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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
बाढ़ और रासायनिक दुर्घटना की आपात स्थिति से निपटने 20 अगस्त को होगा मॉक अभ्यास
दुर्ग, 18 अगस्त 2026 / जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने और नागरिकों को आपदा की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 20 अगस्त 2026 गुरुवार को बाढ़ के कारण उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना की स्थिति पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई है। यह मॉक ड्रिल सुबह 10 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई में आयोजित होगी।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास के माध्यम से बाढ़ एवं उससे उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मॉक ड्रिल के दौरान शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार की घबराहट न करें। यह केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए आयोजित प्रशिक्षण अभ्यास है। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें।
प्रशासन ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने की अपील की है। नागरिकों का सहयोग इस अभ्यास को सफल बनाने के साथ-साथ वास्तविक आपदा की स्थिति में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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दुर्ग / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। एनआईसी दुर्ग से कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री ए.के. भट्टाचार्य सहित अन्य जिला प्रमुख अधिकारी बैठक में जुड़े थे।
*बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्देश*
दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
*दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने निर्देश*
अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
*दुर्घटनाओं में कमी लाने सड़क निर्माण के पूर्व ही डिजाइन सही बनाएं*
ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
*युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को यातायात जागरूकता से जोड़े*
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक की शुरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी।
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दुर्ग। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दुर्ग नगर पालिक निगम को नया आयुक्त मिल गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी प्रशासनिक फेरबदल के आदेश में IAS अधिकारी लीना कोसम (IAS-2020) को अस्थायी रूप से आयुक्त, नगर पालिक निगम दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है। लीना कोसम वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं।
दुर्ग नगर निगम के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि निगम के इतिहास में पहली बार किसी IAS अधिकारी को आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में नई आयुक्त के सामने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के साथ-साथ शहर के विकास कार्यों, कर्मचारियों से जुड़े मामलों और जनसुविधाओं को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
एक महीने से प्रभारी आयुक्त के भरोसे था निगम
गौरतलब है कि पिछले करीब एक महीने से दुर्ग नगर निगम में आयुक्त का नियमित पद खाली था और उप आयुक्त मोहन साहू प्रभारी आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नियमित आयुक्त की अनुपस्थिति के चलते निगम के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
इसी दौरान निगम कर्मचारियों को भी वेतन सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों महापौर स्तर से किए गए प्रयासों के बाद कर्मचारियों को वेतन मिल पाया था। ऐसे माहौल में अब नियमित आयुक्त की नियुक्ति से निगम के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
IAS अधिकारी की नियुक्ति से बढ़ी जवाबदेही की उम्मीद
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का निवास एवं विधानसभा क्षेत्र आता है। वहीं भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का निवास भी निगम क्षेत्र में है। इसके अलावा दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा अहिवारा क्षेत्र के विधायक एवं दर्जा प्राप्त मंत्री डोमनलाल कोरसेवाड़ा का भी दुर्ग निगम क्षेत्र से जुड़ाव है।
ऐसे महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र में पहली बार IAS अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इससे नगर निगम में निर्णय प्रक्रिया, जवाबदेही, विकास कार्यों की निगरानी और जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
कर्मचारियों में भी खुशी, अब कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद
नए आयुक्त की नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिला। पिछले एक महीने से नियमित आयुक्त नहीं होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में आ रही दिक्कतों के बीच अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के साथ लंबित कार्यों को गति मिलेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
