों और बढ़ते अपराधों के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। 17 मार्च को राजधानी रायपुर में होने वाले विशाल विधानसभा घेराव की तैयारियों को लेकर आज दुर्ग के राजीव भवन में एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक संपन्न हुई।
बैठक में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' से लेकर 'अवैध अफीम खेती' जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बनाई गई।
"प्रदेश का हर वर्ग त्रस्त, सरकार मस्त" – अय्यूब खान
प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 2023 से प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार आई है, कानून-व्यवस्था पूरी तरह लाचार हो चुकी है। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा:
"महंगाई और बेरोजगारी ने जनता की कमर तोड़ दी है। न किसान खुश है, न युवा और न ही व्यापारी। भाजपा के दावे 'ढाक के तीन पात' साबित हो रहे हैं।"
प्रमुख मुद्दे जिन पर घेरेगी कांग्रेस:
अवैध अफीम की खेती: पूर्व विधायक अरुण वोरा ने सवाल उठाया कि प्रशासन की नाक के नीचे इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती किसके संरक्षण में हो रही थी? सरकार को स्पष्ट करना होगा कि इस गोरखधंधे के पीछे असली चेहरे कौन हैं।
मनरेगा पर प्रहार: वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर गरीबों की जीवनरेखा 'मनरेगा' को कमजोर कर रही है।
बढ़ता अपराध: प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और असुरक्षा के माहौल को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया।
दुर्ग की रहेगी बड़ी भागीदारी
दुर्ग ग्रामीण अध्यक्ष राकेश ठाकुर एवं शहर अध्यक्ष धीरज बकलीवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि दुर्ग जिले से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता अपनी गाड़ियों के साथ रायपुर कूच करेंगे।
बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
पूर्व विधायक अरुण वोरा, पीसीसी महामंत्री दीपक दुबे, सचिव अय्यूब खान, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा, छाया महापौर श्रीमती प्रेमलता साहू सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेस जन।
मुख्य आकर्षण (Highlight Boxes)
नारा: "जनता की आवाज, विधानसभा के द्वार"
मिशन: 17 मार्च, रायपुर चलो!
मुद्दा: कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, और कि
सानों की अनदेखी।
रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा सरकार ने निर्णय लिया है कि अब 1 अप्रैल से फाइबर की बोतल में शराब मिलेगी। साथ ही 35 नई दुकाने भी खोली जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि शराब बंदी की बात करने वाली भाजपा शराब की खपत बढ़ाने में लगी है। शराब की काली कमाई के लालच में भाजपा की सरकार ने पिछले दो वर्षों में आधा दर्जन बार आबकारी नीति में परिवर्तन किया है। पूर्व में संचालित लगभग 700 दुकानों में कंपोजिट व्यवस्था लागू करके अंग्रेजी में देसी और देसी शराब दुकानों में अंग्रेजी शराब भी बेचने का निर्णय लिया अर्थात पुरानी दुकानों की क्षमता दुगनी होकर 400 हो गयी। इस सरकार ने पिछले साल 67 नई शराब दुकानें खोले, जिसका जमकर विरोध हुआ, अब नई नीति में 35 और शराब दुकान खोले जा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि भाजपा की सरकार हर तरफ से शराब की बिक्री बढ़ाने में लगी है। विगत दिनों अंबिकापुर में सी-मार्ट को बंद कर प्रीमियम शराब दुकान खोली गई, अब नई शराब नीति के तहत और भी प्रीमियम दुकान खोलने का फैसला भाजपा की सरकार ने लिया है। पिछले 2 साल में सीमावर्ती पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उड़ीसा से शराब की तस्करी बढ़ी है। कोचियों और बिचौलियों का कारोबार बेख़ौफ़ चल रहा है, नाबालिक बच्चों तक अवैध नशे की सामग्री पहुंच रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि साय सरकार में शराब की कोचियागिरी बड़े पैमाने पर जारी है। नकली सरकारी होलोग्राम लगाकर शराब बेचा जा रहा है। राजनांदगांव, मुंगेली सहित प्रदेश के अनेकों स्थानों से लगातार खबरे आ रही है सरकारी शराब दुकानों से 200 रू. प्रति पेटी अतिरिक्त लेकर गली, मुहल्लों में कोचिये शराब पहुंचा रहे है। हाल ही में डोंगरगढ़ में बाटलिंग प्लांट यूनिट में पानी मिलाते रंगे हाथों पकड़े गये। दूसरे राज्यों की शराब बस्तर, सरगुजा सहित मैदानी क्षेत्रों में निर्बाध पहुंच रहे है। नकली और अवैध शराब का धंधा सत्ता के संरक्षण में तेजी से फल-फूल रहा है। भाजपा की सरकार बनने के बाद अवैध शराब की बिक्री बढ़ गई, दूसरे प्रांतो से शराब तस्करी कर के आ रही, बिना होलोग्राम, नकली होलोग्राम के शराब सरकारी दुकानों से बेची जा रही। पूरी सरकार शराब की काली कमाई में डूबी हुई है।
प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि साय सरकार के द्वारा लगातार शराबखोरी को संरक्षण देने वाले निर्णयों से प्रमाणित है कि भाजपा का शराबबंदी के लिए प्रदर्शन केवल राजनैतिक पाखंड था। साय सरकार का शराब प्रेम मनपसंद ऐप और 67 नई शराब दुकान खोलने के निर्णय से स्पष्ट है। भाजपा नेताओं का फोकस केवल कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में है और इसके लिए प्रदेश को नशे में डूबोने का षड़यंत्र रचा है।
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