नगर निगम के सामने शहर की सफाई व्यवस्था, सड़क एवं नाली निर्माण, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, राजस्व वसूली, कर्मचारियों से जुड़े मामले और विभिन्न विकास कार्यों को गति देने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में IAS अधिकारी की नियुक्ति से निगम प्रशासन में नई कार्यशैली और बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
दुर्ग निगम के लिए नए अध्याय की शुरुआत
लीना कोसम की नियुक्ति को महज प्रशासनिक तबादला नहीं, बल्कि दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि नई आयुक्त निगम की कार्यप्रणाली को किस तरह गति देती हैं और शहर की लंबित समस्याओं तथा विकास कार्यों पर कितनी तेजी से निर्णय लिए जाते हैं।
लंबे इंतजार के बाद निगम को नियमित आयुक्त मिला है। पहली बार IAS अधिकारी को यह जिम्मेदारी मिलने से दुर्ग शहरवासियों और निगम कर्मचारियों की उम्मीदें अब नई आयुक्त लीना कोसम से जुड़ गई हैं।
- कृषकों की तरफ से मांग आने पर जलाशयों से सिंचाई पानी छोड़ा जाए
- संभाग आयुक्त ने ली संभाग स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक
दुर्ग / शौर्यपथ / संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने कहा कि संभाग अंतर्गत जिलों के सभी ड्राई नलकूप में वॉटर लेवल बढ़ाने हेतु रिचार्ज सोकपीट बनायी जाए। इस हेतु ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा के द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव के आधार पर पीएचई विभाग द्वारा जिलों के ड्राई नलकूप की संख्यात्मक जानकारी के साथ आवश्यक पहल की जाए। इसी प्रकार वर्षा जल को संरक्षित करने सभी आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने अधीक्षक अभियंता लोक निर्माण विभाग को संभाग अंतर्गत सभी जिलों में पूर्व निर्मित एवं निर्माणाधीन शासकीय भवनों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्यतः लगवाने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित करने कहा।
संभाग आयुक्त राठौर ने आज संभाग कार्यालय के सभाकक्ष में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक में विभागीय काम-काज की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशानुरूप संभाग के सभी जिलों के विकासखण्ड, तहसील एवं जिला स्तरीय कार्यालयों में कार्यालयीन कार्य, फाईल मूवमेंट, ई-ऑफिस प्रक्रिया के तहत ही हो, यह सुनिश्चित किया जाए। इस पारदर्शी व्यवस्था से कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। संभाग आयुक्त ने कहा कि अधीनस्थ कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति पर विशेष ध्यान दें। प्रति सप्ताह उपस्थिति पत्रक की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने सीएम हेल्पलाईन में विभागों को प्राप्त शिकायतों की जानकारी लेते हुए निर्धारित समयावधि के भीतर विभागीय शिकायतें निराकृत करने के निर्देश दिये। संभागायुक्त ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से नशा-मुक्ति अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु नुक्कड़ नाटक, रैली आदि कार्यक्रम निरंतर जारी रखने उन्होंने संयुक्त संचालक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी को संबंधित विभागों के समन्वय से नशा-मुक्ति अभियान क्रम जारी रखने के निर्देश दिये।
संभाग आयुक्त राठौर ने सी.जी.एम.एस.सी. के माध्यम से चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी ली तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बातें कही। उन्होंने निर्माण कार्य एजेंसी विभाग के अधिकारियों को विभागीय निर्माण कार्यों की औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिये। संभाग आयुक्त श्री राठौर ने संभाग अंतर्गत जलाशयों में जल भराव की जानकारी ली। साथ ही अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग से कहा कि किसानों की तरफ से मांग आने पर सिंचाई हेतु जलाशयों से पानी छोड़ा जाए। खरीफ फसल बोनी की समीक्षा के दौरान संयुक्त संचालक कृषि ने बताया कि संभाग के जिलों में खरीफ धान, मक्का, कोदो, कुक्की, रॉगी, ज्वार एवं अन्य फसलों की 100 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इसी प्रकार अरहर, मुंग, उड़द, कुल्थी एवं अन्य दहलन फसलों की 93 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। नियमित बारिश की वजह से संभाग अंतर्गत 16.45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में बियासी कार्य किसानों द्वारा पूर्ण कर लिया गया है। बैठक में उपायुक्त पदुम लाल यादव और संतोष ठाकुर सहित सभी विभाग के संभाग स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
चिखली में रात 10 बजे सनसनीखेज वारदात से मचा हड़कंप, दो आरोपी अभिरक्षा में, दो फरार; व्यस्त इलाके में घर के भीतर हत्या से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मृणेन्द्र चौबे
राजनांदगांव/शौर्यपथ। शहर के चिखली इलाके में रविवार 16 अगस्त की रात एक सनसनीखेज हत्या की वारदात ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। देशमुख चौक के पास स्थित अपने घर में सत्यजीत देशमुख की हत्या कर दी गई। मृतक पूर्व महापौर श्रीमती हेमा देशमुख के देवर बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में हत्या के पीछे कुछ दिन पहले हुआ विवाद और पुरानी रंजिश सामने आ रही है। रात करीब 10 से 10.30 बजे के बीच हुई इस वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई और देर रात तक घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जुटी रही।
कुछ दिन पहले हुआ विवाद बना हत्या की वजह!
स्थानीय लोगों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले सत्यजीत देशमुख का कुछ युवकों के साथ विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद तनाव बढ़ता गया और रविवार रात आरोपियों ने कथित तौर पर उनके घर पहुंचकर हमला कर दिया। हमले में सत्यजीत देशमुख की मौत हो गई।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वारदात में करीब चार युवकों के शामिल होने की बात कही जा रही है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को अभिरक्षा में लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई है।
धारा 103(1), 332(a), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज
पुलिस के अनुसार, 16 अगस्त की रात्रि चिखली चौकी अंतर्गत देशमुख चौक के पास पुराने विवाद को लेकर सत्यजीत देशमुख की उनके घर में हत्या के मामले में धारा 103(1), 332(a), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बबलू साहू उर्फ बल्ला एवं एक विधि संघर्षरत बालक को अभिरक्षा में लिया है। दोनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
वहीं वारदात में शामिल बताए जा रहे दो अन्य आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश और पतासाजी कर रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई जारी है।
व्यस्त चौक के पास घर में हत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या ऐसी जगह हुई, जो देशमुख चौक जैसे व्यस्त इलाके के समीप है। घटना का समय भी रात करीब 10 बजे का बताया जा रहा है, जब क्षेत्र में आमतौर पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। खास बात यह है कि इसी क्षेत्र में पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग प्वाइंट भी लगाया जाता है।
इसके बावजूद घर में घुसकर हत्या जैसी गंभीर वारदात का सामने आना पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर व्यस्त इलाके में संदिग्धों की गतिविधियों की भनक क्यों नहीं लगी और आरोपी किस तरह घर तक पहुंचे—यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। देर रात तक घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जमा रही। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और अब वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
पुरानी रंजिश, विवाद की वजह और हत्या की पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस
पुलिस हत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। प्रारंभिक तौर पर पुराना विवाद और आपसी रंजिश घटना से जुड़ी होने की आशंका है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक और आरोपियों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था, विवाद के बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा और हत्या की वारदात को किसने तथा किस भूमिका में अंजाम दिया।
फिलहाल एक आरोपी और एक विधि संघर्षरत बालक पुलिस की अभिरक्षा में हैं, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस जांच के आगे बढ़ने के बाद ही हत्या की असली वजह, वारदात की पूरी कड़ी और सभी आरोपियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशिक्षु डीएसपी के गनमैन विजय जेना ने घर में उठाया खौफनाक कदम, कंधे को छूते हुए निकल गई गोली; महारानी अस्पताल में उपचार जारी
नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट
जगदलपुर / शौर्यपथ / शहर के पथरागुड़ा इलाके में सोमवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रशिक्षु डीएसपी के गनमैन के रूप में तैनात आरक्षक विजय जेना (30 वर्ष) ने अपने ही घर में अपनी सर्विस INSAS रायफल से खुद को गोली मार ली। गोली कंधे को छूते हुए बाहर निकल गई, जिससे आरक्षक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई और कोतवाली थाना प्रभारी सहित पुलिस के अधिकारी एवं अन्य स्टाफ तत्काल मौके पर पहुंचे। घायल आरक्षक को तत्काल उपचार के लिए महारानी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
कई दिनों से पारिवारिक विवाद को लेकर था परेशान
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरक्षक विजय जेना पिछले कुछ दिनों से अपने घर में चल रहे पारिवारिक विवाद को लेकर मानसिक रूप से परेशान था। बताया जा रहा है कि उसने अपने विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी इस पारिवारिक तनाव की जानकारी दी थी। सोमवार को घर में एक बार फिर विवाद हुआ, जिसके बाद विजय कथित तौर पर इस कदर टूट गया कि उसने अपने पास मौजूद सर्विस रायफल से स्वयं को गोली मार ली।
बताया गया कि विजय जेना प्रशिक्षु डीएसपी सुमित चंद्रा के गनमैन के रूप में तैनात है। ड्यूटी से संबंधित सर्विस रायफल उसके पास थी। घटना के समय वह अपने घर में मौजूद था।
कंधे पर रायफल टिकाकर चलाई गोली
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया सामने आया है कि विजय जेना ने अपनी रायफल को कंधे की ओर टिकाकर गोली चलाई। गोली कंधे को छूते हुए बाहर निकल गई। गोली चलने की आवाज सुनकर परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद घायल विजय को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली। आला अधिकारियों की टीम महारानी अस्पताल में मौजूद है और चिकित्सकों से लगातार घायल आरक्षक के स्वास्थ्य की जानकारी ले रही है।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर घटना के पीछे पारिवारिक विवाद को कारण बताया है। हालांकि पुलिस द्वारा घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सर्विस रायफल से गोली चलने की परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल विजय जेना का महारानी अस्पताल में उपचार जारी है और चिकित्सकों की निगरानी में उसकी स्थिति बताई जा रही है। पुलिस महकमा भी लगातार उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है।
धमतरी/कुरुद। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कुरुद से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वायरल वीडियो को 15 अगस्त 2026 का बताकर यह दावा किया गया कि विधायक ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के स्थान पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा फहराया। हालांकि, विधायक अजय चंद्राकर ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है।
चंद्राकर के अनुसार, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया माध्यमों में प्रसारित किया जा रहा वीडियो 15 अगस्त 2026 का नहीं, बल्कि पुराना वीडियो है। उनके मुताबिक यह वीडियो कुरुद में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम का है, जिसे कथित तौर पर गलत संदर्भ के साथ स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर प्रसारित किया गया। उपलब्ध दावे के अनुसार वीडियो 22 मार्च 2026 को आयोजित भाजपा प्रशिक्षण शिविर से संबंधित बताया जा रहा है।
‘पुराने वीडियो को 15 अगस्त से जोड़कर छवि खराब करने की कोशिश’
विधायक अजय चंद्राकर ने वायरल वीडियो को लेकर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक विरोधियों और विघ्नसंतोषी तत्वों द्वारा पुराने वीडियो को नए संदर्भ में प्रसारित कर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मीडिया संस्थानों से अपील की कि किसी भी संवेदनशील वीडियो अथवा राजनीतिक सामग्री को प्रसारित करने से पहले उसकी तथ्यात्मक पुष्टि और फैक्ट चेक अवश्य किया जाए।
चंद्राकर ने यह भी आरोप लगाया कि एक निजी न्यूज चैनल द्वारा पुराने वीडियो को 15 अगस्त के घटनाक्रम के रूप में प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि यदि जांच में वीडियो को जानबूझकर गलत संदर्भ में प्रसारित करना पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
15 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर विधायक का पक्ष
विधायक के पक्ष के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को धमतरी जिले में आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में अजय चंद्राकर ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ही फहराया था। इसी आधार पर भाजपा की ओर से वायरल वीडियो के दावे को भ्रामक बताया जा रहा है।
मामले का मूल विवाद यही है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित पुराने वीडियो को कथित तौर पर 15 अगस्त 2026 के कार्यक्रम से जोड़कर पेश किया गया, जबकि विधायक पक्ष का कहना है कि वीडियो की वास्तविक तारीख और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि अलग है।
भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, पुलिस से कार्रवाई की मांग
वायरल वीडियो को लेकर धमतरी और कुरुद क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी सामने आई। भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने सिटी कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत और कार्रवाई की मांग की। भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व से जुड़े किसी वीडियो को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर राजनीतिक विवाद पैदा करना गंभीर विषय है।
धमतरी के महापौर रामू रोहरा सहित भाजपा पदाधिकारियों की ओर से पुलिस के समक्ष शिकायत किए जाने और वीडियो को गलत संदर्भ में प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। भाजपा नेताओं ने संबंधित राजनीतिक एवं सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं पर भी लगाए आरोप
विवाद के राजनीतिक रूप लेने के बाद भाजपा की ओर से कांग्रेस के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं और सोशल मीडिया पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत सहित संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायत और कार्रवाई की मांग किए जाने की बात कही है।
हालांकि, इस मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अथवा जानबूझकर फर्जी सामग्री फैलाने का आरोप पुलिस जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही तय हो सकता है। इसलिए आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित पक्षों के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
फैक्ट चेक के बाद ही तय होगा सच
अजय चंद्राकर से जुड़े वायरल वीडियो का विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के अवसरों से संबंधित वीडियो को बिना तारीख, स्थान और मूल स्रोत की पुष्टि किए प्रसारित करने से किस तरह भ्रम पैदा हो सकता है।
इस पूरे मामले में वीडियो का मूल स्रोत, शूटिंग की तारीख, कार्यक्रम का स्थान, वीडियो का पूरा/ओरिजिनल संस्करण और उसके डिजिटल मेटाडेटा महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस अथवा स्वतंत्र फैक्ट-चेक एजेंसी द्वारा इन तथ्यों की पुष्टि किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट रूप से तय किया जा सकेगा कि वीडियो वास्तव में कब और किस कार्यक्रम का है तथा उसे 15 अगस्त 2026 से जोड़कर किसने और किस उद्देश्य से प्रसारित किया।
फिलहाल अजय चंद्राकर का स्पष्ट दावा है कि 15 अगस्त 2026 को भाजपा का झंडा फहराने संबंधी वायरल वीडियो फर्जी संदर्भ में प्रसारित किया गया है और पुराने वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया है।
स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी*
*‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का प्रदर्शन*
*21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी*
रायपुर । शौर्यपथ/ 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।
*‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा*
प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।
*छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा*
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।
विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।
*योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर*
प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।
महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।
*सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक*
प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।
*एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव*
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
*21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी*
कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।
स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों के स्मारक पर तिरंगा नहीं फहरने से उठे सवाल, प्रशासन की चुप्पी पर भी सवालिया निशान
नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। स्वतंत्रता दिवस… वह दिन जब पूरा देश तिरंगे के रंग में रंग जाता है। जब आसमान में लहराता राष्ट्रध्वज हमें उन अनगिनत बलिदानों की याद दिलाता है, जिनकी वजह से आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। लेकिन जगदलपुर के लालबाग में शनिवार को एक ऐसा दृश्य भी सामने आया, जिसने कई संवेदनशील नागरिकों को सवालों के बीच खड़ा कर दिया।
लालबाग मैदान में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया। देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान के बीच स्वतंत्रता दिवस का मुख्य आयोजन हुआ। लेकिन इसी लालबाग मैदान से महज कुछ कदम की दूरी पर स्थित झीरम घाटी शहीद स्मारक में तिरंगा नजर नहीं आने की स्थिति सामने आई।
वह स्मारक… जहां पत्थरों पर केवल नाम नहीं लिखे हैं, बल्कि उन परिवारों की अधूरी कहानियों की स्मृतियां जुड़ी हैं, जिनके अपने 25 मई 2013 को झीरम की धरती पर हुए नक्सली हमले में जान गंवा बैठे।
किसी मां ने अपना बेटा खोया था…
किसी पत्नी ने अपना सुहाग…
किसी बच्चे ने अपने पिता…
और देश ने लोकतंत्र के प्रहरी।
झीरम की वह शाम आज भी बस्तर के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। गोलियों की आवाज में कई सपने हमेशा के लिए खामोश हो गए। कई घरों के चिराग बुझ गए। लेकिन उनकी शहादत ने लोकतंत्र की लौ को बुझने नहीं दिया।
इसी बलिदान को चिरस्थायी बनाने और आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र तथा देशप्रेम का संदेश देने के उद्देश्य से लालबाग में झीरम घाटी शहीद स्मारक बनाया गया। परिसर में विशाल राष्ट्रीय ध्वज भी स्थापित किया गया है।
स्मारक परिसर में लगे बोर्ड पर उल्लेख है कि इन शहीदों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
फिर सवाल उठता है—
जिस दिन पूरा देश तिरंगे को सलाम कर रहा था, उसी दिन झीरम के शहीदों की याद में बने स्मारक पर तिरंगा क्यों नहीं लहराया गया?
क्या यह महज प्रशासनिक चूक थी? क्या कार्यक्रम की तैयारियों में यह स्मारक शामिल नहीं हो सका? क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं गया? या फिर इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण रहा?
इन सवालों का जवाब संबंधित प्रशासन ही स्पष्ट कर सकता है। बिना आधिकारिक स्पष्टीकरण के किसी राजनीतिक मंशा या जानबूझकर की गई कार्रवाई का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मगर सवाल उठना इसलिए जरूरी है, क्योंकि शहादत का सम्मान किसी दल, विचारधारा या राजनीति की सीमा में नहीं बंधना चाहिए।
झीरम में जान गंवाने वालों में जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और सुरक्षा में तैनात जवान भी शामिल थे। उनके खून का रंग एक था… उनकी अंतिम पहचान एक थी—भारतीय। उनकी शहादत पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
तिरंगा भी किसी पार्टी का नहीं है। वह उस मां का है, जिसने अपना बेटा देश के लिए खोया। वह उस पत्नी का है, जिसने अपने जीवनसाथी को खो दिया। वह उस बच्चे का है, जिसने अपने पिता को तस्वीरों में ही देखा। और वह उन शहीदों का है, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी।
लालबाग मैदान में तिरंगा शान से लहरा रहा था। हवा में राष्ट्रगान की गूंज थी। लोगों के चेहरों पर देशभक्ति थी। लेकिन कुछ ही कदम दूर… झीरम के शहीद स्मारक पर तिरंगा नजर नहीं आया। झीरम के शहीदों का स्मारक मौन था।
शायद वह मौन ही सबसे बड़ा सवाल पूछ रहा था—
“क्या हमें आज याद नहीं किया जाना था?”
“क्या हमारी शहादत इतनी जल्दी भुला दी गई?”
“जिस लोकतंत्र के लिए हमने अपनी जान दी, क्या उसी लोकतंत्र के राष्ट्रीय पर्व पर हमारे स्मारक पर तिरंगे के लिए भी जगह नहीं थी?”
ये सवाल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल पर आरोप नहीं हैं। ये उस संवेदनशील भावना से जुड़े सवाल हैं, जो शहीदों के सम्मान को लेकर समाज के मन में उठना स्वाभाविक है।
इन सवालों का कोई राजनीतिक जवाब नहीं होना चाहिए। इनका जवाब संवेदना और जिम्मेदारी के साथ दिया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय का पर्व है और शहीद हर भारतीय की विरासत।
जनता की भावुक अपील— अगली बार जब 15 अगस्त आए और लालबाग मैदान में तिरंगा शान से लहराए, तो उसकी एक झलक झीरम के शहीद स्मारक तक भी पहुंचे। जिस धरती ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने बेटे खोए हैं, वहां राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान भी उसी गरिमा के साथ होना चाहिए। शहीदों के परिवारों के जख्म शायद कभी नहीं भरेंगे, लेकिन तिरंगे की छांव उन्हें यह एहसास जरूर करा सकती है कि देश अपने शहीदों को भूला नहीं है।
क्योंकि शहीदों की तस्वीरों पर भले वक्त की धूल जम जाए, लेकिन उनकी शहादत पर देश की याद कभी धुंधली नहीं होनी चाहिए।क्योंकि शहीद किसी दल के नहीं होते… शहीद सिर्फ देश के होते हैं। और शायद यही झीरम के शहीदों को स्वतंत्रता दिवस पर दी जा सकने वाली सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर सुआर्य राजपुरोहित तिवारी ब्राह्मण समाज का वर्ष 2026 का वार्षिक बैठक आमसभा ग्राम घाटलोहंगा के सामुदायिक भवन में रविवार को सम्पन्न हुआ। इस बैठक आमसभा में ग्राम घाटलोहंगा सहित सभी पाँच ग्राम तोकापाल, चितालूर, कविआसना, अरण्डी एवं जगदलपुर के सदस्य उपस्थित हुए। इस वार्षिक आमसभा में समाज के मुख्य बिंदुओं को रखा गया जिसके आय - व्यय लेखा - जोखा का ब्यौरा दिया गया, जिसके साथ ही साथ समाज के हितों की चर्चा भी की गयी, जिसमें काफी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे। सारी गतिविधियों की जानकारी देने के पश्चात् सभी सदस्यों से अपने-अपने वार्षिक सदस्यता शुल्क जमा 250 रुपये एवं स्वेच्छा अनुदान राशि 50 रूपये जमा करने के लिए आग्रह किया गया तत्पश्चात आमसभा का समापन किया गया। समाज के सदस्यों में प्रेसविज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया कि, वर्ष 1324 ईस्वी में जब वारंगल से काकतीय राजवंश महाराज अन्नमदेव बस्तर आये उस समय से सूआर्य राजपुरोहित भी इनके साथ बस्तर में बस गए। इस आमसभा में समाज के अध्यक्ष मन्ना प्रसाद तिवारी, लक्ष्मी प्रसाद तिवारी, उपाध्यक्ष, नवरतन तिवारी, संरक्षक, मिथिला प्रसाद तिवारी, कोषाध्यक्ष, घनश्याम तिवारी, सचिव, चंद्रशेखर तिवारी, सह-सचिव, खीरेंद्र तिवारी, पूर्णप्रकाश तिवारी, सुखनाथ तिवारी, अनंत तिवारी, गजेंद्र प्रसाद तिवारी, विपिन कुमार तिवारी, कामेंद्र प्रसाद तिवारी, कोर कमिटी सदस्य के साथ साथ भारी संख्या में समाज के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे।
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण के लिए मंगाए गए सीमेंट के खराब होने की खबर शौर्यपथ अख़बार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद अब विभाग ने इसके रखरखाव का एक नया तरीका खोज लिया है। जानकारी सामने आई है कि शेड के नीचे रखे कुछ सीमेंट को अब वन विद्यालय परिसर के एक कमरे के अंदर रख दिया गया है। वहीं शेष सीमेंट को भी कमरे के अंदर रखने की तैयारी की बात सामने आ रही है।
*सवाल यह है कि जो सीमेंट पहले ही पत्थर जैसा जम चुका है, उसे कमरे में रखने से आखिर बचेगा क्या?*
पहले सीमेंट को नमी से बचाने के लिए सुरक्षित भंडारण नहीं किया गया और अब जब उसके खराब होने की तस्वीर सामने आई तो उसे कमरे के अंदर रखकर सुरक्षा देने की कवायद शुरू हो गई। मानो सीमेंट की हालत नहीं, सिर्फ उसका पता बदलना जरूरी हो!
*सीमेंट खराब होने के बाद कमरे की सुरक्षा या सरकारी नुकसान पर पर्दा?*
यदि सीमेंट वास्तव में उपयोग योग्य है, तो विभाग को उसका तकनीकी परीक्षण कराकर स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी मात्रा निर्माण में इस्तेमाल करने लायक है। और यदि सीमेंट जमकर पत्थर बन चुका है, तो उसे कमरे में रखने के बजाय यह स्पष्ट होना चाहिए कि जनता के पैसे से खरीदी गई इस सामग्री के खराब होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि पहले खुले या अपर्याप्त सुरक्षित स्थान पर रखा गया सीमेंट अब अचानक कमरे के अंदर रखने लायक कैसे हो गया? क्या यह कदम सीमेंट को बचाने के लिए है या फिर खराब हो चुकी सामग्री को नजरों से बचाने के लिए?
वन विद्यालय प्रबंधन ने पहले दावा किया था कि सीमेंट ठीक है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। अब यदि सीमेंट को कमरे में सुरक्षित रखा जा रहा है, तो विभाग को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि क्या उसकी गुणवत्ता की कोई जांच हुई है और क्या उसे निर्माण में इस्तेमाल करने की अनुमति तकनीकी रूप से दी गई है?
जनता के पैसे से खरीदी गई सामग्री का हिसाब सिर्फ स्टॉक रजिस्टर में नहीं, जमीन पर भी दिखना चाहिए। पत्थर बन चुके सीमेंट को कमरे में रखने से सरकारी धन नहीं बचता—सवाल तो यह है कि वह पत्थर बना ही क्यों?
अब जरूरत कमरे बदलने की नहीं, जिम्मेदारी तय करने की है।
शौर्यपथ संवाददाता*
*बालोद । शौर्यपथ । *
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेवा और सामाजिक सरोकार की भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद के सदस्यों ने समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त वृद्धाश्रम "अपना घर", कलेक्ट्रेट रोड, आदमाबाद-सिवनी, बालोद पहुंचकर वृद्धजनों से भेंट की।
इस दौरान वृद्धजनों को शॉल, मिठाई, फल एवं बिस्किट भेंट किए गए। क्लब के सदस्यों ने उनके साथ समय बिताकर कुशलक्षेम जाना और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
क्लब के सदस्यों ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका अनुभव और जीवन का ज्ञान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनके बीच समय बिताना एक भावनात्मक और यादगार अनुभव रहा।
प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद ने कहा कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना को बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। क्लब भविष्य में भी जनहित और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता से करता रहेगा। क्लब ने सहयोगकर्ताओं से अपील की कि वे आगे भी इसी प्रकार सहयोग करते रहें, ताकि जरूरतमंद वर्ग तक सेवा का संदेश पहुंचाया जा सके।
इस सेवा कार्य में दल्ली राजहरा के समाजसेवी प्रवीण जैन और नीलेश श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा।
*विशेष संदेश:*
_“तिरंगा केवल आसमान में लहराने का नाम नहीं,
बल्कि उन हाथों को थामने का नाम भी है
जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और देश के
नाम कर दिया।”_
बालोद छत्तीसगढ़ शौर्यपथ संवाददाता
दल्ली राजहरा । शौर्यपथ
15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दल्ली राजहरा के पर्यावरण प्रेमियों की एक टोली ने प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती गंदगी और प्रदूषण को रोकने तथा आम जन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से विशेष स्वच्छता अभियान चलाया।
इस टोली में प्रदीप साहू, टिकेश्वर साहू, लोकेंद्र देवांगन, ताराचंद रावेट, कौशल साहू और चेला राम निर्मलकर शामिल थे।
स्वतंत्रता दिवस के दिन प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति को देखते हुए जागरूकता के लिए बस्तर इन स्थलों का चयन किया गया था। टीम ने हांदावाड़ा जलप्रपात, चित्रकूट जलप्रपात एवं तामरघुंडी जलप्रपात में सफाई की और वहां मौजूद पर्यटकों को स्वच्छता का महत्व समझाया।
इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा -
"लोग एक तरफ सुकून और शांति के लिए प्राकृतिक स्थलों पर जाना पसंद करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह स्थान साफ और सुरक्षित हो। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग जाने-अनजाने में खाने-पीने की चीजें, प्लास्टिक के डिब्बे और पॉलिथीन वहीं फेंक देते हैं, जिससे वह प्राकृतिक स्थान गंदा हो जाता है और उसकी खूबसूरती धूमिल पड़ती जा रही है। हमने सिर्फ सफाई ही नहीं की, बल्कि वहां मौजूद लोगों से पर्यटन क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखने की अपील भी की।"
टीम के इस प्रयास की वहां मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने सराहना की। कई लोगों ने स्वेच्छा से सफाई में हाथ बंटाया और भविष्य में भी पर्यटन स्थलों को स्वच्छ रखने और अन्य लोगों को जागरूक करने की शपथ ली।
टीम का मानना है कि ऐसे ही छोटे-छोटे अभियानों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण और अच्छे संस्कार मिल सकें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
